भैया अब डाल भी दो अपना लंड

Bhai bahan ki palangtod chudai:- हेलो दोस्तों, मेरा नाम माया है। मैं 19 साल की हूं। मेरा फिगर 34-26-34 है। लंबे हाइलाइटेड बाल, गोरा रंग और आकर्षक शरीर। ये कहानी मेरे और मेरे बड़े भाई नितीश के बीच हुई चुदाई की है। नितीश की उम्र 24 साल है। वो बहुत हैंडसम है, फिट बॉडी, अच्छी हाइट। हम दोनों में सिर्फ 5 साल का फर्क है।

हमारा फैमिली एक मिडिल क्लास फैमिली है। मम्मी-पापा दोनों नौकरी करते हैं इसलिए दिन भर घर खाली रहता है। छोटा भाई अवि (16 साल) स्कूल जाता है। मैं कॉलेज जाती हूं और नितीश जॉब करता है।

Bhai bahan ki palangtod chudai sex story

सब कुछ नॉर्मल चल रहा था। लेकिन कुछ महीने पहले मुझे अचानक सेक्स की तरफ आकर्षण होने लगा। मेरी सहेलियां सेक्स की बातें करतीं, पोर्न वीडियो दिखातीं। मैं पहले शर्मा जाती थी, लेकिन धीरे-धीरे मुझे भी रात को अकेले में अजीब सी गर्मी होने लगी। मैं बाथरूम में नहाते समय अपने स्तनों और चूत को छूने लगी, लेकिन पूरी तृप्ति नहीं होती थी।

एक दिन मैं कॉलेज से घर आई तो कोई नहीं था। मैंने सोचा नहा लूं। मैंने कपड़े उतारे और शावर के नीचे खड़ी हो गई। गर्म पानी मेरे शरीर पर गिर रहा था। मैं अपने बड़े-बड़े स्तनों को साबुन लगा रही थी, निप्पल्स को हल्का दबा रही थी। फिर नीचे हाथ ले जाकर अपनी चूत को सहलाने लगी। आंखें बंद करके मैं कल्पना कर रही थी कि कोई लड़का मुझे चूम रहा है। तभी अचानक दरवाजे की आवाज आई।

मैं डर गई। जल्दी से टॉवल लपेटा और बाहर आई। सामने नितीश भैया खड़े थे। उन्होंने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा। मेरा टॉवल थोड़ा छोटा था, जिससे मेरी जांघें और स्तनों का ऊपरी हिस्सा दिख रहा था। मैं शर्मा गई और तेजी से अपने कमरे में भाग गई। लेकिन जाते समय टॉवल फंस गया और एक पल के लिए मैं लगभग नंगी हो गई। भैया की नजर मेरी नंगी गांड पर पड़ गई।

मैं कमरे में आकर लॉक कर के बैठ गई। दिल जोरों से धड़क रहा था। लेकिन अजीब बात ये थी कि मुझे डर के साथ एक रोमांच भी हो रहा था।

रात को खाना खाते समय भैया मुझे बार-बार देख रहे थे। उनकी नजर मेरे ब्लाउज पर अटक रही थी। मैं शर्मा रही थी लेकिन आंखें मिलाने से बच नहीं पा रही थी।

अगले कुछ दिन कुछ खास नहीं हुआ। लेकिन अब भैया मेरे कमरे में ज्यादा आने लगे थे। कभी होमवर्क पूछने का बहाना, कभी फोन चार्ज करने का। एक रात मैं सो रही थी। हल्की नींद में मुझे लगा कोई मेरे पास है। मैंने आंखें खोलीं तो देखा भैया मेरे बेड के पास खड़े हैं। उन्होंने मेरा कंधा हिलाया।

“माया… सो गई क्या?” मैंने आंखें बंद कर लीं और सोने का नाटक किया।

तब उन्होंने मेरे लूज टॉप के अंदर हाथ डालकर मेरे स्तन को हल्का दबाया। मैं सिहर गई लेकिन कुछ नहीं बोली। उनका हाथ धीरे-धीरे मेरे स्तनों को सहलाने लगा। फिर दूसरा हाथ मेरी शॉर्ट्स के अंदर चला गया और मेरी चूत पर रख दिया। वे सिर्फ बाहर से सहला रहे थे। मैं गीली हो रही थी।

कुछ देर बाद उन्होंने अपना लंड निकाला और मुठ मारने लगे। उनके हाथ की हल्की आवाज आ रही थी। फिर उन्होंने मेरी चूत पर हल्का सा लंड रगड़ा और झड़ गए। उनका गर्म माल मेरी जांघ पर गिरा। फिर वे चुपचाप चले गए।

इसके बाद ये रात का सिलसिला शुरू हो गया। हर रात भैया आते, मेरे स्तनों को दबाते, चूत सहलाते और मुठ मारकर चले जाते। मैं हर रात सोने का नाटक करती लेकिन अंदर से तड़प रही थी।

एक रात मैंने हिम्मत करके मुंह खोल लिया। जब वे मेरा लंड मेरे होंठों पर रगड़ रहे थे, मैंने मुंह थोड़ा खोल दिया। उन्होंने लंड अंदर डाल दिया। मैंने पहली बार भाई का लंड चूसा। वे धीरे-धीरे मेरा मुंह चोद रहे थे।

“आह्ह्ह माया… तेरे होंठ बहुत नरम हैं…” वे फुसफुसा रहे थे।

उस रात भैया ने मेरे मुंह में लंड डालकर काफी देर तक मुँह चोदा। मैंने पूरा स्वाद लिया। वे झड़ गए तो मैंने सारा माल निगल लिया। उसके बाद भैया मेरे पास लेट गए। उन्होंने मुझे गले लगाया और बोले, “माया… तुझे बुरा तो नहीं लगा ना?” मैंने शर्माते हुए सर हिला दिया।

उसके बाद 2-3 दिन कुछ खास नहीं हुआ। बस भैया मुझे देखते ज्यादा थे। उनकी नजरें मेरे शरीर पर घूमती रहतीं। मैं भी अब जानबूझकर हल्के कपड़े पहनने लगी थी — tight टॉप और छोटी शॉर्ट्स।

भैया फिर आए। इस बार उन्होंने मुझे जगाया नहीं, बल्कि चुपचाप मेरे बगल में लेट गए। उन्होंने मेरे टॉप के अंदर हाथ डाला और स्तनों को धीरे-धीरे सहलाने लगे। मैं आँखें बंद किए पड़ी रही। उनके हाथ मेरे निप्पल्स को हल्का-हल्का दबा रहे थे। फिर उन्होंने टॉप ऊपर किया और एक स्तन मुंह में ले लिया। चूसने लगे। मैं सिसकारियाँ भर रही थी — “आह्ह्ह… भैया…”

उनका दूसरा हाथ मेरी शॉर्ट्स के अंदर चला गया। उन्होंने मेरी चूत को बाहर से सहलाना शुरू किया। उंगलियों से लिप्स को छेड़ रहे थे। मैं पूरी गीली हो चुकी थी। वे सिर्फ उंगली अंदर डालने की कोशिश कर रहे थे लेकिन पूरी नहीं डाल रहे थे। सिर्फ छेड़ रहे थे।

काफी देर तक उन्होंने यही किया — स्तन चूसना, चूत सहलाना, और कभी-कभी अपना लंड मेरी जांघ पर रगड़ना। फिर वे मुठ मारकर झड़ गए और चले गए।

अब ये सिलसिला रोज का हो गया। हर रात भैया आते। पहले मेरे स्तनों को काफी देर तक चूसते और दबाते। फिर मेरी चूत को उंगलियों से खेलते। धीरे-धीरे उन्होंने दो उंगलियाँ अंदर डालना शुरू कर दिया। मैं तड़पकर कराहती — “भैया… और अंदर… आह्ह्ह…”

वे मेरी चूत चाटने भी लगे थे। लेकिन अभी तक पूरा लंड अंदर नहीं डाला था। सिर्फ रगड़ते थे। मेरे होंठों पर, स्तनों के बीच में, और चूत पर।

मैं अब बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। हर रात सोते समय मैं इंतजार करती कि आज भैया मुझमें अपना लंड डालेंगे। लेकिन भैया जानबूझकर बहुत slow रखे हुए थे।

इस रात भैया आए तो पहले से ज्यादा जोश में थे। उन्होंने मुझे पूरी तरह नंगा कर दिया। खुद भी नंगे हो गए। उनका मोटा लंड मेरे सामने था। मैंने उसे हाथ में लिया और चूसने लगी। काफी देर तक चूसा।

फिर उन्होंने मुझे लिटाया। मेरी टांगें फैलाईं। लंड की टिप मेरी चूत पर रखी और सिर्फ रगड़ने लगे। काफी देर तक रगड़ा। मैं तड़प रही थी — “भैया… अब डाल दो ना… मैं चुदाई के लिए मरी जा रही हूं… प्लीज…”

वे मुस्कुराए और बोले, “अभी नहीं माया… कल रात। आज सिर्फ रगड़ के ही झड़वा देता हूं।”

उस रात भैया के जाने के बाद मैं बिस्तर पर करवटें बदल रही थी। मेरी चूत अभी भी गीली थी और बहुत तड़प रही थी। मैंने हिम्मत करके अपनी उंगली अपनी चूत में डाली। भैया का चेहरा, उनका लंड, उनकी उंगलियाँ — सब याद करके मैं तेज-तेज उंगलियां चला रही थी। “आह्ह्ह भैया… काश तुम अंदर डाल देते…” मैं फुसफुसा रही थी। उस रात मैं तीन बार झड़ गई, लेकिन संतुष्टि नहीं हुई।-

अगले दिन सुबह भैया को अचानक ऑफिस का जरूरी काम पड़ गया। उन्हें 8-10 दिन के लिए दिल्ली जाना पड़ा। जाते समय उन्होंने मुझे गले लगाया। उनका शरीर मेरे शरीर से सटा हुआ था। उन्होंने कान में फुसफुसाकर कहा, “माया… तुम्हारी बहुत याद आएगी।” उनकी सांस मेरे कान पर पड़ रही थी। मैं शर्मा गई लेकिन कुछ नहीं बोली।

भैया के जाने के बाद घर सूना-सूना लगने लगा। मैं कॉलेज जाती, घर आकर अपना काम करती, लेकिन मन कहीं और था। हर रात भैया की याद आती। मैं बिस्तर पर लेटकर अपनी चूत में उंगलियां डालती। कभी दो, कभी तीन उंगलियां। भैया की पुरानी शर्ट सूंघकर, उनकी फोटो देखकर मुठ मारती। “भैया… जल्दी आओ ना… मेरी चूत बहुत जल रही है…” मैं अकेले में बुदबुदाती।

एक रात मैंने हिम्मत करके भैया को वीडियो कॉल किया। उन्होंने उठाया। हम दोनों काफी देर तक बातें करते रहे। बातों-बातों में मैंने हल्का-हल्का अपना टॉप सरका दिया। भैया की आँखें मेरे स्तनों पर अटक गईं। उन्होंने कुछ नहीं कहा, लेकिन उनकी सांस तेज हो गई।

उधर भैया दिल्ली में भी परेशान थे। उन्होंने मुझे मैसेज किया — “माया, वहाँ सब ठीक है? मुझे तुम्हारी बहुत याद आ रही है।” मैंने जवाब दिया, “मुझे भी भैया… आपकी बहुत याद आ रही है।” उन्होंने सिर्फ एक इमोजी भेजा — 🔥🔥

दिन बीतते गए। मैं अब दिन में भी बाथरूम में जाकर उंगलियां करने लगी थी। भैया की याद में मैं अपनी चूत को रगड़ती, स्तनों को दबाती। कभी-कभी मैं उनकी पुरानी जॉक्स पहनकर सोती।

भैया भी मुझे रोज मैसेज करते — “क्या कर रही हो?” “सोने जा रही हो?” हर मैसेज में छुपी हुई भूख साफ दिख रही थी। एक रात उन्होंने मुझे वॉइस नोट भेजा। उसमें सिर्फ उनकी भारी सांस और हल्की-हल्की मुठ मारने की आवाज थी। मैंने उसे सुनकर अपनी चूत में तीन उंगलियां डाल दीं और जोर-जोर से झड़ गई।

अब सिर्फ एक दिन बचा था। मैं पूरी बेचैन थी। रात को मैंने हिम्मत करके भैया को वीडियो कॉल किया। इस बार मैंने अपना टॉप उतार दिया। भैया ने भी अपनी शर्ट उतार दी। हम दोनों एक दूसरे को देखकर अपने-अपने शरीर को छू रहे थे। भैया अपना लंड दिखा रहे थे और मैं अपनी चूत। लेकिन कोई भी कुछ बोल नहीं रहा था। सिर्फ तड़प थी।

भैया बोले, “माया… कल मैं आ रहा हूं… तब बहुत कुछ होगा।” मैंने सिर्फ “हम्म…” कहा।

भैया आखिरकार लौट आए। शाम को घर आए तो थके हुए थे। मम्मी-पापा दोनों घर पर थे, इसलिए हम सिर्फ नजरों से ही बात कर पाए। भैया मुझे देखते ही मुस्कुरा दिए। उनकी नजर मेरे शरीर पर घूम रही थी। मैं शर्मा गई लेकिन अंदर से बहुत खुश थी।

रात का खाना खाने के बाद सब अपने-अपने कमरे में चले गए। मैं अपने कमरे में लेट गई। दिल जोरों से धड़क रहा था। मैं जानती थी कि आज भैया जरूर आएंगे।

रात के करीब 12:30 बजे मेरे कमरे का दरवाजा धीरे से खुला। भैया अंदर आए और चुपचाप दरवाजा बंद कर लिया। उन्होंने मेरे बेड के पास आकर मुझे देखा। मैं आँखें बंद किए पड़ी थी लेकिन सोई नहीं थी।

भैया मेरे बगल में लेट गए। उन्होंने धीरे से मुझे अपनी तरफ खींचा और गले लगा लिया। उनका शरीर गर्म था। उन्होंने मेरे कान में फुसफुसाया, “माया… 10 दिन बाद तुझे छू रहा हूं… बहुत तड़पा हूं मैं।”

फिर उन्होंने मेरे होंठों पर किस किया। बहुत धीरे, बहुत प्यार से। किस धीरे-धीरे गहरी होती गई। उनकी जीभ मेरे मुंह में घुस गई। हम काफी देर तक एक दूसरे को चूमते रहे।

उन्होंने मेरा टॉप ऊपर किया। मेरे स्तनों को दोनों हाथों से सहलाने लगे। “तेरे boobs की याद में मैं दिल्ली में भी रात भर जागता था…” कहते हुए उन्होंने एक स्तन मुंह में ले लिया और धीरे-धीरे चूसने लगे। निप्पल को जीभ से घुमाते, हल्का-हल्का काटते। मैं उनकी पीठ पर हाथ फेर रही थी और “आह्ह्ह भैया… धीरे…” कर रही थी।

उनका दूसरा हाथ मेरी शॉर्ट्स के अंदर गया। मेरी चूत पूरी तरह गीली थी। उन्होंने बाहर से ही काफी देर तक सहलाया। फिर धीरे से एक उंगली अंदर डाली। “बहन… कितनी गीली है तेरी चूत… मेरी याद में रोज उंगली करती थी ना?”

मैं शर्म से लाल हो गई लेकिन हाँ में सर हिला दिया। भैया मुस्कुराए और दो उंगलियां अंदर डाल दीं। वे धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगे। मैं तड़प रही थी।

काफी देर तक उन्होंने सिर्फ उंगलियों और मुंह से ही खेला। मेरी चूत चाटी, स्तन चूसे, पेट चूमा, जांघें चूमी। मैं कई बार झड़ चुकी थी।

लेकिन भैया ने अपना लंड अभी तक मेरी चूत में नहीं डाला। सिर्फ मेरी जांघ पर, पेट पर और चूत के बाहर रगड़ रहे थे।

मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। मैंने उनके कान में कहा, “भैया… अब डाल दो ना… मैं बहुत तड़प गई हूं… प्लीज…”

भैया मेरे कान में बोले, “कल रात माया… आज सिर्फ foreplay। मैं तुझे पूरा मजा देना चाहता हूं। जल्दबाजी नहीं करनी।”

भैया मेरे कान में “कल रात” कहकर मुस्कुरा दिए। मैंने उनकी छाती पर हाथ रखकर गिड़गिड़ाते हुए कहा, “भैया प्लीज… आज ही डाल दो… मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रही…” लेकिन भैया ने मेरे होंठों पर उंगली रख दी और बोले, “शांत हो जा माया… धीरे-धीरे सब होगा। मैं तुझे रात भर तड़पाना चाहता हूं।”

उन्होंने मुझे लिटाया और मेरे पूरे शरीर को चूमने लगे। गर्दन, स्तन, पेट, नाभि, जांघें — हर जगह। मेरी चूत पर वे सिर्फ जीभ फेर रहे थे, अंदर नहीं डाल रहे थे। मैं तड़प-तड़पकर उनकी पीठ पर नाखून गड़ा रही थी। “भैया… आह्ह्ह… अब बस करो… मुझे पूरा चाहिए…”

लेकिन भैया रुकने वाले नहीं थे। उन्होंने अपना लंड मेरी चूत के बाहर ही रगड़ना शुरू कर दिया। सुपाड़ा मेरी चूत की लिप्स पर घिस रहा था, लेकिन अंदर नहीं जा रहा था। मैं कमर उठा-उठाकर खुद को रगड़ रही थी, लेकिन भैया जानबूझकर पीछे हट जाते।

काफी देर तक ये खेल चलता रहा। मैं कई बार झड़ चुकी थी। भैया भी मेरे मुंह में लंड देकर झड़ गए। आखिरकार रात के 3 बजे के करीब वे बोले, “अब सो जा माया… कल और होगा।” और चले गए।

अगली रात भी भैया आए। इस बार उन्होंने मुझे पहले से ज्यादा छेड़ा। मेरे पूरे शरीर को चाटा, स्तनों को लाल कर दिया, चूत में तीन उंगलियां डालकर घुमाईं, लेकिन लंड अंदर नहीं डाला। जब मैं रोते हुए कह रही थी “भैया अब डाल दो”, तो उन्होंने मुस्कुराकर कहा, “अभी नहीं… तुझे और तड़पाना है।”

तीसरी रात भैया आए। हम दोनों नंगे हो चुके थे। भैया मुझ पर लेटे हुए थे। उनका लंड मेरी चूत के बिल्कुल मुंह पर था। बस एक धक्का और अंदर चला जाता। मैंने आँखें बंद कर लीं और तैयार हो गई।

तभी अचानक बाहर से आवाज आई — “नितीश… माया… पानी पीने कौन जा रहा है?” मम्मी उठ गई थीं।

भैया तुरंत मेरे ऊपर से हट गए। हम दोनों घबरा गए। भैया जल्दी से कपड़े पहनकर बाहर चले गए। मैं बिस्तर पर पड़ी रह गई। मेरी चूत जल रही थी। मैंने फिर उंगलियां डालकर खुद को झड़ाया, लेकिन संतुष्टि नहीं हुई।

चौथी रात भैया फिर आए। इस बार उन्होंने मुझे कुतिया बनाया। लंड मेरी चूत पर रखा और काफी देर तक रगड़ा। मैं रो रही थी — “भैया… अब डाल दो… मैं मर जा रही हूं…”

भैया ने मेरी कमर पकड़कर कहा, “बस एक-दो दिन और माया… फिर मैं तुझे पूरी तरह अपना बना लूंगा।”

भैया रात के 12:40 बजे आए। इस बार उनके चेहरे पर भी साफ तड़प दिख रही थी। उन्होंने तुरंत मुझे चूमना शुरू कर दिया। किस बहुत भूखी और जोरदार थी। हम दोनों एक दूसरे को कसकर पकड़े हुए थे।

उन्होंने मेरे सारे कपड़े उतार दिए। मैं भी उनकी शर्ट और पैंट उतारने में मदद कर रही थी। अब हम दोनों पूरी तरह नंगे थे। भैया मेरे ऊपर लेट गए। उनका मोटा, गर्म लंड मेरी चूत के बिल्कुल मुंह पर था।

मैंने उनकी कमर पकड़कर कहा, “भैया… आज प्लीज मत रोकना… मुझे अब और इंतजार नहीं हो रहा… अंदर डाल दो…”

भैया ने मेरी आँखों में देखा और बोले, “हाँ माया… आज मैं तुझे अपनी बना लूंगा।” उन्होंने लंड की टिप मेरी चूत में हल्का सा दबाई। बस एक छोटा सा धक्का और पूरा लंड अंदर चला जाता।

मैं आँखें बंद करके तैयार हो गई। भैया ने मेरी कमर पकड़ी और…

तभी अचानक बाहर से आवाज आई — “नितीश! माया! कौन जाग रहा है? पानी का ग्लास कहाँ रखा है?”

मम्मी उठ गई थीं और बाहर कमरे में घूम रही थीं। भैया तुरंत मेरे ऊपर से हट गए। हम दोनों घबरा गए। भैया जल्दी से अपनी पैंट पहनकर चुपचाप कमरे से निकल गए। मैं बिस्तर पर नंगी पड़ी रह गई। मेरी चूत जल रही थी। मैं तकिए में मुंह दबाकर रो पड़ी, मुझे लंड चाहिए था जोकि आज फिर मेरी चुत मे जाने से रह गया था।

अगली रात भैया फिर आए। इस बार हम दोनों पहले से ज्यादा बेकाबू थे। उन्होंने मुझे तुरंत नंगा किया। मैंने भी उनका लंड पकड़कर चूसना शुरू कर दिया। काफी देर तक चूसने के बाद भैया मुझे बेड पर लिटाकर मेरी टांगें फैला दीं।

उनका लंड मेरी चूत पर था। वे बोले, “माया… आज कोई नहीं आएगा… मैं तुझे जमकर चोदूंगा।”

मैंने हाँ में सर हिलाया। भैया ने लंड दबाया। सुपाड़ा अंदर घुसने लगा था कि तभी अचानक छोटा भाई अवि बाहर से चिल्लाया — “भैया! मेरा फोन कहाँ है? तुम्हारे कमरे में देखा था!”

भैया को तुरंत उठना पड़ा। उन्होंने जल्दी से कपड़े पहने और बाहर चले गए। मैं फिर से अधूरी रह गई। मेरी चूत सूज गई थी। मैंने उंगलियां डालकर खुद को झड़ाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

सातवीं रात भैया आए तो हम दोनों पहले से ज्यादा बेकरार थे। उन्होंने मुझे चूमते हुए कहा, “माया… आज मैं तुझे नहीं छोडूंगा।”

वे मुझे कुतिया बनाकर मेरी गांड पर लंड रगड़ रहे थे। मैंने खुद पीछे हाथ डालकर उनका लंड पकड़ा और अपनी चूत पर रख दिया। भैया ने मेरी कमर पकड़ी और…

तभी मम्मी-पापा दोनों बाहर हॉल में बात करने लगे। उनकी आवाजें साफ आ रही थीं। भैया रुक गए। हम दोनों काफी देर तक चुपचाप लेटे रहे। जब मम्मी-पापा सो गए तब तक हमारी तड़प और बढ़ गई थी।

भैया ने आखिर में मेरे कान में कहा, “माया… कल रात… कोई रुकावट नहीं आएगी। मैं तुझे पूरी तरह चोदूंगा।”

भैया रात के 12:15 बजे मेरे कमरे में आए। इस बार उनके चेहरे पर साफ दिख रहा था कि आज वो रुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने तुरंत दरवाजा अंदर से बंद किया और मेरे बेड के पास आकर मुझे जोर से गले लगा लिया। हम दोनों काफी देर तक एक दूसरे को कसकर पकड़े रहे। उनकी सांसें तेज थीं और मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था।

भैया ने मुझे बेड पर लिटा दिया। उन्होंने मेरे होंठों पर गहरी किस की। उनकी जीभ मेरे मुंह में घुसकर मेरी जीभ से खेल रही थी। किस के दौरान उनका एक हाथ मेरे स्तनों पर था। उन्होंने मेरा टॉप ऊपर किया और दोनों स्तनों को बाहर निकाल लिया। मेरे ३४ साइज के बड़े-बड़े स्तन देखकर उनकी आँखें चमक उठीं। उन्होंने एक स्तन मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगे। निप्पल को दांतों से हल्का काटते हुए चूस रहे थे। दूसरा स्तन हाथ से मसल रहे थे।

“आह्ह्ह भैया… धीरे… आह्ह्ह…” मैं कराह रही थी।

उनका दूसरा हाथ मेरी शॉर्ट्स के अंदर चला गया। उन्होंने मेरी पैंटी उतार दी। मेरी चूत पहले से ही बहुत गीली थी। उन्होंने उंगलियों से मेरी चूत की लिप्स को सहलाया, फिर दो उंगलियां अंदर डालकर अंदर-बाहर करने लगे। मैं तड़प रही थी। उन्होंने मेरी चूत को काफी देर तक चाटा। उनकी जीभ अंदर-बाहर हो रही थी। मैं उनके सर को पकड़कर अपनी चूत में दबा रही थी।

“भैया… आह्ह्ह… और चूसो… बहुत मजा आ रहा है…”

काफी देर foreplay के बाद भैया मेरे ऊपर आए। उन्होंने मेरी टांगें फैला दीं। उनका मोटा, गर्म और खड़ा लंड मेरी चूत के बिल्कुल मुंह पर था। मैंने खुद हाथ बढ़ाकर उनका लंड पकड़ा और अपनी चूत के मुंह पर रख दिया।

भैया ने धीरे से धक्का मारा। उनका सुपाड़ा मेरी चूत में घुस गया। “आह्ह्ह भैया… धीरे… दर्द हो रहा है…” मैंने दांत भींचते हुए कहा।

वे रुक गए। मेरे माथे को चूमते हुए बोले, “आराम से माया… मैं बहुत धीरे करूंगा।” फिर उन्होंने और धीरे से आधा लंड अंदर किया। मैं कराह रही थी। दर्द के साथ एक अनोखा मजा भी हो रहा था। कुछ सेकंड रुककर उन्होंने बाकी का पूरा लंड भी बहुत धीरे-धीरे मेरी चूत में उतार दिया।

अब भाई का पूरा मोटा लंड मेरी चूत में समा चुका था। मैंने आह भरते हुए कहा, “भैया… पूरा अंदर चला गया… आह्ह्ह… बहुत भर गया है…”

भैया ने बहुत धीमी गति से धक्के मारना शुरू किया। हर धक्के के साथ उनका लंड मेरी चूत को पूरी तरह भर देता। मैं “आह्ह्ह… आह्ह्ह… भैया…” करती जा रही थी। वे मेरे स्तनों को चूसते हुए धीरे-धीरे चोद रहे थे। उनकी रफ्तार जानबूझकर slow रखी हुई थी।

करीब १०-१२ मिनट बाद उन्होंने मेरी टांगें अपने कंधों पर रख लीं और थोड़े गहरे धक्के मारने लगे। अब उनकी थैलियाँ मेरी गांड से हल्का-हल्का टकरा रही थीं। “घप्प… घप्प…” की हल्की आवाज कमरे में गूंज रही थी।

मैं उनकी पीठ पर नाखून गड़ा रही थी। “भैया… और गहरा… आह्ह्ह… मुझे बहुत अच्छा लग रहा है…”

भैया ने मेरे कान में फुसफुसाकर कहा, “माया… तेरी चूत बहुत टाइट है… मैं तुझे पूरी रात चोदना चाहता हूं…”

भैया मेरी टांगें अपने कंधों पर रखे हुए थे। अब उनके धक्के थोड़े तेज और गहरे हो गए थे। हर धक्के पर उनका मोटा लंड मेरी चूत के अंदर तक जा रहा था। मैं तकिए में मुंह दबाकर कराह रही थी — “आह्ह्ह भैया… बहुत गहरा जा रहा है… आह्ह्ह… फाड़ दो मेरी चूत…”

भैया पसीने से तर हो रहे थे। वे मेरे स्तनों को चूसते हुए जोर-जोर से धक्के मार रहे थे। उनकी थैलियाँ मेरी गांड से टकरा रही थीं। “घप्प… घप्प… घप्प…” की आवाज अब साफ सुनाई दे रही थी। मैं उनकी पीठ पर नाखून गाड़ रही थी। दर्द और मजा दोनों एक साथ हो रहा था।

करीब १५-२० मिनट तक उन्होंने मुझे इसी पोजीशन में चोदा। फिर उन्होंने मुझे घुमाकर कुतिया बनाया। मेरी गांड ऊपर थी। भैया ने पीछे से लंड रखा और एक जोरदार धक्का मारा। पूरा लंड मेरी चूत में घुस गया। मैं “आह्ह्ह्ह…” करके चीख पड़ी।

भैया ने मेरी कमर पकड़कर तेजी से चोदना शुरू कर दिया। “ले बहन… ले अपना भाई का लंड… कितनी टाइट चूत है तेरी…” वे बोल रहे थे। मैं भी अपनी गांड पीछे करके उनका साथ दे रही थी।

“भैया… और तेज… आह्ह्ह… मुझे और जोर से चोदो…”

वे मेरी कमर पकड़े हुए घपाघप चोद रहे थे। कभी-कभी मेरी गांड पर थप्पड़ मार देते। मेरे स्तन लटककर हिल रहे थे। मैंने एक हाथ नीचे ले जाकर अपनी चूत को सहलाना शुरू कर दिया।

काफी देर तक कुतिया स्टाइल में चुदाई के बाद भैया रुके। उन्होंने मुझे फिर से अपनी गोद में बिठा लिया। अब मैं उनके लंड पर ऊपर-नीचे हो रही थी। वे नीचे से मेरे स्तनों को दबा रहे थे और कभी-कभी जोर से ऊपर धक्का लगा देते थे। मैं तेजी से उछल-उछलकर चुदवा रही थी। “आह्ह्ह भैया… बहुत मजा आ रहा है… मैं फिर झड़ने वाली हूं…”

मैं दो बार और झड़ गई। भैया अभी तक नहीं झड़े थे। उन्होंने मुझे नीचे लिटाया और मेरी टांगें चौड़ी करके फिर से चोदने लगे। अब उनकी रफ्तार काफी तेज हो गई थी।

“माया… मैं झड़ने वाला हूं… कहाँ डालूं?” “अंदर ही डाल दो भैया… अपनी बहन की चूत में भर दो…”

भैया ने आखिरी कुछ तेज धक्के मारे और मेरी चूत के अंदर गर्म-गर्म माल भर दिया। वे मेरे ऊपर ही ढेर हो गए। हम दोनों पसीने से तर थे और हांफ रहे थे।

लेकिन भैया अभी रुकने वाले नहीं थे। उन्होंने कुछ देर आराम किया और फिर बोले, “माया… अब तेरी गांड भी लेनी है…”

भैया मेरे ऊपर से उठे और कुछ देर तक मेरे बगल में लेटे रहे। हम दोनों हांफ रहे थे। उनकी उंगलियां मेरे स्तनों पर घूम रही थीं। उन्होंने मेरे कान में फुसफुसाकर कहा, “माया… अब तेरी गांड लेनी है… तैयार है?”

मैं शर्मा गई। पहली बार गांड में लंड लेने वाली थी। डर के साथ उत्सुकता भी थी। मैंने धीरे से कहा, “भैया… धीरे से करना… दर्द न हो…”

भैया मुस्कुराए। उन्होंने मुझे पेट के बल लिटाया। मेरी गांड ऊपर थी। उन्होंने पहले मेरी गांड के दोनों गोलों को चूमा, फिर जीभ से चाटा। “तेरी गांड कितनी सुंदर है माया…” कहते हुए उन्होंने अपनी उंगली मेरी गांड के छेद पर रखी और हल्का-हल्का घुमाने लगे।

मैं सिहर गई। “आह्ह्ह भैया…”

उन्होंने लंड पर थूक लगाया और मेरी गांड के छेद पर रगड़ने लगे। फिर बहुत धीरे से सुपाड़ा अंदर डाला। “आह्ह्ह्ह… भैया… दर्द हो रहा है… धीरे…” मैंने तकिए में मुंह दबाकर कहा।

भैया रुक गए। उन्होंने मेरी कमर सहलाई और बोले, “आराम से बहन… पूरा अंदर चला जाएगा।” फिर उन्होंने और धीरे से आधा लंड अंदर किया। मैं दांत भींच रही थी। दर्द बहुत था लेकिन एक अजीब सा मजा भी आ रहा था।

कुछ देर बाद पूरा लंड मेरी गांड में समा गया। भैया ने मुझे कुछ देर ऐसे ही रहने दिया ताकि मैं आदत डाल लूं। फिर बहुत धीमी गति से धक्के मारने शुरू कर दिए।

“आह्ह्ह भैया… आह्ह्ह… धीरे… लेकिन अच्छा लग रहा है…”

भैया की रफ्तार धीरे-धीरे बढ़ने लगी। अब वे मेरी कमर पकड़कर ठीक से चोद रहे थे। उनकी थैलियाँ मेरी चूत से टकरा रही थीं। “घप्प… घप्प… घप्प…” की आवाज कमरे में भर गई थी।

मैंने एक हाथ नीचे ले जाकर अपनी चूत को सहलाना शुरू कर दिया। भैया मेरी पीठ और गर्दन को चूम रहे थे। “माया… तेरी गांड बहुत टाइट है… आह्ह्ह… बहुत मजा आ रहा है…”

वे काफी देर तक मेरी गांड चोदते रहे। फिर उन्होंने मुझे फिर से कुतिया बनाया और चूत में लंड डाल दिया। कुछ देर चूत चोदने के बाद फिर गांड में डाल दिया। इस तरह वे दोनों जगह चोद रहे थे।

आखिरकार वे झड़ने वाले थे। उन्होंने मेरी गांड में ही गर्म माल भर दिया। “आह्ह्ह माया… ले बहन… अपना भाई का माल…”

हम दोनों थककर बेड पर गिर पड़े। भैया ने मुझे गले लगा लिया और बोले, “माया… तू अब पूरी तरह मेरी है।”

उस रात के बाद हम दोनों की तड़प थोड़ी शांत हुई, लेकिन भूख बढ़ गई थी। अगली कई रातें हम छुप-छुपकर सेक्स करते रहे। हर रात नई पोजीशन ट्राई करते। कभी मैं ऊपर होती, कभी भैया मुझे दीवार से सटाकर खड़े-खड़े चोदते, कभी शावर के नीचे।

एक रात भैया ने मुझे बाथरूम में ले जाकर शावर के नीचे चोदा। गर्म पानी हमारे शरीर पर गिर रहा था। भैया ने मुझे दीवार से सटाया और पीछे से मेरी चूत में लंड डाल दिया। पानी की आवाज के साथ “घप्प घप्प” की आवाज छुप रही थी। मैं मुंह में तौलिया दबाकर चीख रही थी।

“भैया… आह्ह्ह… और तेज… फाड़ दो…”

उन्होंने मेरी गांड पर थप्पड़ मारते हुए कहा, “ले बहन… तेरी चूत और गांड दोनों मेरी हैं।”

धीरे-धीरे हम और बोल्ड होते गए। कभी-कभी दिन में भी जब मम्मी-पापा बाहर होते, हम जल्दी-जल्दी सेक्स करते। एक दिन छोटा भाई स्कूल गया था। भैया मुझे किचन में झुकाकर चोद रहे थे। मैं बर्तन पकड़े हुए थी और भैया पीछे से घपाघप कर रहे थे।

हम अब एक दूसरे के बिना नहीं रह पाते थे। रात को सोने से पहले भैया जरूर आते। कभी-कभी पूरे दिन की तड़प के बाद रात भर चुदाई चलती। मैं अब उनकी गांड भी चूसने लगी थी। भैया को ये बहुत पसंद था।

अब हम दोनों पूरी तरह आदी हो चुके थे। भैया जब भी मौका मिलता मुझे चोदते। कभी कार में, कभी छत पर, कभी होटल में। हम दोनों को पता था कि ये गलत है, लेकिन ना हम रुक सकते थे, ना हम रुकना चाहते थे।

मैं अब भैया की पूरी रंडी बन चुकी थी। वो चाहे चूत हो, गांड हो या मुंह — हर जगह भर देते थे। और मैं भी उन्हें पूरा मजा देती।

कहानी यहीं खत्म होती है। लेकिन हमारी चुदाई वाली कहानी अभी भी जारी है…

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3 Comments

  1. Hello Maya ji
    Am Body Massager Home Service Only Female
    Full Satisfied Full Enjoy Full Privacy Hogi
    Kabhi Jarurat Pade To Please Contact Me

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