मुझे अंकल ने चोदा – 6

Uncle se meri chudai ho gayi:- पिछले पार्ट में फलक और अंकल के बीच फोरप्ले चल रहा था। अंकल ने फलक की चूत चाटकर उसे दो बार झड़ा दिया था, बिना चुदाई के। अब आगे की कहानी।

Part 5 ==> मुझे अंकल ने चोदा – 5

Uncle se meri chudai ho gayi

मैं झड़ने के बाद थककर वैसे ही लेटी रही। मैं आज 2 बार झड़ चुकी थी, वो भी बिना चुदाई किए हुए।

आज से पहले मैं कभी 2 बार नहीं झड़ी थी। कभी-कभी तो बिना झड़े भी रह जाती थी, क्योंकि हस्बैंड झड़ जाते थे, मैं नहीं।

अंकल ने मेरी चूत को चाट-चाट कर बिल्कुल क्लीन कर दिया था। अंकल मेरी चूत का सारा पानी पी गए थे।

मैं बेसुध हुई लेटी हुई थी। झड़ने के बाद मुझे होश ही नहीं था। था तो बस सुकून, जो आज से पहले कभी नहीं मिला था।

अंकल भी मेरे पास आकर लेट गए और बोले—

अंकल: फलक तुम तो बहुत जल्दी-जल्दी झड़ रही हो? मुझे देखो? मैं अभी तक एक बार भी नहीं झड़ा हूँ?

मैं क्या बोलती? कि मैं क्यों जल्दी-जल्दी झड़ रही हूँ और आप एक बार भी नहीं झड़े। मैं कुछ नहीं बोली, बस ऐसे ही लेटी रही।

अंकल: तुम्हें अच्छा तो लग रहा है ना?

फलक: हम्मम्म (मैं खुश होते हुए बोली)

ये बात सच है कि मैं आज बहुत खुश थी। इतना खुश तो मुझे कभी हस्बैंड ने चुदाई करके भी नहीं किया था, जितना खुश आज अंकल ने फोरप्ले से ही कर दिया। इतना खुश मैं पहले कभी नहीं हुई थी।

अंकल: पर मुझे अच्छा नहीं लगा?

फलक: क्यों? (मैंने हल्की सी आवाज में पूछा)

अंकल: तुम्हारा दो-दो बार पानी निकल गया? और मेरा एक बार भी नहीं?

मैं ये सुनकर मुस्कुराने लगी। मुझे समझ में नहीं आया कि मैं क्या बोलूँ, इसलिए मैं चुप ही रही।

अंकल: क्या पहले भी तुम्हारा पानी एक रात में दो बार निकला है?

फलक: नहीं…… ये फर्स्ट टाइम है।

अंकल: इसका मतलब? मेरे साथ ज्यादा मजा आ रहा है तुम्हें।

फलक: हम्मम्म

अंकल: क्यों? समीर के साथ नहीं आता मजा?

फलक: आता है? पर इतना नहीं।

अंकल: वो क्यों?

फलक: क्योंकि आज तक समीर ने मेरे साथ ऐसे सेक्स ही नहीं किया, जैसे आप कर रहे हो।

अंकल: फिर से सेक्स? मैंने तुमको पहले भी बोला था? हिंदी में बोला करो। चुदाई…

फलक: चुदाई (मैं हँसते हुए बोली)

अंकल: हाँ? ऐसे? सब चीजों के नाम हिंदी में बोला करो। जैसे – चूत, लंड, चूची, और चुदाई।

फलक: ठीक है।

अंकल: तो? समीर कैसे चुदाई करता है तुम्हारी?

फलक: वो तो बस नॉर्मली करते हैं। मतलब थोड़ी बहुत लिप टू लिप किसिंग, उसके बाद सीधे चुदाई।

अंकल: ओके? इसलिए तो मैंने बोला था? तुमने गलत आदमी से शादी कर ली।

फलक: हम्मम्म

अंकल: चलो कोई बात नहीं। अब मैं क्या करूँगा तुम्हारी अच्छे से रगड़-रगड़ के चुदाई।

मुझे शर्म भी लग रही थी और मजा भी आ रहा था अंकल की बातें सुनके।

फिर अंकल ने मेरा हाथ पकड़ा और अपने लंड पर ले जाकर रख दिया और सहलाने लगे। थोड़ी देर अंकल का हाथ मेरे हाथ के ऊपर रहा। फिर अंकल ने अपना हाथ हटा लिया।

अब अंकल के लंड को मैं ही अपने हाथ से सहला रही थी। और अंकल अपने एक हाथ से मेरी चूचियों से खेल रहे थे, और दूसरे हाथ से मेरे बालों को सहला रहे थे।

मुझे अच्छा लग रहा था अंकल का ऐसा करना। हम दोनों बिल्कुल नंगे ही लेटे हुए थे बेड पर।

अंकल: लंड चूसकर कैसा लगा तुम्हें? मुझे तो तुम्हारी चूत चाटकर बहुत मजा आया।

फलक: अच्छा लगा (मैं शर्माते हुए बोली)

अंकल: तो फिर और चूसो ना? देखो कैसे खड़ा हुआ है तुम्हारे चूसने के इंतजार में।

अब मैं क्या बोलती? ना भी नहीं कर सकती थी।

फलक: हम्मम्म

इतना बोलकर मैं उठी और अंकल को देखते हुए नीचे की तरफ जाने लगी, लंड की तरफ। अंकल ने अपने पैर फैला दिए, एक ईस्ट में और दूसरा वेस्ट में।

मैं अंकल के पैरों के बीच में जाकर बैठ गई। फिर मैंने अपने एक हाथ से लंड को पकड़ा और अंकल की आँखों में देखते हुए अपने होंठ लंड की टोपी पर टिका दिए।

अंकल के मुँह से एक आआआह्ह्ह्ह निकली, मजे की आआआह्ह्ह्ह।

फिर मैंने अपनी जीभ लंड की टोपी पर घुमानी शुरू की, टोपी के चारों ओर।

अंकल की आँखें बंद हो गई थीं मजे में। मुझे भी अच्छा लग रहा था, अंकल को ऐसे मजे में देखकर। अब तक अंकल ने जितने मजे मुझे दिए हैं, ये तो उनके आगे कुछ भी नहीं था।

बस यही सोचकर मैंने भी अपने दिल में ठान लिया कि मैं भी अंकल को उतना ही मजा दूँगी जितना अंकल ने मुझे दिया है।

लंड चूसने का मुझे ज्यादा अनुभव तो था नहीं, लेकिन मैंने पोर्न मूवीज में देखा हुआ था कि वो लोग लंड कैसे चूसते हैं।

तो मैंने भी वैसे ही लंड चूसने की सोची। फिर मैंने लंड की टोपी पर से मुँह हटाया और अपने मुँह को नीचे ले गई, जहाँ आंड (बॉल्स) होते हैं। मैंने अपनी जीभ बाहर निकाली और नीचे से ऊपर को लंड पर जीभ फेरनी शुरू की।

अंकल को शायद मेरा ऐसा करना अच्छा लगा, तभी तो उनके मुँह से मजे में फिर से आआआह्ह्ह्ह निकली। अब अंकल के हाथ मेरे सर पर आ गए थे। और मैं पूरे दिल से अंकल के लंड को चूस और चाट रही थी।

कभी अंकल के लंड को नीचे से लेकर टोपी तक, तो कभी लंड की टोपी को मुँह में लेकर। थोड़ी देर ऐसे चूसने के बाद अंकल बोले—

अंकल: मेरी जान मेरे आंडों (बॉल्स) को चूसो? (मजे में बोले)

पहले तो मुझे समझ में नहीं आया कि आंडों को कैसे चूसूँ।

पर मैंने ट्राई किया। मैंने लंड को एक हाथ से ऊपर की तरफ किया (अंकल के पेट से मिला दिया) और दूसरे हाथ को आंडों के नीचे ले जाकर उनको थोड़ा सा ऊपर को उठाया।

पहले मैंने उन पर अपनी जीभ फेरनी शुरू की। फिर उनको अपने होंठों में लेकर चूसने लगी। ये सब मैं पहली बार कर रही थी।

अंकल मजे लेते हुए फिर बोले—

अंकल: आआआह्ह्ह्ह मेरी जान ऐसे ही? मजा आ रहा? और चूसो।

मुझे ये सुनकर और जोश चढ़ गया। तो मैं और भी शिद्दत से चूसने लगी। अंकल के आंड पूरे गीले हो चुके थे मेरी लार (सलाइवा) से और मेरा मुँह भी।

फिर अंकल ने मेरे सर के बालों को पकड़कर मेरा मुँह ऊपर किया और बोले—

अंकल: जान? अब लंड को भी मुँह में लेकर चूसो।

मैंने थोड़ा अपने आप को एडजस्ट किया ताकि सही से बैठके लंड को चूस सकूँ। फिर मैंने अपने हाथों में लंड को नीचे से पकड़ा और लंड की टोपी को अपने होंठों में लेकर चूसने लगी।

पहले टोपी को चूसा। उसके बाद थोड़ा सा लंड को मैंने अपने मुँह में अंदर लिया और लंड पर अपने मुँह को ऊपर-नीचे करके चूसने लगी।

अंकल: थोड़ा और अंदर लो ना।

लंड मेरे मुँह में बड़ी मुश्किल से आ रहा था, क्योंकि अंकल का लंड बहुत मोटा था। पर मैंने हिम्मत नहीं हारी। मैं बस अंकल को खुश करना चाहती थी। उन्होंने भी तो मुझे आज बहुत खुश किया था। इसलिए मैं अंकल को निराश नहीं करना चाहती थी।

इसलिए मैंने और कोशिश की लंड को और अंदर मुँह में लेने की। अब लंड की टोपी मेरे हलक में जाकर लग रही थी। अब मेरे मुँह से बहुत ज्यादा लार (सलाइवा) निकल रही थी जो कि लंड को बहुत गीला कर रही थी।

अब जब भी मैं लंड को अपने मुँह में अंदर-बाहर करती तो सुपड़-सुपड़ की आवाज आती। अंकल भी मेरे सर को बालों से पकड़कर ऊपर-नीचे कर रहे थे अपने लंड पर। और मजे में बोले जा रहे थे—

अंकल: आआआह्ह्ह्ह आआआह्ह्ह्ह उम्मम्म आआआह्ह्ह्ह मेरी जान ऐसे ही और जोर से चूसो आआआह्ह्ह्ह मजा आ रहा है? और अंदर लो ना? पूरा लंड अपने मुँह में ले लो मेरी जान? आआआह्ह्ह्ह ऐसे ही चूसती रहो।

मुझे उनके मुँह से ऐसी सिसकारियाँ सुनकर और जोश चढ़ता जा रहा था। मैं भी अब फिर से गरम हो चुकी थी। तो मैं भी अब पूरे जोश से अंकल के लंड को चूस रही थी। अब उनका लंड मेरे मुँह में आधे से थोड़ा कम अंदर जा रहा था। लंड तो पूरा गीला हो ही चुका था। अंकल का पेट भी गीला हो गया था।

मैं लंड को तब तक चूसती रही जब तक अंकल ने मुझे खुद नहीं रोका। मेरा मुँह पूरा लाल हो चुका था लंड को चूसने से, क्योंकि मैंने पहले कभी लंड नहीं चूसा था। ये मेरा फर्स्ट टाइम था।

अंकल वैसे ही लेटे रहे जैसे लेटे हुए थे। मुझे अंकल ने मेरे शोल्डर से पकड़कर ऊपर को खींच लिया, मतलब अपने ऊपर लिटा लिया। फिर अपने हाथों में मेरे चेहरे को पकड़कर बोले—

अंकल: वाह मेरी जान वाह्ह्ह? तुमने मुझे खुश कर दिया।

मुझे ये सुनकर बहुत खुशी हुई कि अंकल मुझसे खुश हुए।

अंकल: मजा आया तुम्हें? मेरा लंड चूसकर?

फलक: हम्मम्म

अंकल: कैसा लगा तुम्हें मेरा लंड चूसकर?

फलक: बहुत अच्छा (मैं खुश होते हुए बोली)

अंकल: अब मेरी बारी है तुम्हें खुश करने की।

मैं ये सुनकर शर्मा गई और अपनी आँखें बंद कर लीं शर्म से।

फिर अंकल ने मेरी नाइटी उठाई जो कि बेड पर ही पड़ी थी। उससे मेरा मुँह अच्छी तरह साफ किया। मुँह साफ करने के बाद मेरे होंठों पर अपने होंठ रखकर किस करने लगे।

थोड़ी देर किस करने के बाद उन्होंने मुझे बेड पर सीधा लिटाया और खुद मेरी राइट साइड में लेट गए। फिर से अंकल ने मुझे किस करनी शुरू कर दी, लिप्स पर।

और अपने एक हाथ से मेरी चूची को पकड़कर सहलाने लगे। फिर गर्दन पर किस करने लगे। ऐसे ही किस करते-करते मेरी चूचियों पर आ गए।

अब वो मेरे पेट के ऊपर आकर बैठ गए थे और मेरी दोनों चूचियों को अपने दोनों हाथों में पकड़कर बारी-बारी से दोनों चूचियों को चूसने लगे थे। पहले-पहले तो आराम से चूस रहे थे। फिर थोड़ी देर के बाद हार्ड सकिंग करनी शुरू कर दी। कभी चूची में काटते तो कभी मेरे निप्पल में।

मुझे दर्द भी हो रहा था और मजा भी आ रहा था। मैंने भी उनके सर को पकड़कर उनका मुँह अपनी चूचियों पर दबाया हुआ था।

और मेरे मुँह से मजे में सिसकारियाँ निकल रही थीं—

फलक: आआआह्ह्ह्ह अंकल उम्मम्म आआआह्ह्ह्ह चूसो इन्हें? पी जाओ इनका सारा दूध? आपको बहुत पसंद है ना ये?

अंकल: हाँ मेरी जान मुझे बहुत पसंद है तुम्हारी ये चूचियाँ। आज तो मैं इनका दूध जरूर पीऊँगा।

फलक: आआआह्ह्ह्ह आराम से? काटो मत ना, दर्द होता है।

अंकल: इस दर्द में ही तो मजा है मेरी जान।

फिर अंकल ने मेरी राइट वाली चूची पर बहुत जोर से थप्पड़ मारा।

मेरे मुँह से बहुत जोर की चीख निकली। थप्पड़ मारने के बाद चूची को चूसने लगे। मुझे बहुत आराम मिला चूची चूसने से।

फिर ऐसे ही लेफ्ट वाली चूची पर थप्पड़ मारा और चूसने लगे।

जब अंकल चूची पर थप्पड़ मारते तो मुझे बहुत दर्द होता, लेकिन जब चूसते तो मजा भी आता और आराम भी मिलता।

अंकल ने ऐसे ही बहुत बार मेरी चूचियों पर थप्पड़ मारे और थप्पड़ मारकर चूसते। मेरी चूचियाँ अब लाल हो गई थीं, थप्पड़ खा-खाकर।

फिर अंकल ने मेरी चूचियों को छोड़ा और नीचे को आ गए मेरे पेट पर।

अब अंकल मेरे पेट पर किसिंग कर रहे थे और मैं उनके सर को पकड़कर अपने पेट पर दबा रही थी (मजे में)।

पेट के बाद अंकल मेरी थाईज पर किसिंग करने लगे। मेरी टाँगें एकदम सीधी और आपस में मिली हुई थीं। अंकल मेरी टाँगों के दोनों तरफ अपनी टाँगें किए हुए घुटनों पर बैठे थे।

अंकल मेरी थाईज पर ऊपर की साइड में किसिंग कर रहे थे और बराबर वाली साइड में हाथ फेर रहे थे। ऐसे ही किसिंग करते-करते वो मेरे घुटनों तक आए और फिर किसिंग करते-करते वापस ऊपर की तरफ आने लगे।

अब अंकल मेरे ऊपर आकर लेट गए फेस टू फेस और मुझसे बोले—

अंकल: मेरी जान क्या तुम रेडी हो चुदाई करने के लिए?

सच पूछो तो मैं तो बहुत पहले से रेडी थी चुदाई कराने के लिए। लेकिन अभी तक अंकल ही रेडी नहीं थे।

फलक: हाँ….. (मैं मदहोशी में बोली)

फिर अंकल ने अपने हाथ नीचे ले जाकर मेरी दोनों टाँगों को लेफ्ट-राइट साइड में फैलाया ताकि खुद मेरी टाँगों के सेंटर में आ सकें।

टाँगें फैलाने के बाद अंकल ने अपना लंड मेरी चूत की फाँकों के बीच में रखा और लिप्स पर किसिंग करने लगे। धीरे-धीरे अंकल अपने लंड को मेरी चूत की फाँकों के बीच में ही आगे-पीछे करने लगे।

अंदर नहीं कर रहे थे, बस बाहर-बाहर ही कर रहे थे।

लेकिन मेरा मन कर रहा था कि अंकल अपना लंड मेरी चूत में अंदर डालें। लेकिन शायद अंकल अभी अंदर नहीं करना चाहते थे।

कभी तो मेरी चूत के दाने पर अपना लंड रगड़ते, तो कभी अपना लंड मेरी चूत पर ऐसे मारते जैसे कील (आयरन नेल) के सर पे हथौड़ा (हैमर) मारते हैं।

अंकल का ऐसा करने से मुझे मजा आ रहा था।

अंकल ने थोड़ी देर लंड को मेरी चूत पर ऐसे ही रगड़ा। फिर मेरे ऊपर आकर लेट गए और मुझे किसिंग करने लगे, लिप्स पर।

किसिंग करते टाइम वो अपने लंड को भी मेरी चूत पर रगड़ते रहे। लिप्स के बाद अंकल मेरी गर्दन पर किस करने लगे।

अब मुझसे बरदाश्त नहीं हो रहा था। तो मैं बोली—

फलक: आआआह्ह्ह्ह अंकल प्लीज अंदर करो ना।

अंकल: क्या अंदर करूँ मेरी जान?

फलक: आआआह्ह्ह्ह उम्मम्म अपना लंड।

अंकल: कहाँ अंदर करूँ अपना लंड?

अंकल मुझे और ज्यादा तड़पा रहे थे। अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था। तो मैं बोली—

फलक: आआआह्ह्ह्ह अंकल प्लीज अपना लंड मेरी चूत में अंदर डाल दीजिए प्लीज। अब मुझसे बरदाश्त नहीं हो रहा प्लीज।

अंकल: ठीक है मेरी जान? बस थोड़ा सा और सब्र करो? फिर डालता हूँ।

फिर अंकल ने अपनी गाँड को थोड़ा ऊपर उठाया और अपने लंड को अपने हाथ में पकड़कर मेरी चूत के सुराख पर लंड की टोपी को रगड़ने लगे। मैं बहुत तड़प रही थी लंड अपनी चूत में लेने के लिए।

लेकिन अंकल थे कि मुझे और ज्यादा तड़पा रहे थे। मैं लंड को अपनी चूत में लेने के लिए जैसे पागल हुई जा रही थी।

मैं अंकल से फिर से बोली—

फलक: अंकल प्लीज और मत तड़पाओ ना? डाल दो ना अंदर अपना लंड (मैं तड़पती हुई बोली)

अंकल: मेरी जान लंड को गीला तो करने दो।

अंकल अपने लंड को मेरी चूत पर रगड़कर चूत के पानी से गीला कर रहे थे। थोड़ी देर के बाद अंकल ने अपना एक हाथ मेरी गर्दन के नीचे को डाला और दूसरे हाथ से अपने लंड को पकड़कर चूत के अंदर डालने लगे।

लेकिन अंकल का लंड अंदर नहीं जा पा रहा था, क्योंकि अंकल का लंड बहुत मोटा था और मेरी चूत बहुत छोटी। बार-बार फिसलकर बाहर निकल जाता।

फिर अंकल मेरे ऊपर से उठकर बैठ गए और एक पिलो लिया। पिलो लेकर मुझे बोले—

अंकल: अपनी गाँड को थोड़ा ऊपर उठाओ।

मैंने अपनी गाँड ऊपर उठाई तो अंकल ने वो पिलो मेरी गाँड के नीचे रख दिया।

जिससे मेरी चूत और ऊपर को हो गई। अब अंकल ने मेरी टाँगों को पकड़कर अपने दोनों शोल्डर पर रखा और अपने लंड को हाथ से पकड़कर चूत के सुराख पर रखा।

अंकल ने फिर ट्राई किया लंड को चूत में डालने का। लेकिन लंड फिर से फिसलकर ऊपर की साइड आ जाता, चूत के दाने की तरफ। जब ऐसे भी लंड अंदर नहीं जा रहा था तो अंकल बोले—

अंकल: तुम्हारी चूत तो बहुत टाइट है? लंड अंदर जा ही नहीं रहा।

फिर अंकल ने दूसरा तरीका ट्राई किया। अब उन्होंने मेरी टाँगों को अपने शोल्डर से हटाकर मेरे बूब्स के साथ मिला दिया और मुझे बोले टाँगों को पकड़ने के लिए।

मैंने अपने दोनों हाथ घुटनों के नीचे को निकालकर अपनी टाँगों को पकड़ लिया। इस पोजीशन में मेरी चूत और ज्यादा उभरकर बाहर को आ गई थी। अब अंकल ने अपने एक हाथ से मेरी चूत की फाँकों को पकड़कर फैलाया और दूसरे हाथ से अपने लंड को मेरी चूत पर रखा।

और अंदर डालने की कोशिश करने लगे। लंड इस पोजीशन में थोड़ा सा अंदर गया ही था कि मेरे मुँह से चीख निकल गई, क्योंकि अंकल का लंड बहुत मोटा था।

अंकल मेरी चीख सुनकर वहीं के वहीं रुक गए और बोले—

अंकल: मेरी जान थोड़ा तो दर्द होगा ही? थोड़ा दर्द बरदाश्त कर लो? फिर देखना कितने मजे आएँगे तुम्हें।

मेरी आँखों में आँसू आ गए थे। मैं अंकल से बोली—

फलक: अंकल प्लीज बाहर निकालो। बहुत दर्द हो रहा है।

लेकिन अंकल उसी पोजीशन में वैसे ही रुके रहे। ना तो उन्होंने लंड को बाहर निकाला और ना ही अंदर किया। अंकल अपने हाथों से मेरी थाईज सहलाने लगे और बोले—

अंकल: कुछ नहीं हुआ मेरी जान? सब कुछ ठीक है? थोड़ा तो दर्द होगा ही ना? दर्द के बाद ही तो असली मजा आएगा? और वो मजा ही क्या जिसमें दर्द ना हो?

मुझे अंकल की बातें सुनकर और थाईज सहलाने से थोड़ा आराम मिला।

फिर अंकल ने अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर मेरी चूची पकड़ ली और चूचियों को सहलाने लगे।

मुझे उनका यूँ चूची दबाना और थाईज सहलाना अच्छा लग रहा था और मेरा दर्द भी अब कुछ कम हो गया था। फिर अंकल बोले—

अंकल: तुम्हारी चूत तो बहुत टाइट है फलक? मैंने तो सोचा था तुम्हारी चूत समीर ने चोद-चोदकर ढीली कर रखी होगी? लेकिन ये तो बहुत टाइट है? ऐसा लग रहा है जैसे तुम पहली बार चुदवा रही हो।

फलक: आपके लंड में और समीर के लंड में जमीन-आसमान का फर्क है। समीर का लंड पूरा अंदर जाकर भी इतना दर्द नहीं देता, जितना आपके लंड की टोपी ही अंदर जाने से हो रहा है।

अंकल मेरी बात सुनकर हँसने लगे और बोले—

अंकल: चुदाई का असली मजा तो फिर लंबे और मोटे लंड से ही आता है। आज देखना तुम? कितना मजा आएगा तुम्हें चुदाई में? आज की रात हमेशा याद रखोगी।

फलक: मजे का तो मुझे नहीं पता? लेकिन अभी तो मुझे दर्द हो रहा है।

अंकल: क्यों? जब फर्स्ट टाइम समीर ने किया था? तब दर्द नहीं हुआ था क्या?

फलक: हुआ था लेकिन इतना नहीं जितना आज हो रहा है।

मैं अब नॉर्मल हो चुकी थी। ज्यादा दर्द नहीं हो रहा था अब।

अंकल को भी शायद ये फील हो चुका था तो अंकल ने थोड़ी सी हरकत की। अपने लंड को थोड़ा सा बाहर निकाला बहुत ही धीरे-धीरे से, जिससे मुझे ज्यादा दर्द ना हो। और फिर उतना ही लंड वापस अंदर किया, धीरे-धीरे से।

अंकल थोड़ी देर तक ऐसे ही लंड को अंदर-बाहर करते रहे। मुझे भी अब मजा आने लगा था।

और मजे में मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। मेरे मुँह से सिसकारियाँ सुनकर अंकल को भी समझ में आ गया था कि मुझे अब दर्द नहीं हो रहा है बल्कि मजा आ रहा है। फिर अंकल मेरे ऊपर लेट गए और मेरे लिप्स पर किसिंग करने लगे।

मैंने भी अपनी टाँगों को छोड़ दिया था। अब मेरे दोनों हाथ अंकल की कमर पर थे। अंकल के दोनों हाथ भी मेरी बगल (अंडरआर्म) से होते हुए मेरे शोल्डर पर थे। अंकल ने मुझे मेरे शोल्डर पर से बड़ी मजबूती से पकड़ा हुआ था।

और फिर वो हुआ जिसकी मुझे उम्मीद भी नहीं थी। मेरे मुँह से बहुत ही जोर की चीख निकली। पर मेरी वो चीख मेरे मुँह में ही दबकर रह गई, क्योंकि मेरे मुँह पर अंकल का मुँह था (लिप टू लिप)।

मैं रो रही थी पर मेरे रोने की आवाज बाहर नहीं आ रही थी। वो भी हमारे मुँह के अंदर ही दबी हुई थी। मैं अंकल को अपने ऊपर से हटाना चाह रही थी। लेकिन अंकल ने मुझे इतनी मजबूती से पकड़ा हुआ था कि वो मुझसे हिलाए भी नहीं जा रहे थे।

हुआ ये था – अंकल मुझे लिप टू लिप किस कर रहे थे और धीरे-धीरे अपने लंड को मेरी चूत में अंदर-बाहर कर रहे थे। जिससे मुझे अब मजा आने लगा था। फिर अंकल ने मुझे मेरे शोल्डर पर से मजबूती से पकड़ लिया था और मेरे पैरों को भी अपने पैरों से।

फिर अंकल ने अपना लंड थोड़ा सा बाहर निकाला और जोर लगाकर अंदर की साइड में एक झटका मारा। जिससे अंकल का लंड मेरी चूत को फाड़ता हुआ आधा अंदर घुस गया था। जो मुझसे बरदाश्त नहीं हुआ और मेरे मुँह से बहुत जोर की चीख निकली थी।

अंकल अपना आधा लंड मेरी चूत में डालकर वहीं के वहीं रुक गए।

मेरी आँखों से लगातार आँसू निकल रहे थे। मेरी चूत में भी मुझे जलन महसूस हो रही थी। ऐसा लग रहा था कि किसी ने लोहे की गरम रॉड अंदर डाल दी हो।

अंकल कम से कम 10 मिनट तक ऐसे ही रुके रहे। ना उन्होंने अपना लंड अंदर किया और ना ही बाहर। वो लगातार मुझे किस करते रहे। एक पल को भी उन्होंने अपना मुँह मेरे मुँह से नहीं हटाया था।

जब मेरा रोना बंद हुआ तब अंकल ने मेरे मुँह से अपना मुँह हटाया।

और अपने हाथों से मेरे गालों पर से मेरे आँसू साफ करने लगे।

अब मेरा रोना कम हो गया था। मतलब अब मैं सिसकियाँ लेकर हल्के-हल्के से रो रही थी।

अंकल मुझे दिलासा दे रहे थे। कह रहे थे—

अंकल: मेरी जान कुछ नहीं हुआ? सब ठीक है? जो होना था वो हो गया। जितना दर्द होना था हो गया। अब रिलैक्स करो।

मैं लगातार सिसकियाँ लेकर हल्के-हल्के से रो रही थी। अभी तक मुझे चूत में दर्द हो रहा था। फिर अंकल मेरी गर्दन पर किस करने लगे हल्के-हल्के प्यार से। कुछ देर गर्दन पर किस करने के बाद अंकल मेरे बूब्स पर किसिंग करने लगे।

कभी लेफ्ट वाले पर कभी राइट वाले पर। उनके इस तरह किस करने से मुझे थोड़ा आराम मिला। थोड़ी देर मेरे बूब्स को किसिंग करने के बाद अंकल बोले—

अंकल: क्या तुम ठीक हो?

फलक: हाँ (मैंने रोती हुई सी आवाज में कहा)

अंकल ने अभी तक अपने लंड को थोड़ा भी नहीं हिलाया था। ना आगे ना पीछे। पर अपने हाथों से कभी मेरे बूब्स को सहलाते कभी मेरी बॉडी को और कभी-कभी किस भी करते।

बहुत देर तक अंकल ने अपने लंड से कोई हरकत नहीं की। वो शायद मेरे नॉर्मल होने का वेट कर रहे थे। मैं भी धीरे-धीरे नॉर्मल होते जा रही थी।

अंकल: अब ज्यादा दर्द तो नहीं हो रहा?

फलक: नहीं।

अंकल: मुझे अंदाजा नहीं था कि तुम्हारी चूत इतनी टाइट होगी। मैंने तो सोचा था कि तुम्हारी चूत ढीली होगी। पर तुम्हारी चूत तो इतनी टाइट है जैसे कुँवारी लड़की की होती है।

फलक: हम्मम्म

अंकल: ऐसा लग रहा है जैसे कि मेरा लंड भी छिल गया हो। मैंने तो ख्वाब में भी नहीं सोचा था कि तुम्हारी ऐसी चूत होगी।

अंकल मुझसे बातें करके मेरा ध्यान चूत के दर्द से हटाना चाह रहे थे। बीच-बीच में अंकल मुझे किसिंग भी कर रहे थे।

आगे क्या हुआ पढ़िए नेक्स्ट पार्ट में।

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