माँ बनी क्लाससमेट 5
Maa ki jungle me gandbang chudai story:- जंगल की सुबह बेहद हसीन थी, पर त्रुप्ति के लिए ये एक नए इम्तेहान की शुरुआत थी। रात भर राहुल की बाँहों में रहने और उसके “बैक स्ट्रोक्स” को झेलने के बाद, त्रुप्ति के जिस्म में एक अजीब सी थकान और गर्मी थी। जब वो अपने टेंट से बाहर निकलीं, तो हर तरफ़ चहल-पहल थी। दस बज चुके थे और दीपक सर सबको इकट्ठा कर रहे थे।
Is kahani ka pichla part yaha padhen ==> माँ बनी क्लाससमेट 4
Maa ki jungle me gandbang chudai story
त्रुप्ति ने आज जानबूझकर एक बेहद टाइट रेड गाउन पहना था। वो गाउन उनके तन पर ऐसे चिपका था जैसे उनकी दूसरी खाल हो। उनके 38 इंच के बूब्स गाउन की पतली सतह को फाड़कर बाहर आने को बेताब लग रहे थे। जब वो चलतीं, तो उनकी पतली कमर के नीचे उनकी भारी-भारी गाँड व्हाइट नाइट-गाउन के बाद अब इस रेड गाउन में और भी ज़्यादा क़यामत ढा रही थी। वो वाक़ई किसी हॉलीवुड स्टार से कम नहीं लग रही थीं।
राहुल, विक्की और अभय—तीनों दुश्मन और दोस्त आज एक ही कतार में खड़े थे, और उन तीनों की नज़रें सिर्फ़ एक ही निशाने पर थीं: त्रुप्ति की थिरकती हुई गाँड। राहुल का लंड उसकी टाइट जींस में फन उठाए खड़ा था। वो सोच रहा था, ‘कल रात तो सिर्फ़ ट्रेलर था, आज मौक़ा मिला तो माँ की पुसी की गहराई ज़रूर नापूँगा।’
कृति और शीतल त्रुप्ति के पास पहुँचीं और उनकी बातों ने त्रुप्ति को और भी ज़्यादा “नॉटी” बनने पर मजबूर कर दिया।
कृति: हाई त्रुप्ति! क्या चमक रही हो आज तो!
शीतल: यू आर लुकिंग लाइक अ गॉडेस, त्रुप्ति! रात की थकान चेहरे पर दिख नहीं रही, बल्कि एक अलग ही नूर है।
त्रुप्ति (एक नशीली स्माइल के साथ): ओ थैंक यू, डियर्स! बस जंगल की हवा का असर है।
त्रुप्ति ने हल्के से मुड़कर देखा। उन्होंने महसूस किया कि राहुल, विक्की और अभय तीनों के पैंट में ‘टेंट’ बन चुके हैं। वो तीनों अपने लंड को मसल रहे थे। त्रुप्ति को एक अजीब सा गर्व महसूस हुआ कि वो एक साथ तीन-तीन जवान लड़कों को पागल कर रही हैं।
कृति: क्यों त्रुप्ति, बता ना… तेरा बीएफ़ (राहुल) तेरे साथ कुछ करता है कि नहीं? रात को कुछ ‘स्पेशल’ हुआ?
त्रुप्ति (एक्टिंग को अगले लेवल पर ले जाते हुए): राहुल बहुत शैतान है, कृति। जब भी अकेले मिलते हैं, वो मुझे जमके मसलता है। वो चोदने में बिल्कुल रहम नहीं दिखाता।
शीतल: क्या! सच में तुम दोनों ने सेक्स किया है?
त्रुप्ति (झूठ बोलते हुए पर अंदर से गरम होते हुए): हाँ… दो-तीन बार हो चुका है। वो बहुत एग्रेसिव है।
कृति: और उसका साइज़? सुना है राहुल का गन्ना काफ़ी बड़ा है?
त्रुप्ति (रात का एहसास याद करते हुए): तक़रीबन 8-9 इंच का है। जब वो अंदर जाता है तो मेरी रूह काँप जाती है। बड़ा मज़ा आता है इतने बड़े लंड से चुदवाने में।
शीतल: वैसे उसे तेरी पुसी ज़्यादा पसंद है या गाँड?
त्रुप्ति (राहुल की पसंद को याद करते हुए): उसे मेरी गाँड चोदना ज़्यादा पसंद है। वो ज़्यादातर मेरी गाँड ही मारता है, और बड़ा बेरहमी से मारता है।
कृति और शीतल ये सुनकर दंग रह गईं। उन्हें लगा त्रुप्ति वाक़ई एक “लकी रंडी” है जो इतने बड़े लंड का मज़ा ले रही है। तभी दीपक सर ने सबको टीम अनाउंसमेंट के लिए बुलाया।
त्रुप्ति जब अपनी हाई हील्स पर थिरकती हुई दीपक सर की तरफ़ बढ़ीं, तो उनकी गाँड हवा में ऐसे लहरा रही थी जैसे किसी को दावत दे रही हो। राहुल, विक्की और अभय तीनों हवस से पागल हो रहे थे। त्रुप्ति ने उनकी तरफ़ देखकर धीरे से कहा, “ये लोग तो रोज़ ही अपनी आँखों से मेरे कपड़े फाड़ते हैं और मेरी चुदाई करते हैं।”
दीपक सर की नज़र जैसे ही त्रुप्ति पर पड़ी, वो अपने होश खो बैठे। उन्होंने पूरे कॉलेज में ऐसी हसीन औरत नहीं देखी थी। उनके दिमाग़ में तुरंत ख़याल आया, ‘इस त्रुप्ति का तो एक स्पेशल क्लास लेना ही पड़ेगा।’
दीपक सर ने टीमें अनाउंस कीं। राहुल और विक्की के चेहरे उतर गए क्योंकि त्रुप्ति उनके ग्रुप में नहीं थीं। लेकिन अभय की लॉटरी लग गई थी। त्रुप्ति अभय के ग्रुप में थीं और अभय ही उस ग्रुप का लीडर था।
दीपक सर: ये तुम्हारे टास्क हैं। नाउ गो इनटू द जंगल!
अभय ने त्रुप्ति की तरफ़ एक शैतानी मुस्कान से देखा। उसे लगा कि आज रात त्रुप्ति राहुल की नहीं, बल्कि उसकी होगी। जंगल के घने पेड़ों के बीच, अब अभय और त्रुप्ति अकेले होने वाले थे, और त्रुप्ति को पता था कि अभय उन्हें इतनी आसानी से छोड़ने वाला नहीं था।
सारे ग्रुप्स जंगल की गहराइयों में रवाना हो चुके थे। चारों तरफ़ घने पेड़ और झाड़ियाँ थीं, जो किसी भी तरह के गुनाह को छुपाने के लिए काफ़ी थीं। अभय, जो त्रुप्ति को पाने के लिए पहले ही पागल हो रहा था, आज बेहद ख़ुश था। उसने एक जगह रुककर अपने ग्रुप को दो-दो के पेयर्स में बाँट दिया। शैतानी दिमाग़ लड़ाते हुए, उसने त्रुप्ति को अपने साथ रखा और बाक़ी सबको दूसरी दिशाओं में भेज दिया।
सन्नाटा छा गया था। सिर्फ़ पक्षियों की आवाज़ें और त्रुप्ति की साँसों की गर्मी बाक़ी थी।
त्रुप्ति (थोड़ी घबराहट में): चलो अभय, बाक़ी सब निकल गए हैं। हम भी अपना टास्क पूरा करते हैं।
त्रुप्ति आगे बढ़ने ही वाली थीं कि अभय ने एक झटके से उनका नरम हाथ पकड़ा और उन्हें अपनी मज़बूत बाँहों में खींच लिया। त्रुप्ति सीधा अभय की छाती से जा टकराईं। उनके रेड गाउन के अंदर क़ैद बूब्स अभय के सीने पर बुरी तरह दब गए।
अभय (एक गहरी और भूखी आवाज़ में): मैं यहाँ कोई टास्क पूरा करने नहीं आया हूँ, त्रुप्ति। मैं तो तुम्हारे साथ मज़े करने आया हूँ! कब तक मुझे तड़पाओगी?
त्रुप्ति (छूटने की कोशिश करते हुए): अभय! ये तुम क्या कर रहे हो? ये सब ग़लत है!
अभय: आई लव यू त्रुप्ति यार! तुम मेरी सिचुएशन क्यों नहीं समझती? मैं तुम्हारे लिए पागल हो रहा हूँ। जब से तुम्हें देखा है, नींद और सुकून सब उड़ गया है।
त्रुप्ति: लेकिन अभय… मैं राहुल की जीएफ़ हूँ अब! तुम्हें पता है ना हमारे बीच क्या रिश्ता है?
अभय (जुनून में): मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता! राहुल से पहले मैंने तुम्हें चाहा था। प्लीज़ त्रुप्ति, आज मुझे मत रोको। मैं वादा करता हूँ, मैं सिर्फ़ ऊपर-ऊपर से ही मज़े लूँगा… बस थोड़ा सुकून चाहिए।
त्रुप्ति: नहीं अभय, ये नहीं हो सकता! छोड़ो मुझे!
त्रुप्ति अभी अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाई थीं कि अभय ने अपने दोनों हाथों से त्रुप्ति का हसीन चेहरा दबोचा और उनके रसीले होंठों पर अपने होंठ जड़ दिए। त्रुप्ति इस अचानक हुए हमले के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थीं। उनके जिस्म में एक बिजली सी दौड़ गई और उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं।
अभय अब दरिंदे पर उतर आया था। उसने अपने एक हाथ से त्रुप्ति के रेशमी बाल पकड़कर उनकी गर्दन पीछे की और दूसरे हाथ से त्रुप्ति की भरी हुई गाँड को गाउन के ऊपर से ही ज़ोर से दबोच लिया। उसने त्रुप्ति को अपने से इतना सटा लिया कि अभय का तना हुआ लंड त्रुप्ति की गाँड की दरार पर कसके दबने लगा। वो त्रुप्ति के होंठों को किसी भूखे की तरह पूरे पैशन से चूसने लगा।
त्रुप्ति शुरुआत में छूटने के लिए हाथ-पाँव मार रही थीं, पर अभय की ताक़त के आगे वो मजबूर थीं। कुछ देर बाद अभय ने त्रुप्ति की गाँड को इतनी ज़ोर से मसला कि दर्द और मज़े के मिले-जुले एहसास में त्रुप्ति का मुँह खुल गया।
मौक़ा मिलते ही अभय ने अपनी गरम ज़ुबान त्रुप्ति के मुँह में डाल दी और उन्हें एक एग्रेसिव फ़्रेंच किस देने लगा। वो त्रुप्ति के मुँह के हर कोने को अपनी ज़ुबान से चाट रहा था और उनकी ज़ुबान को चूस रहा था। त्रुप्ति की साँसें उखड़ रही थीं, उनका रेड गाउन अभय की पकड़ में चूमस रहा था।
अँधेरे जंगल में सिर्फ़ उनके होंठों के मिलने की चप-चप और त्रुप्ति की दबी हुई सिसकारियाँ सुनाई दे रही थीं। अभय का हाथ त्रुप्ति की गाँड को बेरहमी से मसल रहा था, जैसे वो उन्हें वहीं नंगा करने वाला हो।
तभी, झाड़ियों में किसी के आने की आहट हुई। कोई सूखे पत्तों पर चल रहा था। अभय तुरंत होश में आया और डर के मारे त्रुप्ति के होंठ छोड़ दिए। वो फट से त्रुप्ति से अलग होकर खड़ा हो गया, अपनी साँसें दुरुस्त करने लगा।
त्रुप्ति हाँफ रही थीं, उनकी लिपस्टिक फैल चुकी थी और उनके बाल बिखरे हुए थे। उन्होंने अपने गाउन को ठीक किया, उनकी आँखों में डर और एक अजीब सा नशा दोनों था। दोनों ने मुड़कर देखा कि आख़िर वहाँ कौन आया है…
झाड़ियों की सरसराहट के बीच से जैसे ही राहुल का चेहरा बाहर निकला, अभय के तन-बदन में आग लग गई। अभय निराश हो गया, उसके दिमाग़ में सिर्फ़ एक ही बात घूम रही थी: “इस साले को भी अभी आना था! बस थोड़ी देर और मिल जाती तो आज त्रुप्ति की सारी गर्मी निकाल देता।”
राहुल सीधा उनके पास पहुँचा। त्रुप्ति, जो अभी अभय के हमले से थोड़ी हड़बड़ाई हुई थीं, तुरंत सँभल गईं। उन्होंने अपने गाउन को झटका, कमर पर हाथ रखा और एक सेक्सी पोज़ में खड़ी हो गईं, चेहरे पर वही क़ातिलाना मुस्कान लेकर।
राहुल ने आते ही त्रुप्ति को ऊपर से नीचे तक देखा। उनका लाल गाउन जंगल की हरियाली में आग लगा रहा था। राहुल ने बिना देरी किए त्रुप्ति की गाँड पर अपना हाथ रखा और उसे सहलाने लगा। ये देखकर अभय की आँखों में खून उतर आया।
अभय (गुस्से को दबाते हुए): राहुल, तुम यहाँ क्या कर रहे हो? तुम्हें तो अपनी टीम के साथ जंगल के उस पार होना चाहिए था!
राहुल (हँसते हुए): यार अभय, तू ही बता! इतनी ख़ूबसूरत माल अगर जंगल में अकेली हो, तो कोई टीम के साथ कैसे रह सकता है? मैं तो चुपके से रास्ता बदलकर यहीं भाग आया।
त्रुप्ति ने गहरी साँस ली। उन्होंने मन ही मन सोचा: “अच्छा हुआ राहुल सही वक़्त पर आ गया, वरना ये अभय तो आज सारी हदें पार करने पर तुला था।”
त्रुप्ति (शरारत से मुस्कुराते हुए): लेकिन राहुल, ये तो ग़लत है। रूल्स फ़ॉलो करने चाहिए ना?
अभय समझ रहा था कि त्रुप्ति उसे चिढ़ा रही हैं। उसका गुस्सा और जलन अब उसके कंट्रोल से बाहर हो रहे थे। तभी राहुल ने त्रुप्ति की गाँड को गाउन के ऊपर से ही ज़ोर से मसल दिया।
राहुल: डार्लिंग, रूल्स गए तेल लेने! मुझे तो तेरी ये मस्त सेक्सी उभरी हुई गाँड यहाँ खींच लाई है!
त्रुप्ति एक पल के लिए ठिठकीं, उन्होंने ये उम्मीद नहीं की थी कि राहुल अभय के सामने इतना खुल जाएगा। पर उन्होंने सोचा कि राहुल सिर्फ़ “बेस्ट बॉयफ्रेंड” की एक्टिंग कर रहा है ताकि अभय का शक़ हमेशा के लिए ख़त्म हो जाए। वो शर्माकर रह गईं।
राहुल ने अब त्रुप्ति को अपनी मज़बूत बाँहों में खींच लिया। उसने त्रुप्ति की आँखों में आँखें डालीं और अपने दोनों हाथों से त्रुप्ति की गोल गाँड को दबोचकर सख़्ती से मसलने लगा। त्रुप्ति ने अपनी आँखें बंद कर लीं और उनके मुँह से निकलने लगीं वही मदहोश करने वाली सिसकारियाँ… “उम्मम… राहुल… आाह्ह्ह…”
अभय की हालत देखने लायक़ थी। उसके सामने उसकी पसंदीदा औरत को कोई और इतनी बेरहमी से मसल रहा था। अभय के पैंट में भी एक बड़ा टेंट बन चुका था, पर वो मजबूर था।
राहुल ने फिर त्रुप्ति के होंठों पर अपने होंठ जड़ दिए। त्रुप्ति पहले तो अचानक अटैक से शॉक हुईं, पर अब उन्हें राहुल के साथ किस करने की आदत हो चुकी थी। उन्होंने सोचा कि एक्टिंग को असली दिखाने के लिए ये ज़रूरी है। उन्होंने भी अपनी बाँहें राहुल के गले में डाल दीं और उसका पूरा साथ देने लगीं।
दोनों के बीच एक तूफ़ानी फ़्रेंच किस शुरू हो गई। वो एक-दूसरे की ज़ुबान को ऐसे चूस रहे थे जैसे एक-दूसरे का सारा रस पी जाना चाहते हों। अभय के सामने उनका रोमांस इतना एग्रेसिव था कि जंगल की ठंडी हवा भी गरम होने लगी।
लंबी किस तोड़ने के बाद राहुल ने त्रुप्ति को छोड़ा नहीं, उनकी गाँड अभी भी उसकी मुट्ठियों में क़ैद थी। राहुल और अभय, दोनों के पैंट में लंड लोहे की रॉड बनकर खड़े थे।
राहुल (अभय की आँखों में देखकर): भाई अभय, तू यहाँ पहरेदार बनकर खड़ा रह! मैं त्रुप्ति को उस बड़े पेड़ के पीछे ले जाकर थोड़ा ‘स्पेशल’ सुकून देना चाहता हूँ। समझ रहा है ना?
त्रुप्ति हैरान थीं पर चिल्लर (एक्टिंग) समझकर चुप रहीं। उन्हें लगा राहुल सिर्फ़ अभय को जलन के मारे पागल करना चाहता है।
राहुल ने त्रुप्ति को एक झटके में अपनी गोद में उठाया और जंगल की घनी झाड़ियों की तरफ़ बढ़ गया। अभय वहीं ज़मीन पर बैठ गया, अपनी किस्मत को कोसते हुए और अपने खड़े लंड को पैंट के ऊपर से मसलते हुए पहरेदारी करने लगा।
राहुल त्रुप्ति को लेकर एक पुराने, मोटे पेड़ के पीछे पहुँचा, जहाँ से बाहर का कुछ दिखाई नहीं देता था। त्रुप्ति ने राहुल की आँखों में देखा—
त्रुप्ति: एक्टिंग थोड़ी ज़्यादा नहीं हो रही, राहुल?
राहुल ने कोई जवाब नहीं दिया, बस उसकी आँखों में एक ऐसी हवस थी जो आज एक्टिंग की सारी दीवारें तोड़ने वाली थी…
पेड़ के पीछे के उस अँधेरे कोने में त्रुप्ति का दिल ढोल की तरह बज रहा था। राहुल ने जब त्रुप्ति को खड़ा किया और वापस अभय के पास जाकर उसे “गाँड मारने” की ख़बर दी, तो त्रुप्ति को लगा ये सब सिर्फ़ अभय को रास्ता साफ़ करने के लिए बोला गया है। वो मुस्कुरा रही थीं, क्योंकि उन्हें लग रहा था उनका बेटा उन्हें प्रोटेक्ट करने के लिए इतना बड़ा झूठ बोल रहा है।
लेकिन जैसे ही राहुल वापस आया, उसकी आँखों में एक्टिंग की चमक नहीं, बल्कि शिकारी की भूख थी। राहुल ने जब त्रुप्ति को उस बड़े पत्थर के पास सेक्सी पोज़ देने को कहा, त्रुप्ति ने ख़ुशी-ख़ुशी वैसा ही किया। वो पत्थर से चिपक गईं, उनका टाइट रेड गाउन उनके शरीर पर रेशम की तरह कसा था, और उनकी भारी-भारी गाँड हवा में एक नंगी दावत की तरह उभर आई थी। वो अभय की तरफ़ देखकर मुस्कुरा रही थीं, ये दिखाने के लिए कि वो सिर्फ़ राहुल की हैं।
लेकिन असली खेल तो उनके पीछे शुरू हुआ।
राहुल ने जब त्रुप्ति की गाँड पर हाथ फेरा और उसे “सेक्सी” बोला, त्रुप्ति ने एक्टिंग में कह दिया—
त्रुप्ति: राहुल! मेरी गाँड तुम्हारे लिए ही है! चाहो जो करो!
ये सुनते ही राहुल के अंदर का बचा-खुचा डर भी ख़त्म हो गया। उसने तुरंत अपने पैंट में छुपे लोहे जैसे सख़्त लंड को त्रुप्ति की गाँड की दरार पर सेट किया। जैसे ही राहुल ने पहला बैक-स्ट्रोक मारा, त्रुप्ति का पूरा बदन झनझना उठा। गाउन के पतले कपड़े के नीचे से उन्हें राहुल के लंड की गर्मी और सख़्ती अपनी दरार के बीच महसूस हो रही थी।
त्रुप्ति: इस… ह्ह्ह्ह्ह…
त्रुप्ति ने एक गहरी साँस ली। उनका जिस्म इस छुवन का आदी हो रहा था, उन्हें मज़ा भी आ रहा था, पर ये मज़ा अब ख़तरनाक होता जा रहा था।
राहुल अब बेक़ाबू हो गया था। वो त्रुप्ति के नंगे कंधों को अपनी ज़ुबान से चाट रहा था, उनके गले और कानों पर अपने दाँत गड़ा रहा था। उसने अपने हाथ आगे बढ़ाकर त्रुप्ति के बूब्स को गाउन के ऊपर से ही इतनी सख़्ती से मसला कि त्रुप्ति के मुँह से दर्द और लुत्फ़ की सिसकारी निकल गई। राहुल का हर धक्का त्रुप्ति की गाँड को बुरी तरह हिला रहा था।
तभी राहुल ने वो अल्फ़ाज़ कहे जिन्होंने त्रुप्ति की रूह कँपा दी।
राहुल: त्रुप्ति… कितना सॉफ़्ट बदन है तेरा! दिल तो तुझे नंगी करने का कर रहा है!
त्रुप्ति के दिमाग़ में एकदम से धमाका हुआ। उन्हें लगा जैसे उनकी आँखों से पर्दा हट गया हो। राहुल का लहजा, उसकी साँसों की गर्मी, और उनकी गाँड पर पड़ने वाले वो बेरहम धक्के… ये सब एक्टिंग नहीं थे। उन्हें महसूस हुआ कि राहुल उन्हें अब ‘माँ’ की नज़र से नहीं देख रहा था। उनके सामने उनका बेटा नहीं, बल्कि एक दीवाना आशिक़ खड़ा था जो अपनी माँ के जिस्म को निचोड़ना चाहता था।
त्रुप्ति (घबराहट में): राहुल! ये क्या कर रहे हो! हद में रहो! मैं तुम्हारी माँ हूँ!
राहुल ने त्रुप्ति को और कसकर पकड़ा, उसका लंड त्रुप्ति की गाँड पर लगातार रगड़ रहा था।
राहुल (नशीली और गहरी आवाज़ में): त्रुप्ति डार्लिंग! तू इस वक़्त मेरी माँ नहीं, बल्कि एक ख़ूबसूरत औरत है… जिसे आज मैं नंगी करके रहूँगा! मैंने बहुत इंतज़ार किया है।
त्रुप्ति के पैरों तले ज़मीन निकल गई। उन्हें हक़ीक़त का एहसास उस वक़्त हुआ जब उन्हें पता चला कि राहुल की हवस उनकी ममता से कहीं ज़्यादा बढ़ चुकी है। उन्हें डर लगा कि अगर वो यहाँ रुकीं तो राहुल सब कुछ भूलकर उन्हें वहीं जंगल में नंगा कर देगा।
त्रुप्ति ने अपनी पूरी ताक़त से राहुल को पीछे धक्का दिया। राहुल, जो मदहोशी में था, थोड़ा लड़खड़ा गया। त्रुप्ति ने बिना पीछे देखे वहाँ से अपने टेंट की तरफ़ दौड़ लगा दी। उनका गाउन हवा में लहरा रहा था, उनकी हाई हील्स उन्हें दुख दे रही थीं पर वो रुकना नहीं चाहती थीं।
अभय वहीं बैठा था, उसे लगा शायद उनका “सेशन” पूरा हो गया, पर राहुल का गुस्सा कुछ और ही था। राहुल के दिमाग़ पर सिर्फ़ त्रुप्ति का जिस्म सवार था। वो भी शिकारी कुत्ते की तरह त्रुप्ति के पीछे भागा।
राहुल: मम्मी… रुको! कहाँ भाग रही हो!
त्रुप्ति के दिमाग़ में सिर्फ़ एक ही बात घूम रही थी: उनका बेटा उन्हें चोदना चाहता है। ये पाप था, ये ग़लत था, पर राहुल अब किसी की सुनने वाला नहीं था। जंगल के अँधेरे में, एक बेटा अपनी ही माँ का शिकार करने के लिए उनके पीछे था।
त्रुप्ति की साँसें धौंकनी की तरह चल रही थीं। वो उस पेड़ से टिकी हुई खड़ी थीं, उनका रेड गाउन उनके पसीने से भीगे जिस्म पर चिपक गया था। उन्होंने पीछे मुड़कर देखा, राहुल वहाँ खड़ा था—उसकी आँखों में वो मासूमियत नहीं थी जो एक बेटे की होती है, बल्कि एक ऐसी दरिंदगी थी जो त्रुप्ति ने कभी नहीं देखी थी। त्रुप्ति का दिल घिन से भर उठा, पर साथ ही एक डर भी था कि उन्होंने “एक्टिंग” के नाम पर इस आग में इतना तेल डाल दिया है कि अब ये आग उन्हें ही जलाकर राख कर देगी।
राहुल: क्या हुआ मम्मी? आप ऐसे दौड़के क्यों आई हो? अभी तो पार्टी शुरू हुई थी।
त्रुप्ति (काँपते हुए): राहुल… बस करो। ये पागलपन है। मैंने पापा को चीट करने का कभी सपना भी नहीं देखा था। हम दोनों माँ-बेटा हैं, हमारे बीच ये सब… ये महापाप है!
राहुल ने एक क़दम आगे बढ़ाया और त्रुप्ति की कमर को हल्के से पकड़ लिया। त्रुप्ति ने हटने की कोशिश की पर राहुल की पकड़ लोहे की ज़ंजीर जैसी थी। उसका तना हुआ लंड त्रुप्ति की गाँड की दरार पर दबाव बना रहा था।
राहुल: मम्मी, आप बेमतलब डर रही हो। हम सिर्फ़ एक्टिंग कर रहे हैं। आप मेरी हीरोइन हो, मैं आपका हीरो। बस अपना किरदार निभाओ ना।
त्रुप्ति: रोमांस माँ-बेटों में नहीं होता राहुल! ये नियम सृष्टि के ख़िलाफ़ है!
राहुल ने त्रुप्ति को झटके से अपनी तरफ़ घुमाया। उसने त्रुप्ति की आँखों में देखा, जहाँ गिल्ट और हवस का एक अजीब युद्ध चल रहा था। राहुल ने अब अपने शैतानी दिमाग़ का इस्तेमाल किया। वो जानता था कि त्रुप्ति को जज़्बातों से नहीं, बल्कि ग़लत लॉजिक से ही जीता जा सकता है।
राहुल: मम्मी, आप भूल जाओ कि आप मेरी माँ हो। आप सिर्फ़ एक कॉलेज गर्ल हो। और रही बात नियम की… तो ये सृष्टि भगवान ने बनाई है ना? जानवरों को भी उसने बनाया है? उनमें तो माँ-बेटा सेक्स करते हैं। तो इंसानों में क्यों नहीं? भगवान ने सबके लिए नियम बराबर बनाए हैं।
त्रुप्ति का दिमाग़ सुन्न होने लगा। वो जानती थीं ये सब ग़लत है, पर राहुल का लहजा इतना यक़ीन भरा था कि उनकी सोचने की शक्ति ख़त्म हो रही थी।
राहुल: और आपको लगता है ये सिर्फ़ यहाँ होता है? अमेरिकन्स को देखो! वहाँ तो बेटा 18 साल का होते ही माँ उसे खुद को गिफ़्ट करती है। ये सब नेचुरल है मम्मी। हम बस दोस्तों को दिखाने के लिए थोड़ा और क्लोज़ जा रहे हैं।
त्रुप्ति के दिमाग़ में एक ज़ोर का धक्का लगा। उन्होंने सोचा, ‘क्या सच में ऐसा होता है? क्या मैं ही पुराने ख़यालों की हूँ?’ पर साथ ही उन्हें घिन आ रही थी कि उनका बेटा ये सब बातें कर रहा है। उन्होंने महसूस किया कि राहुल इस वक़्त एक भूखा शेर बन चुका है। अगर उन्होंने अभी उसे शांत नहीं किया, तो राहुल यहीं जंगल में उन्हें नंगा करके उनकी पुसी चोद देगा। उन्हें किसी भी तरह राहुल को कंट्रोल करना था।
त्रुप्ति (धीरे से, रोते हुए): राहुल… प्लीज़… मैं ये नहीं कर सकती।
राहुल (उनकी गर्दन पर गरम साँस छोड़ते हुए): मम्मी, मैं आपकी पुसी नहीं चोदूँगा। मैं पक्का वादा करता हूँ। मैं सिर्फ़ आपके जिस्म से खेलूँगा, आपको चूमूँगा-चाटूँगा। बस आप अपने नरम हाथों से मेरे इस तनाव (इरेक्शन) को शांत कर देना। इतना तो कर सकती हो ना?
त्रुप्ति को ये डील थोड़ी ‘सेफ़’ लगी। उन्होंने सोचा, ‘अगर मैं इसके लंड को हाथ से शांत कर दूँ, तो शायद इसका पागलपन उतर जाए। फिर जब ये होश में आएगा, तो शायद ये मुझे फिर से माँ की नज़र से देखे।’ उनका दिल गिल्ट से फट रहा था, पर अपने बेटे को बलात्कार करने से रोकने का उन्हें यही एक रास्ता दिखा।
त्रुप्ति: पक्का? तुम मुझे… तुम मेरी पुसी नहीं चोदोगे?
राहुल: पक्का मम्मी! जब तक आप खुद नहीं कहोगी, मैं वहाँ नहीं जाऊँगा। पर एक शर्त है… मेरा वीर्य आपकी गाँड की दरार, या आपके बूब्स और चेहरे पर गिरेगा। आपको उसे क़ुबूल करना होगा।
त्रुप्ति की रूह काँप गई। अपने बेटे का थूक और वीर्य अपने चेहरे पर लेना… ये सोचकर ही उन्हें उल्टी आने को हुई। पर फिर उन्होंने सामने खड़े राहुल को देखा—वो बेटा नहीं, एक हवस का पुजारी लग रहा था। उसे शांत करना ज़रूरी था।
त्रुप्ति (आँखें बंद करके): ठीक है… मुझे मंज़ूर है। बस… बस मेरी पुसी मत चोदना।
राहुल ने एक शैतानी मुस्कान दी। उसने त्रुप्ति को गोद में उठा लिया। त्रुप्ति को अपनी पीठ पर उसकी उँगलियों का एहसास हो रहा था। वो जानती थीं कि उन्होंने आज शैतान से समझौता कर लिया है। गिल्ट और दर्द उनके दिल में नश्तर की तरह चुभ रहे थे, पर अब वो इस दलदल में इतनी गहरी उतर चुकी थीं कि बाहर निकलने का हर रास्ता उन्होंने खुद ही बंद कर दिया था।
राहुल: अब चलो मम्मी… एक्टिंग को असलियत बनाते हैं।
राहुल उन्हें टेंट की तरफ़ ले जाने लगा, और त्रुप्ति ने अपना सिर उसकी छाती पर रख दिया, ये जानते हुए कि आज की रात उनकी ममता का अंतिम संस्कार होने वाला है।
राहुल ने जैसे ही त्रुप्ति को अपनी गोद में उठाया, त्रुप्ति का पूरा शरीर थर-थरा उठा। उन्होंने अपने नरम हाथ राहुल के मज़बूत कंधों पर टिकाए, पर उनमें राहुल को पीछे धकेलने की हिम्मत नहीं थी। राहुल के जिस्म से निकलने वाली मर्दाना गर्मी त्रुप्ति के रेड गाउन के पतले कपड़े को चीरकर उनके जिस्म में उतर रही थी। त्रुप्ति का दिमाग़ सुन्न हो चुका था, वहाँ सिर्फ़ गिल्ट, डर और एक अजीब सी मजबूरी का तूफ़ान था।
राहुल उन्हें लेकर टेंट के अंदर दाख़िल हुआ और धीरे से उन्हें नीचे उतारा। टेंट की ज़िप बंद करने की आवाज़ त्रुप्ति को किसी क़ैदख़ाने के दरवाज़े जैसी लगी। बाहर जंगल का सन्नाटा था, पर त्रुप्ति के कानों में अभय और कृति की वही बातें गूँज रही थीं—अगर उन्हें शक़ हुआ तो बदनामी हो जाएगी।
त्रुप्ति (काँपते हुए होंठों से): राहुल… तुमने वादा किया है ना? तुम… तुम मेरी पुसी नहीं छुओगे?
राहुल ने अँधेरे में त्रुप्ति के चेहरे पर अपनी उँगलियाँ फेर दीं।
राहुल: मम्मी, मैंने कहा ना, जब तक आप तैयार नहीं होंगी, मैं वहाँ नहीं जाऊँगा। पर मुझे शांत करना आपका फ़र्ज़ है। अगर मैं अभी बाहर गया इस हालत में, तो लोग समझ जाएँगे कि मैं मर्द नहीं हूँ, और हमारा नाटक खुल जाएगा।
त्रुप्ति के दिल में एक गहरा दर्द उठा। वो सोच रही थीं, ‘मैंने ही इस आग को हवा दी। मैंने ही उसे उकसाया ताकि मैं अपने सपने पूरे कर सकूँ। मैंने ही उसे एक्टिंग करने को कहा… और अब मैं ही उसे रोक रही हूँ? अगर मैंने इसे अभी शांत नहीं किया, तो ये पागलपन में कुछ भी कर बैठेगा। शायद… शायद इसका लंड अपने हाथ में पकड़ लेना ही सबसे बड़ा बलिदान होगा।’
उन्होंने खुद को ये समझाकर मनाया कि ये सिर्फ़ एक ‘फ़िज़िकल रिलीज़’ है। जैसे एक बच्चे को रोने से रोकने के लिए खिलौना दिया जाता है, वैसे ही उन्हें राहुल की हवस को ठंडा करना था ताकि वो होश में आ सके। उनका गिल्ट उन्हें अंदर ही अंदर निचोड़ रहा था, पर उनकी ममता और डर ने एक नया ‘लॉजिक’ तैयार कर लिया था—अपने बेटे को बलात्कारी बनने से बचाने के लिए, उन्हें खुद थोड़ा सा बदचलन बनना ही पड़ेगा।
राहुल ने त्रुप्ति का हाथ पकड़ा और उसे अपने पैंट के उस उभार (टेंट) पर रखा। त्रुप्ति ने जैसे ही उस लोहे जैसे सख़्त लंड को छुआ, उनकी आँखें बंद हो गईं और मुँह से एक हल्की सिसकारी निकली।
राहुल (उनके कान में व्हिस्पर करते हुए): देखो मम्मी, ये कितना तड़प रहा है आपके लिए।
त्रुप्ति की आँखों से आँसू बहने लगे। वो घिन से भर गई थीं कि वो अपने बेटे के लंड को महसूस कर रही हैं, पर राहुल का शैतानी लॉजिक उनके दिमाग़ में बैठ चुका था—जानवर भी तो ऐसा करते हैं, अमेरिकन्स भी तो करते हैं। उन्होंने सोचा, ‘ठीक है… अगर ये करने से राहुल शांत हो जाता है और हमारी इज़्ज़त बच जाती है, तो मैं ये पाप सह लूँगी। मैं इसे अपने हाथों से शांत कर दूँगी… पर पुसी नहीं… वहाँ मैं उसे कभी नहीं जाने दूँगी।’
राहुल ने त्रुप्ति को घूरते हुए देखा, उसकी आँखों में एक भूखा शेर था। उसने त्रुप्ति के गाउन के स्ट्रैप को कंधे से नीचे सरकाया। त्रुप्ति ने उसे रोका नहीं, वो बस बुत बनकर खड़ी रहीं, उनकी रूह रो रही थी पर उनका जिस्म इस नए तजुर्बे की गर्मी से पिघल रहा था।
राहुल: मम्मी, आज आप मुझे वो सुकून दोगी जो किसी औरत ने किसी मर्द को नहीं दिया होगा।
और उसने त्रुप्ति के गाल को चाटना शुरू कर दिया।
त्रुप्ति ने अपना सिर पीछे कर लिया, उन्होंने फ़ैसला कर लिया था।
त्रुप्ति: ठीक है राहुल… तुम… तुम जो चाहो करो… बस… बस नियम याद रखना। मेरी इज़्ज़त मत लूटना… बाक़ी तुम जिस्म से खेल सकते हो।
राहुल की जीत हो चुकी थी। उसने त्रुप्ति को गद्दे पर धकेला और उनके ऊपर आ गया। त्रुप्ति ने महसूस किया कि उन्होंने आज अपनी ममता का सौदा कर लिया है। गिल्ट और दर्द के बीच, उन्होंने अपने बेटे को वो ‘परमिशन’ दे दी थी जिसे सुनने के लिए राहुल तड़प रहा था। उस रात उस टेंट में, नियम बदलने वाले थे और त्रुप्ति की ममता का दम घुटने वाला था।
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