नौकरी दिलाने के बहाने मामा ने मेरी चूत फाड़ दी

Mama bhanji ki chudai kahani:- हैलो दोस्तों कैसे हो आप सब? मै मेरी सेक्स स्टोरी वैबसाइट की बहुत बड़ी फ़ैन हूँ और डेलि मै यहाँ चुदाई की कहानियाँ पढ़ती हूँ। आज मैंने सोचा कि जब सब लोग अपनी अपनी स्टोरी बता रहे है तो क्यूँ ना मै भी आज अपनी सच्ची कहानी आप लोगो के साथ शेयर करूँ। तो दोस्तों ये कहानी मेरे और मेरे मामा के बीच हुई जबर्दस्त चुदाई की है तो आप लोगो का ज्यादा समय ना लेते हुए मै अपनी कहानी शुरू करती हूँ।

सबसे पहले मैं अपने घर के बारे में बता दू. मैं, मेरी माँ, पापा और एक छोटा भाई है मेरे घर में. हमारे घर की हालत कुछ ठीक नहीं थी इसलिए मैं बड़ी सिटी में जा कर नौकरी करना चाहती थी. तो मैंने अपने मामा जी से अपनी नौकरी के लिए बात की. उन्होंने हां कर दी और फिर जैसे-तैसे करके मैंने अपनी माँ और पापा को सिटी जा कर नौकरी करने के लिए मना लिया. बस अब मैं तैयारी कर रही थी सिटी में जाने के लिए. वहाँ मैं मामा जी के घर रुकने वाली थी.

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मामा जी के घर में सुबह सवेरे राजू और पीयू दोनों एग्जाम के लिए लड़ रहे थे.

मामा जी: अरे तुम दोनों क्यों लड़ रहे हो सुबह उठते ही?

पीयू: फूफा जी हमारे एग्जाम एक साथ है. तो राजू बोलता है कि बुआ उसके साथ जाएगी मेरे साथ नहीं जाएगी.

राजू: हां-हां माँ मेरे साथ जाएँगी क्यूंकि वो मेरी माँ है इसकी नहीं.

मामा जी: तुम दोनों लड़ो मत और राजू ऐसे नहीं बोलते. वो तुम्हारी बहन है न. और रही बात एग्जाम की तो तुम्हारी माँ तुम दोनों के साथ जाएँगी.

मामी जी: अगर मैं इन दोनों के साथ चली गयी तो आप घर में अकेले होंगे और आपका ख़याल कौन रखेगा?

मामा जी: उसकी तुम टेंशन मत लो. क्यूंकि कल सुबह पिंकी यहाँ हमारे घर आने वाली है. कल मैंने फ़ोन पर उससे बात की थी.

(फ़ोन पर मै और मामा जी)

मै: मामा जी मैं पिंकी बोल रही हूँ. आप वहाँ सब कैसे हो? राजू और मामी जी ठीक है?

मामा जी: हां पिंकी बेटी यहाँ सब ठीक ठाक है. तुम बताओ तुम और बहन और जीजा जी कैसे है और छोटू कैसा है?

मै: नहीं मामा जी यहाँ कुछ ठीक नहीं है.

मामा जी: क्यों क्या हुआ है?

मै: मामा जी ऐसी कोई बात नहीं है. बस घर की हालत कुछ ठीक नहीं है और खर्चे बढ़ गए है. तो मैंने सोचा क्यों ना मैं भी नौकरी पर लग जाऊ.

मामा जी: ये तो बहुत अच्छी बात है कि तुम नौकरी करना चाहती हो. अपने घर का बोझ उठाना चाहती हो. बोलो इसमें मैं तुम्हारी क्या हेल्प कर सकता हूँ?

मै: क्या मुझे आपकी सिटी में कही पर नौकरी मिलेगी मामा जी?

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मामा जी: हां बिलकुल तुम्हे मिल जाएगी. तो तुम यहाँ आ जाओ हमारे पास. मैं तुम्हारी कही न कही नौकरी लगवा दूँगा ठीक है?

मै: ठीक है मामा जी. मैं आज शाम की ट्रैन से निकलूंगी और कल सुबह आपके घर पहुँच जाउंगी.

मामा जी: ठीक है बेटी और तुम यहाँ सिटी में पहुँच कर फ़ोन करना, मैं स्टेशन पर आ जाऊंगा तुमको लेने.

मै: ओके मामा जी तो फिर मिलते है.

मामा जी: मुझे इंतज़ार रहेगा.

मामी जी: तो ठीक है, मैं राजा और पीयू के रूम में एक बेड लगवा देती हूँ.

पीयू: नहीं माँ एक और बेड की ज़रुरत नहीं है. मैं और पिंकी एक साथ एक बेड पर सो जाएँगी.

मामीजी: ठीक है पीयू जैसी तुम्हारी मर्ज़ी.

(नेक्स्ट डे)और फिर मैं घर से तैयार हो कर निकल गयी सिटी मामा जी के घर के लिए. फिर स्टेशन पर पहुँच कर मैंने मामा जी को फ़ोन किया.

मामा जी: हेलो पिंकी बेटी.

मै: मामा जी मैं पहुँच गयी हूँ. स्टेशन पर खड़ी हूँ, आप आ जाओ मुझे लेने.

मामा जी: ठीक है पिंकी बेटी, मैं आ रहा हूँ तुमको लेने, करीब 30 मिनट के अंदर पहुँच जाऊंगा स्टेशन.

मै: ओके मामा जी मुझे इंतज़ार रहेगा आपका.

फिर मामा जी मुझे लेने आ गए. वो मुझे देख कर बहुत खुश हुए पर मैंने एक बात नोट की थी. उनकी नज़र सीधे मेरे बूब्स पर थी. अक्सर लोग जब भी मुझे देखते है तो पहली नज़र मेरी छाती मेरे बूब्स पर ही जाती थी. फिर जब मामा जी से मैं गले मिली तब उनक लंड सीधा मेरी चूत को टच हुआ और मेरे बूब्स उनकी चेस्ट को टच हुए. तब मेरे अंदर एक करंट जैसा महसूस हो रहा था क्यूंकि 5 दिन पहले एक लंड मेरी चूत अपने अंदर ले चुकी थी और वो लंड किसका था वो मैं आप सब को इस कहानी में आगे बताउंगी। फिर मै मामा जी के साथ गाडी में बैठ कर उनके घर आ गयी. Mama bhanji ki chudai kahani

मामी जी: मेरी प्यारी बेटी पिंकी तुम कैसी हो?

मै: मामी जी बिलकुल ठीक-ठाक हूँ आप बताओ आप कैसी हो?

मामी जी: मैं भी ठीक हूँ, आप बैठो इससे मिलो, ये है तुम्हारा छोटा भाई राजू!

मै – ओह राजू तुम तो काफी बड़े हो गए.

वैसे फ्रेंड्स राजू काफी हैंडसम लग रहा था. मुझे पहली नजर में पसंद आ गया.

राजू: ठीक हूँ दीदी वैसे आप बताओ आप बड़ी दूर से आयी हो आपके वहाँ कैसा है सब बुआ और फूफा जी सब कैसे है?

मै: सब ठीक ठाक है राजू और ये कौन है?

पीयू: हाय पिंकी मैं पीयू हूँ. तुम्हारे मामा जी के भाई की लड़की.

मै: ओह नाइस तुम बहुत खूबसूरत हो.

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वैसे पीयू का फिगर काफी अच्छा था 34-26-34. और फिर सब से मिलने के बाद मुझे मामी जी ने कहा कि मैं फ्रेश हो जाऊ. फिर मैं बाथरूम में चली गयी नहाने और बाकी सब अपने काम में लग गए. और वैसे ही सुबह मामी जी राजू और पीयू के साथ जाने वाले थे. उन दोनों के एग्जाम थे ना इसलिए. मैं जैसे बाथरूम के अंदर गयी और जैसे दरवाज़े की कुण्डी लगायी तो कुण्डी टूटी हुई थी. तो मैंने ऐसे ही अटका दी और अपने कपडे उतार कर नहाने बैठ गयी.

थोड़ी देर बाद मुझे ऐसा लगा की कोई मुझे देख रहा था और वह कोई और नहीं मामा जी थे. तो मैंने सोचा क्यों ना मामा जी के मज़े लिए जाये मतलब मस्ती. मैंने शावर ऑन किया और ठंडा-ठंडा पानी मेरे पूरे जिस्म को मदहोश कर रहा था. वो पानी मेरे जिस्म को मदहोश कर रहा था लेकिन मेरी चूत को गरम कर रहा था.

मैं बोली: काश इस समय इस बाथरूम में मेरी चूत को कोई मस्त लम्बा सा लंड मिल जाये तो मज़ा आ जाये. चलो ऊँगली से ही काम चला लेती हूँ. लंड कहा मिलेगा यहाँ.

मैं जान-बूझ कर ऐसा बोल रही थी. क्यूंकि मैं तो मामा जी के मज़े ले रही थी इसलिए. लेकिन मामा जी तो कुछ और ही समझ रहे थे. बाथरूम के अंदर उनकी आवाज़ सुनाई दे रही थी कि वो क्या बोल रहे है. मामा जी: यार पिंकी तो बहुत बिगड़ गयी है और क्या सच में ये अपनी चूत रगड़ रही है. लगता है ये सच में अपनी चूत रगड़ रही है तभी तो मेरा लंड खड़ा हो रहा है इसकी आवाज़ सुन कर. इसकी आवाज़ सुन कर मेरा लंड खड़ा हो रहा है अगर मैंने इसको नंगी देख लिया तो मेरा क्या हल होगा?

मामा जी: लेकिन यार मेरी बहन की बेटी है. मैं इसके बारे में ऐसा गलत क्यों सोच रहा हूँ? मुझे अब यहाँ से जाना चाहिए. नहीं तो मैं खुद पर और कण्ट्रोल नहीं कर पाउँगा और कुछ गलत हो जायेगा.

मैंने ये सुन कर दरवाज़ा खोल दिया और मैं मामा जी के सामने पूरी नंगी खड़ी थी (और जैसे उन्होंने मेरी तरफ देखा मैंने दरवाज़ा बंद कर लिया). अब कोई आवाज़ नहीं आ रही थी तो मैंने फिर से थोड़ा सा दरवाज़ा खोला. मैंने देखा तो बाहर मामा जी नहीं थे. वो वहाँ से चले गए थे. नेक्स्ट रात डिनर के समय मैं मामा जी के सामने एक-दम नार्मल थी जैसे कुछ हुआ ही नहीं और मामा जी भी ऐसे ही नार्मल थे. खाना खाने के बाद मैं पीयू और राजू के रूम में चली गयी और मैं पीयू के साथ उसके बेड पर सो गयी. रात के करीब 1 बजे को मै पानी पीने के लिए उठी तो मुझे मामा जी के बैडरूम से कुछ आवाज़ आ रही थी.. Mama bhanji ki chudai kahani

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आए ओह्ह्ह्ह आआह्ह की. मामा और मामी दोनों नंगे थे मतलब चुदाई चालु थी. मामी जी डोगी स्टाइल में थी और मामा जी पीछे घुटनो के बल बैठ कर अपना लंड मामी की चूत में डाल कर घपा-घप चोद रहे थे. और मामी अपने मुँह से अह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह ओह्ह्ह्ह की सिसकियाँ निकाल रही थी.

मामी जी: अह्ह्ह अह्ह्ह ओह्ह्ह्ह उफ्फ्फ डार्लिंग और ज़ोर से करो. मुझे बहुत मज़ा आ रहा है. आप अपना पूरा लंड मेरी चूत में घुसा दो. अह्ह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह ओह्ह्ह्ह उफ्फ्फ डार्लिंग करते रहो रुकना मत. चोदो मुझे और ज़ोर से चोदो. डार्लिंग मेरी चूत तुम्हारे लंड की प्यासी है.

मामा जी: हां डार्लिंग मुझे भी तुम्हारी गीली रसीली चूत चोदने में बहुत मज़ा आता है.

उन दोनों की चुदाई देख कर मैं गरम होने लगी और न-जाने कब मेरा हाथ मेरी सलवार के अंदर मेरी चूत पर चला गया और मैं अपनी चूत को हाथ से रगड़ने लगी.

मामा जी: डार्लिंग अब मेरा निकलने वाला है.

मामी जी: डार्लिंग मेरी चूत के अंदर मत निकालना अपने लंड का पानी. मैं तुम्हारे लंड का पानी पीना चाहती हूँ इसलिए तुम अपने लंड का पानी मेरे मुँह में छोड़ना. मैं कब से तड़प रही थी तुम्हारे लंड का पानी पीने के लिए.

अंदर मामा जी ने मामी के मुँह में अपना पानी छोड़ दिया और इधर मेरी चूत ने अपना पानी छोड़ दिया. फिर मैं वापस रूम में आ गयी और पीयू के साथ बेड पर लेट गयी. पर नींद नहीं आ रही थी. क्यूंकि मेरे दिल दिमाग में बस मामा जी का लंड घूम रहा था.

मैं (मन में): यार मुझे क्या हो रहा है? मामा जी के लंड के बारे में क्यों सोच रही हूँ? मुझे खुद को रोकना होगा, ये गलत है. लेकिन मैं क्या करू मुझे नींद भी तो नहीं आ रही. आँखें बंद करती हूँ तो मामा जी का लंड सामने आ जाता है. क्या करू मैं?

और पूरी रात मैं मामा जी के लंड के बारे में ही सोचती रही और न जाने कब सुबह हो गयी. फिर सुबह जैसे ही मेरी आँख खुली तो देखा राजू और पीयू दोनों रूम में नहीं थे. रूम से बहार आयी तो वहाँ पर भी कोई नहीं था. फिर मुझे याद आया की मामी जी ने कहा था की सुबह वो सवेरे 6 बजे घर से निकल जायेंगे और मुझसे कहा था कि मैं उठ कर खुद भी नाश्ता कर लू और मामा जी को भी नाश्ता करा दू. मैं फिर उठी हाथ-मुँह धो कर किचन में गयी. किचन के अंदर नाश्ता पहले से तैयार किया हुआ था. तो मैंने सोचा पहले मामा जी को उठा कर आती हूँ फिर साथ में बैठ कर नाश्ता करते है. और फिर मैं मामा जी के बैडरूम में गयी उनको जगाने के लिए. मामा जी कम्बल ओढ़ कर सोये हुए थे.

मैंने कम्बल हटाया तो देखा मामा जी का लंड अकड़ कर खड़ा था हार्ड और फुल टाइट था. और वो नंगे सोये हुए थे. बेड पर उनको ऐसे देख कर मेरे दिल में गंदे ख़याल आने लगे. मैं क्या करती उनका लंड ही ऐसा था. मेरा दिल तो कर रहा था कि मामा जी का लंड अभी पकड़ लू. लेकिन मुझे डर लग रहा था की कही मामा जी जाग न जाये. और शर्म भी आ रही थी. फिर मैंने मामा जी को कम्बल ओढ़ा दिया और रूम के दरवाज़े पर जा कर खड़ी हो कर मामा जी को आवाज़ दी. फिर वो जाग गए और मैंने उनसे कहा- Mama bhanji ki chudai kahani

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मै: मामा जी आप फ्रेश हो जाओ मैं आपके लिए नाश्ता लगा देती हूँ.

मैं इतना बोल कर वापस किचन में चली गयी. फिर जब मामा जी अपने बैडरूम से बाहर आये तो वो सिर्फ तौलिया लपेटे हुए थे और सीधे बाथरूम में चले गए. थोड़ी देर बाद मैंने सोचा क्यों न मामा जी को नहाते हुए देखु. वैसे भी बाथरूम के दरवाज़े की कुण्डी थोड़ी ढीली थी तो थोड़ा दरवाज़ा खुला रहता था जिसकी वजह से बाथरूम में नहाते हुए को देख सकते थे. मैंने देखा मामा जी पूरे नंगे खड़े थे शावर के नीचे और अपना लंड हाथ में पकड़ कर मेरा नाम ले रहे थे.

मामा जी: पिंकी तुम कितनी सेक्सी हो तुम्हारे नाम से मेरा लंड खड़ा हो गया है. लगता है अब मेरे इस लंड को पिंकी की चूत चाहिए. मुझे पता है यार गलत है लेकिन मेरा लंड खड़ा हो गया है. अब मैं क्या करू इस लंड का. बाहर जाऊ तो कैसे जाऊ? ऐसा करता हूँ टॉवल लपेट लेता हूँ.

और फिर मामा जी टावल लपेट कर बाथरूम से बाहर आये. लेकिन आगे से थोड़ा फूला हुआ लग रहा था. मतलब मामा जी का लंड खड़ा था अभी भी. मैंने उनसे कहा-

मै: मामा जी आप फ्रेश हो गए हो चलो कपडे पहन लो मैं नाश्ता लगा देती हूँ. लेकिन मामा जी वही खड़े रहे और जान-बूझ कर टॉवल नीचे गिरा दिया. वो मेरे सामने नंगे हो गए. उनका लंड एक-दम टाइट हो कर खड़ा था. फिर मेरी तरफ मामा जी बढे तो मैंने उनसे कहा-

मै: मामा जी आप ये क्या कर रहे हो?

मामा जी: पिंकी मेरे सामने इतनी खूबसूरत सेक्सी लड़की खड़ी हो और मैं उसे कुछ न करू ऐसा हो नहीं सकता. और मैं जानता हूँ कि मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए. लेकिन मैं क्या करू तुम इतनी सेक्सी हो कि मैं खुद को रोक नहीं पा रहा हूँ.

मै: लेकिन मैं आपकी भांजी हूँ और ये सब गलत है, ऐसा नहीं हो सकता.

मामा जी: मैं जानता हूँ तुम मेरी बहन की बेटी हो. लेकिन जब से मैंने तुम्हे नंगी देखा है तब से मुझे मालूम नहीं क्या हो गया है. और पिंकी मेरी हालत की ज़िम्मेदार तुम हो क्यूंकि तुमने मेरे लंड को खड़ा किया है. अब तुम ही इस लंड को शांत कर सकती हो.

मैं मामा जी के मुँह से ये सब सुन कर हैरान थी कि मामा जी मेरे बारे में ऐसा सोचते थे. लेकिन अब और मैं क्या कर सकती थी. तो मैंने उनसे कहा-

मै: मैं आपके लंड को कैसे शांत कर सकती हूँ?

मामा जी: तुम अपने हाथ में लेकर मेरे लंड को रगड़ो (मतलब मुठ मारो). और जैसे मेरे लंड से पानी निकल जायेगा वो शांत हो जायेगा.

मै: ठीक है मामा जी. और फिर मैं अपने हाथ में मामा जी का लंड लेकर ऊपर-नीचे करने लगी मुठ मारने लगी.

मामा भांजी की चुदाई कहानी

मामा जी अपने मुँह से अह्ह्ह्ह अह्ह्ह ओह्ह्ह्ह कर रहे थे. अब मुझे ऐसा करते हुए 5 मिनट से ऊपर हो गए थे लेकिन मामा जी का निकल ही नहीं रहा था. और ऐसे में वो मेरे बूब्स को मेरे कपड़ों के ऊपर से दबाने लगे. Mama bhanji ki chudai kahani

मै: ये क्या कर रहे हो मामा जी? आपने तो सिर्फ कहा था की मैं आपके लंड को हाथ में लेकर मुठ मारू.

मामा जी: हां मैंने सोचा था कि तुम अपने हाथ से मेरे लंड को हैंडजॉब दोगी तो ये शांत हो जायेगा. लेकिन मेरे लंड को तुम्हारे हाथ के साथ तुम्हारी चूत की ज़रुरत है. तब जा कर मेरा लंड शांत होगा. और ये सब तुम्हारी वजह से हुआ है.

अब क्या करती मैं मेरे पास और कोई रास्ता नहीं था. तो मैंने मामा जी से कहा-

मै: ठीक है आपको जो करना है करो मेरे साथ. लेकिन आप ये बात किसी को नहीं बताओगे. बस हम दोनों के बीच रहेगी ये बात.

मामा जी: हां मैं तुमसे वादा करता हूँ कि मैं किसी को नहीं बताऊंगा.

इतना बोलने के बाद मामा जी मुझे किसिंग करने लगे. वो मेरे होंठो को अपने मुँह में लेकर चूसने लगे. मुझे शर्म आ रही थी तो मैंने आँखें बंद कर ली. फिर मेरे कपडे उतार दिए मामा जी ने. अब मैं उनके सामने ब्रा पैंटी में खड़ी थी. वो घुटनो के बल बैठ गए और मेरी पैंटी के ऊपर से मेरी चूत को चाटने लगे. फिर थोड़ी ही देर में मेरी पैंटी नीचे कर दी और अपनी जीभ से मेरी चूत को चोदने लगे. वो अपनी जीभ मेरी चूत के अंदर-बाहर कर रहे थे और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.

मेरी चूत गीली हो गयी थी और पानी छोड़ने लगी थी. मामा जी सारा पानी अपनी जीभ से चाट गए. फिर वो खड़े हुए और मेरी ब्रा निकाल दी. अब वो मेरे बूब्स के निप्पल्स को अपने मुँह में लेकर चूसने लगे और हाथो से बूब्स को दबाने लगे. मेरे मुँह से हलकी-हलकी अह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह की आवाज़ निकलने लगी. फिर मामा जी ने मुझे घुटनो के बल बिठा दिया और खुद खड़े हुए. फिर उन्होंने अपना लंड मेरे मुँह में दिया और मैं कुल्फी की तरह चूसने लगी. Mama bhanji ki chudai kahani

मामा जी के लंड का गुलाबी टोपा मुझे बहुत मज़ा दे रहा था और बहुत हार्ड भी था और गरम भी. मुझे लंड चूसने में बहुत मज़ा आ रहा था. मैंने उनका लंड करीब 8-10 मिनट तक अपने मुँह में लेकर चूसा. अब तो मेरे होंठ भी दुःख नहीं रहे थे. फिर मामा जी मुझे अपनी गोद में उठा कर अपने बैडरूम में ले गए. उन्होंने मुझे सीधी बेड पर लिटा दिया और मेरे पैर फैला दिए. फिर वो खुद मेरे ऊपर आ गए और मुझसे बोले-

मामा जी: पिंकी अब तुम तैयार हो? अब मैं अपना लंड तुम्हारी चूत में घुसाने वाला हूँ.

मै: हां मामा जी मेरी चूत भी तैयार है आपका लंड अपने अंदर लेने के लिए. लेकिन धीरे-धीरे से अंदर डालना जिससे मुझे मज़ा आये और दर्द न हो.

मामा जी: पिंकी तुम चिंता मत करो मैं चुदाई करने में एक्सपर्ट हूँ. तुम्हे इतना मज़ा आएगा की तुम्हारी चूत हमेशा मेरा लंड ही मांगेगी चुदवाने के लिए.

पिंकी: ठीक है मामा जी अब बहुत देर मत करो और डाल दो अपना लंड मेरी चूत में.

मामा ने भांजी को चोदा

और फिर मामा जी ने धीरे-धीरे से अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया. वैसे मेरी चूत गीली थी तो उनका लंड आराम से अंदर घुस गया और घपा-घप चुदाई चालु. मेरे मुँह से अब अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह उफ्फ्फ की सिसकियाँ निकलने लगी. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. Mama bhanji ki chudai kahani

मै: मामा जी चोदो मुझे चोदो मुझे बहुत मज़ा आ रहा है. और मामा जी भी नॉन-स्टॉप धक्के पर धक्का मार रहे थे मेरी चूत के अंदर. मेरी चूत गीली थी तो फ़च फ़च फ़च की आवाज़ भी निकल रही थी. और फिर हमने पोजीशन चेंज की. मैं डोगी स्टाइल में और मामा जी ने मेरे पीछे घुटनो के बल बैठ कर लंड मेरी चूत में घुसाया. अब मामा जी ज़ोर-ज़ोर से अंदर-बाहर कर रहे थे. उनका लंड मेरी चूत की गहरायी तक घुस रहा था और मुझे चरम सुख मिल रहा था. ऐसे ही मामा जी ने 5 से 6 मिनट तक चोदा और फिर पोजीशन चेंज करवाई.

नेक्स्ट पोजीशन में मामा जी सीधे लेटे और मैं उनके ऊपर उनका लंड अपनी चूत में लेकर ऊपर-नीचे होने लगी. ऐसे तो और ज़्यादा मज़ा आने लगा मुझे. मैं तेज़-तेज़ सिसकियाँ निकालने लगी. इस पोजीशन में मामा जी मेरे बूब्स भी दबा रहे थे और निप्पल चूस भी रहे थे. इससे मुझे कुछ ज़्यादा ही मज़ा आ रहा था और ऐसे ही मैं 5 मिनट के करीब ऊपर-नीचे हुई. फिर मामा जी के लंड ने मेरी चूत के अंदर ही पिचकारी छोड़ दी और मेरी चूत ने भी अपना पानी छोड़ दिया. अब हम दोनों शांत हो गए.

मैं मामा जी को कस कर लिपट गयी. फिर हम दोनों ने अपने-अपने कपडे पहन लिए और फिर मैं मामा जी के साथ चली गयी जहा मामा जी ने मेरी जॉब के लिए बात की थी. मुझे वहाँ जॉब मिल गयी शॉपकीपर की. फ्रेंड इससे आगे क्या हुआ इस कहानी के नेक्स्ट पार्ट में बताउंगी. और प्लीज मुझे कमेंट करना अगर मेरी ये कहानी आप सब को पसंद आयी हो तो. प्लीज प्लीज कमेंट करना मैं इंतज़ार करुँगी आपके कमैंट्स का.

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