मम्मी की चूत के बाल – 1
Mummy ki chudai ki iccha:- हैलो दोस्तों! एक बार फिर से हाजिर हूँ मै आपके लिए एक और नई स्टोरी लेकर, ये स्टोरी मेरे एक रीडर ने भेजी है। चलिए स्टार्ट करते है। मैं 20 साल का लंबा-चौड़ा लड़का हूँ। मेरी हाइट 5’10” है। ये स्टोरी के मुख्य पात्र हैं मैं और मेरी 45 साल की माँ। मेरी माँ का नाम रजनी है। दिखने में मस्त लगती हैं। ज्यादा गोरी तो नहीं हैं मगर माल लगती हैं। मेरी फैमिली में 4 मेंबर हैं। एक छोटा भाई और है।
दोस्तों अगर मेरी ये सच्ची कहानी अच्छी लगे तो प्लीज मुझे मेल करिएगा। अब सीधे स्टोरी पर आते हैं।
Mummy ki chudai ki iccha hindi sex story
हम दिल्ली में रहते हैं और एक मिडिल क्लास फैमिली से हैं। पापा का बिजनेस है और मम्मी हाउसवाइफ हैं। मेरी मम्मी पढ़ी-लिखी नहीं हैं और पापा भी ज्यादा नहीं पढ़े। मैं बी.टेक थर्ड ईयर में हूँ और छोटा भाई 11th स्टैंडर्ड में है।
हमारा मकान 2 मंजिला है जिसमें 3 रूम नीचे और 3 ऊपर। हम ऊपर रहते हैं। नीचे किरायेदार रहते हैं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरे साथ ऐसा सच में होगा।
मेरी मम्मी पर गंदी नजर बहुत साल पहले से थी। जब मैं 18 साल का था और मम्मी-पापा की चुदाई करते देखा था। अंधेरे में कुछ दिखाई तो दे नहीं रहा था मगर सुनाई दे रहा था और पच-पच की आवाज सुनाई दे रही थी।
तभी से मेरा नजरिया माँ की ओर गलत हो गया और फिर कई बार ये हुआ। और अब तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता था। और मैं जब पापा मम्मी की चूत मारते थे तो मैं इमेजिन करके मुठ मारता था।
धीरे-धीरे समय गुजरता गया और मुझे पता चला कि मम्मी पैंटी और ब्रा नहीं पहनती हैं। और मेरी मम्मी साड़ी ही पहनती थीं ज्यादातर और रात में कभी-कभी नाइटी।
एक दिन गर्मियों का टाइम था। मैं अपने रूम में मूवी देख रहा था और मम्मी हॉल में सो रही थीं। पापा छत पर सो रहे थे। तो अचानक मुझे प्यास लगी और मैं पानी पीने के लिए उठा और फ्रीज की तरफ गया। और हॉल की लाइट ऑन की तो मेरे होश उड़ गए और शरीर में सरसराहट सी होने लगी।
मेरी मम्मी खाट पर सो रही थीं। उस दिन मम्मी ने नाइटी नहीं पहनी थी और पेटीकोट-ब्लाउज में सो रही थीं। मैंने देखा कि मम्मी का पेटीकोट घुटनों तक उठा हुआ है और मम्मी बेसुध होकर सो रही हैं।
मैं दबे पाँव आगे बढ़ा और देखा तो मुझे मम्मी की चूत के काले बाल दिखाई दे रहे थे। घने बाल थे और गोरी-गोरी नंगी जाँघें क्या लग रही थीं। मेरा लंड खड़ा हो गया और मुँह में पानी आने लगा।
मैंने पहली बार किसी भी औरत को नंगा देखा था। आप लोग अंदाजा लगा ही सकते हैं वो क्या पल रहा होगा मेरे लिए।
थोड़ी देर बाद मम्मी ने हरकत ली और मैं डर के मारे जल्दी से लाइट बंद करके अपने बिस्तर पर आ गया। और लंड निकालकर सहलाने लगा। और वही सीन मेरी आँखों के सामने आ रहा था बार-बार।
मेरा लंड पूरी तरह से टाइट था और मुझसे अब रहा न गया। और मुझे और देखने की जिज्ञासा थी। तो मैं इस बार बाथरूम के बहाने बाहर गया और लाइट ऑन की तो बस मेरी मानो कामना पूरी हो गई थी। मम्मी का पेटीकोट लगभग कमर तक आ गया था।
मैंने जल्दी से मम्मी की चूत की झलक देखी। पूरी तरह से चूत पर झांटों ने कब्जा कर रखा था। वाह क्या चूत थी। चूत के होंठ बहुत बड़े थे। पापा ने खूब चोदा होगा मम्मी को। जाँघ पर एक मसा था। टाँगें फैलाई हुई पड़ी हुई थीं माँ बेसुध। और जल्दी से मैं बाथरूम गया और गेट बंद करते ही मम्मी की आँख खुल गई और उन्होंने अपनी हालत ठीक की।
मैं अंदर आया तो देखा मम्मी ने पेटीकोट ठीक कर लिया था। फिर मैं जल्दी से रूम में एंटर हुआ और लाइट बंद कर दी। फिर अपना कच्छा उतारा और उस रात 2 बार मुठ मारी और सुबह को लेट उठा।
लगभग 9.30 बजे काफी अच्छी रात बीती थी ये मेरी। लंड अभी भी टंच था और वो सीन सामने आए जा रहे थे सब। भाई स्कूल जा चुका था और पापा अपने काम पर। और घर में बस मैं और मम्मी ही थे।
मम्मी नीचे थीं और मैं 10 बजे तक फ्रेश हो गया था और चाय पीने लगा और टीवी देखने लगा था। उस दिन मैं कॉलेज नहीं गया था।
थोड़ी देर बाद मम्मी भी आ गईं और काफी खुश दिखाई दे रही थीं। और मुझसे पूछने लगीं—
माँ- आज कॉलेज नहीं जाएगा क्या?
मै- नहीं आज नहीं जा रहा मैं।
फिर मम्मी नहाने चली गईं। उस दिन फ्राइडे था। और आप लोगों को मैं एक बात बता दूँ कि थर्सडे को हमारे यहाँ कपड़े नहीं धुलते हैं। कोई साबुन का भी इस्तेमाल नहीं करता है। यहाँ तक कि अंडरवियर भी नहीं धुलते हैं। और हमें वही पुराने अंडरवियर्स पहनने पड़ते हैं फ्राइडे को।
पर शायद उस दिन मम्मी भूल गई थीं और पेटीकोट में ही नहा लीं और गीला कर दिया। फिर बाद में उसे ध्यान आया कि आज शुक्रवार है और उसका पेटीकोट नहीं धुला है। वो अब क्या पहनेगी क्योंकि उसके 3ों पेटीकोट गीले पड़े थे। बस न्यू पेटीकोट ही बेड में था।
मम्मी ने मुझसे कहा—
माँ- सचिन मेरा बेड में से एक ग्रीन कलर का पेटीकोट होगा। दे देना।
मै- ठीक है।
पर पेटीकोट मुझे नहीं मिला। मैंने 2-3 बार ढूँढा और बोल दिया कि मुझे नहीं मिल रहा। तभी मुझे पेटीकोट मिल गया और मेरे दिमाग में शरारत सूझी। और मैंने पेटीकोट बेड के नीचे डाल दिया और बोल दिया—
मै- मुझे नहीं मिल रहा वहाँ।
मम्मी परेशान गीले पेटीकोट में खड़ी थीं तभी क्योंकि मम्मी की नाइटी भी गंदी और भीगी पड़ी थी। तो मम्मी नीचे क्या पहनतीं। तभी मुझे एक स्कर्ट दिखाई दी। बहुत पुरानी स्कर्ट थी मेरी बहन की थी स्कूल की। बहुत छोटी लग रही थी।
मैंने मन ही मन कहा—अगर ये मम्मी पहनें तो कैसा रहेगा क्योंकि वो तो कच्छी पहनती नहीं हैं तो मुझे उसकी चूत दिन में भी दिखने का मौका मिलेगा साफ-साफ।
तो मैंने मम्मी से कहा—
मै- मम्मी एक स्कर्ट है। पेटीकोट नहीं मिल रही। इससे पहनकर आ जाओ जब तक पेटीकोट नहीं मिल जाता।
मम्मी गुस्सा हो रही थीं पर थोड़ी देर बाद बोलीं—
माँ- ले आ। और बोलीं कि ये तो मेरे नहीं आने वाली है।
मै- यही है यहाँ पर। तो फिर मैं देने चला गया। लो।
मम्मी ने दरवाजा खोला। बोलां—
माँ- ला।
और एक हाथ बाहर निकालकर स्कर्ट अंदर खींच लीं। और कहने लगीं—
माँ- क्या बदल लाया है?
और पेटीकोट उतारकर पहनने लगीं। और बहुत जोर से कहने लगीं—
माँ- ये मेरे नहीं आ रही है। बहुत टाइट है।
और फिर बाथरूम का दरवाजा खुला। मैं अपने कमरे में था उस टाइम।
मम्मी ने हॉल में कदम रखा और मैं तो जैसे मानो देखता का देखता ही रह गया। ओह माय गॉड क्या लग रही थीं मेरी माँ रजनी। ब्लू कलर की चेक वाली स्कर्ट में। तौबा रे तौबा। स्कर्ट बहुत टाइट आ रही थी। कमर से घुटनों तक ही आ रही थी स्कर्ट। और ऊपर मम्मी ने ब्लाउज पहना था।
पर मेरी नजर तो नीचे थी। गाँड क्या गदर मचा रही थी। उस दिन मुझे अपनी माँ के सेक्सी रंडी जैसे फिगर का एहसास हुआ। मम्मी कमरे में आईं और बोलीं—
माँ- तुझे कुछ मिलता भी है?
और बेड खोलने के लिए आईं। और मुझसे कहा—
माँ- बेड पकड़ ले।
और बेड खोलके नीचे झुक गईं और पेटीकोट ढूँढने लगीं।
जब वो झुकीं तो उनकी गाँड मेरी तरफ थी। मेरी तो हालत ही खराब हो गई।
माँ- तेजस उठ बेड पर से। तुझे जिंदगी में कुछ मिला भी है?
मम्मी अपनी गाँव की लैंग्वेज में मुझसे बोलती हैं। मैं बेड पर से उठकर खड़ा हो जाता हूँ और मम्मी के पीछे खड़ा हो जाता हूँ। मम्मी एक झटके में बेड खोलती हैं और थोड़ी सी कमर को नीचे झुकाती हैं। और मेरी तो कच्छे में हालत खराब हो रही थी।
मुझे मम्मी की घुटनों से ऊपर तक की जाँघें साफ दिखाई दे रही थीं और मैं इसका पूरा आनंद ले रहा था। थोड़ी देर तो मम्मी पेटीकोट ढूँढती रहीं। फिर जब उनके हाथ में दर्द होना स्टार्ट हुआ तो मुझसे बोलीं—
माँ- खड़ा क्या है (हरामखोर)? बेड को पकड़ ले। पता ना कहाँ आग लग गई पेटीकोट में।
जाहिर था कि मम्मी को काफी गुस्सा आ रहा था उस टाइम क्योंकि स्कर्ट काफी टाइट थी। फिर मैंने कहा—
मै- लाओ मैं पकड़ लेता हूँ बेड। तुम ढंग से ढूँढ लो।
और मैं मन ही मन मुस्कुरा रहा था। लंड फुल्ली टाइट था मेरा। मैं खाली अंडरवियर में था।
फिर मैंने बेड पकड़ लिया और मम्मी के बहुत करीब पीछे आ गया। बस मुझमें और मम्मी में मुश्किल से 2 इंच की दूरी होगी। और फिर मम्मी थोड़ी और झुकीं। बड़ी लगन से पेटीकोट ढूँढ रही थीं। जैसे ही मम्मी झुकीं मुझे उनके 60% चूतड़ साफ दिखाई दे रहे थे। और मम्मी के चूतड़ों पर गाँड की दरार भी दिखाई देने स्टार्ट हो गई थी।
चूतड़ों पर भी मम्मी के हल्के-हल्के बाल साफ दिखाई दे रहे थे। मैं तो मानो अपने चरम पर था। इतना एक्साइटेड हो गया था कि लंड पर कोई हाथ भी लगा दे तो मेरे पानी की धार निकल जाती। मम्मी को करीब 5 मिनट हो गए थे।
पेटीकोट को ढूँढते-ढूँढते कि अचानक उनकी कमर में झुकने की वजह से दर्द होना स्टार्ट हो गया। तो वो एकदम से ऊपर की तरफ उठीं और उनका सिर बेड पर बहुत जोर से लग गया। क्योंकि मेरा ध्यान तो मम्मी की मस्त काली गाँड देखने में था। इसलिए मुझे पता ही नहीं चला कि जो बेड का सिरा मैंने उठा रखा था वो बहुत नीचे हो गया था। और मम्मी का सिर उसमें लग गया।
एक तो मेरी मम्मी पहले से ही गुस्से में थीं। ऊपर से सिर बेड पे लगने की वजह से मेरी तो शामत आ गई। और मम्मी ने मुझ पर अपनी गाँव की गालियों की बरसात कर डाली। और मैं चुपचाप सुनता रहा। पर मम्मी हार कहाँ मानने वाली थीं।
उन्होंने मुझसे कहा—
माँ- ढंग से बेड पकड़ ले।
और फिर झुक गईं। और मम्मी गुस्से में इस बार कुछ ज्यादा ही झुक गईं। और मेरी तो लॉटरी ही लग गई। मम्मी की पूरी की पूरी गाँड-चूत झुकी हुई मेरे सामने थी। मम्मी के राइट चूतड़ पर एक बहुत मोटा मसा था काले कलर का। और उसके नीचे तिल। मम्मी की सांवली गाँड ने मुझे दीवाना बना दिया था।
मम्मी की चूत चॉकलेटी कलर की थी और चूत का छेद भी साफ दिखाई दे रहा था। मम्मी की चूत का छेद इतना बड़ा था कि मानो शायद उसमें दो लंड आराम से आ जाएँगे। शायद ये मेरी कल्पना थी। चूत के बीच में से मास बाहर को आ रहा था। और मम्मी की गाँड के छेद के क्या कहने।
दोस्तों शायद आपने कभी इंडियन औरतों की गाँड का छेद ना देखा हो। उसकी गाँड में किसी की भी 2 उँगलियाँ आराम से आ सकती थीं बिना तेल लगाए। मैं आपको कैसे शब्दों में बयान करूँ कि मम्मी की गाँड का छेद कितना मनमोहने वाला था।
वो तो दोस्तों मैं था वहाँ पर। वरना किसी और के साथ ऐसा होता तो मैं विश्वास से कह सकता हूँ वो अपना लौड़ा निकालकर मम्मी की गाँड में दे चुका होता। मेरा ध्यान पूरी तरह से गाँड पर ही था कि मम्मी जोर से चिल्लाईं—
माँ- बेड ढंग से पकड़ ले।
झुकने की वजह से मम्मी मुझसे मुश्किल से आधा इंच दूर थीं। जैसे ही मैंने वहाँ से ध्यान हटाया बेड को और ऊपर कर दिया। जिस वजह से मैं और आगे की ओर आ गया। और मेरा लंड अब पूरी तरह से मम्मी की नंगी गाँड में चुभ गया। और मेरा तो मानो गला सूख गया हो। और मैं तो बस मूर्ति की तरह वहीं जम गया।
मम्मी की भी साँसें वहीं अटक गईं जब उन्होंने अपनी गाँड पर मेरे लंड का दबाव पड़ा। आप इमेजिन कर सकते हैं हम किस पोज़ में होंगे उस टाइम। एक पल के लिए तो मम्मी हटना चाहती थीं। बट ना चाहते हुए भी मेरे लंड की जो गरमी थी उन्हें हटा नहीं पाईं। और वो अब उत्तेजित होने लगीं। और शायद उनकी चूत में भी नमी आ गई थी।
अब मम्मी को मेरे लंड का एहसास अच्छा लग रहा था। और एक बार उन्होंने जरूर सोचा—ये मैं क्या कर रही हूँ। तेजस मेरा बेटा है। पर दोस्तों जब जिस्मों की गरमी बढ़ती है ना तो लोग रिश्ता नहीं, औरत-मर्द देखते हैं।
मम्मी वैसे ही पेटीकोट ढूँढने का नाटक करने लगीं। और मेरी तो सिट्टी-पिट्टी गुल थी। मम्मी को अब मस्ती चढ़ने लगी थी। और फिर मम्मी थोड़ा सा पीछे और हुईं। अब मेरे पूरे लंड का दबाव मम्मी की गाँड पर था। मेरे लंड पर झटका लगा। और फिर मम्मी पेटीकोट ढूँढने के बहाने आगे हुईं।
पर वो जाहिर ऐसे कर रही थीं कि ये सब अनजाने में हो रहा है। और फिर मम्मी रुक-रुक के चूतड़ आगे करतीं फिर पीछे करतीं। आगे-पीछे, आगे-पीछे, आगे-पीछे। और मम्मी अनजान बन रही थीं। मुझे भी यही लग रहा था कि पेटीकोट ढूँढने के चक्कर में ऐसा हो रहा है।
पर दोस्तों वो पल मेरे लिए किसी भी स्वर्ग से कम नहीं थे। मैं तो जन्नत महसूस कर रहा था। और मम्मी भी मेरे लंड से अपनी गाँड रगड़ रही थीं। और मेरी भी लिमिट खत्म होने वाली थी। तो मैंने पूरे जोर से लंड का गाँड पर दबाव बना दिया। और मेरा पानी यानी कि वीर्य कच्छे में ही झड़ गया।
उस दिन मैं पहली बार इतना ज्यादा झड़ा था। बहुत सफेद-सफेद वीर्य निकला था। मम्मी भी एक जगह शांत हो गईं। और वीर्य ज्यादा होने की वजह से क्योंकि मेरा लंड मम्मी की गाँड से सटा हुआ था तो वीर्य कच्छे से बाहर आकर गीला-गीला हो गया और गाँड पर लग गया।
मम्मी को जब गीलापन महसूस हुआ तो उन्हें पता चल गया था कि मैं झड़ गया हूँ। और उनकी आधी गाँड मैंने गीली कर दी थी। मम्मी को गरम-गरम वीर्य उत्तेजित कर रहा था। पर मेरी तो फटी पड़ी थी कि कहीं मम्मी को पता ना चल जाए।
उनकी गाँड पर गीला माल महसूस ना कर लें। पर पता नहीं क्या होगा अगर ऐसा हुआ तो। मैं ये सब नेगेटिव बातें सोचकर काँप रहा था। और चढ़ने के बाद जैसे सब गिल्टी फील करते हैं वैसे ही मैंने भी किया। पर मम्मी तो अनजान बन रही थीं।
फिर जैसे ही उन्हें पता चला कि मेरा लंड ढीला पड़ चुका है तो वो एकदम से बोलीं—
माँ- रहने दे। नहीं मिल रहा पेटीकोट। पता नहीं कौन खा गया।
और वो ऊपर को आ गईं और हट गईं। जैसे ही वो मुझसे हटीं तो मुझे मम्मी की गाँड पर वीर्य लगा दिखाई दिया।
एक तरफ से गाँड उनकी गीली हुई पड़ी थी। और मेरी फटी पड़ी थी। और फिर मम्मी हट गईं और खड़ी हो गईं। और मैंने बेड बंद कर दिया और तुरंत अपने कच्छे को दुबका कर मतलब हाथ से छिपा कर बाथरूम की ओर भागा।
क्योंकि मेरा कच्छा आगे से पूरा गीला पड़ा था। बट मम्मी ने देख लिया था। मेरे और मम्मी के चेहरे पर एक खुशी थी। और उनका चेहरा तो लाल हो चुका था। क्योंकि मम्मी बहुत एक्साइटेड हो गई थीं इस दुर्घटना से।
पढ़ते रहिए… क्योंकि कहानी अभी जारी रहेगी। और अगर आपको मेरी कहानियाँ पसंद हैं तो आप मुझे कमेंट भी कर सकते हैं।





Sanskari Mummy aur chachi ka agla paath banaa bhai
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