बड़ी दीदी को पटा के चोदा 5

Didi ke sath sex krne ki baat ki kahani:- हाय फ्रेंड्स, मैं हूँ रॉनी। पिछली स्टोरी में मैंने बताया, कि कैसे मैंने दीदी को ब्लोज़ॉब और चूत खिलाने की आदत डाल दी और इसके साथ दीदी ने खुद कैसे मम्मी से पूरे घर में नंगे रहने की परमिशन ले ली। चलिए आगे बताता हूँ।

मम्मी को मनाने के बाद दीदी पूरे घर में नंगी रहने लगी। सुबह उठकर नाश्ता करना, झाड़ू लगाना, नहाकर निकलना, लंच करना, टीवी देखना, डिनर करना और सोने जाना, सारा काम नंगी ही करती थी। और सबसे बड़ी बात मम्मी को भी कोई प्रॉब्लम नहीं थी।

पिछला पार्ट यहाँ पढ़ें ==> बड़ी दीदी को पटा के चोदा 4

Didi ke sath sex krne ki baat ki hindi kahani

मैं (दीदी से): आपका तो हो गया, अब मेरा सोचो। मेरे लिए कैसे मनाओगी? तुम्हारा तो ब्रा पैंटी का इरिटेशन का बहाना था, लेकिन मेरे लिए क्या बोलोगी?

दीदी: अरे भाई रिलैक्स, प्लान रेडी है और तेरे लिए और आसान है। देख मैंने मम्मी को बिना कपड़ों के रहने का रीज़न ये बताया है, कि आराम लगता है और वो मान गई हैं। तो तेरे लिए फिर से बोलने की ज़रूरत नहीं है। बोलूँगी तुझे जलन हो रही है और तू भी फ्री रहना चाहता है। पक्का मान जाएँगी।

शाम को वो मम्मी से बोली: मम्मी हम भाई को भी नंगा रहने दे सकते हैं?

मम्मी: क्यों?

दीदी: वो बोला, कि उसको भी रहना है।

मम्मी घबरा गईं: देखा मैंने कहा था ना वो देखेगा। अब वो भी आगे बढ़ने लगा है।

दीदी: कहाँ आगे बढ़ा? थोड़ी मुझे टच करने की बात कर रहा है। बस मेरी तरह रहना चाहता है। उसको भी गर्मी लगती होगी और मुझे पता था, कि मुझे देखकर उसका भी मन करेगा। क्योंकि सच में कपड़ों में बंधा-बंधा सा लगता है और दूसरी बात ये है, कि उसको ये लग रहा है, कि तुम सिर्फ़ मुझे प्यार करती हो। इसलिए सिर्फ़ मुझे ही सब कुछ करने देती हो।

मम्मी: ऐसा बिल्कुल नहीं है।

दीदी: ऐसा नहीं है, तो उसको भी मेरी तरह रहने दो। तब उसे लगेगा, कि दोनों को बराबरी से देखती हो।

मम्मी ने बहुत सोचा और स्माइल करते हुए बोलीं-

मम्मी: ठीक है, उसको भी बोल दे।

दीदी: मैं उसको आपके पास भेजती हूँ, तुम बोल देना।

ये बोलके दीदी ने मेरे पास आकर सब बताया। मैं भी भोला सा बच्चा बनकर मम्मी के पास चला गया।

मम्मी: तुझे दीदी को देखके कुछ फील नहीं होता?

मैं: हाँ होता है। मुझे जलन होती है, कि वो कितने मज़े में रहती है। मुझे भी गर्मी लगती है, पर मैं क्यों नहीं कर सकता?

मम्मी हँसके बोलीं: किसने बोला है, कि नहीं कर सकते? तुमने कभी पूछा मेरे से? उसने पूछा, तो मैंने बोल दिया।

मैं: तो क्या मैं भी नंगा रह सकता हूँ, जब तुम बोलो?

मम्मी: बोलने से क्यों, तुम जब जैसे चाहो रह सकते हो। मुझसे पूछने की ज़रूरत नहीं है। चाहो तो दीदी की तरह सारा दिन घर में नंगे रह सकते हो। तुम्हारा घर है, कुछ भी करो।

हम दोनों ख़ुश होकर वापस जाने लगे, तो मम्मी ने हमें वापस बुलाया अपने पास। क़रीब जाते ही, मम्मी ने मेरा पैंट उतार दिया और स्माइल करते हुए बोलीं-

मम्मी: अबसे इसकी ज़रूरत नहीं है।

दीदी हँसने लगी और मैं भी स्माइल कर दिया। मम्मी के रूम से निकलकर लिविंग रूम में ही हम सोफा में ख़ुशी से 69 करने लगे। अब तो मम्मी के आने पर दीदी को टी-शर्ट नीचे करने का भी डर नहीं था। उस वक्त आ जातीं तो हम बस अलग बैठ जाते।

अगले दिन, पहली बार मैं रूम से बेफ़िक्र होकर नंगा निकला और नाश्ता करने बैठा। जहाँ दीदी और मम्मी पहले से ही बैठी थीं।

मम्मी: अब कैसा लग रहा है?

मैं: बहुत आराम लग रहा है, थैंक यू।

मम्मी: अच्छा तुझे सच में तेरी दीदी को नंगा देखके कुछ नहीं होता?

मैं: अरे मेरे लिए नंगा-पन आम बात हो गया है। इंग्लिश मूवीज़ में इतना दिखाते हैं, कि बोर ही हो गया हूँ देख-देखकर।

मम्मी: तेरा मतलब पॉर्न मूवीज़ में?

मम्मी की ये बात सुनकर, मैं शर्मा गया।

मम्मी: शर्माने की ज़रूरत नहीं है, सब इस उम्र में देखते हैं। लेकिन तेरे लिए ये सब आम होने के वजह से दीदी को हेल्प हुई।

मैं: मतलब?

मम्मी: उसको बहुत पहले से नंगा रहना था और तुझे फ़र्क़ नहीं पड़ता। इसलिए रिया को मैं नंगी रहने दे पाई और तुझे फ़र्क़ नहीं पड़ता, क्योंकि तुझे आदत हो गई है पॉर्न वीडियोज देखके। वरना कौन बहन अपने भाई के सामने ऐसे रहती है?

दीदी: सच में, मुझे लगता है सबको घर में ऐसे रहना चाहिए।

ये कहते ही, वो लेफ्ट हाथ से टेबल के नीचे से, मेरा लंड पकड़कर मुठ मारने लगी और बातें करती जा रही थी। मेरे पैर काँपने लगे, तो वो समझ गई, कि मैं झड़ने वाला हूँ।

दीदी ने बड़ी चालाकी से स्पून नीचे गिरा दिया और मम्मी की नज़र हटने पर एक ब्रेड लेकर नीचे चली गई। नीचे मेरा माल निकलते ही, उसने ब्रेड को लंड के सामने रख दिया और सारा माल ब्रेड पर गिरने दिया।

फिर वो ऊपर आ गई और ब्रेड खाने लगी। मम्मी को पता भी नहीं था, कि दीदी ब्रेड पर मेरा माल लगाकर खा रही थी। मैं मौका क्यों छोड़ता, मैंने भी एक ब्रेड उठाकर उसको दिखाया। वो समझ गई, कि मैं क्या चाहता हूँ और स्माइल करी।

मम्मी किचन में जा चुकी थीं। इसी मौके पर मैंने दीदी की चूत सहलाने लगा और थोड़ी देर बाद झड़ते ही, मैंने भी ब्रेड में उनका गरम नमकीन पानी लिया और दोनों ने मिलके वो दोनों ब्रेड खाया।

साथ ही मुझे एक और आइडिया आया। मम्मी जब वापस आईं, तो मैंने पूछा कि-

मैं: मम्मी तुमने कहा ना, कि पॉर्न देखना नॉर्मल है?

मम्मी: हाँ क्यों?

मैं: तो तुम्हें जब पता है, तो क्या मैं और दीदी देख सकते हैं?

मम्मी हँसने लगीं और बोलीं: बहन के साथ पॉर्न देखेगा? सुना रिया?

दीदी (मुस्कुराते हुए): मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है।

मैं: बोलो ना मम्मी।

मम्मी (थोड़ा सोचकर): अच्छा ठीक है, पर ज़्यादा ज़ोर की वॉल्यूम में मत चलाना, ताकि बाहर सुनाई न दे।

मैं ख़ुश होकर: ओके मम्मी।

मैंने थोड़ी देर रुककर फिर पूछा: मम्मी तुम्हारे सामने देख सकता हूँ?

मम्मी हँसने लगीं: भक, पागल कहीं का।

मैं: अरे पता तो है ही आपको, कि हम देख रहे हैं। तो चुपकर देखने का क्या मतलब है। प्लीज़ मम्मी प्लीज़।

मम्मी: अच्छा-अच्छा ठीक है। जो मर्ज़ी करो तुम लोग। बस मैं जब टीवी देख रही हूँ, तो डिस्टर्बेंस न हो मुझे।

ये बोलके मम्मी चली गईं।

दीदी: वाह बेटा! गज़ब गेम खेला है तुमने तो।

अब हम काफ़ी मज़ा लेने लगे। जब-तब कहीं भी मन करता, तो साथ बैठकर पॉर्न देखने लगते। मम्मी टीवी देख रही होतीं, तो हेडफ़ोन लगाकर देखते और जैसा कि मैंने कहा, कि अब दीदी का टी-शर्ट ऊपर-नीचे करने का झमेला नहीं था, क्योंकि वो नंगी ही तो रहती थी।

इसलिए मैं आराम से मम्मी के पीछे से, दीदी का बूब्स दबाता और निप्पल्स चूसता था और नीचे बैठकर चूत खाता था और उनका गरम पानी पीता था। मेरा भी लंड दीदी जब-तब मुँह में ले लेती थी।

मम्मी भी हमको ख़ुश देखकर ख़ुश थीं बहुत। वो भी नॉर्मली ही लेने लगीं सब कुछ। हम लोग हर जगह करने लगे और मम्मी के आने की आवाज़ आती, तो बस थोड़ा अलग होकर बैठ जाते।

दो हफ़्ते बाद, एक रात को बात करते हुए मैंने दीदी को पूछा-

मैं: दीदी मज़ा तो खूब आ रहा है, लेकिन मेन काम तो अभी भी बाकी है। कपड़े तक तो ठीक है, अब ये सब मम्मी के सामने कैसे करें? कुछ सोचिए। मुझे पता है, कि आप कुछ न कुछ निकाल ही लेंगी।

दीदी: टेंशन मत ले, मैंने ये भी सोच लिया है। आज रात बोलूँगी।

मैं: नहीं अभी नहीं।

दीदी: क्यों?

मैं: एक आख़िरी बात पूछनी थी आपसे। फिर सबके बारे में एक साथ मम्मी से बात कर लेना।

दीदी: क्या, बोलो।

मैं: सेक्स करोगी मेरे साथ?

दीदी शर्मा गईं और थोड़ा सोचने के बाद बोलीं-

दीदी: लेकिन……

मैं: भाई बहन है, इसलिए सोच में पड़ गईं? आपने ही तो बोला था, कि जो मैं बोलूँगा आप मानोगी।

दीदी: हाँ, लेकिन क्या ये सही होगा?

मैं: सही कारण दूँगा, तो मानोगी?

दीदी: हाँ सही लगा तो।

मैंने लैपटॉप खोला और एक्स-वीडियोज में ब्रदर एंड सिस्टर सेक्स वीडियोज सर्च करके खोलीं। खुलते ही मैंने नंबर्स दिखाया।

मैं: देखो दीदी, भाई बहन के 4 लाख से ऊपर वीडियोज हैं।

दीदी की आँखें फट गईं।

दीदी: बाप रे इतनी सारी वीडियोज?

मैं: इतनी सारी वीडियोज नहीं हैं। इतने सारे भाई बहन सेक्स करते हैं आज के टाइम पे। इसके अलावा भी पता नहीं कितने और हैं जो वीडियो नहीं डालते, जैसे हम लोग।

दीदी: वही तो, मुझे नहीं पता था, कि ये भी मुमकिन है।

मैं: अगर अब इतने सारे लोग करते हैं, तो पागल तो नहीं हो सकते ना? उनको सही लग रहा है और कोई प्रॉब्लम नहीं होती है, इसलिए कर रहे हैं। देखो दीदी कल को तुम बॉयफ्रेंड बनाओगी। पता नहीं कैसा होगा वो। कल को तुम्हें प्रेग्नेंट करके भाग गया तो? मेरे साथ करोगी, तो तुम्हें रोज़ और जब चाहे मज़ा मिलेगा और घर की बात घर में ही रहेगी।

दीदी: तुमने ठीक कहा और स्पेशली, कि घर का बात घर में रहेगी। देना मुझे वीडियोज, मैं देखूँगी।

दीदी ने लैपटॉप लिया, तो अचानक से फैमिली वाली वीडियोज पे मेरी नज़र पड़ी।

दीदी: फैमिली सेक्स?

मैं: जी हाँ, सिर्फ़ भाई-बहन ही नहीं, माँ-बेटा, बाप-बेटी, कज़िन्स सबके साथ कर सकते हैं। सेक्स करने के लिए सिर्फ़ लड़का और लड़की चाहिए, रिश्ता मैटर नहीं करता है। पर हाँ दोनों की मर्ज़ी होनी चाहिए।

मेरी बात सुनकर दीदी का मुँह खुला का खुला रह गया।

दीदी: दो मुझे, मैं देखूँगी।

वो वीडियोज देखने लगीं और पता नहीं कब मुझे नींद आ गई। रात 1 बजे मेरी नींद खुली, तो मैंने देखा, कि दीदी अभी भी वीडियो देख रही थीं।

मैं: सोई नहीं?

दीदी: अरे हाँ जाती हूँ। पता ही नहीं चला, कि रात हो गई है।

दीदी ने लैपटॉप बंद किया और मुझे बोला-

दीदी: भाई मैंने क़रीब 50 वीडियोज देखी हैं। पहले मुझे विश्वास नहीं हो रहा था, लेकिन फिर मुझे भी मज़ा आने लगा। गूगल पे भी देखा तो पाया, कि कई कंट्रीज़ में अलाउ्ड भी है इनसेस्ट।

मैं: कहा था ना सही है। इसलिए ही तो कर रहे हैं लोग।

दीदी: सच में यार, तुमने आँखें खोल दी मेरी। अब इतना कुछ देखने के बाद, मुझे भी बिल्कुल सही लगता है सब।

दीदी ने मुझे अचानक से सिर पे मारा।

दीदी: और फिरसे, तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बोला? अब तो लगता है, कि बूब्स और चूत से पहले तुम्हें मुझसे डायरेक्ट सेक्स के लिए पूछना था। फोरप्ले और नंगा होना अपने आप हो जाता।

मैं: अजीब लड़की हो यार।

मेरी बात सुनकर, दीदी ज़ोर से हँसने लगीं।

दीदी: ठीक है, अभी सो जाते हैं, रात हो गई है और हाँ, कल से हम सेक्स भी करेंगे।

मैं बहुत ख़ुश हो गया और सोने को मुड़ा, तो दीदी ने पूछा-

दीदी: कहाँ चला?

वो अपनी चूत की ओर इशारा करके बोलीं: ये कौन करेगा? तूने इतनी आदत डाल दी है, कि मेरा पानी निकले बिना और तेरा माल खाया बिना, मुझे नींद ही नहीं आती।

मैं भी मुस्कुराया और उठकर दीदी के सिर के पास घुटनों पर बैठ गया और लंड उनके मुँह में डाल दिया। वो मज़े से मेरा लंड चूसने लगीं। मैं झुककर उनके राइट बूब को चूसने लगा और लेफ्ट हाथ से उनके लेफ्ट बूब को दबाने लगा।

मैं राइट हाथ से उनकी चूत को रगड़ने लगा। 10 मिनट बाद वो झड़ गईं और मेरा भी माल दीदी के मुँह में निकल गया और वो उसे खा गईं। हम दोनों थककर सो गए।

अगले दिन हमने डिसाइड किया, कि झाड़ू करने के बाद जब दीदी फ्री होती हैं, तब हम सेक्स करेंगे। काम होते ही हम रूम में आए। हमने रिसर्च कर लिया था, कि पहली बार दर्द होगा। इसलिए ऑयल भी ले आए।

दीदी लेट गईं और मैं लंड पर और उनकी चूत की छेद में ऑयल लगाने लगा। दीदी उसी से गरम हो गई थीं। चूत से हाथ निकालते ही, जब मैं हाथ पोंछने वाला था, तभी दीदी ने मेरा हाथ लिया और अपनी चूत का रस चाट लिया।

इससे मैं भी गरम हो गया और दीदी के ऊपर चढ़ गया। मैंने लंड पहली बार चूत के ऊपर रखा था और इससे वो भी झटका लेने लगीं। मैं दीदी को स्मूच करने लगा और लंड चूत पर रगड़ने लगा।

दीदी मोन करने लगीं। फिर मैं दीदी के गले पे किस करने लगा, तो वो और पागल होने लगीं और गरम साँसें फेंकने लगीं। मम्मी कभी भी बुला सकती थीं, इसलिए टाइम न वेस्ट करके मैंने दीदी की टाँगों को फैलाया और लंड चूत में घुसाने लगा।

दीदी को दर्द कम मज़ा ज़्यादा आ रहा था। वो ज़ोर-ज़ोर से साँसें लेने लगीं। इसी का फ़ायदा उठाकर, मैं लंड घुसाता चला गया। जहाँ दर्द से आवाज़ करतीं, वहाँ थोड़ा रुक जाता। फिर वो इशारा करतीं तो और घुसाता।

ऐसे ही मैंने पूरा लंड दीदी की चूत में घुसा दिया और दीदी उछल पड़ीं। मैं थोड़ी देर रुककर दर्द कम होने का वेट करने लगा। फिर धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा।

जन्नत ही थी जन्नत दोस्तो, जब दीदी को फाइनली चोद रहा था। उसकी चूत और मेरा लंड गरम था। दीदी का दर्द कम होकर मज़ा बन गया और हर पुश के साथ वो सिसकी भरने लगीं और आआह आआह करने लगीं।

इससे मुझे भी जोश आने लगा। पहली बार था, इसलिए स्पीड बढ़ाई नहीं। धीरे और आराम से अंदर-बाहर कर रहा था। आधे घंटे तक मैंने दीदी को चोदा और वो क़रीब 4 बार झड़ चुकी थीं।

मैं भी अब झड़ने वाला ही था, तो धीरे-धीरे मैंने लंड बाहर निकालकर, सारा पानी दीदी के मुँह में डाल दिया और वो खा गईं। हम दोनों पसीने में थे और थके हुए भी थे।

दीदी ने मुझे गले लगा लिया और बोलीं-

दीदी: तूने आज मुझे अब तक का सबसे बड़ा मज़ा दिया है। आज के बाद मैं तेरे पे डाउट नहीं करूँगी कभी भी। तू जो बोलेगा मैं करूँगी।

मैं: अभी तो शुरुआत है, आगे बहुत मज़ा बाकी है।

दीदी: मैं बिल्कुल रेडी हूँ। तो तुमने इसके लिए मुझे मम्मी से बात करने पे रोका?

मैं: हाँ दीदी, मैं चाहता हूँ, कि हम मम्मी के सामने सेक्स भी करें।

दीदी: ये मुश्किल है, लेकिन ठीक है, मैं ज़रूर मनाऊँगी मम्मी को। क्योंकि अब तेरे से ज़्यादा मुझे सेक्स करना है और रोज़ करना है और दिन भर करना है।

शेर के मुँह में खून लग चुका था और मुझे पूरा यकीन था, कि दीदी मम्मी को फिरसे मना लेगीं। दीदी ने मम्मी को क्या बोला, वो बताऊँगा अगले पार्ट में।

More Stories

One Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *