माँ को चोदने की चाहत – 1
Maa beta ki chudai ki kahani:- मेरा नाम अजय है और मैं यूपी के सुल्तानपुर का रहने वाला हूँ। मेरे परिवार में मेरे पापा, मम्मी और एक छोटा भाई है। पापा एक सरकारी नौकरी में हैं, मैं अभी एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करता हूँ, छोटा भाई इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है और मम्मी एक हाउसवाइफ हैं। मम्मी की उम्र अभी 46 साल है और मैं अभी 26 का हूँ। इस कहानी की शुरुआत आज से 4 साल पहले हुई थी यानी 2022 में जब मम्मी 42 की और मैं 22 का था।
कहते हैं एक माँ को अपना बेटा और एक बेटे को अपनी माँ हमेशा प्यारे लगते हैं, चाहे फिर वो दुनिया को देखने में कैसे भी लगे। और यहाँ तो मेरी मम्मी सच में बहुत सुंदर हैं। 5 फीट 4 इंच का कद, दूध में जैसे थोड़ा सा रूह अफजा डाल दिया हो ऐसा रंग और गजब का फिगर। सबसे अच्छी बात ये है कि उनके बूब्स का साइज 38-डी होने के बाद भी इस उम्र में भी वो एकदम गोल और सुडौल हैं और गाँड का तो कहना ही क्या।
Maa beta ki chudai ki kahani
मुझे याद नहीं मुझमें मम्मी को लेकर ये फीलिंग्स कब से आईं, लेकिन इतना पता है कि जब से होश संभाला है तब से मैं मम्मी की तरफ अट्रैक्टेड हूँ। शायद पहली मुठ्ठी भी मम्मी को सोचके ही मारी थी। मेरी हमेशा से 2 फैंटेसीज थीं। पहली तो मम्मी की चूत मारना और दूसरा मम्मी की चौड़ी गाँड मारना।
मैं इंजीनियरिंग करने के बाद मेरी नौकरी लग गई थी और मैं गुड़गाँव चला गया था, पर वहाँ दूर रहकर भी मम्मी को लेकर मेरा अट्रैक्शन कम नहीं हुआ, बल्कि और बढ़ गया। हमेशा सोचता था कि काश एक बार मम्मी को चोद पाऊँ। लेकिन ये संभव नहीं हो पा रहा था, तो इंटरनेट पर माँ और बेटे की सेक्स स्टोरीज पढ़के या वीडियो देखके ही दिल को तसल्ली दे रहा था।
2020 में हालात बदले और कोविड के वजह से मैं वर्क फ्रॉम होम लेकर घर आ गया। यहाँ मम्मी को हर वक्त अपने सामने देखकर मेरी हालत और खराब होती थी, लेकिन मैं चाहकर भी कुछ कर नहीं सकता था। फिर आया साल 2022, जहाँ से सब बदलना शुरू हुआ।
अप्रैल 2021 में पापा का ट्रांसफर दूसरे शहर में हो चुका था तो वो वहीं पे रूम लेकर रहने लगे थे। वहाँ से उनका घर आना तभी हो पाता था जब 2-3 दिन की छुट्टी एक साथ मिल पाती थी। घर में सिर्फ मैं, मेरा छोटा भाई और मम्मी थे। जुलाई 2022 में भाई का एडमिशन इंजीनियरिंग में हो गया और वो बैंगलोर चला गया। मेरा सीन ये था कि मेरा डब्ल्यूएफएच (वर्क फ्रॉम होम) अभी भी कंटिन्यू था। महीने में 3-4 दिन के लिए गुड़गाँव चला जाता था ऑफिस के लिए और फिर वापस घर।
तो इस तरह से घर में अब हम दो लोग ही बचे थे। ये मेरे लिए एक बेहतरीन मौका था, लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा था कि शुरुआत क्या और कैसे करूँ क्योंकि मैंने उन्हें हमेशा उनके घरेलू अवतार में ही देखा था। घर में रहने वाली, दिन-रात पूजा-पाठ करने वाली मम्मी को उनके बेटे तो क्या, किसी भी दूसरे आदमी के साथ सेक्स के लिए राजी कर पाना लगभग इंपॉसिबल था।
जैसा कि मैं पहले ही बता चुका हूँ कि मैं माँ-बेटा सेक्स स्टोरीज पढ़ा करता था, तो मैंने कहीं एक सेक्स स्टोरी पढ़ी थी जिसमें एक बेटा फेसबुक की मदद से अपनी माँ के साथ सेक्स करता है। मुझे लगा कि शायद इस कहानी से आइडिया लिया जाए तो काम बन सकता है क्योंकि मेरी मम्मी भी फेसबुक और व्हाट्सऐप वगैरह यूज करती थीं। मेरे पास एक एडवांटेज ये थी कि मम्मी बहुत टेक सेवी नहीं हैं। उनको जब मैंने स्मार्टफोन दिया था तो उनकी जीमेल आईडी, यूट्यूब, फेसबुक, व्हाट्सऐप सब अकाउंट मैंने ही बनाके दिए थे और मुझे स्क्रीन लॉक और पासवर्ड सब पता थे। यहाँ तक कि उनके फोन में मैंने अपना फिंगरप्रिंट भी लगा रखा था।
मैंने अपने प्लान पर काम करना शुरू किया मगर मन में ढेरों डाउट्स भी थे और साथ ही ये लालच भी था कि अगर प्लान सफल हो गया तो धरती पर ही जन्नत मिल जाएगी।
तो मैंने सोचा कि एक फेक फेसबुक प्रोफाइल बनाऊँ एक ऐसी लेडी के नाम से जो दिखने में लगभग मम्मी की ही उम्र की हो और उसकी फैमिली भी हमारी फैमिली जैसी हो जिससे कि मम्मी उसके साथ कनेक्ट कर पाएँ। फिर मैंने इंटरनेट पर बहुत सी फोटोज, प्रोफाइल्स सर्च कीं जहाँ से मुझे इस फेक प्रोफाइल को असली जैसा फील कराने के लिए फोटोज मिल जाएँ। बड़ी मेहनत के बाद एक औरत की फोटोज मुझे मिलीं जो लगभग मम्मी की ऐज की थी और उसके कुछ फैमिली फोटोज भी थे। फिर मैंने इन फोटोज को यूज करके एक अच्छी सी फेसबुक प्रोफाइल बनाई और कुछ पोस्ट्स भी अपलोड कर दिए।
अब प्रॉब्लम ये थी कि इस फेक फेसबुक प्रोफाइल को मम्मी से इंट्रोड्यूस कैसे करूँ। मुझे कोई कॉमन लिंक चाहिए था। फिर मुझे ध्यान आया कि मम्मी ने एक सत्संग ग्रुप जॉइन कर रखा था। इस ग्रुप की कई ब्रांचेस हैं मेरे आसपास के जिलों में तो मैंने डिसाइड किया कि इसी का सहारा लिया जाए। ये सोचके मैंने मम्मी को अंजलि नाम की इस फेक फेसबुक आईडी से फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दी।
एक दिन हो गया, दो दिन हो गए… धीरे-धीरे करके 5 दिन बीत गए लेकिन फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट नहीं हुई। मुझे लगा मेरा प्लान तो पहले ही स्टेज में फेल हो गया।
फिर मैंने सोचा कि अगर मम्मी रिक्वेस्ट नहीं एक्सेप्ट कर रही हैं तो मुझे खुद ही उनके फोन से रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर देनी चाहिए। अगले दिन जैसे ही मम्मी नहाने के लिए बाथरूम में गईं, मैंने उनका फोन अनलॉक किया और उनकी फेसबुक आईडी ओपन करके अंजलि की फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर दी और उन्हें जैसे उनके सत्संग ग्रुप में हेलो बोला जाता था वैसा एक मैसेज भेज दिया।
लेकिन इससे भी कुछ खास फायदा नहीं हुआ… 2 दिन तक वो मैसेज सीन ही नहीं हुआ। मुझे फिर निराशा होने लगी। ऐसा लग रहा था कि किस्मत मेरे साथ नहीं है। फिर मैंने एक लास्ट ट्राई करने की सोची कि अगर इससे बात नहीं बनी तो किसी और आइडिया पर ट्राई करेंगे। तो उस दिन जब मम्मी किचन में काम कर रही थीं तो मैंने किसी बहाने से उनका फोन उनसे माँगा…
मम्मी: देख लो, चार्जिंग में लगा है।
तो मैंने रूम में जाकर फोन उठाया और 2 मिनट बाद उनसे कहा:
मैं: देखो मम्मी, इसमें किसी अंजलि का मैसेज आया है। शायद आपके सत्संग ग्रुप की कोई मेंबर है।
मम्मी: ठीक है। फ्री होकर देखती हूँ।
मैं: इतने दिन तक मैसेज क्यों अनसीन छोड़ देती हो?
मम्मी: अरे बेटा! काम के चक्कर में ध्यान नहीं गया होगा। आज फ्री होंगी तो बात कर लूँगी ना।
मम्मी का रोज़ का एक फिक्स शेड्यूल था… सुबह जल्दी उठना फिर झाड़ू-पोछा करके नहाना-धोना और पूजन करना। उसके बाद मम्मी रसोई के कामों में लग जाती थीं तो 1-1:30 बजे ही फ्री होती थीं। फिर दिन में आराम करके शाम समय सत्संग जाती थीं और वहाँ से वापसी करके फिर वही किचन के काम।
तो उस दिन जब मम्मी 1 बजे के आसपास फ्री हुईं तो उन्होंने मैसेंजर खोला और अंजलि को जवाब दिया। उस समय मैं अपने रूम में बैठा था और ऑफिस का काम होल्ड पर रखकर बड़ी बेसब्री से मम्मी के मैसेज का इंतजार कर रहा था कि कब वो मेरी बनाई फेक आईडी पर मैसेज करेंगी। अचानक से मेरे लैपटॉप की स्क्रीन पर चैट विंडो में मम्मी का मैसेज फ्लैश हुआ।
मम्मी: राधे राधे अंजलि जी!
अंजलि: राधे राधे सारिका जी! कैसी हैं आप? (मम्मी का नाम सारिका है)
मम्मी: जी मैं ठीक हूँ। माफ कीजिए, मैंने आपको पहचाना नहीं।
अंजलि: जी मैं हरिओम सत्संग ग्रुप से जुड़ी हूँ। आपकी प्रोफाइल देखी तो लगा कि शायद आप भी उसी से जुड़ी हैं। तभी आपको मैसेज किया।
मम्मी: मगर मैंने कभी आपको सत्संग में देखा नहीं।
अंजलि: मैं अमेठी (मेरे पड़ोस का जिला) से हूँ और यहाँ के ग्रुप में जुड़ी हूँ।
इस तरह से दोनों में बातचीत की शुरुआत हो गई। शुरू में तो मैं ही उनसे ज्यादा से ज्यादा सवाल पूछता था लेकिन फिर धीरे-धीरे वो भी अपनी तरफ से बातें करने लगीं। बातों-बातों में मैंने उनसे उनके परिवार के बारे में पूछा और उन्होंने भी मेरी फैमिली के बारे में पूछा तो मैंने कहा कि मेरी फैमिली में मेरे पति, एक बेटा और एक बेटी है। मैंने उन्हें बताया कि मेरे यानी कि अंजलि के पति एक एमएनसी में थे और काम के सिलसिले में अक्सर बाहर ही रहते थे और बेटी की शादी हो चुकी थी। घर में अक्सर सिर्फ मैं और मेरा बेटा ही रहते थे।
खैर इस तरह धीरे-धीरे बातें करते-करते 10-12 दिन हो गए अभी। अब हम लोगों की बातें परिवार और पर्सनल लाइफ से जुड़ने लगी थीं। कभी-कभार हँसी-मजाक और डबल मीनिंग बातें भी हो जाती थीं। शुरुआत में तो मैं ही अपनी तरफ से ऐसी बातें करता था लेकिन कुछ दिनों के बाद मम्मी भी कोई नॉटी बात बोल देती थीं। कई बार मैं अपनी तरफ से मैसेज नहीं करता तो मम्मी का ही मैसेज आ जाता। इससे मुझे आइडिया लग गया था कि अब मम्मी की अंजलि से अच्छी दोस्ती हो गई है और अब मेरा मन था कि बातों को दूसरी तरफ ले जाया जाए। क्योंकि सास-नंद की बातें करने के लिए तो मैंने आईडी नहीं बनवाई थी।
लगभग 15 दिन बाद मैंने तय किया कि अब प्लान के अगले स्टेप पर काम किया जाए। तो उस दिन की चैट में मैंने कुछ देर इधर-उधर की बातें करने के बाद कहा –
अंजलि: सारिका यार एक बात बताओ।
मम्मी: क्या अंजू? (मम्मी भी मुझे अंजू बुलाने लगी थीं)
अंजलि: तुम्हारे पति इतने दिनों तक बाहर रहते हैं…. कैसे मैनेज करती हो?
मम्मी: मैनेज करने जैसा क्या है…. मेरा बेटा है वो ध्यान रखा है मेरा भी और घर का भी। सामान वगैरह जो भी लाना होता है वो उसी से मँगवा लेती हूँ।
अंजलि: अरे नहीं यार मैं वो नहीं कह रही। मैं दूसरे वाले मैनेज की बात कर रही हूँ?
मम्मी: ओहो :डी
अंजलि: हाँ।
मम्मी: पति तो तुम्हारे भी बाहर रहते हैं… ये सवाल तो मैं भी तुमसे पूछ सकती हूँ।
अंजलि: नहीं सवाल पहले मैंने किया है… तो पहले आप बताओ।
मम्मी: अच्छा।
अंजलि: हाँ।
मम्मी: यार सच कहूँ तो मैनेज नहीं हो पा रहा है… बहुत मन करता है।
अंजलि: हाँ मुझे लगा ही था।
मम्मी: अच्छा! तुम्हें कैसे लगा था?
अंजलि: यार मैं भी एक औरत हूँ तो औरत के मन की बात और शरीर की डिमांड तो समझ ही सकती हूँ।
मम्मी: हाँ यार।
अंजलि: और तुम इतनी सुंदर और सेक्सी भी हो तो जाहिर ही है।
मम्मी: अच्छा जी?
अंजलि: तो बताया नहीं आपने।
मम्मी: क्या?
अंजलि: यही कि कैसे मैनेज करती हो।
मम्मी: बताया तो कि नहीं मैनेज हो पा रहा है। यही सोचके सत्संग जॉइन किया था कि माइंड कुछ डायवर्ट हो लेकिन कोई फायदा नहीं हो रहा है। एक तो इनकी उम्र भी हो रही है तो पहले जैसी बात नहीं रही और ऊपर से आते भी बहुत कम हैं घर पे।
अंजलि: अच्छा।
मम्मी: हाँ।
अंजलि: तो कोई बीएफ बना लो या कोई पुराना लवर हो कॉलेज टाइम का।
मम्मी: कॉलेज में ये सब कर पाने का टाइम ही नहीं मिला.. फर्स्ट ईयर में ही थी कि इनसे शादी हो गई… ग्रेजुएशन भी फिर यहीं से कंप्लीट किया। और अब इस उम्र में कहाँ बीएफ बना लूँ। किसी को पता चल गया तो बदनामी हो जाएगी।
अंजलि: हाँ यार ये तो सही कहा तुमने।
मम्मी: अच्छा अब तुम बताओ।
अंजलि: क्या?
मम्मी: यही कि कैसे मैनेज करती हो तुम? तुम्हारे भी तो सेम प्रॉब्लम है।
अब ये वो टाइम था जहाँ से आर या पार का फैसला होना था। अब मुझे मम्मी को आइडिया देना था कि वो अपने बेटे के साथ सेक्स करें और ये सोचके मेरी धड़कनें बहुत बढ़ी हुई थीं। क्योंकि किसी के लिए भी ये जानना बहुत बड़ी बात होती तो मैंने तय किया कि एकदम से नहीं बताऊँगा। इसलिए मैंने कुछ ऐसे रिप्लाई किया।
अंजलि: नहीं यार मैं नहीं बता सकती।
मम्मी: क्यों?
अंजलि: नहीं यार थोड़ा अकवर्ड होगा तुम्हारे लिए… पता नहीं तुम्हें कैसा लगे सुनकर। फिर तुम जज करोगी।
मम्मी: अरे ऐसा भी क्या है… किसी पड़ोसी या पुराने आशिक को अपने हुस्न के जाल में फँसा लिया होगा :डी शर्माओ नहीं… बताओ तो।
अब आगे टाइप करने की मेरी हिम्मत नहीं पड़ रही थी… धड़कनें बेकाबू हो रही थीं और मुँह सूखने लगा था तो मैं झट से ऑफलाइन हो गया।
ऑफलाइन होने के बाद भी मुझे घबराहट लग रही थी कि अगर मैंने ये बोला तो क्या होगा। ये कुछ-कुछ ब्रेक्स जैसा ही था जैसे जब आप किसी लड़की को प्रपोज करने का मन बना लेते हो लेकिन करने से पहले डर लगने लगता है। काफी देर सोच-विचार करने के बाद मैंने डिसाइड किया कि ये करना तो है ही… बरसों की ख्वाहिश पूरी करनी है तो ये करना ही होगा लेकिन खुद के डर को कंट्रोल करने के लिए मैंने सोचा कि कल बताऊँगा अब। फिर अगले दिन मैंने मम्मी को मैसेज नहीं किया तो मम्मी का ही मैसेज आया –
मम्मी: यार अंजू ये क्या बात हुई। तुमने मुझसे तो पूछ लिया लेकिन मुझे अपनी बात नहीं बताई।
अंजलि: रहने दो यार… मुझे बताते संकोच हो रहा है।
मम्मी: अरे हम दोनों तो दोस्त हो गए हैं तो इसमें कैसा संकोच।
अंजलि: आप जज तो नहीं करोगी।
मम्मी: नहीं यार दोस्ती में ये सब थोड़ी होता है।
अंजलि: पहले प्रॉमिस करो जज नहीं करोगी।
मम्मी: अच्छा बाबा ठीक है… प्रॉमिस।
अंजलि: मैं अपने बेटे की हेल्प से मैनेज करती हूँ।
मम्मी: क्या मतलब? उससे कैसे?
अंजलि: यार मैं अपने बेटे के साथ ही रिलेशनशिप में हूँ…… सेक्सुअली।
मम्मी: हे भगवान! ये क्या बोल रही हो यार अंजू।
अंजलि: देखो तुमने प्रॉमिस किया था कि जज नहीं करोगी।
मम्मी: मैं जज नहीं कर रही लेकिन ये क्या कह रही हो…. अपने बेटे के साथ ही सेक्स किया तुमने?
अंजलि: सिर्फ किया नहीं… अभी भी करती हूँ।
मम्मी: हे भगवान! कितनी अजीब बात कह रही हो… मतलब अभी भी तुम बेटे के साथ..?
अंजलि: हाँ।
मम्मी: मुझे यकीन नहीं हो रहा।
इसी पल के लिए मैंने एक-दो-तीन फोटो पहले से फोटोशॉप करके रखी हुई थी जिसमें वो प्रोफाइल वाली लेडी की फोटो के साथ एक लड़के की फोटो थी और वो दोनों किस कर रहे थे। देखने से ऐसा लग रहा था जैसे अंजलि ने खुद ही सेल्फी ली हो।
अंजलि: रुकिए मैं आपको फोटो भेजती हूँ।
और मैंने वो फोटो उन्हें भेज दी।
मम्मी: यार ये तो सच में तुम अपने बेटे के साथ किस कर रही हो।
अंजलि: मैं झूठ क्यों बोलूँगी तुमसे… और वो भी ऐसा। मैं सच में अपने बेटे के साथ सेक्सुअल रिलेशनशिप में हूँ।
मम्मी: यार मुझे ये जानके बहुत अजीब लग रहा है।
अंजलि: आपने प्रॉमिस किया था कि जज नहीं करोगी।
मम्मी: यार जज नहीं कर रही लेकिन ये तो बहुत बड़ी बात है।
मेरे लिए अभी तक प्लस पॉइंट यही था कि मम्मी गुस्सा नहीं हुई थीं और बात कर रही थीं अभी तक। फिर उन्होंने पूछा –
मम्मी: कब से कर रही हो तुम अपने बेटे के साथ?
अंजलि: यही कोई 3-4 साल हो गए।
मम्मी: और शुरू कैसे हुआ था ये सब?
अंजलि: क्या बताऊँ… इसके पापा तो घर पे रहते नहीं थे और बेटी भी अपनी ससुराल में रहती है तो घर में हम माँ-बेटा ही रहते थे। तो बाहर के सब काम मैनेज करना, घर का राशन वगैरह लाना सब बेटा ही करता था… घर के कामों में भी मेरी हेल्प कर देता था। हम लोग काफी टाइम साथ ही स्पेंड करते थे तो एक-दूसरे से बहुत कम्फर्टेबल भी हो गए थे। कभी-कभी आकर प्यार से मुझे हग या किस भी कर लेता था वो। इस तरह से हम दोनों बहुत करीब आ गए थे। एक-दूसरे का टच करना धीरे-धीरे अच्छा लगने लगा था। फिर एक दिन हम लोग साथ में बैठे मूवी देख रहे थे तो उसमें एक सेक्सी सीन आया तो मैंने बेटे का तना लंड देखा और मेरा मन डोल गया… बहुत दिनों से मैंने कुछ किया भी नहीं था। उस दिन फिर बेटे को सोते टाइम गुड नाइट किस दी… और उसके बाद सब अपने आप होता चला गया। (ये सब कहानी भी मैंने किसी सेक्स स्टोरी से ही बनाई थी)
मम्मी: हे भगवान! फिर तुम्हें गिल्टी नहीं फील हुआ?
अंजलि: यार सच कहूँ तो जब अगले दिन उठी तब तो फील हुआ कि ये क्या हो गया… उस दिन शुरू में तो हम लोग एक-दूसरे से आँखें चुरा रहे थे लेकिन जैसे-जैसे दिन बीता…. ऐसा लगा कि हम दोनों ही सुबह का गिल्ट भूलने लगे और रात में फिर वही सब हुआ हम दोनों के बीच।
मम्मी: अच्छा।
अंजलि: हाँ.. और फिर तो जैसे मुझे आदत ही हो गई है… जब तक उसके साथ सेक्स न करूँ तो दिन अधूरा सा लगता है। घर का कोई कोना ऐसा नहीं है जहाँ हमने सेक्स न किया हो।
मम्मी: हम्म।
अंजलि: और पता है… ये नए लड़के सेक्स में इतनी नई-नई चीजें करते हैं… इतना मजा आता है कि जैसा इसके बाप के साथ आज तक नहीं आया।
मम्मी: अच्छा… जैसे कि क्या?
अंजलि: अच्छा, आप बताओ आपके पति आपके साथ सेक्स कैसे करते हैं?
मम्मी: कैसे क्या, जैसे किया जाता है वैसे ही करते हैं।
अंजलि: नहीं, मतलब प्रोसेस बताओ… कैसे स्टार्ट करते हैं?
मम्मी: वही… 2-4 किस गालों पे की और फिर कपड़े ऊपर या नीचे खिसकाके हो जाता है।
अंजलि: यानी आपने कभी पूरा नंगे होकर सेक्स नहीं किया?
ये सब बातें मम्मी से कहते हुए मुझे ऐसा फील हो रहा था जैसे मेरी नसों में सनसनी हो रही हो… धड़कन एकदम बढ़ी हुई थी और घबराहट से हाथ काँप रहे थे। फिर मम्मी ने रिप्लाई किया—
मम्मी: नहीं।
अंजलि: आपके हस्बैंड ने कभी आपको नीचे किस किया है या चाटा है?
मम्मी: नीचे कहाँ?
अंजलि: चूत पे।
मम्मी: छी! ऐसे कौन करता है। गंदा होता है वहाँ।
अंजलि: यार तुम्हें पता नहीं तुम क्या मिस कर रही हो। मेरा बेटा तो मुझे वहाँ बहुत अच्छे से किस करता है… लिक करता है… इतना मजा आता है कि क्या बताऊँ।
मम्मी: अच्छा?
अंजलि: हाँ यार। जब वो मेरी चूत में अपनी जीभ डालके चाटता है और फिर चूसता है… एकदम जन्नत जैसा फील होता है।
मम्मी: हूँ…
फिर ऐसे ही कुछ बातों के बाद मम्मी ऑफलाइन हो गई थीं। अभी तक की बातों से मुझे ऐसा लग रहा था कि मम्मी को इंटरेस्ट तो आ रहा है सेक्स की बातें सुनने में, लेकिन वो अभी इस फैक्ट के साथ कम्फर्टेबल नहीं थीं कि कोई माँ अपने बेटे के साथ भी सेक्स कर सकती है। इससे मुझे थोड़ी मायूसी तो हुई, पर अचानक एक नया प्लान मेरे दिमाग में आया। मुझे मम्मी की जीमेल आईडी और उसका पासवर्ड पता था। मैंने उसे अपने लैपटॉप में यूट्यूब पर लॉगिन किया और उनकी आईडी से कई सारे ‘माँ-बेटा सेक्स स्टोरी’ के ऑडियो वाले वीडियो प्ले किए।
मुझे उम्मीद थी कि इससे उनके ऐप में ऐसे वीडियो सजेशन्स में आने लगेंगे। अगर मम्मी ने ऐसे 2-3 वीडियो देख लिए, तो शायद कुछ काम बने। मैंने 2-4 दिन तक यही किया और मैं उनकी हिस्ट्री भी चेक करता जाता था कि क्या उन्होंने ऐसा कोई वीडियो देखा है या नहीं। इस बीच हमारी चैट भी नॉर्मली चलती रही और उस बारे में कुछ दिन बात नहीं हुई।
आगे क्या हुआ पढ़िए अगले पार्ट में।
Next Part ==> माँ को चोदने की चाहत – 2

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