ममेरी बहन की चूत फाड़ दी
Mama ki ladki ki seel pack chudai:- मैं अरमान हूँ। अभी मैं पुणे में रहता हूँ। ये मेरी पहली कहानी है और ये मेरी रियल स्टोरी है। बात तब की है जब मैं पढ़ाई के लिए अपने मामा के घर दिल्ली गया था। वहाँ मैं दो साल तक रहा। वहाँ जाकर मैंने पहली बार हिलाना (मुठ मारना) सीखा था और मैंने अपने मामा के दोनों लड़कों के साथ ब्लू फिल्म भी वहीं पहली बार देखी थी।
Mama ki ladki ki seel pack chudai hindi sex story
मेरे मामा की एक बड़ी बेटी भी है जिसका नाम तन्नू है। उस समय वो दिल्ली यूनिवर्सिटी से बी.ए. कर रही थी। उसकी हाइट 5’5″ होगी, दूध की तरह एकदम गोरा रंग और फिगर साली का एकदम लंड खड़ा कर देने वाला था – 38-28-38। अब आप ही सोच लो जब वो टॉप और मिनी स्कर्ट पहनती होगी तो क्या जलवे बिखेरती होगी साली।
कई बार मैं उसे घर के काम करते हुए अपना हाथ उसकी गाँड पर रगड़ देता था, तो वो थोड़ा सा हिल जाती थी। मेरे कॉलेज 12 बजे से 4 बजे तक होता था और तन्नू का भी कॉलेज 12.30 से होता था। मेरे मामा के लड़कों का सुबह 7 बजे से 2 बजे तक था, और मामा भी 8.30 को ऑफिस के लिए रोज़ निकल जाते थे। घर में सिर्फ़ मैं, मेरी मामी और मेरी तन्नू ही रहते थे। मैं अपने ऊपर वाले कमरे में 11.30 AM तक पढ़ता था और मामी और तन्नू घर की सफाई करते थे।
मेरी मामी कपड़े धोने के लिए नीचे आँगन में आकर कपड़े धोती थीं, जो मेरे ऊपर वाले रूम के पीछे वाले दरवाज़े से नीचे की ओर एकदम साफ़-साफ़ दिखाई देता था। और मामी रोज़ कपड़े धोने के बाद वहीं पे अपनी मैक्सी (नाइट गाउन) निकालकर नहाने लगती थीं। मैं ये नज़ारा रोज़ देखा करता था और रोज़-रोज़ मामी के बड़े-बड़े बूब्स और उनकी सेक्सी सी चूत को देखके अपने 7 इंच के लंबे लंड को पकड़के हिलाता था और सारा स्पर्म किसी अखबार में गिराके फेंक देता था।
और जब कभी मामी सुबह-सुबह किसी आंटी के घर चली जाती थीं तब मुझे असली मौका मिलता था अपनी भूख को शांत करने का। जब मामी चली जाती थीं तो घर में मैं और सिर्फ़ तन्नू ही बचते थे। और तन्नू रोज़ 11.00 AM बजे नहाने जाती थी। हमारे बाथरूम में एक दीवार के कोने में छोटा सा रोशनदान बना हुआ है। जैसे ही तन्नू नहाने के लिए बाथरूम जाती थी, मैं जल्दी से एक चेयर लगाके उस विंडो से उसे देखा करता था।
ऊऊऊऊऊह फक! वो गोरा बदन और उसके बड़े-बड़े दोनों बूब्स और उन पर पिंक कलर का निप्पल। यार मैं तो देखके पागल हो जाता था। और जब नीचे देखता था तब तो यार, उसकी चूत की लिप्स दोनों एकदम टाइट-टाइट थीं और दोनों चिपक के एकदम फूले हुए थे। मैं हमेशा उसके गोरे सेक्सी बदन को देखकर अपने मोटे और 7 इंच के लंड को हाथों में पकड़के ज़ोर-ज़ोर से हिलाता था और करीब 15-20 मिनट हिलाने के बाद मेरा सारा रस निकल जाता था। एकदम रिलैक्स फील होता था और मैं उस स्पर्म को एक पेपर में लपेटके कहीं भी फेंक देता था। और ऐसे ही 2-3 महीनों तक चलता रहा।
मैं अपनी मामी और अपनी तन्नू को नंगा देख-देख कर अपने आप को कंट्रोल में रखता था। और मैं किसी-न-किसी बहाने से तन्नू की गाँड पर अपने हाथ को भी रगड़ देता था, लेकिन वो कभी कुछ भी नहीं बोलती थी। और मैं हमेशा उसके दोनों बूब्स को भी घूरता रहता था। जब वो कॉलेज के लिए तैयार होती तो मेरा भी वही टाइम था कॉलेज जाने का, तो मुझसे हमेशा पूछा करती थी कि “आज मैं कैसी लग रही हूँ?” और मैं हमेशा उसे अच्छे-अच्छे कॉम्प्लिमेंट देकर ख़ुश कर देता था। कभी कहता कि “आप आज हॉट लग रही हो” तो कभी कहता कि “आप बहुत ज़्यादा सेक्सी लग रही हो”। और वो बहुत ख़ुश हो जाया करती थी। हम दोनों साथ में ही निकलते थे – वो अपनी स्कूटी पर और मैं अपनी बाइक पर। दिन ऐसे ही चलता रहा।
एक दिन उसने मुझसे बोला कि “चलो आज कॉलेज बंक करके कोई मूवी देखने चलते हैं।” उस समय अनिल कपूर, समीरा रेड्डी और संजय दत्त की “मुसाफ़िर” मूवी लगी हुई थी। हम दोनों कॉलेज बंक करके 12 से 3 का शो देखने चले गए। वहाँ जाकर जैसे ही हमने पिक्चर हॉल में एंटर किया, एकदम अँधेरा था। हम दोनों अपने-अपने सीट पर बैठ गए। हमारे जस्ट आगे वाली सीट पर एक कपल बैठा हुआ था। मूवी स्टार्ट हो गई।
करीब 15-20 मिनट बाद वो दोनों कपल किसिंग करने लगे, और उसी समय समीरा रेड्डी का भी सेक्सी डांस चल रहा था। मैं और तन्नू उन दोनों को देख रहे थे और फिर कभी एक-दूसरे को। और वो दोनों कपल एक-दूसरे को पागलों की तरह किस किए जा रहे थे। ये सब देखके मेरा लंड एकदम कड़क होकर खड़ा हो गया था। ये सब देखते-देखते 3 घंटे ख़त्म हो गए और हम मूवी हॉल से बाहर आ गए। लेकिन मूवी हॉल से बाहर आने के बाद हम दोनों में कुछ-कुछ चेंज आ गया था। तन्नू मुझसे थोड़ा बोल्ड होकर बात करने लगी थी।
तन्नू: वो लड़का-लड़की तो एकदम पागल हो गए थे।
मैं: हाँ सच में, पूरे 3 घंटे उन्होंने सिर्फ़ किसिंग ही करते रहे।
तन्नू: तो क्या और भी कुछ करना चाहिए था क्या?
मैं: नहीं, मैं तो बस ऐसे ही बोल रहा हूँ।
उसके बाद हम अपनी-अपनी बाइक पर बैठे और घर आ गए। घर आने के बाद हमारे दिमाग में वही सब सीन चल रहा था। मैं अब और पागल होता जा रहा था। मुझे अब किसी भी क़ीमत पर तन्नू को चोदना ही था, चाहे जो हो जाए। लेकिन कैसे पहला स्टेप लूँ, मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था।
फिर एक दिन ग़लती से मैंने जो स्पर्म से लिपटा हुआ पेपर मेरे एक पैंट की पॉकेट में ही रह गया था और जब तन्नू ने कपड़े धोने के लिए पैंट चेक की तो उसे वो पेपर मिल गया। वो उस पेपर को लेकर सीधे मेरे पास मेरे ऊपर वाले रूम में अचानक से आ गई। और मैं मामी को नहाते हुए देखकर अपना लंड ज़ोर-ज़ोर से हिला रहा था। तन्नू मेरे कमरे में कब आई मुझे पता भी नहीं चला और वो दरवाज़े के पास खड़ी होकर मुझे और मेरे लंड को देख रही थी। लेकिन उसने कुछ नहीं बोला। जब तक मेरा पानी नहीं निकल गया तब तक वो वहीं खड़ी होकर देख रही थी।
स्पर्म निकलने के बाद जैसे ही मैं रिलैक्स होकर घूमा तो तन्नू को देखकर डर सा गया और जल्दी से अपना पैंट पहन लिया। फिर तन्नू ने पूछा—
तन्नू: अरमान ये तुम क्या कर रहे थे?
मैं: सॉरी तन्नू दीदी, मैं अब दोबारा ऐसा कभी नहीं करूँगा। प्लीज़ आप किसी को इसके बारे में मत बोलना प्लीज़………..
तन्नू: (तन्नू ने अपने हाथ से वो पेपर दिखाते हुए बोला) और ये पेपर किसका है?
मैं: ये भी मेरा है और इसपे जो स्पर्म लगा हुआ है वो भी मेरा ही है।
तन्नू: तुम्हें शर्म नहीं आती कि तुम अपनी मामी को देखकर ऐसा गंदा काम करते हो?
मैं: सॉरी तन्नू दी…….मैं अब नहीं करूँगा।
तन्नू: तुम्हारी कोई जीएफ नहीं है क्या?
मैं: नहीं है, तभी तो ऐसा कर रहा था।
तन्नू: ठीक है, पहली बार तुम्हें मैं छोड़ रही हूँ, लेकिन अगर दोबारा तुमने ऐसा काम किया तो मैं सबको बता दूँगी।
उसके बाद हम दोनों रेडी होकर कॉलेज चले गए। लेकिन पूरा दिन मेरे दिमाग में तन्नू और मेरी मामी ही आ रही थी। मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ। उधर दूसरी तरफ़ तन्नू के दिमाग में भी मेरे 7 इंच का लंबा लंड आ रहा था (जो मुझे उसने बाद में बताया)। हम दोनों की हालत ख़राब होती जा रही थी। फिर शाम को हम दोनों घर आ गए लेकिन किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि एक-दूसरे से बात करें।
फिर कुछ देर बाद तन्नू मुझसे नॉर्मल बात करने लगी। मुझे भी थोड़ा अच्छा लगा, और मैं भी उससे नॉर्मल होकर बात करने लगा। अगले दिन सुबह जब मैं ऊपर के रूम में पढ़ रहा था तो तन्नू आ गई और बोलने लगी—
तन्नू: मैं बस ऊपर देखने आई हूँ कि कहीं तुम फिर से तो नहीं अपना मोटा सा लंड लेकर हिला रहे हो ना?
मैं इतना सुनते ही हैरान हो गया और अब मुझे भी कॉन्फिडेंस आ रहा था। मैंने बोला—
मैं: नहीं तन्नू दीदी, मैं तो पढ़ रहा हूँ।
तन्नू: अगर मैं कहूँ कि मैं तुम्हारे राज़ को छुपाने के बदले मुझे कुछ चाहिए तो क्या तुम मुझे दोगे?
मैं: हाँ तन्नू दी, आप जो बोलो मैं करने को तैयार हूँ।
तन्नू: तो ठीक है, मुझे आज फिर से देखना है तुम्हारा लंड।
मैं: क्यों?
तन्नू: ठीक है, नहीं दिखाना है तो मत दिखाओ। मैं तो मम्मी को सब कुछ बता दूँगी।
मैं: ओके… ओके…. मैं दिखाता हूँ।
इतना बोलते ही तन्नू ख़ुश हो गई और उसने जल्दी से मेरे रूम का दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया।
अब वो मेरे पास आकर बैठ गई थी और मैंने अपना लंड बाहर निकाला। लंड को निकालते ही तन्नू ने उसे अपने हाथ में ले लिया और तन्नू अब मेरे लंड को धीरे-धीरे दबा भी रही थी और हिला भी रही थी। कुछ ही सेकंड में मेरा लंड एकदम कड़क हो गया। मैंने उसे बोला थोड़ा ज़ोर-ज़ोर से हिलाने के लिए तो वो ज़ोर-ज़ोर से हिलाने लगी। मुझे अब और मज़ा आ रहा था। तन्नू और ज़ोर-ज़ोर से हिलाने लगी। मैं एकदम पागल हो गया था और उसी समय मैं तन्नू के बूब्स को दबा रहा था। उसे भी मज़ा आ रहा था। तभी मेरा सारा स्पर्म निकल गया और तन्नू के कपड़ों और हाथ पर लग गया।
मैं 2 मिनट के लिए शांत हो गया और अब मैंने बोला—
मैं: तन्नू तुमने तो मेरा लंड देख भी लिया है, अब तुम भी मुझे अपना बूब्स और चूत दिखाओ ना।
तन्नू: अभी नहीं, अभी मम्मी आ जाएँगी। जब हमारे पास ज़्यादा टाइम होगा तब मैं तुम्हें दिखाऊँगी।
और फिर हम दोनों तैयार होकर कॉलेज चले गए। अब शाम हो गई थी। हम घर आ गए थे लेकिन सब लोग घर पे थे इसलिए हम कुछ भी नहीं कर पा रहे थे। अब हम दोनों मौका तलाशने लगे कि कब हम एक सेकंड के लिए भी अकेले हों। बस हम तुरंत किस करना शुरू कर देते थे। तन्नू मेरा लंड दबाने लगती थी और मैं उसके बड़े-बड़े बूब्स दबाने लगता था, किस करते-करते। काफ़ी दिनों तक यही चलता रहा।
फिर एक दिन वो हसीन पल आ ही गया। मामी के भाई की शादी थी तो हमने बोला कि आप जाओ, हम बाद में आ जाएँगे। मामी 4 दिन पहले ही चली गईं। अब मेरे और तन्नू के ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं रहा। हम बहुत ख़ुश थे।
मामी अगले दिन सुबह-सुबह शादी में चली गईं। मामा भी ऑफिस चले गए और उनके दोनों लड़के भी स्कूल चले गए। अब घर में सिर्फ़ हम दोनों ही रह गए थे।
मामा के जाते ही हम दोनों ने एक-दूसरे को ज़ोर से गले लगा लिया और एक-दूसरे को पागलों की तरह किस करने लगे। तन्नू अपने लिप्स को मेरे मुँह में डाल ही रही थी और मैं भी उसे ज़ोर से किस कर रहा था और अपने दोनों हाथों से उसके दोनों बड़े-बड़े बूब्स को दबा रहा था। करीब 10 मिनट तक हम किस करते रहे। मैं उसे किस करते-करते बेडरूम लेकर आ गया और उसे प्यार से बेड पर लिटा दिया। अब मैं तन्नू के ऊपर लेटकर उसे किस कर रहा था और बूब्स को दबा रहा था।
मैं फिर धीरे-धीरे तन्नू के टॉप के अंदर अपना हाथ डाल तो देखा कि आज तन्नू ने अपना ब्रा भी नहीं पहना है और मेरा हाथ सीधे तन्नू के दोनों बूब्स पर आ गया है। क्या मस्त फीलिंग थी यार! मेरा 7 इंच का लंड एकदम कड़क हो गया था। अब मुझे कंट्रोल नहीं हो रहा था। मैंने तन्नू के टॉप को जल्दी से निकालकर उससे अलग कर दिया। टॉप निकालते ही तन्नू शर्मा गई और उसने अपने दोनों हाथों से अपनी आँखें बंद कर लीं।
और जैसे ही मैंने टॉप निकाला, दो बड़े-बड़े बूब्स आज मेरी आँखों के इतने क़रीब कि मुझे यक़ीन ही नहीं हो रहा था। मैं पागलों की तरह उसके दोनों बूब्स को दबा-दबा के चूसने लगा।
तन्नू: आाह्ह्ह्ह….आाह्ह्ह……. अरमान थोड़ा धीरे करो ना, बहुत मज़ा आ रहा है।
तन्नू: अरमान आई लव यूयूयू……
मैं भी तन्नू के दोनों बूब्स को करीब 20 मिनट तक चूसता रहा। और तन्नू अपने हाथ से मेरे लंड को पकड़के दबा रही थी। मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था। पहली बार कोई लड़की मेरे लंड को दबा रही थी। मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था, मैं एकदम सातवें आसमान में था।
मैं अब धीरे-धीरे अपना राइट हैंड तन्नू की पैंटी में डालकर अपनी बीच वाली फिंगर से उसकी चूत में डालकर हिलाने लगा। उसकी चूत एकदम गरम हो चुकी थी, और उसके चूत के दोनों लिप्स एकदम फूले हुए थे। क्योंकि तन्नू अभी तक वर्जिन थी, उसे अभी तक किसी ने चोदा नहीं था। अब मेरी एक्साइटमेंट और बढ़ गई थी।
मैंने धीरे-धीरे तन्नू की पैंटी निकाल दी। अब तन्नू मेरे सामने बेड पर पूरी तरह से नंगी लेटी हुई थी और उसकी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे। उसकी चूत एकदम टाइट और फूली हुई थी और तन्नू की चूत हल्की-हल्की काँप भी रही थी क्योंकि वो आज पहली बार चुदने जा रही थी।
मैंने भी अपना टी-शर्ट और लोअर निकाल दिया और अब मैं भी पूरी तरह से नंगा था और तन्नू के ऊपर लेटा हुआ था। मैं अब एक हाथ से तन्नू के बूब्स को दबाता और दूसरे बूब्स को चूस रहा था। तन्नू के बूब्स के दोनों निप्पल एकदम कड़क हो गए थे और तन्नू ज़ोर-ज़ोर से आाह्ह्ह-आाह्ह्ह……. ऊऊऊऊऊ……. ओओओओओह्ह्ह्ह……….अरमाआआन्न.. आई लव यू कर रही थी।
तन्नू की इस तरह की आवाज़ सुनकर मैं भी बहुत ज़्यादा एक्साइटेड हो गया था। अब मुझे भी कंट्रोल नहीं हो रहा था और अब मैंने तन्नू की चूत के पास अपना मुँह ले गया और हल्का सा तन्नू की चूत को किस किया तो तन्नू सहम गई और उसने अपने दोनों हाथों से मेरे बाल और हाथ को पकड़ लिया। अब मुझे भी तन्नू की चूत की स्मेल पसंद आने लगी। मैं और उसके चूत को ज़ोर-ज़ोर से चाटने लगा और तन्नू की चूत से लगातार पानी निकल रहा था और तन्नू पागल हो रही थी एक्साइटमेंट की वजह से।
फिर मैंने अपना लंड तन्नू की चूत के ऊपर रगड़ने लगा, और अब उसे भी मज़ा आ रहा था।
तन्नू: अरमान अब और कंट्रोल नहीं हो रहा है प्लीज़zzzzz…. अपना लंड मेरी चूत में डालके मुझे ज़ोर-ज़ोर से चोदो ना….
मैं भी अपना लंड तन्नू की चूत में डालने लगा लेकिन तन्नू की चूत टाइट होने की वजह से मुझे भी दर्द हो रहा था। लेकिन मैंने भी सोच लिया था कि मुझे आज तन्नू को चोदना ही है। तो मैंने धीरे-धीरे अपना लंड तन्नू की चूत में डालने लगा। अब उसे भी दर्द हो रहा था। उसने अपने दोनों पैरों को एकदम कड़क कर लिया था। मैं अब धीरे-धीरे अपना लंड तन्नू की चूत में डाल रहा था और करीब आधा लंड जाने के बाद तन्नू की आवाज़ निकल गई और उसकी वर्जिनिटी लूज़ हो चुकी थी। उसे अब दर्द हो रहा था।
मैंने फिर अपना लंड थोड़ा और अंदर डाला तो उसे और दर्द हुआ। फिर मैंने 5 मिनट तक अंदर-बाहर करने के बाद अपना लंड तन्नू की चूत में से निकाल लिया तो देखा कि मेरे लंड पर 1-2 ड्रॉप्स खून लगा हुआ है। मैं समझ गया कि तन्नू अब अच्छे से चुदाने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
मैंने फिर देर न करते हुए अपना मोटा लंड तन्नू की चूत में डाल दिया। उसे फिर से दर्द हुआ लेकिन इस बार उसे ज़्यादा मज़ा आ रहा था। और अब मैंने अपना पूरा 7 इंच का लंड तन्नू की चूत में घुसा दिया था। अब उसे भी मज़ा आ रहा था। मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी। उसे और भी मज़ा आ रहा था।
तन्नू: अरमान और ज़ोर-ज़ोर से चोदो ना मुझे…… और ज़ोर….. से……. कम ऑनnn…….. ओओओओओओओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह
मैं: हाँ जानमन, मैं भी आज तुझे ज़ोर-ज़ोर से चोद-चोद के रंडी बना दूँगा।
और मैं भी उसे ज़ोर-ज़ोर से शॉट मारने लगा और तन्नू भी मेरा साथ देने लगी। तन्नू अपनी कमर उठा-उठा के अपनी चूत और ज़ोर-ज़ोर से मरवा रही थी। करीब 20 मिनट तक तन्नू को चोदने के बाद तन्नू ने बोला कि मुझे कुछ हो रहा है, कुछ निकलने वाला है। मैं समझ गया। मैंने भी अपनी स्पीड और बढ़ा दी और ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा। तभी तन्नू ने मुझे ज़ोर से गले लगा लिया और उसने अपना पानी छोड़ दिया। मैंने भी अपना बढ़ाकर तन्नू को चोद रहा था तभी मेरा भी स्पर्म निकल गया और मैंने अपना पूरा पानी तन्नू की चूत में ही छोड़ दिया। और उसके बाद मैं तन्नू के ऊपर ही लेट गया। मेरा लंड अब भी तन्नू की चूत में था।
हम 20 मिनट बाद फिर उठे और मैंने तन्नू को फिर से चोदा। अब वो पहले से ज़्यादा मज़ा ले रही थी।
उस दिन हमने 3 बार सेक्स किया और साथ में नहाया भी। और जब भी मैं दिल्ली जाता हूँ तो तन्नू को चोदता हूँ। और एक ख़ास बात और बताना है – अब मैं अपनी मामी को भी चोदता हूँ। मेरी मामी को तन्नू ने ही कन्वेंस कर लिया था, जिसकी स्टोरी मैं आपको अगली स्टोरी में बताऊँगा।
उसके बाद मैं शाम को मेडिकल स्टोर से 1 आई-पिल की गोली तन्नू को लाकर दी ताकि वो प्रेग्नेंट न हो जाए।

मेरी रूपाली दीदी और जालिम ठाकुर esko pura karo
Koi saxi ladki mere mote land se mja karna chati ho vo message kre