भाभी ने दिलाई मम्मी की चूत 4

Bhabhi ne dilayi mummy ki chut hindi story:- मैं सुनीता हाजिर हूँ। आपके लिए इस सेक्सी स्टोरी का नेक्स्ट पार्ट लेकर। पढ़िए और मुझे कमेन्ट करना मत भूलना। और अगर आपने इस कहानी के पिछले पार्ट नहीं पढे है तो नीचे लिंक से पढ़ सकते है। मेरा हाथ मम्मी की झाँटों के बाल से लगता हुआ मम्मी की चूत पर लग गया। मेरी चारों उंगलियाँ मम्मी की फूली हुई चूत पर लग गईं। मम्मी की चूत एकदम गरम लग रही थी।

Part 3 ==> भाभी ने दिलाई मम्मी की चूत 3

Bhabhi ne dilayi mummy ki chut hindi sex story

मम्मी को इस बात का अहसास होते ही उन्होंने मेरा हाथ निकाल दिया।

मैं: सॉरी मम्मी, वो गलती से हाथ लग गया।

मगर मम्मी ने मुझे कुछ नहीं कहा। और मैं मम्मी की नाभि में उंगली करता रहा।

मम्मी: बेटा एक बात पूछूँ अगर बुरा न माने तो।

मैं: मम्मी आपका जो भी मन हो पूछ लो। मैं बुरा नहीं मानूँगा।

मम्मी: बेटा उस दिन के बाद से तूने अपनी भाभी के साथ कुछ किया तो नहीं है?

मैं: मम्मी मैंने आपकी कसम खाई है। और मैं कभी आपकी कसम नहीं तोड़ूँगा। मैंने लास्ट बार तभी उनकी चुदाई की थी। उसके बाद से मैंने उन्हें देखा भी नहीं है।

मेरे मुँह से ऐसा खुलके चुदाई सुनके मम्मी मुझे घूरके देखने लगीं। मगर उन्होंने कहा कुछ नहीं।

मम्मी: बहुत अच्छा किया बेटा। तूने ये सब बंद कर दिया। अगर तेरे भाई को पता चलता तो वो क्या सोचता कि उसका छोटा भाई उसकी बीवी के साथ बिस्तर गरम कर रहा है।

मैं: वैसे मम्मी इसमें गलती भाभी की थी। मैंने तो खुद को बहुत रोका था। मगर कब तक खुद को रोक सकता था।

मम्मी: इसका मतलब ये सब बहू ने शुरू किया था। मगर मुझे तो ऐसा कुछ नहीं लगा।

मैं: मम्मी वो आपके सामने सीधी बनती थीं। मगर अकेले में उनका रूप कुछ और ही था। और वो इस सब का दोष भाई को देती थीं।

मम्मी: तेरे भाई को इसका दोष देती थीं? क्या कहती थीं वो तेरे भाई के बारे में?

मैं: मम्मी मैं आपको बता रहा हूँ। मगर आप किसी से ये बात नहीं कहना। भाभी कहती थीं कि तुम्हारे भाई मुझे टाइम नहीं देते हैं। रात में आते हैं और खाना खाके सो जाते हैं। इसीलिए उन्होंने मेरे साथ चुदाई की।

मम्मी: बेटा तो तूने मुझे तभी क्यों नहीं बताया? बात यहाँ तक आती ही नहीं। तू मुझे बता देता और मैं सब सही कर देती।

मैं: कैसे बताता मम्मी? तब मैं आपसे ऐसी खुलके बातें नहीं करता था। अगर आप शुरू से मेरी दोस्त होतीं तो मैं आपको सब बता देता।

मम्मी: बेटा कोई भी माँ ऐसी बातें अपने बेटे से नहीं करती है। मगर अब तूने मुझे थोड़ा-थोड़ा बदल दिया है।

मैं: मम्मी आजकल तो माँ-बाप खुद अपने बेटे को सब बताते हैं ताकि उनका बेटा कहीं बहक न जाए। अगर मुझे पता होता तो मैं भाभी की चुदाई नहीं करता।

मम्मी: हाँ बेटा तुम सही कह रहे हो। मगर मैंने आज तक ऐसी बातें सिर्फ औरतों से और तेरे पापा से की हैं।

मैं: मगर मम्मी अब पापा नहीं हैं। और मैं और आप एक जैसे हैं। आप भी अकेले हो और मैं भी अकेला हूँ। हम दोनों एक-दूसरे से बात तो कर ही सकते हैं।

मम्मी: हाँ बेटा अब तो हमारे बीच काफी बातें हो जाती हैं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं अपने बेटे से ऐसे खुलके बातें करूँगी।

मैं: मम्मी मैं तो भाभी को धन्यवाद देता हूँ। अगर वो मुझसे अपनी चुदाई नहीं करवातीं तो मैं अपनी मम्मी के इतने करीब कभी नहीं आता।

मम्मी: हट शैतान कैसे बातें करता है। तेरी भाभी ने गलती की थी जो अपने देवर के साथ बिस्तर गरम कर रही थीं।

मैं: मम्मी मगर भाभी हमेशा यही कहती थीं कि मेरी वजह से उन्हें सुख मिल रहा है।

मम्मी: वो तो कहेंगी ही। मेरे दोनों बेटों का बिस्तर गरम कर रही थीं। बड़ा नहीं तो छोटा ही सही।

मैं: एक बात बताऊँ आपको अगर आप बुरा न मानो तो।

मम्मी: हाँ बता ना बेटा क्या बात है?

मैं: आप जानती हो भाभी आपसे बहुत जलती हैं।

मम्मी: वो मुझसे जलती हैं? मेरे पास ऐसा क्या है जिससे उसको जलन होती है?

मैं: मम्मी आपके पास तो वो है जिससे ज्यादातर लड़कियाँ आपसे जलने लगती हैं।

मम्मी: बेटा साफ-साफ बता ना किससे जलन होती है बहू को।

मैंने अपना हाथ मम्मी के दूध पर रख दिया। और हल्के से दूध दबा दिए। मम्मी ने मेरी आँखों में देखा। और मैंने कई बार उनके दूध दबा दिए।

मम्मी: ये तू अब क्या कर रहा है बेटा?

मैं: मम्मी भाभी को आपके ये बड़े-बड़े दूध से जलन होती है। क्योंकि उनके दूध आपकी तरह नहीं हैं।

मम्मी: बेटा सब औरतों के दूध का साइज अलग-अलग होता है।

मैं: मगर मम्मी भाभी कह रही थीं कि मम्मीजी ने तुझे बहुत दूध पिलाया है। इसीलिए उनके दूध बड़े-बड़े हैं। मम्मी क्या मैंने बहुत दूध पिया है आपका?

मम्मी: हाँ बेटा तूने मेरा दूध सबसे ज्यादा पिया है। पूरे 4 साल तक तू मेरे दूध पीता था। मेरा तो दूध निकलना भी बंद हो गया था। मगर फिर भी चूसता रहता था। बहुत मुश्किल से तेरा दूध चूसना बंद करवाया था।

मैं: मम्मी आपने तो बंद करवा दिया। मगर भाभी ने शुरू करवा दिया। जब आप नीचे बैठी होती थीं तब भाभी रोज मुझे अपना दूध पिलाती थीं।

मम्मी: हाँ बेटा अच्छा फायदा उठाया। मैं सोचती थी मेरी बहू चाय देने गई है। मगर वो तो अपना दूध पिलाने जाती थीं। और मेरा बेटा भी अपनी भाभी का दूध पीने के साथ उसकी…

मैं: अब मैं क्या करता मम्मी। जब भी भाभी मेरे सामने आती थीं उनके ब्लाउज के ऊपर का हुक खुला होता था। और भाभी के दूध बाहर निकल रहे होते थे। वो आपके जितने बड़े नहीं थे। मगर ठीक-ठाक थे।

मम्मी: मतलब बहू ने तुझे पूरी तरह से बहका दिया था। चल अब सोते हैं। आज बहुत बातें कर लीं।

आज मैंने मम्मी को पूरी तरह से गरम कर दिया था। और आज तो मेरा हाथ भी मम्मी की चूत पर लग गया था। मगर उन्होंने कुछ नहीं कहा।

आज मुझे इस मौके का फायदा उठाना था। मैंने थोड़ा इंतजार किया। और मम्मी जब गहरी नींद में चली गईं तब मैंने उनका पेटीकोट ऊपर कर दिया।

अब मम्मी की गाँड पीछे से बिल्कुल नंगी हो गई थी। मैंने अपना हाथ मम्मी की गाँड पर रख दिया। मम्मी की चिकनी गाँड सहलाने में बहुत मजा आ रहा था।

आज मेरी हिम्मत बहुत ज्यादा थी। क्योंकि मम्मी की तरफ से मुझे अब कोई डर नहीं था। मैंने हल्के-हल्के अपना हाथ मम्मी की चूत पर रख दिया।

मम्मी की चूत एकदम गरम आग की भट्ठी की तरह गरम थी। मैं कुछ देर तक सिर्फ मम्मी की चूत पर हाथ रखे रहा। फिर मैंने मम्मी की चूत के छेद पर उंगली लगाई।

मम्मी की चूत मुझे गीली मिली। इसका सीधा सा मतलब ये था कि मम्मी जाग रही हैं। मगर एक माँ-बेटे के बीच जो शर्म का पर्दा होता है वो उसे खुलके पार नहीं करना चाहती थीं।

मुझे मम्मी की ये बात अच्छी लगी। हम दोनों के बीच पर्दा भी रहे। और मैं अपनी मम्मी की गरम चूत को ठंडा भी कर दूँ।

मैंने अपनी बड़ी उंगली हल्के से मम्मी की चूत में डाल दी। मम्मी की चूत काफी खुली हुई थी। इसलिए उंगली जाने में कोई परेशानी नहीं हुई।

मैं हल्के से उंगली बाहर निकालता और उसे फिर से अंदर डाल देता। मम्मी वैसे ही लेटी हुई थीं। उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई थी। मैंने अपनी उंगली निकाल ली।

मेरी उंगली पर मम्मी की चूत का पानी लगा हुआ था। मैंने अपने लंड पर थूक लगाया। और उसे मम्मी की चूत पर रगड़ने लगा। मम्मी की चूत आग उगल रही थी।

मगर पता नहीं मम्मी कैसे सहन करके लेटी हुई थीं। मम्मी की मोटी गाँड की वजह से मैं सही से लंड नहीं रगड़ पा रहा था। इसलिए मैं थोड़ा तिरछा होकर लेट गया।

अब मम्मी वैसे ही लेटी हुई थीं। और मैं मम्मी की चूत पर लंड रगड़ रहा था। कुछ देर तक मैं लंड रगड़ता रहा। मगर फिर मैं उठके मम्मी की तरफ देखा।

मम्मी आँखें बंद किए लेटी थीं। मगर उनके हाथ ने चादर को जोर से पकड़ रखा था। यानी वो जाग रही थीं। बस मेरा सामना नहीं करना चाहती थीं।

मैंने फिर से मम्मी की चूत पर अपना लंड लगा दिया। मगर इस बार मैंने बहुत सारा थूक अपने लंड पर लगाया था। और फिर से उसे मम्मी की चूत पर लगा दिया।

कुछ देर मैं मम्मी की चूत पर लंड रगड़ता रहा। फिर मैंने हल्के से अपना लंड मम्मी की चूत में डाल दिया। मेरा लंड आसानी से अंदर चला गया। मेरे लंड का सुपड़ा मम्मी की चूत के अंदर था।

और मुझे मम्मी की चूत की गर्माहट मिलने लगी। इस पोज़ में मैं सही से धक्के नहीं लगा सकता था। इसलिए हल्के-हल्के बस अपना सुपड़ा अंदर-बाहर कर रहा था।

मम्मी वैसे ही लेटी हुई थीं। मगर मम्मी की गीली चूत मेरे लंड की दोस्त बन गई थी। मैंने मम्मी की गाँड पकड़ी। और हल्के-हल्के लंड अंदर डालने की कोशिश करने लगा।

मगर मम्मी ऐसी लेटी हुई थीं कि धक्के लग ही नहीं सकते थे। इसलिए मैं बस अपना सुपड़ा अंदर-बाहर कर रहा था। कुछ देर तक मैं ऐसा करता रहा।

और फिर जब मेरा पानी निकलने वाला था तभी मैंने लंड बाहर निकाल लिया। और सारा पानी मम्मी की गाँड पर निकाल दिया। आज कई महीनों के बाद मैंने अपना पानी निकाला था।

लंड एकदम हल्का-हल्का हो गया था। और मेरा ढेर सारा पानी मम्मी की गाँड पर लगा हुआ था। मैंने मम्मी के पेटीकोट से पानी पोंछ दिया। और अपना लंड अंडरवियर के छेद से निकाले हुए ही सो गया।

पानी निकलने के बाद बहुत अच्छी नींद आ गई। और मेरी आँख सुबह खुली। मैंने देखा मम्मी सो रही थीं। यानी अभी 6 नहीं बजा था।

मेरा लंड खड़ा था। और मैं ऐसी ही लेटा रहा। मैंने अपना हाथ मम्मी के दूध पर रख दिया। और मेरा लंड मम्मी की कमर पर लग रहा था।

6 बजे जब मम्मी उठीं तो उन्होंने मेरा हाथ अपने ऊपर से हटाया। और वो बाथरूम में चली गईं। जब वो नहाके आईं तो उन्होंने मेरे सामने कपड़े पहने।

मेरा लंड अभी भी बाहर था। फिर वो बाहर गईं और पूजा करके 7 बजे मुझे चाय देने आईं। मम्मी ने चाय बेड के साइड में रख दी।

और पहली बार मेरा लंड पकड़के उसे मेरे कच्छे में डाल दिया। आज भाभी तो थीं नहीं इसलिए वो मेरे पास ही बैठ गईं। मैंने और मम्मी ने चाय पी ली। चाय पीते हुए भी मम्मी मुझे ही घूर रही थीं।

फिर मम्मी काम में लग गईं। और मैं अपने काम करने लगा। मैं घर से बाहर निकल गया। और दोपहर को वापस आया। मम्मी लेटी हुई टीवी देख रही थीं।

मैं भी उनके पीछे लेट गया। और पीछे से बिल्कुल चिपक गया। मैंने अपना हाथ मम्मी की कमर पर रखा। और सीधा मम्मी की नाभि में ले गया।

नाभि में उंगली जाते ही मेरा लंड खड़ा हो गया। जिसे मैं साड़ी के ऊपर से मम्मी की गाँड में रगड़ रहा था।

मम्मी: बस शुरू हो गया तू। जब देखो मेरी नाभि में उंगली करता रहता है। न दिन देखता है न रात देखता है। बस उंगली कर देता है।

मैं: अब क्या करूँ मम्मी मुझे आपकी नाभि इतनी पसंद है। मेरा हाथ वहीं चला जाता है।

फिर मैं अपना काम करने लगा। और दोपहर को मम्मी ने मुझे आवाज लगाई। मैं तुरंत नीचे आ गया।

मम्मी बेड पर सीधी लेटी हुई थीं। और उन्होंने सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट पहना था। मम्मी का पेटीकोट काफी नीचे था। और उनकी गहरी नाभि देखकर मेरी जीभ ललचा रही थी।

मैं: मम्मी आज फिर से आपकी नाभि में शहद लगा दूँ?

मैंने होंठों पर जीभ फिराते हुए कहा।

मम्मी: ना बाबा ना। तू पहले शहद लगा देता है। फिर मेरी नाभि को चाट लेता है। मैं अब शहद नहीं लगाऊँगी।

मैं: सॉरी मम्मी लगता है आप मेरे नाभि चाटने से गुस्सा हो गई हैं। मगर मैं क्या करता। जब मैंने शहद बहता देखा तो मैं खुद को रोक नहीं पाया। मैं फिर से आपसे माफी माँगता हूँ।

मम्मी: बेटा मैं तुझसे नाराज नहीं हूँ। और तुझसे नाराज हो भी नहीं सकती हूँ। मगर जब तू नाभि चाट रहा था तो बहुत अजीब लग रहा था।

मैं: कैसा अजीब लग रहा था मम्मी?

मम्मी: बेटा जब तू मेरी नाभि में अपनी जीभ डाल रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे पेट में एक तितली सी उड़ रही हो।

मैं: हाहाहाह सच में मम्मी ऐसा लगता है। मुझे तो पता ही नहीं था। मगर क्या आपको अच्छा लग रहा था?

मम्मी: बेटा अच्छा तो लग रहा था। मगर कोई भी बेटा अपनी माँ के साथ ऐसा नहीं करता है।

मैं: अब मम्मी बाहर हमें क्या पता कौन माँ-बेटा क्या-क्या करते हैं? मुझे तो सिर्फ मेरी मम्मी अच्छी लगती है। और मैं कौन सा किसी को बताने वाला हूँ। न ही ये बात आप किसी को बताओगी।

मम्मी: ठीक है बेटा। बस ये बात किसी को मालूम नहीं चलनी चाहिए। और जब तेरी भाभी आ जाए तो उसके सामने ऐसा कुछ मत करना। चल अब खाना खा ले।

मम्मी खाना निकालने किचन में चली गईं। और मैं भी उनके पीछे चला गया। वहाँ जाके मैंने मम्मी को पकड़ लिया।

मम्मी: तू यहाँ क्या कर रहा है?

मैं: मम्मी मैंने सोचा आपकी थोड़ी मदद कर दूँ।

मेरे दोनों हाथ मम्मी के पेट को सहला रहे थे। और मेरा लंड मम्मी की गाँड में घुसना जा रहा था।

मम्मी: बेटा तू मेरा काम और बढ़ा रहा है। देखो अभी भी हाथ मेरी नाभि पर ही है। पता नहीं क्या करूँ मैं इस पागल लड़के का। चल जा यहाँ से।

मैं किचन से बैठक में आ गया। और फिर मैंने और मम्मी ने खाना खा लिया। खाना खाके मम्मी लेट गईं। और मैं भी उनके पीछे लेट गया।

कहानी जारी रहेगी।

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