मेरी दीदी बनी देसी रंडी 5
Didi aur muslim mochi ki chudai ki kahani:– पिछले पार्ट में आपने पढ़ा कि सिनेमा हॉल के अँधेरे में अकरम ने नीतू दीदी का ब्लाउज खोल दिया और उनके बड़े-बड़े बूब्स को चूसने लगा। दीदी पहले हिचक रही थीं लेकिन धीरे-धीरे मजे लेने लगीं। राहुल पीछे बैठकर सब देख रहा था।
Part 4==> मेरी दीदी बनी देसी रंडी 4
अब आगे…
Didi aur muslim mochi ki chudai ki kahani
अब दीदी ऊपर से पूरी नंगी थीं। दीदी के बूब्स इतने बड़े थे कि अकरम एक हाथ से बूब्स दबाता, दूसरे से चूसता और दीदी की सिसकियाँ निकलती रहीं।
दीदी: आाह… अकरम जी… आराम से… आाहhh… अकरम जी… और चूसो… अकरम जी…
ऐसे करते समय दीदी अकरम के सर पर हाथ फेरने लगीं और अपने बूब्स पर दबाने लगीं। अकरम तो पागलों की तरह चूस रहा था। साथ में अब निप्पल पर काटने लगा। दीदी की एक तेज आह निकल गई।
दीदी: आआआआhhhhh… काटिए मत अकरम… मmmmmmmmm जीiiii… दर्द हो रहा है।
अकरम: तुम्हारे बूब्स कितने रसीले हैं मेरी जान।
दीदी: तो चूस लो ना… मेरे शौहर जी।
अकरम: मेरी जान, मैं तो पागल हो गया हूँ तुम्हारे बूब्स देखकर।
और चूसता रहा। फिर अकरम थोड़ा सीधा हुआ और दीदी का हाथ पकड़ लिया। दीदी का हाथ अपनी पैंट के ऊपर से लंड पर रख दिया। जिसे महसूस करके दीदी डर सी गईं और हाथ हटा दिया। फिर अकरम ने वापस से दीदी के हाथ को पकड़ा और लंड पर रख दिया।
अकरम: देखो मेरी जान, तुमने क्या किया मेरे लंड को। अब तो इसको तुम्हें ही शांत करना होगा।
दीदी: ना बाबा ना… ये देखो, ये तो पैंट में ही झटके दे रहा है।
अकरम: तुम्हारे कारण ही हुआ है। देखो तुम्हारे मुँह में देने के लिए कैसे झटके दे रहा है।
दीदी एकदम रंडी की तरह हँसने लगीं।
अकरम: लो ना मुँह में।
दीदी: अब भी ना।
फिर दीदी खड़ी हुईं और इधर-उधर देखा। मैं जल्दी से नीचे हो गया कि दीदी मुझे न देख सकें। फिर दीदी अकरम के पैरों के पास घुटनों के बल बैठ गईं। अकरम हँसने लगा।
दीदी पहले पैंट के ऊपर से ही लंड को मसल रही थीं। फिर अकरम बोला—
अकरम: अब जल्दी करो ना।
फिर दीदी ने अकरम की पैंट का बटन खोला और पैंट नीचे की। उसके बाद दीदी ने अकरम के अंडरवियर को नीचे किया। वैसे ही अकरम का लंड दीदी के मुँह पर जाकर लगा। दीदी लंड देखकर डर गईं।
अकरम: देखो कैसे झटके दे रहा है।
दीदी: बाप रे… कितना बड़ा है।
दीदी ने उसके लंड को एक उंगली से टच किया। अकरम का लंड झटके देने लगा।
अकरम: देखो।
दीदी ने फिर अकरम के लंड को अपने हाथ में लिया। लेकिन लंड हाथ में भी नहीं आ रहा था। दीदी ने अकरम के लंड को अपने हाथ से नापने लगीं।
दीदी: बाप रे… कैसे लूँगी मैं ऐसे? कितना बड़ा है रे।
फिर दीदी अकरम के लंड को हाथ में लेकर हिलाने लगीं और धीरे-धीरे हिलाती रहीं। दीदी अकरम के लंड को देखकर पूरी गरम हो गई थीं। अब दीदी लंड के पास अपना मुँह लेकर गईं और अकरम के टोपे पर अपनी जीभ फेर दी।
अकरम जैसे पागल हो गया। फिर दीदी अकरम के लंड पर जीभ ही फेर रही थीं। लेकिन अकरम की हालत खराब हो रही थी।
अकरम: बेगम मुँह में लो जल्दी। अब बरदाश्त नहीं होगा।
दीदी ने फिर अकरम के टोपे को मुँह में लिया और टोपे को चूसने लगीं। दीदी पहले टोपे को ही चूस रही थीं और मुँह में लेकर अपनी जीभ टोपे पर घुमा रही थीं। जिससे अकरम की हालत खराब हो रही थी। अकरम दीदी को देखने लगा। दीदी भी अकरम की आँखों में देखने लगीं और लंड को मुँह में लेने लगीं।
अकरम: बेगम पूरा लो ना।
दीदी ने फिर और मुँह में घुसने की कोशिश की। लेकिन जा नहीं रहा था। लेकिन जब दीदी अकरम की आँखों में देखकर चूस रही थीं तो अकरम ने दीदी के सर पर थोड़ा अपने लंड पर धक्का दिया। जिससे पूरा लंड दीदी के मुँह में जाने लगा। फिर अकरम ने अपना हाथ हटा लिया।
फिर दीदी अकरम के लंड को जबरदस्ती पूरा मुँह में लेने लगीं। और अब दीदी को भी लंड लेने में मजा आने लगा। दीदी अकरम के लंड को अपने पूरे मुँह में ले लेतीं और थोड़ी देर बाद बाहर निकालतीं। अकरम दीदी के सर को सहलाने लगता। ऐसे ही दस मिनट और चला।
अकरम से कंट्रोल नहीं हुआ।
अकरम: बेगम मेरा होने वाला है। कहाँ निकालूँ?
दीदी: मुँह में ही निकाल दो अकरम जी। मैं भी इसका टेस्ट लेना चाहती हूँ।
अकरम: बेगम जल्दी मुँह खोलो।
फिर अकरम ने दीदी के मुँह पर अपना माल गिरा दिया। कुछ दीदी के चेहरे पर गया और कुछ दीदी के मुँह में। फिर दीदी ने अपने फेस का सारा माल साफ करके अपने मुँह में डाला। जिसके बाद अकरम बोला—
अकरम: बेगम अपना मुँह खोलो। तुम्हारी फोटो लेनी है।
फिर दीदी ने अपना मुँह खोला। अकरम ने दीदी की फोटो ली।
अकरम: बेगम पी जाओ।
और दीदी ने भी ऐसा ही किया। दीदी माल को पी गईं।
अकरम: कैसा लगा?
दीदी रंडी की तरह मुस्कुरा दीं। उसके बाद दीदी अपनी सीट पर बैठीं। दीदी ने अपने ब्लाउज से अपना मुँह पोंछा। ब्रा और ब्लाउज पहन लिया और अपने कपड़े ठीक किए। अकरम ने भी। उसके बाद मूवी खत्म हो गई और लाइट जल गई।
मैंने दीदी का फेस देखा तो दीदी का लिपस्टिक हट गई थी और दीदी का मेकअप भी उतर गया था। दीदी के फेस पर अभी भी कहीं-कहीं माल लगा हुआ था।
दीदी और अकरम जाने लगे। मैं भी हिला-हिलाकर थक सा गया था। मैं भी हॉल से बाहर जाने लगा। उसके बाद दीदी घर की तरफ जाने लगीं और मैं जल्दी से घर पर पहुँच गया।
मैं घर पहुँच चुका था। दीदी का वेट कर रहा था। दीदी अकरम के साथ घर आ रही थीं। अकरम ने दीदी के फेस पर अपना स्पर्म निकाला था जिससे उसका फेस का मेकअप उतर गया था और साथ में कहीं-कहीं स्पर्म भी लगा हुआ था।
घर पहुँचकर मैं जल्दी से अपने रूम में चला गया और दीदी का वेट करने लगा। दस मिनट के बाद दीदी आईं। दीदी ने बेल बजाया।
मैं: आ रहा हूँ।
फिर मैंने डोर खोला। दीदी की हालत बड़ी खराब थी। ऐसा लग रहा था कि दीदी के साथ अकरम ने ऑटो में भी कुछ किया है। क्योंकि दीदी के ब्लाउज पर कुछ लगा हुआ था। वो कुछ और नहीं, स्पर्म ही था। मतलब मेरे जाने के बाद अकरम ने दीदी के साथ कुछ और भी किया है।
दीदी अंदर आईं। दीदी थोड़ा अजीब सा ही बिहेव कर रही थीं। जैसे वो मुझसे कुछ छिपा रही हों।
मैं: दीदी ये आपने क्या हालत बना रखी है? और आपके कपड़े पर क्या लगा है?
दीदी: क्या बना रखी है? और कहाँ क्या लगा है?
(दीदी ने ये चौंकते हुए बोला)
मैं: दीदी आपके फेस और ब्लाउज पर कुछ लगा है।
दीदी: अरे हाँ… वो मैं मूवी देखते-देखते कोल्ड कॉफी पी रही थी। गलती से मेरी फ्रेंड की वजह से मेरे ऊपर गिर गया था।
मैं मन ही मन सोच रहा था—मुझे पता है दीदी, आपके कौन से फ्रेंड ने आपके ऊपर कौन सी कॉफी गिराई है।
दीदी: अच्छा मैं थोड़ा नहाकर आती हूँ। तूने खाना खाया?
मैं: हाँ दीदी।
दीदी: अच्छा जा फिर सो जा। मैं भी नहाकर सोने जा रही हूँ।
उसके बाद दीदी अपने रूम में चली गईं और मैं भी अपने रूम में चला गया। जाते ही मुझे भी नींद आ गई। क्योंकि आज मैंने थिएटर में चार बार हिला दिया था जिससे मैं सो गया।
मैं सुबह सात बजे उठा। मैंने जल्दी से फोन चेक किया कि दीदी ने रात को क्या बात की है। लेकिन रात को दीदी और अकरम की कोई बात नहीं हुई। जिसके बाद मैं थोड़ी देर और सो गया। आठ बजे उठा। दीदी उठ चुकी थीं और दीदी नाश्ता रेडी कर रही थीं। दीदी मुझे देखकर बोलीं—
दीदी: अरे वाह! तू आज इतनी जल्दी कैसे उठ गया?
मैं: बस दीदी, आँख खुल गई।
दीदी: जा जल्दी नहाकर आ जा।
मैं: ओके दीदी।
उसके बाद मैं नहाकर आ गया और फिर दीदी ने नाश्ता लगा दिया। दीदी और मैं नाश्ता करने लगे। नाश्ते करते समय दीदी मुझसे बोलीं—
दीदी: सुन राहुल।
मैं: हाँ बोलो, क्या हुआ?
दीदी: आज मार्केट जाना है सामान लेने।
मैं: ठीक है। कब जाना है?
दीदी: शाम को तो भीड़ रहती है। क्यों न दोपहर में चलें?
मैं: ठीक है दीदी।
उसके बाद मैं अपने रूम में जाकर फोन चलाने लगा और दीदी भी टीवी देखने लगीं। करीब साढ़े दस बजे अकरम का कॉल आया दीदी के फोन पर। दीदी ने कॉल पिक किया। सामने से अकरम बोला—
अकरम: बेगम क्या कर रही हो?
दीदी: कुछ नहीं अकरम जी। टीवी देख रही थी।
अकरम: अच्छा! बेगम कल तो तुमने मजा ही दिला दिया।
दीदी: (नॉटी आवाज में) आपने कल ठीक नहीं किया रिक्शे में।
अकरम: (हँसते हुए) मैंने क्या किया था बेगम जो तुम नाराज हो रही हो?
दीदी: अच्छा जी, आपने क्या किया था?
अकरम: वही तो पूछ रहा हूँ क्या किया था।
और हँसता रहा।
दीदी: जैसे आपको पता ही नहीं है कि आपने क्या किया था।
अकरम: (बेकसूर बनते हुए) मुझे तो नहीं पता मैंने क्या किया था।
दीदी: अच्छा जी… वो आप रिक्शे में ही मुझे अपना लंड चुसवाने लगे। पता है रिक्शेवाला कैसे देख रहा था।
अकरम: (हँसते हुए) क्या करूँ बेगम। तुमको देखते ही कंट्रोल नहीं हुआ था।
दीदी: अच्छा जी। आपने सिनेमा हॉल में भी इतना कुछ किया। आपका मन नहीं भरा था जो आपने रिक्शे में भी…
अकरम: क्या रिक्शे में भी?
दीदी: रिक्शेवाले के सामने ही शुरू हो गए।
अकरम: अरे बेगम, अरे वो मेरा दोस्त था। उसके सामने ही तो किया था। क्या हो गया?
दीदी: (रंडी जैसी आवाज में) मतलब आपका दोस्त था तो आप कुछ भी करेंगे?
अकरम: अपनी बेगम के साथ ही तो कर रहा था।
और हँसने लगा।
दीदी: अब हँसिए मत। पता है आपने मेरे मुँह और ब्लाउज पर ही वापस से अपना माल गिरा दिया था।
अकरम: अरे वो कंट्रोल नहीं हुआ था। एकदम से निकल गया था।
दीदी: आपके वजह से मैं तो कल फसते-फसते बची हूँ।
अकरम: कैसे?
दीदी: कल जब मैं घर पहुँची तो राहुल ने मेरे कपड़े पर लगा हुआ आपका माल देख लिया।
अकरम: अच्छा?
और हँसने लगा।
अकरम: और क्या हुआ?
दीदी: वो पूछने लगा—दीदी ये क्या लगा है?
अकरम: अच्छा।
दीदी: मैंने बोल दिया था कि मेरे दोस्त की कोल्ड कॉफी गिर गई थी।
अकरम: (हँसते हुए) अच्छा… कोल्ड कॉफी गिरी थी।
दीदी: तो क्या बोलती उससे?
अकरम: बोल देती—तेरे नए जीजू का लंड चूसके आई हूँ।
दीदी: (हँसते हुए) आप भी ना। बड़ी जल्दी है आपको उसका जीजा बनने की।
(रंडी जैसी आवाज में)
अकरम: हाँ बेगम जी। कर लो ना निकाह।
दीदी: (मजाक करते हुए) जाइए। कौन करेगा आपसे निकाह। अपनी एज तो देखिए। दादा बनने की एज में निकल पड़े।
अकरम: अच्छा तो कर लो निकाह और बन जाओ उसकी दादी। फिर दोनों मिलकर खिलाएँगे।
दीदी: अच्छा जी मुझे दादी ही बना दिया।
अकरम: निकाह कर लो। अपने बच्चे की अम्मी भी बना दूँगा। वो भी सात बच्चों की।
दीदी: बाप रे… सात बच्चे!
अकरम: क्यों डर गईं? अभी भी बहुत जान है मेरे में।
दीदी: (सेक्सी आवाज में) ना बाबा ना। मुझे नहीं करनी आपके निकाह। आप तो मुझे मार ही डालोगे।
दीदी: वो तो कल मैंने आपकी ताकत देखी ही थी। आपने कैसे मुझे रिक्शे के अंदर ही उठाकर अपनी गोदी में बिठा दिया था।
अकरम: (हँसते हुए) बताओ तो कब का शादी का कार्ड छपवाऊँ?
दीदी: कार्ड क्यों छपवाओगे?
अकरम: निकाह नहीं करोगी मुझसे?
दीदी: अरे मैं अपने हसबैंड को कैसे धोखा दे सकती हूँ।
अकरम: अरे बेगम, कौन सा तुम्हारा हसबैंड तुम्हारे साथ रहता है। वो तो इतनी सेक्सी वाइफ को छोड़कर चला गया चेन्नई।
दीदी: फिर भी नहीं अकरम जी।
अकरम: बेगम मान जाओ। नहीं तो तुमको घर से भगाकर ले जाऊँगा।
दीदी: अच्छा जी मुझे भगा ले जाओगे?
अकरम: हाँ। और फिर निकाह करूँगा।
दीदी: मुझे पता है आप किस लिए निकाह करना चाहते हो।
अकरम: (हँसते हुए) अच्छा जी, किस लिए?
दीदी: (हँसते हुए) आप तो निकाह के बाद मुझे बेड से नीचे भी नहीं उतरने दोगे।
अकरम: अरे बेगम, बेड से नहीं… लंड से नहीं उतरने दूँगा।
(और हँसने लगा)
दीदी: अच्छा जी आप पूरे दिन मुझे उस पर ही बिठाकर रखोगे क्या?
(खिलखिलाकर हँसने लगीं)
अकरम: बेगम एक बार निकाह तो होने दो। एक दिन में ही तुम्हें अपने बच्चे की माँ बना दूँगा।
दीदी: अरे आपको इतनी जल्दी है मुझे माँ बनाने की?
अकरम: और क्या। तुम्हारे भाई को मामा भी तो बनाना है।
दीदी: उसको जब पता चलेगा कि बच्चा उसके जीजा का नहीं, किसी और जीजा का है तो क्या होगा?
अकरम: क्या होगा? कुछ नहीं होगा। तुम्हारे भाई को तो मैं पटा लूँगा।
दीदी: अच्छा जी।
अकरम: हाँ बेगम साहिबा। निकाह के बाद तो तुम्हें पूरे दिन-रात चोदता रहूँगा।
दीदी: अच्छा। खाना खाने भी नहीं जाने दोगे क्या?
अकरम: (हँसते हुए) खाना खाने की क्या जरूरत है। मेरा माल खाकर पेट भर लेना ना।
दीदी: छी… आप भी ना। कैसी गंदी बात करते हो।
अकरम हँसता रहा।
ऐसे ही दीदी और अकरम की बात एक बजे तक चली। फिर दीदी ने कॉल कट कर दी। उसके बाद दीदी मार्केट जाने के लिए मुझे बोलीं और खुद रेडी होने चली गईं।
करीब तीस मिनट के बाद दीदी एक ब्लू कलर की सेक्सी सी साड़ी पहनके आईं। साथ में बैकलेस ब्लाउज।
दीदी को देखकर तो मैं जैसे पागल सा हो रहा था। मैं सोचने लगा—दीदी कैसे उस अकरम से पट गईं। काश दीदी मेरी रंडी होतीं। मैं दीदी को देखकर सोच ही रहा था कि दीदी बोलीं—
दीदी: अरे क्या देख रहा है घूर-घूर कर?
मैं: अरे दीदी आज तो आप बहुत सुंदर लग रही हो।
दीदी: अच्छा। आज से पहले तो कभी तूने नहीं बोला। आज क्या हो गया बेटे? पैसे की जरूरत होते ही मक्खन मारने लगा।
मैं: अरे नहीं दीदी। आप सच में आज बहुत सुंदर लग रही हो।
दीदी: अच्छा चल। चलें मार्केट।
मैं: चलो दीदी।
उसके बाद दीदी ने घर लॉक किया और हम मार्केट की तरफ निकल गए। जब हम मार्केट जा रहे थे तो हमारे एरिया के सारे बुड्ढे से लेकर जवान लड़के, सभी दीदी की गाँड को हिलते हुए देख रहे थे। और दीदी भी जानबूझकर आज कुछ ज्यादा ही अपनी गाँड हिला रही थीं। कुछ लोग तो अपना लंड भी मसल रहे थे दीदी को देखकर।
फिर हम मार्केट में पहुँच गए। आपको पता ही है गर्मी में दोपहर को बहुत कम लोग होते हैं। ऐसे ही आज भी बहुत कम लोग थे।
हम कुछ सब्जी लेकर वहीं कोने वाली फ्रूट की दुकान गए। जैसे ही हम उधर पहुँचे—
अब्दुल: अरे भाभी जी, नमस्ते।
दीदी: नमस्ते अब्दुल जी।
अब्दुल ने मुझे नहीं देखा था। साला मेरी दीदी को ही घूरे जा रहा था। क्या करें, दीदी हैं ही इतनी सेक्सी कि किसी की नजर हटती ही नहीं।
हँसते हुए अब्दुल बोला—
अब्दुल: क्या हुआ भाभी जी? अकरम भाई जान ने केला नहीं दिया कि जो आप हमारे पास आ गईं केला लेने?
दीदी हँसने लगीं। दीदी सोच रही थीं कि मैं कुछ समझ नहीं रहा। लेकिन उनका क्या पता मुझे सब पता है और किस केले की बात हो रही है।
अब्दुल: वैसे मेरे पास भी बहुत बड़ा केला है। लोगी क्या भाभी जी?
दीदी: (हँसते हुए) नहीं अब्दुल जी। हमें तो अकरम जी का ही पसंद है।
अब्दुल: तो क्या हुआ? कभी हमें भी मौका दीजिए।
ऐसे ही अब्दुल और दीदी बात कर रहे थे कि अकरम दूर से दीदी को देखा और बोला—
अकरम: अरे बेगम तुम यहाँ बिना बताए?
दीदी जैसे डर ही गईं कि अकरम ने ये क्या बोल दिया। और मुझे देखने लगीं। लेकिन मैंने कुछ रिएक्ट नहीं किया। दीदी को लगा जैसे मैंने सुना ही नहीं।
फिर अकरम हमारे पास आया और दीदी को देखकर बोला—
अकरम: बेगम बिना बताए आ गईं?
दीदी आँखें बड़ी करते हुए अकरम को देखने लगीं और आँखों से मेरी तरफ इशारा करने लगीं।
अकरम: क्या हुआ बेगम?
फिर मैं भी अब दीदी से मजे लेने के लिए बोला—
मैं: दीदी ये अंकल आपको बेगम क्यों बोल रहे हैं? और ये तो मोची वाले अंकल हैं ना?
दीदी थोड़े शॉक में। अब क्या बोलें, उसे क्या बोलूँ। फिर एकदम से अब्दुल बोला—
अब्दुल: भाभी जी ये आपका भाई है क्या?
दीदी: हाँ अब्दुल जी। ये मेरा भाई है।
मैं: दीदी बोलो तो क्यों बोल रहे हैं?
दीदी: अरे ये मुझे प्यार से बेगम बोलते हैं।
(दीदी के मुँह से एकदम से निकल गया)
मैं: प्यार से?
फिर दीदी को रियलाइज हुआ कि उन्होंने क्या बोल दिया। फिर दीदी घबराहट में बोलीं—
दीदी: ये मेरे फ्रेंड हैं राहुल। इसलिए ये मुझे प्यार से बोलते हैं। निकनेम है राहुल।
फिर अकरम बोला—
अकरम: हाँ साले साहब। प्यार से बोलता हूँ मैं तुम्हारी दीदी को बेगम।
और हँसने लगा।
मैं: दीदी देखो ये मुझे क्या बोल रहे हैं।
दीदी: (आँख दिखाते हुए) अरे अकरम जी क्या बोल रहे हो?
अकरम: अरे बेगम… निकनेम है।
दीदी फिर मुझसे बोलीं—
दीदी: देख राहुल, तेरा निकनेम भी रख दिया।
और थोड़ी बनावटी हँसी हँसते हुए बोलीं।
मैं: दीदी लेकिन इसका मतलब तो पत्नी होता है ना?
दीदी: हाँ बाबू। मुझे भी पता है। लेकिन इनको मेरा नाम याद नहीं रहता इसलिए ये मुझे बेगम बोलते हैं।
मैं: दीदी क्यों?
अकरम: साले साहब तुम्हारी बहन मेरी बेगम है। इसलिए बेगम बोल रहा हूँ। तुम्हारी बहन मेरे से निकाह करने वाली है।
मैं: दीदी क्या बोल रहे हैं ये? आपसे निकाह करने वाले हैं?
दीदी: अरे अब्दुल जी अब भी ना मजाक करते रहते हैं। मजाक कर रहे हैं। दोस्त हैं मेरे इसलिए मजाक करते रहते हैं।
मैं: अच्छा दीदी।
दीदी को लगा जैसे मुझे कुछ नहीं समझ रहा। फिर दीदी अकरम की तरफ देखकर घूरते हुए बोलीं—
दीदी: अकरम जी चुप रहिए। क्या बोल रहे हैं आप? मुझे फँसवाना चाहते हैं क्या?
अकरम: अच्छा ठीक है।
फिर थोड़ा माहौल ठीक हुआ। फिर अब्दुल बोला—
अब्दुल: अरे भाभी जी बोलिए क्या चाहिए?
दीदी: एक किलो सेब कर दीजिए।
अब्दुल: छाँट लो भाभी जी।
दीदी फिर सेब छाँटने लगीं। फिर एकदम से अकरम ने मेरे सामने ही दीदी की गाँड पर अपना हाथ रख दिया। उसको लगा मैं उसको नहीं देख रहा।
दीदी जैसे डर सी गईं और मेरी तरफ देखने लगीं। मैं उस समय सेब छाँटने में दीदी की मदद कर रहा था। तो दीदी को लगा मैंने नहीं देखा। फिर दीदी अकरम की तरफ देखीं और आँखें बड़ी करते हुए धीरे से बोलीं—
दीदी: क्या कर रहे हो?
अकरम दाँत दिखाकर हँसने लगा। और अकरम ऐसे ही दीदी की गाँड को मसलता रहा। दीदी कुछ रिएक्ट नहीं कर रही थीं। क्योंकि अगर कुछ रिएक्ट करेंगी तो राहुल को पता लग जाएगा। और मसलता रहा।
और मैं अकरम को दीदी की गाँड मसलते हुए देखने लगा। फिर मैं तो चौंक ही गया अकरम की हरकत देखकर। साला बुड्ढा इतना हरामी है।
साला दीदी की साड़ी के अंदर हाथ डालने की कोशिश करने लगा। लेकिन हाथ नहीं जा रहा था क्योंकि कमर पर साड़ी टाइट होती है। तो उसका हाथ नहीं जा रहा था। लेकिन साला इतना हरामी है कि ट्राई करता रहा। और पूरी ताकत लगाकर दीदी की साड़ी के अंदर हाथ डाल दिया। दीदी भी सरप्राइज हो गईं। दीदी ने इस चीज की उम्मीद नहीं की थी।
साला अकरम दीदी की नंगी गाँड को मसलने लगा। दीदी अकरम को देखकर आँखें बड़ी करके बोलीं—
दीदी: अकरम जी क्या कर रहे हो? मेरा भाई देख लेगा।
अकरम: (धीरे से) नहीं देखेगा। तुम अपने काम करो।
और अकरम दीदी की नंगी गाँड को पागलों की तरह मसलने लगा और दबाने लगा। दीदी की हालत खराब होने लगी।
फिर अब्दुल बोला—
अब्दुल: और क्या चाहिए भाभी जी?
अकरम बोला—
अकरम: भाई तरबूज कर दे।
और हँसने लगा। अब्दुल भी दीदी को देखकर हँसने लगा।
एकदम से अकरम ने दीदी की गाँड के छेद में अपनी उंगली डाल दी। दीदी की आह निकल गई।
दीदी: आआआhhhhh……
अकरम ने अपना हाथ निकाल लिया। मैं दीदी से बोला—
मैं: क्या हुआ दीदी?
दीदी: अरे कुछ नहीं। चींटी ने काट लिया।
पूछो पता है किसने काटा है दीदी।
फिर दीदी वापस से सामने देखने लगीं और मैं भी। अकरम फिर से दीदी की साड़ी में वापस से हाथ डाला और गाँड को मसलने लगा। और इस बार वापस से दीदी की गाँड में उंगली डाल दी। दीदी दर्द को बरदाश्त करने लगीं।
अकरम दीदी की नाजुक सी छोटे से छेद में अपनी उंगली डाल रहा था। दीदी ने आज तक कभी भी अपनी गाँड नहीं मरवाई थी। दीदी को बहुत दर्द हो रहा था। दीदी के फेस से पता चल रहा था। जो कि अब्दुल को भी पता चल रहा था।
अब्दुल: केला नहीं लोगी भाभी जी?
दीदी: दे दीजिए।
(थोड़े दर्द में)
अब्दुल: देख लीजिए भाभी जी। आपको कौन सा लेने हैं।
अकरम दीदी को देखकर आँखों से कुछ इशारा करने लगा।
अब्दुल: भाभी जी एक काम करिए। पीछे गली में मेरा घर है। उधर ताजे-ताजे केले रखे हैं। उधर से जाकर ले लो।
दीदी: क्यों अब्दुल जी?
अकरम: हाँ बेगम पीछे चलो। उधर से ले लो।
और दीदी को देखकर कुछ इशारा करने लगा। दीदी इशारे में उसे मना करने लगीं। फिर अकरम दीदी की गाँड से हाथ निकाला। और जो उंगली दीदी की गाँड में डाली थी उसको सूँघकर मुँह में डालकर चाटने लगा। दीदी एकदम शॉक हो गईं कि अकरम ने क्या किया।
फिर अकरम बोला—
अकरम: चलो बेगम।
अकरम जिद करने लगा तो दीदी बोलीं—
दीदी: चलिए।
और दीदी मुझसे बोलीं—
दीदी: राहुल तू इधर मेरा वेट कर। मैं केला लेकर आती हूँ।
फिर अकरम बोला—
अकरम: साले साहब मैं तुम्हारी दीदी को केला देकर आता हूँ।
और हँसने लगा। दीदी की भी हँसी निकल गई।
मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि दीदी कैसे अकरम के कंट्रोल में हो गई हैं। वो जो भी बोलता है दीदी कर लेती हैं।
फिर अकरम और दीदी पीछे गली में चले गए। और दस मिनट हो गए अभी तक आए नहीं थे। फिर अब्दुल बोला—
अब्दुल: लगता है अकरम भाई जान तुम्हारी बहन को कोई बड़ा सा केला दे रहा है जो अभी तक नहीं आए।
और हँसने लगा। उसको लग रहा था कि जैसे मुझे नहीं पता। फिर वो मुझसे बोला—
अब्दुल: तुम इधर रुको। मैं अभी आता हूँ।
और वो भी पीछे गली में चल दिया। उसके गए दो मिनट हो गए और वो भी नहीं आया। फिर मैं भी उसके पीछे गया। और क्या देखा कि अकरम ने दीदी को अपनी गोद में बिठा रखा है। दीदी ऊपर से पूरी नंगी थीं। दीदी की साड़ी कमर तक थी। और अकरम दीदी के बूब्स एक हाथ से चूस रहा था और एक हाथ अकरम का दीदी की गाँड पर था। और एक उंगली दीदी की गाँड में डाल रहा था और अंदर-बाहर कर रहा था।
दीदी: अकरम जी दर्द हो रहा है। धीरे-धीरे करिए… आाहhh आाहhh आाहhh अकरम जी…… आाहhh
अकरम: कहाँ दर्द हो रहा है?
दीदी: अकरम जी गाँड में हो रहा है।
फिर अकरम बोला—
अकरम: क्या करूँ मैं रंडी। तेरी गाँड ही इतनी मस्त है। बिना उंगली डाले रुका नहीं जा रहा।
दीदी और अकरम अंदर रूम में ये सब कर रहे थे। और अब्दुल बाहर गेट पर खड़ा था। और मैं खिड़की से देख रहा था।
अब्दुल: अरे भाई कब तक करेगा यार। मेरा भी मन कर रहा है।
अकरम: अरे कैसे बात कर रहा है साले। तेरी भाभी है।
अब्दुल: भाई कर नहीं सकता तो दिखा दे।
अकरम दीदी से बोला—
अकरम: बेगम उसको बुला लूँ क्या?
दीदी: कैसी बात कर रहे हो। मुझे क्या समझ रखा है?
अकरम: बेगम बाहर खड़ा है। देख लेगा बस।
दीदी: नहीं अकरम जी।
अकरम: तुमको मेरे पे विश्वास नहीं है क्या?
दीदी: है अकरम जी।
अकरम: तो बुला लो ना।
दीदी: ठीक है अकरम जी।
अकरम अब्दुल से बोला—
अकरम: भाई अंदर आ जा।
अब्दुल: अरे भाई जान क्या ही मजे ले रहे हो।
अब्दुल अंदर रूम में जाकर दीदी और अकरम के सामने बैठ गया। और अपनी पैंट खोलकर लंड बाहर निकाल लिया। दीदी की पीठ थी अब्दुल के सामने। इसलिए दीदी ने नहीं देखा था।
और मैं ये देखकर पागल सा हो गया। मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि दीदी कैसे रंडी जैसी हरकत करने लगी हैं।
और अकरम ऐसे ही दीदी के बूब्स चूसता रहा और गाँड में उंगली करता रहा। और मैं बाहर दीदी को देखकर मुठ मार रहा था।
अब्दुल: भाभी जी आपकी गाँड कितनी बड़ी है।
दीदी: देखो अकरम जी। आपके दोस्त आपके सामने ही मुझसे मजे ले रहे हैं।
अकरम: अरे दोस्त है मेरा। करने दो।
दीदी अकरम से बोलीं—
दीदी: हाँ अब्दुल जी। बड़ी तो है लेकिन अकरम जी की है।
और हँसने लगीं। अकरम को किस करने लगीं। और बूब्स दबा रहा था और गाँड में उंगली कर रहा था।
फिर अकरम ने दीदी से बोला—
अकरम: बेगम थोड़ा जरा घूमो तो। तुम्हारी गाँड का स्वाद लेना है।
फिर दीदी अकरम की गोदी से खड़ी होकर अब्दुल की तरफ। जैसे ही फेस किया दीदी की आँख फट गई। क्योंकि अब्दुल अपना 10 इंच का लंड हिला रहा था।
दीदी: अकरम जी देखिए क्या कर रहे हैं ये।
अब्दुल: क्या करूँ भाभी जी। आप हो ही ऐसी माल।
अकरम: करने दो बेचारे को।
(और हँसने लगा)
फिर अकरम ने दीदी की गाँड को चाटने लगा।
अकरम: आाह बेगम। तुम्हारी गाँड की खुशबू तो मुझे पागल कर रही है।
दीदी बहुत गरम हो गई थीं। दीदी भी गाँड चटाई से पागल हो रही थीं।
दीदी: अकरम जी चाटिए… अकरम जी चाटिए… ओह मम्मी… अmmmm
अकरम दीदी की गाँड के छेद पर अपनी जीभ से चाट रहा था। साथ में दीदी की गाँड के छेद में अपनी जीभ डालने की कोशिश करने लगा।
दीदी: आाह अकरम जी बहुत अच्छा लग रहा है। करते रहिए।
दीदी को इतना मजा आ रहा था कि दीदी फिर अपनी गाँड को खुद से अकरम के फेस पर रगड़ने लगीं। जिसे देखकर अब्दुल अपना लंड हिला रहा था। और दीदी उसको देख रही थीं।
दीदी पहले से ही इतनी गरम थीं कि वो अब्दुल का लंड देखकर अपने होंठों पर जीभ फेरने लगीं। जिसे देखकर अब्दुल बोला—
अब्दुल: अकरम भाई लग रहा है भाभी को मेरा लंड चाहिए। दे दूँ क्या?
अकरम: क्या बोल रहा है बे।
अब्दुल: भाई भाभी को मेरा लंड मुँह में चाहिए।
अकरम: बेगम क्या बोल रहा है ये?
दीदी कुछ नहीं बोलीं और शर्माने लगीं।
अब्दुल: देख भाई भाभी भी शर्मा रही हैं।
अकरम: भाई अगर चाहिए तो दे दे। लेकिन उससे आगे कुछ मत करियो। ठीक है?
अब्दुल: ठीक है भाई।
अब्दुल ने अपनी पैंट अपने से अलग की और दीदी के पास गया। दीदी को देखकर बोला—
अब्दुल: बोल भाभी जी। जरा मुँह में तो लो।
दीदी शर्माने लगीं। अब्दुल ने अपना लंड दीदी के होंठ से टच करने लगा। फिर दीदी ने खुद उसका लंड पकड़ लिया और हिलाने लगीं। और उसके बाद दीदी उसका लंड मुँह में लेने लगीं।
और पीछे अकरम खड़ा हुआ और अपना लंड पीछे से दीदी की गाँड की दरार में रगड़ने लगा। वो भी नंगा।
दीदी इस समय मुझे एक सस्ती रंडी लग रही थीं जो एक साथ दो लोगों को खुश कर रही थीं। अकरम पीछे से दीदी की गाँड में लंड रगड़ रहा था और आगे से अब्दुल दीदी के मुँह में लंड दे रहा था।
ऐसे ही पंद्रह मिनट चला। अब्दुल ने पहली बार इतनी सेक्सी लड़की के मुँह में दिया था। जिससे उसे कंट्रोल नहीं हुआ और दीदी के मुँह में झड़ गया। और इतना माल गिरा कि दीदी का मुँह भर गया। और माल दीदी के मुँह से दीदी के बूब्स पर गिरने लगा। अब्दुल आह-आह करते-करते पीछे जाकर बैठ गया।
दीदी ने मुँह का सारा माल पी गईं। दीदी इतनी गरम हो गई थीं कि दीदी को पता भी नहीं था कि दीदी किसके साथ क्या कर रही हैं।
फिर अकरम ने दीदी को अपनी तरफ घुमाया।
अकरम: बेगम चूसो।
दीदी स्टार्ट हो गईं। दीदी अकरम का लंड चूस ही रही थीं कि दीदी भी झड़ गईं। और दीदी ने सारा पानी नीचे गिरा दिया। और कुछ दीदी की साड़ी पर गिर गया जिससे दीदी की साड़ी गीली हो गई। अब दीदी के अंदर जान नहीं थी।
दीदी: अकरम जी अब मेरे से नहीं हो पाएगा। आप अपने आप ही कर लो।
अकरम: ठीक है बेगम। तुम बैठ जाओ और बस मुँह में ले लो।
दीदी ने वैसा ही किया। बाकी का सारा काम जैसे अकरम खुद ही करने लगा। उसने दीदी के चेहरे को पकड़ा और दीदी के मुँह को चोदने लगा। दीदी तो जैसे सुन थीं।
करीब दस मिनट ऐसा ही चला। उसके बाद दीदी वापस से गरम हो गईं और दीदी भी खुद अपना सर हिलाने लगीं। अकरम भी धक्के दे रहा था। ऐसे ही दस मिनट के बाद—
अकरम: आाह… बेगम… आाहhh… मेरा होने वाला है। जल्दी घूम जाओ। तुम्हारी गाँड पर निकालूँगा।
दीदी जल्दी से घूम गईं। और अकरम ने दीदी की गाँड पर माल गिरा दिया। और अकरम पीछे जाकर बैठ गया। दीदी भी जमीन पर बैठ गईं और पीछे हाथ ले जाकर अपने हाथ में माल लिया और चाट गईं।
जिसे देखकर अकरम बोला—
अकरम: बेगम तुम तो प्रोफेशनल हो गई हो।
दीदी रंडी की तरह हँसने लगीं।
बाहर मेरा भी लंड हिला-हिलाकर बुरा हाल हो गया था।
फिर अकरम ने अपने कपड़े ठीक किए। दीदी और अब्दुल ने भी। फिर दीदी अपने कपड़े पहनने वाली थीं लेकिन दीदी की ब्रा नहीं मिल रही थी।
अब्दुल: अरे भाभी जी रहने दो। मुझे मिल जाएगी तो मैं आपको दे दूँगा।
दीदी: ठीक है अब्दुल जी।
फिर दीदी ने अपनी साड़ी कमर से नीचे की और बिना ब्रा के ब्लाउज पहन लिया। दीदी की हालत देखने लायक थी। दीदी किसी रंडी की तरह लग रही थीं। जिसको लोग चोद देते हैं उसके बाद जो रंडी की हालत होती है ठीक वैसे ही दीदी की भी हालत थी।
फिर तीनों बाहर जाने लगे। मैं जल्दी से दुकान के पास चला गया। वो तीनों हँस-हँसकर आ रहे थे।
मैंने देखा दीदी के हाथ में तो केला था ही नहीं।
दीदी मेरे पास आईं।
दीदी: चल राहुल चलते हैं।
मैं दीदी से बोला—
मैं: दीदी आप तो केले लेने गई थीं ना?
इस बार अकरम और अब्दुल हँसने लगे। दीदी की भी हँसी निकल गई।
दीदी: राहुल वो केले तो मैं खा गई थी उधर। बस वही बड़े केले थे। इसलिए मुझे अच्छे लग रहे थे तो खा गई।
इस बार अब्दुल बोला—
अब्दुल: तुम्हारी बहन ने आज बड़े अच्छे से केले खाए हैं।
फिर अकरम बोला—
अकरम: हाँ। साथ में अपने आम और तरबूज भी तो दिए। मजा आ गया खाकर।
दीदी उससे बोलीं—
दीदी: आप लोग भी ना। जो मर्जी बोलने लगते हो।
मैं: दीदी आपकी हालत तो देखो। क्या हो रही है?
दीदी: क्या हो रही है?
मैं: देखा कैसे आपके बाल बिखरे हुए हैं। और आपके ब्लाउज पर भी गीला है। और आपकी साड़ी भी आगे और पीछे से गीली हो रही है।
दीदी कुछ नहीं बोलीं और हँसने लगीं। जिस पर अकरम बोला—
अकरम: साले साहब बेगम ने आज बड़ी मेहनत की है। इसलिए ये हाल हुआ है।
जैसे इस फोटो में हालत है ठीक वैसे ही दीदी की हालत थी। इधर-उधर स्पर्म लगा हुआ था। फेस का स्पर्म सूख गया था। साड़ी आगे-पीछे से गीली थी। दीदी एक रंडी लग रही थीं।
दीदी खिलखिलाकर हँसने लगीं। दीदी को अब लंड का नशा लग चुका था। अब दीदी को कुछ फर्क नहीं पड़ रहा था कि कौन क्या कहेगा। दीदी को अब मेरी भी टेंशन नहीं थी।
मैं: दीदी आप तीनों एक घंटे से अंदर क्या कर रहे थे?
फिर तीनों हँसने लगे।
दीदी: तू घर चल। तुझे सब बताती हूँ।
फिर हम सामान लेकर चलने लगे।
अकरम: बाय बेगम जान।
दीदी: बाय शौहर जी।
दीदी को रियलाइज हुआ कि उन्होंने क्या बोल दिया। जब दीदी ने मुझे देखा तो बोलीं—
दीदी: अरे राहुल गलती से बोल दिया। वो मुझे बेगम बोलते हैं ना इसलिए आदत हो गई है।
मैं: दीदी मैं समझ रहा हूँ।
दीदी: क्या समझ रहा है?
दीदी के फेस पर टेंशन आ गया था।
मैं: दीदी कुछ नहीं।
उसके बाद हम घर पहुँच गए।
दीदी के साथ जो हुआ उसके बारे में घर आने के बाद मैंने दीदी से पूछा। और दीदी ने जो बताया वो अगले पार्ट में…
Next Part ==> मेरी दीदी बनी देसी रंडी 6

Bro next part
Next part me kya hua
Hey
Tumhe bhi interest hai isme
Next part Bro, I am waiting
Agla bhag bhi likho
kab aayega bro next part
Next part
I can’t waiting please upload next part