एक परिवार की मस्त सेक्स कहानी 1

A hot family hindi sex story:- मैं विनोद मिश्रा हूँ। आपके सामने एक बहुत ही मस्त कहानी ला रहा हूँ।

वह रविवार था। मैं शनिवार नाइट शिफ्ट करने के बाद घर आकर सो गया। सुबह जब नींद खुली तो 9.30 बज गया था। तीन घंटा सोने के बाद फ्रेश फील कर रहा था। हाथ-मुँह धोकर बाहर आया तो बीवी नहीं दिखाई दी। सिर्फ़ हम दोनों ही घर में थे। बेटी एमबीबीएस के फ़र्स्ट ईयर में थी और बेटा इंजीनियरिंग के फ़ाइनल ईयर में। दोनों हॉस्टल में रहते थे।

A hot family hindi sex story

अक्टूबर की शुरुआत थी। बीवी दिखाई नहीं दी तो विंडो से बाहर देखा। बाहर का नज़ारा देख दिल धड़क उठा। घर के बाहर एक सब्ज़ी वाला अपना ठेला लेकर खड़ा था। मेरी बीवी अनु, उसके बग़ल में खड़ी थी। दोनों का बैक मेरी तरफ़ था।

उन दोनों के सामने दो और औरतें सब्ज़ी ख़रीद रही थीं। मैंने देखा कि सब्ज़ी वाला देबू बार-बार मेरी बीवी के चुत्तरों को सहलाता था, दबाता था और फिर हाथ हटा लेता था। और मेरी बीवी सामने खड़ी लेडीज़ से बातें करते हुए सब्ज़ी भी सेलेक्ट कर रही थी।

लेकिन उसने एक बार भी देबू को चुत्तर दबाने-सहलाते से मना नहीं किया। मैं 5-7 मिनट वहाँ खड़ा रहा। उस बीच देबू ने चार बार कसकर चुत्तरों को दबाया और अनु ने एक बार भी मना नहीं किया। मैं ग़ुस्से से लाल-पीला हो रहा था।

जी तो किया कि बाहर जाकर हरामी देबू को खूब मारूँ। लेकिन जब मेरी बीवी ही कुछ नहीं बोल रही थी तो मैं क्या बोलता। इसका मतलब था कि मेरी 42 साल की बीवी एक 19-20 साल के लड़के के साथ मस्ती मार रही थी। मुझे ये भी डाउट हुआ कि मेरी बीवी अपने बेटी के उम्र के लड़के के साथ चुदाई भी करती है।

वहाँ से हटकर पानी पीने किचन में आया। पानी लेकर किचन के बाहर गया और मैं स्टैच्यू होकर देखता रहा। एक क़रीब 60 साल की औरत, खूब गदराई बॉडी वाली औरत नंगी नहा रही थी। वो हमारी नेक्स्ट डोर नेबर पुनीत की माँ थी।

पुनीत खुद क़रीब 26 साल का था। हमारी फ़ैक्टरी में इंजीनियर था। उसकी बीवी संगीता 21-22 साल की यंग अट्रैक्टिव औरत थी। संगीता बहुत ही ख़ुश-मिज़ाज, लाइवली औरत थी। हम दोनों के घर के बीच एक क़रीब 3 फ़ुट हाइट की दीवार थी।

और वो आंटी बिल्कुल नंगी होकर नहा रही थीं। रविवार था, घर में बेटा, बहू भी होंगे फिर भी औरत नंगी नहा रही थी। आंटी का बैक मेरी तरफ़ था। मैं देखता रहा। 3-4 मिनट उसने बाल्टी से पानी लेकर अपने ऊपर डाला। फिर टॉवल से बॉडी को वाइप करती हुई मेरी तरफ़ घूमी।

उफ़्फ़ क्या ज़बरदस्त माल थी। 38-40 इंच की चुचियाँ जो अपने वेट से नीचे की ओर ढल गई थीं। खूब मोटे-मोटे और लंबे थाईज़ और बिना झाँटों वाली, फूली हुई बुर। 60 साल के आसपास की थीं लेकिन बॉडी में थोड़ा भी ढीलापन नहीं दिखाई पड़ रहा था।

हम दोनों इस औरत को आंटी कहते थे और ये हमें नाम से बुलाती थीं। पूरा बॉडी वाइप करने के बाद आंटी ने एक लेग को पेटीकोट के अंदर डालने के लिए उठाया। मैंने कहा—

मै: आंटी, आप बहुत ही मस्त औरत हो।

मेरी आवाज़ सुनकर उसने नज़र उठाई, मेरी ओर देखा। इधर-उधर देख वो धीरे से बोली—

आंटी: विनोद, क्या कर रहे हो? संगीता, अनु दोनों बाहर हैं, देखेंगे तो क्या बोलेंगे, जल्दी से लुंगी बाँधो।

आंटी की आवाज़ सुन मेरी नज़र नीचे गई। तो देखा कि मेरी लुंगी खुलकर नीचे गिर गई थी और लौड़ा फन-फना रहा था। आंटी की बुर में घुसने के लिए पूरा तैयार था। मैंने धीरे से कहा—

मै: आंटी, मेरे पास आओ।

और वो 60 साल की औरत ने एक बार फिर भी इधर-उधर देखा और पार्टीशन वॉल के बिल्कुल पास आ गई। मैंने झटके से आंटी को अपनी दोनों बाँहों में बाँधा, लिप्स को किस किया, दोनों चुचियों को मसला।

बुर को मसला और मिडिल फ़िंगर को बुर के अंदर ठेलते हुए कहा—

मै: देखो आंटी, आपकी बुर मेरा लौड़ा के लिए पूरी तरह से तैयार है। आज रात दरवाज़ा खोलकर रखना, बहुत प्यार से चोदूँगा, बहुत मज़ा दूँगा।

या तो औरत खुद चुदासी थी या फिर उसे मेरा लौड़ा, मेरी बॉडी बहुत पसंद आ गई थी। उसने हाथ आगे बढ़ाकर लौड़ा को मसलते हुए कहा—

आंटी: आज घर में सभी हैं। कल फिर इसी टाइम नहाने आऊँगी तब बात करेंगे। अभी अंदर जाकर अनु को चोदो।

उसने खूब ज़ोर से लौड़ा को दबाया और पेटीकोट लेकर वैसे ही नंगी अपने किचन में घुस गई। आंटी ने खुद लौड़ा पकड़ा था यानी वो मुझसे चुदने के लिए तैयार थी। आंटी की नंगी जवानी देखकर अपनी बीवी की बेशर्मी को भूल गया और सोचा कि अंदर जाकर घरवाली को खूब चोदूँगा।

मैं लुंगी हाथ में लेकर घर के अंदर आया। अनु ड्रॉइंग रूम से किचन की ओर आ रही थी। मुझे नंगा देखकर बोली—

अनु: सुबह-सुबह ये क्या पागलपन कर रहे हो। जल्दी से लुंगी बाँधो। बाहर देबू के पास बैठो मैं तुम लोगों के लिए चाय लेकर आती हूँ।

लेकिन मैंने घरवाली को बाँहों में बाँध लिप्स को चूमा और बोला—

मै: बेशरम, रंडी सब्ज़ी वाले को घर क्यों बुलाया? सब तुझे रंडी समझेंगे, सब यही सोचेंगे कि अनु टीचर एक सब्ज़ी वाले से चुदवाती है।

अनु ने लौड़ा को मसलते हुए कहा—

अनु: बेचारे ने पानी माँगा तो क्या देबू को प्यासा भेज देती? तुम्हारे लिए चाय बनाना ही था, इसलिए उसे भी बुला लिया। जाओ उससे बात करो देबू को बढ़िया लगेगा।

मेरी बीवी जिस प्यार से देबू का नाम ले रही थी मेरा डाउट और भी बढ़ गया। ये रिस्पेक्टेड टीचर एक सब्ज़ी वाले से चुदवाती है। घरवाली की दोनों चुचियों और बुर को मसलकर बाहर आ गया।

बरामदे के बेंच पर देबू बैठा था। मुझे देखते ही खड़ा हो गया। हाथ जोड़कर प्रणाम किया और बोला—

देबू: साहब, मैं बहुत किस्मत वाला हूँ कि अनु मैडम मुझसे प्यार से बात करती हैं। मैंने अब तक अनु मैडम से बढ़िया औरत नहीं देखी। सच साहब, आप बहुत किस्मत वाले हैं कि अनु मैडम आपकी घरवाली हैं। मेरा तो मन करता है हर हमेशा अनु मैडम के साथ ही रहूँ।

उस लड़के की बोल्ड बातें सुनकर मैं अवाक था। उसकी बातों से साफ़ झलक रहा था कि वो अपने से 21-22 साल बड़ी औरत से बेहद प्यार करता है। मेरा तो मन किया कि उससे पूछूँ कि वो अनु को कब से चोद रहा है। लेकिन हिम्मत नहीं हुई।

मैं उससे उसके फ़ैमिली के बारे में पूछता रहा। उसने बताया कि उनका वेजिटेबल का होलसेल बिज़नेस है। मेन मार्केटिंग प्लेस में उनका शॉप है। वे छोटे रिटेलर्स, होटल, रेस्टोरेंट्स में सब्ज़ी सप्लाई करते हैं। देबू ने यह भी बताया कि फ़ैमिली में सिर्फ़ वही ठेला लेकर सब्ज़ी बेचता है।

वो सिर्फ़ 4-5 महीने से ही ठेला लेकर आता है और सिर्फ़ तीन सोसाइटियों में ही घूमता है। शायद दूसरे दो सोसाइटियों में भी अनु जैसी कोई रंडी मिल गई हो। हम बातें कर रहे थे कि अनु एक ट्रे में चाय, पानी, स्नैक्स लेकर आई और हम तीनों बाहर ही बातें करते रहे।

आड़ोस-पड़ोस की कई लेडीज़ सामने के रास्ते से आ-जा रही थीं। सबने मुझे और अनु को विश किया, प्रणाम किया। चाय पीकर देबू जाने लगा तो अनु ने कहा—

अनु: देबू, बहुत दिनों से ताज़ा, मोटा गाजर-मूली नहीं खिलाया तुमने।

देबू ने मुस्कुराते हुए कहा—

देबू: मैडम, आपको मालूम है कि गल्ले पर ताज़ा सब्ज़ी शाम 3-4 बजे आती है और एक-दो घंटे में ही सब ख़त्म हो जाता है। आपको चाहिए तो गल्ले पर ही आना पड़ेगा।

अनु: आज तो सब ख़रीद लिया, बाद में देखूँगी।

देबू चला गया लेकिन जब देबू ने 4 बजे शाम की बात कही तो मुझे खटका। अनु कई बार 4 बजे के आसपास यह बोलकर बाहर जाती है कि वो अपनी सहेली से मिलने जाती है। और हर बार 2-3 घंटे बाद वापस आती है।

मुझे विश्वास हो गया कि हो न हो ये रिस्पेक्टेड औरत उस समय देबू से ही चुदवाने जाती है। लेकिन चुदाई कहाँ करते हैं समझ नहीं आया।

खैर देबू के जाते ही अनु के ना-नहीं करते रहने पर भी मैंने बीवी को खूब चोदा। चुदाई के बाद हम दोनों ने नंगा ही नहाया। शावर खोलकर, शावर के नीचे बीवी को कुतिया बनाकर गाँड भी मारी। मैंने उसे कपड़ा नहीं पहनने दिया।

उसने नंगा ही खाना बनाया। खाना खाकर मैं क़रीब 2 बजे सोने जा रहा था तो किसी का फ़ोन आया। नॉर्मली वही फ़ोन उठाती थी। अनु ने ही बात की। उसने सिर्फ़ हाँ-हूँ ही कहा। रिसीवर रखने के बाद बोली—

अनु: मेरी एक कलीग के घर फ़ंक्शन है। तुम सो जाओ, मैं शाम 7 बजे के पहले आ जाऊँगी।

वो पहले भी अक्सर इस समय पर बाहर जाती थी। उस दिन भी मैंने उसे नहीं रोका। मैं सो गया। जब नींद खुली तो देखा कि 5.30 हो रहा है और मैं घर में अकेला हूँ। बाहर आकर देखा तो बीवी की एक्टिवा नहीं दिखाई दी।

मैं अनु और देबू के बारे में सोच ही रहा था कि पड़ोसन संगीता की आवाज़ सुनाई दी।

संगीता: अंकल, अनु आंटी घर में नहीं हैं। आइए हम आपको बढ़िया कॉफ़ी पिलाते हैं।

नज़र घुमाकर देखा। बग़ल के बरामदे पर संगीता अपने हसबैंड पुनीत और सास के साथ थी। उसकी सास, जिसने मेरा लौड़ा दबाया था, उसने भी इनवाइट किया। मैं अपने डोर की कुंडी लगाकर सिर्फ़ लुंगी और स्लीवलेस बनियान पहनकर बग़ल में चला गया।

संगीता की सास के बग़ल में बैठा और संगीता अंदर चली गई। कुछ ही देर बाद वो कॉफ़ी और स्नैक्स लेकर आई। हम खाते-पीते बातें कर रहे थे और अचानक संगीता ने कहा—

संगीता: पुनीत, अंकल से पूछो कि वे क्या-क्या एक्सरसाइज़ करते हैं। तुम भी अंकल जैसा रेगुलर एक्सरसाइज़ करोगे तो हमेशा हेल्दी और स्ट्रॉन्ग रहोगे।

संगीता हमारे बग़ल में दो साल से थी लेकिन मुझे याद नहीं कि कभी उसने मुझे एक्सरसाइज़ करते देखा हो। वैसे संगीता सही कह रही थी। मैं डेली एक घंटे के क़रीब एक्सरसाइज़ करता था।

लेकिन संगीता की बात ने मुझे ख़ुश कर दिया। उसकी बातों से साफ़ लगा कि वो मेरे फ़िगर को पसंद करती है। संगीता की बात सुनकर मैंने उसकी सास की ओर देखा। आंटी ने मुझे विंक करते हुए ज़ोर से आँख मारी।

पुनीत चुप रहा। लेकिन मैंने कहा—

मै: संगीता, तुम्हें चिंता करने की ज़रूरत नहीं। पुनीत ऐसे ही बहुत स्ट्रॉन्ग और हैंडसम है, समय आने पर वो भी अपने बॉडी का पूरा ध्यान रखेगा। वैसे मैं बचपन से ही खेल-कूद, एक्सरसाइज़ करता हूँ।

अँधेरा हो गया था। तभी एक्टिवा की आवाज़ सुनाई दी। देखा कि अनु ने घर के सामने स्कूटर पार्क की और सीधा हमारे पास आ गई। उसने कहा—

अनु: अच्छा हुआ संगीता, तुम सब एक साथ मिल गए, देखो तुम सब के लिए गरमा-गरम जलेबी और समोसा लाई हूँ।

उसने एक पैकेट टेबल पर रखा और खुद किचन जाकर प्लेट्स लेकर आई। अनु ने कहा—

अनु: आंटी, इस गरम समोसा के साथ आपके हाथ का स्पेशल चाय हो जाए तो मज़ा आ जाए।

आंटी अपने जगह से उठी और अनु के गालों को सहलाते हुए बोली—

आंटी: अनु, तुम तो ऐसे ही बहुत सुंदर हो लेकिन अभी तो गज़ब की ख़ूबसूरत लग रही हो। कितनी चमक रही हो!

मैंने भी ध्यान दिया। अनु सच में चमक रही थी। गोरे-गोरे गाल और भी गुलाबी लग रहे थे। संगीता ने कहा—

संगीता: हाँ माँ, मैं भी यही कहने वाली थी, सच भाभी, बहुत ही प्यारी लग रही हो। आदमी तो आदमी मच्छर भी आपको कितना पसंद करते हैं, देखो गुलाबी गाल पर कैसे निशान बन गए हैं!

हम सब समोसा-जलेबी खा रहे थे। मैंने फिर ध्यान से देखा। सच अनु के दोनों गालों पर ऐसा निशान था जैसे किसी ने बहुत देर तक बहुत चूसा हो। साली, अंडआउटली किसी से गाल चुसवाकर, चुदवाकर आ रही है। खैर, मैं चुप रहा।

अनु ने बताया कि अपनी एक कलीग के घर गई थी और वहाँ दो औरतें बहुत बदमाशी कर रही थीं। सब के गालों को चूस-चूसकर ऐसा निशान बना दिया है। दोनों बहुत बड़ी हरामज़ादी हैं।

साली, बेशरम होकर झूठ बोल रही थी, सब को बेवकूफ़ समझ रही थी। हम सब बातें कर रहे थे लेकिन संगीता का हसबैंड एकटक मेरी बीवी अनु को घूर रहा था।

अनु ने कहा—

अनु: संगीता, तुमने पुनीत को कितना डराकर रखा है। हम सब एक घंटे से बैठे हैं और बेचारा एक शब्द भी नहीं बोल रहा है।

संगीता मुस्कुराकर अपने हसबैंड के गालों को पिंच करते हुए बोली—

संगीता: नहीं आंटी, मैं आपके पुनीत को डराकर नहीं, बहुत प्यार से रखती हूँ। लेकिन हरामी हर समय सिर्फ़ आपकी ही बात करता रहता है।

अनु ने भी पुनीत के एक गाल को पिंच कर पूछा—

अनु: संगीता जैसी कमसिन, नशीली औरत के साथ रहते हुए कोई भी मर्द किसी दूसरी औरत को नहीं देखेगा। पुनीत शरमाने की बात नहीं। जब भी चाहो मेरे पास आकर मुझसे बात कर सकते हो। मैं कॉलेज में टीचर हूँ लेकिन यहाँ तुम सब की दोस्त हूँ।

साली, एक और जवान आदमी को पटाने, फुसलाने की बात कर रही थी। पुनीत ने कुछ जवाब नहीं दिया। कुछ देर और बैठने के बाद हम दोनों घर वापस आए। मैंने कुछ इन्क्वायरी नहीं की।

अनु मना करती रही लेकिन मैं खुद नंगा हुआ। अनु को भी नंगा कर खूब प्यार से चोदा और चुदाई के बाद भी उसे कपड़े पहनने नहीं दिए। अनु सो गई लेकिन मुझे नींद नहीं आई।

यह एन्श्योर कर कि अनु गहरी नींद में है मैंने मेन लाइट ऑन किया। अनु की नंगी जवानी को नीचे से ऊपर, ऊपर से नीचे घूरकर देखा।

मैं अनु को तबसे जानता हूँ जब वो सिर्फ़ 11-12 साल की थी। उसके घर रेगुलरली जाता-आता था। धीरे-धीरे हमारी दोस्ती हो गई। दोस्ती प्यार में बदल गई और जब वो पूरी जवान हुई हमने शादी कर दी।

शादी से पहले कई बार चुम्मा लिया था, कपड़ों के अंदर हाथ डालकर चुची और बुर को सहलाया था, मसला था। शादी से पहले ही उसने कई बार लौड़ा को चूसा था। लेकिन हमने पहली चुदाई अपनी सुहागरात को ही की।

सुंदर तो थी ही, बहुत कड़क माल थी। सुहागरात को बिल्कुल पेटी-पैक वर्जिन थी। पहली बार चोदने में हालत ख़राब हो गई थी। मैं खुद शादी से पहले कई सालों से चुदाई कर रहा था। एक से एक बढ़िया ख़ूबसूरत माल को चोदा था लेकिन सभी शादीशुदा मैरिड थीं। अनु मेरी ज़िंदगी की पहली वर्जिन माल थी।

मैंने अपनी बीवी की नंगी जवानी को कभी इतने ग़ौर से, घूर-घूरकर नहीं देखा था जितना उस रात देखा। सिर्फ़ गालों पर ही नहीं, दोनों चुचियों पर, थाईज़ पर, पेट पर भी चूसने के गहरे निशान थे, दाँतों और नाखूनों के भी कई दाग़ थे।

मेरी बीवी अपने किसी पसंद के आदमी से या आदमियों से चुदवाकर आई थी। मैंने उसका हैंडबैग खोलकर देखा। उसमें सिर्फ़ 330 रुपये थे। यानी, अनु ने चुदवाकर पैसा नहीं कमाया था। किसी अपने यार से ही चुदवाकर आई थी।

अनु के ख़ूबसूरत बॉडी पर टीथ बाइट्स, नेल्स के दाग़ और चूसने के निशानी को देखकर बहुत दुखी हो गया। तब तक मैं यही सोचता था कि मेरी घरवाली एक सती-सावित्री औरत है।

लेकिन ऐसा हो कैसे सकता था? जिस औरत का हसबैंड शादी से पहले और बाद में भी दूसरी औरतों को चोदता हो वो क्यों सिर्फ़ एक ही लौड़ा से चुदवाती रहेगी?

मैं भी सो गया। सुबह सब नॉर्मल था। मैंने अनु को यह फ़ील नहीं होने दिया कि मुझे उस पर डाउट हो गया है। वो रोज़ की तरह सुबह 7.30 को अपने कॉलेज चली गई। मैं घर में अकेला था और यह सोच रहा था कि आंटी को कैसे चोदूँ।

मैं टीवी देख रहा था कि मुझे संगीता की आवाज़ सुनाई दी। मैं मेन डोर खोलकर बाहर आया तो देखा कि संगीता अपनी एक्टिवा पर बैठ आंटी से बात कर रही है।

उसने मुझे देख प्रणाम करते हुए गुड मॉर्निंग कहा। मेरे पूछने पर उसने बताया कि उसने एक कंप्यूटर का कोर्स जॉइन किया है। 6 महीने का कोर्स है और उसे वीक में तीन दिन मंडे, वेडनेसडे और फ़्राइडे को 9.00 से 11.00 तक का, 2 घंटे क्लास करनी पड़ेगी।

संगीता ने उस समय टाइट जींस और लूज़ टॉप पहना था। टॉप के ऊपर से ब्रा कप्स और स्ट्रैप साफ़ दिख रहे थे। कप्स का आउटलाइन देख मुझे लगा कि उसकी चुचियाँ भी अनु जैसी गोल-गोल और 36 इंच साइज़ की हैं।

और उस समय पहली बार इस संगीता को चोदने के लिए लौड़ा टाइट हो गया। मैंने डिसाइड किया कि जैसे भी हो इस अपने से 20-21 साल छोटी औरत को चोदना ही है। अनु की स्लटनैस को भूल गया।

संगीता मुझे वेव करते हुए चली गई। मैंने आंटी की ओर देख लुंगी के ऊपर से लौड़ा को सहलाया। आंटी मुस्कुराकर घर के अंदर चली गई। तभी देबू अपना लॉरी लेकर अंदर आया और मुझे देखकर नमस्ते किया।

मैंने उसे बुलाया और कहा—

मै: देबू, तुमने अपनी अनु मैडम पर क्या जादू किया है? हमेशा तुम्हारे बारे में ही बोलती रहती है।

मेरी बात सुनकर वो शर्मा गया और लजाते हुए पिछले दिन जैसा बोला—

देबू: साहब, मेरी किस्मत बढ़िया है कि अनु मैडम मुझसे प्यार से बात करती हैं। साहब एक रिक्वेस्ट करूँ?

मैंने नोड किया और उसने रिक्वेस्ट किया कि अगले रविवार को हम दोनों उसके घर डिनर पर आएँ। मैंने उससे पूछा तो उसने बताया कि घर में माँ-बाप के अलावा एक बड़ा भाई और उसकी बीवी है, दो छोटी बहनें भी हैं।

मैंने कहा कि वो खुद अनु से कहे और अगर अनु तैयार हो गई तो हम लोग उसके घर आएँगे। देबू से बात कर मैं अंदर आया, और किचन साइड बाहर आया। आंटी बिल्कुल नंगी खड़ी थीं। मुझे देखते ही अंदर चली गईं। मैं भी अपने रूम में आया।

कपबोर्ड से 3000 रुपये निकाला और फिर किचन के बाहर आया। इधर-उधर देखा, कोई नज़र नहीं आया। मैं पार्टीशन वॉल को जंप कर संगीता के घर की ओर आया और उसकी किचन में घुस गया। वहाँ कोई नहीं था। ड्रॉइंग रूम में भी कोई नहीं था।

एक बेडरूम में घुसा तो देखा कि आंटी नंगी ही बेड पर अपने लेग्स नीचे कर बैठी हैं। मैंने भी अपना लुंगी और बनियान निकाला और नंगा उनके सामने खड़ा हो गया। मैंने 3000 उनके हाथ में दिए।

आंटी ने मेरा हाथ झटक दिया और बोलीं—

आंटी: मैं रंडी नहीं हूँ।

मैं आंटी के कंधों को दबाते हुए उन्हें बेड पर लिटाया और खुद उनके ऊपर आ गया।

आंटी के लिप्स को कई बार चूसा, गालों पर किस किया और बोला—

मै: आंटी, यह रुपया आपकी चुदाई के लिए नहीं है। मुझे आपकी बहू संगीता की नंगी जवानी देखनी है, उसकी प्यारी बुर में लौड़ा पेलना है।

आंटी ने हाथ आगे बढ़ाकर लौड़ा को पकड़ा और बुर के एंट्री होल पर दबाते हुए बोलीं—

आंटी: विनोद, पहले मुझे अपने लौड़ा का दम दिखाओ। अगर मेरी बुर की गर्मी ठंडी हो गई तो फिर संगीता को भी तुमसे चुदवा दूँगी। मारो धक्का।

आंटी की बात सुनकर मैं समझ गया कि इसके लिए चुदाई की मस्ती सिर्फ़ बुर में लौड़ा पेलना ही है। मुझे लगा कि इस औरत को ओरल मस्ती की कोई ख़बर नहीं है। मैंने चुचियों को दबोचे हुए गालों और लिप्स को चूमा और बोला—

मै: आंटी, बुर की गर्मी तो ठंडा करूँगा। पर पहले मुझे अपनी मस्त जवानी का टेस्ट लेने दो, कल रात दोनों ख़ूबसूरत रंडियाँ बैठी थीं। लेकिन मेरा लौड़ा सिर्फ़ तुम्हें ही प्यार करना चाहता था। रात में अनु को दो बार चोदा और दोनों बार यही सोचकर चोदा कि अनु को नहीं आंटी को ही चोद रहा हूँ।

मैं उनके बॉडी पर नीचे फिसलने लगा। कुछ देर दोनों चुचियों को चूसा। जैसा अनु की चुचियों पर देखा था वैसा ही दाग़ आंटी की चुचियों पर भी हो गया। फिर पेट और बेली बटन को चूसते-चाटते हुए बुर की घुंडी/क्लिट को ज़ोर से चूसा। आंटी उछल पड़ीं—

आंटी: उफ़्फ़ बेटा क्या किया, बहुत मज़ा आया, फिर से करो।

उसके बाद क़रीब 20 मिनट तक बुर को खूब चूसा, चाटा, टंग को बुर के अंदर घुसाया, बुर की पत्तियों/कंट लिप्स को खूब चबाया। आंटी छटपटा रही थीं। फिर कुछ देर एक साथ पाँचों फ़िंगर्स बुर के अंदर घुसाकर 5-7 मिनट खूब तेज़ी से अंदर-बाहर किया। उसके बाद लौड़ा बुर के अंदर पेला।

आंटी ज़ोर-ज़ोर से मोन करते हुए खूब मस्ती से चुदवाने लगीं। कभी मुझे अपनी बाँहों में टाइटली बाँधती थीं तो कभी अपने मोटे-मोटे जाँघों को मेरे ऊपर कसाती थीं। आंटी से पहले भी तीन 60 साल से बड़ी उम्र की औरतों को चोद चुका था, कई बार चोदा था।

लेकिन इस आंटी का फ़िगर सबसे बढ़िया था। पहले वाली तीनों सुंदर तो थीं लेकिन उनका बॉडी ऐसा भरा-पूरा नहीं था जैसा उस आंटी का था। 49-45 साल से चुदी हुई बुर में भी मेरा लौड़ा पूरा टाइट होकर अंदर-बाहर हो रहा था।

और अचानक हाँफते हुए आंटी बोलीं—

आंटी: वाह बेटा, तुमने मस्त कर दिया, मेरा ये बॉडी, मेरी बुर तुम्हारा है ही संगीता भी तुमसे बहुत प्यार से चुदवाएगी। लेकिन थोड़ा अपनी घरवाली से कहो कि मेरे बेटे पुनीत का दिल बहलाए। पुनीत अनु को बहुत पसंद करता है।

आंटी झड़ गई थीं, ढीली हो गई थीं फिर भी लौड़ा को बुर के अंदर-बाहर करते हुए मैं बोला—

मै: आंटी, पुनीत यदि मेरी घरवाली को चोदना चाहता है तो मुझसे पूछने की कोई ज़रूरत नहीं। आप भी औरत हैं और आपको मालूम है कि हर उम्र की औरत को जवान आदमियों से दोस्ती करना, बात करना बढ़िया लगता है।

और कल रात आपने देखा ही कि अनु ने पुनीत से क्या कहा। इस वीक मेरा आफ्टरनून शिफ्ट है। डेढ़ बजे जाऊँगा और साढ़े दस बजे रात को आऊँगा। उस समय अनु घर में अकेली रहेगी। पुनीत को बोलिए कि शर्म छोड़कर अनु से बात करे, उसे पटाकर चोदे।

फिर हम दोनों एक ही बेड पर एक-दूसरे की घरवाली को चोदेंगे। आपका बेटा मेरी घरवाली को कब चोदेगा मालूम नहीं। लेकिन मुझे कल ही संगीता की जवानी से खेलना है, उसे चोदना है। आप उसको भी अपने जैसा बाहर में नंगा होकर बाथ लेने बोलिए, बाक़ी सब मैं खुद कर लूँगा।

और तब आंटी ने वो बात कही जो मैं नहीं सुनना चाहता था। आंटी ने मुझे धक्का मारते हुए अपने ऊपर से उतारते हुए कहा—

आंटी: बेटा, बुरा मत मानना, मैंने कल नहीं कहा। लेकिन कल शाम अनु को देखकर लगा कि वो ज़रूर किसी से चुदवाकर आई है। गालों पर जो निशान हैं वो किसी मच्छर के काटने से नहीं किसी मर्द ने गालों को खूब चूसा है, उसके निशान हैं। पता करो कि किस से चुदवाती है?

मेरे ही जैसा आंटी को भी डाउट था कि पिछली शाम मेरी घरवाली किसी से खूब चुदवाकर आई थी।

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