लॉकडाउन और तबस्सुम 6
Ek pakiza muslim housewife ka doodh story:- ग्लास तबस्सुम की तरफ बढ़ाता है तो तबस्सुम उस ग्लास को काँपते हाथों से लेती है…. और वो ग्लास को ले खड़ी हो जाती है…. पर अंदर ऐसा कुछ हुआ कि ग्लास अपने निप्पल से मिल्क निकालने की सोचकर उसके निप्पल और ज़्यादा तन से गए।
शंकर: अब क्या हुआ निकालो अपना दूध अब शर्माओ नहीं कब से इंतज़ार में खड़ा हूँ….
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Ek pakiza muslim housewife ka doodh sex story
तबस्सुम: … वो मैं आपके सामने नहीं निकाल सकती मुझे शरम आ रही है मैं किचन में जाकर….. अपना मिल्क निकालती हूँ..
ये बात डरते सहमें हिम्मत दिखाकर तबस्सुम कहती है…..
शंकर: देखो तुम्हें मैं कैसे समझाऊँ यही शरम हया ने तो मुझे पागल कर दिया है…. मैं जानता हूँ तुम क्या सोच रही हो…. देखो तुम्हें ये करना तो होगा ना इसलिए अब दोबारा मुझे तकलीफ़ न देना… चलो अच्छी बच्ची की तरफ मेरा कहना मानो….
कुछ लम्हा फिर से तबस्सुम ऐसे ही खड़े होकर सोचती है… और वो कहीं न कहीं मन बना लेती है कि ये इंसान मुझे ज़्यादा नुकसान पहुँचाए इससे पहले इतना काम कर देती हूँ…….. पर ये कैसे करूँ…. करना तो पड़ेगा ही…. पर मैं उफ्फ ख़ुदा रहम कर दे……
शंकर: अब सोचो मत बहुत सोच लिया मुझे नींद भी आ रही है और तेरे ये हुस्न देखकर दारू पीने का भी दिल नहीं कर रहा है इतनी नशीली है तू कि दारू की 100 बोतल भी तेरे सामने फ़ेल हो गईं…. चल निकाल ना दूध वरना मैं ही निकाल देता हूँ…..
तबस्सुम: … नहीं नहीं वहीं रुको मैं कर रही हूँ वहीं रुको आगे नहीं बढ़ना……
शंकर: हाँ मैं कब से खड़ा हूँ अभी तक तुझे अपने हाथों से छुआ क्या…… अब इतना तो भरोसा कर सकती है ना…..
तबस्सुम ने एक आह्ह भरी अपनी साँस ऊपर खींचकर बाहर निकाली जिससे एक हिम्मत उसके अंदर जागी…..
ग्लास को अपने सीने की तरफ करती है….. और अपना एक निप्पल पकड़ती है…. ग्लास ठीक निप्पल के पास रखती है…. अगर पिचकारी निकले तो नीचे न गिरे….. तबस्सुम ने हल्के से कुछ ऊपर एरोल को नीचे निप्पल के पॉइंट तक दबाया तो सर्र से पिचकारी दूध की निकली जो सीधा ग्लास के अंदर पहुँची…..
ये चीज़ देखकर शंकर का अपना मुँह खुला का खुला रह जाता है….. वो ऐसी चीज़ की कभी कल्पना भी नहीं कर सकता उसका लंड में दर्द होने लगता है…. पर वो ऐसा नज़ारा एक पल के लिए भी मिस नहीं करना चाहता……. वो अपनी एक सेकंड के लिए भी पलकें नहीं झुकाता अपना लंड कसकर पकड़ लेता है उसके लंड का खून का दौरा पूरे शबाब पर पहुँच जाता है…..
तबस्सुम के चेहरे पर दर्द साफ़ झलक रहा था…..
तबस्सुम थोड़ा अब अपने बूब्स को ऊपर से दबाती हुई अपने हाथ की उँगली को निप्पल पर लाके उसे दबाती है…. फिर से एक पिचकारी सर्र से निकलती है…. और दूध लगातार ग्लास में जाने लगता है…. जब एक बूब में दर्द ज़्यादा होने लगता है तो वो अब दूसरे बूब पर ऐसा ही करती है ऊपर से दबाती हुई अपने निप्पल तक उँगली लाती है और पूरे खड़े निप्पल को दबा देती है…. जिससे दूध आना शुरू हो जाता है……
ऐसा करते वक्त तबस्सुम के चूत में एक जलन और ज़्यादा तेज़ हो रही थी…. वो इसलिए नहीं कि अपना दूध निकाल रही हो…. वो इसलिए भी कि लगातार शंकर अपने बातों से उसे काफ़ी देर से उत्तेजित भी कर रहा था और अब उसके सामने जो अपना लंड कस-कस कर मसल रहा था…. और तबस्सुम उसके लंड पर एक नज़र देखकर दूध निकालने से चूत में शोला भड़का जा रहा था……
पर वो इस बात को अपने वजूद में शामिल नहीं कर सकती थी कि वो अंदर से एक मस्त औरत में तबदील हो रही थी…….
वो बस यही अपने को समझा रही थी कि तू अपने बच्चे के ख़ातिर ये सब कर रही है…. पर ऐसा बिल्कुल नहीं था… तबस्सुम अंदर से हॉट हो गई थी….. पर इज़हार तो इस ज़िंदगी में कभी नहीं कर सकती थी……
5 मिनट की मेहनत के बाद ग्लास आधे से ज़्यादा भर गया जिससे अब 2 कप चाय आराम से बन सकती थी…. लेकिन अपने इस दर्द को बरदाश्त करते हुए तबस्सुम अपने एक-एक क़तरा दूध का निकाल रही थी…. पहले पिचकारी के रूप में दूध बाहर आया जिससे उसकी चुची जो बेहद गोरी थी.. वो उसके उँगली के दबाव से लाल पड़ गई थी……
शंकर तो बस मुँह फाड़े देखता ही रह गया उसके ज़बान पर ताला पड़ गया कि वो अब कहे क्या करे क्या….. शंकर को ऐसे बेसुध देखकर तबस्सुम भी हैरानज़दा थी कि जो इतनी देर से सेक्स पर लेक्चर दे रहा था वो बस एक मूर्ति की तरह खड़ा है…. और कहीं न कहीं उसकी ये एक चीज़ से तबस्सुम को राहत थी कि उसने अभी तक नहीं टच करा…. पर उसे ये ख़ौफ़ भी था कि शायद ये मुझ पर अटैक न कर दे……
जब दूध अच्छे से निकल गया तो तबस्सुम अपने सामने का बुर्ख़ा अपने बूब्स पर ढकने लगी….
शंकर: ना ना ना… ऐसा न करना ये चुची को नहीं छुपाना इतने मुश्किल से तो इन्हें देखा है और तुम इसे छुपाने की गुस्ताख़ी कर रही हो…….
तबस्सुम ने अपने हाथ रोक दिए… और वो अपना क़दम आगे बढ़ाकर किचन की तरफ रुख़ किया….. उसे डर था कि ये उसे रोकेगा तो नहीं….. पर वो भी उसके पीछे चला…..
शंकर: मैं जानता हूँ तू आराम से चाय बनाएगी बस मैं ऐसे ही तेरे ये ज़ालिमाना बुर्ख़े में ढकी छुपी गाँड देखना चाहता हूँ और तू जब अपने दूध की चाय बनाएगी एक तेरे एक मेरे वो भी देखना चाहता हूँ…..
तबस्सुम: … तौबा अब तो मुझ पर तरस खाओ…. मैं अपने मिल्क की चाय आह्ह ख़ुदा कैसे पी सकती हूँ…..
शंकर: तुझे रोज़ पीना भी पड़ेगी और पिलाना भी पड़ेगी…..
तेरा शौहर कुछ दिन में आ जाएगा तो मैं कहाँ से पी पाऊँगा इसलिए जितना तेरा दूध निकले पिलती रह मुझे…. और तू भी पी के देख पर ऐसा कभी नहीं करना कि मेरे पीछे तू ये दूध की चाय अपने शौहर को पिला दे समझी……
तबस्सुम ने शरम के मारे बस सिर हिलाया और वो किचन में आ गई वहीं डोर पर खड़ा ऐसा ही नंगा लंड हिलाकर तबस्सुम की गाँड का दीदार कर रहा था……
जब वो चाय बनाने लगी तो शंकर ने और कुछ बात करना शुरू कर दी… चेहरे पर नक़ाब अब भी लगा था और सामने के दोनों बूब्स नंगे थे….
शंकर: मेरी बीवीजी एक बात तो बताओ इतनी देर से तुम भी मेरा लंड देख रही थी तो तुम्हें कैसा लगा मेरा लंड…… बताओ ना शर्माओ नहीं…..
तबस्सुम का दिल फिर ज़ोर से धड़का……
तबस्सुम: .. मुझे नहीं मालूम और प्लीज़ ऐसे बात न करो जिसका जवाब मेरे पास न हो…..
शंकर: अरे बीवीजी कुछ तो बता दो…. मेरा ये लंड कैसे लगा…..
यहाँ तबस्सुम ने अपनी ज़िंदगी में ये दूसरा लंड देखा था जो काला चमड़ी चढ़ा हुआ था… जो बहुत ही तबस्सुम को अंदर ही अंदर क़यामत बरपा रहा था…. ख़ासतौर से तबस्सुम को एक चीज़ ज़्यादा इरोटिक फील दे रही थी जिससे उसका चूत का रस बाहर आता जा रहा था यहाँ तक कि उसकी जाँघ भी उस अमृत रस से गीली होने लगी थी…. वो ये था कि जब वो अपने लंड को आगे-पीछे हिलाता तो उसकी चमड़ी टोपी पर चढ़ती और उतरती…… जिससे उसका टोपा लुका-छुपी करता ये देख तबस्सुम की चूत में रिसाव होने लगता……
पर तबस्सुम इस चीज़ को नहीं मान रही थी….. कि वो ऐसे देखकर कहीं न कहीं पिघल रही थी.. और उसकी हर बात शरम के मान रही थी…….
चाय बन चुकी थी तो वो चाय 2 कप में डाली और यहाँ कहीं न कहीं अपने मिल्क की चाय पीने के लिए कहीं न कहीं तबस्सुम के दिल में भी उत्साह पैदा होने लगा……. चाय की ट्रे शंकर ने अपने हाथों में ली और उसे आगे करके गाँड की मनमोहक लचक देखकर आगे चलने को कहा…..
शंकर: चल तेरे रूम में चलकर चाय पीते हैं…..
तबस्सुम: .. नहीं नहीं वहाँ नहीं मैं नहीं जा सकती…..
शंकर: अरे अब क्या हुआ वहाँ क्यों नहीं अब तू फिर से नखरे न दिखा…..
तबस्सुम: वो मेरे शौहर का रूम है मैं वहाँ नहीं जा सकती…..
शंकर: अबे क्या बेवकूफ़ी कर रही हो…. तेरा शौहर का रूम है पर तेरा शौहर तो नहीं है ना….. चल अंदर चुपचाप से बेकार में तेरा बच्चा जाग जाएगा कितने प्यार से सो रहा है…. और ले ये चाय की ट्रे पकड़ अपने चेहरे पर मुस्कान ला.. भले ही ऊपरी दिल से ही….. और अपने चुची और अच्छे से खुला कर जिससे पूरी चुची का नज़ारा मुझे मिले……
और जब मैं बैठूँ तो ये ट्रे मेरे बिल्कुल क़रीब लाके चाय दे.. अगर चाय तेरे सोचने समझने में ठंडी हो गई तो फिर मैं तेरे चुची दबाकर जो थोड़ा भी दूध बचा होगा वो निकाल दूँगा समझी मेरी बीवी……
ये सुनकर तबस्सुम बहुत डर जाती है और अपना हाथ आगे बढ़ाकर जल्दी से ट्रे पकड़ती है….. दोनों रूम में जाते हैं… और शंकर बेड पर बैठ जाता है……
उसके कहने के मुताबिक़ थोड़ा कंधे से नीचे बुर्ख़ा करती है और अपने बूब्स पर से बिल्कुल बुर्ख़ा आगे से हटा देती है जिससे बहुत अच्छा नज़ारा शंकर को देखने को मिले….
चेहरे पर नक़ाब तो लगाया हुआ ही था पर उसकी आँखें कुछ और शंकर को बता रही थीं वो मुस्कुराना चाहती थी कोशिश भी करी पर मुस्कान चेहरे पर जो नक़ाब के पीछे छुपा था उस पर न ला पा रही थी मगर उसकी आँखों के अंदर सुलगते शोले साफ़ शंकर महसूस कर रहा था…..
जब उसने अपना बुर्ख़ा हटाया तो पेट भी कुछ आधा दिखा पर चूत के ऊपर बुर्ख़े का एक पर्दा था अपने हाथ बढ़ाकर शंकर की तरफ ट्रे करी……
तो शंकर उसके बूब्स को देखकर कुत्ते की तरह ज़बान निकालकर हाँफने लगा। ये देख कहीं न कहीं शरम के साथ तबस्सुम के चेहरे पर मुस्कान आ गई… मुस्कान का मतलब ये नहीं था कि वो शंकर के इस दिलदारीपन से इम्प्रेस हो रही थी… या उसने अभी तक अपने हाथों से नहीं छुआ था…..
बल्कि एक होता है कोई ऐसी हरकत कर दे कि रोता हुआ भी शख़्स हँस दे…..
शंकर ने चाय ली और उसे भी सामने बिठाया दोनों ने चाय की चुस्की ली……
ताज्जुब ये हुआ कि शंकर से पहले तबस्सुम ने चाय की सीप ली जिसे देखकर शंकर बड़ा ताज्जुब में आ गया……
उसकी आँखें बता रही थीं कि चाय खुद के दूध से बनी हुई कैसी लगी आज पहली बार…….
शंकर को बिना देखे वो चाय पीती चली गई.. और शंकर को ऐसा लगा कि उसकी माँ चुद गई…… वो तो तारीफ़ में चाय की बोल ही नहीं पाया…….
चाय खत्म हुए तो वो उठकर बाहर जाने लगी……
शंकर: कहाँ जा रही हो… एक काम करो पहले अपने बेटे को अच्छे से दूध पिला दो डिब्बे का फिर एक बात करके मैं ऊपर सोने चला जाऊँगा……
ये सुनकर तबस्सुम को एक इत्मिनान सा होने लगा कि शायद उसकी चूत बच जाए…. पर ऐसा कैसे हो सकता था……
शंकर: मुझे अब ऐसे ही चाय बनाकर देगी… और कोई नखरा न दिखाएगी…… कब से साला चुतियों की तरह बोलता जा रहा हूँ और एक तू है कुछ बात ही नहीं करती चल कोई बात नहीं मैं पेशाब करने जा रहा हूँ…. और ऐसे ही अपने बच्चे को दूध पिलाकर आ…..
तबस्सुम किचन में जाकर दूध बनाती है और सोचने लगती है मैं इसे नफ़रत करती हूँ इसका काला मनहूस चेहरा कभी नहीं देखना चाहती ये मुझे क्या समझ रहा है….. इतना रोई इतना रहम की उम्मीद रखी पर ये मुझ पर हावी क्यों होता जा रहा है… और तो और मेरा जिस्म उसकी बात क्यों मान रहा है…. और मेरे जिस्म में ये कैसा मीठा सा दर्द है…. जो ऐसा लगता है कि कोई मेरे जिस्म को कसके मरोड़ दे… मेरे शरमगाह में ये कैसी अजीब जलन हो रही है…. ये क्या हो रहा है….. मेरा जिस्म क्यों मेरा साथ नहीं दे रहा है…….
क्या मुझे सच में उसका गंदा सतर अच्छा लग रहा है देखने में… वो कैसे गंदी-गंदी बात कर रहा था बिना कोई शरम के वो ये भी भूल गया कि मैं उसकी मालकिन हूँ और वो मुझे ऐसे समझ रहा था जैसे मैं उसकी ज़रख़रीद लौंडी हूँ……
क्या करूँ कहीं ये अब क्या डिमांड करेगा मुझसे पर क्या कर सकती हूँ… उसकी बातों में क्या ऐसा कशिशपन है जो मुझे न चाहते हुए भी करती चली जा रही हूँ…. शायद मेरे शौहर ने जो कमी रखी है उसकी सज़ा आज मुझे मिल रही है……
ये सोचकर वो अपने बच्चे का दूध बनाकर उसके पास जाती है जो बेखबर अपनी दुनिया के सपनों में सो रहा था…… वो बोतल का कवर लगाकर उसके नन्हे हाथों में देके वहीं उसके पालने के पास बैठकर दूध पिलाने में मशगूल हो गई…….
तभी 10 मिनट तक वो जब मिल्क फ़ीड करा चुकी थी कि एक आवाज़ आती है..
शंकर: अरे बच्चे को दूध पिला दिया है तो जल्दी आओ कुछ कहना है तुमसे…..
उसकी इस आवाज़ का असर ऐसा हुआ कि जैसे उसके शौहर अल्ताफ़ ने आवाज़ दी हो…..
और वो चिहुककर बोली…..आती हूँ जी एक मिनट मैं आई…..
तब उसे पता चला उसने क्या बोल दिया….. इस बात से अपना सिर पीटकर वो अब उसके रूम में जाती है।
तबस्सुम घबराकर अंदर रूम में जाती है तो… बिल्कुल नंगा पड़ा बीड़ी पी रहा था…
शंकर: ओह्ह शबाश इतनी जल्दी आ गई… ज़रा मेरे पास आकर बैठ…..
तबस्सुम पर ना जाने क्या असर हुआ वो उसके पास आकर बैठ गई…..
शंकर उठा और उसके सामने खड़ा हुआ उसके चेहरे नक़ाब में देखने लगा। और अपना लंड उसकी तरफ करके हिलाने लगा…..
तबस्सुम एक नज़र करके उसके लंड को फिर से देखा….
शंकर: अब बता भी दे मेरा लंड कैसे लगा कितनी देर से मैं बात कर रहा हूँ और तू है कि कुछ नहीं बोलती बस प्यार से मेरे लंड को देखती रहती है कुछ बोल ना मेरे कान तरस रहे हैं सुनने के लिए…. बोल भी दे……
तबस्सुम: .. मुझे नहीं पता आप प्लीज़ ऐसे वाहियात सवाल न करो…
शंकर: मैं तो तुझसे हार गया इतनी देर समझाया तुझे तेरे बारे में बताया कि तू क्या है पर तू… चल अब कोई बात नहीं अब ऊपर जाते-जाते मेरे दो या 3 सवाल का जवाब दे और तेरे बच्चे की कसम अब भी तुझ पर लगी है समझी चल ये बता कि मैंने तेरी चूत मारी है… मारी है कि नहीं…..
तबस्सुम शर्माते हुए…. जी हाँ…..
शंकर: मैंने तेरे मुँह में लंड दिया था या नहीं…..
जी हाँ……
शंकर: मैंने तेरी चुची अपने मुँह में लेकर पी थी या नहीं….
जी हाँ…….
तुझे चुदते वक्त मज़ा आता था या नहीं……
तबस्सुम: .. पता नहीं……
शंकर: अबे क्या है वहाँ गाँड हिलाकर दे रही थी और अब कह रही है पता नहीं….. आख़िर क्या बात है जो तुम्हारे समझ नहीं आती……
चल ये तो माना तूने कि तेरी चूत मारी अब मुझे रहा नहीं जाता उस अँधेरे में तेरी चिकनी चूत नहीं देखी अभी के अभी तेरी चूत देखनी है… जितना सब्र कर सकता था कर लिया बस तेरी चूत तेरी चिकनी जाँघ तेरा पेट सब देखना है…. अभी के अभी जैसे मैंने तेरे साथ नर्मी से पेश आया तू भी मेरे साथ पेश आ और दिखा दे स्वर्ग का दरवाज़ा…….
तबस्सुम: .. नहीं नहीं ऐसा न करो तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ ऐसा न करो जो चीज़ पर्दे में है उसे रहने दो…. मैंने सब कुछ माना अपना हुस्न का प्याला तुम्हें पिलाया अब नहीं प्लीज़ रहम खाओ….
शंकर: मुझे अब तेरे हुस्न की शराब पीनी है…. चल बुर्ख़ा ऊपर उठा और अगर तूने बुर्ख़ा नीचे किया तो डायरेक्ट तेरी चूत शरीफ़ फाड़ दूँगा…. समझी अब मैं तुझे एक पल का भी मौका नहीं देना चाहता दिखा तेरी लसलसी कमसिन चूत……
यहाँ जितना हो सका तबस्सुम अपने को बचाने के लिए उसके पैरों पर भी गिर जाती है….. पर वो नहीं मानता….. तब आख़िर में जब शंकर धमकी देता है तो यहाँ तबस्सुम टूट जाती है…..
और उसका जिस्म तो पहले ही हार मान चुका था…. तो वो उसके पास खड़ी होती है…. तब एक बार फिर से उसे मजबूर करता है…..
तब उसे बेड पर धक्का देके बुर्ख़ा चुची के ऊपर तक उठाने को कहता है… उसका लंड फुल शिद्दत से अपनी सबसे प्यारी गुफा देखने का इंतज़ार कर रहा था….
सब रास्ते बंद हो गए तब बिस्तर पर लेटकर तबस्सुम हौले-हौले अपना बुर्ख़ा उठाती है इस वक्त वो अपनी आँखें बंद किए थी शायद इसलिए कि कोई उसे देखे नहीं…. पर ऐसा कैसे हो सकता था….
जाँघों से बुर्ख़ा उठा हुआ पेट तक आया और चूत का नज़ारा सामने था जो काफ़ी मात्रा में उसका अमृत बाहर निकाल रहा था…. यहाँ शंकर की हालत भी चूत देखकर बिगड़ने लगी इतनी गोरी चूत की कल्पना भी नहीं कर सकता था…..
तब पेट नंगा हुआ बहुत चिकना ज़रा से भी चरबी नहीं शानदार चौड़ा और उस पर ख़ूबसूरत नेवल जो पेट की ख़ूबसूरती बढ़ा रही थी….. ऐसा करते हुए बुर्ख़ा अपना गला तक ले आई और जब ऊपर का सब नंगा हुआ तो ना जाने क्यों उस नक़ाब से चेहरे ढके होने के बाद भी वो अपने एक बार आँखें खोलती है वो देखना चाहती है कि शंकर का हाल कैसा है ज़िंदा है या मर गया…..
शंकर को जब देखा तो वो तो अपना सिर पकड़े खड़ा था… कुत्ते की तरह ज़बान बाहर निकली थी……. वो तो हैरतज़दा देख रहा था…. जैसे अब सच में उसकी सही मायनों में अम्मा चुद गई……
शंकर को उस तरफ देखते हुए तबस्सुम सोच रही थी ये बंदे ने मुझे नंगा कर ही दिया और कैसे दीवानों की तरह मुझे देखे जा रहा है… और ऐसा कभी अल्ताफ़ ने पहले दिन से इस नज़रों से कभी नहीं देखा…. और एक ये है… कि मेरे साथ ज़िना करने के बाद भी अब तक मुझे बिना हाथ लगाए ही ऐसा देखे जा रहा है……..
क्या ये मेरे साथ कुछ करेगा नहीं नहीं ये कुछ नहीं करेगा…. पर इसकी आँखों में दुनिया भर की हवस है…. ये तुझे बिना सेक्स के नहीं छोड़ेगा…. पर मैं ऐसा नहीं होने दूँगी…. मैं कैसे इस गंदे इंसान के साथ छिई जो तेरे मज़हब का भी नहीं……..
शंकर: दुनिया मेरे बस यही है कहीं नहीं है…… यहाँ से मेरी ज़िंदगी शुरू और यहीं पर खत्म…. बीवीजी तुमने जो अहसान किया है उसका बदला तो नहीं उतार सकता पर अभी भी कुछ है जो मैं करना चाहता हूँ…..
तबस्सुम: … प्लीज़ अब नहीं होता मुझसे बरदाश्त…..
शंकर: हाँ सच कहा आपने अब नहीं होता बरदाश्त तेरी चूत को अगर मैंने ऐसे ही छोड़ा तो सच कहो ये तुझे जलाकर राख कर देगी……
ये कहके फ़ौरन उसके पैरों को चौड़ा करके अपना मुँह चूत की तरफ बढ़ाया…..
तबस्सुम उछल पड़ी इस अचानक हमले से….. पर जब तक देर हो गई थी…. उसका काला मुँह बहुत ही गोरी चूत से बस 2 इंच ही दूर था..
तबस्सुम: रुक जाओ ख़ुदा के लिए रुक जाओ मैं कहती हूँ रुक जाओ मैं जान दे दूँगी अगर आगे बढ़े तो मैं अपनी अस्मत ऐसे दोबारा नहीं लुटने दूँगी रुक जाओ….. मैं हाथ जोड़ती हूँ न करो कुछ भी और तुम्हारा वादा था कि तुम मुझे छुओगे नहीं रुक जाओ…….
पर यहाँ उल्टा हुआ लाख मिन्नतें तबस्सुम कर रही थी…. पर सच तो ये था कि न तो अपने बचने के लिए हाथ-पैर मार रही थी न अपने हाथों की ताक़त लगाकर उसे पीछे धकेल रही थी न खुद को बचाने के लिए ज़्यादा मज़हम्मत नहीं कर रही थी….
बस रोते हुए वो इल्तिजा कर रही थी उसके मज़बूत हाथ दोनों जाँघों को कस लिए…. और अपनी ज़बान जैसे ही चूत पर रखकर चाटा तो……. जो अल्ताफ़ ने बस थोड़ा किस करके आग भड़काकर हट जाता था…… वहाँ शंकर उसकी गोरी चूत से निकलता पानी को चाटते हुए पूरी ज़बान जब चूत के नीचे से लेकर ऊपर तक फिराई…. तो…. क्या हाल हुआ……
तबस्सुम: बदज़ात हट जा मेरे से दूर तुझे बहुत अज़ाब पड़ेगा एक मजबूर औरत का फ़ायदा उठाना अच्छा नहीं है…. हट जा मुझ पर रहम खा मैंने आज तक अपनी अस्मत इज़्ज़त को बड़ा सँभालकर रखा तू इसे गंदाआआआआआआ आआआआआआआआआ श्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह नहींईईईईईईईईई ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह माआआआआआ मेरे ख़ुदाआआआआआआ आआआआआआआआआ दूर्र्र आआआ हटटट जाआआआ नहींईईईईईईईईई आईईईईईईईईईई श्सससससससससस

Are yar anam ki chudayi wali story bhi dalona bhot wakt hogaya