हुमा एक हाउस वाइफ और मिश्रा पान वाला – 8
Huma a housewife kamukta sex story:- पिछले पार्ट मे आपने पढ़ा कि मिश्रा ने हुमा को ईमोशनल करके उसका फायदा उठाना चाहा। मिश्रा ने हुमा की जांघों को सहलाया और उसके बूब्स दबाने की कोशिश की, तो हुमा मिश्रा को एक थप्पड़ मारकर वहाँ से निकल गई। अब पढिए आगे…
पिछला पार्ट यहाँ पढ़ें ==> हुमा एक हाउस वाइफ और मिश्रा पान वाला – 7
Huma a housewife kamukta sex story
मिश्रा को शॉक लग गया उसको लगा हाथ आयी चिड़िया अब उड़ गयी, शायद उसने जल्दबाज़ी कर दी। उसने ये सब बातें शांता को बताई।
शान्ता फ़ोन पर – क्या तुम मिश्रा जी इतनी जल्दबाज़ी कर दी अच्छा खासा प्लान बिगाड़ दिया।
मिश्रा – अरे कहा जल्दबाज़ी की 2 महीने से ट्राई कर रहे है, तो सोचा मान जाएगी।
शांता – वो कोई चालू औरत नहीं की इतनी जल्दी मान जाएगी, अब सुनो जो मै कहती हूं वो करना होगा नहीं तो चिड़िया हाथ से गयी समझो।
मिश्रा – अगर मै उसको चोद नहीं पाया तो भूल जाओ फिर तुम्हारे पैसे भी।
शांता – मै ही कुछ सोचती हूँ।
तभी हुमा घर आयी और सीधे बाथरूम में जाकर रोने लगी। आधा घंटा तक वो रोती रही उसको बहोत बुरा लगा, जिसको अपना समझा वो भी धोकेबाज़ निकला। आधे घंटे बाद जब हुमा बाहर आयी तो शांता ने कहा-
शांता – क्या हुआ मालकिन आप की सूजी हुए आँखे बता रही है कि आप रोई हो क्या हुआ?
हुमा – कुछ नही।
शांता – आपने मुझे बहन कहा बता दीजिये आपको मेरी कसम।
हुमा – अब क्या बताओ तुझे शांता।
शान्ता – बोल दो मालकिन दुख बाटने से कम होता है आप जो भी कहेगी वो बात सिर्फ मुझ तक ही होगी मै किसी को नहीं बताऊँगी! क्या मालिक का दुःख है?
हुमा – उनका दुःख नहीं है और फिर हुमा ने सबकुछ शांता को बता ही दिया.
शांता – सच कहु तो यकीं नहीं आ रहा है मिश्रा जी तो भगवान का रूप है मेरे और आपके लिए अगर वो नहीं होते तो हम ज़िंदा नहीं होते।
हुमा – शॉकड तो मै भी हूं शांता।
शांता – अगर ऐसा हुआ है तो मै अब भी मिश्रा जी को गलत नहीं कहुंगी।
हुमा गुस्से से – क्या? इतना कुछ हुआ और तुम कह रही हो वो गलत नहीं है।
शांता – मालकिन वो एक मर्द है कई साल से उसकी बीवी उसको अपने करीब नहीं आने देती, बेचारा इंसान कैसे कण्ट्रोल करके जी रहा है आप भी इंसान है, अगर आपको भी मालिक अधूरा प्यासा छोड़ देंगे तो आप भी मिश्रा की तरह बहक जाएँगी।
हुमा ने कुछ नहीं कहा वो शांता की बातें सुन रही थी।
शांता – अगर मिश्रा जी की नियत ख़राब होती तो हमारी बस्ती की कई औरते उनपर डोरे डालती है कब से उन औरतो के साथ वो चुदाई कर लेते।
चुदाई वर्ड आते ही हुमा ने शांता को देखा।
शान्ता – माफ़ करना मालकिन मगर चुदाई को चुदाई ही कहते है ना।
हुमा अब भी कुछ नहीं बोली।
शांता – मिश्रा जी सबकी मदद करते है बस्ती में कई औरते उनसे चोदने को तैयार है मगर मिश्रा जी है की कभी उनको नज़र उठा कर नहीं देखा।
हुमा रोते हुए अब क्या करू शांता मेरा दिमाग ही काम नहीं कर रहा पिछले कुछ दिनों में इतना कुछ हो गया की कुछ समझ नहीं आ रहा क्या करू क्या न करू।
शांता – मै समझ सकती हूं मालकिन मगर औरत को ऐसी ही ज़िन्दगी जीनी पड़ती है आप दुखी है आपने तो कुछ भी नहीं देखा है। मेरी ज़िन्दगी को ही देख लीजिये पति शराबी, कोई सहारा नहीं, आपके यहाँ नौकरी मिली तो मालिक ने भी मेरी मज़बूरी का फायदा उठाया, मगर फिर भी मै जी रही हूं ना। मुझे क्या उस बेचारे मिश्रा की बीवी के बारे में भी आप जानते हो, मगर उस इंसान को भी हमेशा मैंने मुस्कुराते देखा और आप है की बस अपने पति की बेवफाई के लिए परेशान है।
शांता की बात सुनकर हुमा के आंसू रुक गये।
हुमा – तो तुमको क्या लगता है मुझे क्या करना चाहिए?
शांता – खुश रहिये और हो सके तो मिश्रा जी को माफ़ कर दीजिए।
हुमा चुप होती है, आज का दिन भी गुजर गया रात को सैफ खर्राटे मार कर सो रहा था मगर हुमा की आँखों में नींद नहीं थी। आज मिश्रा के साथ हुए हादसे के बारे में सोच रही थी उसको लगा की उसने ठीक किया या नहीं मिश्रा को थप्पड़ मारके। ऐसे ही कश्मकश में वो सो गयी। ऐसे ही 3 दिन गुजर गए मिश्रा ने इस बीच कुछ कॉल भी किये हुमा को, मगर उसने कॉल नहीं उठाई। मिश्रा परेशान हुआ। मिश्रा ने शांता से कहा की कुछ करे शांता ने मिश्रा को कहा की वो पूरी कोशिश कर रही है मगर बात नहीं बन रही है शांता को भी उसके पैसो से मतलब था।
आखिर शांता और मिश्रा ने मिलकर प्लान बनाया मगर मिश्रा और शांता को पता था ये प्लान फ़ैल हो गया, तो समझो हुमा तो गयी हाथ से. 4 दिन बाद शांता हांफते हुए घर आयी हुमा हॉल में थी, सैफ जा चुका था।
शांता हांफते हुए मालकिन मालकिन।
हुमा क्या हुआ इतनी घबराई क्यों है?
शांता – वो मालकिन वो।
हुमा – बोल भी इतनी हाँफ क्यों रही है?
शांता – वो मेरी बस्ती से भाग के आ रही हूं हुआ ये की मिश्रा जी हमेशा के लिए शहर छोड़ कर जा रहे है।
हुमा – क्याआआ क्या कह रही है?
शांता – पिछले 5 दिन से वो बहोत दुखी थे, मालकिन शायद आपकी वजह से।
हुमा – तुझे कैसे पता वो जा रहे है?
शांता – जब मै यहाँ काम पर आ रही थी, तो सोचा मिश्रा जी से मिल आऊं मेरी बच्ची की फीस दी, उस दिन तो उनका शुक्रिया भी नहीं बोल पायी। जैसे मै उनके घर गयी तो वो अपना सामान बांध रहे थे, मैंने पूछा तो उन्होंने कहा की मै हमेशा के लिए जा रहा हूं शहर छोड़ कर। अगले महीने आ कर पान की दुकान भी बेच दूंगा। मैंने पूछा क्यों जा रहे हो तो कहा की मैं एक देवी का दिल तोड़ दिया, उनका भरोसा तोड़ दिया, अब मै यहाँ नहीं रह सकता। वो आप की बहोत इज़्ज़त करते है मालकिन आप ही है जो उनको जा कर रोक सकती है।
हुमा – मै?
शांता – हाँ आप जाईये नहीं तो बहोत देर हो जाएगी! मैंने रो-रो कर मिन्नत की मत जाईये मगर वो नहीं माने आखिर वो सहारा है मेरे परिवार का, ऐसा अच्छा इंसान हमारे बीच से जार रहा है वो भी सिर्फ आपकी वजह से। मालकिन आपको उनको रोकने के लिए जो करना है वो कीजिये मगर रोकिये।
हुमा हड़बड़ाई थी क्योंकी चाहती तो वो भी नहीं थी की मिश्रा जी चले जाये, हुमा भी उठ कर फ़ौरन बाहर निकल गयी। शांता बाहर तक छोडने आयी, तभी हुमा ने कहा-
हुमा – अरे मै तो बुर्का पहनना ही भूल गयी मै बुर्का पहन कर आती हूँ।
शान्ता – मालकिन उतना वक़्त नहीं है हमारे पास।
हुमा – मगर बगैर बुर्क़े के और मुझे उनके घर का एड्रेस नहीं पता।
शान्ता पहले से ही कागज़ पर एड्रेस लिख आयी थी, उसने अपने ब्लाऊज़ से छोटा सा पेपर निकालकर हुमा को दे दिया।
हुमा बाहर ही खड़ी थी तभी एक ऑटो आया और शांता ने उस ऑटो को रुकवा कर हुमा को उसमे बैठने को कहा। हुमा ने एक बार शांता की तरफ देखा और ऑटो में बैठ गयी। ऑटो निकल गया। शांता के चेहरे पर एक क़ातिल मुस्कराहट आ गयी उसने मिश्रा को कॉल करके बता दिया की चिड़िया फिर जाल में फंस गयी है और वो बस्ती की तरफ आ रही है। ऑटो कुछ देर चलके एक गन्दी सी बस्ती में आकर रुका। ऑटो वाले ने कहा मैडम यही एड्रेस है हुमा ने यहाँ वहाँ देखा बहोत बड़ा सा स्लम एरिया लग रहा था।
उसने बुर्का नहीं पहना था, मगर उसने दुप्पटे से अपना चेहरा कवर किया और ऑटो से उतर कर ऑटो वाले को पैसे दे दिए और आगे चल पड़ी। कुछ दूर जाकर उसको एक बूढ़ा दिखाई दिया जो अपने घर के बाहर बैठ कर खाँस रहा था। हुमा उसके पास गयी और उसको कहा बाबा ये मिश्रा जी घर कहा है।
बुद्धा – कौन वो पान की दुकान वाला?
हुमा – जी।
बुद्धा गली में एक घर की तरफ इशारा करते हुए कहता है, वो जो सामने पीली दिवार दिख रही है वही मिश्रा का घर है।
हुमा – शुक्रिया बाबा।
हुमा उस घर की तरफ जाती है तो उस बुड्ढे की नज़र उसकी बड़ी थिरकती गांड पर जाती है।
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