मम्मी को दादाजी से चुदवाया – 5

Mummy ki chudai ki sex kahani:- सुबह में जल्दी उठ गया और मम्मी और दादा जी को देखने लगा, मगर वह दोनों कही नहीं दिखे। मगर फिर मुझे बाथरूम से आवाज आयी, मैंने नीचे से देखा तो दोनों के पैर दिखाई दिए। मै फिर आके बेड पर लेट गया और जब दोनों बाहर आ गए, तो फिर मैं फ्रेश होने गया। फ्रेश होकर मैं दादा जी के पास गया।

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Mummy ki chudai ki sex kahani

मैं – वाह दादा जी कल रात को तो आपने फुल मज़े किये है, मगर सिर्फ 1 बार चुदाई करके सो गए।

दादा जी – ओह्ह लगाता है तूने एक बार चुदाई देखि थी, मगर उसके थोड़ी देर बाद मैंने फिर से तेरी मम्मी को चोदा था।

मैं – वाह दादा जी मतलब 2 बार चुदाई की थी।

दादा जी – हाँ बेटा उसके बाद तेरी मम्मी ने मना कर दिया। अभी भी उसके साथ ही नहा रहा था। बहुत मज़ा आया तेरी मम्मी के साथ नहाने मेँ।

फिर मम्मी नाश्ता लेके आ गयी और तब मम्मी ने सिर्फ मैक्सी पहनी हुई थी। वह नाश्ता रखकर चली गयी।

दादा जी – देखा तेरी मम्मी मैक्सी में आयी थी और जानता है वह अंदर से नंगी है। चल तुझे दिखाता हूँ।

दादा जी किचन में गए और उन्होंने पीछे से मम्मी की मैक्सी उठा दी। मम्मी अंदर से नंगी थी।

मम्मी – क्या कर रहे है पापा जी? आपका अभी भी मन नहीं भरा क्या? कही मन्नू न देख ले।

दादा जी – बहु वह नाश्ता कर रहा है और मेरा मन तो कभी नहीं भर सकता है। देखो कैसे खड़ा पड़ा है।

मम्मी – वह तो मैं देख रही हूं पापा जी। आपका लंड तो बैठने का नाम ही नहीं लेता है। अब जाइये यहाँ से, दोपहर में कर लेना।

मगर दादा जी कहाँ मानने वाले थे। उन्होंने वही किचन में मम्मी की चूत में लंड डाल दिया और वही चुदाई करने लगे। मम्मी भी दादा जी का साथ देने लगी और इसी तरह दादा जी और मम्मी की चुदाई चल रही है। मम्मी हर महीने आपने प्रेगनेंसी टेस्ट करती है। ये देखने के लिए की कही वह प्रेग्नेंट न हो जाएँ। और पापा के आने के बाद भी दादा जी मौका देखकर मम्मी की चुदाई कर ही देते है। मम्मी भी दादा जी के साथ खुश है।

दादा जी मम्मी के दूध चूसते थे तो मेरा भी मन करता था। वह मम्मी का पूरा बदन चाट चाट के गीला कर देते थे। जिसे देखकर मेरा लंड पागल हो जाता था और मम्मी की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था। मम्मी को भी घर में एक नया लंड मिल गया था। अब पापा के न रहने का उनके कोई फर्क नहीं पड़ता था। वो हर रात दादा जी के पास जाती थी और दादा जी उनकी गरम चूत को शांत कर देते थे। फिर वो मेरे पास आके सो जाती थी।

दादा जी को माँ की चुदाई करते 1 महीने से ज्यादा हो गया था और अब मैंने भी सोच लिया था, की मम्मी को एक नया लंड देने का टाइम आ गया है। अब मम्मी घर में मैक्सी पहन के ही रहती थी। दादा जी भी आते जाते मम्मी की गांड दबा देते थे। एक दिन मैं और मम्मी नाना जी के घर गए, क्युकी नाना जी की तबियत ठीक नहीं थी। दादा जी को अच्छा तो नहीं लग रहा था, मगर मज़बूरी थी। इसीलिए मम्मी ने दादा जी का खाना बना दिया और फिर मैं और मम्मी नाना जी के घर निकल गए।

बाइक से 2 घंटे में नाना जी के घर पहुंच गए। मगर पुरे रास्ते मैंने कई बार ब्रेक लगाए और मम्मी के बड़े बड़े दूध का बहुत मज़ा लिया। नाना जी के घर सब हमें देखकर बहुत खुश हो गए। नाना जी के घर पर नाना नानी, मामा मामी और उनके 2 बच्चे रहते है। पूरा दिन ऐसी ही निकल गया और फिर रात को मैं और मम्मी 11 बजे लेटने गए। मम्मी ने मैक्सी पहनी हुई थी। मगर आज उन्होंने ब्रा और पैंटी भी पहनी हुई थी। मम्मी लेटे लेटे कुछ सोच रही थी। शायद उन्हें दादा जी की याद आ रही थी। मेरे लिए यही सही टाइम था। सब सो चुके थे।

मैं – क्या हुआ मम्मी आप कुछ सोच रही हो?

मम्मी – हाँ बेटा बस यही सोच रही हूं की तेरे दादा जी वहाँ अकेले है।

मैं – मम्मी एक ही रात की बात है। कल तो आपने उन्ही के पास जाना है। वैसे मम्मी मुझे आपसे एक बात पूछनी है।

मम्मी – हाँ पूछो बेटा क्या पूछना है?

मैं – पहले आप मेरी कसम खाओ की आप ये बात किसी से नहीं कहोगी।

मम्मी – बेटा ऐसी क्या बात है? जिसके लिए तू कसम खिला रहा है।

मैं – मम्मी प्लीज पहले कसम खाओ।

मम्मी – अच्छा बाबा ठीक है। तेरी कसम किसी से नहीं कहुंगी।

मैने बहुत हिम्मत करके मम्मी से डायरेक्ट बोल दिया।

मैं – मम्मी आप पापा के लंड से ज्यादा खुश हो या दादा जी के लंड से?

मेरे मुँह से ये बात निकलते ही मम्मी उठ के बैठ गयी और कुछ देर मेरी तरफ ही देखने लगी। मम्मी के चेहरे का रंग सफ़ेद हो चुका था।

मम्मी – ये क्या बकवास कर रहा है? तेरी हिम्मत कैसे हुई ये बात बोलने की इसीलिए तुझे पढ़ा लिखा रहे है? ताकि तू ऐसी बाते सीखे।

मम्मी ने मुझे थप्पड़ मारना चाहा, मगर मैंने उनका हाथ पकड़ लिया।

मै – मम्मी अब ज्यादा ड्रामा दिखाने की जरुरत नहीं है, मैं जानता हूं रोज रात को मेरे सोने के बाद आप दादा के पास जाती हो। और वहाँ आप दोनों चुदाई का खेल खेलते हो।

मम्मी समझ गयी थी की मैं सब जान गया हूँ उनका चेरा उतर चुका था और उनकी आँखों में आँसू भी आ चुके थे। तभी मैंने उनके आँसू पूछेँ।

मै – मम्मी आप टेंशन मत लो! मैं ये बात पापा को नहीं बताऊँगा। मैं जानता हूं पापा आपसे दूर रहते है और आपको भी उनकी कमी महसूस होती है। इसीलिए आपने दादा जी के साथ ऐसा किया है। वैसे आपने सही ही किया, क्युकी मैंने देखा है। अब दादा जी ज्यादा खुश रहते है और आपके चेहरे पर भी पहले वाली ख़ुशी आ चुकी है।

मम्मी मेरी बाते सुनती जा रही थी, मगर कुछ बोल नहीं रही थी।

मैं – मम्मी कुछ तो बोलो। आप कुछ कहना चाहती हो तो बोल दो।

मम्मी – अब मैं क्या बोलूँ बेटा? मैं तो तुझसे आँखे मिलाने के भी काबिल नहीं रही।

मै – मगर मम्मी आपने कुछ गलत नहीं किया है।, जो भी किया है, वह घर में किया है। किसी बदनामी का भी डर नहीं है।

मम्मी की आँखों से आँसू निकल रहे थे, जिन्हे मैं बार बार पोंछ रहा था।

मम्मी – बेटा मैं वादा करती हूँ मैं आज के बाद कभी भी तेरे दादा जी के साथ ऐसा नहीं करूंग़ी। तू बस ये बात किसी को मत बताना।

मै – मगर मम्मी मैं चाहता हूँ आप दादा जी के साथ सम्बन्ध बनाए रखो।

मेरी बात सुनके मम्मी चौक गयी।

मम्मी – बेटा ये क्या कह रहा है तू?

मैं – हाँ मम्मी मैंने देखा है, जब दादा जी आपको अपनी बाहो में लेते है। तो आप कैसे खिल सी जाती हो और जब वो आपकी चुदाई करते है। तो आप कितनी संतुष्ट दिखाई देती हो।

मम्मी मेरी बात सुनके समझ गयी, की मैं सब देख चुका हु।

मैं – मैंने कभी भी आपको पापा के साथ इतना खुश नहीं देखा है। यहाँ तक की जब वो 2 दिन के लिए आते है। तब भी आप परेशान ही रहती हो। मगर जब से मैंने आपको दादा जी के साथ देखा है, मुझे लगता है की आप उनके साथ ज्यादा खुश रहती हो। मैं ये बात किसी को नहीं बताऊँगा। ये राज़ सिर्फ आपके और मेरे बीच ही रहेगा, आप भी दादा जी से मत कहना और आप दादा जी के साथ खुश रहो। पापा तो सिर्फ महीने में 2 या 3 दिन आते है। जिसमें वो आपको खुश नहीं कर पाते है। आप भी अपनी जवानी का मज़ा लो, शायद पापा भी वहाँ मज़े ले रहे होंगे।

मम्मी – बेटा मुझे बहुत अजीब लग रहा है, तू मुझसे ऐसी बाते कर रहा है।

मैं – तो क्या हुआ मम्मी? आप भी तो दादा जी से चूत लंड और चुदाई की बाते करती हो। अब मैं भी आपका राज़दार हूँ मैं जानता हूं आप भी खुल के बाते करती हो। तो अब मेरे सामने भी कर लो।

मम्मी ने कोई जवाब नहीं दिया। मगर उन्होंने मुझे गले लगा लिया और मम्मी के मोटे मोटे दूध मेरे सीने में दब गए।

मम्मी – बेटा मैंने कभी नहीं सोचा था की मेरा ये राज़ तेरे सामने आएगा और तेरे दादा और मेरे बीच ऐसा रिश्ता बन जाएग, मगर तेरे दादा भी काफी टाइम से अकेले है और मैं भी तेरे पापा के होते हुए भी अकेली हूँ, इसीलिए जब तेरे दादा ने ऐसा किया। तब मैं भी खुद को रोक नहीं पायी, मगर मैं नहीं जानती थी की मेरे बेटा ये बात जान जायेगा। मगर आज मैं खुश हूं की मेरा बेटा मेरी ख़ुशी में खुश है और इतना समझदार है।

मैं – मगर मम्मी अभी भी आपने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया, की आप पापा के लंड से ज्यादा खुश हो या फिर दादा जी के लंड से।

मम्मी का चेरा शर्म से लाल हो चुका था और वो मेरी तरफ देख भी नहीं रही थी। मैं समझ गया था की मम्मी को मेरे साथ खुलने में टाइम लगेगा। आखिर थी तो वो मेरी मम्मी ही और एक माँ अपने बेटे से ऐसी बाते कैसे कर सकती है, मगर मैंने भी ठान लिया था, की मैं मम्मी की चुदाई करके ही रहुंगा। मम्मी नीचे देख रही थी। मगर कुछ बोल नहीं रही थी। मगर मैं उनसे चुदाई की बाते करना चाह रहा था।

मैं – अब बता भी दो मम्मी! अब हमारे बीच कौनसा पर्दा है। मैं सब तो जान गया हु।

मम्मी – बेटा मैं तेरे साथ ऐसे बाते नहीं कर सकती हूँ तू मेरा बेटा है।

मैं – मैं समझ सकता हूं मम्मी। हम दोनों का रिश्ता बहुत अलग है, मगर अब हमारे बीच एक राज़दार का रिश्ता भी बन गया है। वैसे मम्मी मुझे लगता है आप दादा जी के लंड से ज्यादा खुश हो, मैंने आपको दादा जी के साथ देखा था। दादा जी कैसे जोर जोर से धक्के लगाते है और आपके मुँह से कैसी आवाज निकलती है।

मम्मी मेरी बाते सुन सुन के पानी पानी हो रही थी। वह अपने बेटे के मुँह से अपनी चुदाई की कहानी सुन रही थी। अजीब तो लगना ही था। मगर बाते कर कर के मेरा लंड खड़ा हो चुका था। जिस पर मम्मी की नज़र भी चली गयी। मैंने मम्मी के सामने ही अपना लंड मसल दिया। मम्मी इस सब का सामना कैसे करती इसीलिए वो बोली।

मम्मी – बेटा अब रात बहुत हो गयी है और सुबह हमें निकलना भी है। तो हम लोग सो जाते है। फिर मैं और मम्मी सो गए। मैंने मम्मी के साथ कुछ नहीं किया। मगर ये तो सिर्फ शुरुवात थी। सुबह हम लोग नास्ता करके निकल पड़े।

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