लौडा घर पे ही है 1
Bhabhi ki chut par lund ghiskar pani nikala:- दोस्तों, मैं लाउंज रूम में बैठा टीवी देख रहा था कि तभी लैंडलाइन की घंटी बजी। मैं फ़ोन उठाने के लिए उठा और जैसे ही रिसीवर उठाया मेरे कानों में आवाज़ पड़ी।
हेलो सपना मेरी जान कैसी हैं।
मैं फ़ोन वापस रखने ही वाला था कि दूसरी आवाज़ मेरे कान में पड़ी।
घंटा ठीक हूँ। तूने साली कल पूरे प्रोग्राम की माँ चोद दी…..
Bhabhi ki chut par lund ghiskar pani nikala
ये आवाज़ किसी और की नहीं बल्कि मेरी मॉम की थी जिनका नाम है सपना। वैसे तो मेरी मॉम गाँव की हैं लेकिन पिछले 22 साल से हम लोग दिल्ली में रह रहे हैं और इसका सबसे ज़्यादा असर मेरी मॉम पर पड़ा जिन्होंने अपने आपको बिल्कुल यहाँ की अबोहवा में ढाल लिया। मेरी मॉम वैसे तो 42 साल की हैं पर देखकर कोई नहीं कह सकता कि ये 3 बच्चों की माँ हैं और 30 से ज़्यादा हैं।
कॉल करने वाली मॉम की बेस्ट फ्रेंड थी निशा आंटी।
निशा: छोड़ ना यार गुस्सा। अच्छा तेरा फ़ोन क्यों ऑफ है।
मॉम: फ़ोन की भी माँ चुद गई है, मेरा मूड ऑफ है। अब बता तूने कॉल क्यों लिया।
निशा: यार नहीं बन पाया प्रोग्राम, अच्छा चल आई एम सॉरी, चल बाहर लंच पे चले..
मॉम: आज मेरा हसबैंड आने वाला है।
निशा: तो फिर किस बात की टेंशन, कल नहीं हुआ तो आज हो जाएगा।
मॉम: हरामज़ादी, अगर मेरा हसबैंड कुछ कर पाता तो क्या मैं तुझ पर डिपेंडेंट रहती। एक तो काम नहीं करा ऊपर से रंडी ज़ाले पे नमक छिड़क रही है….
निशा: ओह्होoooo इतना गुस्सा कामिनी।
मॉम: और नहीं तो क्या इतने मूड से पूरा प्रोग्राम बनाया था और तेरी उस चिनाल फ्रेंड रोहिणी ने एंड टाइम पे खड़े लंड पे धोखा दे दिया।
निशा: अब गुस्सा थूक, मैं कुछ करती हूँ।
मॉम: क्या करेगी तू, तेरे पास तो तेरा ड्राइवर है ना, साली अभी थोड़ी देर में उसके लंड पे उछलेगी और यहाँ मैं उँगली से काम चलाऊँगी।
निशा: तो आजा तू भी कुद लेयो उसके लोडे पे। मैंने तुझे मना किया है क्या।
मॉम: मुझे नहीं कुदना उसके चूतिये के लोडे पे, पहले एन्जॉय करेगा फिर बाद में ब्लैकमेल। और हाँ उस रोहिणी ने पेमेंट ट्रांसफ़र कर दी है।
निशा: चलो पैसे तो वापस आए।
मॉम: क्या खाक साली से पेनल्टी लेनी चाहिए, फ़ोटो तो ऐसे भेजे थे जैसे फ़ोटो में से ही सारे लंड निकाल के चोद डालेंगे। साली दो आदमी अरेंज नहीं कर पाई। कितना मन था पूरी रात चुदने का। अर्सा हो गया ढंग से चुदे हुए। इतनी गर्मी है ना अंदर की एक दो आदमी तो झेल भी नहीं पाएँगे मुझको।
निशा: हँसते हुए इतनी तेज़ बोल रही है। किसी ने सुन लिया तो।
मॉम: मैं अपने रूम में हूँ और घर पर कोई नहीं है (मॉम को नहीं मालूम था कि मैं घर पर ही हूँ)।
निशा: चल अब गुस्सा थूक, कभी और बनाते हैं प्रोग्राम।
मॉम: क्या यार, चल मैं आती हूँ तेरे ऑफिस थोड़ी देर में।
निशा: ओके चल आजा।
ये सुनकर मॉम ने फ़ोन रख दिया और फिर मैंने।
लेकिन जो कुछ सुना उसके बाद तो मेरे होश उड़ गए। मेरी सोचने समझने की शक्ति खत्म सी हो रही थी। लेकिन मेरा लंड खड़ा हुआ था ये सोच-सोचकर कि मेरी मॉम और निशा आंटी कल कोई प्रोग्राम बनाके चुदने गई थीं और मेरी मॉम तो पूरी रात चुदना चाहती थी। क्या पापा मॉम को सैटिस्फ़ाई नहीं कर पाते। मैं अपनी मॉम को इमेजिन करने लगा और अपने लंड को शॉर्ट्स के ऊपर से सहलाने लगा। आज से पहले मैंने कभी भी अपनी मॉम के बारे में ऐसा नहीं सोचा था हाँ पर निशा आंटी को सोचके कई बार मुठ मारी थी। और मारूँ भी क्यों न वो एक नंबर आइटम थी और हमेशा मेरे से हेल्दी फ़्लर्टिंग करती थी जो हमेशा मेरे लंड को खड़ा कर देती थी। लेकिन कभी आगे बढ़ने का मौका नहीं मिला।
मुझसे बरदाश्त नहीं हो रहा था मैं भागके लॉन्ड्री में घुस गया और अपना हिलाने लगा। तभी मुझे वहाँ वॉशिंग मशीन में कुछ दिखा।
ओएमजी ये तो मॉम की ब्राज़ हैं और मैं उन्हें उठाके सूँघने लगा और अपना हिलाने लगा। कुछ अलग ही एहसास हो रहा था। आज से पहले हिलाने में इतना मज़ा कभी नहीं। मेरा लंड आज से पहले इतना हार्ड कभी नहीं हुआ और मेरे हाथ हिलाते समय कभी इतने तेज़ नहीं चले और मैं क्या बड़बड़ा रहा था मुझे भी नहीं पता बट आई वाज़ फ़ीलिंग एक्साइटेड। मैं मॉम को इमेजिन करके बोल रहा था सारी रात क्या तुझे तो मैं इस लंड पे झूला झुलाऊँगा। इतना चोदूँगा कि तू मेरे आगे ठहर नहीं पाएगी। तुझे कुतिया बनाके पूरे घर में पेलूँगा। जाने क्या-क्या सोच रहा था, वैसे मैं वर्जिन नहीं हूँ, तीन औरतों को और एक लड़की की चोद चुका हूँ (जिनका इंट्रोडक्शन बाद में बताऊँगा)।
मै बस झड़ने वाला था और मेरे मुँह से निकला “सपना मेरी जान” और मेरा झड़ गया। इतना झरा कि अगर एक औरत की चूत में इतना पानी डाला जाए तो कम से कम तीन बच्चे तो पैदा होंगे। मॉम की ब्रा मेरे मुँह में थी जैसे मैं उनके बूब्स चूस रहा हूँ। पूरे कप्स ब्रा के गीले हो गए थे। मैंने जल्दी से उस ब्रा को अपने अंडरवियर में डाला और बाहर निकला। मॉम की ब्रा मेरे अंडरवियर पर मुझे बहुत सेक्सी फ़ील कर रही थी। मैं अपने रूम की तरफ़ जा ही रहा था कि मुझे किसी ने आवाज़ दी।
आरुष….. ये है मेरा नाम। मैं 20 साल का हूँ और फ़िलहाल मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहा हूँ। वैसे तो मेरा मन इंजीनियर बनने का था बट फ़ैमिली बिज़नेस के लिए मुझे मैनेजमेंट जॉइन करना पड़ा। आम यंगस्टर्स की जैसे मेरी भी ज़िंदगी है फ्रेंड्स के साथ चिल आउट करना, लड़कियों को इंप्रेस करना और अगर हाथ आ जाए तो चुदाई भी। वैसे मैं पढ़ाई में भी ठीक हूँ नॉट एक्स्ट्राऑर्डिनरी बट फ़ार बेटर दैन एवरेज। मुझे फ़िट रहना का शौक है।
ये आवाज़ मॉम की थी।
मॉम: आरुष तुम घर में हो? कॉलेज क्यों नहीं गए?
मैं: मॉम आज कॉलेज में कुछ कल्चरल फ़ेस्ट है और मुझे इस भीड़-भाड़ से चिढ़ है।
मॉम: बेटा ये कॉलेज फ़ेस्ट तो एन्जॉय करने के लिए होते हैं। यही टाइम है जब तुम नए लोगों से मिलते हो। यू हैंगआउट विद योर फ्रेंड्स और नई-नई लड़कियाँ भी मिलती हैं …. दोस्त बनाने को।
मैं: क्या मॉम आप भी।
मॉम: अरे यार चिल मार और अपनी लाइफ़ एन्जॉय कर, नहीं तो और दो साल बाद तेरे पापा तुझे बिज़नेस में डाल देंगे तो फिर मिस करेगा ये दिन।
मॉम बिल्कुल सही बोल रही थीं और मुझे लगा कि शायद मुझे जाना चाहिए।
मैं: आप ठीक बोल रही हो एटलीस्ट फ्रेंड्स के साथ तो हैंगआउट कर ही सकता हूँ।
मॉम: दैट्स लाइक माय बेबी, और सुनो मैं निशा के यहाँ जा रही हूँ शाम तक आ जाऊँगी और हाँ जाते हुए ये इस फ़ोन को ज़रा दिखा दो कल से ऑन ही नहीं हो रहा। अगर ख़राब हो गया हो तो प्लीज़ मेरे लिए एक अच्छा फ़ोन लेके आना। टेक माय कार्ड विद यू।
ये बोलके मॉम आगे निकल गईं और मैं मॉम को पीछे से देखने लगा। उनकी गाँड की बनावट और चलने से जो थिरकन उनकी गाँड में आ रही थी उससे मेरा लंड वापस एक्शन में आ गया था। उस क़ातिलाना वॉक से मैं नज़र नहीं हटा पा रहा था। ऐसे लग रहा था कि वो गाँड मुझे बुला रही हो और मुझसे कह रही हो कि मुझे प्यार करो, मुझे रगड़ो, मसलो और मेरी मार लो। व्हाट एन एस….
मैं मॉम की गाँड को निहार रहा था और अपने लंड तक हाथ लेके ही जाने वाला था कि मुझे एक शॉक लगा। मॉम पीछे मुड़ीं और अपनी लेफ्ट आई विंक कर दी मुझे देखके। आज से पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था।
और वो चली गईं। मेरा माथा भन्ना गया और ये लंड बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था। मैं जल्दी से बाथरूम में गया और अपने कपड़े निकाल दिए और मेरे हाथ में फिर मॉम की ब्रा आ गई।
क्या लगती होंगी वो इससे पहनकर और मैं उस ब्रा को अपने मुँह पे रख लिया और उसकी स्मेल को महसूस करने लगा। उसमें से मॉम की ख़ुशबू मुझे पागल कर रही थी और मेरे हाथ मेरे लंड को मथने लगे। मैं उस स्मेल को महसूस कर रहा था, मुझे मॉम के जिस्म का नशा हो गया था और मैं डिस्चार्ज होना चाह रहा था जिससे मुझे सुकून मिले। मेरे हाथ और तेज़ी से लंड पे हिलने लगे और मैं डिस्चार्ज होने के बहुत क़रीब था मैं मॉम की ब्रा को अपने लंड पे लपेट लिया ऐसा लग रहा था मानो मैं मॉम को बूब फ़क दे रहा हूँ। मैं झड़ने के बहुत क़रीब था।
मैं: मॉम मैं आ रहा हूँ, सँभालो मेरा लोडा.. आह्ह्हआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आई लव यू मॉम, वाना फ़क यू लाइक ए बिच…….आआआह्ह्ह्सससससससससस और मैं झड़ गया।
कोई 5 मिनट तक मैं आँखें बंद करे इस पल को महसूस करने लगा और फिर मुझे होश आया।
मैं नहाया और उस ब्रा को अपने रूम में छुपा दिया। ब्रा की सिर्फ़ हाथ ही लगाया था कि महाराज फिर अटेंशन हो गए। मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि इन महाराज का क्या करूँ। साला बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था। मैंने सोचा इसका बंदोबस्त करना पड़ेगा। मैं अपना मोबाइल उठाया और टाइप किया “बाज़ घोंसले में आना चाहता है” और सेंड कर दिया और रिप्लाई का वेट करने लगा। कोई 2 मिनट बाद मोबाइल बीप किया मैंने देखा तो जवाब आया हुआ था और लिखा हुआ “घोंसला नं. 2 खाली है। बाज़ को चिड़िया वहीं मिलेगी”। मैं खुश हो गया और लंड को सहलाके बोला बेटा तेरे इंतज़ाम हो गए हैं।
मैंने गाड़ी उठाई और घोंसला नं. 2 (घोंसला नं. 2 मतलब हमारी फ़ैमिली का फ़ार्म हाउस) की तरफ़ चल पड़ा। मैं पहुँचने ही वाला था कि फिर फ़ोन में मैसेज बीप हुआ मैंने देखा तो लिखा था “चिड़िया घोंसले में पहुँच चुकी है”। मैसेज पढ़के मैंने कार की स्पीड और तेज़ कर दी और 10 मिनट में घोंसला नं. 2 के गेट पे था। मैंने कार्ड को सेंसर पे लगाया और गेट खुल गया। मैंने पोर्च में गाड़ी खड़ी करी और मेन डोर पे कोड एंटर किया और गेट खुल गया।
मैं घर में एंटर हुआ तो देखा वहीं पर एक जोड़ी सैंडल पड़े हैं और थोड़ी दूरी पर कोट। तभी एक मैसेज बीप हुआ लिखा था शूज़ उतारो। मैंने अपने शूज़ उतारे और आगे बढ़ा जहाँ पर कोट पड़ा था तभी दोबारा बीप हुई मैंने देखा तो लिखा था शर्ट उतारो। मैंने शर्ट उतारी और सीढ़ियों की तरफ़ बढ़ने लगा (क्योंकि सारे रूम्स ऊपर ही थे) बीच सीढ़ियों पे मुझे स्कर्ट दिखाई दी। मैंने स्कर्ट उठाई और उसे सूँघने लगा तभी फिर से फ़ोन बीप हुआ और लिखा था जीन्स उतारो। मैंने अपनी जीन्स उतारी और मास्टर बेडरूम की तरफ़ बढ़ने लगा। गेट बंद था मैंने धीरे से गेट खोला और अंदर का माहौल ही मेरा खड़ा करने को बहुत था। स्लो म्यूज़िक चल रहा था वेरी लाइट एंड वेरी स्लो। बेडसाइड टेबल्स पर दो ग्लास और वाइन की बोतल और बेड पे बैठी थी शीतल।
शीतल यानी कि शीतल भाभी, ये हमारे ख़ानदान की बड़ी बहू हैं। ये हमारे ताऊजी के बेटे प्रकाश की वाइफ़ हैं। बात यूँ निकली कि शीतल के पापा हमारी कंपनी के एम्प्लॉई हैं और ताऊजी ने मौक़े की नज़ाकत को समझते हुए शीतल का हाथ अपने नशेड़ी बेटे के लिए माँग लिया और शीतल के पापा मना न कर सके कि उनकी बेटी इतने बड़े घर में जाएगी। और हमारे बड़े बुज़ुर्गों का मानना है कि जो कुछ ख़राब है वो शादी के बाद ठीक हो जाएगा। सच में वो लोग ऐसा बिलीव करते हैं और हमें भी यक़ीन दिलाने की कोशिश करते हैं। शीतल और मेरा रिलेशन पिछले सिक्स मंथ्स से चल रहा है। इसकी शुरुआत कैसे हुई तो पहले उसपे चलते हैं।
मैं बहुत छोटे से बोर्डिंग में रहा हूँ। हमारी बोर्डिंग में साल में सिर्फ़ 20 डेज की ही छुट्टी मिलती थी। मेरा पहला एनकाउंटर या मुलाक़ात शीतल से उसकी शादी वाले दिन हुआ। कोई ख़ास बात नहीं हुई हमारे बीच। मैं वापस बोर्डिंग आ गया और शीतल अपनी लाइफ़ में। जब मेरा बोर्डिंग खत्म हुआ और मैं वापस दिल्ली आ गया तो हमारी मुलाक़ात होने लगी। मैं अब बड़ा हो गया था चीज़ें समझने लगा था। शीतल एन्जॉय तो करती थी फ़ैमिली के साथ लेकिन एक उदासी उसके हसीन चेहरे पे हमेशा रहती। मैं समझ तो रहा था कि क्या खटक रहा है उसको लेकिन शायद उसने खुद को हालत के भरोसे छोड़ दिया था। क्योंकि मेरा मानना ये है कि जब तक आप खुद की मदद नहीं करते कोई आपकी मदद नहीं कर सकता।
अब आता हूँ वो दिन जिस दिन इस रिश्ते को नया मुक़ाम मिला। होली का दिन था, हम सब लोग फ़ैमिली और कुछ क्लोज़ फ़ैमिली फ्रेंड्स के साथ होली सेलिब्रेट कर रहे थे।
मैं: मॉम भाभी कहाँ हैं।
मॉम: बेटा यहीं कहीं होगी, देख ले।
ये मेरा फ़र्स्ट टाइम था कि मैं अपनी भाभी के साथ होली खेलने वाला था। आई वाज़ सुपर एक्साइटेड। मैंने नौकरों से पूछा तो एक बोला कि बहुरानी को ऊपर जाते हुए देखा है।
मैं जब ऊपर पहुँचा तो भाभी एकदम उदास खड़ी थीं, शायद किसी कोने में उनकी आँखों से आँसू भी बह रहे थे।
मैं: तो आप यहाँ चुपके बैठी हैं, हम वहाँ नीचे होली खेलने के लिए आपको ढूँढ रहे हैं और आप यहाँ बैठके हमें तड़पा रही हैं।
शीतल: आरुष मेरा बिल्कुल मूड नहीं होली खेलने का, प्लीज़।
मैं: ऐसे कैसे नहीं है, आज तो मैं आपको नहीं छोड़ूँगा।
शीतल: प्लीज़ आरुष ऐसा कुछ मत करो, मैं होली नहीं खेलती।
मैं: नहीं खेलती तो आदत डाल लो, क्योंकि हम नहीं मानने वाले।
मैं किसी तरह उन्हें चीयर अप करना चाहता था। मैं उनकी तरफ़ भागा और वो मुझसे बचने के लिए आगे भागीं।
फिर एक वॉटर टैंक के पीछे वो खड़ी हो गईं।
शीतल: आरुष मान भी जाओ यार, प्लीज़। अब उनकी आवाज़ में वो कन्विक्शन नहीं था।
मैं: आज तो आपको मुझसे कोई नहीं बचा सकता। आज तो आप गईं।
मैंने अपनी जेब में हाथ डाला और मुट्ठी भर गुलाल लेके उनकी तरफ़ फेंक दिया।
इससे पहले वो कुछ समझ पातीं मैंने उन्हें पीछे से पकड़ लिया और लगाने लगा रंगने।
मुझे होली खेलने का इतना जोश चढ़ा हुआ था कि मुझे ये भी न पता लगा कि मेरा कौन सा बॉडी पार्ट उनसे कहाँ टच हो रहा है। मेरा हाथ उनके बूब्स को टच कर रहा था और मेरा लंड उनकी गदराई गाँड में टच हो रहा था। इस छीना-झपटी में कब मेरा लंड खड़ा हो गया मुझे पता ही नहीं चला और उसकी चुभन शीतल को महसूस होने लगी। जिस चीज़ से वो पिछले चार साल से महरूम थीं वो उन्हें अचानक मिली वो भी अपने देवर से। शीतल कब अपनी गाँड पीछे को ढकेलने लगीं ये हम दोनों से कोई नहीं जानता।
शीतल मेरे लंड को महसूस करना चाहती थीं और वो अपने हाथ को मेरे हाथ पे रखके प्रेस करने लगीं जिससे मुझे उनकी चुचियों का एहसास होने लगा। इस रगड़ा-रगड़ी में शीतल एक्साइट होने लगीं और उनकी साँसें तेज़ी से चलने लगीं। जब मुझे एहसास हुआ कि क्या हो रहा है तो मुझे लगा कि शायद मैं भावनाओं में ज़्यादा बह गया हूँ। मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ तो मैंने एकदम से शीतल को छोड़ दिया और पीछे हट गया। मैं कुछ बोलूँ इससे पहले शीतल की आँखों ने सब कुछ बोल दिया मानो वो कह रही हों क्यों पीछे हट गए, कुछ छीन ली मुझसे ख़ुशियाँ। शीतल की आँखों में एक नशा सा था और उनकी साँसें बहुत तेज़ चल रही थीं….
मैं माहौल को थोड़ा लाइट बनाने के लिए बोलता हूँ होली है भाई होली है बुरा न मानो होली है।
शीतल के चेहरे पर आज पहली बार मैंने एक स्माइल देखी।
शीतल: आरुष अब तुम नहीं बचोगे। देखो मैं तुम्हारा क्या हाल करती हूँ।
मैं शीतल को अँगूठा दिखाता हुआ भागता हूँ और वो मेरे पीछे। मैं उल्टा चल रहा था। वो वहीं से एक थाली में से गुलाल उठाती हैं और मेरे पीछे आती हैं। मैं दीवार तक पहुँच जाता हूँ जहाँ से अब मेरे पास आगे जाने का कोई रास्ता नहीं है। तभी शीतल भागते हुए अपना बैलेंस खोती हैं और उसको बचाने के चक्कर में आगे बढ़ता हूँ और वो सीधे मेरी चेस्ट से टकराती हैं और हम दोनों नीचे ज़मीन पे गिरते हैं पहले मैं और वो मेरे ऊपर। हम दोनों एक-दूसरे की आँखों में देख रहे थे। शीतल के बूब्स मेरी चेस्ट में धँसे हुए थे और शायद मेरा लंड उनको उनकी चूत पे महसूस हो रहा था।
न शीतल कुछ बोल रही थीं न मैं। न शीतल ने उठने की कोशिश की और न मैंने। हम दोनों को नीचे का म्यूज़िक शोर-शराबा कुछ नहीं सुनाई दे रहा था सुनाई दे रही थी तो बस दोनों की साँसें। हम धीरे-धीरे एक-दूसरे के और क़रीब आते जा रहे थे। हम इतने क़रीब आ गए थे कि एक-दूसरे की साँसों को फ़ील कर रहे थे और अब सिर्फ़ मिलना बाक़ी रह गया था तो हमारे होठों का। मैं शीतल के लिप्स की तरफ़ बढ़ने लगा और शीतल भी। हम दोनों के लिप्स काँप रहे थे। मैंने शीतल की आँखों में देखा और उसने अपने लिप्स आगे किए और आँखें बंद कर लीं जैसे उसने मौन स्वीकृति दी हो। मैंने शीतल के नीचे वाला लिप्स अपने लिप्स में दबाया और चूसने लगा।
शीतल ने अपनी आँखें बंद ही रखीं। मैंने शीतल के नीचे वाला लिप्स छोड़ा और शीतल को देखने लगा। शीतल ने पल भर के लिए अपनी आँखें खोलीं मुझे देखा और अपने लिप्स में मेरे लिप्स क़ैद कर लिए। मैंने इस किस के दौरान शीतल को पलटा दिया अब मैं ऊपर और शीतल नीचे। शीतल के हाथ मेरे बालों में आ गए और उनको वो सहलाने लगीं। कब उनकी बाँहों ने मुझे अपनी गिरफ़्त में ले लिया पता ही नहीं चला। मेरे हाथ भी शीतल की बॉडी पर चलने लगे और मैंने शीतल के बूब्स को अपनी मुट्ठी में ले लिया। अब मैं बारी-बारी शीतल के दोनों बूब्स को प्रेस कर रहा था। उनके निप्पल महसूस हो रहे थे जो कि अब टाइट हो गए थे। मैं कभी बूब्स को प्रेस करता और कभी उनके निप्पल को छेड़ता। मेरा लंड फ़ुल टाइट हो चुका था।
मैं शीतल की चूत पे अपना लंड घिसने लगा लेकिन हमारी किस चालू थी। मैंने एकदम से अपनी कमर रोक दी पर शीतल अभी भी अपनी कमर हिला रही थीं। उनकी चूत ऊपर उठकर मेरा लंड ढूँढ रही थी। शीतल ने एक पल के लिए फिर आँख खोली और मेरी आँखों में देखते हुए उसने अपने हाथ मेरी गाँड पे रखे और उसे नीचे दखलने लगी और फिर हम एक-दूसरे में समा गए। थोड़ी ही देर में शीतल की गाँड हिलाने की स्पीड तेज़ हो चली मैं समझ गया कि शीतल अब झड़ने के बिल्कुल क़रीब हैं। शीतल की साँसें तेज़ चलने लगीं और उनके नाखून की चुभन मुझे मेरी पीठ पे। शीतल ने एकदम से मेरे लिप्स छोड़ दिए।
शीतल: आआह्हआआह्ह्ह्ह्ह्ह्हआ….आआह्ह्ह्ह्हआह्हआआआआआ
शीतल झड़ चुकी थीं और उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में जकड़ लिया। मैं सिर्फ़ शीतल को देख रहा था और वो मुझसे नज़रें चुरा रही थीं। मैं अभी भी अपना लंड शीतल की चूत पे घिस रहा था क्योंकि मेरा तो कुछ हुआ नहीं था। तभी किसी की आवाज़ आई शीतल ओ शीतल।
शीतल ने आवाज़ सुनते ही मुझे अपने ऊपर से धकेला और उठकर भाग खड़ी हुईं। नीचे उतरने से पहले शीतल ने मुझे देखा, हमारी आँखें मिलीं और वो नीचे चली गईं।
शीतल को बोलने वाली कोई और नहीं उनकी सास थी यानी मेरी ताईजी।
आगे क्या होता है पढ़ें अगले पार्ट में।

Are yr kya adhure me chod dete ho