पुरानी हवेली – 1
इस कहानी में जितने भी तंत्र-मंत्र, काला जादू और विकृत सेक्स के बारे में बात की गई है, वो सब काल्पनिक है। वास्तव के साथ उनका कोई कनेक्शन नहीं है। लोग कितने नीचे जा सकते हैं, वही मैंने यहाँ दिखाने की कोशिश की है। इसलिए इस स्टोरी को सिर्फ एक स्टोरी के जैसे ही एंजॉय कीजिए।
डॉक्टर अजय बहुत ही अच्छे डॉक्टर हैं। उनका शहर में बहुत नाम है। वन ऑफ बेस्ट डॉक्टर में से एक हैं। उनको सेवा करके खुशी मिलती है। वो गरीब लोगों का इलाज फ्री में करने में ज्यादा इंटरेस्टेड हैं। और इसी वजह से उनका नाम और ज्यादा चर्चा में रहता है। उनकी बीवी प्रिया, पूरा नाम प्रियंका, वो भी एक बड़े घर से बिलॉन्ग करती हैं। मॉडर्न जमाने की लाइफस्टाइल में बिलीव करती हैं। और जो सबसे बड़ी बात, प्रिया बहुत ही सुंदर हैं। बिल्कुल एक परी की तरह दिखती हैं।
जब शादी के लिए अजय बाबू को लड़कियों की फोटो दिखाई जा रही थीं, तब उनके पापा के फ्रेंड रमेश जी ने प्रिया की तस्वीर उनके माता-पिता को दिखाई। और अजय जी के माता-पिता ने वो फोटो अजय जी को दिखाई थी। डॉक्टर अजय तो उसकी फोटो देखकर ही दीवाना हो गया था। इतनी खूबसूरत लड़की!!! ऐसी लड़की को जो मना करेगा वो पागल ही होगा। और शादी के लिए राजी हो गए थे। आज वो एक खुशनसीब इंसान हैं। उनकी बीवी और 6 साल का बेटा रोहन, यही उनकी जिंदगी है। बहुत खुश थे वो जिंदगी में, पर उनको क्या पता था उनके जिंदगी में किसी का बुरा नजर पड़ने वाला था। हवस का एक ऐसा आग जलने वाला था जो कभी ना बुझे।
उनको एक गाँव का प्रधान डॉक्टर बनके जाने का रिक्वेस्ट आया। और वो खुशी-खुशी राजी हो गए। लेकिन प्रिया बिल्कुल किसी गाँव में नहीं जाना चाहती थीं। वो शहर की लड़की हैं, वो चाहती हैं कि उनका बेटा भी शहर में ही अपनी पढ़ाई करे। अजय बाबू खुद अकेले ही जाना चाहते थे, पर उन्हें अकेले छोड़ने को प्रिया राजी नहीं हुईं। डॉक्टर अजय ने किसी तरह अपनी पत्नी को राजी किया जाने के लिए और ये भी वादा किया कि 2 साल बाद वो फिर शहर चले आएँगे। अगर ये प्रपोजल वो एक्सेप्ट नहीं करते तो उनके फ्यूचर डेवलपमेंट में प्रॉब्लम्स आ सकते हैं।
प्रिया राजी हो गईं। अजय के माँ और पिताजी भी उनके साथ जाना चाहते थे। पर अजय ने नहीं जाने दिया। उनको गाँव का नेचर कैसा लगेगा, वहाँ के लोग कैसे होंगे, ये सब के लिए उनको शहर में ही रुकने को बोला अजय बाबू। और दो दिन बाद वो कांपुर गाँव के लिए निकल पड़े। कांपुर गाँव 6 घंटे का रास्ता है। अगले दिन सुबह वो पहुँच गए गाँव में। उनके स्वागत के लिए गाँव के प्रधान और कुछ खास लोग आए थे।
अजय जी को हार पहनाके स्वागत किया गया। उनको अपने पंचायत में ले जाकर उन लोगों को खाना खिलाया और फिर बहुत सेवा की और डॉ. अजय एक स्पीच भी दिए गाँव के विकास करने के ऊपर। इन सब में दोपहर हो गया। अजय गाँव के प्रधान अनमोल बाबू से बात कर रहे थे।
अजय: बहुत अच्छा गाँव है आपका। मैं कल से ही काम शुरू कर दूँगा। अरे हाँ… हम तीनों कहाँ रहने वाले हैं? एक्चुअली मेरी पत्नी को ऐसी जगह की हैबिट नहीं है।
अनमोल: अरे बिल्कुल चिंता मत कीजिए। आपके लिए हम गाँव वालों ने एकदम जबरदस्त इंतजाम किया है। इस गाँव की जमींदार जतिंद्रनाथ ठाकुर की हवेली में आप लोग रहेंगे।
अजय: जमींदार जतिंद्रनाथ की हवेली? वो कहाँ है?
अनमोल: बस यहाँ से 10 मिनट का रास्ता है। हमारी गाड़ी आप तीनों को वहाँ छोड़के आएगी। आप बिल्कुल चिंता मत कीजिए। अब उस हवेली में कोई नहीं रहता। बस खाली पड़ी है। आपके लिए ही कल से सफाई-सफाई चाल रही है। आपको कोई भी परेशानी हुई तो यहाँ कांता नाम की एक नौकरानी हमेशा आपकी सेवा में होंगी। और बाकी हम तो हैं ही।
अजय: धन्यवाद… अब हमको जाना चाहिए। मेरा बेटा बहुत थक गया है। छोटा बच्चा है ना। अच्छा… तो चलते हैं। नमस्ते।
अनमोल: जी… जी… नमस्ते।
अजय, प्रिया और रोहन को लेकर गाड़ी में बैठके हवेली के लिए निकल पड़ते हैं।
प्रिया: चलो… कम से कम एक हवेली में तो रहने को मिलेगा।
अजय: अरे… इस गाँव का सबसे बड़ा डॉक्टर हूँ मैं और मुझे ये रिस्पेक्ट नहीं मिलेगा तो किसको मिलेगा? तुम चिंता मत करो। रानी की तरह रहोगी उस हवेली में।
प्रिया: लेकिन इस गाँव का नाम ऐसा अजीब क्यों है? कांपुर…?
अजय: क्या पता… कितने अजीब नाम के गाँव होते हैं। ये भी उनमें से एक है। हमें क्या करना जानके…
रोहन: मम्मी… मुझे बहुत नींद आ रही है। कब जाएँगे नए घर?
प्रिया: हाँ बेटा… अभी बस कुछ ही देर में वहाँ पहुँच जाएँगे।
10 मिनट में वो तीनों वहाँ पहुँच जाते हैं। प्रिया देखती है हवेली काफी पुराना है पर बहुत शानदार है। अजय आगे चला जाता है। पीछे-पीछे प्रिया बेटे का हाथ पकड़के हवेली की सीढ़ियाँ चढ़ने लगती हैं। तभी उसकी जूते (सैंडल) में कुछ प्रॉब्लम होता है तो वो जूता ठीक करने के लिए नीचे झुकती है और उसकी साड़ी का पल्लू खिसक के नीचे गिर जाता है और ब्लाउज के ऊपर से उसके बड़े-बड़े चूचियाँ दिखाई देने लगती हैं।
प्रिया जूता ठीक कर रही थी। और रोहन दौड़ के पापा के पास चला गया था। वहाँ और कोई नहीं था। लेकिन प्रिया को क्या पता था कि दूसरे मंजिल के एक टूटे हुए खिड़की से कोई उसकी खूबसूरती को देख रहा था। उसकी बड़े-बड़े चूचियों को देख रहा था। प्रिया सैंडल ठीक करके खड़ी होती है और वो हवेली देखने लगती है। कितना पुराना और बड़ा हवेली है। उसकी नजर उस टूटे हुए खिड़की पर पड़ती है पर उसे वहाँ कोई भी नजर नहीं आता। प्रिया अपना पल्लू उठाके अंदर चली जाती है।
प्रिया जूता ठीक करके अंदर जाने लगती है तभी उसे लगता है उसके पीछे कोई खड़ा हुआ है। जब वो पीछे मुड़के देखती है तो उसे कोई दिखाई नहीं देता। वो अंदर आ जाती है। अंदर बड़ा सा हॉल रूम है। वहाँ रोहन खेल रहा है। और अजय बाबू सफाई करने वालों से बात कर रहा है। प्रिया रोहन का हाथ पकड़कर उसको लेके पूरा हॉल घूमती रहती है। कितना बड़ा हॉल रूम है। एक बहुत पुराना एंटीक डाइनिंग टेबल है बीच में।
हवेली की दीवारों पे कई तरीके की पोर्ट्रेट टंगी हुई हैं। प्रिया रोहन को लेकर वो तस्वीरें देख रही थी। तभी अचानक एक बुढ़िया सी नौकरानी उसके सामने आती है। अचानक उसको सामने देखके प्रिया थोड़ी डर जाती है। पर बाद में अपने आपको संभाल लेती है। वो औरत हँसते हुए प्रिया को नमस्ते करती हैं।
कांता: नमस्ते मालकिन… मैं कांता हूँ। आप लोगों की सेवा में। मैं यहीं पास में रहती हूँ।
प्रिया: हाँ नमस्ते। तुम कबसे यहाँ काम करती हो कांता?
कांता: मेरी पूरी परिवार इस हवेली का सेवा करता था। लेकिन मुझे मौका नहीं मिला। उससे पहले ही…
प्रिया: उससे पहले क्या कांता?
कांता: छोड़िए मालकिन… ऐसा कुछ नहीं। छोड़िए। आपका बेटा तो बहुत प्यारा है। चलिए मालकिन आपको आपका कमरा दिखा दूँ।
अजय: हाँ प्रिया… तुम इस कांता के साथ ऊपर रूम देखकर आओ। तब तक मैं नीचे सब कुछ देखकर आता हूँ। अरे भाई जरा वहाँ साफ करना… हाँ और आओ जरा वो हटाना…
प्रिया रोहन का हाथ पकड़के कांता के पीछे-पीछे जाने लगी। सीढ़ियों से ऊपर आकर लेफ्ट में एक बड़ा सा कमरा। बाकी के ज्यादातर कमरे ताला बंद हैं। कमरों के उल्टी साइड लंबा सा बरामदा है। जैसे पुराने महलों में हुआ करता था। प्रिया अपने कमरे में आकर देखती है बहुत अच्छा कमरा है। सब कुछ अच्छी तरह सजाया हुआ है। लोग कुछ दिन पहले आकर ही इलेक्ट्रिक और बाकी का सब इंतजाम करके गए हैं। प्रिया बाहर आती है और बाहर एक बड़ा सा तस्वीर लगा हुआ था। प्रिया उस तस्वीर के पास आती है और कांता को पूछती है।
प्रिया: अरे कांता… ये किसकी तस्वीर है?
कांता: जी… जी… ये… ये इस हवेली के जमींदार जतिंद्रनाथ जी के बेटे जितेंद्रनाथ जी की तस्वीर है। यही आखिरी जमींदार थे।
प्रिया देखती है कितना खतरनाक दिखता था ये जितेंद्रनाथ। लंबा हट्टा-कट्टा आदमी पर चेहरे पे शैतानी साफ दिख रही थी। प्रिया उस पोर्ट्रेट को और भी सामने से देखने लगी। जैसे वो पोर्ट्रेट भी उसे ही देख रहा था। प्रिया पीछे घूमके देखती है कांता इधर-उधर देख रहा है। उसकी आँखों में जैसे एक डर था।
प्रिया: अच्छा… लेकिन तुम इतनी घबरा क्यों रही हो। तुम ठीक तो हो ना?
कांता: हाँ…? नहीं… नहीं… कु… कुछ नहीं। मालकिन… मैं चलती हूँ। आपके लिए चाय बनाती हूँ।
कांता जैसे भागते हुए वहाँ से चली जाती है। प्रिया उस तस्वीर को देख रही थी। उसे जमींदार की तस्वीर जैसे आकर्षित कर रहा था। तभी रोहन आकर अपनी माँ को पकड़ लेता है। प्रिया बेटे के साथ अंदर कमरे में चली जाती है। पर वो ये नहीं देख पाती कि जमींदार की तस्वीर में कुछ बदलाव हो गया है। पहले जमींदार के चेहरे में एक शांत भाव था लेकिन अब जैसे होठों पे एक मुस्कान आ चुका था। और आँखों में शैतानी झलक।
(जमींदार जितेंद्रनाथ की वो पोर्ट्रेट। कितना खतरनाक दिखता था)
कुछ देर बाद अजय ऊपर आता है और कमरा चेक करता है। फिर अपने घर से लाया हुआ हर चीज यहाँ रखने में, टीवी इंस्टॉल में, इन सब में ही रात हो जाता है। अब हवेली पूरा खाली था सिर्फ 3 लोग थे। अजय, प्रिया और उनका बेटा रोहन। नीचे कांता।
अजय: यहाँ के लोग भी अजीब हैं। पता नहीं कोई रहने के लिए तैयार क्यों नहीं था। शाम होते ही सब चले गए। सिर्फ नीचे एक कमरे में कांता रहने आई है। वो रहना नहीं चाहती थी पर गाँव के प्रधान ने उसको रहने का आदेश दिया तब जाके राजी हुई वो।
प्रिया: कुछ अजीब सा है यहाँ। मुझे भी कुछ अच्छा नहीं लग रहा। हवेली तो बहुत अच्छी है पर… पता नहीं मुझे अजीब सा महसूस हो रहा है।
अजय: दैट इज नॉर्मल प्रिया। यू आर न्यू हियर। तुमको पहले तो ऐसी जगह पसंद नहीं फिर एक नया घर सब कुछ मिलाके तुम्हें अजीब सा लग रहा है।
प्रिया: हम्मम… लेकिन तुमको क्या? तुम तो कल से बाहर काम पे चले जाओगे। यहाँ मुझको और मेरे बेटे को अकेले रहना होगा।
अजय: अरे… वो कांता भी होगी ना? यहाँ तुम्हें परेशान करने के लिए कोई नहीं आएगा। आस-पास कोई घर-बार नहीं हैं। सो डोंट वरी। छोड़ो ये सब चलो सो जाते हैं।
रात को 2 बज चुके थे।
प्रिया: छोड़ो ना… क्या कर रहे हो। रोहन सो रहा है।
अजय: कल से टाइम नहीं मिलेगा… आओ ना… ओके चलो बाहर चलते हैं।
प्रिया: यहाँ हमारा पहला दिन है। पर… अच्छा ठीक है चलो।
प्रिया और अजय बाहर आ जाते हैं। बाहर एक बड़ा सा सोफा था पुराने जमाने का। अजय प्रिया को वहीं सोफा पे बिठाके अपना कपड़ा उतारके प्रिया के पास बैठके उसको चूमने लगता है। 7 साल हो गए शादी को लेकिन प्रिया जैसे दिन-ब-दिन और खूबसूरत होती जा रही थी। कौन बोलेगा कि इसका 6 साल का बच्चा है। अजय बाबू प्रिया का गाउन को उठाने लगा और एक समय गाउन कमर तक उठा दिया। उधर प्रिया अपने पति के बालों से खेल रही थी। उधर अजय बाबू प्रिया की गर्दन पर चूमने लगते हैं और दोनों सोफे पर सोकर एक-दूसरे के शरीर से खेलते हुए काम में डूब जाते हैं।
(रोहन के मम्मी-पापा एक-दूसरे को चूम रहे हैं)
लेकिन इन सब में वो देख नहीं पाए कि उनके सामने ही जमींदार की तस्वीर था। वो तस्वीर के सामने ही सेक्स कर रहे थे। वो पूरी तरह से एक-दूसरे में खोए हुए थे।
अजय: आआह्ह्ह्ह… स्साह्ह्ह… प्रियंका… आआह्ह्ह्ह… ये लो आब्ब्ब्ब्… आआह्ह्ह्ह
प्रिया: जोर से करो… हाँ… जबसे तुम काम में बिजी हुए हो हमें मौका ही नहीं मिला… कल से फिर बिजी हो जाओगे… प्लीज रुको मत… आआह्ह्ह्ह्ह… उम्मममम… करो मुझे रोहन के पापा… करो… जानू… येस… श्शह्ह्ह आआह्ह्ह्ह…
उनकी चुदाई की पोक… पोक… पोकट… पोकट… पोचट… पिचट… आवाज चारों ओर गूँज रही थी। आज 70 साल बाद इस हवेली में ऐसी चुदाई की आवाज आ रही थी। 70 साल बाद इस हवेली में दो पुरुष और नारी का मिलन की आवाज आ रहा था।
अजय: आआह्ह्ह… आआह्ह्ह… मेरा निकलने वाला है आआह्ह्ह्ह… बेबी आई एम गोन्ना… आआह्ह्ह्ह
प्रिया उठती है और अजय का लंड चूत से निकालके हिलाने लगती है और पूरा काम रस प्रिया के बदन पे गिरने लगता है। प्रिया का पेट और नाभि पे अजय का माल गिरा।
प्रियंका: ये देखो पूरा मेरे ऊपर डाल दिया… चलो अब मुझे नहाना पड़ेगा। तुम जाओ जाके सो जाओ। मैं फ्रेश होकर आती हूँ।
अजय ड्रेस पहनके रोहन के पास जाके सो जाता है। इधर प्रिया बाथरूम में जाती है। कमरे से थोड़ा दूर ऑपोजिट साइड में बाथरूम है। पुराने स्टाइल का बाथरूम है। पर बहुत बड़ा बाथरूम है। प्रिया बाथरूम में घुसके दरवाजा बंद नहीं करती। कौन आएगा यहाँ ये सोचके। ऐसे पुराने दरवाजे कभी भी अटक जाते हैं… ये सब सोचके प्रिया दरवाजा हल्का बंद करके शावर लेने जाती है। शावर चला देती है और फ्रेश होने लगती है।
प्रिया के पेट से पापा का वीर्य साफ करने लगती है। पर उसे क्या पता कि कोई उसके हसीन बदन को देख रहा था। अचानक बाथरूम का दरवाजा अपने आप खुल जाता है। प्रिया घूमके देखती है। प्रिया समझ नहीं पाती पर फिर से दरवाजा बंद कर देती है। और शावर लेने लगती है। उधर रोहन और पापा सो रहे थे लेकिन इधर रोहन की मम्मी की जवानी को कोई देख रहा था। शावर लेने के बाद वो निकल आती है और आकर जैसे ही कमरे के पास आती है उसे जमींदार की तस्वीर दिखती है। प्रिया रुक जाती है उसे तस्वीर में कुछ चेंज नजर आता है। कुछ तो बदल गया है तस्वीर में।
वो पास से देखने लगती है। तभी उसे लगता है कोई उसके पीछे कंधे के पास अपनी साँस छोड़ रहा है। वो मुड़ती है पर उसे कोई नहीं दिखता। वो कमरे में आकर सो जाती है। उधर कांता रात को डर-डर के सो रही थी। कि कोई आ ना जाए। उस हवेली का राज़ उसे पता था। इसलिए डर रही थी। पर उसे क्या पता था कि वो जिससे डर रही थी वो तब उसकी नई हसीन मालकिन पे नजर रख रहा है। आज इतने सालों बाद कोई खूबसूरत औरत इस हवेली में आई थी।
अगले दिन सुबह हुई। डॉक्टर अजय अपने काम से निकल गए। इधर प्रिया सुबह उठ चुकी थी वो अपने बेटे को उठाया और उसको तैयार किया। उसके लिए यहाँ पे जल्द कोई कॉलेज ढूँढा होगा। अभी कोई कॉलेज डिसाइड नहीं हुआ था इसलिए रोहन कुछ दिन घर पे ही रहने वाला था। प्रिया नीचे गई और कांता से खाना बनाने को बोला पर कांता पहले से ही खाना बना चुकी थी। सुबह का नाश्ता करने के बाद प्रिया रोहन का हाथ पकड़कर पूरा हवेली घूमने लगी। वो छत पे गई कितना बड़ा छत था। रोहन खेलने लगा और प्रिया घूमने लगी। तभी कांता वहाँ आई और बोली।
कांता: मेमसाब आपको कोई तकलीफ तो नहीं हुई रात को?
प्रिया: नहीं… सब ठीक था। तुम रहना क्यों नहीं चाहती थीं कल?
कांता: वो… वो… वो… असल में मेरे घर में कुछ पापा हैं। वो बीमार हैं… इसलिए। अगर आप बुरा ना मानो तो रात को मैं घर चला जाऊँ? सुबह आ जाऊँगी।
प्रिया: हम्ममम… ठीक है। पर सुबह जल्दी आ जाना। अब जाओ।
कांता चली जाती है। उधर चिंटू खेल रहा था और इधर उसकी माँ घूम रही थी और नीचे देख रही थी। तभी उसको लगा कि कोई उसके कपड़े को खींच रहा है। उसे लगा रोहन होगा। पर वो घूमके देखती है वहाँ कोई नहीं था। उसे लगता है हवा होगा शायद। फिर वो बेटे को लेकर वापस नीचे आ जाती है और दोपहर को सो जाती है। पर उसे नहीं पता था कि हर वक्त उसपे कोई नजर रखे हुए है। इधर प्रिया सो जाती है और रोहन उठके खेलने निकल जाता है।
बच्चा है थोड़ा शरारती। वो बॉल से खेल रहा था। वो खेलते-खेलते बाहर आ जाता है। तभी अचानक उसका बॉल उछलके तीसरे फ्लोर में चला जाता है। रोहन बॉल के पीछे-पीछे जाता है। रोहन देखता है वो बॉल बहुत दूर एक कमरे के दरवाजे के पास जाके रुक गया है। रोहन बॉल लेने जाता है। जैसे ही वो बॉल उठाता है उसे एक आवाज आती है अंदर कमरे से कोई हँस रहा है। कोई आदमी। वो दौड़ के नीचे आ जाता है। और आकर अपनी माँ को जगाता है और अपनी माँ को सब बात बताता है।
प्रिया पहले उसको डाँटती है अकेले बाहर जाने के लिए। लेकिन जब वो बोला कि कमरे से आवाज आ रही है तो उसे लगता है एक बार चेक करना चाहिए। वो चिंटू को लेकर उस कमरे के पास जाती है पर कमरा ताला लगा हुआ था। वो दरवाजे पे कान लगाकर सुनती है पर कोई आवाज नहीं थी।
प्रिया: क्या बेटा? कोई आवाज नहीं हो रही है। तुमने कुछ गलत सुना होगा।
रोहन: नहीं माँ!!… मैंने सुना कोई अंदर हँस रहा था। मैं डर गया था (बच्चा है इसलिए ठीक से बोल नहीं पाता)
प्रिया को क्यूरियोसिटी फील होती है और वो वहाँ पड़ा हुआ एक बड़ा सा पत्थर उठा लेती है। पुरानी हवेली थी। ऊपर से छत गिरके पत्थर-ईंटें नीचे पड़ी हुई थीं। प्रिया उनमें से ही एक बड़ा सा पत्थर उठाके उस ताले पे मारने लगती है। पुराना ताला था इसलिए थोड़ी ही देर में टूट गया। प्रिया पहले अंदर जाती है। कमरा पूरा मकड़ी के जाल से भरा पड़ा है। वो पुराना कपड़ा उठाके वो सब हटाके अंदर जाती है। पीछे-पीछे उसका बेटा। वो खिड़की खोल देती है। पर अंदर कोई इंसान तो क्या कोई कबूतर भी नहीं था। वो बेटे को बोलती है कि कोई नहीं है। उसने कुछ और आवाज सुना होगा। वो इधर-उधर घूम कर देखने लगती है। बहुत पुरानी चीजें थीं उस कमरे में।
वो सब देखने लगती है तभी रोहन को नीचे एक चीज दिखता है जो कपड़े से बंधा हुआ था। वो अपनी माँ को वो बताता है। प्रिया वो चीज उठा लेती है। वो उस कपड़े को हटाकर देखती है एक मिरर जो कि बहुत ही सुंदर था। वो उस मिरर में से वो लाल कपड़ा और धागा हटाके फेंक देती है।
प्रिया: वाह… इतना खूबसूरत आईना यहाँ इस बंद कमरे में क्या कर रहा है? इसको तो हमारे कमरे में होना चाहिए। ये आईना हमारे कमरे का शोभा बढ़ाएगा। थैंक यू रोहन बेटा। तुम्हारे वजह से माँ को एक नया आईना मिल गया।
चलो यहाँ से चलते हैं। इस आईने को लेकर।
रोहन: चलो माँ… पापा बहुत खुश होंगे इस मिरर को देखकर। है ना? माँ… पापा मेरे लिए रात को चॉकलेट लाएँगे ना?
प्रिया: हाँ बेटा लाएँगे। चलो इस गंदी जगह से।
पर रोहन को क्या पता था कि उसने जो ढूँढ निकाला वो एक दिन उसकी मम्मी का क्या हाल करने वाला था। उसकी माँ के साथ अब कुछ ऐसा होने वाला था जो बयान नहीं किया जा सकता। उस बच्चे ने अपने ही हाथों से अपनी माँ को ऐसी चीज दे दी जिसके वजह से उसकी माँ बदलने वाली थी।
अब आगे क्या होगा? जानने के लिए अगले अपडेट तक वेट करें।
स्टोरी अच्छी लग रही हो तो कमेंट्स करना और रेप्स देना। थैंक यू।

Hi bhabhi 9654060616