अपने बेटे से ही चुदाई कर बैठी 4

Maa bete ki sexy chudai kahani:- मेरी चूत पूरी गीली हो चुकी थी। मगर अपने बेटे के होने की वजह से मैं खुद की चूत को सहला नहीं रही थी। वरना अगर मेरा बेटा नहीं होता तो मैं इस वक्त अपनी चूत को रगड़ रही होती। मैंने अभी कहानी के 3 पार्ट ही पढ़े थे। और मेरी चूत पूरी तरह गीली हो गई थी।

मैंने तभी मोबाइल को साइड में रख दिया। क्योंकि अगर मैं आगे कहानी पढ़ती तो मैं खुद को रोक नहीं पाती। मैं बेड पर बैठी-बैठी माँ-बेटे की चुदाई की कहानी के बारे में सोच रही थी।

Pichla part yaha padhen ==> अपने बेटे से ही चुदाई कर बैठी 3

Maa bete ki sexy chudai hindi kahani

और उस कहानी के बारे में सोचते ही मुझे मेरा बेटा दिखाई दे रहा था। क्योंकि वो भी वही सब कर रहा था जो उस कहानी में हो रहा था। और फिर मोबाइल रखने के बाद मैं किचन में आ गई। और खाना बनाने लगी।

मगर मेरे दिमाग़ में इनसेस्ट राहुल की कहानी घूम रही थी। और मैं बार-बार यही सोच रही थी कि क्या ये कहानी सच है या अपने मन से बनाई गई है। क्योंकि कहानी पढ़ने के बाद मुझे वो कहानी रियल लग रही थी।

इनसेस्ट राहुल ने जिस तरह उन कहानियों को लिखा था, उसे देखकर यही लग रहा था कि वो कहानी रियल है। मैं बार-बार कहानी के बारे में सोच रही थी। और मेरी चूत गीली हो रही थी। मैं अपनी सोच में डूबी हुई थी।

कि तभी किसी ने पीछे से मेरी कमर को पकड़ लिया। और मैंने पलटके देखा तो मेरा बेटा मेरे पीछे खड़ा हुआ था। मेरी कमर को पकड़ते ही मेरा बेटा अपना लंड मेरी गाँड पर लगाने लगा। और मुझे भी उसके लंड का अहसास मिलने लगा।

मेरा बेटा: क्या बना रही हो मम्मी?

मैं: दाल-चावल और रोटी बना रही हूँ। मगर तू यहाँ गर्मी में क्यों आ गया बेटा? जा बाहर जाके बैठ।

मेरा बेटा मुझसे चिपका हुआ था। और उसका हाथ गरम हो रहा था। और वो मेरी कमर को हल्के-हल्के सहला रहा था। और उसका लंड मेरी गाँड पर रगड़ मार रहा था। और उसकी ये हरकत मुझे उस कहानी की याद दिला रही थी।

जिसमें वो लड़का अपनी मम्मी की कमर सहलाते हुए अपना लंड उनकी गाँड पर रगड़ता है। और उन्हें अपने लंड का अहसास दिलाके उन्हें चोदना चाहता है। और इस वक्त मुझे बिल्कुल उस कहानी की मम्मी की तरह ही महसूस हो रहा था।

मेरा बेटा मेरे साथ गलत कर रहा था। मगर फिर भी मैं उसे रोक नहीं पा रही थी। उल्टा उसके ऐसा करने से मेरा बदन गरम पड़ रहा था। कुछ देर मुझे पकड़े रहने के बाद मेरा बेटा किचन से चला गया।

और उसके जाते ही मैं उसकी हरकत के बारे में सोचने लगी। और मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं करूँ तो क्या करूँ। मैं यही सब सोच रही थी। और फिर खाना बनाने के बाद मैं अपने कमरे में आ गई।

और कमरे में आकर मैं फिर से वो कहानी पढ़ने लगी। उस कहानी में जो औरत थी, उसकी ज़िंदगी की सच्चाई मुझसे मिलती-जुलती थी। उस कहानी में वो औरत अपने पति से खुश नहीं थी। दोनों पति-पत्नी साथ ज़रूर थे।

मगर उसका पति न तो उसे वक्त देता था और न ही उसको जिस्मानी सुख देता था। और ये बात उसका बेटा अच्छी तरह जानता था। इसलिए वो हमेशा अपनी माँ के क़रीब रहता था। उस कहानी को पढ़ते-पढ़ते ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने मेरी ही ज़िंदगी की कहानी लिख दी हो।

मैं भी अपने पति से दूर थी। और मेरे पति भी मुझे जिस्मानी संतुष्टि नहीं दे पाते थे। कहानी को पढ़ते-पढ़ते मैं पूरी तरह गरम हो गई थी। उस कहानी में उस औरत का बेटा वही सब हरकतें कर रहा होता है जो मेरा बेटा कर रहा था।

और फिर उस कहानी में एक दिन जब उस औरत का बेटा किचन में उसे पीछे से पकड़ता है तो वो औरत अपने बेटे की हरकतों के बारे में उससे बात करती है। और उसका बेटा अपनी माँ को प्यार करने की बात करता है।

जिसे सुनके वो औरत अपने बेटे को थप्पड़ मार देती है। मगर उसके बेटे को इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है। वो वहीं अपनी मम्मी को पकड़के प्यार करने लगता है। उसकी माँ उसे मना कर रही होती है। मगर उसका बेटा रुकने का नाम नहीं लेता है।

और उसकी माँ भी गरम हो जाती है। जिसके चलते वो भी अपने बेटे का लंड पकड़ लेती है। और दोनों वहीं चुदाई करने लगते हैं। और एक बार की चुदाई के बाद वो औरत भी अपने बेटे से खुल जाती है। और फिर उसका बेटा उसे हर दिन चोदने लगता है।

पूरी कहानी को पढ़के मैं पूरी तरह गरम हो चुकी थी। और मेरी चूत से निकलते पानी ने मेरी पैंटी को गीला कर दिया था। मैं उस कहानी के कमेंट ही पढ़ ही रही थी कि तभी मेरा बेटा आ गया। और बोला—

मेरा बेटा: क्या देख रहे हो मम्मी मोबाइल में?

मैं: कुछ नहीं बेटा बस ऐसे ही रील्स देख रही थी। खाना निकाल दूँ?

मेरा बेटा: हाँ मम्मी निकाल लो।

मेरा बेटा अंडरवियर और बनियान में मेरे सामने खड़ा था। और मैं उसके अंडरवियर को देख रही थी। जहाँ उसके लंड का उभार साफ़-साफ़ दिख रहा था। अपने बेटे के लंड को देखते हुए मैं उठ गई। और फिर मैं खाना निकालके कमरे में ले आई।

और फिर मैं और मेरा बेटा खाना खाने लगे। खाना खाते हुए भी मैं अपने बेटे को देख रही थी। और मेरे दिमाग़ में वही माँ-बेटे की चुदाई वाली कहानी चल रही थी। और फिर कुछ देर में खाना खाके मैं बर्तन रखने चली गई।

और मेरा बेटा मेरे कमरे में लेटकर टीवी देखने लगा। बर्तन रखने के बाद मैं भी कमरे में आ गई। और कमरे में आकर मैं अपनी साड़ी निकालने लगी। दोपहर में काम करने के बाद मैं हमेशा ब्लाउज़ और पेटीकोट में ही लेटती हूँ।

और मेरे बेटे ने शुरू से मुझे ऐसे देखा है। और मुझे उससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता था। मगर तब मैं ये नहीं जानती थी कि मेरा बेटा मुझे चोदना चाहता है। साड़ी के निकलते ही मैं ब्लाउज़ और पेटीकोट में आ गई।

और मैंने देखा मेरे बेटे की नज़र मेरे बड़े-बड़े दूध और मेरी नाभि पर थी। और वो बार-बार अपनी नज़र बचा-बचाके मुझे ही देख रहा था। मेरे बेटे की नज़र मुझे अंदर तक चीर रही थी। और मुझे बार-बार वो कहानी याद आ रही थी।

जिसमें उस औरत का बेटा भी अपनी माँ को ऐसे ही देखता है। मगर उस कहानी में वो माँ अपने बेटे के इरादों से अनजान होती है। मगर मैं अपने बेटे के इरादे जान गई थी। और उसके इरादों को जानकर भी मैं कुछ कर नहीं पा रही थी।

और फिर मैं बेड पर आकर लेट गई। और मेरा बेटा मेरे बगल में लेट गया। जब भी मेरे बेटे की छुट्टी होती थी तब वो हमेशा मेरे साथ मेरे ही कमरे में रहता था। और आज भी वो मेरे साथ ही लेटा हुआ था।

हम दोनों लेटकर मूवी देख रहे थे। और फिर जब मुझे नींद आने लगी तो मैं करवट लेकर लेट गई। और तभी मेरे बेटे ने मेरी कमर पर हाथ रखा। और पीछे से मुझसे चिपकते हुए बोला—

मेरा बेटा: मम्मी नींद आ रही है तो क्या टीवी बंद कर दूँ?

मेरा बेटा वही सब हरकतें कर रहा था जो वो काफ़ी वक्त से कर रहा था। बस आज फ़र्क़ इतना सा था कि उसकी हरकतों का मतलब मैं अच्छी तरह से समझ रही थी। मेरे बेटे के पीछे से चिपकते ही उसका लंड मेरी गाँड पर लगने लगा। और फिर मैं बोली—

मैं: हाँ बेटा टीवी बंद कर दे। मैं भी ज़रा अपनी कमर सीधी कर लूँ।

मेरा बेटा: मम्मी अगर दर्द हो रहा है तो तेल लगा दूँ?

मैं: नहीं नहीं बेटा ज़्यादा दर्द नहीं हो रहा है। बस थोड़ी देर लेट लूँगी तो ठीक हो जाएगा।

और फिर मेरी बात सुनके मेरे बेटे ने टीवी बंद कर दिया। और फिर वो वहीं मेरे पास लेट गया। मेरा बेटा हमेशा से मेरा बहुत ख़याल रखता है। और मैं भी उससे बहुत प्यार करती हूँ। इसलिए उसकी ये सारी हरकतें जानकर भी मैं कुछ कर नहीं पा रही थी।

मैंने अपने बेटे से कई बार अपनी कमर की मालिश करवाई है। और वो मालिश वाक़ई बहुत अच्छी करता है। मगर तब मैं ये नहीं जानती थी कि वो मुझे चोदना चाहता है। मगर अब मैं ये बात जानती थी।

इसलिए मैंने उसे अपनी मालिश करने से मना कर दिया। मैं करवट लिए लेटी हुई थी। और मुझे बार-बार ये अहसास हो रहा था कि मेरा बेटा मेरी गाँड और मेरी कमर को पीछे से घूर रहा है।

कुछ देर मैं यही सब सोचती रही। और फिर मेरी आँख लग गई। और फिर शाम 5 बजे मेरी आँख खुली। और आँख खुलते ही मैंने देखा मेरा बेटा मेरे ही बगल में सो रहा था। और अपने बेटे को सोता देखकर मेरी नज़र उसके अंडरवियर पर गई।

जहाँ उसके लंड का उभार दिख रहा था। अपने बेटे के लंड को देखने के बाद मैं उठके बैठ गई। और जैसे ही मैं बेड से उठी तभी मेरा बेटा भी उठ गया। और आँखें खोलके मुझे देखने लगा।

और अपने बेटे को देखने के बाद मैं बाहर आ गई। और छत पर जाके फैलाए हुए कपड़े उतारने लगी। और जब मैं नीचे आई तब तक मेरा बेटा उठ चुका था। और फिर वो तैयार होकर बाहर चला गया।

और मैं पड़ोसन से बात करने लगी। शाम का सारा टाइम ऐसे ही निकल गया। और मेरे बेटे ने वही सब किया जो वो दोपहर में कर रहा था। और फिर रात का खाना खाने के बाद मैं कमरे में आ गई।

और अपने पति से बात करने लगी। पति से बात करने के बाद मैंने कमरे का दरवाज़ा बंद कर लिया। और डिम लाइट जलाके बेड पर लेट गई। बेड पर लेटते ही मैंने अपनी आईडी लॉगिन कर ली। मैंने देखा विक्रम पहले ही ऑनलाइन था। तभी मैंने उसे मैसेज किया।

मैं: हेलो।

विक्रम: हेलो आंटी, कैसे हो आप।

मैं: मैं ठीक हूँ। तुम कैसे हो।

विक्रम: मैं भी ठीक हूँ आंटी। बस आपका ही इंतज़ार कर रहा था। बेटा सो गया आपका?

मैं: पता नहीं वो कमरे में है। और मैं अपने कमरे में हूँ।

विक्रम: अच्छा। वैसे आपको कहानी कैसे लगी आंटी।

मैं: अच्छी थी, पढ़के यकीन नहीं हुआ कि दुनिया में एक माँ अपने बेटे के साथ ऐसे रिश्ते में भी रहती है।

विक्रम: आंटी ये रिश्ते दुनिया से छुपके बनते हैं। इसलिए किसी को इनके बारे में पता नहीं चलता है। मेरा और मेरी माँ का रिश्ता ही देख लो।

मैं: हाँ वो तो है। वैसे क्या ये सारी कहानी सच्ची है?

विक्रम: हाँ आंटी सच्ची ही है। इसलिए तो इतनी लंबी-लंबी कहानी लिखी है। वैसे आप बताओ आंटी। क्या आपको ये कहानी कहीं से कहीं तक फ़ेक लग रही थी।

मैं: नहीं पढ़ने में तो फ़ेक नहीं लग रही थी। ऐसा लग रहा था सब असली में हो रहा है।

विक्रम: वही तो आंटी हर रिश्ता ज़रूरत की वजह से बनता है। और बड़ी उम्र की औरतें ज़्यादातर अपने पति से खुश नहीं होती हैं। और ये बात हर बेटा जानता है। मगर कुछ बेटे ही अपनी माँ का अकेलापन समझ पाते हैं।

इसलिए वो उन्हें अलग नज़र से देखने लगते हैं। और इनसेस्ट बन जाते हैं। जैसे मैं अपनी माँ के लिए इनसेस्ट हूँ। और आपका बेटा आपके लिए इनसेस्ट है।

विक्रम की बात सुनके मैं अपने बेटे के बारे में सोचने लगी। मेरा बेटा भी मुझे 5 साल से अकेला देख रहा है। और मुझे लगता है शायद वो ये बात जानता है कि मुझे भी जिस्मानी सुख की ज़रूरत है। इसलिए वो ज़्यादा से ज़्यादा वक्त मेरे साथ ही बिताता है।

विक्रम: वैसे सच कहूँ आंटी। बहुत कम लड़के ही अपने दिल की बात अपनी माँ से कह पाते हैं। और शुरू में उनकी माँ उन्हें मारती भी है। मगर जब वो अपने बेटे को समझ जाती है तो वो भी खुलके अपने बेटे के लंड का मज़ा लेती है।

क्योंकि इस दुनिया में जितना प्यार एक माँ अपने बेटे से करती है, उतना ही प्यार एक बेटा भी अपनी माँ से करता है। काश मैं भी अपने दिल की बात अपनी माँ से कह पाता।

मैं: तुमने कभी अपने दिल की बात अपनी माँ से कहने की कोशिश नहीं करी?

विक्रम: बहुत बार कोशिश करी आंटी। मगर ये इतना आसान नहीं है। इसलिए अभी तक नींद की गोली से काम चला रहा हूँ। वैसे आप बताओ आंटी। उस कहानी में उस औरत ने जो किया… वो आपको सही लगा या गलत।

मैं: अगर दुनिया की नज़र से देखा जाए तो उसने गलत किया। और अगर उस औरत के अकेलेपन और उसकी जिस्मानी ज़रूरत के नज़र से देखा जाए तो उसने कुछ गलत नहीं किया। बहुत कम औरतें ऐसे होती हैं…

जिनको भरपूर जिस्मानी सुख मिलता है। वरना तो बहुत सी औरतें इस आग में जलती रहती हैं। और उनकी सुनने वाला कोई नहीं होता है।

विक्रम: सही कहा आपने आंटी। इसलिए मुझे माँ-बेटे का ये रिश्ता गलत नहीं लगता है। मेरी माँ भी अकेली है। इसलिए मैं भी उनकी गर्मी निकालता रहता हूँ। वैसे आज तो आपका बेटा घर पर था। उसने कुछ किया या नहीं।

मैं: नहीं ऐसा तो कुछ नहीं किया। बस बार-बार मेरी कमर को पकड़के मुझसे चिपक जाता है।

विक्रम: आपको अपने लंड की गर्मी दे रहा है आंटी। वैसे जब वो अपना लंड आपकी गाँड पर लगाता है तो आप उससे कुछ कहती हो या नहीं।

मैं: क्या कहूँ बस यही समझ नहीं आता है। मुझे तो अब तुमसे बात करके पता चला कि वो ये सब हरकतें अनजाने में नहीं बल्कि जानकर कर रहा था।

विक्रम: समझा सकता हूँ आंटी। वैसे आपका बेटा वही सारी हरकतें कर रहा है ना… जो हरकतें वो लड़का उस कहानी में करता है।

मैं: हाँ तुमने सही कहा था। मेरा बेटा भी वही हरकतें कर रहा है।

विक्रम: अब तो आपको यकीन हो गया आंटी कि आपका बेटा भी आपको चोदना चाहता है।

मैं: हाँ अब तो मुझे भी यकीन हो गया है।

विक्रम: तो आंटी अब आप क्या करना चाहती हो?

मैं: पता नहीं, मुझे समझ नहीं आ रहा है कि मैं करूँ तो क्या करूँ? क्या बात करने से मेरा बेटा सही हो सकता है?

विक्रम: मुझे नहीं लगता आंटी कि आपका बेटा अब सही हो सकता है।

मैं: ऐसा क्यों कह रहे हो तुम?

विक्रम: आंटी जब ये सब शुरू-शुरू हुआ होता है तब कुछ लड़के इसे कंट्रोल कर लेते हैं। और सिर्फ़ अपनी माँ को देखकर अपना लंड हिलाके काम चला लेते हैं। मगर कुछ लड़के जो ज़्यादा आगे बढ़ जाते हैं…

जैसे मैं और आपका बेटा… उन्हें वापस नॉर्मल करना आसान नहीं होता है। उन्हें बस अपनी माँ ही माँ सब जगह दिखाई देती है।

मैं: तो तुम कहना चाहते हो कि मेरा बेटा हमेशा ऐसे ही रहेगा। और वो ये सब हरकतें करता रहेगा।

विक्रम: हाँ आंटी, अब आपका बेटा इससे आगे ही बढ़ेगा। क्योंकि वो पहले से आपके साथ वो सब हरकतें कर रहा है। और इतना सब कुछ होने के बाद कोई भी इनसेस्ट लड़का अपनी माँ को चोदना चाहेगा।

वैसे आंटी इसमें गलत क्या है। आपको भी तो लंड की ज़रूरत है। तो आप अपने बेटे से काम क्यों नहीं चला लेतीं?

विक्रम की ये बात सुनते ही मैं अपने बेटे के बारे में सोचने लगी। क्योंकि जब से ये माँ-बेटे की चुदाई की बातें मैं करने लगी हूँ तब से कई बार मैंने अपने बेटे के लंड को देखा है। और उसके लंड की गर्मी को अपनी गाँड पर महसूस किया है।

और इन कुछ दिनों में मेरी चूत माँ-बेटे की चुदाई के बारे में सोचते ही गीली होने लगती है। और जब से मुझे अपने बेटे की सच्चाई पता चली है तब से मेरी चूत कुछ ज़्यादा ही गरम होने लगी है।

मैं: ये तुम क्या कह रहे हो?

विक्रम: आंटी अभी आपने ही कहा था कि उस कहानी में उस औरत ने सही किया। और आप भी तो उस औरत की तरह जिस्मानी सुख के लिए तड़प रही हैं। तो अगर आपका बेटा आपकी चुदाई करता है तो इसमें गलत क्या है?

मैं: वो कहानी थी। ये असल ज़िंदगी है।

विक्रम: आंटी असल ज़िंदगी में भी ये सब होता है। आपने सुना ही होगा। देवर-भाभी, ससुर-बहू, भाई-बहन… इन सब रिश्तों में चुदाई हो चुकी है। तो माँ-बेटे में ऐसा कौनसी बड़ी बात है।

विक्रम की बात सुनके मैं सोच में पड़ गई। वो मुझे मेरे बेटे से चुदवाने के लिए कह रहा था। और उसकी बातों से मुझे मेरे बेटे का ख़याल आ रहा था।

विक्रम: वैसे आंटी एक बात कहूँ। मुझे लगता है। आप भी अपने बेटे से चुदवाना चाहती हैं। बस आप ये बात मानना नहीं चाहती हैं।

मैं: नहीं नहीं ऐसे कोई बात नहीं है। और तुम्हें ऐसा क्यों लगता है?

विक्रम: आंटी आपका बेटा आपको चोदना चाहता है। ये बात आप अच्छी तरह जानते हो। मगर ये सब जानकर भी आपने उसे कुछ नहीं कहा। उल्टा उसकी हरकतों का आप भी मज़ा ले रहे हो। क्योंकि आपके अंदर की औरत भी लंड का सुख लेना चाहती है।

विक्रम की बात सुनके मैं चुप हो गई। क्योंकि उसका कहना गलत नहीं था। जब से मुझे ये माँ-बेटे की चुदाई के बारे में पता चला था तब से मैं ये सब सोच रही थी। और तब से जब भी मेरा बेटा मेरी गाँड पर अपना लंड लगाता था…

तो मेरे बदन और मेरी चूत में एक बिजली सी दौड़ जाती थी। कुछ देर मैंने विक्रम को कोई मैसेज नहीं किया। फिर वो बोला—

विक्रम: आंटी मैं जानता हूँ। आप ये मानना नहीं चाहते हो। मगर सच-सच बताना आपकी अपने बेटे की कसम है। आपका भी मन चुदवाने का करता है ना।

मैं: हाँ करता है, मगर मैं ऐसा नहीं कर सकती हूँ। वो मेरा बेटा है।

विक्रम: रुको आंटी मैं आपको कुछ दिखाता हूँ।

और फिर विक्रम ने मुझे वीडियो भेजा। और वीडियो के आते ही मैं उसे खोलके देखने लगी। वीडियो में एक 40-45 साल की मोटी सी औरत अपनी टाँगें फैलाए पूरी नंगी लेटी हुई थी। और एक 20-22 साल का लड़का वीडियो बनाते हुए उसे चोद रहा था। और वो औरत बोल रही थी—

औरत: उम्मम्म उम्मम्म बेटा तू ये वीडियो क्यों बनाता है।

लड़का: डरो मत मम्मी। वीडियो में आपका चेहरा नहीं आ रहा है। आप बस मेरे लंड का मज़ा लो।

और ये बात बोलके वो लड़का तेज़-तेज़ धक्के लगाने लगता है। वीडियो देखकर और उस लड़के और उसकी माँ की बातें सुनकर मेरी चूत गीली हो गई थी। फिर मैं बोली—

मैं: ये किसकी वीडियो थी विक्रम।

विक्रम: ये भी एक इनसेस्ट लड़का है आंटी। यही इंस्टाग्राम पर मिला था। ये भी अपनी माँ को चोदना चाहता था। तो मैंने इसकी मदद कर दी। और फिर इसने अपनी माँ को मना लिया। तब से दोनों चुदाई का ऐसे ही मज़ा लेते हैं।

मैं: मतलब इसकी मम्मी मान गई।

विक्रम: हाँ आंटी मान गई। आपने वीडियो में नहीं देखा कितने मज़े से अपने बेटे के लंड से चुदवा रही थी।

मैं: हाँ वो तो है।

विक्रम: यही तो मैं आपको भी समझा रहा हूँ। चुदाई की ज़रूरत हर औरत को होती है। इसलिए कुछ औरतें बाहर का लंड ले लेती हैं। और कुछ औरतें अपना मन मारकर रह जाती हैं। और आपका भी मन चुदाई का करता है। तो आप अपने बेटे से चुदाई का मज़ा लो।

आपको कहीं बाहर भी नहीं जाना पड़ेगा। और किसी को इस बात का पता भी नहीं चलेगा। आपको घर में ही चुदाई का मज़ा मिलेगा। और अगर आप ये सब ना भी करो तो भी एक ना एक दिन आपका बेटा आपकी चुदाई कर ही देगा।

मैं: नहीं नहीं ये बात तो सोचने भर से मेरे हाथ-पैर ठंडे हो गए हैं। अपने बेटे के सामने ये मैं कैसे कर पाऊँगी।

विक्रम: आपको कुछ नहीं करना है आंटी। सब आपका बेटा ही करेगा। आपको तो उसे बस ये सब करने के लिए उकसाना है।

मैं: मैं कुछ समझी नहीं।

और फिर विक्रम ने मुझे वो सब समझा दिया। और उसकी बातें सुनके मैं पूरी तरह हिल गई।

मैं: क्या मेरा बेटा सच में ये सब करेगा?

विक्रम: बिल्कुल करेगा आंटी। आपको एक सबूत दूँ।

मैं: कैसा सबूत।

विक्रम: आप अभी पैंटी पहने हो।

मैं: हाँ पहनी हूँ।

विक्रम: बस आप अपनी पैंटी उतारके सुबह बाथरूम में छोड़ देना। और फिर जब आपका बेटा नहाने जाए तो चुपके देखना कि आपका बेटा आपको चोदने के लिए कितना पागल है। काश मेरी मम्मी भी आपकी तरह मान जाएँ।

मैं: वैसे एक बात कहूँ। जो वीडियो तुमने भेजी थी। उसमें तो तुमने पूरा लंड अपनी मम्मी की चूत में डाल दिया था। क्या तुम शुरू से ऐसे ही अपनी मम्मी को चोद रहे हो?

विक्रम: नहीं नहीं आंटी शुरू में बस मैं मम्मी को नंगा करके मज़े लेता था। ये तो अभी कुछ टाइम पहले से मैं मम्मी को ऐसे चोदने लगा हूँ।

मैं: वैसे सच कहूँ जिस तरह तुम अपनी मम्मी को चोद रहे हो। और उसके बावजूद भी उन्हें कुछ पता नहीं चल रहा है। ये थोड़ा अजीब लगता है।

विक्रम: मैं कुछ समझा नहीं आंटी। आप कहना क्या चाहते हो?

मैं: जिस तरह तुम ऊपर-ऊपर से अपनी मम्मी के बदन से खेल रहे थे। उसमें तो उन्हें कुछ पता ना चला ये समझ में आता है। मगर तुम्हारा इतना बड़ा और मोटा लंड अपनी चूत में लेकर भी उन्हें कुछ पता नहीं चल रहा है। ये बात कुछ समझ नहीं आती।

विक्रम: आंटी अगर उन्हें पता चल होता तो वो तो मुझे मार-मारके भूत बना देतीं। मगर उन्होंने तो ऐसा कुछ नहीं किया।

मैं: बस यही बात अजीब है। तुम्हारे जैसे मोटा लंड अगर किसी भी औरत की चूत में जाएगा तो उसे पता चल ही जाएगा। मुझे लगता है तुम्हारी माँ जानती हैं कि तुम उनके साथ क्या करते हो।

विक्रम: सच कहूँ आंटी, तो शक तो मुझे भी हुआ था। मगर मुझे लगा शायद उन्हें पता नहीं चला होगा। मगर आपकी बात सुनने के बाद मुझे लगता है कि मम्मी सब जान गई हैं।

मैं: अगर ऐसा है तब तो तुम्हारा काम बन जाएगा।

विक्रम: हाँ आंटी और थैंक्स ये मुझे बताने के लिए। वैसे बहुत जल्द आप भी अपने बेटे के लंड का मज़ा लोगी। फिर देखना जैसी चुदाई वो आपकी करेगा… ऐसी चुदाई किसी ने आपकी नहीं की होगी।

मैं: चलो अब मैं चलती हूँ। कल बात करते हैं।

विक्रम: ठीक है आंटी। और आप भी वो सब वैसे ही करना। जैसे मैंने आपको बताया है।

और फिर विक्रम से बात करके मैं लेटी-लेटी उसकी बातों के बारे में सोचने लगी। विक्रम ने मुझे मेरे बेटे को उकसाने का तरीका बताया था। और उस वक्त मैं इतनी गरम हो गई थी कि सच में अपने बेटे से चुदवाने के बारे में सोचने लगी।

और फिर मैं लेटी-लेटी इनसेस्ट राहुल की कहानी पढ़ने लगी। और कहानी पढ़ते-पढ़ते मैंने अपनी पैंटी निकाल दी। और अपनी चूत रगड़ने लगी। और चूत को रगड़ते हुए अपने बेटे के बारे में सोचने लगी।

आज से कुछ दिन पहले तक मैं कभी-कभी ही अपनी चूत को रगड़ती थी। मगर जब से मैं माँ-बेटे की चुदाई की बातें करने लगी थी तब से मैं हर रोज़ अपनी चूत को रगड़ रही थी। और आज तो मैं अपने बेटे को याद करके अपनी चूत को रगड़ रही थी।

और फिर कुछ ही देर चूत रगड़ने के बाद मेरा पानी निकल गया। और मैं बेड पर लेटी-लेटी हाँफने लगी। और फिर मैं ऐसे ही लेटे-लेटे सो गई।

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