अपनी माँ को अपने पति से चुदवाया

हाय, मै इंदु आपके लिए एक गरम कहानी लेकर हाज़िर है। उम्मीद है आपको पसंद आएगी। यह स्टोरी मेरी एक रीडर की है, तो आगे यह कहानी उसी के शब्दों में होगी।

मेरा नाम आरती है, उम्र 34 साल, व्यवसाय अध्यापिका, शादीशुदा, रंग गोरा, जिस्म गदराया, कद 5 फीट 2 इंच, चूची का साइज़ 36 C, गाँड 35 इंच। मैं गवर्नमेंट इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ाती हूँ और मेरे पति हमारे शहर के सबसे बड़े बिज़नेसमैन हैं। मेरे पति महेश चंदर, उम्र 38 साल, औरतों के अंडरगारमेंट्स का बिज़नेस करते हैं, यानी कि औरतों की पैंटी और ब्रा का धंधा करते हैं। मेरी एक बेटी है मोनिका. मोनिका मेरे जैसी दिखती है बस थोड़ी स्लिम है. उसका रंग मेरी तरह गोरा है और चूचि का साइज 34 c और चूतड़ भरे भरे हैं. वो अधिकतर स्कर्ट्स पहनती है और उसको अपने चूतड़ मटका कर चलने की आदत है.

मेरे पतिदेव भी सेक्स के शौकीन हैं और अक्सर मुझे मेरे अपने दिल की तमन्ना पूछते हैं कि मैं सेक्स में क्या चाहती हूँ। पहले तो मैं शर्मा जाती थी लेकिन जब पतिदेव खुद बताने लगे कि वो किस दूसरी औरत को मेरी आँखों के सामने चोदना चाहते हैं तो मैं भी खुलकर बातें करने लग गई।

मैंने भी उनको बता दिया कि मैं भी चाहती हूँ कि मुझे कम से कम दो मर्द चोद डालें और वो भी आपके सामने और मेरे सामने आपकी गाँड मार डालें।

उस वक़्त रात के 11 बजे हुए थे और महेश मुझ पर चढ़े हुए थे।

महेश: आरती, तू एक रंडी है, दो-दो मर्दों से चुदवाना चाहती है? मैं जानता था कि तू मेरी सास माँ उर्वशी एक रांड है और तू उस रंडी की बेटी है और रंडी की तरह चुदवाना चाहेगी!! तेरी माँ भी एक चालू औरत है। मैं कब से तेरी माँ को चोदना चाहता हूँ लेकिन वो मुझे अपना दामाद समझकर बस “बेटा” बेटा” कहती रहती है। अब सुनो, मैं तुम माँ-बेटी दोनों को चोदना चाहता हूँ! मेरे मन की ख़्वाहिश है कि मैं उर्वशी, अपनी सास को अपनी प्यारी पत्नी आरती के सामने चोदूँ और फिर वो मेरा लंड अपनी बेटी की चूत में डाले! काश भगवान मेरी यह इच्छा पूरी कर दे!!!! फिर तू जो कहेगी करूँगा, साली गाँड भी मरवानी होगी तो मरवा लूँगा!! मेरा वादा रहा तेरे साथ… तेरे लिए खुद दो मर्द ढूँढकर लाऊँगा… तेरा दलाल बन जाऊँगा!!!!!!!!

मैंने भी पतिदेव की हिम्मत को देखकर वादा किया कि मैं भी अपनी माँ उससे चुदवा लूँगी। मेरे पतिदेव की बात सुनकर मेरी कामुकता की कोई सीमा न रही। ऐसे ख़याल मेरे मन की गहराई में कई बार आए थे लेकिन मेरा मन उनकी असलियत को मानता ही नहीं था। कई बार मैंने मन की कल्पना में चाहा और देखा है कि महेश मुझे और मम्मी को चोद रहा है। और शायद मेरे मन की गहराई में यह तमन्ना भी थी कि मैं अपनी मम्मी को चुदवाते हुए देखूँ। कल्पना की इस तस्वीर में एक शख्स और भी था लेकिन उसकी शक्ल मेरा मन साफ़ तौर से नहीं देख पा रहा था।

महेश की बातों ने मुझे इतना गरमा दिया कि मैं नीचे पड़ी हुई अपनी गाँड उठा-उठाकर उसके धक्कों का जवाब देने लगी। पतिदेव भी तबाड़तोड़ धक्के मारने लगे। लग रहा था कि वो कल्पना में अपनी बीवी को नहीं बल्कि सास माँ को चोद रहे थे। उनकी चुदाई अब तूफ़ानी हो चुकी थी।

आरती: चोद डाल मुझे बेटा, चोद डाल अपनी मम्मी को… मुझे भी उसी तरह चोद जिस तरह मेरी बेटी को चोदता है बेटा…. शाबाश बेटा तेरा लंड तेरी मम्मी की चूत को भर रहा है… डाल दे पूरा लंड मम्मी की चूत में, महेश बेटा!!!

मैं भी पति के सामने उसकी सास माँ की एक्टिंग करते हुए चुदवा रही थी।

महेश: ठीक है मम्मी…. बहुत तरसा हूँ आपके लिए मम्मी…. आपकी चूत चोदना मेरा मक़सद है… जिस चूत से मेरी बीवी पैदा हुई है उस चूत को चोदना चाहता हूँ, मेरी प्यारी मम्मी। अब रुक नहीं सकता, मम्मी.. मेरा रस निकलने को है, मैं झड़ रहा हूँ सास माँ… मेरा बीज आपकी चूत में गिरने वाला है, माँ!!!!!!!!

इधर मैं झड़ रही थी और मैं चाहती थी कि महेश इसी सोच में झरे कि वो मेरी माँ यानी अपनी सास माँ की चूत में झड़ रहा हो।

आरती: हाँआआआआ बेटा, डाल दे अपना बीज मम्मी की बुर में… पेल अपनी मम्मी की चूत… चोद अपनी माँ को, बेटा महेश… तेरी सास भी तेरी पत्नी हो गई बेटा!!!

महेश मुझे चोदता गया और अपना बीज मेरी चूत में गिराता चला गया। अब की बारी उसका झड़ना ख़त्म ही नहीं हो रहा था। कोई 10 मिनट के बाद हम बिस्तर पर आलिंगनबद्ध नंगे लेटे पड़े थे। हमारी साँस अब नॉर्मल हो चुकी थी और मेरी चूत से महेश का लंड रस बिस्तर पर टपक रहा था।

आरती: क्यों पतिदेव, मेरी माँ को चोदकर मज़ा आया? तो आप बीवी को कम और सास को चोदना ज़्यादा चाहते थे? वाह राजा, असल में बीवी और मन में सास माँ? अगर आपके मन की यही इच्छा है तो वो भी पूरी करूँगी मेरे राजा। और यह भी देखना चाहती हूँ कि मेरी माँ कितनी बड़ी चुदक्कड़ है जैसे कि आप कह रहे हैं। और पापा के बाद उसको भी तो लंड नहीं मिल पा रहा। चलो माँ-बेटी दोनों के साथ मज़े उठा लो। लेकिन सबसे पहले आपकी सास माँ को पटाने का तरीक़ा ढूँढना होगा जिससे उसको हमबिस्तर किया जा सके।

महेश ख़ुश हो गए और उन्होंने मुझे चूम लिया।

महेश: डार्लिंग मुझे तुमसे यही उम्मीद थी। ऐसा करते हैं। मैं कल शिमला जा रहा हूँ दो दिन के लिए और वैसे भी दो दिन तुझे तो छुट्टी है। हम अपने बंगले पर रहेंगे। मनिका को सुधा के पास छोड़ देंगे। वो कुछ दिन अपनी बुआ के साथ बिता लेगी। मम्मी को साथ ले जाते हैं और हिमाचल की वादियों में उनको पटा लेंगे। बोलो क्या ख़याल है?

मैंने हाथ नीचे ले जाकर पतिदेव के अंडकोष पकड़ते हुए कहा—

आरती: मेरे मालिक जो कहें, मेरे लिए हुक्म है। लगता है मम्मी को चोदने की प्लान पहले ही बनी हुई है। अब तो बस मम्मी की बेटी को बस तैयार किया जा रहा है। वैसे कल आपका जन्मदिन भी है। जन्मदिन पर अपनी माँ आपको तोहफ़े में दे दूँगी, ठीक है?

महेश का लंड एक बार फिर खड़ा होकर फुँकारने लगा।

आरती: शायद यह अब सास माँ के लिए अकड़ रहा है। लगता है सास माँ का इश्क़ आपके सिर पर चढ़ चुका है। बोलो राजा इस बारी अपनी उर्वशी को कैसे चोदोगे?

महेश मुस्कुराता हुआ बेशर्मी से बोला—

महेश: मम्मी, क्यों न इस बार आपको घोड़ी बनाया जाए?

मैं बिना कुछ बोले घोड़ी बन गई। पतिदेव ने मेरे चूतर को किस किया और फिर से मेरे ऊपर सवार हो गए। उस रात मुझे बहुत ज़ोर से चोदा महेश ने। शायद वो मन ही मन मेरी माँ को चोद रहे थे।

दूसरे दिन मैंने माँ को फ़ोन किया—

आरती: मम्मी, मैं और महेश शिमला जा रहे हैं दो दिन के लिए। सोचा आप भी हमारे साथ चलें। आपका भी टाइमपास हो जाएगा। ये तो दिन भर काम करेंगे तो मुझे भी आपका साथ हो जाएगा।

मम्मी ने पहले तो न जाने को कहा लेकिन मैंने उनको मना लिया और मैंने उनको बोल दिया कि 1 घंटे में तैयार हो जाएँ।

महेश: मनिका बेटी मैं और तुम्हारी मम्मी दो दिन के लिए बाहर जा रहे हैं। नानी माँ भी हमारे साथ जाएगी। तुम अपनी सुधा बुआ के साथ रह लेना।

मेरी बेटी बोली—

मनिका: पापा मैं दिन भर तो बुआ के पास रहूँगी पर रात को पढ़ाई की वजह मुझे यहीं अपने घर में सोना है क्योंकि मेरा कंप्यूटर यहाँ है। शायद मेरी सहेलियाँ भी यहीं पढ़ने आ जाएँ, प्लीज़ आप बुआ को बता देना!!

महेश ने मनिका को आलिंगन में लेकर प्यार किया और कहा—

महेश: जैसे मेरी बेटियाँ रानी ख़ुश रहें।

और ख़ुशी से झूमती हुई मेरी बेटी अपने पापा से लिपट गई। मैं यह देखे बिना न रह पाई कि मनिका की उभरी हुई चूची महेश के सीने से टकरा रही थी। बेटी कितनी जल्दी जवान होती हैं, मैं हैरान थी।

‘कहीं, हमारी बेटी भी हमारे पीछे कोई गुल तो नहीं खिलाने वाली?’ सवाल मेरे मन में कौंध गया। लेकिन मनिका के चेहरे से सभी सवाल ख़त्म हो गए। वो भोली-भाली लड़की मुस्कुरा रही थी।

मम्मी सफ़ेद साड़ी में बहुत सुंदर लग रही थीं। मेरी मम्मी 51 साल की बेहद सेक्सी दिखने वाली औरत हैं। बहुत गोरी हैं, सिर पर बालों की एक लट सफ़ेद हो रही है, मम्मी की उठती हुई चूची, ब्लाउज़ में से झाँकती हुई सफ़ेद पहाड़ियों में गहरी घाटी, किसी मर्द को पागल बनाने के लिए काफ़ी है। मम्मी ने जूड़ा किया हुआ था और जब वो चलती थीं तो उनकी गाँड मटक-मटक कर रही थी।

मैंने महेश को आँख मारी और वो मम्मी की तरफ़ बढ़ा और उसने मम्मी को बाँहों में भरके गालों पर किस कर लिया। मम्मी की भारी-भारी चूची महेश के सीने में धँस गई। मम्मी बेचैन होने लगीं तो पति ने उनको छोड़ दिया और नाराज़ होकर बोला—

महेश: मम्मी, आप अपने बेटे से नाराज़ हैं?

मम्मी ने हँसकर जवाब दिया—

उर्वशी: नहीं बेटा, माँ भी कभी अपने बेटे से नाराज़ होती है कभी?

महेश नाटक करता हुआ बोला—

महेश: तो फिर इतनी देर से मुझे मिलने क्यों नहीं आईं? अब मैं आपको अपने पास ही रखने वाला हूँ। आरती, मम्मी मेरे पास आगे बैठाएगी और तुम माँ-बेटे के बीच नहीं आओगी, समझी?

इससे पहले कि मम्मी कुछ बोलें, महेश ने मम्मी की कमर में हाथ डालकर उनको अपने साथ सटा लिया और अपनी बगल में बिठा लिया।

आरती: महेश, यार मैं कब आप माँ-बेटे के बीच आती हूँ? मैं तो खुद चाहती हूँ कि आप एक-दूसरे से प्यार से रहें। क्यों मम्मी?

कार चल पड़ी। महेश जब भी कोई बहाना मिलता तो वो हँसकर मम्मी की जाँघ पर हाथ मार देता और कभी उनके कंधे पर थपकी मार देता। मम्मी भी बार-बार शर्म से लाल हो रही थीं जैसे कोई 19 साल की लड़की किसी लड़के के अश्लील जोक पर शर्मा रही हो।

दोपहर को हम शिमला पहुँच गए। महेश ने कार पार्क की और हमसे बोले—

महेश: आप ज़रा आराम करो मैं कुछ खाने-पीने को ऑर्डर करके आता हूँ। अगर शावर लेना है तो ले लो। सफ़र की थकावट दूर हो जाएगी। मेरी तो कार ड्राइव करते-करते गाँड दुख रही है। तेरा क्या हाल है, आरती?

महेश ने मम्मी के सामने मेरी गाँड पर ज़ोरदार थपकी मारते हुए कहा।

आरती: अरे बहनचोद, इतनी ज़ोर से मारते हैं किस औरत के चूतर पर?

मैंने भी अब कुछ बेशर्मी की भाषा बोलते हुए नाटक जारी रखा। महेश ने मुझे बाँहों में भरके किस करते हुए कहा—

महेश: ये गाँड भी मेरी बीवी की है किसी ग़ैर की नहीं, इसको चाहे मैं मारूँ या फिर चोद…

वो कहते-कहते रुक गए। हमारी बेशर्मी को देखकर मम्मी का चेहरा लाल हो रहा था। मैं और मम्मी शावर लेने चली गईं। जब मम्मी अंदर थीं तो मैं भी नंगी होकर बाथरूम में चली गई। मम्मी मुझसे पर्दा करती हुई बोलीं—

उर्वशी: आरती मैं नहा लूँ तू फिर नहा लेना।

लेकिन मैंने मम्मी के सीने से तौलिया हटाते हुए कहा—

आरती: मम्मी मैं आपकी बेटी हूँ, मुझसे क्या पर्दा? माँ-बेटी में कोई राज़ नहीं होता, होता है क्या? मुझे आज भी याद है जब मुकेश अंकल और आप दोपहर के दिनों में छुप-छुपकर प्यार करते थे!!! मम्मी मैंने क्या कभी पापा को कुछ बताया था? फिर आज अपनी बेटी से यह नाटक क्यों। वाओ, मम्मी आपका जिस्म तो आज भी उसी तरह कसा हुआ है। आपके मम्मे आज भी उसी तरह टाइट हैं। सच कहूँ, मम्मी आप तो पापा के बाद और भी निखर गई हैं। आज हम तीनों खूब मौज करेंगे। महेश अभी बीयर लेकर आता ही होगा। बीयर पीकर क्या मस्ती करता है महेश!!!!!!!!

उर्वशी: ना बेटी, ना, मैं बीयर नहीं पीती। बीयर पीकर मैं पागल जाती हूँ, बहक जाती हूँ। मैं नहीं चाहती कि मैं अपने बेटे जैसे दामाद के सामने कोई उल्टी-पुल्टी हरकत कर बैठूँ। और बीयर मेरी कामवासना को भी भड़काती है। मेरे बदन में एक खुजली सी होने लगती है। मुझे सच में मर्द की कमी बहुत महसूस होती है। यहाँ पर मेरी हालत बहुत ख़राब हो जाएगी। प्लीज़ मुझे बीयर पीने को मजबूर मत करना!!!!!

मैं मुस्कुरा पड़ी।

आरती: मम्मी घबराने की कोई बात नहीं है। आपकी हर प्रॉब्लम का हल है मेरे पास। अब हमको बस शावर ही लेना है। अरे मम्मी आपने तो अपनी चूत पर शेव भी नहीं की है। क्या आपके यार झाँटों वाली चूत पसंद करते हैं? महेश को तो चूत बिल्कुल साफ़ ही पसंद है। आपकी चूची कितनी मस्त है!! अगर मेरे पति को मौक़ा मिल जाए तो सारा दिन आपकी चूची ही चूसता रहे!!!

मैंने मम्मी की नंगी चूची को कसके दबा दिया।

उर्वशी: बेटी, तुम बहुत बेशर्म हो गई हो। अपनी माँ से ऐसी बात करते हैं क्या। और तुमने मुकेश भाई साहब के साथ मुझे कब देखा?

मैं बस मुस्कुरा पड़ी और हम दोनों शावर के नीचे नहाने लगे। मैं नहाकर बाहर चली गई तो मम्मी अपनी चूत पर शेव करने लगीं। महेश जब लौटा तो उसने बहुत सी बीयर की बोतलें ख़रीदी हुई थीं, कुछ तंदूरी मुर्गे, सलाद, भुने हुए काजू, सिगरेट्स। सामान के ऊपर कुछ कंडोम्स भी थे। तभी मम्मी तौलिया लपेटकर बाथरूम से बाहर निकलीं। वो कंडोम्स देखकर शर्मा गईं।

महेश ने बीयर के तीन ग्लास बनाए तो मम्मी बोलीं—

उर्वशी: बेटा मैं नहीं पीती, मैंने आरती को बताया है, क्यों आरती?

मैंने हँसकर कहा—

आरती: महेश मम्मी कहती हैं कि बीयर पीकर वो बहक जाती हैं और मैंने कहा है कि यहाँ कौन सा कोई बाहर का आदमी है? अगर मम्मी बहक भी जाएँगी तो हम सँभाल लेंगे, क्यों महेश?

मैंने पूछा तो महेश ने मुझे बाँहों में भरकर चूमते हुए कहा—

महेश: हाँ डार्लिंग क्यों नहीं।

उस वक़्त मैं पिंक कलर की ट्रांसपेरेंट नाइटी पहने हुई थी और नीचे पूरी नंगी थी। जब मम्मी कपड़े पहनने के लिए जाने लगीं तो मैंने उसको रोक लिया—

आरती: मम्मी यहीं बैठो ना हमारे पास। आज के दिन सब कुछ भूल जाओ कि मैं आपकी बेटी हूँ और महेश आपका दामाद है। यही समझो कि हम तीनों यार हैं और शिमला मज़े लूटने आए हैं। महेश भी आपको अपना यार ही समझेगा।

मम्मी कुछ शर्माते हुए मेरे पास बैठ गईं। महेश ने मुझे देखा तो मैंने आँख मारकर इशारा किया।

महेश: मम्मी, आप मेरे पास बैठ जाएँ। मैं अपने हाथ से आपको बीयर पिलाता हूँ। तभी आपकी झिझक ख़त्म होगी।

कहते ही उसने मम्मी को अपनी गोद में बिठा लिया और ग्लास मम्मी के होंठों से लगा दिया। मम्मी ने शर्म से आँखें बंद करके लेकिन बीयर पी ली।

आरती: महेश तुम भी शावर ले लो ना। तुझसे पसीने की स्मेल आ रही है। तब तक मैं मम्मी की शर्म ख़त्म करती हूँ। देखूँ तो सही कि मेरी मम्मी कितनी बहकती हैं पीकर। और फिर तुम भी तो हो मम्मी को सँभालने के लिए। ज़रा अच्छी तरह से साफ़ करना अपना……

मैंने जानबूझकर बात अधूरी छोड़ दी। मम्मी का चेहरा लाल हो उठा और महेश बेशर्मी से हँस पड़ा और बाथरूम में चला गया। मैंने एक-एक ग्लास और भरा और मम्मी को दे दिया।

आरती: मम्मी, आप साथ वाले रूम से कुछ सीडीज़ ले आओ। देखते हैं टीवी पर और लेते हैं बीयर का मज़ा।

साथ वाले रूम में हमने कुछ बहुत गरम ब्लू फ़िल्म्स की सीडीज़ रखी हुई थीं। मेरा प्लान मम्मी को ब्लू फ़िल्म दिखाकर अपने पति से चुदवाने का था। इससे मैं अपने पति की इच्छा पूरी कर दूँगी और फिर मम्मी को भी लंड का स्वाद मिल जाएगा।

महेश बाथरूम में नहाते हुए गा रहा था। जब मम्मी कुछ देर तक वापस न लौटीं तो मैंने देखा कि मम्मी बाथरूम के अंदर झाँक रही थीं। जब वो वापस आईं तो मम्मी का चेहरा लाल था।

आरती: क्यों मम्मी अपने दामाद का लंड देखा? मैंने आपको देख लिया था झाँकते हुए। घबराने की ज़रूरत नहीं है। मेरा सब कुछ आपका ही तो है।

इतने में महेश आ गया। उसने भी केवल तौलिया ही लपेट रखा था कमर के इर्द-गिर्द। हम तीनों बीयर पीने लगे और चिकन खाने लगे। मम्मी ज़रा आराम से बैठी थीं। मैंने उठकर एक ब्लू फ़िल्म चालू कर दी जो कि एक हिंदी की थी। इस फ़िल्म में एक अमीर परिवार की माँ अपने नौकर से चुदवा रही होती है और ऊपर से उसकी जवान बेटी आ जाती है और माँ बेटी को भी नौकर से चुदवाने को निमंत्रित करती है।

फ़िल्म के शुरू होते ही महेश ने मुझे सोफ़े पर लिटाकर चूमना शुरू कर दिया। मम्मी की नज़र टीवी से हट नहीं रही थी और जब उसने सोफ़े पर देखा तो तब तक महेश मुझे नंगा कर चुका था और मेरी चूची चूस रहा था। मम्मी की आँखों में भी लाल डोरे तैर रहे थे।

आरती: महेश, अपनी सास माँ का भी ख़याल रखो ज़रा। मम्मी बहुत अकेली हैं। मम्मी से प्यार करो, महेश।

महेश ने मुझे छोड़ दिया और मम्मी की तरफ़ बढ़ गया। मम्मी ने भी अपनी बाँहें खोलकर महेश को आलिंगन में ले लिया। महेश और मम्मी अब समझ चुके थे कि मुझे उन दोनों के मिलन से कोई दिक्क़त नहीं है और मैं भी उनका मिलन चाहती हूँ। महेश ने मम्मी को बाँहों में भरके किस कर लिया तो मेरी मम्मी की कामुक सिसकी निकल गई। मेरा पति और मेरी मम्मी ऐसे किस करने लगे जैसे वो पति-पत्नी हों। उनके लिप्स “पुच” “पुच” करने लगे।

टीवी स्क्रीन पर नौकर अपनी मालकिन को घोड़ी बना रहा था। मैं बोली—

आरती: महेश, मम्मी को बिस्तर पर ले चलो। वहाँ आराम से प्यार करना मम्मी को!! मुझे तैयार करने दो अपनी प्यारी मम्मी को। कहीं अपने दामाद से शर्माती न रह जाएँ। तब तक तुम नए ग्लास भरो और ज़रा सिगरेट सुलगायो। तब तक मैं मम्मी के अंदर आग सुलगाती हूँ!!

महेश बीयर के ग्लास भरने चला गया। मैंने मम्मी को पलंग पर लिटा दिया और उनका तौलिया खींच दिया। रूम में लाइट्स न होने से अँधेरा था। जब मेरी माँ ने जाँघें खोलीं तो मैं उसकी फूली हुई चूत देखकर मस्त हो गई। मम्मी की गोरी चूत एकदम पेस्ट्री जैसी लग रही थी। मम्मी अभी-अभी चूत की शेव कर चुकी थीं। मम्मी की बड़ी-बड़ी चूची आज मेरे पति के लिए क़यामत साबित होने वाली थी। वही चूची जिसको चूसकर मैं बड़ी हुई थी, मेरा पति भी उसका स्वाद चखने वाला था।

मैं अपनी मम्मी के ऊपर चढ़ गई और उसको किस करने लगी और उसकी चूची मसलने लगी।

उर्वशी: आरती, क्या यह ठीक है?

मैं अपने होंठ मम्मी के पेट से होते हुए नाभि तक ले जाकर बोली—

आरती: उर्वशी, अगर आनंद न आ रहा हो तो जो हम कर रहे हैं वो ग़लत है, वरना सही। तेरी चूत को तेरे दामाद के लंड का इंतज़ार है या नहीं? और वो भी न जाने कब से अपनी सास माँ को चोदने के सपने देखता आ रहा है। इससे पहले कि आपका दामाद आपको लंड से चोदे अपनी बेटी को इस नमकीन चूत का रसपान करने दो, मम्मी!!!!!!!!! इस चूत को पापा ने, मुकेश अंकल ने और न जाने कितने आपके यारों ने चोदा है, चूसा है… आज अपनी बेटी को भी इसका मौक़ा दे दो, प्लीज़!!!

कहते ही मैंने मम्मी की जाँघों पर स्पर्श करते हुए उनकी चूत पर अपने होंठ रख दिए।

उर्वशी: ओओओओओओओओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…. म्ममममममन्नन्नन…… आआआआआआाह्ह्ह्ह्ह्ह…… आर्र्र्र्र्ग्ग्ग्ग्घ्ह्ह्ह….. बेटी…… मर गई….. उईईई…. माँआआ!!!!!!!!

मम्मी सिसक उठीं। मम्मी की चूत का रस मेरी ज़ुबान पर लगा तो मैं गुनगुना उठी। मम्मी की जाँघें मेरे सिर पर कस गईं और मैंने उनकी चूत के होंठों को अलग करके उसका रस पीना शुरू कर दिया। मम्मी की चूत बुरी तरह से उत्तेजित थी और मैं भी चूत के लिए दीवानी हुई जा रही थी। ऐसी गरम चूत मैं पहली बार चाट रही थी। मम्मी अब अपने चूतर उठाने लगीं और मेरी ज़ुबान को अपनी चूत की जड़ तक लेने की कोशिश करने लगीं।

जब मैं साँस लेने के लिए चूत से ऊपर उठी तो देखती हूँ कि महेश ने अपने लंड को मम्मी के मुँह में धकेला हुआ था और मम्मी मज़े से अपने दामाद का लंड चूस रही थीं। क्या नज़ारा था। एक तरफ़ बेटी माँ की चूत चाट रही थी और दूसरी तरफ़ सास माँ अपने दामाद का लंड चूस रही थीं। महेश ने मम्मी के बालों को पकड़ रखा था और उन ज़बरदस्ती से उनके मुँह में ठोक रहा था।

महेश: उर्वशी, तुम भी अपनी बेटी की तरह चूसती हो लंड को, बिल्कुल एक रांड की तरह!!!! मम्मी, मेरे अंडकोष भी चूसो… ओओओह्ह्ह्ह….. आआाह्ह्ह्ह्ह…… मम्मीईईईई!!

मैंने देखा कि अगर महेश ऐसे ही लंड चुसाता रहा तो जल्दी ही झड़ जाएगा। इसलिए मम्मी के मुँह से उसका लंड अलग करते हुए बोली—

आरती: महेश, मादरचोद, अब जल्दी से चोद डालो अपनी सास माँ को!! साले अपनी माँ पेश कर रही हूँ तुझे। कितने मज़े से लंड चुसवा रहे हो मेरे सामने मेरी माँ से? कल को अगर तेरी बेटी को कोई तेरे सामने चोदेगा तो कैसा लगेगा?

लेकिन महेश ने मेरे मुँह में एक सिगरेट ठूसते हुए कहा—

महेश: साली, अगर खुद ही पेश कर रही हो मम्मी को मेरे लिए तो रो क्यों रही हो? अब हम माँ-बेटे को चुदाई का आनंद तो ले लेने दो। चुदवा लेना मेरी बेटी को भी जिससे भी चुदवाना है और तू भी चुदवा लेना अपने जमाई से। मुझे अब मम्मी से हटने को मत कहना। मम्मी आप बोलो किस पोज़िशन में चोदूँ आपको?

मम्मी तो अब चुदासी थीं। वो बोलीं—

उर्वशी: मेरे प्यारे बेटे, जैसे चोदना है चोद ले। मैं तो अब तेरे इस प्यारे लंड से चुदने को तरस रही हूँ। आरती बेटी, मुझे अपने पति का लंड देकर बहुत एहसान किया है तुमने। बेटा तू बोल, तुझे घोड़ी की सवारी पसंद है? मुझे तेरे सामने झुककर चुदवाने में बहुत आनंद आएगा!!!

महेश हँस पड़ा—

महेश: सच मम्मी? आपके चूतड़ बहुत मस्त हैं अगर चोदते हुए आपकी गाँड के दर्शन होते रहें तो क्या बात है?

मम्मी झट से अपने हाथ और घुटनों के बल हो गईं और मैंने पतिदेव के लंड को पकड़कर अपनी मम्मी के नितंबों को अलग करते हुए उनकी चूत के मुँह पर रख दिया।

आरती: महेश, मेरे राजा, मेरे मालिक, डाल दे अपना लंड उस चूत में जिस में से तेरी पत्नी का जन्म हुआ था, जो मैंने किया है किसी और पत्नी ने शायद न किया हो। देख अपनी सास माँ की चूत!!! कैसे भीग चुकी है अपने जमाई राजा के लंड का स्वागत करने के लिए!!! इस पर रहम मत करना! यही इच्छा है मम्मी की चूत की।

महेश ने अपने कुल्हे आगे बढ़ा दिए और उनका लंड आसानी से मम्मी की भीगी हुई चूत में चला गया।

उर्वशी: ओओओओओओओ…… आआआआाह्ह्ह्ह्ह्ह…… माँआआआआ,,………… हाँआआआआ। बेटाआआआआआआआआ…………… आरतीईईईईईईई…………… मेरी माँआआआआ!!!!!!!!

मम्मी के गले से एक लंबी सिसकी छूट पड़ी क्योंकि महेश ने एक ही झटके में पूरा 8 इंच का मोटा लंड मम्मी की प्यासी चूत में धकेल दिया। मेरी माँ एक कुतिया की तरह हाँफ रही थीं और उनकी मोटी चूची सीने के नीचे झूल रही थी। मेरा जी करता था कि मम्मी की चूची को चूसूँ, लेकिन फिर एक नया विचार मेरे दिल में आया। मैंने मम्मी से अपनी चूत चुसवाने की सोची। खुद मम्मी के मुँह के सामने मैं टाँगें फैलाकर लेट गई और अपनी चूत पर हाथ फेरने लगी।

महेश ने माँ की बग़ल से हाथ डालकर उनकी चूची कसके पकड़ ली और उसको मसलने लगा। मैंने मम्मी को इशारा किया तो उन्होंने अपनी ज़ुबान मेरी चूत पर रख दी और मैंने मम्मी का सिर अपनी चूत की तरफ़ खींच लिया। उर्वशी को महेश पीछे से चोद रहा था और पति के सामने मैं मम्मी से चूत चुसवा रही थी।

आरती: आर्र्र्ग्ग्ग्घ्ह्ह्ह…. ओओओह्ह्ह्ह्ह मम्मीईईईई…. हाँ ऐसे ही चूसो अपनी बेटी की चूत!!!!!!! माँआआआआआआआ……… बहुत मज़ा आ रहा है…….. महेश चोद मेरी माँ को…… अपनी सास को…. माँ कैसा लगा अपने जमाई का लंड…. मेरे महेश का लंड…… मेरे पति का लंड????

मम्मी वाक़ई ही चूत की चुसाई करना जानती थीं। मेरे अंदर से निकलने वाला रस चाट रही थीं और बार-बार अपनी ज़ुबान मेरे क्लिट से चूम लेती थीं। मैं उत्तेजित होकर अपनी उँगलियाँ मम्मी के बालों में डाल रही थी और मेरी गाँड अपने आप ऊपर उठ रही थी।

महेश: आरती, बहुत टाइट है उर्वशी… मेरी माँ बहुत टाइट है तेरी चूत…. बिल्कुल कुँवारी लड़की जैसी है तेरी चूत मम्मी….. हम से कभी जुदा न होना….. मेरी बनकर रहना…. हम तीनों कभी जुदा न होंगे!!!!!!!

महेश न जाने क्या-क्या बोल रहा था। मम्मी की चूत में जब मेरे पति का लंड आ-जा रहा था तो एक मधुर संगीत मेरे कानों में पड़ रहा था….. लंड चूत में जाते वक़्त जो संगीत बनाता है, उससे बढ़कर कोई संगीत नहीं होता। मम्मी अब अपनी गाँड पीछे धकेल रही थीं और महेश का लंड तेज़ रफ़्तार से मम्मी को चोद रहा था। महेश की स्पीड से लग रहा था कि वो झड़ने के क़रीब आ चुका था। इधर मम्मी की ज़ुबान ने मेरा पानी निकाल दिया था और मैं मम्मी की ज़ुबान पर झड़ने लगी, मेरी साँसें उखड़ रही थीं।

महेश: माँआआआआ….. मैं जा रहा हूँ…. सास माँ मैं झड़ रहा हूँ…… आपकी चूत मेरा रस निकाल रही है… आआाह्ह्ह्ह्ह… भगवान……. मम्मी आपने मुझे जन्नत का मज़ा दे दिया है…. मेरा लंड मस्त कर दिया आपने!

मम्मी के मुँह से कामुक सिसकारियाँ निकल रही थीं। शायद वो भी उसी वक़्त झड़ रही थीं। मम्मी ने मेरी चूत से मुँह अलग कर लिया और बोलीं—

उर्वशी: हाँ बेटा, ज़ोर से…. और ज़ोर से… चोद डाल मुझे…. अपनी माँ को चोद, बेटा….. आज तुमने बेटी के साथ माँ को भी निहाल कर दिया….. मैं भी झड़ईईईई…. मम्मी झड़ रही है…… बस अब बस …. मैं गई…… माँआआ!!!!!!!!

पतिदेव की आँखें कामुकता के कारण बंद थीं लेकिन वो मम्मी को चोदे जा रहे थे। फिर उनका लावा छूट पड़ा। मेरी कल्पना की आँख अपनी माँ की चूत में गिरने वाले फुहारे को देख रही थी जब हाँफते हुए मेरे पति ने अपना बीज मम्मी की चूत में उड़ेलना शुरू कर दिया। 10-12 धक्के मारने के बाद महेश ख़लास हो गए।

आरती: क्यों मम्मी कैसा रहा फ़र्स्ट राउंड चुदाई का?

मैंने पूछा तो मम्मी बोलीं—

उर्वशी: बेटी मेरी तो जान ही निकाल डाली जमाई राजा ने। ऐसा लंड मैंने नहीं देखा पहले कभी। मेरी तो बस हो गई। मुझे लगता है मैं सारा दिन उठ न पाऊँगी। बहुत दम है तेरे लंड में बेटा!!

मम्मी बोलीं। लेकिन महेश का इरादा कुछ और ही था।

महेश: मम्मी मेरा 8 इंच का इंजेक्शन आपको फिर से चुदवाने के लिए तैयार कर देगा। हमारी चुदाई में रुकावट नहीं पड़ेगी, शिमला में हमारी चुदाई नॉन-स्टॉप चलेगी, क्यों आरती?

मैंने कहा—

आरती: बिल्कुल, मेरे राजा, लेकिन पहले मुझे मम्मी की चूत से अपना रस चाट लेने दो।

मैं मम्मी की चूत पर झुक गई और महेश और मम्मी हँस पड़े…..

जारी रहेगी।

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