एक जवान प्यासी बीवी 3

Newly married wife ki chudai ke kisse:- अगले दिन अतुल के जाने की सारी तैयारी हो चुकी थी। जैसे ही घर के बाहर टैक्सी आई, तो ध्रुव ने बैग्स को टैक्सी में रख दिए और अतुल अपने मम्मी-पापा के पैर छूकर टैक्सी में बैठ गया। उसने सुप्रिया को बाय तो क्या उसकी तरफ़ ठीक से देखा भी नहीं। सुबह कमरे में ही उसने सुप्रिया को चूमते हुए बाय बोल दिया था, पर सुप्रिया को लगा कि वो अभी भी जाने से पहले उसे बाय तो बोलेगा।

इस कहानी का पिछला पार्ट यहाँ पढ़ें ==> एक जवान प्यासी बीवी 2

Newly married wife ki chudai ke kisse sex story hindi

टैक्सी में उसे छोड़ने अतुल के पापा और ध्रुव भी चले गए। अर्पिता भी तभी अपने ससुराल के लिए निकल पड़ी। उसने सुप्रिया को गले लगाकर बाय बोला और उसे उदास न होने की सलाह दी।

सबके जाने के बाद, सुप्रिया अपने कमरे में आ गई और बेड पर लेटकर रोने लगी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो अतुल के बिना यहाँ कैसे रहेगी। रोते-रोते, उसकी आँख लग गई और उसे पता ही नहीं चला कि कब 2 घंटे बीत गए। उसकी आँख खुली तो वो अपना चेहरा धोकर नीचे चली गई।

नीचे पहुँचकर उसने देखा कि ध्रुव भी रेलवे स्टेशन से वापस आ गया था। वो मम्मी जी और चाची के साथ किचन के काम में लग गई। अगले कुछ दिन कुछ ऐसे ही चलते रहे, सुबह उठकर तैयार होकर किचन के कामों में हेल्प करती। फिर दिन होते-होते ध्रुव कॉलेज से आ जाता और घर की रौनक बढ़ा देता और फिर शाम होते-होते कोई न कोई और आ ही जाता और हँसी-मज़ाक में पूरी शाम निकल जाता।

बस एक रात थी जो सुप्रिया को अकेले अपने कमरे में बितानी होती और वो उसे अतुल की याद दिलाती थी। वो अतुल को कॉल करके थोड़ी देर बात कर लेती और अपने दिन के बारे में बता देती। अतुल भी उसे अपने ऑफिस और दिन के बारे में बता देता, और कभी-कभी उससे सेक्स की बातें भी करता। सुप्रिया उसको सताने के लिए फ़ोन पर सेक्सी आहें भरती। पर जब कॉल खत्म हो जाती तब भी रात काफ़ी लंबी बची होती थी और उसे अपने आप को नीचे छूकर ही शांत करना पड़ता था।

4-5 हफ़्तों में ही उसकी और ध्रुव की तो जैसे गहरी दोस्ती हो गई थी। वो अपने आप को रोज़ उसके कॉलेज से आने का इंतज़ार करते हुए पाती और उसके आने पर वो कभी गप-शप, कभी ताश या कभी ऐसे ही एक-दूसरे की टाँग खींचने में लग जाते थे। कई मायनों में तो उन दोनों का रिश्ता उसे अपनी भाभी की याद दिलाता था और वो कमी भी पूरा करता था। ध्रुव भी अपनी भाभी का पूरा ख़्याल रखने की कोशिश करता। वो रोज़ उसके लिए कुछ न कुछ बाहर से लेकर आता और अपनी मम्मी और ताईजी से लड़कर सुप्रिया को घर के कामों से दूर रखने की कोशिश करता। पर भाभी से उसे तो लड़ना भी अच्छा लगता था।

चाची – सुप्रिया आज तक ये लड़का हमारे लिए तो कुछ नहीं लाया। पता नहीं क्या जादू कर दिया तुमने इस पर। चलो अच्छा है अब तुम ही इसे सँभालो और इसके लिए लड़की भी तुम्हीं ढूँढना।

सुप्रिया – हाँ बिल्कुल, कैसी लड़की चाहिए तुम्हें ध्रुव?

ध्रुव – आपको लगता है मैं शादी करूँगा?

सुप्रिया – मैं भी बिल्कुल ऐसे ही बोलती थी अपने घर में, पर देखो हो गई ना शादी।

ध्रुव – अब आप जैसा पागल तो नहीं हूँ ना मैं।

सुप्रिया और चाची ने दोनों तरफ़ से उसके कंधे पर मारा।

ध्रुव – अच्छा कोई ढूँढनी ही है तो अपनी जैसी ढूँढना। कोई छोटी बहन है क्या आपकी?

सुप्रिया – है ना, मेरी एक कज़िन सिस्टर है। वो मेरे जैसी ही दिखती है।

ध्रुव ने थोड़ा सोचते हुए बोला – नहीं, वो नहीं चलेगी…. आप जैसा तो कोई हो ही नहीं सकता।

इतने में चाची उठकर चली गईं, ध्रुव ने कहा – भाभी आपसे कुछ बात करनी थी।

सुप्रिया – हाँ बोलो ना।

ध्रुव – आप किसी को बताएँगी तो नहीं।

सुप्रिया – हमारी आपस की बात? कभी भी नहीं।

ध्रुव – मुझे कॉलेज में एक लड़की पसंद है, पर वो मुझे भाव ही नहीं देती।

सुप्रिया – अरे वाह्। क्या नाम है उसका। फ़ोटो तो दिखाओ। और तुम्हें कैसे मना कर सकती है कोई।

ध्रुव – नीती है उसका नाम। वो तो मना कर ही रही है ना। पर मेरे पास एक आइडिया है।

सुप्रिया – कैसा आइडिया?

ध्रुव – मैं उसे जेलस फ़ील करवाना चाहता हूँ और फिर शायद वो मुझे अलग तरह से देखे। मैं जानता हूँ वो मुझे लाइक करती है अंदर ही अंदर।

सुप्रिया ने भी कॉलेज में दोस्तों के लिए ऐसे कई आइडियाज़ निकाले थे – आइडिया तो अच्छा है। कोई लड़की है जो तुम्हारी हेल्प कर दे इसमें?

ध्रुव – हाँ, मेरे दिमाग में तो सिर्फ़ एक ही है। आप।

सुप्रिया – मैं!!!??? नहीं बाबा, मैं नहीं करूँगी, कोई भी पकड़ लेगा आराम से।

ध्रुव – कैसे पकड़ेगा? आप तो कॉलेज स्टूडेंट ही दिखती हो और मेरा कोई फ्रेंड आपसे मिला भी नहीं कभी।

सुप्रिया – मुझे मरवाओगे तुम। अगर घर पर किसी को भी पता चल गया तो।

ध्रुव – किसी को नहीं पता चलेगा। प्लीज़ भाभी, कोई भी नहीं है और जिसे मैं ट्रस्ट कर सकूँ।

सुप्रिया – नहीं यार, प्लीज़ समझो ना।

ध्रुव – आपने उस दिन जब मुझे मारा था आपने वादा किया था ना कि आप मेरी हेल्प करोगी।

सुप्रिया को लगा कि ध्रुव उसे इमोशनल कर रहा है, उसने भी खुद ये कई बार किया हुआ था। पर वो उसको फिर भी मना नहीं कर पाई।

सुप्रिया – ठीक है पर सिर्फ़ एक बार और घर में किसी को भी नहीं पता चलना चाहिए।

ध्रुव – ओह यू आर ग्रेट भाभी! कहकर उसने सुप्रिया के गाल खींच लिए।

फिर उन दोनों ने प्लानिंग करी कि कैसे सब होगा। प्लान सिंपल था, ध्रुव किसी बहाने से सुप्रिया को घर से कुछ घंटों के लिए ले जाएगा और फिर वो उसके कॉलेज के सामने साथ होने का नाटक करेंगे। प्लान के हिसाब से सुप्रिया ने कपड़े चेंज करने के लिए ध्रुव के बैग में रख दिए। और फिर 2-3 दिन बाद खेल शुरू किया।

सुप्रिया – मम्मी जी, मुझे कुछ सैंडल्स खरीदनी थीं तो मैं सोच रही थी कि ध्रुव मुझे मार्केट ले जाएगा।

सरिता – हाँ बेटा ठीक है, अगर मुझे चलना है तो मैं भी चल सकती हूँ।

ध्रुव – हाँ आप ही ले जाओ, मैं नहीं लेकर जा रहा।

सुप्रिया – अब तो ये ही मुझे लेकर जाएगा मम्मी जी।

सरिता – ले जा ना भाभी को, उसके अच्छे से मार्केट दिखा दियो।

ध्रुव – अगर आप बोल रहे हो तो ठीक है, वरना…

इस तरह से सुप्रिया ध्रुव की बाइक पर घर से निकल पड़ी। उसने अब तक ज़्यादा बाहर देखा नहीं था तो उसको भी अच्छा लग रहा था। सबसे ट्रिकी पार्ट कपड़े चेंज का था जिसके लिए ध्रुव सुप्रिया को एक मॉल में ले गया और उसने वहाँ के वॉशरूम में चेंज कर लिया। जब सुप्रिया चेंज करके एक ब्लैक ड्रेस में आई तो ध्रुव उसे देखता ही रह गया।

सुप्रिया इस ड्रेस में बिल्कुल एक कॉलेज स्टूडेंट की तरह दिख रही थी और हद से ज़्यादा क्यूट और प्रिटी लग रही थी। सुप्रिया वैसे तो साड़ी में भी क्यूट और सुंदर लगती थी पर इस ड्रेस में उसे देखकर ध्रुव जैसे खो ही गया।

सुप्रिया – क्या हुआ? चलें? ये लो मेरी साड़ी रख लो अपने बैग में। वापस आकर यहीं चेंज कर लेंगे। थोड़ा मुश्किल होगा पर ठीक है, देख लेंगे।

ध्रुव – हाँ ठीक है चलो।

बाइक पर बैठने के बाद, ध्रुव ने पीछे पलटकर नीचे देखा तो उसे सुप्रिया की गोरी टाँगें दिख रही थीं। और उस पर एक हल्का सा चोट का निशान जो शायद उसने सुप्रिया को दिया था। सुप्रिया ने उसके कंधे पर हाथ रखकर उसे पकड़ा। ध्रुव इस समय काफ़ी खोया हुआ ही था और उसके दिमाग में बस सुप्रिया की ड्रेस और टाँगें चल रही थीं। किसी तरह से वो कॉलेज के बाहर पहुँचा, और फिर वो दोनों नीती के बाहर आने का वेट कर रहे थे। जैसी ही नीती बाहर आई, ध्रुव ने इशारे से सुप्रिया को बता दिया कि वो कौन थी। सुप्रिया ने नीती को देखा। वो कुछ-कुछ उसकी तरह ही लगती थी – सिल्की बाल, हल्के से चब्बी चीक्स, पतली कमर, पर उससे थोड़ा कम सुंदर।

उसको आता देख सुप्रिया ने अपना हाथ ध्रुव के हाथ में दे दिया, उसकी उँगलियाँ ध्रुव की उँगलियों के बीच में जकड़ी हुईं। ध्रुव ने भी उसका सॉफ़्ट हाथ को कसके पकड़ लिया। नीती ने उन लोगों को देख लिया था और उनकी ओर आई।

नीती – हाई ध्रुव।

ध्रुव – हाई नीती, कैसी हो।

नीती – बढ़िया। ये कौन है, पहले नहीं देखा।

ध्रुव – ये रिया है, मेरी गर्लफ़्रेंड। इस कॉलेज से नहीं है।

नीती – ओह गर्लफ़्रेंड! मुझे पता नहीं था कि तुम्हारी गर्लफ़्रेंड है।

ध्रुव – हाँ, ये देखो। शी इज़ जस्ट अमेज़िंग ना।

सुप्रिया – हाई, उर नीतू राइट?

नीती ने उसे थोड़ा गुस्से से देखा और बोला – नीतू नहीं नीती। सो तुम लोग कबसे साथ हो?

ध्रुव – अभी 1-2 महीने, बट ऐसा लगता है कि सालों से जानते हैं एक-दूसरे को..

नीती – सो जस्ट गुड फ्रेंड्स या….

ध्रुव ने सुप्रिया के चेहरे को पकड़ते हुए अपनी ओर खींचा और उसके गालों पर किस करते हुए बोला – हाँ, काफ़ी अच्छे फ्रेंड्स हैं!

सुप्रिया एकदम से हैरान सी रह गई। ये किस तो प्लान का पार्ट ही नहीं था। पर उसने किसी तरह से अपनी हैरानी को छिपाते हुए चेहरे पर स्माइल रखी।

नीती उनकी किस से काफ़ी चिढ़ गई – ओके बाय, मुझे जाना है।

नीती थोड़ा गुस्से में वहाँ से चली गई। उसे यक़ीन ही नहीं हो रहा था कि ध्रुव ने उससे सुंदर लड़की को अपनी गर्लफ़्रेंड बना लिया। वो तो ध्रुव को सिर्फ़ इसलिए लटका रही थी कि उसे पता था कि उससे सुंदर पूरे कॉलेज में कोई नहीं था। ध्रुव भी कॉलेज का सबसे स्मार्ट लड़का था, जो अब शायद उसका नहीं था।

उसके जाने के बाद, ध्रुव और सुप्रिया भी बाइक की तरफ़ चल पड़े। सुप्रिया को ध्रुव पर गुस्सा आ रहा था कि उसने बिना बताए उसे कैसे किस कर दिया। उसने बाइक पर बैठकर ध्रुव को नहीं पकड़ा और कॉलेज से थोड़ी दूर जाते ही वो उस पर रास्ते में गुस्सा करने लगी।

सुप्रिया – तुमने मुझे किस क्यों किया। ये प्लान में नहीं था।

ध्रुव – सॉरी भाभी पर उस टाइम वो एकदम से ही हो गया। पर नीती की शक्ल देखने वाली थी उस टाइम।

सुप्रिया – तुम मुझे पहले बता सकते थे अगर ऐसा करना था तो।

ध्रुव – भाभी सच में कोई प्री प्लैन्ड नहीं था। आपने भी तो मेरा हाथ पकड़ लिया था।

सुप्रिया – वो अलग बात है। अच्छा जल्दी से मॉल चलो।

ध्रुव बाहर से तो चाहे काफ़ी कूल बना रहा था पर अंदर ही अंदर उसे अभी तक सुप्रिया के सॉफ़्ट गाल अपने होठों पर फ़ील हो रहे थे। और उसके सॉफ़्ट हाथ अपने हाथों में। उसके दिमाग से ये दोनों ही चीज़ें जा नहीं रही थीं। मॉल पहुँचकर सुप्रिया वॉशरूम में चेंज करने गई। पर उसने पाया कि वॉशरूम में साड़ी पहनना काफ़ी मुश्किल था। अगर वो साड़ी नीचे गिरा देगी तो उसकी साड़ी काफ़ी गंदी हो जाएगी।

उसने ध्रुव को टेक्स्ट किया – ध्रुव अंदर आओ जल्दी से।

ध्रुव को समझ नहीं आया कि भाभी उसे लेडीज़ बाथरूम में क्यों बुला रही हैं। थोड़ा हिचकिचाते हुए वो अंदर गया। सुप्रिया एक बाथरूम स्टॉल के अंदर थी और उसने ब्लाउज़ पहना हुआ था और नीचे पेटीकोट पर साड़ी ज़रा सी बंधी हुई थी और बाक़ी साड़ी उसके हाथ में थी। ब्लाउज़ में सुप्रिया के बूब्स की शेप साफ़ दिखाई दे रही थी। सुप्रिया के बूब बहुत ज़्यादा बड़े तो नहीं थे, पर वो हद से ज़्यादा सुडौल थे, एकदम परफ़ेक्ट शेप, जैसे वो सख़्त होने के साथ-साथ बिल्कुल मुलायम भी हों।

सुप्रिया – सुनो, तुम ये साड़ी पकड़ो और मैं धीरे-धीरे साड़ी बाँधती हूँ।

ध्रुव उसको घूरता हुआ बोला – ठीक है।

सुप्रिया – और सुनो, दूसरी साइड देखो, मुझे नहीं।

ध्रुव एकदम से दूसरी ओर पलट गया। सामने आईना था और उसमें सुप्रिया साफ़ दिखाई दे रही थी। सुप्रिया का फ़ोकस अपनी साड़ी बाँधने में था, तो उसने ग़ौर नहीं किया कि ध्रुव उसे आईने से देख पा रहा था। ध्रुव सुप्रिया के गोरे-गोरे गले और ब्लाउज़ के ऊपर की छाती को देख रहा था। ये देखकर उसका लंड हल्का सा खड़ा होने लगा था।

सुप्रिया – आज तो मैंने तुम्हारी हेल्प कर दी। पर आज के बाद मुझे अपने इन फ़ालतू आइडियाज़ में इन्क्लूड मत करना।

ध्रुव – सॉरी भाभी। पर आपके भी इनपुट थे इस प्लान में, और वैसे मैं भी तो लेडीज़ वॉशरूम में खड़ा हूँ ना आपके लिए।

सुप्रिया को ये सुनकर थोड़ी हँसी और थोड़ा गुस्सा आ गया, पर उसने अपने आप को कंट्रोल किया। उसने जल्दी से अपने साड़ी की प्लीट्स बनाई और फिर शीशे में देखकर अपने बाल ठीक करने लगी। सुप्रिया ने शीशे में से देखा कि ध्रुव वहीं खड़ा उसे घूर रहा था, तो उसने हल्का सा पलटकर ध्रुव को एक तीखी नज़र से देखा।

सुप्रिया – चलो अब तुम बाहर जाओ। हो गया तुम्हारा काम यहाँ।

ध्रुव झेंपते हुए बाहर चला गया और थोड़ी देर बाद सुप्रिया भी आ गई। उन्होंने मॉल से थोड़ी शॉपिंग करी ताकि घर पर कुछ दिखा सकें। वापस जाते हुए सारे रास्ते दोनों बिल्कुल चुप रहे।

More Stories

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *