हुमा एक हाउस वाइफ और मिश्रा पान वाला – 7
Ek Housewife ki chudai kahani:- इस स्टोरी के पिछले पार्ट मे आपने पढ़ा कि हुमा ने सैफ को नौकरानी शांता की चुदाई करते देखा तो उसको बहुत दुख हुआ। सैफ की बेवफाई की वजह से हुमा वहाँ से चल पड़ी और सुसाइड करने पहुँच गई। मिश्रा भी हुमा के पीछे पीछे वहाँ पहुँच गया और उसने हुमा को पीछे से पकड़ लिया। अब पढिए ये hindi sex story आगे…
पिछला पार्ट यहाँ पढ़ें:- हुमा एक हाउस वाइफ और मिश्रा पान वाला – 6
Ek Housewife ki chudai kahani
हुमा – छोड़ दीजिये भाई साहब मैं मरना चाहती हूँ।
मिश्रा – आप पागल ना बनिए भाभी! ये आप क्या कह रही है।
हुमा – सब कुछ खत्म हो गया मै मरना चाहती हु।
मिश्रा – ऐसे मरने से कोई परेशानी का हल नहीं निकलता, नहीं तो आधी दुनिया मर गयी होति।
मिश्रा की गांड फट गयी थी क्योंकी उसने नहीं सोचा था ये इनोसेंट शरीफ औरत के साथ जो गेम वो खेल रहा था, उसमे सुसाइड जैसा भी कुछ हो सकता है ये उसने नहीं सोचा था, इसलिए वो भी डर गया था. मिश्रा ने अब भी हुमा को पीछे से पकड़ रखा था, उसको उस खाई के किनारे से दूर झाड़ियों की तरफ ले गया। हुमा ने ताकत लगा कर उससे अपने आपको छुड़ा लिया।
मिश्रा – आपको मेरी कसम भाभी जी! ऐसा सोचना भी मत क्या मैंने कोई गुनाह किया आपको सच्चाई बता कर? मै आपके पीछे चल रहे इस खेल को आपको इसलिए बताना चाह रहा था क्योंकी मै आप का वफादार हूं अगर आपने, अपने आपको कुछ किया तो मै भी मर जाऊँगा।
मिश्रा की फट गयी थी उसने रोने का नाटक किया, मिश्रा को रोता देख हुमा कुछ शांत हुई. कुछ देर बाद मिश्रा बोला.
मिश्रा – भाभी आप मेरे सर की कसम खाइये आप दोबारा ऐसा नहीं करेगी! अगर आपने कसम तोड़ी तो मै भी मर जाऊँगा, आप दुनिया की पहली औरत नहीं जो आपके साथ धोखा हुआ, मुझे देखिये मै भी आप की तरह अपनी पत्नी का धोखा सह रहा हूं, मगर मुझे देख के लगा की मै दुखी हूं? मुझे तो कब से मर जाना चाहिए था।
मिश्रा ने हुमा का हाथ पकड़ कर अपने सर पर रख दिया था, हुमा पूरी तरह शांत हो गई।
हुमा – मगर भाई साहब! आखिर मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ? मैंने तो हर वक्त उनके साथ वफ़ा की मुझे ही ये बेवफाई क्यों मिली? सैफ तुमने आखिर ऐसा क्यों किया? बहन जैसी शांता ने भी धोखा दिया.
मिश्रा – शांता को गलत मत कहिए भाभी जी वो बेचारी तो दुःख दर्द की मारी है वो मजबूर थी, उसने कई बार सैफ भाई को मना किया मगर सैफ भाई हर हल में अपनी हवस मिटाना चाहते थे, वो बार बार उसको धमकी देते थे अगर तूने करने नहीं दिया तो नौकरी से निकाल दूंगा। शंकर दादा को बोलकर तेरी बेटी को उठा लूंगा.
हुमा – छि: इतने गिर गए है वो? मगर आपको इतना सब कैसे पता।
मिश्रा फंस गया मगर फिर उसने बात को सम्भाला।
मिश्रा – जैसे आज तुम आत्महत्या करने जा रही थी, वैसे वो दुखियारी भी ज़हर खा रही थी, वो तो मै वक़्त पर पहुंच गया था उसकी बेटी की फीस के पैसे देने, तो देखा उसके हाथ में चूहे मारने की दवा थी। मैंने भाग कर गया उसको रोका बहुत समझाया फिर उसने मुझे बताया, मै सैफ भाई से बात करने वाला था, मगर सैफ भाई ने शांता को धमकी दे रखी थी अगर किसी को बताया तो अंजाम बहोत बुरा होगा।
एक और झूटी कहानी यहाँ मिश्रा ने हुमा को बताई। हुमा टूट गयी थी मगर मिश्रा की बातो की वजह से कुछ हिम्मत उसमे आयी थी। मिश्रा ने देखा की हुमा कुछ नार्मल हो रही है, तो उसकी भी जान में जान आयी, मिश्रा भी डर गया था सुसाइड का सीन जो क्रीऐट हो गया था। मिश्रा ने घर जाने के लिए हुमा को मना लिया था। हुमा उदास सी बेजान लाश की तरह मिश्रा के साथ घर की ओर निकल गयी। चलते वक़्त सिर्फ उसने इतना ही कहा.
हुमा – भाई साहब उस घर में जाने का मन नहीं कर रहा अब।
मिश्रा – देखो भाभी जी मै भी आप की तरफ बेवफाई का शिकार हूं, मगर कभी किसी को एहसास नहीं होने दिया की मै दुखी हूं। आपको भी ऐसे ही जीना है मै हूं न आपके साथ।
हुमा – मै सैफ से बात करूंगी।
मिश्रा को लगा सैफ से बात करके कही उसका प्लान न बिगड़ जाये, उसने फिर सिचुएशन को सम्भाला।
मिश्रा – अरे भाभी आप क्यों अपनी ही ज़िन्दगी बर्बाद करने पर तुली हो? तुम सैफ भाई से बात करोगी वो मुकर जायेगा और कबूल भी कर लिया तो क्या कर लोगी आप? वो मर्द है उसने आपको छोड़ भी दिया तो हर हल में नुकसान आप का ही है। मुझे देखिये मेरी बीवी का अफेयर किसी और से चल रहा है ये बात को मै बढ़ावा दू तो बदनामी सिर्फ मेरी होगी समझी आप।
मिश्रा की बातो का कुछ ज्यादा ही हुमा पर असर हो गया था, वो मिश्रा की हर बात मानने लगी थी, उसको लग रहा था पूरी दुनिया में सिर्फ मिश्रा ही उसका हमदर्द है, इसलिए उसने सैफ से जाकर बात न करने का फैसला किया। हुमा को मिश्रा की बातो से हिम्मत मिल रही थी, मगर वो अंदर से काफी टूट गयी थी जैसे तैसे हुमा घर पहुंची। अंदर जाते ही उसने देखा की शांता किचन में काम कर रही है और सैफ बाथरूम में नहा रहा था। हुमा ने एक नजर शांता की तरफ देखा, उसको लगा की जाकर शांता को एक तमाचा लगा दे। मगर उसको मिश्रा की बात याद आयी की शांता खुद मज़बूरी में ये सब कर रही है।
तभी सैफ बाथरूम से बाहर आते हुए. सैफ – ओह्ह आ गयी तुम?
हुमा ने सैफ को देखा उसको लगा की जाकर सैफ का गिरेबान पकड़ ले और पूछे आखिर उसने ऐसा क्यों किया, मगर उसको मिश्रा की बात याद आयी की सैफ से बात करने से उसका ही नुकसान है।
हुमा – क्यों नहीं आना चाहिए था क्या?
सैफ – अरे यार तुम भी ना! अच्छा मटन ले आयी तो लज़ीज़ बिरयानी बना दो.
हुमा सैफ को देख सोचने लगी कितने बेशरम हो तुम, सैफ मुझ से बेवफाई करके बिरयानी की बात कर रहे हो, उस बेचारी की मज़बूरी का फायदा उठा कर शान से घूम रहे हो लानत है तुम पर। इतना सोच कर वो वाशरूम की तरफ चली गयी हुमा को सैफ की शकल देखने में इंट्रेस्ट नहीं बचा था। जैसे तैसे दिन चला गया, दूसरे दिन सैफ के जाने के बाद शांता आयी और उसने और मिश्रा ने बनाये प्लान का अगला हिस्सा शुरू हुआ। शांता आते ही हुमा के गले लग कर रोने लगी।
शांता – मालकिन मुझे माफ़ कर देना बहोत दिन से आप से एक बात कहनी थी अब ये बोझ लेकर नहीं जी सकती मै, आपने मुझे बहन कहा है।
हुमा समझ गयी थी शांता क्या कहने वाली है
हुमा – क्या हुआ बोलो।
शांता – मालकिन आप देवी हो मगर मैंने आप से एक बात छुपाई।
हुमा – क्या?
शांता – आप मेरी बात सुनने के बाद मुझ से नाराज़ नहीं होगी न वादा करो।
हुमा – कहो तुमको बहन कहा है नाराज़ नहीं हूँगी बोलो।
शांता – मालकिन वो वो मालिक मेरे साथ ज़बरदस्ती करते है।
हुमा – क्या?
हुमा जान कर अनजान बन रही थी, उसको शांता के मुह से सुनना था।
शान्ता नकली आंसू बहाते हुए – मालकिन मैंने उनको बहोत मना किया मगर वो नहीं माने वो मुझे बार बार धमकिया देते रहे, आखिर मैंने अपनी बेटी की खातिर हार मान ली, मगर एक बोझ लेकर जी रही थी अब जाके वो बोझ उतर गया.
हुमा – शांता एक बात कहूँ?
शान्ता रोते हुए जी मालकिन।
हुमा – मुझे ये बात पता थी।
हुमा कल वाली पूरी बताती है।
शांता – सच कहा मालकिन अगर मिश्रा जी नहीं होते तो ना मै होती ना आप! हम उस राक्षस सैफ का शिकार हो जाते। मैंने अपनी बेटी के लिए ये क़ुरबानी दी है मालकिन।
हुमा – मै समझती हु।
शान्ता रोते हुए – आप मालिक से कुछ मत कहना नहीं तो उन्होंने कहा है की शंकर दादा से बोलकर मेरी बेटी को कॉलेज से उठा लेंगे।
हुमा – नहीं कहूंगी।
एक ऐसा जाल शांता और मिश्रा ने हुमा और सैफ के आस पास बना दिया था की उनके रिश्ते लगभग ख़तम होने की कगार पर थे। हुमा एक इनोसेंट हाउसवाइफ उसको नहीं पता था की उसके आस पास जो हो रहा है वो सिर्फ प्लान है और सैफ भी इस बात से बेखबर था। वो तो शांता को चोद कर बहोत खुश था, मगर उसको पता नहीं था ये चुदाई उसको कितनी महंगी पड़ने वाली थी, उसको उसकी बीवी उसके हाथो से निकलने वाली थी। शांता हुमा के गले लग कर रोने का नाटक करने लगी।
आज का दिन भी गुजर गया, मगर हुमा की ज़िन्दगी में बदलाव आ गया था। वो अब गुमसुम सी रहने लगी थी, उसको अब अपना दर्द हल्का करना होता वो मिश्रा से बात करती। मिश्रा अब इस नज़दीकियों का पूरा फायदा उठाने के चक्कर में था। एक दिन मिश्रा ने हुमा को अपनी शॉप पर बुलाया था, हुमा को भी मिश्रा के साथ वक़्त बिताना अच्छा लग रहा था। हुमा जैसे ही शॉप पर आयी मिश्रा ने उसको पीछे वाले रूम में जाने को कहा। हुमा पीछे रूम में गयी, मिश्रा की नज़र फिर उसकी बड़ी गांड पर गयी, तो मिश्रा अपनी पान की दुकान के बॉक्स जिसमे वो खड़ा रहता था उसमे झुक कर वो बैठ गया और अपने घुटनो के बल वो उस छोटे से विंडो जैसे डोर से उस रूम में गया।
अंदर हुमा एक चेयर पर बैठी थी, मिश्रा अंदर आते ही एक और झूठी कहानी बनाने लगा।
मिश्रा – अच्छा हुआ आ गयी आप आज बड़ा मन उदास था मेरा।
हुमा – क्या हुआ?
मिश्रा की आँखे नम हुए या फिर नाम होने की उसने एक्टिंग की।
हुमा – क्या हुआ बताइए?
हुमा चेयर पर बैठी थी, आस पास पान की शॉप का सामान पड़ा था, जैसे की पान, कत्था सुपारी तंबाकू वगैरह। रूम में एक अलग सी स्मेल आ रही थी, मिश्रा हुमा के पैरो के पास बैठा था। हुमा बुर्क़े में उस छोटे से कमरे में चेयर पर बैठी थी।
मिश्रा – भाभी जी गाँव से एक दोस्त ने खबर दी की मेरी लुगाइ।
हुमा – लुगाई?
मिश्रा – मेरी पत्नी प्रेग्नेंट हो गयी थी, 3 साल से उसने मुझे अपने करीब नहीं आने दिया और वो प्रेग्नेंट हो गयी, बाद में उसने वो बच्चा गिरा भी दिया।
इतना कह कर मिश्रा मगरमच्छ के आंसू बहाने लगा हुमा को मिश्रा के दर्द में अपना दर्द महसूस होने लगा। मिश्रा ने भी मौका देख चौका मार दिया और थोड़ा आगे बढ़कर चेयर पर बैठी हुमा की गोद में सर रख कर रोने लगा। हुमा एक दम से चौक गयी, मगर उसने देखा की मिश्रा जी रो रहे है इसलिए उसने उसको इग्नोर करते हुए मिश्रा के सर पर हाथ रख कर कहा।
हुमा – आप मर्द होकर रो रहे है और मुझे नहीं रोने की सलाह देते हो।
मिश्रा के दोनों हाथ हुमा की जांघ पर थे और उसका का राइट साइड का गाल हुमा की चूत के ऊपर था। बुर्क़े में भी मिश्रा को हुमा की चूत की गर्माहट महसूस हुई, मिश्रा का लंड फुल टाइट हो गया और मिश्रा रोते हुए हुमा की नरम जांघ को सहलाने लगा और सोचने लगा क्या मोटी और नरम जांघें है इसकी चूत की गर्मी तो मेरे चेहरे को जला देगी। मिश्रा के हाथ हुमा की जांघ पर चलने लगे हुमा को भी कुछ महसूस होने लगा, मगर फिर भी उसने रोते हुए मिश्रा को सहारा देने में अपना धयान लगाया। कमीना मिश्रा हुमा की नरम मोटी जांघों का मज़ा ले रहा था।
जब मिश्रा ने अपना चेहरा ऊपर की तरफ किया, तो हुमा के बड़े बूब्स उसको दिखाई दिए, बूब्स इतने बड़े थे की हुमा की गोद में लेटे हुए हुमा का चेहरा मिश्रा को दिखाई नहीं दे रहा था। मिश्रा ने इस बार अपना मुह हुमा की चूत की तरफ घुसा दिया और ज़ोर ज़ोर से उसकी जांघ मसलने लगा।
हुमा ने मिश्रा के दोनों हाथो को पकड़ कर कहा – भाई साहब कण्ट्रोल कीजिए।
मिश्रा मगर अब रुकने के मूड में नहीं था, मिश्रा ने अपना चेहरा ऊपर किया और हुमा के बड़े बूब्स पर अपना चेहरा रगड़ने लगा। हुमा को अब गुस्सा आ गया, उसने ज़ोर लगा कर मिश्रा को पीछे धकेला और उठकर खड़ी हो गयी। मिश्रा भी उठ कर खड़ा हो गया और हुमा को गले लगा लिया।
मिश्रा – भाभी जी मै बहोत दुखी हूं मुझे समझने की कोशिश कीजिये।
हुमा ने मिश्रा को फिर धक्का दिया और chattttttttaaaaaaaaaakkkkk एक थप्पड़ लगा कर उस कमरे से बाहर निकल गयी।
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