मम्मी को दादा जी से चुदवाया – 2

Mummy aur dada ji ki chudai story:- पिछले पार्ट मे आपने पढ़ कि मैंने मम्मी की कपड़े बदलते हुए नंगी फोटो ली और बाथरूम मे कैमरा छुपाके मम्मी की चूत मे उंगली करते हुए विडिओ बना ली। मुझे लगा की मम्मी पापा के बिना सेक्स के लिए प्यासी है। मेरे दादाजी भी पार्ट मे औरतों को आते जाते घूरते थे तो मैंने सोच क्यूँ ना दादाजी को मम्मी की फोटो दिखाई जाए। फिर मैंने दादाजी को ट्रिक से मम्मी की नंगी फोटो दिखा दी और दादाजी का रिएक्शन देखने लगा। दादाजी मम्मी की नंगी फोटो देखकर बहुत इक्साइटिड हो गए और अब वो हर टाइम मम्मी की गांड और बूब्स को ही घूर रहे थे। फिर मैंने दादाजी को मम्मी का विडिओ भी दिखा दिया। अब पढिए ये hindi sex story आगे…

पिछला पार्ट यहाँ पढ़ें ==> मम्मी को दादा जी से चुदवाया – 1

Kapiva Shilajit Gold Resin
Kapiva Shilajit Gold Resin
Kapiva Shilajit Gold Resin
Kapiva Shilajit Gold Resin

Mummy aur dada ji ki chudai story

मैं- तो दादा जी आप मम्मी की गर्मी आपने लंड से निकाल दो। उन्हें भी मज़ा आ जायेगा और आपको भी मज़ा आ जायेगा।

दादा जी – तेरा दिमाग ख़राब हो गया है क्या? वह मेरी बहु है। तेरी माँ है वह! तू ऐसी बात कैसे बोल सकता है।

मैंने मम्मी की वीडियो फिर चला दी और उसे दादा जी को दिखने लगा।

मैं – ये देखो दादा जी कैसे अपनी चूत रगड़ रही है। अगर मम्मी का चक्कर बाहर किसी से शुरू हो गया तो घर की कितनी बदनामी होगी और अगर आप उनकी चूत को शांत कर देते है तो आप तो घर के ही है। मम्मी को एक घर का लंड मिल जायेगा जिससे वह जब चाहे अपनी गर्मी निकाल सकती है।

दादा जी – मगर क्या इसके लिए बहु मान जाएगी?

दादा जी की ये बात सुनके मैं खुश हो गया।

मैं – थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी दादा जी, क्युकी जरुरत तो मम्मी को भी है। पापा सिर्फ 2 दिन के लिए आते है और 2 दिन में ज्यादा चुदाई नहीं करते होंगे। मगर आप घर में हो कभी भी चोद लेना।

दादा जी – बेटा मुझे तो अभी भी यकीन नहीं हो रहा है की तू अपनी माँ को आपने दादा से चुदवाना चाहता है।

मैं – दादा जी मैं तो सिर्फ आप दोनों को खुश देखना चाहता हूँ और वैसे भी घर की औरत की प्यास घर के मर्द ही शांत करते है।

दादा जी – बेटा ये बात सही कही, जब घर के मर्द है, तो औरते बाहर क्यों जाये। वैसे तूने सोचा है ये सब कैसे करेगा?

मैं – है दादा जी सोचा है, बस आप डरना मत।

दादा जी – बेटा मुझे डर तो लग रहा है, कही बहु ने तेरे पापा को कह दिया तो क्या होगा?

मैं – और अगर वह आपसे चुदवाने आ जाये, तो सोचो आपका क्या हाल होगा?

दादा जी – तब तो मज़ा ही आ जायेगा बेटा, तेरी मम्मी की सारी गर्मी निकाल दूंगा, उसकी ना ना  करवा दूंगा।

मैं – वैसे दादा जी आपको मम्मी की सबसे ज्यादा कोनसी चीज पसंद है। मुझे तो उनकी नाभि बहुत पसंद है और उनकी बड़ी बड़ी गांड।

दादा – वाह बेटा तू बिलकुल मुझपे गया है। मुझे भी तेरी मम्मी की गांड और उसकी नाभि पसंद है। कई बार जब उसकी साड़ी साइड हो जाती है, तब मुझे उसकी नाभि दिखाई देती है।

मैं – दादा जी आपका लंड तो बातो से ही खड़ा हो गया है, देखो कैसे उछल रहा है। अब घर चलते है।

दादा जी – हाँ बेटा ये अभी भी रात को बहुत परेशान करता है। दिन में तो मैं इसका इलाज कर लेता हु।

मैं – दिन में कैसे इलाज करते है दादा जी।

दादा जी – बेटा तेरा दादा इतना भी सीधा नहीं है, मैंने एक रंडी देख रखी है, जो मेरी गर्मी निकाल देती है।

मैं – दादा जी क्या वह मम्मी जैसे जिस्म वाली है?

दादा जी – बेटा तेरी मम्मी जैसे कोई नहीं हो सकती है। बस वह मेरा काम चला देती है, मगर रात बहुत मुश्किल से निकलती है।

मैं – दादा जी अब चिंता मत करो, मम्मी सुबह शाम आपके लंड की गर्मी निकाल दिया करेंगी।

मै और दादा जी हसने लगे और फिर हम घर आ गए। घर आते हुए दादा जी सबके लिए गोल गप्पे लेके आये। फिर घर आके मैं मम्मी और दादा जी गोल गप्पे खाने लगे। मम्मी हमारे सामने बैठकर गोल गप्पे खा रही थी और मेरी और दादा जी नज़र उनके पेट और दूध पर थी। मैं दादा जी को इशारे कर रहा था और वह भी अपनी जीभ आपने होंठों पर फिरा रहे थे। फिर मम्मी किचन में चली गयी और दादा जी भी अपनी प्लेट रखने किचन में गए। मैंने उन्हें पहले ही समझा दिया था की उन्हें क्या करना है। दादा जी बिलकुल चुप चाप गए थे, मम्मी को पता ही नहीं चला।

वह सिंक के पास खड़ी थी और तभी दादा जी ने मम्मी की कमर को पकड़ लिया। मम्मी की नंगी कमर पर दादा जी के दोनों हाथ थे।

दादा जी – बहु जरा साइड हो जाना, मैं प्लेट रख दू।

मम्मी दादा जी के छूने से घबरा गयी थी, क्युकी आज से पहले दादा जी ने उन्हें कभी ऐसे नहीं छुआ था। मै वही बाहर खड़ा सब देख रहा था।

दादा जी – माफ़ करना बहु तुम्हे बुरा तो नहीं लगा? मैंने तुम्हारी कमर को ऐसे पकड़ लिया।

मम्मी – नहीं पापा जी कोई बात नहीं! आपको और कुछ चाहिए था क्या?

दादा जी – नहीं बहु बस तुम अपने काम करो, खाना 8 बजे तक दे देना।

दादा जी किचन के बाहर आ गए और फिर हम दोनों उनके कमरे में जाके बैठ गए।

मैं – कैसा लगा दादा जी मम्मी की कमर को पकड़ के?

दादा जी – पूछ मत बेटा कितना मज़ा आया, जब मैंने तेरी मम्मी की कमर को पकड़ा था, एक दम माखन जैसी है! काश मैं उसे चूम पाता।

मैं – सबर करो दादा जी आपको पूरा माखन चटवाऊंगा। जी भर के चाट लेना।

दादा जी – बेटा इतने सालो में मेरी कभी हिम्मत नहीं हुई। मगर आज पहली बार बहु को छू के अच्छा लगा।

मैं – वैसे दादा जी आपके ज़माने में भी तो गन्दी वाली किताबे आती थी। आपने भी तो पढ़ी होगी।

दादा जी – हाँ बेटा मैं भी पढ़ता था और हाँ मैंने भी बहुत काण्ड किये है। कई औरतो को चोदा है, जिसमें से कई औरते हमारे घर की थी।

मैं – वाह दादा जी आप तो छुपे रुस्तम निकले।

दादा जी – हाँ मगर मेरा पोता तो मुझसे 10 कदम आगे है। अपनी माँ और मेरे लिए इतना कुछ कर रहा है।

मैं – दादा जी अभी तो खेल शुरू हुआ है, आगे तो आपने मम्मी को नंगा ही रखना है और अब मैं अपने दादा जी और मम्मी की चुदाई कहानी पढ़ूँगा।

दादा जी – बेटा जब से तूने ये बात कही है, तब से मेरा लंड बैठा ही नहीं है।

मैं – वही तो चाहिए मम्मी को भी दादा जी। उनकी गांड पर अपना लंड रगड़ देना बस।

रात के 8 बजे मम्मी दादा जी और मेरे लिए खाना लेके आयी। मम्मी जब झुकी तो दादा जी ने स्माइल किया और मम्मी ने भी स्माइल किया।

मैं – क्या हुआ मम्मी आप और दादा जी हंस क्यों रहे है?

मम्मी मेरी बात सुनके सकपका गयी, मगर दादा जी बोल पड़े।

दादा जी – अरे कुछ नहीं बेटा कभी कभी कुछ बात याद आ जाती है। इसीलिए तेरी माँ और मैं हंस रहे है।

मैं – अच्छा आप दोनों को एक ही बात याद आयी।

मम्मी – ज्यादा बाते मत कर चुप चाप खाना खा।

दादा जी – अरे बहु बच्चा है उसे डाँटो मत! क्या हुआ न बेटा अभी जब मैं किचन में गया था, तब वहाँ एक कीड़ा घूम रहा था और तेरी मम्मी चीख पड़ी। इसीलिए हम दोनों हंस रहे है।

मैंने मम्मी की तरफ देखा, तो उन्होंने एक राहत की सांस ली। मम्मी को लगा होगा, दादा जी मुझे ये तो नहीं बता रहे है की उन्होंने कैसे उनकी कमर को पकड़ लिया था।

मैं – अच्छा ये बात थी दादा जी! मम्मी भी बड़ी डरपोक है, कीड़े से डर जाती है।

मै और दादा जी खाना खाने लगे। मैंने जल्दी से खाना खा लिया और प्लेट रख के आ गया। फिर कुछ देर बाद दादा जी प्लेट रखने गए। आज से पहले दादा जी कभी भी प्लेट रखने नहीं गए थे।

मम्मी – अरे पापा जी मुझे आवाज दे देते, मैं लेने आ जाती।

दादा जी – अरे बहु तुम इतना काम तो करती हो, तुम्हे भी तो आराम चाहिए होता है। वैसे मुझे माफ़ करना, वहाँ मन्नू के सामने मेरी हंसी निकल गयी थी।

मम्मी – पापा जी हंसी तो मेरी भी निकल गयी थी, मगर फिर मैं डर गयी, जब आप उसे बताने लगे। मगर जब आपने बात बदल दी तो मेरी जान में जान आयी।

दादा जी – बहु मैं जानता हूँ कोनसी बात किसको कहनी है, ये बात कोई कहने वाली थोड़ी है।

मम्मी – ठीक कहा आपने पापा जी। आप, चलिए मैं थोड़ी देर में दूध लेके आती हूँ।

मम्मी बर्तन धोने लग गयी और दादा जी फिर से किचन में चुप चाप गए और मम्मी के बिलकुल पीछे पहुंच के उनकी गांड पर अपना लंड लगा दिया। मम्मी एक दम से उछल पड़ी और तुरंत पीछे मुड़ गयी।

मम्मी – आपने तो मुझे डरा ही दिया था पापा जी! कुछ चाहिए था क्या?

दादा जी – हाँ बहु वह गिलास लेने आया था। मैंने सोचा मैं खुद ले लेता हूँ मगर तुम तो मुझे देखकर ही डर गयी।

मैंने देखा मम्मी की नज़र दादा जी के लंड पर पड़ चुकी थी। यानी अब वह भी समझ चुकी थी की बुड्ढे को जवानी चढ़ी है। फिर दादा जी बाहर आ गए और सीधा कमरे में आ गए।

मैं – मम्मी को डरा दिया आपने तो दादा जी। जानते है वह आपके लंड की तरफ देख रही थी।

दादा जी – सच में वह मेरे लंड की तरफ देख रही थी? यानी वह भी समझ गयी होगी की मैं क्या कर रहा हु।

मैं – ये तो अच्छी बात है दादा जी, इससे तो जल्दी ही आपको उनकी चूत मिल जाएगी।

फिर मम्मी दादा जी के लिए दूध लेके आ गयी और फिर मैं और मम्मी कमरे में आ गए और मम्मी पापा से बाते करने लगी। कुछ देर बात करने के बाद वह मेरे साथ लेट गयी। मगर आज उनकी आँखों में नींद नहीं थी। वह ऊपर देख रही थी और कुछ सोच रही थी। यानी दादा के लंड का असर उनके दिमाग तक पहुंच गया था।

मैं – क्या हुआ मम्मी आप परेशान लग रही हो?

मम्मी – नहीं बेटा बस ऐसे ही कुछ सोच रही थी, तुम सो जाओ! कल कॉलेज जाना है या नहीं।

मैं – नहीं मम्मी बस कॉलेज नहीं जाना है।

फिर हम दोनों सो गए। 2 से 3 दिन दादा जी ने सिर्फ मम्मी को टच किया और मम्मी ने भी कुछ नहीं कहा। यानी अब वह भी हलके हलके इस सब का मज़ा ले रही थी। मगर फिर मैंने एक रात को अपना काम कर दिया था। सुबह मम्मी सबसे पहले उठी और फिर फ्रेश होकर दादा जी को चाय देने गयी। फिर जब दादा जी फ्रेश होने चले गए। तब मम्मी उनके कमरे की सफाई करने लगी। जब मम्मी दादा जी का बिस्तर ठीक करने लगी और जैसे ही उन्होंने तकिया हटाई, तो उनकी आँखे खुली की खुली रह गयी।

तकिया के नीचे मम्मी की काली पैंटी थी, जिसे मैंने मुठ मारके रखा था। मम्मी ने पैंटी उठायी और उसे देखने लगी। मम्मी ने पैंटी के अंदर भी देखा और वह उसे बड़े धयान से देख रही थी। मुझे लग रहा था, जैसे अब मम्मी की चूत पर भी चीटिया रेंगने लगी थी। फिर मम्मी ने पैंटी को वही रख दिया और जल्दी से बाहर निकल गयी। दादा जी के फ्रेश होने के बाद जब मम्मी दुबारा चाय लेके आयी, तब मम्मी दादा जी को घूर रही थी। दादा जी ने भी अपनी नज़र नीचे नहीं की वह भी मम्मी को ही देख रहे थे। मम्मी के जाते ही दादा जी बोले।

दादा जी – बेटा आज तेरी मम्मी मुझे कुछ ज्यादा ही घूर रही है, कुछ गड़बड़ तो नहीं हो गयी।

मैं – अब आपने इतनी बड़ी हरकत जो की है दादा जी।

दादा जी – मैंने क्या कर दिया बेटा?

मैं – जरा अपनी तकिया तो हटा के देखो।

दादा जी ने जैसे ही तकिया हटाई, तो उनकी भी गांड फट गयी।

दादा जी – ये यहाँ कहा से आयी बेटा? मैं तो नहीं लेके आया।

मैं – दादा जी मैंने रात को रख दी थी, ताकि मम्मी भी जान ले की आप उनके लिए पागल हो रहे है। कल रात को वह कुछ सोच रही थी, शायद आपके बारे में ही सोच रही हो।

दादा जी – बेटा थोड़ा ध्यान से मुझे डर लग रहा है।

मैं – दादा जी ये टाइम डरने का नहीं आगे बढ़ने का है। क्या आप नहीं चाहते है की मम्मी भी आपके साथ इसी बिस्तर पर नंगी सोये।

दादा जी – बेटा तुझे जो करना है कर। मगर मुझे बता दिया कर।

मैं – ठीक है दादा जी आगे से बता के करूँगा। वैसे अब आपको ये पैंटी मम्मी को देनी है।

दादा जी – बेटा मैं तेरी मम्मी को पैंटी दूंगा, तो वह पूछेगी नहीं की मुझे कहाँ से मिली?

मैं – दादा जी वह जानती है, की ये पैंटी आप अपने लंड पर रगड़ रहे थे, इसीलिए वह बस ले लेंगी। और ये काम दोपहर में करना जब वह कमरे में आराम कर रही हो, क्युकी वह दोपहर को मैक्सी पहन लेती है।

दोपहर का खाना खाने के बाद मैं दादा जी के साथ था और मम्मी आज दादा जी को ही घूर रही थी। फिर दोपहर में दादा जी मम्मी के पास गए और उन्होंने उनके कमरे का दरवाजा हलके से खोल दिया। मम्मी बेड पर लेटी हुई थी और दादा जी को देखते ही वह खड़ी हो गयी। दादा जी पहले कभी ऐसे कमरे में नहीं गए थे। मम्मी जल्दी से अपना सर ढकने के लिए कपडा देखने लगी। फिर उन्होंने टॉवल को सर पर डाल लिया। मगर तब तक दादा जी उन्हें पूरा देख चुके थे और मम्मी के बड़े बड़े दूध मैक्सी में पुरे कसे हुए दिख रहे थे। दादा जी का लंड खड़ा हो चुका था।

दादा जी – माफ़ करना बहु मैं ऐसे आ गया, मुझे नहीं पता था तुम कमरे में ऐसे रहती हो।

मम्मी – कोई बात नहीं पापा जी! कुछ काम था क्या आपको?

दादा जी ने हाथ बढ़ाके मम्मी की पैंटी दिखा दी और मम्मी ये देखकर शर्म से नीचे देखने लगी।

दादा जी – बहु ये तुम्हारी कच्छी वहाँ बाहर गिरी पड़ी थी, तो मैंने सोचा तुम्हे दे देता हु।

मम्मी ने तुरंत दादा जी के हाथ से पैंटी ले ली और वह नीचे देखने लगी। दादा जी का लंड पूरा खड़ा हो चुका था और मम्मी भी उसे ही देख रही थी। फिर दादा जी बाहर आ गए और वह अपने कमरे में जाके लेट गए।

मैं – कैसा नज़ारा था दादा जी?

दादा जी – पूछ मत बेटा! अभी तक तेरी मम्मी के वह कसे हुए दूध दिखाई दे रहे है।

मैं – जल्दी ही वह आपको आपने दूध भी पिला देंगी, दादा जी।

दादा जी – बेटा क्या तेरी मम्मी कमरे के अंदर ही मैक्सी पहन के रहती है?

मैं – हाँ दादा जी वह कमरे के अंदर ही मैक्सी पहनती है, बाहर आपकी वजह से नहीं पहनती है। मगर आप चाहो तो उनसे यही बात करो और बाहर भी मैक्सी पहनने को कह दो।

दादा जी – हाँ बेटा मैं भी यही सोच रहा था की वह भी खुल के घूमे। हमेशा मेरे सामने पल्लू कर लेती है।

मैं – अरे दादा जी बहुत ही जल्द ये पल्लू भी नहीं रहेगा और न ही कपडे रहेंगे। रोज आपका लंड चूसने आएगी।

दादा जी – बेटा जब भी तू ऐसी बाते करता है, तो मेरा लंड पागल हो जाता है। बस एक बार तेरी मम्मी मौका दे दे, तब उसे दिखाऊंगा की मैं आपने बेटे से भी आगे हु।

मैं – मैं जानता हूं दादा जी, तभी आप रोज रात को शिलाजीत खाते हो।

दादा जी – हा बेटा इसीलिए मेरा लंड अभी भी जवान है।

मैं – वैसे क्या आपके पास दादी जी का कोई हार या गहना पड़ा है।

दादा जी – हाँ तेरी दादी के कुछ कपडे और गहने पड़े है, मगर उनसे तू क्या करेगा?

मैं – मैं नहीं आप करोगे।

मैंने दादा जी को सब समझा दिया, फिर शाम को मैं अपने स्टोर रूम में चला गया, जिसे मैंने स्टडी रूम बनाया हुआ है। फिर शाम को मम्मी चाय देने गयी और मैं भी दादा जी कमरे के पास पहुँच गया और उनके कमरे के बाहर की खिड़की से अंदर देखने लगा। मम्मी दादा जी को चाय दे रही थी और जैसे ही वह जाने के लिए मुड़ी दादा जी ने मम्मी का हाथ पकड़ लिया।

आगे क्या हुआ पता चलेगा अगले पार्ट मे …

Next Part ==> मम्मी को दादा जी से चुदवाया – 3

Kapiva Shilajit Gold Resin
Kapiva Shilajit Gold Resin
Kapiva Shilajit Gold Resin
Kapiva Shilajit Gold Resin

More Stories

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *