जिस चूत से निकला उसी मे लंड डाल दिया

Maa beta ki kamuk chudai hindi sex story:- मेरा नाम रमन है। मैं परिवार में चुदाई की कहानियाँ बहुत पसंद करता हूँ। इसलिए मैंने सोचा कि मैं भी अपनी रियल स्टोरी यहाँ पर लिखूँ। यह स्टोरी मेरे और मेरी हॉट मॉम रेखा अग्रवाल के बीच की है। तो चलिए स्टोरी स्टार्ट करते हैं।

मैं फ़ौज में कैप्टन बनकर पहली छुट्टी पर घर आ रहा था। फ़ौज में तीन साल से घर की शक्ल नहीं देखी थी। मुझे फ़ौज की नौकरी का शौक़ था। मेरे पिता जी का देहांत हो गया। मेरे पिता मनोहर लाल को कैंसर था जो उनकी मौत का कारण बना। उनकी उम्र कोई 60 साल की थी। घर में उनके अलावा मेरी प्यारी माँ रेखा है। माँ की उम्र 42 की है। मैं खुद रमन हूँ, उम्र 23 साल, क़द 6 फीट, रंग गोरा, बाल घुँघराले, छाती चौड़ी। रेखा 5 फीट 5 इंच की साँवले रंग की औरत है। बिल्कुल स्लिम, उसकी चूची ना मोटी है ना छोटी है, मीडियम साइज़ की है और कुल्हे बहुत सेक्सी हैं। अपनी माँ के बारे में ये सब नोट किया था मैंने क्योंकि मुझे माँ बहुत पसंद थी। उसके मोटे होंठ और गोल चेहरा मेरे मन में बसा हुआ था।

Maa beta ki kamuk chudai hindi sex story

मैं शुरू से ही माँ की तरफ़ आकर्षित रहा हूँ और माँ मेरी तरफ़। मेरी माँ मुझे बहुत प्यार करती है और मैं माँ को। अकेले में मैं उसको रेखा कहकर पुकार लेता हूँ। हम दोनों दोस्त अधिक और माँ-बेटा कम लगते हैं। रेखा कभी-कभी कॉलेज की लड़कियों की तरह ड्रेस अप होती है और हम दोनों फ़िल्म देखने, रेस्टोरेंट में, पार्क में घूमने चले जाते हैं। कई बार माँ मेरी गर्लफ्रेंड की तरह मेरे साथ नाटक करती है जिससे लोगों को जलन होती है। जब मेरा फ़ौज में जाने का आख़िरी दिन था तो माँ और मैं एक रेस्टोरेंट में खाना खाने गए तो एक कपल जो वहाँ पहले ही बैठा था हमसे दोस्ती करने लगा। वो लोग अच्छे लगे तो हम उनके साथ बैठ गए। उनका नाम विनय और विमला था। विनय कोई 25 साल का और विमला कोई 21 साल की थी। मैं और विनय बीयर पी रहे थे तो रेखा बोली—

माँ: अरे रमन तुम बीयर पी रहे हो और हम औरतों को कॉफ़ी पिला रहे हो।

तो विनय बोला—

विनय: भाभी, आप बीयर पीओगी क्या? विमला ने तो कभी नहीं पी।

विनय की बात सुनकर माँ का चेहरा लाल हो गया लेकिन वो कुछ नहीं बोली। फिर उसने कहा—

माँ: विनय भाई साहब, कभी तो पहली बारी आएगी ना! क्यों न आज ही शुरू कर दी जाए।

विनय मेरे कान में बोला—

विनय: भाई तेरी पत्नी तो बहुत अच्छी है जो खुद बीयर पीने को कह रही है। चलो इसी बहाने विमला भी शायद खुल जाए मेरे साथ।

उसकी बात सुनके मेरे कान भी लाल हो गए। विनय रेखा और मुझे पत्नी और पति समझ रहा था! ख़ैर हमने बीयर ऑर्डर कर दी माँ और विमला के लिए और धीरे-धीरे वो अपना ग्लास पी गई। जैसे-जैसे वो बीयर पी रही थी, उनके चेहरे की चमक बढ़ रही थी। हम जब घर वापस आए तो माँ के क़दम बहक रहे थे। मैंने माँ की कमर पर हाथ डाला हुआ था और सँभालकर उसको उसके रूम में लिटा दिया। जब मैं जाने लगा तो रेखा ने मेरे गले में बाँहें डालते हुए कहा—

माँ: रमन यार आज यहीं सो जाओ। तेरे पापा तो नींद की मेडिसिन लेकर उठने से रहे। ये तो बस मुर्दा पड़े रहते हैं। मेरे लिए तो हों या ना, कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, हूह्!!

कहते ही माँ ने मेरे होंठों का चुंबन ले लिया और मैं देखता ही रह गया। मुझे एक झटका सा लगा और मेरा लंड खड़ा हो गया। अपनी माँ के चुंबन से मेरा लंड खड़ा होना मेरे लिए शर्म की बात थी। मैं जल्दी से बाहर निकल गया और साथ वाले रूम में चला गया जो कि मेरा था।

दोनों कमरों के बीच एक बाथरूम था जिसका डोर दोनों रूम में खुलता था। मैंने अपने कपड़े उतारे और पजामा पहनकर सोने की कोशिश करने लगा। थोड़ी देर में बाथरूम की बत्ती जली। मेरी आँख खुली तो सोचा रेखा बाथरूम यूज़ कर रही होगी। तभी मन में रेखा को नंगा देखने की इच्छा जाग उठी। मैं चुपचाप बाथरूम के डोर की तरफ़ बढ़ा। मेरे रूम का डोर थोड़ा खुला था। अंदर का नज़ारा देखकर मेरे होश उड़ गए। रेखा सफ़ेद सिल्क की पैंटी और ब्रा में खड़ी थी और मिरर में देख रही थी। उसकी पीठ मेरी तरफ़ थी। भगवान की क़सम, ऐसी सेक्सी औरत कभी न देखी थी आज तक। उसके साँवले चूतर सफ़ेद सिल्क की पैंटी में गज़ब ढा रहे थे। माँ की काली बड़ी-बड़ी आँखें आधी बंद और आधी खुली थीं। उसके चूतर का उभार देखकर मैं पागल हो उठा। उसने अपना एक हाथ आगे से अपनी पैंटी में घुसा लिया और अपनी चूत को रगड़ने लगी और एक हाथ से अपनी मस्त चूची मसलने लगी—

माँ: ओह्ह्ह्ह्ह मादरचोद मनोहर क्यों सो गया है तू….. अपनी रेखा को चोद बहनचोद साले मनोहर…. इस जलती चूत को कैसे ठंडी करूँ मादरचोद…. तुझे क्या पता क्या होती है चूत की जलन… अपनी रेखा को चोद मादरचोद और अगर नहीं चोद सकते तो मुझे बता क्या करूँ!!!!

मेरी आँखों के सामने मेरी माँ का हाथ तेज़ी से उसकी चूत रगड़ रहा था और वो उँगली से अपनी प्यासी चूत को चोद रही थी। उसकी पैंटी नीचे सरक गई और उसके मस्त चूतर मुझे साफ़ दिखाई देने लगे।

माँ: आाह्ह्ह्ह्ह्ह…. उउउउईईई…. ओओओह्ह्ह्ह.. मर गईईईई… उउउफ़्फ़्फ़… हाय… हाय…. मेरी माँआआआआ.. आआआआ!!!

रेखा की सिसकारी मेरे कानों में पड़ रही थी। उसकी ब्रा भी अब जिस्म से अलग होकर ज़मीन पर जा गिरी।

माँ: ओह्ह्ह्ह चोद मुझे बहनचोद देख क्या रहा है, मैं झड़ईईईईई, ओओह मादरचोद!

मेरा हाथ अब मेरे लंड पर कस गया और मैं मुठ मारने लगा। एक पल में रेखा अपनी पैंटी और ब्रा वहीं छोड़कर अपने पलंग पर सोने चली गई। मैं धीरे से बाथरूम में दाख़िल हुआ। माँ की पैंटी उठाई और उसको सूँघने लगा। माँ की मस्त चूत की सुगंध मेरे नथुनों में पड़ी तो नशा सा चढ़ गया। फिर मैंने माँ की चूत से लगने वाली पैंटी पर ज़ुबान फेरी। मुझे ऐसा लगा जैसे मैं माँ की चूत पर ज़ुबान फेर रहा हूँ। रेखा की चूत की ख़ुशबू और स्वाद में खोया हुआ मैं मुठ मारने लगा और जब मैं झड़ा तो मेरे ख़ुशी का कोई अंत नहीं था। मेरे लंड का रस जब गिरने लगा तो मैंने माँ की पैंटी लंड पर रख दी और सारा रस उसी में छोड़ दिया। मुझे लगा कि मेरे लंड रस की नदी कभी नहीं रुकेगी। ख़ैर मैं झड़के सो गया और दूसरे दिन मैं अपनी नौकरी पर चला गया। कुछ दिनों बाद ख़बर मिली कि पिताजी का देहांत हो गया।

अब मैं तीन साल बाद घर लौटा हूँ। स्टेशन से टैक्सी लेकर मैं घर पहुँचा। जैसे-जैसे मैं घर के नज़दीक पहुँच रहा था, कई ख़याल मेरे दिमाग़ में आ रहे थे। “माँ कैसी होगी? कैसी दिख रही होगी? क्या अब भी मुझे वैसे ही प्यार से मिलेगी? पिताजी के बाद माँ किसी को चाहने तो नहीं लगी होगी? कोई उसको चोद रहा होगा? क्या वो अभी भी उतनी सेक्सी और सुंदर होगी?” मुझे यक़ीन था कि रेखा मुझे “बेटा” कहकर गले से लगा लेगी।

मैंने डोर बेल बजाई तो रेखा ने दरवाज़ा खोला। मेरा मन धक-धक कर रहा था। माँ सफ़ेद साड़ी में थी, बाल बिखरे हुए, आँखें रोकर सूजी हुई। मुझे देखा तो फिर रो पड़ी—

माँ: बेटा, रमन, तू आ गया? तेरी माँ बिल्कुल अकेली रह गई इस दुनिया में, बेटा। मेरी तो आँखें तरस गईं तुझे देखने के लिए बेटा।

कहते ही वो मुझसे लिपट गई। माँ को रोता देखकर मैं बहुत दुखी हुआ। उसको बाँहों में भरके मैंने बोला—

मै: माँ अब मैं आ गया हूँ। तू अकेली नहीं है। रमन तेरे साथ है। अब तुझे रोने की कोई ज़रूरत नहीं है। तेरा बेटा सब ठीक कर देगा। तुझे दुनिया की हर ख़ुशी दूँगा जो किसी औरत को मिल सकती है।

मैं रेखा से लिपट रहा था, उसकी आँखों से बहने वाले आँसू अपनी ज़ुबान से चूम-चूमकर पी रहा था और उसके बालों में उँगली फेर रहा था।

माँ: बेटा अब मुझे छोड़कर मत जाना, वरना मैं मर जाऊँगी रमन।

रेखा मुझसे पागलों की तरह लिपटने लगी।

कुछ देर बाद मैंने माँ को शांत करके बिठा दिया और बोला—

मै: रेखा, अब सुनो। ये सफ़ेद साड़ी किस लिए पहनी है? उतार दो इसको। देखो मैं कितनी सुंदर ड्रेस लेकर आया हूँ तेरे लिए। मैं अपनी माँ को उसी तरह सुंदर देखना चाहता हूँ जैसे वो पहले थी। मैं तुझे वैसे देखना चाहता हूँ जैसे विनय ने देखकर तुझे मेरी पत्नी समझ लिया था। वही जवान, सुंदर, चुलबुली और सेक्सी रेखा। अब मैं तुझे जीवन का आनंद उठाकर जीवन जीना देखना चाहता हूँ। आज हम बाहर खाना खाएँगे सैर करेंगे और कल मैं तुझे देहरादून ले जाऊँगा जहाँ तुम मेरे साथ रहोगी, सदा के लिए। चलो अब नहाकर तैयार हो जाओ।

रेखा की आँखों में फिर आँसू आ गए—

माँ: बेटा ये नहीं हो सकता। एक विधवा की ज़िंदगी में रंग नहीं होते। ये दुनिया इसकी इजाज़त नहीं देती। समाज हमको इजाज़त नहीं देगा, बेटा।

मै: समाज!! छोड़ो समाज को। समाज सिर्फ़ लोगों को दुख देता है, जीवन नहीं। मैं तुझे जीना सिखाऊँगा। ऐसे समाज को मैं ठोकर मारता हूँ जो अपनी माँ को सुख देने से रोकता हो।

मैंने रेखा को बाँहों में भरके बाथरूम में ले गया और बोला—

मै: आज तुम क्या पहनोगी, मैं तुझे दूँगा, फिर देखना ज़िंदगी कितनी ख़ूबसूरत दिखेगी।

जब माँ नहाने चली गईं तो मैंने माँ के लिए एक कॉटन की हल्की ब्राउन पैंट्स, ग्रीन कलर की लो कट गले वाली टीशर्ट, ब्लैक कलर के लेस वाली पारदर्शी पैंटी और ब्रा निकाली जो मैं माँ के लिए ख़रीदकर लाया था। उसके बाद मैंने एक विदेशी परफ़्यूम की शीशी और बॉडी स्प्रे, हेयर स्प्रे और पाउडर बाथरूम के डोर पर रख दिया।

मै: माँ, तेरे कपड़े और कुछ सामान डोर पर है, ले लेना।

कहके मैं सोफ़े पर बैठ गया और एक बीयर बैग से निकालकर पीने लगा। बाथरूम का डोर खुला और फिर बंद हो गया। शायद माँ नहा चुकी थीं, मैंने सोचा। तभी मेरी कल्पना आज से तीन साल पहले चली गई और माँ का नंगा जिस्म मेरी आँखों के सामने नज़र आने लगा। मेरा लंड फिर से सिर उठाने लगा तो मैंने उसको चपत मार बिठा दिया—

रमन (खुद से): मादरचोद लंड महाराज जी, अभी से फुँकाने की ज़रूरत नहीं है। रात का इंतज़ार करो और फिर देखना क्या है तेरी किस्मत में।

मैं खुद से बोलकर मुस्कुरा पड़ा।

माँ: मैं आ गई रमन। बेटा ये ड्रेस तो लड़कियों वाली है। मुझे अजीब लग रही है। और ये अंडरगारमेंट्स तो बहुत महँगे हैं। ये तुझे अपनी पत्नी के लिए ख़रीदने चाहिए, बेटा। मुझ पर पैसे वेस्ट करने से क्या फ़ायदा?

मैंने जब नज़र उठाई तो होश उड़ गए। रेखा गज़ब की सेक्सी औरत दिख रही थी। तीन साल में उसके वक्ष कुछ अधिक उभर चुके थे और उसकी जाँघें और मांसल हो चुकी थीं। रेखा का हुस्न क़यामत ढा रहा था। मैंने ग्लास टेबल पर रखा और रेखा की तरफ़ बढ़ा और अपने हाथ न रोक सका और अपनी माँ को आलिंगन में लेकर प्यार करने लगा—

मै: तू अभी लड़की ही रेखा। ये सब चीज़ें मैंने अपनी पत्नी के लिए ही ख़रीदी हैं। तुझे ये अंडरगारमेंट्स पसंद आए? बहुत अच्छा। मैं तेरा चेहरा ऐसा ही खिलता हुआ देखना चाहता था।

रेखा के माथे पर बल पड़े और वो सीरियस होकर बोली—

माँ: अपनी पत्नी के लिए? क्या मतलब है तेरा? मैं तेरी माँ हूँ रमन! माँ और पत्नी में फ़र्क़ जानते हो तुम?

रेखा मुझसे अलग होने की कोशिश करते हुए बोली। मुझे लगा कि मैं कुछ ज़्यादा ही तेज़ी से जा रहा हूँ तो मैंने बात को मज़ाक बनाते हुए कहा—

मै: मेरी माँ नाराज़ हो गई? मैं तो मज़ाक कर रहा था। मेरा मतलब है कि पत्नी के लिए और ख़रीद लूँगा। ये सब तो मेरी प्यारी माँ के लिए है जो आज एक पत्नी की तरह सुंदर लग रही है, अब गुस्सा मत हो और चलो बाहर चलते हैं।

मैंने मोटरसाइकिल निकाली और माँ को बिठाकर रेस्टोरेंट में ले गया।

मै: रेखा मुझसे चिपककर ऐसे बैठो कि सभी समझें कि तुम मेरी गर्लफ्रेंड हो। मैं सबको ऐसी सेक्सी गर्लफ्रेंड दिखाकर जलाना चाहता हूँ।

रेखा मुझे सटाकर बैठ गई और बोली—

माँ: फ़ौज ने तुझे बहुत नटखट बना दिया है, जो माँ को गर्लफ्रेंड बना रहा है। ख़ैर घर जाकर ख़बर लूँगी तेरी, गर्लफ्रेंड के बच्चे। मैं तेरे बाप की गर्लफ्रेंड थी बेटा!!

जब हम रेस्टोरेंट में दाख़िल हुए तो सभी हमारी तरफ़ देखने लगे। मैंने जानबूझकर एक हाथ माँ की कमर पर डाल दिया और वो भी नाटक करते हुए मुझे लिपट गई।

मै: डार्लिंग मैं तेरे लिए ड्रिंक लेकर आया।

मेरी प्यारी हसीन रेखा मुस्कुरा पड़ी। मैं दो स्कॉच के पेग सोडा के साथ ले आया और माँ बोली—

माँ: रमन बेटा, बीयर तक तो ठीक था.. ये… नहीं ये नहीं…..

मैंने धीरे से कहा—

मै: रेखा क्या बात है? बेटा नहीं… तुम यहाँ मेरी गर्लफ्रेंड हो, डार्लिंग, घर जाके जो सज़ा देनी हो दे देना… ये स्कॉच है… इसमें नशा नहीं होता।

मैंने झूठ बोलते हुए कहा। माँ के साथ जो सपना मैंने देख रखा था उसकी कामयाबी के लिए उसको शराब पिलाना बहुत ज़रूरी था।

तभी म्यूज़िक बजने लगा और कुछ मर्द और औरतें डांस फ़्लोर पर डांस करने लगीं। मैंने माँ की तरफ़ इशारा किया तो वो उठ खड़ी हुई और हम डांस करने लगे। मैं उसको अपने जिस्म से चिपकाते हुए डांस करने लगा और मेरा लंड फिर उसके पेट से लगकर चुभने लगा। मैं रुक गया और एक नई ड्रिंक ले आया। मेरी माँ की आँखों में खुमारी चढ़ने लगी और वो शरारती हँसी हँसने लगी। एक लड़का हमारे टेबल पर आकर बोला—

लड़का: May I dance with you beautiful lady?

रेखा ने मेरी तरफ़ देखा तो मैंने हाँ में सिर हिला दिया। मेरी माँ नज़ाकत से उठी और उस लड़के का हाथ थामकर डांस फ़्लोर पर चली गई। मैं उसके मस्त चूतर देखता रह गया। जब वो लड़का उसके साथ चिपककर डांस करने लगा तो मेरे दिल में ईर्ष्या का तूफ़ान उमड़ पड़ा। वो लड़का मेरी माँ की कमर पर हाथ डालकर अपनी तरफ़ खींचकर डांस कर रहा था और उसके कान में कुछ बुदबुदा रहा था। उसके शब्द सुनकर रेखा का चेहरा शर्म से लाल हो गया। मैं अपनी सीट से उठा और उस लड़के के पास जाकर रेखा से बोला—

मै: रेखा डार्लिंग, अब घर चलने का टाइम हो गया है। चलें?

मेरी बात सुनकर रेखा ने आराम की साँस ली और लड़के का मुँह लटक गया।

हम दोनों अपनी सीट पर आ गए और खाना ऑर्डर करके लास्ट ड्रिंक पीने लगे। मेरी प्लान के मुताबिक़ माँ को उसकी कैपेसिटी से एक पेग अधिक पिलाने का था। खाना ख़त्म करके हम घर की तरफ़ चल दिए। रास्ते में रेखा मुझसे बहुत चिपककर बैठी हुई थी और उसके स्तन मेरी पीठ में चुभ रहे थे और उसकी गरम साँस मेरी गर्दन से टकरा रही थी। घर पहुँचकर मैंने माँ को अपनी बाँहों में भरकर पापा वाले रूम में ले गया। रेखा मुझसे लिपटने लगी। लेकिन मैंने अपने बैग से एक ब्लैक पारदर्शी नाइटी निकालकर माँ को पकड़ाई और बोला—

मै: रेखा, इसको पहन लो। ये मैं तेरे लिए लाया हूँ। बहुत सुंदर लगोगी इसमें तुम। मैं अभी ब्रश करके आता हूँ।

माँ भी बाथरूम में चेंज करने चली गईं और मैं दूसरे बाथरूम में जाकर ब्रश करने लगा। जब मैं बाहर निकला तो देखा कि माँ मेरी ख़रीदी हुई नाइटी पहने हुई थी और किसी कामदेवी से कम नहीं लग रही थीं। वो पलंग पर बैठी थीं। मैं दो ग्लास व्हिस्की के भर लाया। माँ पीना नहीं चाहती थीं लेकिन मैंने ज़िद की—

मै: रेखा, बस लास्ट पेग, मेरी ख़ातिर। मेरे प्यार की ख़ातिर एक ड्रिंक नहीं पी सकती?

वो मुस्कुरा पड़ी—

माँ: रमन तेरे प्यार की ख़ातिर तो जान हाज़िर है, बेटा। ला मुझे अपने हाथों से पिला, बेटा!

मैं भी माँ की बग़ल में बैठ गया और ग्लास उसके होंठों से लगाकर शराब पिलाने लगा। माँ की आँखों में लाल डोरे उमड़ने लगे। मैं जानबूझकर उसके गालों को स्पर्श करने लगा। रेखा बहुत कामुक औरत लग रही थी। मैंने उसको बाँहों में लेकर उसके गाल चूम लिए और भावुक होकर बोला—

मै: मैंने आज तक आप जैसी सुंदर और सेक्सी औरत नहीं देखी, सच रेखा!!

वो भी शरारती अंदाज़ में मुस्कुराती हुई बोली—

माँ: अपनी माँ को सेक्सी बोलते हुए शर्म नहीं आती, रमन? माँ बस माँ होती है। सेक्सी मैं तेरे बाप के लिए थी।

मैं भी उसी अंदाज़ में बोला—

मै: माँ तुम मेरी माँ होने से पहले एक औरत हो और मैं तेरा बेटा होने से पहले एक मर्द हूँ। सच कहूँ मुझे बहुत ईर्ष्या हुई जब वो लड़का तेरे कान में कुछ कह रहा था। क्या कह रहा था वो बहनचोद तुझे?

मैंने कभी माँ के सामने गाली नहीं बोली थी लेकिन अब मैं नशे में था।

माँ: तुझे ऐसी बातें अपनी पत्नी से करनी चाहिए, माँ से नहीं। अच्छा अब सो जाते हैं।

मैं उठकर जाने लगा तो न जाने क्यों मेरे मुँह से निकल गया—

मै: रेखा याद है जब मैं फ़ौज के लिए जाने वाला था उस रात तुमने मुझे इसी बिस्तर पर सो जाने का निमंत्रण दिया था, जब पापा यहीं सो रहे थे। आज पापा भी नहीं हैं.. क्या वो निमंत्रण आज भी क़ायम है?

मुझे लगा कि माँ अपना फ़ैसला नहीं कर पा रही थीं। लेकिन शराब का एक घूँट भरके बोली—

माँ: बेटा तो कभी भी माँ के साथ सो सकता है, रमन, इसमें निमंत्रण की क्या बात है। आजा बेटा हम दोनों एक ही बिस्तर में सोते हैं। आज बहुत सालों के बाद मेरे साथ बिस्तर में कोई सोएगा और वो भी मेरा बेटा। रमन तुम भी चेंज कर लो और आ जाओ। मैं तेरा इंतज़ार कर रही हूँ।

मैं अपने रूम में गया और एक बरमुडा पहनकर माँ के रूम में दाख़िल हुआ। रेखा अपने बिस्तर में बैठकर मेरा इंतज़ार कर रही थीं। ज़ीरो नंबर का ब्लू लाइट वाला बल्ब जल रहा था। रेखा के बाल खुले थे और उसके कंधों तक पहुँच रहे थे। उसके सीने के उभार ऊपर-नीचे हो रहे थे जब वो साँस लेतीं। मैं जब उसके पास गया तो उसको बाँहों में लेने लगा तो वो बोली—

माँ: बेटा बस अब सो जाते हैं।

मैं उसके सीने पर हाथ रखकर बोला—

मै: माँ गुडनाइट किस नहीं दोगी?

वो कुछ न बोलीं। मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। माँ के होंठ तप रहे थे। मैंने माँ के होंठों के बीच अपनी ज़ुबान धकेल दी और उसके होंठ चूसने लगा। हम दोनों के जिस्म वासना से जल रहे थे। मेरी प्यारी माँ अब न चाहते हुए भी नशे में मुझसे लिपटने लगीं। मेरी ज़ुबान उसके मुँह के अंदर जाकर नाच करने लगी और माँ ने मेरी जीभ को चूसना शुरू कर दिया। कामुकता का तूफ़ान कमरे में ज़ोर पकड़ने लगा था।

मेरे हाथ अब रेखा की चूची पर थे और मैं माँ की मस्त चूची दबा रहा था।

मै: रेखा, आज तुमको तड़पने की ज़रूरत नहीं है। आज पापा नहीं हैं। लेकिन रमन तुझे बाथरूम में जाकर उँगली से शांत होने नहीं देगा। उस दिन जो तुझे मिरर के सामने अपनी जवानी की आग को अपने हाथ से शांत करते देखा था, वो तस्वीर अभी तक मेरे दिमाग़ से नहीं गई। उस दिन ही फ़ैसला कर लिया था कि एक दिन तुझे अपनी पत्नी बनाऊँगा। जो काम पापा न कर सके मैं करके दिखा दूँगा। उस दिन पापा के होने की वजह से मैं रुक गया था, लेकिन आज मुझे कोई नहीं रोक सकेगा। मेरी पत्नी बनोगी माँ? तुझे पत्नी के रूप में देखा है मैंने जब से होश सँभाला है। तेरा घूँघट उठाने का सपना देखा है मैंने। तेरी माँग में सिंदूर भरने की चाहत की है मैंने। मेरे हाथ में तेरा मचलता हुआ जिस्म मुझे पागल बना रहा है, रेखा। रमन रेखा का और रेखा रमन की है हमेशा!!!! माँ से पत्नी बना रहा हूँ तुझे, माँ कोई एतराज़ तो नहीं?

मैं न जाने क्या-क्या बोल रहा था। मेरी वासना, प्यार और शराब का नशा मुझे अपने दिल की हक़ीक़त की गहराई बताने पर मजबूर कर रहा था।

माँ ने अपना हाथ मेरे लंड पर रखकर ज़ोर से लंड को भींच लिया और मदहोशी में बोली—

माँ: रमन, मेरे बेटे तुझे अपनी कोख से जन्म दिया है मैंने, पर तू उसी कोख को भरने का सपना देख रहा है। मेरी कोख से पैदा होकर मेरा पति बनाने का सपना देख रहा है तू। अगर ऐसा ही था तो उस दिन बाथरूम में मुझे तड़पता क्यों छोड़ गया था। और उसके बाद अपनी माँ की पैंटी में ही मुठ क्यों मार गया था तू? उसकी चूत में क्यों नहीं डाला था अपना लंड बेटा? तेरा बाप तो मुर्दा पड़ा था बिस्तर पर। तू अपनी माँ के प्यार को क्यों ठुकरा गया बेटा? मैं तो तब भी तेरी थी आज भी तेरी हूँ। बस आज तेरे पापा हम दोनों के बीच नहीं हैं। जब अपने बाप का सब पैसा और जायदाद तेरी हो गई है तो उसकी पत्नी क्यों नहीं? मैं भी तो मनोहर की जायदाद ही हूँ। सँभाल ले मुझे भी। बना ले मुझे अपनी पत्नी या रखैल। ओह बेटा, ये क्या, तेरा लंड तो पापा से दोगुना है। तेरे बाप के लंड से तो तुझे पैदा किया था मैंने, अब इस हलावी लंड से क्या पैदा करोगे अपनी माँ की कोख से? बेटा तेरे जिस्म के स्पर्श से ही मेरे अंदर वासना की आग भड़क चुकी है। मुझे अपना लो, अपना बना लो, मेरे अंदर समा जाओ बेटा। मैं तेरी हूँ!

माँ अब मेरे लंड से खेलने लगी थीं और मेरा लंड बेक़ाबू हो रहा था। मैं नाइटी को गले से खोलते हुए रेखा की चूची मसल डाली। उसकी ब्रा मुझे परेशान कर रही थी—

मै: माँ अपनी ब्रा उतार दो, मुझे तेरे दूध को किस करना है। वाह रेखा, ऐसी चूची मैंने अब तक किसी और औरत के जिस्म पर नहीं देखी, अब जब हमारे बीच सब पर्दे हट गए हैं तो फिर ये कपड़ों की दीवार क्यों, मुझे अपना वो रूप दिखाओ रेखा जो पापा को दिखाया था, अपने आपको निर्वस्त्र कर डालो। आज हमारी ज़िंदगी के हसीन प्यार की पहली रात है।

मैं ब्रा के ऊपर से माँ की चूची को ज़बरदस्ती से मसल रहा था और उसकी चूची कड़ी हो चुकी थी।

माँ: बेटा इसी चूची को चूसकर बड़ा हुआ है तू। आज इसी को मसल रहा है। आज फिर इस चूची को चूसकर दूध नहीं पीओगे? तेरे हाथ लगाते ही तेरी माँ चुदासी हो गई है। ओह्ह्ह्ह्ह बेटा, तेरा स्पर्श मेरी चूत में एक शोला भड़का रहा है। अब जब माँ को पत्नी बना रहा है तो कपड़े भी खुद ही उतार दे ना। मेरे हाथ में तेरा लंड एक आग का गोला बन चुका है। इसका इरादा आज मुझे चोदने का है और तू आज मादरचोद बने बिना नहीं रहेगा। ख़ैर तेरी माँ को भी तेरे जैसा मर्द ही चाहिए है। आज की रात बेटा नहीं मर्द बनकर अपनी रेखा की दुनिया रंगीन बना दे बेटा।

मैं अब जान चुका था कि माँ बिल्कुल कामुक हो चुकी हैं और अब देर करना ठीक नहीं है। मैंने जल्दी से उसके जिस्म से नाइटी अलग कर डाली और फिर पैंटी और ब्रा भी खींचकर उतार डाली। रेखा एक ब्लू फ़िल्म की एक्ट्रेस की तरह नंगी बिस्तर पर छटपटा रही थीं। मैंने अपना बरमुडा भी उतार फेंका।

मै: माँ अब अपने बेटे के लिए टाँगें खोल दो और उस चूत के दीदार करवा दो जिस में से मैं दुनिया में आया था। उसी चूत को चोदकर आज मादरचोद बनाना है मुझे। माँ आज सारी रात हमारी चुदाई की रात है। लेकिन पहले मुझे अपनी चूत का स्वाद चखा दो। तेरी मक्खन जैसी चूत को चाटकर इसका रस पीना है मुझे!!!

मैंने माँ की जाँघें फैला दीं और उसकी चूत पर हाथ फेरकर अपने होंठ उसकी चूत पर रख दिए। जिस चूत से चिपकी हुई पैंटी को मैंने सूँघा था आज मेरे होंठ उसको किस कर रहे थे। लंड में तूफ़ान भर चुका था। रेखा के पैरों की तरफ़ सरक करके मैं अपनी माँ की चूत का रस चाटने लगा। उस वक़्त मेरा लंड माँ के होंठों के सामने था। मेरी माँ भी नशे और उत्तेजना से भरी हुई थीं। उसकी उँगलियों ने पहले मेरे अंडकोष सहलाए और फिर मेरा लंड मुँह में डाल लिया। हम माँ-बेटा एक सेक्सी 69 की पोज़िशन में लिपट गए। रेखा की चूत की महक मुझे पागल बना रही थी। मैं चूत चाट रहा था और वो अपने चूतर ऊपर उठा-उठाकर मेरी ज़ुबान से चुदवा रही थीं।

माँ ने मेरा लंड दोनों हाथ से जकड़ लिया और अपनी ज़ुबान अंडकोष से लेकर सुपाड़े तक ले जाकर चाटने लगीं। मैं अब जन्नत में था। मेरी जन्नत मेरी माँ रेखा की चूत में थी! फिर मैंने महसूस किया कि अगर रेखा ऐसे ही चूसती रहीं तो मेरा लंड ऐसा छोड़ देगा। मैंने माँ की चूत से मुँह हटाते हुए कहा—

मै: माँ अब असल चुदाई शुरू करें? इस वक़्त की राह मैं सारी ज़िंदगी से देख रहा हूँ। अब और नहीं रहा जा रहा। अगर तुझे मेरा प्यार अच्छा लगा तो कल ही हम शादी कर लेंगे। मेरी हसरत अपनी माँ को दुल्हन के रूप में देखने की है। रमन की पत्नी रेखा!! मेरी पत्नी बनोगी, रेखा? अपने बेटे को मनोहर का स्थान दोगी, रेखा? रमन को अपनी माँग का सिंदूर बनाओगी, माँ?

रेखा बिस्तर पर पीठ के बल लेटकर आँखें बंद किए हुए थीं। लेकिन वो वासना भरी आवाज़ में बोलीं—

माँ: बाप के बाद बेटा ही सँभालेगा मुझे। अगर तुझ जैसा मर्द मेरी ज़िंदगी में आ जाए तो मुझे और क्या चाहिए। अपनी माँ को चोदकर पहले ये फ़ैसला तो कर लो कि तू कल अपनी बूढ़ी माँ को चोदकर तो नहीं चला जाएगा? तू जवान हो बेटा। जवानी में मर्द जवान औरत की इच्छा रखते हैं।

मैं भावुक हो उठा और माँ की चूची को चूमकर बोला—

मै: मैंने सारी ज़िंदगी तुझे ही अपनी दुल्हन माना है, माँ। बाप और बेटे की एक ही दुल्हन होनी चाहिए। मुझे किसी जवान लड़की की इच्छा नहीं है। माँ की चूत दुनिया में सबसे बढ़िया है मेरे लिए।

इसके साथ ही मैंने रेखा की टाँगें छितरा दीं और अपना सुपाड़ा अपनी माँ की चूत में धकेल दिया। रेखा की चूत रस से चिकनी हो चुकी थी। सरसराता हुआ लंड उसकी चूत में घुसता चला गया। माँ की चूत मेरे लंड के इर्द-गिर्द ऐसे फ़िट हो गई जैसे उँगली के इर्द-गिर्द दस्ताना फ़िट हो जाता है। चूत के अंदर एक भट्ठी जल रही प्रतीत हुई मेरे लंड को—

माँ: आआआआआ…… उउउउर्र्र्र्ह्ह्ह्ह्ह्ग्ग्ग्ग………… ओओओओओ……….. आाह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह!

की आवाज़ें माँ के मुँह से निकल रही थीं। रेखा की जाँघें मेरी कमर पर कसी हुई थीं। उसकी मस्त चूची ऊपर-नीचे हो रही थी। मैं नशे में माँ पर सवार होकर उसको चोद रहा था। जिस चूत की तमन्ना की थी आज मेरी हो चुकी थी। और वो भी क्या चूत थी!!!!! अपनी ही माँ की चूत!!!

मै: कैसा लगा मेरा लंड? रेखा, बता कौन अच्छा चोदता है? बेटा या बाप? मनोहर या रमन? तेरा पहला पति या होने वाला पति?

मैंने पूछ लिया अपनी माँ से। आखिर मैं अपनी सगी माँ का आशिक़ था।

माँ: बेटा तेरा क्या जवाब है। तुझसे बढ़कर कौन हो सकता है? तेरे पापा को मैं बुरा नहीं कह सकती क्योंकि उन्हीं से चुदवाकर तो मुझे तुझ जैसा बेटा मिला है। तेरा लंड मेरी चूत में है झूठ नहीं बोलूँगी, बेटा तेरा लंड तेरे पापा से बहुत बड़ा और शक्तिशाली है। मुझे अपने मस्त लंड से रौंद रहा है तू, मेरी चूत तेरे लंड के लिए आज भी कुँवारी महसूस कर रही है। फाड़ दे इसको। बहुत जली है तेरे पापा की याद में ये चूत!!! चोदकर इसकी आग बुझा दो आज। अपनी बना लो मुझे। चोदो अपनी माँ की चूत बेटा। इसी लिए तुझे इस में से पैदा किया था कि इसी चूत को चोदकर निहाल कर दे!! शाबाश बेटा। जमकर चोद!! ज़ोर से चोद मुझे मेरे मादरचोद रमन बेटे!!! तेरा लंड मेरी बच्चेदानी से टकरा रहा है। मादरचोद ज़ोर से पेल अपनी माँ की चूत। मुझे अपने बेटे की माँ बना ले। रेखा बाप-बेटे दोनों की पत्नी बनके उनके बच्चों की माँ बनना चाहती है। चोद ले माँ को, बना ले माँ को आज माँ!!

माँ की बात सुनकर मेरा जोश दोगुना हो गया। मेरे हाथ अब रेखा के चूतर पर कस गए और मैं पागलों की तरह माँ की चुदाई करने लगा। कभी जब मैं जोश में आकर उसके निप्पल काट लेता तो वो सिसकारी भर लेतीं, चीख पड़तीं लेकिन उसने मुझे रोका बिल्कुल नहीं।

माँ: ओओओओओओ……. बेटा पी ले मेरा दूध…. इसी को चूस-चूसकर तो बड़ा हुआ है तू……… चूस अपनी माँ की चूची… चोद उसकी चूत…. हाय माँआआआआ… मार दिया तेरे ज़ालिम लंड ने….. बहुत मज़ा दे रहा है मेरे बेटे का लंड… बहुत मस्त है तेरी चुदाई बेटा!!!!

मैं जानवर बन चुका था और थाप पर थाप मार रहा था। मेरे धक्कों की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी। हम दोनों पसीना-पसीना हो रहे थे। मैंने जोश में आकर एक उँगली रेखा की गाँड में घुसा डाली और वो तड़प उठीं—

माँ: मादरचोद कहीं के….. ये क्या कर रहे हो…. मेरी गाँड मत छेड़ो बेटा………. बस चोदे जाओ…… मेरी गाँड बहुत टाइट है…. उउउईईईई बस करो….. हाय बेटा चोदो मेरी चूत…. मेरी गाँड चोदो.. मार दिया अपनी माँ को बेटा!!

रेखा की गाँड में मेरी उँगली घुस नहीं रही थी लेकिन अब उसने गाँड को ढीला छोड़ दिया था और मैं अब चूत को लंड से और गाँड को उँगली से चोद रहा था।

थोड़ी देर के बाद रेखा ने मुझे नीचे लिटा दिया और खुद ऊपर आ गईं। मेरे लंड को चूत में घुसाकर अपनी गाँड हिला-हिलाकर मुझे चोदने लगीं। उसकी चूची अब मेरे होंठों से स्पर्श कर रही थी और मैंने निप्पल्स को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। जब मुझे लगा कि मैं अब झड़ने के नज़दीक हूँ तो मैंने माँ की चूची को जोश में आकर काट लिया और वो चिल्ला पड़ीं—

माँ: मादरचोद रमन, अब माँ की चूची को खा जाएगा क्या? बेटा ये चूसने की चीज़ है खाने की नहीं, आाह्ह्ह बेटा चूस मेरी चूची…. पेलता जा मेरी चूत में अपना लंड…. आज तेरी माँ तेरे लंड से चुदवा रही है…. उउउईईईईई….. मार दिया मादरचोद…….. मेरी चूत की बस हो गई….. रमन बेटा तेरी माँ की चूत झड़ रही है,,,,,,,, तेरी माँ अपने बेटे से चुद गई बेटा…. अपना रस डाल दे अपनी माँ की बुर में… आआाह्ह्ह ,…. तेरा गरम रस गिर रहा है मेरी चूत में……. ओह्ह्ह्ह बेटा मैं गईईईईई

मेरा लंड भी अपना फुहारा छोड़ रहा था। रेखा की चूत का रस और मेरे लंड का रस आपस में मिल रहे थे। एक लंबी चीख मारते हुए हम दोनों ख़लास हो गए।

कहानी कैसी लगी कमेन्ट मे जरूर बताना

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