माँ को चोदने की चाहत 5
Maa Beta ki kamuk chudai ki sex story:- रात की घमासान चुदाई के बाद हम दोनों की नींद सुबह देर से खुली। मुझे पिछली रात की बातें याद आने लगीं। कुछ देर तो यही समझने में लग गए कि ये सच था या सपना। फिर जब मुझे मम्मी का मुझसे चिपका नंगा, गरम जिस्म महसूस हुआ तो मेरे चेहरे पर एक स्माइल आ गई। वो मेरी बाँहों में समाई हुई लेटी थीं। उनकी एक टाँग अभी भी मेरी कमर पर थी और उनका सिर मेरी छाती पर टिका हुआ था। उनके मुलायम चुचे मेरी छाती से दब रहे थे और साँसों के साथ हल्के-हल्के ऊपर-नीचे हो रहे थे।
अगर आपने इस कहानी के पिछले पार्ट नहीं पढे तो यहाँ पढ़ें ==> माँ को चोदने की चाहत – 4
Maa Beta ki kamuk chudai ki sex story
मेरा लंड सुबह-सुबह खड़ा होकर उनके पेट से सटा हुआ था। मैंने धीरे से अपना हाथ उनकी पीठ पर फेरा और नीचे ले जाके उनकी नंगी गाँड को हल्के-हल्के दबाने लगा।
मम्मी की आँखें धीरे-धीरे खुलीं। पहले तो वो कुछ समझ नहीं पाईं, फिर जैसे उन्हें याद आया, उनके गालों पर हल्की सी लाली छा गई। उन्होंने शर्माते हुए अपना चेहरा मेरी छाती में छुपा लिया।
मैंने उनका चेहरा ऊपर उठाया और उनके होठों को चूम लिया। सुबह की पहली किस बड़ी प्यारी और गहरी थी। उनकी जीभ मेरी जीभ से खेलने लगी।
किस के दौरान मेरा लंड उनकी जाँघों के बीच दब रहा था।
मम्मी ने किस तोड़ा और नीचे देखा। मेरा मोटा, कड़ा लंड उनकी गोरी जाँघों को छू रहा था।
मम्मी: उफ़्फ़… सुबह-सुबह भी इतना खड़ा है?
मैं: आपकी वजह से। रात को दो बार चोदने के बाद भी शांत नहीं हो रहा।
ये कहके मैंने उनका राइट पैर जो उन्होंने मेरे ऊपर रखा हुआ था वो खोला और अपना हाथ उनकी चूत पर रखकर सहलाने लगा तो मम्मी बोलीं—
मम्मी: अजय पहले जाओ नहा-धो के फ्रेश हो जाओ, मैं कहीं भागी जा रही हूँ क्या?
मैं: मम्मी प्लीज़ बस एक बार और।
मम्मी: ज़िद नहीं करते ना… जाओ नहा लो फिर तो हम दोनों पूरा दिन घर में ही हैं।
मैं ये सुनके ख़ुश था कि ये तो एक तरह से इनविटेशन था। मम्मी खुद से चुदने के लिए रेडी थीं और मुझे क्या चाहिए था। जब इतने दिन जल्दबाज़ी नहीं की तो अब किस चीज़ की जल्दबाज़ी।
ये सोचके मैं बाथरूम में चला गया और उधर मम्मी भी अपने बाथरूम में जाके नहाने लगीं। मेरा मन तो बहुत था साथ में शावर लेने का लेकिन मैंने सोचा सब एक साथ जल्दी-जल्दी नहीं होना चाहिए।
मम्मी रेडी होकर नाश्ता बनाने लगीं और मैं भी तैयार हो गया। रोज़ की तरह आज भी मम्मी सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाउज़ में ही थीं और लास्ट डे की तरह आज भी उन्होंने ब्रा और पैंटी नहीं पहनी थी। मैंने आज सिर्फ़ बरमुडा पहना हुआ था और मेरा लंड पूरे टाइम टाइट था। उसमें बने हुए तंबू को देखके मम्मी कभी हँसतीं कभी शर्मातीं तो कभी मुझे चिढ़ातीं। फिर नाश्ते की टेबल पर मैंने उन्हें खींचके अपनी गोद में बिठा लिया। मम्मी सीधे मेरे खड़े लंड पर बैठीं और मेरा लंड उनकी गाँड की दरार में घुसता चला गया।
फिर उन्हें ऐसे ही बिठाए हुए मैंने उन्हें अपने हाथों से नाश्ता खिलाया। बीच-बीच में मैं बाइट अपने होठों में दबाके मम्मी को खिलाता। इस तरह से खाते हुए हम लोग किस भी कर रहे थे।
नाश्ता ख़त्म होते-होते मैं बहुत एक्साइट हो चुका था लेकिन ऑफ़िस का टाइम हो रहा था तो मैंने सिस्टम में लॉग इन किया और मम्मी घर के काम निपटाने के लिए किचन में चली गईं।
मैंने सिस्टम लॉगिन तो कर लिया था लेकिन मेरा मन काम में नहीं लग रहा था। बार-बार मुझे कल रात की चुदाई आ रही थी और मेरा लंड बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था।
किसी तरह खुद को समझाते हुए मैंने दो-ढाई घंटे बिताए। जैसे ही मेरी मीटिंग ख़त्म हुई मैं सीधे किचन में गया जहाँ मम्मी सुबह वाला ही पेटीकोट और ब्लाउज़ पहने हुए काम कर रही थीं। गर्मी से उनके बदन पर पसीने की छोटी-छोटी बूँदें झलक रही थीं और इस अवतार में वो बहुत सेक्सी लग रही थीं। मम्मी मस्ती में कोई गाना गुनगुना रही थीं।
मैं पीछे से गया और उन्हें हग कर लिया… उनके थोड़े से निकले हुए पेट को पकड़कर मैंने उन्हें खुद से चिपका लिया और उनके कान की लौ को किस करने लगा।
मम्मी: आाह्ह क्या कर रहा है अज्जू?
मैं: वही जो सुबह से करना चाह रहा हूँ।
मम्मी: रात को दो बार करने के बाद भी तेरा मन नहीं भरा?
मैं: आपसे मेरा मन कभी नहीं भर सकता। प्लीज़ मम्मी… करने दो ना।
मम्मी: अभी नहीं बेटा… अभी मैं खाना बना रही हूँ।
मैं: मम्मी प्लीज़… आपने सुबह भी मना कर दिया था। मेरा बहुत मन कर रहा है।
मम्मी: बेटा तवे पे रोटी पड़ी है… जल जाएगी।
लेकिन मैं अब कुछ सुनने वाला नहीं था। मैंने मम्मी की गर्दन पर किस करना शुरू किया। किस करते-करते एक हाथ से उनके चुचे दबाने लगा और दूसरा हाथ उनकी गाँड पर फिराने लगा। मम्मी की साँसें भारी होने लगीं। मैंने हाथ बढ़ाके गैस का बर्नर ऑफ़ कर दिया और अपना लंड उनकी गाँड से सटाए हुए ही उनका ब्लाउज़ खोलना शुरू कर दिया। ब्लाउज़ खोलके मैंने उनके हाथों से नीचे खींचके निकाल दिया।
मम्मी की आँखें मज़े से बंद हो चुकी थीं और अब उनके बदन पर सिर्फ़ पेटीकोट था। इमेजिन करके देखिए… मम्मी के बड़े-बड़े पसीने से भीगे गोरे चुचे और उनके बीच में लटकता मंगलसूत्र। फिर मैंने पेटीकोट खोलने के लिए नीचे हाथ बढ़ाया। रात वाली ग़लती इस बार मैंने नहीं की… और एक झटके से उसका नारा खोल दिया। नारा खुलते ही पेटीकोट सरसराता हुआ नीचे गिर गया। फिर मम्मी ने अपने पैर से एक-एक करके उसे उतार दिया।
(मम्मी तब कुछ ऐसी दिख रही थीं)
मैंने भी अपना बरमुडा उतार दिया था और अब मेरे लंड और मम्मी की गाँड की दरार के बीच कोई रुकावट नहीं थी। मैं अभी भी उनकी नेक पर किस कर रहा था… उनके पसीने का नमकीन टेस्ट मुझे आ रहा था… मैंने एक हाथ से उनके चुचे दबाने स्टार्ट किए और दूसरे हाथ से उनका पैर थोड़ा सा फैलाके उनकी चूत सहलाने लगा। पैर फैला होने की वजह से मैं हाथ उनकी गाँड के छेद से लेकर उनकी चूत तक ले जा रहा था।
चूत सहलाने से मम्मी बहुत गरम हो गईं और मेरा हाथ उनके कामरस से भीग गया। मैंने अपनी 2 उँगलियाँ अपने मुँह में डालके उस पानी को चाटा और उसके बाद वो उँगलियाँ मैंने मम्मी की चूत में डाल दीं लेकिन अभी हम खड़े थे तो उँगलियाँ सही से अंदर नहीं जा पा रही थीं…
मम्मी अब आगे को झुक गईं। उनके बड़े-बड़े गोरे चुचे किचन की स्लैब से दब रहे थे और उनकी गाँड पीछे की तरफ़ निकली हुई थी। मैंने उनके चुत्तरों को खोला और उनकी पसीने और कामरस से भीगी हुई चूत को चाटने लगा। मैंने अपनी जीभ मम्मी की गाँड में भी डालने की ट्राई की लेकिन उनकी गाँड इतनी टाइट थी कि वो अंदर ही नहीं जा रही थी। तो मैं ऊपर से ही उनके गाँड के छेद को चाट रहा था। मैं मम्मी की गाँड और चूत चाटे जा रहा था और मम्मी सिसकारियाँ ले रही थीं…
मम्मी: आाह… स्स्स्स्… अज्जू… आई लव यू बेटा… ऐसे ही चाटो… स्स्स्… और कसके चाटो मेरी चूत… आाह
चूत चाटने के बाद मैंने मम्मी को अपनी तरफ़ घुमाया और मैं खड़ा हो गया। मैंने मम्मी को किस करना शुरू किया। मम्मी के रसीले होठ चूसते हुए मेरा लंड बार-बार उनकी चूत पर रगड़ खा रहा था… मम्मी बहुत एक्साइटेड हो गई थीं और मेरी जीभ को बार-बार चाट और चूस रही थीं। ऐसा लग रहा था कि दोनों की टंग में लड़ाई चल रही हो। उनका एक हाथ मेरी पीठ पर था और दूसरे हाथ से वो मेरे लंड की स्किन आगे-पीछे करते हुए सहला रही थीं।
फिर मैं थोड़ा नीचे आया और उनके चुचे दबाने और चूसने लगा… इस टाइम मम्मी के हाथ मेरे सर पर थे और वो मेरा सर बार-बार अपने चुचों में दबा रही थीं। मम्मी के चुचे दबाने और चूसने के साथ ही मैंने अपनी 2 उँगलियाँ मम्मी की चूत में डाल दीं। चूत गीली होने से बहुत आसानी से अंदर चली गईं। फिर मैं और नीचे आया… उनका एक पैर मैंने अपने कंधे पर रख लिया और उनकी क्लिटोरिस चाटने लगा।
और साथ-के-साथ उन्हें उँगलियों से चोद भी जा रहा था… मेरी उँगलियाँ बहुत स्पीड में अंदर-बाहर हो रही थीं जिससे किचन में फच-फच की आवाज़ आ रही थी।
(मम्मी की पोज़िशन उस टाइम कुछ ऐसी थी)
थोड़ी देर उँगलियों से चोदने के बाद मैंने उन्हें उठाया और किचन के स्लैब पर बिठा दिया और उन्हें किस करते-करते उनकी चूत में लंड डालने लगा।
मगर स्लैब थोड़ा ऊँचा था जिससे चोदते बन नहीं रहा था।
मैंने फिर उन्हें नीचे उतारा और घुमाके खड़ा कर दिया। मम्मी थोड़ा सा पीछे आईं और स्लैब पर अपने हाथ रखकर नीचे की तरफ़ झुक गईं। बड़ा गज़ब नज़ारा था – मम्मी का नंगा गोरा बदन… उनके हाथों में हरी और काली चूड़ियाँ… गले में लटकता मंगलसूत्र… बड़े-बड़े चुचे जो झुकने की वजह से थोड़ा लटक गए थे और पीछे को निकली हुई उनकी मोटी गोरी सी गाँड और गाँड के छेद से नीचे की तरफ़ उनकी क्लीन शेव्ड चूत।
मैंने उनके पैर फैलाए… लंड उनकी चूत पर टिकाया और उनकी चूत पर रगड़ने लगा… मम्मी सिसकारियाँ लिए जा रही थीं। उनकी चूत एकदम पनिया गई थी और वो पानी मेरे लंड के सुपड़े पर लग रहा था। थोड़ी देर लंड रगड़ने के बाद मम्मी ने कहा—
मम्मी: डाल ना अजय या सिर्फ़ रगड़ता ही रहेगा?
ये सुनकर मैंने लंड उनकी चूत में डाल दिया। चूत चिकनी होने की वजह से लंड सरसराता हुआ अंदर तक घुसता चला गया और सुपड़ा उनकी बच्चेदानी के मुहाने पर टच हुआ। मम्मी की चूत के होठ मेरे लंड की जड़ पर टच हो रहे थे। मम्मी के मुँह से दर्द और मज़े की मिली-जुली एक लंबी सी आाह्ह्ह निकली।
मैंने मम्मी को चोदना शुरू किया। मेरा लंड मम्मी की चूत की दीवारों पर रगड़ खाते हुए अंदर-बाहर हो रहा था जिससे मम्मी को बहुत मज़ा आ रहा था।
किचन में अजीब सी स्मेल फैल गई थी और सिर्फ़ थप-थप… फच-फच और आाह-आाह की आवाज़ें आ रही थीं… साथ में मम्मी की पायल और चूड़ियों की आवाज़ भी आ रही थी।
अब मम्मी इतना एक्साइटेड हो गई थीं कि खुद से अपनी गाँड पीछे करके मेरा लंड लेने लगी थीं। मैं इस टाइम जन्नत में था। मम्मी को चोदने का सपना मैंने हमेशा से देखा था और आज वो मुझे चोद रही थीं। और कहती जा रही थीं… स्स्स्स्… अजय… और कसके चोद मुझे… अंदर तक डाल दे एकदम… स्स्स्सााह
मैंने मम्मी की चूत से अपना लंड निकाला और उनकी गाँड के छेद पर फिराने लगा… मम्मी को बहुत मज़ा रहा था ऐसे। मज़े की वजह से उनकी गाँड का छेद बड़ा-छोटा हो रहा था।
मैंने हल्का सा दबाव डाला तो मम्मी बोलीं—
मम्मी: अज्जू वहाँ नहीं बेटा… बहुत दर्द होगा। मैंने कभी गाँड में नहीं डलवाया है।
मैं इतना एक्साइटेड हो गया कि पूछो मत। मैंने सोचा अगर मम्मी की गाँड मारने को मिल जाए तो मज़ा आ जाए… उनकी चूत ना सही मगर गाँड तो कुँवारी मिलेगी… लेकिन जल्दबाज़ी में काम बिगड़ सकता था और मुझे मम्मी को प्यार से चोदना था… ज़बरदस्ती नहीं।
तो मैंने उधर से ध्यान हटाया और मम्मी का एक पैर उठाके किचन के स्लैब पर रख दिया और फिर से उनकी चूत में लंड डाल दिया। इस पोज़ में मेरा लंड और अंदर तक जा रहा था।
अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। इसके साथ ही मम्मी की सिसकारियाँ भी बढ़ गई थीं… कसके धक्के लगाते-लगाते मैं मम्मी के चुचे दबा रहा था। मैंने कसके 25-30 झटके मारे और फिर से मम्मी की चूत में अपना वीर्य भर दिया। मेरा लंड पूरी गहराई में मम्मी की चूत में घुसा हुआ था। उनकी चूत ने मेरे लंड को एकदम जकड़ रखा था।
कमर के नीचे हम दोनों के शरीर एक-दूसरे से चिपके हुए थे और हम दोनों पसीना-पसीना हो गए थे। थोड़ी देर ऐसे ही रहने के बाद जब हम दोनों की साँस में साँस आई तो मैंने अपना लंड मम्मी की चूत से बाहर निकाला। मेरे माल और उनके कामरस का मिक्सचर उनकी चूत से बाहर रिसने लगा। तीसरा राउंड होने की वजह से इस बार माल थोड़ा कम निकला था मगर इतना फिर भी था कि मम्मी की जाँघों पर से होकर नीचे बहने लगा और कुछ ड्रॉप्स नीचे ज़मीन पर और उनके पेटीकोट पर भी गिर गईं।
हम दोनों ने अपनी साँसों को थोड़ा सा सँभाला और मम्मी ने मुझे हल्का सा धक्का देते हुए कहा—
मम्मी: कर ली अपने मन की 😀 अब फिर से नहाना पड़ेगा।
मैं: आप क्यों तकलीफ़ करती हो मम्मी। चलो मैं आपको नहला देता हूँ।
मम्मी: (शर्माते हुए) धत्त!
ये बोलके मम्मी बाथरूम में चली गईं। मैं भी नहाके और अपना बरमुडा पहनके सिस्टम पे बैठ गया।
इसके आगे क्या हुआ वो मैं बताऊँगा आपको अगले पार्ट में।
