एक परिवार की मस्त सेक्स कहानी 2

Pariwar me chudai ki hot sex story:- मैं विनोद हूँ, अपनी सेक्स कहानी का दूसरा पार्ट लेकर। मेरी पड़ोसन, 60 साल की औरत मुझसे चुदवाकर बहुत ख़ुश हुई। चुदाई के बाद उसने भी वही डाउट किया जो मुझे अपनी घरवाली के लिए हो रहा था। आंटी ने पूरे विश्वास से कहा कि पिछली शाम मेरी घरवाली किसी से खूब चुदवाकर आई थी।

मैंने बहुत ख़ुशामद की और आंटी ने प्रॉमिस किया कि वो ना तो अनु से ना ही किसी और से इस बारे में बात करेगी। साथ ही उसने यह भी कहा— Pichla part yaha padhen ==> एक परिवार की मस्त सेक्स कहानी 1

Pariwar me chudai ki hot hindi sex story

आंटी: बेटा, तुम्हारा लंड इतना बढ़िया है, चुदाई भी बहुत बढ़िया करते हो। मेरे जैसी चुदक्कड़ औरत को ख़ुश कर दिया। फिर वो कुतिया, तेरी घरवाली दूसरे से चुदवाने क्यों जाती है, मुझे लगता है कि साली धंधा करती है। बढ़िया चुदाई के लिए नहीं, बढ़िया कमाई के लिए चुदवाती है।

हम दोनों नंगे ही बाहर आए। मैंने खुद अपने हाथों से आंटी को खूब रगड़-रगड़कर नहलाया। पूरे बॉडी में सोप लगाया और आंटी ने मेरे लंड पर भी सोप लगाया। क़रीब 10.30 बजे, खुले में आंटी को कुतिया बनाकर उनकी गाँड मारी।

गाँड मारने से आंटी ख़ुश हुईं। उन्होंने प्रॉमिस किया कि अगले ही दिन संगीता मुझसे चुदवाएगी। बाहर जब संगीता की एक्टिवा की आवाज़ सुनाई पड़ी तब क़रीब ढाई घंटे के बाद मैं अपने घर वापस लौटा।

आंटी को चोदकर, उन्हें ख़ुश कर मैं बहुत ख़ुश था। और सबसे ज़्यादा ख़ुशी थी कि आंटी ने संगीता को चुदवाने की प्रॉमिस की थी।

मैंने खाना खा लिया और फ़ैक्टरी के कपड़े पहनकर अनु का वेट करने लगा। अपने समय पर अनु आ गई। मैंने उससे किस किया, चुचियों को दबाए हुए उसके गालों पर देखा। दोनों गालों पर तब भी चूसने के निशान थे।

दोनों निशानों पर उँगली फिराते हुए कहा—

मै: रानी, बहुत सेक्सी लग रही हो, चलो आज छुट्टी ले लेता हूँ, जल्दी से खा लो फिर हम जमकर चुदाई करेंगे।

अनु ने प्यार से धक्का मारते हुए कहा—

अनु: चुपचाप फ़ैक्टरी जाओ। रात में इतना चोदा कि अब तक बुर में जलन हो रही है। आज ही नहीं, अगले दस दिन भी तुम्हें कुछ नहीं मिलेगा।

और सही में रात को फ़ैक्टरी से वापस आने के बाद बहुत कोशिश की लेकिन साली ने चुदाई नहीं करने दी।

अगली सुबह 9 बजे के क़रीब मैं किचन में खड़ा था। संगीता की आवाज़ सुनाई दी—

संगीता: छी माँ क्या करती हो, कोई ऐसे तुम्हें नंगा नहाते हुए देखेगा तो क्या बोलेगा। विनोद अंकल घर में हैं वे क्या बोलेंगे।

और आंटी ने कहा—

आंटी: अरे बेटी, शर्म छोड़, एक बार तू भी मेरे जैसा सारे कपड़े खोलकर खुले में बाथ ले। तब अगर तुझे बढ़िया नहीं लगेगा तो मैं फिर कभी ऐसा नहीं करूँगी।

संगीता: नहीं माँ, ऐसा मत करो, कितनी बदनामी होगी। सब हमें रंडी समझेंगे। मुझे शर्म आ रही है, नहीं माँ मत खोलो, नंगा मत करो।

ऐसा ही संगीता की प्लीडिंग सुनता रहा। क़रीब 2 मिनट बाद संगीता ने कहा—

संगीता: रंडी, हरामज़ादी, तूने मुझे नंगा कर ही दिया है तो बुला ले विनोद अंकल को। उन्हें भी देखने दो कि सिर्फ़ उनकी घरवाली ही सुंदर नहीं। संगीता उस रंडी से ज़्यादा मालदार है, उस कुतिया अनु से ज़्यादा चुदाई का मज़ा दूँगी।

संगीता की बातों से साफ़ मालूम पड़ा कि वो अनु से जलती है। और एक मिनट बाद मैं भी बिल्कुल नंगा बाहर आ गया। दोनों सास-बहू सामने खड़ी थीं। उनका फ्रंटल मेरी तरफ़ था। मुझे देखते ही संगीता ने झट से अपने दोनों हाथों से अपनी आँखें बंद कर लीं।

मैं पार्टीशन वॉल को जंप कर उस तरफ़ गया और संगीता को अपने दोनों बाँहों में दबोचा। खूब ज़ोर से दबाया और उसे घुमाया। सामने आयरन ग्रिल था। संगीता को उल्टा घुमाया। अपने को सँभालने के लिए उसने दोनों हाथों से ग्रिल को पकड़ा और पीछे से लंड उसकी बुर में घुसाने लगा।

खूब ज़ोर-ज़ोर से धक्का लगाते हुए दोनों हाथों को आगे ले जाकर दोनों कसी हुई मांस-मसल चुचियों को दबोचकर दनादन पेलने लगा। कुछ ही मिनट गुज़रा और संगीता मोन करने लगी। कुछ समय और गुज़रा और संगीता बोलने लगी—

संगीता: उफ़्फ़ अंकल, और तेज़ी से, और अंदर, बहुत मज़ा आ रहा है, चोदते रहिए। मुझे नहीं मालूम था कि चुदाई में इतना मज़ा है। आपने मुझे ख़ुश कर दिया, अब मैं आपकी रंडी हूँ, आपकी रखैल हूँ। मुझे रोज़ चोदिए, दिन में रात में। पुनीत के सामने भी आपसे चुदवाऊँगी। उफ़्फ़ अंकल, मस्त कर दिया आपने और आपके लंड ने।

दिन का 10 भी नहीं हुआ था और खुले में सास के सामने उसकी बहू अपने से डबल एज के आदमी के साथ चुदाई का मज़ा ले रही थी। और कुछ देर बाद संगीता बिल्कुल ठंडी हो गई। पस्त हो गई लेकिन मैं पेलता रहा।

फ़ाइनली मैं भी झड़ने लगा। लौड़ा को बुर के अंदर दबाकर रहा। जब लंड का पूरा रस अंदर निकल गया तब मैंने लंड को बाहर निकाला। आंटी वहीं नीचे फ़्लोर पर दोनों घुटनों को पूरा फैलाकर बैठी थीं। आंटी का प्यूबिक एरिया और बुर साफ़-साफ़ दिख रहा था।

संगीता के बुर से निकला हुआ लंड बुर के रस और कम से लथपथ था। मैंने आंटी का हेड पकड़ा और लंड को उनके मुँह में घुसाकर धक्का मारने लगा। क़रीब 10-12 बार धक्का मारा और फिर लंड उनके मुँह से बाहर निकाल, संगीता को अपनी बाँहों पर उठाकर एक बेडरूम में ले गया।

बेड पर लिटाया और क़रीब 40 मिनट तक आगे से, पीछे से, संगीता के एक-एक अंग को खूब चूसा-चाटा। उसके बाद क़रीब 10-12 मिनट उसकी बुर को खूब बढ़िया से चूसा-चाटा। संगीता बहुत गरम हो गई थी और ज़ोर से बुर में लंड पेलने का रिक्वेस्ट कर रही थी।

उस दिन की सेकंड राउंड की चुदाई में मैंने संगीता को स्ट्रेट मिशनरी पोज़ में जमकर चोदा। इस बार भी संगीता ही पहले झड़ी और कुछ ही देर बाद मैंने भी संगीता के बुर को अपने रस से भर दिया। मेरा रस बुर में गिरते ही संगीता ने मुझे अपनी बाँहों और थाईज़ से टाइटली बाँधा और बोली—

संगीता: थैंक यू माँ, आपके कारण ही मुझे विनोद अंकल का प्यार और लंड मिला। विनोद अंकल आप अंधे हैं जो आपको 2 साल तक मेरी जवानी नहीं दिखाई दी। मन तो जिस दिन आपसे पहली बार मिली उसी दिन आपसे चुदने के लिए तैयार थी। आज माँ ने मेरा बहुत बड़ा काम किया है, माँ को इनाम दीजिए। माँ को चोदिए।

संगीता का बोलना ख़त्म हुआ और आंटी उसके बग़ल में लेट गईं। संगीता को दूसरी बार चोदकर लंड ढीला हो गया था। लेकिन संगीता ने खुद लंड चूसकर टाइट किया और संगीता के सामने उसकी सास को चोदा।

चुदाई ख़त्म होने के बाद हम तीनों बाहर आए। और एक-दूसरे को खूब रगड़-रगड़कर नहलाया। पिछले दिन जैसा बहू के सामने सास को कुतिया बनाकर उनकी गाँड मारी। गाँड मरवाते हुए आंटी ने बहू से कहा कि उसे चुदाई से ज़्यादा मज़ा गाँड मरवाने में आता है।

उस दिन 12 बजे के बाद मैं वापस अपने घर आया। जो खाना बाक़ी था उसे बनाकर खाया और अनु के घर आते ही मैं फ़ैक्टरी चला गया।

अगले चार दिन, शनिवार तक सास और बहू को बेड पर अगल-बग़ल लिटाकर चोदा, खुले में चोदा। मेरी चुदाई उसे इतनी पसंद आई कि अपना कंप्यूटर क्लासेस भी मिस करने लगी। अगले रविवार को भी देखा कि देबू मेरी वाइफ़ अनु के चुत्तरों को बार-बार मसल रहा है।

अगले वीक मेरा मॉर्निंग शिफ्ट था। मंडे को सास-बहू की चुदाई नहीं कर सका। रविवार को अनु बाहर नहीं गई थी। लेकिन मंडे चार बजे अनु बाहर चली गई। अनु ने जाते समय बताया कि—

अनु: मेरे प्रिंसिपल ने किसी बड़े ऑफ़िसर की बेटी को ट्यूशन देने के लिए कहा है, मना नहीं कर सकती। रोज़ 2 घंटा ट्यूशन लेना है, हर महीना 10000 मिलेगा।

पहले भी ऐसा ट्यूशन लेती थी। मुझे कोई दूसरा डाउट नहीं हुआ। उस दिन शाम को जब मैं बाहर खड़ा था तब आंटी मेरे पास आईं और बोलीं—

आंटी: संगीता रात को तुम्हारा वेट करेगी। मुझे नहीं मालूम क्या करोगे, कैसे करोगे। अगर संगीता को नहीं चोदोगे तो वो तुमसे फिर कभी बात नहीं करेगी।

मैंने कहा—

मै: संगीता को प्यार करने के लिए अगर मुझे अनु का मर्डर करना पड़ेगा तो मैं कर दूँगा।

आंटी ने कहा—

आंटी: पिछले वीक अनु रोज़ 4 बजे के पहले एक्टिवा से जाती थी और क़रीब 7 बजे वापस आती थी। मैंने पूछा तो उसने कहा कि उसे एक ट्यूशन मिल गया है, किसी सीनियर गवर्नमेंट ऑफ़िसर की बेटी है, जाना ही पड़ेगा। और बेटा, 7 बजे जब वापस आती है तब जितनी ख़ुश रहती है उतनी ख़ुश तुम्हारे साथ नहीं रहती। साली, ट्यूशन के बहाने किसी से चुदवाने ही जाती है।

मैंने धीरे से कहा—

मै: अब मुझे आपकी जैसी मस्त मालदार औरत के साथ संगीता की प्यारी जवानी मिल गई है। फिर मेरी घरवाली कुत्ते से भी चुदवाए मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। मैं संगीता को प्यार करने आऊँगा।

उस रात मैंने घरवाली को चोदने की कोशिश नहीं की तो उसने भी अपनी तरफ़ से कोई इनिशिएटिव नहीं ली। वो सो गई और मैं रात 11 से लेकर 2 बजे तक संगीता के साथ रहा। उसने किचन का डोर खोल रखा था।

पार्टीशन वॉल जंप कर जाता था। चुदाई तो एक बार ही होती थी लेकिन संगीता के साथ प्यार की बहुत बातें होती थीं। उसने कभी अनु के बारे में कुछ नहीं कहा।

रोज़ शाम को 4 से पहले अनु चली जाती थी और 7 के तक आती थी। मैंने भी ध्यान दिया। अनु जब वापस आती थी तब उसके चेहरे पर जो चमक, ख़ुशी, लालिमा रहती थी वो दूसरे समय नहीं दिखाई पड़ती थी। मैंने उससे कुछ नहीं पूछा।

पूरे वीक ना तो मैंने चुदाई की कोशिश की ना ही उसने मुझे एक बार भी प्यार किया। लेकिन हर रात संगीता मुझे ख़ुश करती रही। उस वीक एवरी अल्टरनेट नाइट आंटी को चोदा, उनकी गाँड मारी।

फिर रविवार आया। देबू के आने के बाद मैंने ध्यान दिया। लास्ट टू रविवार की तरह उस दिन भी अनु उस लड़के के बग़ल में खड़ी थी। देबू बार-बार उसके चुत्तरों को दबाता था, सहलाता था। जैसा मैंने देखा कि देबू बार-बार मेरी वाइफ़ के चुत्तर मसलता है ज़रूर किसी और ने देखा होगा लेकिन किसी ने मुझसे या अनु से कुछ नहीं कहा।

फिर नाइट शिफ्ट आया। मंडे से फ़्राइडे तक हम तीनों, मैं संगीता और उसकी सास ने मिलकर खूब मस्ती मारी। ओपन में बाथ लिया, चुदाई की और आंटी की गाँड भी रेगुलरली मारता था। फ़्राइडे नाइट शिफ्ट कर मैं सो गया।

अगली सुबह, शनिवार को 9 बजे के क़रीब उठकर बाहर आया तो देखा कि ड्रॉइंग रूम में एक सूटकेस और एक हैंडबैग है। हैंडबैग देखने से लगा कि यह लेडीज़ हैंडबैग है।

बेडरूम में जाकर देखा तो एक बेडरूम में, बेड पर मेरी 19 साल की बेटी अंजलि बिल्कुल नंगी सो रही है। मैं उस ख़ूबसूरत हसीना को देखता रहा।

उफ़्फ़, क्या मस्त जवानी है मेरी बेटी की। कभी ध्यान नहीं दिया कि मेरी बेटी इतनी ख़ूबसूरत और मद-मस्त करने वाली जवानी की मालकिन है।

मैं आगे बढ़ा और पहले लिप्स, गालों को छुआ, चुचियों को हौले-हौले सहलाया लेकिन मेरी बेटी के बॉडी में कोई हलचल नहीं। मैंने झाँट भरी बुर को सहलाया, झुककर बुर को किस किया।

तब भी अंजलि की बॉडी में कोई मूवमेंट नहीं। मैं बुर से लंड सटाना चाहता था तभी दोनों सास-बहू की हँसी सुनाई दी। मैं अपने कपड़े पहने हुए बाहर आया। देखा कि दोनों सास-बहू रोज़ जैसा बिल्कुल नंगी होकर एक-दूसरे के ऊपर पानी डाल रही हैं।

मुझे कपड़े पहने देखकर संगीता बोली—

संगीता: अंकल, क्या हुआ? आंटी ने मुझे चोदने से मना कर दिया क्या?

मैंने जवाब दिया—

मै: नहीं रानी, आज सुबह-सुबह अंजलि आ गई इसलिए अभी नहीं आ सकता।

सास-बहू दोनों चुदासी थीं। संगीता ने कहा—

संगीता: ठीक है, बहुत दिनों बाद बेटी आई है, अभी उसे प्यार कीजिए। लेकिन आंटी के आने के बाद आपका लंड मेरी बुर और इस रंडी (सास) की गाँड में होना चाहिए। नहीं आओगे तो आंटी के साथ-साथ पुनीत और अंजलि को भी सब बता दूँगी।

बोलकर दोनों घर के अंदर चली गईं। मैं भी अंदर आया, दोनों तरफ़ का सब दरवाज़ा, विंडोज़ को ठीक से बंद किया और वापस बेटी के पास आया। अंजलि तब भी बेसुध सो रही थी। शायद रात में ट्रेन में सोने की जगह न मिली हो।

मैं कुछ देर सोचता रहा कि बेटी के साथ भी मस्ती लूँ कि नहीं लूँ। लेकिन फिर दिल ने कहा—

“बेटा विनोद इतना क्या सोच रहे हो, जब तुम अंजलि से छोटे थे तो अपनी माँ को खूब चोदते थे, दो बहनों की सील तोड़ी, उन्हें जमकर चोदा, बड़ी बहन के पेट में बच्चा दिया तो इस ख़ूबसूरत हसीना को, अपनी बेटी का भी स्वाद ले लो।”

फ़ाइनली मेरे लंड की ही जीत हुई। बेटी की बुर में घुसने के लिए बेक़रार था। मैं नंगा हुआ और धीरे से अंजलि जो करवट लेकर सो रही थी उसे फ़्लैट किया।

दोनों लेग्स को फैलाया। दोनों हाथों से झाँट को फैलाया और बेटी की कमसिन, प्यारी बुर दिखाई दी। अपने को रोक नहीं पाया। झुककर लिप्स से क्लिट को सक करने लगा, पहले धीरे-धीरे और फिर ज़ोर से।

अंजलि की आँख खुल गई और उसने देख लिया कि उसका बाप उसकी बुर को, क्लिट को चूस रहा है। वो अपने दोनों हाथों से मेरे हेड को ठेलते हुए बोली—

अंजलि: पापा, क्या कर रहे हो। ये बहुत बड़ा पाप है, क्राइम है। मैं सिक्योरिटी ऑफ़िसर में कंप्लेन कर दूँगी, छोड़िए मुझे, मैं चिल्ला दूँगी।

वो पूरी कोशिश कर रही थी मुझे अलग करने की लेकिन मैंने सर नहीं उठाया। लिप्स से बुर की पत्तियों को चूसने लगा, टंग टिप को स्लिट के अंदर घुसाकर स्लिट पर ऊपर-नीचे करने लगा। एक हाथ की उँगलियों से क्लिट को मसलने लगा। दूसरे हाथ से एक चुची की घुंडी/निप्पल्स को भी मसलने लगा।

मुझे गाली देने के साथ-साथ मेरी बेटी सुबक भी रही थी।

अंजलि: मैं आज अभी वापस चली जाऊँगी, देबू के पास जाकर रहूँगी। वो मुझे बहुत प्यार करता है, उससे शादी कर लूँगी। कभी घर वापस नहीं आऊँगी। आह पापा, वेरी नाइस, बहुत बढ़िया लगा, फिर से करो पापा।

मुझे नहीं मालूम कि मेरी कौन-सी हरकत उसे बढ़िया लगी। लेकिन बेटी का टोन बदल गया, गाली और एब्यूसिव लैंग्वेज छोड़ अंजलि मस्ती की आवाज़ बोलने लगी।

अंजलि: उफ़्फ़ पापा, आप क्या कर रहे हो? बहुत बढ़िया लग रहा है, करते रहिए, बहुत मज़ा आ रहा है। देबू ने तीन दिन लगातार 2-2 बार चोदा लेकिन उससे कभी ऐसा मज़ा नहीं मिला। पापा, मस्त कर दिया आपने, और कीजिए, करते रहिए।

साली पहले ही चुदाई का मज़ा ले चुकी थी इसलिए ओरल में ज़्यादा समय नहीं लिया। फिर भी मैं अपने फ़िंगर्स, लिप्स और टंग से बेटी की बुर के साथ खेलता रहा। सिर्फ़ एक हाथ की मिडिल फ़िंगर को अंदर घुसाकर बुर को कुरेदा और 20-25 मिनट होते-होते बेटी ज़ोर से बोली—

अंजलि: पापा, अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है, बुर में आग लगी है, बहुत खुजली हो रही है। बुर में लंड पेलिए, बुर की गर्मी से जलकर मर जाऊँगी।

बेटी बुर में लंड घुसाने के लिए ज़िद करती रही। फ़ाइनली, क़रीब 40 मिनट की ओरल के बाद मैं बेटी के ऊपर सीधा हुआ। उसकी आँखों में देखा। आँखों में ग़ुस्सा नहीं, मस्ती की लाली छा गई थी। चेहरा दमक रहा था।

अंजलि ने अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर लंड को पकड़ा और अपनी बुर के छेद पर दबाते हुए बोली—

अंजलि: बेटीचोद, लंड इतना टाइट है फिर किसके लिए वेट कर रहा है। तेरी घरवाली बोलेगी तब बेटी को चोदेगा? जल्दी पेल हरामी नहीं तो लंड काट कर बुर में भर लूँगी।

उसने नीचे से कमर उचकाया। ऐज़ अ रिफ़्लेक्स एक्शन मैंने भी ऊपर से धक्का मारना शुरू किया। हर धक्के के साथ लंड अपनी ही बेटी की बुर के अंदर घुसता गया और चौथे धक्के में ही पूरा लंड अंदर घुस गया।

अंजलि ने कई बार कहा कि उसने देबू से कई बार चुदवाया है। लेकिन मेरे दिमाग़ में यह बात नहीं आई कि हमारा सब्ज़ी वाला, मेरी घरवाली का यार ही मेरी बेटी को भी चोद चुका है।

मैं सोच रहा था कि मेरी बेटी का देबू कोई उसका को-स्टूडेंट, कॉलेज का फ्रेंड है। लेकिन जो भी हो अंजलि को चोदने में किसी कुँवारी कमसिन लड़की को चोदने के जैसा ही मज़ा मिल रहा था। चोदने से मुझे साफ़-साफ़ लगा कि लड़की की बुर में महीनों से कोई लंड नहीं गया था। बहुत ही टाइट, रसीली और गरम बुर थी।

चुचियों को मसलते हुए, थाईज़ को सहलाते हुए खूब जमा-जमाकर चोदता रहा। और पहले बेटी ठंडी हुई और उसके तुरंत बाद मैंने अपनी बेटी की बुर को अपने रस से भर दिया। बुर में रस गिराए हुए।

उससे कहा कि मेडिसिन की दुकान जाकर कोई कंट्रासेप्टिव पिल्स, आई-पिल खा ले। तो अंजलि ने कहा कि आजकल हर जवान लड़की अपने साथ कोई न कोई कंट्रासेप्टिव रखती ही है। हमने एक-दूसरे को बहुत चूमा और चुदाई ख़त्म होने के बाद बेटी ने नंगा ही मेरे लिए और अपने लिए नाश्ता बनाया।

नाश्ता करने के बाद हम दूसरी राउंड चुदाई करने लगे। और चुदाई के बीच उससे देबू के बारे में पूछा। कहाँ रहता है, किस ईयर में है, उसके पेरेंट्स क्या करते हैं आदि? और बेटी ने कुछ नहीं छुपाया। मेरा धक्का सहते हुए उसने कहा—

अंजलि: पापा, आपको याद है कि जून में कॉलेज जाने के पहले हम दोनों एक सर्कस देखने गए थे। सर्कस देखते-देखते मुझे लगा कि कोई मुझे बहुत घूर रहा है। नज़र इधर-उधर दौड़ाया तो देखा कि हमसे 3-लाइन आगे की बेंच पर बैठा हुआ मेरे ही उम्र का लड़का बार-बार मुझे घूर रहा है।

सर्कस देखते-देखते कई बार हमारी नज़र मिली। फिर हम दोनों एक-दूसरे को देख मुस्कुराने भी लगे। सर्कस ख़त्म हुआ, हम गेट से बाहर निकल रहे थे। तो वो लड़का मेरे बग़ल में आकर धीरे से बोला कि वो कल फिर इसी शो को देखने अकेले आएगा।

मालूम नहीं, उसकी आवाज़, उसके चेहरे में क्या जादू था कि मेरा दिल उस पर फिसल गया। घर वापस आकर बहुत सोचा। डिसाइड किया कि मैं उससे मिलने नहीं जाऊँगी। लेकिन ज्योंही दोपहर का 2 बजा, मैं माँ से झूठ बोलकर सर्कस देखने चली गई।

और वो लड़का गेट पर मेरा ही वेट कर रहा था। मुझे देखते ही उसने पूछा कि सर्कस देखना है कि कहीं एकांत में बैठकर बातें करनी है। मुझे भी सर्कस कहाँ देखना था। वो मुझे लेकर अपने घर आया। घर में उसकी माँ, 2 बहनें और एक भाभी थी।

उसने सबसे मुझे अपना एक दोस्त कहकर मिलवाया। फिर वो मुझे लेकर एक रूम में गया और पापा बिना कोई रोक-टोक के मैंने उसे चोदने दिया। अपनी वर्जिनिटी तोड़ने दी। हम 3 घंटा वहाँ रहे और हमने 2 बार चुदाई की। हम रूम से बाहर आए तो उसकी माँ ने मुझे बहुत प्यार से खिलाया-पिलाया।

वो बोली कि मैं पहली लड़की हूँ जिससे देबू ने पसंद किया है। उन लोगों ने मुझे विश्वास दिलाया कि कोई मुझे बदनाम नहीं करेगा। मुझे भी ज़िंदगी की पहली चुदाई बहुत पसंद आई। मैंने देबू से कुछ नहीं पूछा कि वो क्या करता है, कहाँ पढ़ता है… लेकिन एक बात साफ़ दिखाई दिया कि वे लोग बहुत ही ज़्यादा अमीर हैं। लेकिन अमीरी से मुझे क्या करना था, मेरी बुर को देबू का लंड बहुत पसंद आ गया था। अगले दिन भी तीन बजे मैं खुद उसके घर पहुँच गई।

मैंने उससे पूछा और उसने भगवान की, अपनी माँ-बहन की कसम खाकर कहा कि मैं उसकी पहली माल हूँ। मुझसे पहले उसने किसी को कभी किस भी नहीं किया है। उसने किसी और को चोदा हो ना चोदा हो मुझे उससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ना था। मुझे वो और उसकी चुदाई बहुत पसंद आई।

उस दिन और अगले दिन भी मैं फिर गई और तीनों दिन उसने मुझे 2-2 बार चोदा। उसके बाद कॉलेज आ गई। सुबह यहाँ आई तो सोचा था कि अब फिर जब तक यहाँ हूँ देबू के घर जाकर रोज़ चुदवाऊँगी। लेकिन अब उसके पास नहीं जाऊँगी, मेरा हीरो, मेरा आदमी घर में ही है फिर मन किसी और के पास क्यों जाऊँ?

मैंने और पूछा तो उसने कह दिया कि उसके देबू का बाप वेजिटेबल्स का होलसेल मर्चेंट है। बहुत अमीर हैं वे सब। बेटी की बात सुनकर मुझे विश्वास हो गया कि माँ और बेटी दोनों एक ही आदमी को प्यार करती हैं। लेकिन मैंने बेटी से अनु और देबू के बारे में कुछ नहीं कहा।

उस दिन अनु कॉलेज से जल्दी आ गई। डेढ़ बजे तक हमने लंच ले लिया। दोनों माँ-बेटी जब रूम में बातें कर रही थीं तब मैंने अनु से कहा कि मैं बाहर जा रहा हूँ शाम तक वापस आ जाऊँगा। मैं फ्रंट डोर से बाहर निकला और थोड़ी दूर जाकर वापस आया।

दोपहर/आफ्टरनून का समय था। रोड पर कोई नहीं था। मैं अपने घर के बाउंडरी में आया और पार्टीशन वॉल को जंप कर संगीता के किचन के डोर को ठेला। डोर खुल गया। दोनों मेरा वेट कर रही थीं।

फिर ढाई घंटे में संगीता की जमकर चुदाई की और उसकी सास जैसा चाहती थीं उनकी गाँड मारी। आंटी ने अपना स्पेशल चाय बनाया। हम चाय पी रहे थे कि एक्टिवा के स्टार्ट होने की आवाज़ आई।

आंटी ने विंक करते हुए कहा—

आंटी: इतने महीनों बाद बेटी घर आई है और माँ ट्यूशन के लिए चली गई। अनु ट्यूशन देने जाती है या ट्यूशन लेने वही जाने।

अपनी सास की बात को इग्नोर करते हुए संगीता ने कहा—

संगीता: विनोद राजा, आपकी बेटी भी अगर हमारे जैसा नंगा बाहर में बाथ ले तो आपको ग़ुस्सा आएगा?

संगीता यह कह रही थी कि वो मेरी बेटी को भी ओपन में नंगा होकर नहाने के लिए कन्विंस कर लेगी। मैं कुछ देर दोनों को घूरता रहा और फिर कहा—

मै: अगर किसी और को मालूम न पड़े, तुम सबकी बदनामी न हो तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है।

संगीता ने मेरे लंड को दबाते हुए कहा—

संगीता: हम आपको आपकी अपनी बेटी की ख़ूबसूरत नंगी जवानी दिखाएँगे तो मुझे क्या मिलेगा?

मैंने उसकी चुचियों को मसलते हुए कहा—

मै: कौन आदमी किसी जवान लड़की को, चाहे वो अपनी बेटी, बहन या माँ ही क्यों न हो, नंगा नहीं देखना चाहेगा! तुम्हें क्या चाहिए?

संगीता ने भी स्माइलिंगली कहा—

संगीता: आपको अपनी नंगी बेटी के सामने हम दोनों को चोदना पड़ेगा।

मैंने दोनों को चूमा, प्यार किया और फिर फ्रंट डोर पर आकर कॉल बेल बजाया। अंजलि ने डोर खोला और इरिटेटेड होकर बोली—

अंजलि: माँ ने ये ट्यूशन कब से शुरू कर दिया। मैं मना करती रही लेकिन साली मानी नहीं, चली गई।

मैं अंदर आया। बेटी को गोदी में बैठाकर चुचियों को मसलते हुए कहा—

मै: माँ अपना ट्यूशन लेने गई है, तुम भी जाकर अपने देबू को ट्यूशन दे दो।

अंजलि: नहीं नहीं, अब मुझे देबू या किसी और से नहीं चुदवाना। मेरा यार, मेरा आदमी मेरे साथ है।

अंजलि मना करती रही। लेकिन मैंने उसे फ़ाइनली कन्विंस किया कि वो एक बार अपने पहले यार देबू से मिल ले। और देखे कि वो उससे (अंजलि) से अब भी प्यार करता है या नहीं। पहला प्यार, पहला सेक्स को भुलाना मुश्किल होता है।

अंजलि भी तैयार हो गई। वो दूसरे कपड़े पहनकर तैयार हुई और मैं उसे अपनी कार से ले गया। अंजलि ने जहाँ कार रोकने कहा, मैंने कार रोकी। उसने वहीं से एक मकान की ओर पॉइंट करते हुए दिखाया कि वही देबू का घर है।

थ्री स्टोरीज़ बिल्डिंग काफ़ी आलीशान दिख रहा था। मैंने बेटी से पूछा कि मैं कब उसे लेने आऊँ।

लेकिन उसने कहा कि देबू उसे घर छोड़ देगा। अंजलि को ड्रॉप कर मैं घर वापस आ गया।

एक घंटा भी नहीं गुज़रा कि माँ-बेटी दोनों अनु की एक्टिवा पर साथ आ गए। दोनों का फ़ेस ग़ुस्से से या गिल्ट फ़ीलिंग से तम-तमा रहा था। मैंने दोनों में से किसी से कुछ नहीं पूछा।

रात को खाने के बाद अनु ने कहा कि उसके सिर में बहुत दर्द है। मैंने उसे एक गोली दे दी। अनु ने बिना किसी क्वेश्चन के गोली को पानी के साथ खा ली। गोली मैंड्रेक्स थी। वैसे तो मैंड्रेक्स नशा करने वाली टैबलेट है। लेकिन एक गोली खाकर अगर कोई सो जाए तो वो फिर 7-8 घंटे के लिए बेसुध सो जाता है।

यह एन्श्योर कर कि अनु गहरी नींद में है मैं नंगा ही बेटी के रूम में गया। घर की चूत को घर के लंड से ही पेलना था। मुझे देखते ही अंजलि लाउडली बोली—

अंजलि: आपकी घरवाली, मेरी माँ रंडी है, अपने बेटी के यार से चुदवा रही है।

आगे क्या हुआ पढ़ें अगला पार्ट।

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