डॉक्टर मैडम की कामवासना -1
Dr Amrita ki kamvasna ki kahani:- एक अलिशान सी गाड़ी महाजन मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के सामने रुकती है। गाड़ी का दरवाजा धीरे से खुलता है और अंदर से एक बहुत ही खूबसूरत बाला का पैर गाड़ी के बाहर निकलता है। देखते ही देखते उस गाड़ी से वो खूबसूरत बाला बाहर आती है और मानो पूरे वातावरण को अपनी खुशबू से मनमोहित कर देती है।
उसकी जुल्फें हवा से लहरा रही थीं और मानो खूबसूरती अपने अंतिम सीमा पर थी। वो झट से गाड़ी का दरवाजा बंद कर देती है और एंट्री गेट से हॉस्पिटल में एंटर करती है। पूरे शीशे के ग्लास से बना वो हॉस्पिटल काफी अलिशान था। वो उस हॉस्पिटल में एंट्री करते ही वहाँ का स्टाफ जो भी अपना काम कर रहा था वो वहीं के वहीं रुक जाता है।
Dr Amrita ki kamvasna ki kahani
रिसेप्शन पर बैठा स्टाफ खड़ा होकर उसे कहता है—
स्टाफ: गुड मॉर्निंग मैडम… हैव अ नाइस डे…
वो खूबसूरत हसीना बस हाँ में सर हिलाती है।
जैसे-जैसे वो आगे बढ़ रही थी वैसे-वैसे उसे वहाँ का स्टाफ इज्जत देते हुए गुड मॉर्निंग मैम कह रहा था। वो बस उनको सुनती और अपने बड़े हील्स का आवाज करती हुई आगे बढ़ रही थी।
उसके चाल में एक अलग ही कॉन्फिडेंस था। वो एक-एक कदम बड़े ही कॉन्फिडेंस से डाल रही थी। उसका पूरा बदन मानो काफी स्थिर था।
साड़ी पर पहने उसने लो हील्स हॉस्पिटल की शांतता को भंग कर रहे थे। थप-थप-थप की आवाज से सारे लोगों का ध्यान उसके तरफ खिंच रहा था।
उसको देख किसी की भी कामवासना भड़क जाए ऐसा उसका रूप था। पीछे से मानो वो जन्नत लग रही थी। उसके चाल से उसकी गाँड मानो दोनों तरफ मचल रही थी।
हील्स की वजह से गाँड का हिस्सा और भी कामुक और उभरा हुआ लग रहा था। साड़ी मानो गाँड से चिपक गई थी जिस वजह से उसके बड़ी सी गाँड के साइज का अनुमान लगाना किसी अनुभवी इंसान को काफी आसान था। उस बड़ी सी गाँड को ऐसा मचलता देख ना जाने कितनों का पानी निकला होगा।
उस खूबसूरत बाला की वो मचलती गाँड साड़ी में भी काफी मादक लग रही थी। लगे भी क्यों न 38 की जो थी।
बैकलेस ब्लाउज ने तो उसकी सुंदरता पर मानो अलंकार चढ़ाया था। उसकी गोरी-गोरी चिकनी पीठ पर सिर्फ एक ब्लाउज के हुक का सहारा था और उसके ब्लाउज के अंदर मानो इस धरती का सबसे कीमती खजाना छुपा हो।
आगे से उसका खूबसूरत चेहरा मानो और भी कहर ढा रहा था। होंठों पर गुलाबी लिपस्टिक, एक बाल आँखों के आगे और चेहरे पर कातिलाना अदा मानो अंगार लग रहा था।
ऊपर से उभरे हुए उसके बदन के कसे हुए स्तन उसकी खूबसूरती को एक कामुक पल में बदल रहे थे। उसके चाल से उसके ब्लाउज में कैद 36 के आम ऊपर-नीचे ऊपर-नीचे हो रहे थे। उसको देखने वालों की आँखें मानो उसके उछलते आमों के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे।
और आमों के नीचे उसकी नंगी कमर… उफ्फ्फ और कमर कहर ढा रही थी। उसके नंगे कमर को देख किसी को भी उसे चाटने का मन हो जाए।
अमृता की खूबसूरती का एक बहुत खूबसूरत भाग था उसकी 32 की कमर जो उसके मादक फिगर को बहुत ही कामुक बनाती थी।
उस खूबसूरत बाला की चाल आखिर एक केबिन के पास आकर रुकती है जिस पर नाम लिखा था—
डॉ. अमृता महाजन (एमबीबीएस)
(ऑर्थोपेडिक सर्जन)
वो उस केबिन में जाकर अपने चेयर पर बैठ जाती है।
जी हाँ दोस्तों, इस कहानी की नायिका और महाजन परिवार की बहू यानी कि अमृता महाजन… सॉरी डॉ. अमृता महाजन की ये कहानी।
उम्र: 28 साल
हस्बैंड: रितेश महाजन
महाजन खानदान का ये हॉस्पिटल अमृता के ससुर यानी रितेश महाजन के पिता प्रताप महाजन (उम्र 65 साल) का है। वो एक बड़े ही मशहूर पॉलिटिशियन हैं और काफी प्रॉपर्टी है।
अमृता और रितेश की शादी काफी धूमधाम और शाही तरीके से हुई थी जस्ट 6 महीने पहले। दोनों ही मेडिकल कॉलेज में साथ थे और 5 साल से रिलेशनशिप में थे। और अब ये रिश्ता एक शादी का बंधन बन चुका है।
अमृता ऑर्थोपेडिक सर्जन थी और रितेश हार्ट का डॉक्टर। रितेश की केबिन फर्स्ट फ्लोर पर थी। टोटल 5 फ्लोर का ये हॉस्पिटल और नीचे का पूरा फ्लोर अमृता के अंडर आता था। सभी इमरजेंसी केस अमृता हैंडल करती हैं।
अमृता पहले से एक स्कॉलर लड़की थी। बड़ी ही मेहनत और लगन से उसने एमबीबीएस पूरा किया था। रितेश से जब प्यार हुआ तो उसको पता नहीं था रितेश इतने बड़े घर का लड़का है।
शादी के बाद उस पर एक बहू, बीवी और डॉक्टर… इतनी सारी रिस्पॉन्सिबिलिटी आके गिर गई।
पर अमृता को कोई फर्क नहीं पड़ा। वो एक कॉन्फिडेंट और सक्सेसफुल वुमन थी और उसके तेवर ही उसकी खासियत थी।
आज वैसे देखा जाए तो अमृता का अपने हनीमून के बाद हॉस्पिटल में पहला दिन था। 6 महीने पहले शादी हुई। उसके बाद 1 महीने के लिए हनीमून और बाद में एक ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए अमृता आउट ऑफ सिटी चली गई थी। और आज उसने हॉस्पिटल में कदम रखा था। काफी पेंडिंग काम थे इसलिए अमृता मॉर्निंग से आफ्टरनून तक काम कर रही थी।
उसका सेक्सी सा बदन काम करते हुए भी कामुक लग रहा था। अभी-अभी वो पेशेंट्स के वार्ड में से राउंड मारके आई थी तो उसके बदन पर थोड़ा पसीना था। उसके कारण उसके बूब्स के दरार में कामुक सा गीलापन था और उसका मंगलसूत्र उस दरार में मानो अटक सा गया था। पेशेंट्स की फाइल्स को स्टडी करने में मगन अमृता काफी कामुक लग रही थी।
तभी उसके दरवाजे पर नॉक-नॉक की आवाज आती है और अमृता ऊपर देखने लगती है।
फिर से नॉक-नॉक की आवाज आती है।
अमृता अपने केबिन की बेल बजाके अंदर आने को कहती है।
तभी दरवाजा खुलता है और एक शख्स अंदर आता है और कहता है—
रितेश: लगता है हमारी मोहतरमा आज हमसे नाराज हैं… न साथ में गाड़ी में आईं न हमसे मिलने ऊपर आईं… और अब हमारे लिए केबिन के दरवाजे लॉक कर दिए गए…
अमृता: जी… ऐसी कोई बात नहीं… आप ही सुबह जल्दी निकल गए घर से…
वो शख्स और कोई नहीं अमृता महाजन का पति डॉ. रितेश महाजन था।
रितेश: अच्छा अब हमें रिस्पेक्ट मिलेगी जी वगैरह…
अमृता: हाँ तो हनीमून खत्म हो गया हमारा… और कॉलेज भी। अब आपको आपका रिस्पेक्ट मिलेगा और मुझे आपकी पत्नी होने का अहसास।
रितेश: अच्छा तो मेरी खूबसूरत पत्नी खाना खाए या नहीं कि काम ही करोगी…
अमृता: जी… खाते हैं ना…
रितेश: क्या मिलेगा मुझे आज खाने को?
अमृता: घर के किचन का बता सकती हूँ। अब हॉस्पिटल के कैंटीन में क्या मिलेगा वो मुझे कैसे पता।
रितेश: ओह अच्छा। मैं हॉस्पिटल की नहीं तुम्हारे कैंटीन की बात कर रहा हूँ…
और रितेश का ये बोलते वक्त थोड़ा एक्सप्रेशन बदल जाता है।
अमृता: मेरी कौनसी कैंटीन है… मेरा तो हॉस्पिटल है…
रितेश: अच्छा और तुम्हारे इस भरे हुए कैंटीन का क्या जो मेरे सामने है और मुझे खाने के लिए उकसा रहा है…
ये सुनते ही अमृता का सब समझ में आता है और उसको हनीमून पर हुआ इंसिडेंट याद आता है जहाँ रितेश ने उसके बदन को खाने की चीजों का नाम देके कामसुख का मजा दिया था। वो याद आते ही अमृता की नजर शर्म से झुक जाती है और चेहरे पर एक मुस्कान आती है।
अमृता: अह्म आप भी ना…
रितेश: अब इतनी सेक्सी साड़ी पहन के आओगी और मेरे सामने ऐसे अपनी खूबसूरती को उछालोगी तो तुम्हें खाने का मन तो होगा ही ना जान…
और ऐसा कहते हुए रितेश अमृता के करीब जाता है और उसके कंधे पर हाथ रखकर उसको खड़ा करता है और अपनी बाहों में भर लेता है।
अमृता के बदन में एक कामुक सा अहसास प्राप्त होता है और वो अपने पति के बदन की गर्मी में खुद को समा देती है।
रितेश के गरम हाथ अमृता की नंगी पीठ पर धीरे-धीरे चलने लगते हैं।
रितेश के गरम हाथों के अहसास से अमृता की हल्की-हल्की सिसकियाँ उसके कानों में गूंजने लगती हैं।
अमृता अब अपने पति की बाहों में खुद को बहुत गरम महसूस करती है। उसके पूरे बदन में एक अलग से गर्मी छा गई थी और आँखों में हल्की सी नमी थी। उसके बदन में मानो अलग से आग भड़क गई हो।
अमृता: अह्ममम जान अब तरसाओ मत… अह्ह अगर कुछ करना हो तो जल्दी करो। कोई केस आया तो कोई फायदा नहीं होगा इन सब का। जान अह्ह ऐसा ही गरम रहके जाना पड़ेगा मुझे बेबी अह्ह।
रितेश: अह्म क्या चाहिए मेरी जान को? काफी गर्मी आ गई है आजकल मैडम में।
अमृता: अह्मम तुमने ही आदत डाल दी। अब कुछ मत कहो। मैंने कहा था क्या हनीमून पर क्या-क्या नहीं सिखाया मुझे। क्या-क्या करने को कहा। मुझे तो मालूम भी नहीं था कुछ…
रितेश: अह्ह मेरी अंजान बनाने वाली बीवी। जैसे हमने कभी कॉलेज में रोमांस ही नहीं किया।
अमृता: अह्ह किया पर हनीमून वाला कुछ अलग ही था… अह्ह…
और तभी अमृता अपने केबिन के टेबल पर बैठ जाती है और अपने पति को अपने सीने से लगा लेती है।
दोनों एक-दूसरे की आँखों में खो गए थे। दोनों की नजरें एक-दूसरे से मिल रही थीं। दोनों की आँखों में अंगार थे।
रितेश झट से नीचे झुक जाता है। अमृता को भी समझ में आ जाता है कि रितेश अब क्या करने वाला है।
अमृता अपने दोनों हाथ रितेश के सर पर रख देती है और झट से अपने पूरे बदन को कस लेती है।
रितेश का मुँह अब अमृता की नाभि पर था। वो हल्के से अमृता की नाभि को अपनी जीभ से टच करता है।
उस अहसास से अमृता सिहर उठती है और झट से पूरी ताकत से वो रितेश का मुँह अपने साड़ी के ऊपर से अपनी योनि के यहाँ रख देती है।
उफ्फ्फ टेबल पर बैठी हुई अमृता और भी कामुक लग रही थी। उसकी बड़ी-बड़ी 38 की गाँड मानो उस टेबल पर दब गई थी और उसके शरीर का पूरा भार उसकी गाँड उठा रही थी।
रितेश का मुँह धीरे-धीरे नीचे जाने लगता है और अमृता की साँसें बढ़ जाती हैं।
रितेश अपने दोनों हाथों से अमृता की साड़ी उसके जाँघों तक ऊपर करता है। वो करते वक्त अमृता की बेशुमार खूबसूरती का नजारा दिख रहा था। उसकी सुंदर गोरी बदन का मांस धीरे-धीरे नंगा हो रहा था। उसकी पायल उस गोरी स्किन पर कहर ढा रही थी। उसके पूरे जाँघ पर या पैरों पर एक भी बाल नहीं था। पूरा चिकना पैर और गदराई हुई जाँघ।
रितेश की जीभ अमृता के गोरे पैरों से होते हुए खजाने वाली गुफा तक सफर करती है।
और अमृता जोर-जोर से साँसें लेने लगती है।
पूरे केबिन में कुछ चाटने की आवाज गूंजने लगती है।
अमृता उस टेबल पर बैठे जोर-जोर से साँसें ले रही थी। उसके बदन के 36 के बूब्स काफी ऊपर-नीचे हो रहे थे। उसकी सिसकियों से पूरा केबिन गूंज उठा था।
अमृता: आआआह्ह्ह्ह्ह ओउच उम्ममम अह्ह्मम जान येस्सस आआआह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह्ह आआआह्ह्ह्ह्ह बेबी आआआह्ह्ह्ह येस्ससस आआआह्ह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ आआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह
ऐसे ये पति और पत्नी ने अपने हनीमून पर बहुत मजे किए थे। नए-नए तरीकों से सेक्स का अनुभव करना इन्होंने कॉलेज के रिलेशनशिप से ही स्टार्ट किया था। पर तब एक डर सा था। शादी के बाद दोनों ने भी काफी हद तक डर नाम की चीज को साइड में करते हुए एक-दूसरे के प्यार में खुद को खोने वाले मिलन का मानो आविष्कार कर लिया था और उसका सबसे बड़ा उदाहरण था ये।
दोनों की सेक्सुअल लाइफ काफी अच्छी थी। कॉलेज से ही दोनों को एक-दूसरे की कमजोरी पता थी। एक तरफ रितेश को नई-नई चीजों में इंटरेस्ट था तो दूसरी तरफ अमृता को सॉफ्ट रोमांस पसंद था और दोनों एक-दूसरे की ये जरूरत पूरी करते थे।
अमृता की एक कमजोरी थी और वो थी हाइजीनिक सेक्स को प्रेफर करना। रितेश के फोर्स से उसने हनीमून पर उसका लंड मुँह में लिया तो था पर उसको ये सब करना बिल्कुल पसंद नहीं आया और बाद में रितेश ने भी कभी अमृता को फोर्स नहीं किया।
रितेश भी सेक्स में काफी अच्छा था। अपने बाप यानी प्रताप महाजन का वो खून था। बस उसकी एक कमजोरी थी और वो मतलब उसे काफी नई-नई चीजों में इंटरेस्ट था पर अमृता की शालीनता और संस्कारी होने के कारण वो उससे ज्यादा फोर्स नहीं कर पाता था।
शाम 7 बजे
अमृता अपने केबिन में कुछ फाइल्स चेक करते हुए बैठी थी और तभी वहाँ रितेश ऊपर से आता है। दोनों की आँखों ही आँखों से बातें होती हैं और तभी रितेश कहता है—
रितेश: हुआ आपका काम पूरा?
अमृता: क्यों क्या जल्दी है आपको?
रितेश: मैडम आप शायद कुछ भूल रही हो।
अमृता: मैं क्या भूल रही हूँ?
रितेश: आज घर में पार्टी है। पिताजी के कुछ खास पॉलिटिकल दोस्त आने वाले हैं जो हमारी शादी में नहीं आ सके।
अमृता: ओह सॉरी। मैं थोड़ा भूल गई थी।
रितेश: हाँ हाँ। मैं तो हूँ ही तुम्हें याद दिलाने के लिए।
अमृता: हाँ चलो निकलते हैं। वरना पिताजी का गुस्सा सहना पड़ेगा…
और दोनों ही निकलने की तैयारी करने लगते हैं।
जैसे हमने देखा रितेश के पिता प्रताप महाजन एक काफी फेमस पॉलिटिकल लीडर हैं और उनकी कई सारी प्रॉपर्टीज हैं। फिलहाल उनकी पार्टी सत्ता में है।
आज कुछ अपोजिशन और खास दोस्तों को घर में दावत थी जो शादी को नहीं आ सके और नए-नवेले जोड़े को वो आशीर्वाद देने आने वाले थे।
यहाँ रितेश अपनी अलिशान गाड़ी में अमृता का हॉस्पिटल के बाहर वेट कर रहा था।
अमृता अपने डॉक्टर के कोट को अपनी कुर्सी पर लटका के खुद को सँवार के बाहर निकलती है।
नाइट ड्यूटी वाले लोगों का आना शुरू था। एक शांति थी हॉस्पिटल में। कोई ज्यादा केस नहीं थे।
अमृता अपने नशीले बदन को सँवारते हुए हॉस्पिटल के बाहर जा रही थी।
सब कुछ नॉर्मल सा था…
पर… पर… अमृता को पीछे से दो निगाहें घूर-घूर कर देख रही थीं। मानो अमृता को खा जाएँ। अमृता की चाल से वो आँखें अंगार जैसे तप रही थीं। उन आँखों में बहुत सारी हवस थी। जब सुबह अमृता आती तब भी ये आँखें अमृता को निचोड़-निचोड़ के उसका रस पी रही थीं।
अमृता की मचलते हुए कसी हुई 38 की गाँड को वो आँखें बस देखे जा रही थीं।
देखते ही देखते उन आँखों के सामने से अमृता गायब हो जाती है और वो थकी हुई बूढ़ी आवाज खुद से कहती है—
अज्ञात आवाज: आाह्ह कब तक बस ऐसे ही इस अप्सरा को देखता रहूँगा…
आगे की कहानी नेक्स्ट पार्ट में।
Next Part ==> डॉक्टर मैडम की कामवासना -2




