मुझे अंकल ने चोदा – 1

Uncle se meri chudai kahani:- मेरा नाम फलक है और मैं दिल्ली में रहती हूँ अपने हस्बैंड के साथ। मेरे हस्बैंड का नाम समीर है और वो प्राइवेट जॉब करते हैं जिसके लिए उन्हें कई-कई दिनों तक घर से बाहर रहना पड़ता है। उनके जाने के बाद मैं घर पे अकेली होती हूँ। मैं, उम्र 22 साल और मेरे हस्बैंड की उम्र 27 साल।

Uncle se meri chudai kahani

हमारी शादी को 1 साल हो गया है। मैंने शादी से पहले कभी सेक्स नहीं किया था। सुहागरात को ही पहली बार सेक्स किया था। मेरे हस्बैंड के लंड का साइज 5 इंच लंबा और 1 इंच मोटा है। मैंने शादी से पहले कभी लंड नहीं देखा था तो उस टाइम मुझे नहीं पता था लंड छोटे-बड़े भी होते हैं। मैंने जो पहला लंड देखा था वो अपने हस्बैंड का ही देखा था तो मुझे तो ये ही लगता था कि सबके इतने ही होते होंगे।

एक दिन मेरे हस्बैंड ने मुझे पॉर्न फिल्म दिखाई। उस फिल्म में मैंने देखा वो काले आदमी का लंड बहुत बड़ा है। आई थिंक उसका लंड 8 या 9 इंच लंबा और 2 या 3 इंच मोटा होगा। तो मैंने हस्बैंड से पूछा कि क्या ये सच में इसका इतना बड़ा है या फिल्म में ही दिखाते हैं इतना बड़ा। तो हस्बैंड ने बताया कि इनका इतना बड़ा ही होता है। तो मैंने बोला कि आपका तो है नहीं इतना बड़ा। (पता नहीं कैसे मेरे मुँह से एकदम ये वर्ड निकल गया और मेरे हस्बैंड के ऊपर पानी सा गिर गया मेरे मुँह से ये सुनके। तब मुझे इस बात का एहसास नहीं हुआ कि ये मैंने क्या बोल दिया। बाद में एहसास हुआ।)

तो मेरे हस्बैंड बोले कि ये काले लोगों का लंड इतना बड़ा होता है। इंडिया के लोगों का मेरे जितना ही बड़ा होता है। तो मैंने सोचा शायद ऐसा ही होगा जैसा ये कह रहे हैं।

हमारी शादी को 7 महीने हो चुके थे तब हमारे सामने वाले फ्लैट में एक अंकल आकर रहने लगे थे।

अंकल की उम्र 70 साल थी।

वो अकेले ही रहते थे। उनकी गवर्नमेंट जॉब थी तो ट्रांसफर होकर यहाँ आए थे। (वो पटना के रहने वाले थे। उन्होंने ये बाद में बताया।) कुछ दिनों में मेरे हस्बैंड और अंकल की दोस्ती हो गई थी तो अंकल कभी-कभी मेरे हस्बैंड के साथ हमारे फ्लैट पर भी आ जाते थे। तब मुझे ये नहीं पता था कि वो मुझे देखने के लिए आते हैं।

ये मुझे बाद में रियलाइज हुआ कि वो मुझे गंदी नजरों से देखते हैं। मैंने ये बात मेरे हस्बैंड को बताई तो वो कहने लगे कि बुड्ढा आदमी है देख लेने दो। बेचारा इस उम्र में कुछ कर तो सकता नहीं। देखके ही उसे अपना दिल खुश करने दो। तो मैंने भी सोचा जब इन्हें ही नहीं कोई प्रॉब्लम है तो मुझे भी क्या प्रॉब्लम होगी।

फिर कुछ दिनों बाद वो अकेले भी हमारे फ्लैट में आने-जाने लगे थे जब मेरे हस्बैंड घर पे नहीं होते थे। कभी टी पीने के बहाने कभी कुछ और बहाने से। मैंने ये बात भी अपने हस्बैंड को बताई तो उन्होंने अंकल को कुछ बोला ही नहीं और उल्टा मुझे ही कहने लगे कि बेचारे इस उम्र में अकेले रहते हैं तो चाय-वाय पिला दिया करो। मैं कुछ नहीं बोली। मैं सिर्फ ओके बोलके किचन में आ गई डिनर रेडी करने के लिए।

अगले दिन शाम को मेरे हस्बैंड जब जॉब से घर वापस आए तो उन्होंने मुझे बोला कि मेरा बैग रेडी कर दो। कल मुझे कंपनी के काम से 1 महीने के लिए पुणे जाना है। मैंने बोला ठीक है। फिर अगले दिन वो पुणे के लिए निकल गए।

उनके जाने के बाद मैं घर के कामों में बिजी हो गई। मुझे टाइम का पता ही नहीं चला कब दोपहर का 1 बज गया। गेट की बेल बजी तो मैंने टाइम देखा। मैंने जाके गेट खोला तो गेट पर अंकल खड़े थे। अंकल ने बोला समीर घर पे है तो मैंने उन्हें बताया कि वो तो आज सुबह ही पुणे चले गए कंपनी के काम से। वो ये सुनकर मुस्कुराने लगे। मैंने मुस्कुराने की वजह पूछी तो बोले ऐसे ही। फिर बोले चाय नहीं पिलाओगी। मैंने बोला अंदर आ जाइए अभी बनाती हूँ। वो अंदर आकर हॉल में सोफे पे बैठ गए। मैं किचन में जाके चाय बनाने लगी।

मैं चाय बनाकर अंकल और अपने लिए चाय लेकर हॉल में वापस आई तो अंकल मुझे ही देख रहे थे। मैं अंकल को चाय का कप देते हुए बोली कि ऐसे क्या देख रहे हो। तो वो बोले कि तुम बहुत खूबसूरत हो। मैंने उन्हें थैंक्स कहा और उनके सामने वाले सोफे पे बैठ गई और चाय पीने लगे। थोड़ी देर बाद अंकल बोले –

अंकल: तुम अपने हस्बैंड के साथ खुश हो?

मैं: हाँ। ऐसा क्यों पूछा आपने?

अंकल: नहीं। मुझे ऐसा लगा कि शायद तुम खुश नहीं हो अपने हस्बैंड के साथ इसलिए पूछा।

मैं: क्यों? ऐसा क्यों लगा आपको कि मैं अपने हस्बैंड के साथ खुश नहीं हूँ?

अंकल: क्योंकि तुम बहुत खूबसूरत हो, हसीन हो, जवान हो और तुम्हारा हस्बैंड तुम्हारे सामने कुछ भी नहीं है। तुम्हारा रंग दूध के जैसा सफेद है और तुम्हारे हस्बैंड का रंग काला है तुम्हारे सामने। और तुम्हारा शरीर भी हरा-भरा है। तुम्हारा हस्बैंड दुबला-पतला सा है तुम्हारे सामने।

(पहले तो मैं अपनी तारीफ सुनकर बहुत खुश हुई। फिर मैं सोचने लगी कि कहीं अंकल मुझ पर लाइन तो नहीं मार रहे।)

मैं: नहीं। ऐसा कुछ नहीं है। वो मुझे खुश रखते हैं। मेरी हर ख्वाहिश पूरी करते हैं।

अंकल: नहीं। मेरा वो मतलब नहीं था। मैं ये कह रहा हूँ कि तुम हरे-भरे गदराए हुए जिस्म की मालकिन हो और तुम्हारा हस्बैंड लकड़ी की तरह दुबला-पतला सा तो वो तुम्हें जिस्मानी खुशी दे पाता है?

(मैं ये सुनके एकदम शॉक में आ गई कि ये कैसी बात कर रहे हैं अंकल।)

मैं: अंकल ये आप कैसी बातें कर रहे हैं। आपको शर्म नहीं आई ऐसी बातें करते हुए?

अंकल: अरे नाराज मत हो। मैं तो बस ऐसे ही पूछ रहा था कि तुम खुश तो हो ना अपने हस्बैंड के साथ? मैंने बहुत सी लड़कियाँ देखी हैं तुम्हारे जैसी जो अपने हस्बैंड से खुश नहीं रहतीं।

मैं: नहीं। मैं बहुत खुश हूँ अपने हस्बैंड से।

अंकल: चलो ये तो बहुत अच्छी बात है। तुम्हारा हस्बैंड तुम्हें खुश रखता है।

मैं: जी।

फिर हमने चाय खत्म की और अंकल चले गए।

अंकल के जाने के बाद मैं सोच में डूब गई कि अंकल ऐसा क्यों बोल रहे थे कि तुम्हारा हस्बैंड तुम्हें खुश रखता है या नहीं? तुम्हारे जैसी लड़कियाँ अपने हस्बैंड से खुश नहीं रहतीं? मैं इन्हीं सोचों में गुम थी कि मेरे फोन की रिंग बजी तो मैं उन सोचों से बाहर आई और फोन देखा तो उसमें समीर की कॉल आ रही थी। टाइम देखा तो शाम के 6:15 हो रहे थे। मैं अपनी सोचों में इतनी डूब गई थी कि मुझे पता ही नहीं चला कब शाम हो गई। मैंने कॉल अटेंड की तो उधर से समीर की आवाज आई।

समीर: हेलो।

मैं: हाई।

समीर: कैसी हो?

मैं: ठीक हूँ। आप बताओ आप कैसे हो?

समीर: मैं भी ठीक हूँ। और क्या कर रही हो?

मैं: कुछ नहीं। अंकल आए हुए थे। चाय पी रही थी।

समीर: ओके।

मैं: आप कहाँ तक पहुँच गए?

समीर: भोपाल स्टेशन पर रुकी है ट्रेन।

मैं: ठीक है।

फिर हमने थोड़ी देर बात करके फोन डिस्कनेक्ट कर दिया और डिनर की तैयारी करने लगी। रात के 9 बज चुके थे। मैं सब काम खत्म करके नाइट सूट पहनकर अपने रूम में बेड पर लेटी हुई मोबाइल चला रही थी। तभी एक अननोन नंबर से मेरे फोन पर एक लिंक आया। मैंने वो लिंक ओपन किया तो उसमें एक लिंक ओपन हुआ। मैं उस वेबसाइट पर पढ़ने लगी तो उसमें सेक्स स्टोरी थी। मैंने सोचा चलो देखती हूँ इसमें कैसी-कैसी स्टोरी है। फिर मेरी नजर एक स्टोरी पर पड़ी जिसका नाम था । मैंने वो स्टोरी पढ़ना स्टार्ट की। वो स्टोरी एक हाउसवाइफ की थी जो अपने हस्बैंड से सैटिस्फाइड नहीं थी तो वो हाउसवाइफ एक अंकल को सेड्यूस करती है और उसके साथ सेक्स करके सैटिस्फाइड होती है।

मैं उस स्टोरी को पढ़कर बहुत गरम हो गई थी। मैं ये भी भूल गई थी कि ये लिंक मुझे किसने भेजा है और क्यों। मैं अपनी आँखें बंद करके अपनी चूत पे हाथ फेरने लगी थी।

और उस स्टोरी को इमेजिनेशन करने लगी थी। कैसे उस वाइफ ने उस अंकल को सेड्यूस किया और अंकल के साथ सेक्स किया। उस स्टोरी में अंकल की उम्र 55 और लंड का साइज 8 इंच लंबा और 2 इंच मोटा बताया गया था।

मुझे ये पढ़कर उस पॉर्न फिल्म में जो मेरे हस्बैंड ने मुझे दिखाई थी उस काले आदमी का लंड याद आ गया।

मैं अपनी आँखें बंद करके ये इमेजिनेशन कर ही रही थी कि मुझे उस स्टोरी में जो अंकल थे उनकी जगह मुझे इन अंकल का चेहरा नजर आने लगा जो हमारे सामने वाले फ्लैट में रहते हैं और उस वाइफ की जगह खुद को इमेजिन करने लगी थी।

मैं ये इमेजिनेशन करके और भी ज्यादा गरम हो गई।

फिर मैंने अपना नाइट सूट निकाल दिया और पूरी नंगी होकर बेड पर लेटकर अपनी चूत पे हाथ फेरने लगी।

पता नहीं क्यों ये इमेजिनेशन मुझे अच्छी लग रही थी।

फिर मैंने वो इमेजिनेशन करते हुए फिंगरिंग शुरू कर दी।

आज मैं और दिनों के मुकाबले जल्दी झड़ गई।

इतनी जल्दी तो मैं कभी अपने हस्बैंड के साथ सेक्स करते हुए भी नहीं झड़ी थी।

झड़ने के बाद मैं वैसी ही हालत में सो गई।

सुबह मेरी आँख गेट की बेल बजने से खुली।

मैं खुद को यूँ नंगी देखकर हँस पड़ी।

और सोचने लगी कि मैंने रात में क्या किया था।

और अंकल का ख्याल आते ही मेरा रोम-रोम खड़ा हो गया।

गेट की बेल दोबारा फिर बजी। मैं अपने ख्याल से बाहर आई और जल्दी-जल्दी में सिर्फ नाइट सूट ही पहन लिया। अंदर ना ब्रा पहनी और ना दुपट्टा लिया। ऐसे ही गेट खोलने चली गई।

गेट खोला तो सामने अंकल खड़े हुए थे।

अंकल मुझे ऐसी हालत में देखकर बोले: वाउ। यू लुकिंग वेरी हॉट।

मैंने ये सुनके अपनी हालत देखी तो मैं भी शर्मा गई।

फिर मैं अपने रूम की तरफ भागी ऐसे ही गेट खुला छोड़के। रूम में पहुँचकर मैंने अपना दुपट्टा लिया और फिर बाहर हॉल में आई। तब तक अंकल भी हॉल में आकर सोफे बैठ चुके थे।

फिर अंकल मुझे बोले –

अंकल: बिना दुपट्टे के ज्यादा अच्छी लग रही थी।

मैं: वो मैं सो रही थी तो बेल की आवाज सुनके जल्दी-जल्दी में उठके ऐसे ही आ गई।

अंकल: कोई बात नहीं। मैं कौन सा गैर हूँ। मैं भी तो तुम्हारा अपना ही हूँ।

मैं: जी… (शॉक्ड होकर)

अंकल: अरे चाय नहीं पिलाओगी क्या आज?

मैं: दूध वाला नहीं आया अभी तक। दूध नहीं है अभी।

अंकल: अरे इतना तो दूध है तुम्हारे पास।

(मेरे बूब्स की तरफ देखते हुए बोले।)

(अंकल को मेरे बूब्स घूरते हुए देखके मुझे बहुत शर्म आ रही थी।)

मैं: जी नहीं। मेरे पास नहीं है।

अंकल: अरे है तो ध्यान से देखो।

मैं: जी नहीं। यहाँ कुछ नहीं है।

(पता नहीं क्यों मुझे भी अंकल के साथ ऐसी बातें करते हुए मजा सा आ रहा था।)

अंकल: है तुम्हारे पास दूध। मगर शायद कोई अच्छा मर्द तुम्हें… तुम्हारा दूध निकालने वाला नहीं मिला।

(उन्होंने ये इतना ओपनली बोला था कि मुझे समझ ही नहीं आया कि मैं क्या बोलूँ।)

अंकल: निकाला नहीं ना किसी ने तुम्हारा दूध।

(मैं शर्म के मारे फिर कुछ नहीं बोल पाई।)

अंकल: अगर मुझे मौका मिले तो मैं तो सारा दूध निकालके पी जाऊँ।

फिर दोबारा गेट की बेल बजी। अब की बार मैंने अपना दुपट्टा सही करके गेट ओपन किया तो सामने दूध वाला खड़ा था जो दूध देने आया था। मैं वापस किचन में आई और दूध का बर्तन लेकर दूध लेने चली गई। अंकल वहीं हॉल में सोफे पर ही बैठे थे।

मैं दूध लेकर किचन में जाके चाय बनाने लगी।

मुझे नहीं पता अंकल कब किचन के गेट पर आकर खड़े हो गए।

अंकल: क्या कर रही हो?

मैं: चाय बना रही हूँ।

अंकल: किसके दूध की?

मैं: भैंस के दूध की।

अंकल: मुझे तो स्पेशल दूध की चाय पीनी है।

मैं: स्पेशल दूध कहाँ से लाऊँ?

अंकल: लाना नहीं है। निकालना है।

मैं: निकालना है? किसका?

अंकल: हुस्न की मलिका का।

मैं: हुस्न की मलिका कौन है?

चाय बनकर रेडी हो गई थी। मैंने एक कप चाय का अंकल को दिया और एक कप खुद लेकर हॉल में आ गई। सोफे पर बैठकर हम चाय पीने लगे आमने-सामने। पर पता नहीं क्यों मुझसे अंकल के साथ नजर से नजर नहीं मिलाई जा रही थी। पता नहीं ये रात का असर था या कुछ और….

सुबह के 7:15 हो गए थे।

अंकल का ड्यूटी पर जाने का टाइम हो गया था तो वो चाय पीकर चले गए और मैं किचन का काम करने।

किचन का काम खत्म करके मैं नहाने चली गई।

मैंने बाथरूम में जाकर नाइट सूट निकाला और नंगी होकर शावर के नीचे खड़ी होकर नहाने लगी।

नहाने के बाद जब टॉवल लेने वॉश बेसिन के पास आई तो वहाँ मिरर लगा हुआ है। मेरी नजर मिरर से होते हुए अपने बूब्स पर गई। और मैं अपने बूब्स को बहुत ध्यान से देखने लगी। पता नहीं क्यों फिर मुझे अंकल की बातें याद आने लगीं। जब वो कह रहे थे कि दूध निकालने वाला मर्द नहीं मिला।

मेरे हाथ अपने आप ही मेरे बूब्स पर आ गए थे। फिर मैं अपने बूब्स को धीरे-धीरे सहलाने लगी। पता नहीं उस टाइम मुझे क्या हुआ।

मेरे दिमाग में आया कि देखूँ दूध निकालकर निकलता है नहीं जैसा कि अंकल कह रहे थे।

मैं खुद से ही अपने बूब्स जोर-जोर से दबाकर दूध निकालने की कोशिश करने लगी।

लेकिन मेरी कोशिश नाकाम रही। मेरे बूब्स में से जरा सा भी दूध नहीं निकला। फिर मैं सोचने लगी कि अंकल तो कह रहे थे कि अगर उन्हें मौका मिले तो वो दूध निकाल देंगे।

मैं अपनी ही सोच पे हँसने लगी कि मैं ये क्या सोच रही हूँ कि अंकल से अपने बूब्स का दूध निकलवाऊँ???

अगर आपको स्टोरी अच्छी लगी हो प्लीज कमेंट करके जरूर बताना।

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