हुमा एक हाउस वाइफ और मिश्रा पान वाला – 10
Panwala aur housewife ki chudai ki story:- पिछले पार्ट मे आपने पढ़ा कि हुमा मिश्रा को शहर छोड़ने ने रोकने के लिए उसके घर गई तो वहाँ मिश्रा ने हुमा को बहला फुसला के हुमा के ना ना करने के बावजूद खूब कसके चोदा। मिश्रा ने हुमा की इतनी दमदार चुदाई की थी कि चुदने के बाद जब हुमा मिश्रा के घर से निकली तो वह लंगड़ा कर चल रही थी। अब पढिए ये hindi sex story आगे
पिछला पार्ट यहाँ पढ़ें ==> हुमा एक हाउस वाइफ और मिश्रा पान वाला – 9
हुमा को अपने आप पर शर्म आ रही थी, वो सोचने लगी
हुमा तुझे शर्म नहीं आई, एक गैर मर्द के साथ ऐसा करते हुए, तुझे मौत क्यों नहीं आयी? बहोत सा पछतावा लेकर वो घर पर पहुंची। हुमा बहोत उदास थी।
अब हम थोड़ा पीछे जाकर मिश्रा और शांता के आखरी प्लान पर जाते है। प्लान ये था की शांता की एक विधवा सहेली, जिसका नाम सावित्री था उसको सैफ से चुदवाना था। सावित्री को भी पैसो की काफी ज़रुरत थी, तो वो सैफ से चुदने को तैयार हो गयी थी। पैसे सैफ नहीं मिश्रा देने वाला था, सावित्री को जब शांता ने हुमा को मिश्रा के घर भेजा था, उसी वक़्त उसने सैफ को कॉल कर दिया था।
शान्ता – हेलो मालिक।
सैफ – हाँ बोलो शांता डार्लिंग।
शान्ता – क्या बात मालिक आज बड़े मूड में लग रहे है?
सैफ – क्या करू जब से तूने मज़ा करवाया है मेरा दिल बार बार वही करने को कहता है।
शांता – तो आपको मज़ा करना है?
सैफ – हाँ आ जाऊँ क्या? तुम्हारी मालकिन बाहर गयी है क्या?
शांता – मालकिन बाहर गयी है आप आ जाईये आपके लिए एक, क्या कहते है उसे हाँ एक सरप्राइज है।
सैफ – क्या बात है सरप्राइज! अभी आता हु।
सैफ जब घर पंहुचा, तब हुमा मिश्रा के साथ बेड पर लेट चुकी थी, यहाँ सैफ घर पंहुचा तो देखा हॉल में शांता और एक औरत थी जो साड़ी पहने हुए थी। सैफ शांता के पास गया।
सैफ – शांता ये कौन है?
शांता – यही तो आप का सरप्राइज है।
सैफ – मै समझा नहीं।
शान्ता – अरे मेरे भोले मालिक ये मेरी तरफ से आपको तोहफा है।
सैफ – मतलब।
शांता – मालिक आज शांता नहीं इसके साथ मजे कीजिये।
सैफ – क्या बोल रही है तू? कौन है ये और मेरे साथ?
शान्ता – मेरी सहेली है और जाओ आज करो इसके साथ मजे।
सैफ उसको देखता है वो शांता से भी जायदा सेक्सी थी, वो सैफ को ही देख रही थी। शांता सैफ का हाथ पकड़ कर उस रूम में ले जाती है और उस औरत की तरफ देख कर बोलती है तू क्या देख रही है सावित्री, जा मालिक को खुश कर दे।
शांता सैफ को उस कमरे में छोड़ कर बाहर आती है और कमरे का दरवाज़ा बंद कर देती है।
अब हम फिर प्रेजेंट में आते है जैसे ही हुमा घर आयी, शांता बाहर डोर पर ही खड़ी जैसे पहरा दे रही हो। जैसे हुमा को देखा तो घबराने का झूठा नाटक करने लगी, हुमा ने उसे देख पूछा.
हुमा – अरे क्या हुआ? ऐसे क्यों खड़ी हो दरवाज़े पर डरी डरी?
शान्ता – वो वो मालकिन मुझे साहब ने यहाँ खड़ा करा है ताकि आप आये तो मै आपको बातो में लगाओ और हो सके तो कुछ देर घर के बाहर ही रोक लूँ।
हुमा – क्याआ क्या पहेलियाँ बुझा रही है? सच सच बता क्या हुआ है।
शांता – अब किस मुह से बताऊँ मालकिन आप खुद ही देख लो! आपके पति की कारस्तानी।
शांता हुमा को घर की बाहर की उस दिवार के पास लाती है जहा वो एडजस्ट फैन लगा हुआ था, जहा से उसने पहले भी सैफ को देखा था। शांता इशारे में चुप रहने का बोलकर पास में पड़े उस छोटे से स्टूल को वहाँ रख देती है जो उसने पहले ही रखा था, प्लान की मुताबिक. उस स्टूल पर खड़े रहकर जब हुमा अंदर झाँकती है उसकी आँखे बड़ी हो जाती है। अंदर का नजारा ये था कि वो औरत झुकी हुई थी और सैफ उसको पीछे से दनादन चोद रहा था। उस कमरे की थप थप की आवाज़ बाहर तक आ रही थी।
हुमा को फिर एक शॉक लगा, अब ये औरत कौन है? हुमा हड़बड़ा कर गिरने ही वाली थी की शांता ने उसको सहारा दिया और नीचे उतार दिया। हुमा शॉक थी शांता ने उसका हाथ पकड़ा और कॉलोनी का एक छोटा सा गार्डन था बच्चो के लिए, वहाँ कुछ सीट थे जहा ले जाकर शांता ने कहा-
शांता – मालकिन ये औरत कौन है यही सोच रही होंगी न आप? ये बेचारी विधवा है इसको मालिक ने 5000 रुपये दिए थे, बेचारी लौटा नहीं पायी तो मालिक ऐसे पैसे वसूल करते है। बहोत कमीना इंसान है मालिक।
हुमा आँखों मे आंसू लिए – आज तक पता ही नहीं चला सैफ इतना गिरे हुए इंसान है, कभी मुझे शक नहीं होने दिया और भी पता नहीं क्या क्या करते होंगे। खीज आती है मुझे उस इंसान पे।
अब हुमा टूट चुकी थी पूरी तरह, शांता ने उसको अपनी बातो से सहारा दिया। असल बात तो ये थी जखम देने वाली भी वो और मरहम देने वाली भी। वो शांता ने हुमा से कहा।
शांता – मुझे बहन कहती है ना?
हुमा – हाँ।
हुमा उसके गले लग जाती है और कहती है तू बहन से भी ज्यादा है मेरे लिए, हर वक़्त तू सहारा देती है।
शांता – मै नहीं जीजू आपको सहारा देते है।
हुमा – हैरानी से कौन जीजू।
शांता अरे मेरी प्यारी दीदी, मै आज से आपको दीदी बुलाऊंगी चलेगा ना?
हुमा – हाँ मगर किस जीजू की बात कर रही है? वो जो अंदर अपनी हवस एक मजबूर औरत के साथ निकाल रहा है? दिक्कर है उस जीजू पर.
शांता – दीदी मेरी प्यारी भोली दीदी मै उस शैतान की नहीं मिश्रा जी की बात कर रही हूं वो है मेरे असली जीजू है।
हुमा को शर्म आ जाती है धत्तत्त चुप काहे के जीजू? कैसे जीजू? कुछ भी मत बोल।
शान्ता हुमा को अपने हाथ की कोहनी मारते हुए कहती है, दीदी झूठ न कहो, वैसे क्या क्या हुआ आज बताओ मेरे जीजू ने क्या किया आपके साथ?
हुमा भूल गयी थी उसके पति की बेवफाई, वो तो अब शर्मा रही थी शांता की बातो से।
हुमा – धत्त्त चुप कर अभी! कुछ भी बोलती रहती है।
शांता – बोलो भी दीदी अब हमसे भी क्या छुपाना।
हुमा को शर्म तो बहोत आ रही थी मगर शांता भी बड़ी खिलाड़ी थी, आखिर उसने हुमा से उगलवा ही लिया।
शांता – ओह्ह्ह्ह क्या बात है मतलब जीजू ने तो बिल्ली मार ही ली।
तभी शांता को कॉल आया, उसने कॉल लिया कॉल सैफ का था।
शान्ता – हाँ मालिक।
सैफ – सावित्री चली गयी, मेरा हो गया, मज़ा आ गया मेरी जान! क्या मस्त मॉल दिलवाया तुमने।
शांता कुछ नहीं बोली हुमा थी साथ।
सैफ – मै जा रहा हु।
इतना कह कर सैफ कॉल काट देता है, कॉल कट जाने के बाद।
शांता – मालिक अब मत डाँटिए, मै यही हूं, हुमा मालकिन आयी थी बड़ी मुश्किल से उनको घर से दूर किया।
हुमा समझ गयी थी, वो फिर गुस्से में आने लगी। शांता ने बात करके कॉल कट कर दिया, कॉल तो पहले से कट था। शान्ता ने हुमा के सामने फिर एक बार झूठा नाटक किया।
हुमा – शांता कैसे घटिया इंसान का साथ बंध गयी हूं मै।
शांता – दिल छोटा न करो मालकिन।
हुमा – क्या मालकिन दीदी कहो।
शांता – हाँ दीदी कहूँगी मगर एक शर्त पर।
हुमा – कैसी शर्त?
शांता आँख मारते हुए कहती है मिश्रा जी को जीजू कहुंगी।
हुमा – शैतान तू फिर शुरू हो गयी।
शांता मुस्कुरा देती है, हुमा भी मुस्कुरा देती है। दोनों घर जाते है हुमा का मूड शांता ने ठीक कर दिया था, अपनी चिकनी चुपड़ी बातो से। ये दिन भी गुजर गया। रात को हुमा को सैफ की शकल भी देखनी नहीं थी, तो वह खाना टेबल पर रख कर सो गयी। कुछ ही दिनों में बहोत दूरिया बन गयी थी सैफ और हुमा में। यु कहे तो बना दी गयी थी, मिश्रा पानवाला और शांता ने। सैफ ने भी इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, उसको लगा की शायद तबियत ठीक नहीं होगी हुमा की।
हुमा को जितना अपने शौहर से नफरत हो रही थी, वहीं कही न कही मिश्रा की तरफ झुकाओ और रही सही कसर शांता ने कर दी थी। बार बार मिश्रा का नाम लेकर जीजू जीजू कहकर छेड़ती रहती थी।
एक दिन, रात बीत गई, सुबह सैफ रेडी होकर चला गया, शांता भी उसके टाइम पर आ गयी। शांता और हुमा की बात चल रही थी की तभी डोर बैल बजी टिंग टिंग।
शांता – कौन आया होगा? अभी मै देखती हु।
इतना कह कर शांता ने डोर ओपन किया, सामने मिश्रा खड़ा था। शांता ने उसको आँख मार दी और कहा.
आईये भय्या।
शान्ता और मिश्रा का ही प्लान था, शांता ने ही कॉल करके बुलाया था मिश्रा को।
हुमा – कौन है शांता?
शान्ता – मेरे जीजू आये है।
हुमा उठ कर खड़ी हो जाती है।
शांता आगे और मिश्रा पीछे पीछे हॉल में दाखिल हो जाते है, मिश्रा शर्माने की एक्टिंग करते हुए. अरे क्या जीजू लगा रखा है कौन जीजू किसका जीजू?
शांता – आप मेरे जीजू और मालकिन मेरी दीदी है आज से।
हुमा – चुप शैतान!
इतना कह कर शर्मा जाती है। हुमा जब शर्मा कर निचे देखती है तो शांता मिश्रा को आँख मार देती है और मिश्रा शांता को।
मिश्रा – तू तो मेरी छोटी बहन है जीजू क्यों बोलती है।
शांता – अगर मै तुम्हारी छोटी बहन हूं और मालकिन की भी तो तुम उस हिसाब से मालकिन के भाई हुए।
मिश्रा – कुछ भी बोल मगर ऐसा मत बोल।
शान्ता – क्यों न बोलु।
मिश्रा – ठीक है जीजू ही बोल।
हुमा को बहोत शर्म आ रही थी।
शांता हुमा को कोहनी मारते हुए – जीजू घर आये कुछ खातिर वातिर नहीं करनी क्या?
हुमा – बैठिये न। मिश्रा को देख कर कहती है।
शांता – आग दोनों जगह बराबर लगी है कितने प्यार से कहा बैठिये न।
हुमा – चुप कर अब तु।
शान्ता – जीजू क्या पिएंगे आप बताओ?
हुमा – जूस बना दे।
शान्ता – ओह्ह जूस क्या बात है दीदी को जीजू की पसंद भी पता है।
शांता इतना कह कर किचन में जाती है, मिश्रा हॉल में बैठ जाता है। हुमा अब भी शर्मा रही थी। मिश्रा ख़ामोशी को तोड़ते हुए भाभी जी क्या बात है बड़ी चुप है?
हुमा – जी जी वो।
मिश्रा – अगर मेरा आना आपको अच्छा नहीं लगा तो मै चला जाता हु।
हुमा – जी जी वो ऐसी बात नहीं है।
मिश्रा – कल जो हुआ उसके लिए माफ़ कर दीजिये मै बहक गया था।
हुमा जोकी कल वाली चुदाई से नाराज़ होना चाहिए थी, वो शर्मा रही थी वजह थी शांता की चिकनी चुपड़ी बातें। हुमा चुप थी।
मिश्रा – भाभी जी आप की चुप्पी को मै आपकी नाराज़गी समझ कर जाता हु।
हुमा – जी जी ऐसी बात नहीं, कल जो हुआ वो नहीं होना था, मगर उसमे मेरी भी गलती थी मै भी ज़िम्मेदार हूं इस बात के लिए।
तभी शांता आयी अरे जीजू दीदी आप यहाँ बैठे है? हॉल का ac कुछ ठीक नहीं चल रहा, दीदी आप जीजू को बैडरूम में ले जाईये, बेचारे हमारे जीजू कुछ बोलेंगे नहीं गर्मी में बैठे रहेंगे।
हुमा – अरे अभी तो चल रहा था ac हॉल का।
शान्ता – नहीं अभी अभी ख़राब हुआ है।
ख़राब क्या शांता ने ही फ्यूज निकाल दिया था।
हुमा – आप को गर्मी लग रही होगी?
मिश्रा – ठीक है।
शांता – क्या ठीक है चलिए अंदर बैडरूम मे।
मिश्रा शांता की एक्टिंग से बहोत खुश था, वो मन ही मन साली इस शांता की जितनी तारीफ करू कम क्या सेटिंग कर रही है।
हुमा अब भी शर्मा रही थी।
आगे क्या हुआ पढ़ें अगले पार्ट मे।
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