नवरात्रि पर अंकल ने चोदी मेरी चूत 2
Navratri par uncle se chut chudai:- दिव्या के मम्मी-पापा नवरात्रि में गाँव चले गए थे। महेश अंकल घर पर ही रह गए थे दिव्या का ध्यान रखने के बहाने। गरबा खेलने के बाद दोनों घर आए। अंकल दिव्या को घूर रहे थे और उनका लंड खड़ा हो रहा था। लाइट चली गई तो दिव्या डरकर अंकल से चिपक गई।
Part 1 ==> नवरात्रि पर अंकल ने चोदी मेरी चूत 1
Navratri par uncle se chut chudai
नमस्कार फ्रेंड्स, मैं प्रियंका। सबसे पहले मेरी स्टोरी पढ़ने वाले सभी नए और पुराने रीडर्स को बहुत बड़ा थैंक यू। मुझे आप सबके इतने मेल्स पढ़कर बहुत खुशी हुई और मैं कोशिश करूँगी कि सबका रिप्लाई कर पाऊँ।
जैसे आप सबने लास्ट स्टोरी में पढ़ा ही होगा कैसे महेश अंकल ने दिव्या को चोदने का पूरा प्लान बनाया था और वो भी अब धीरे-धीरे उनकी बातों में आ रही थी।
तो स्टोरी को आगे बढ़ाते हुए स्टोरी स्टार्ट करती हूँ।
नवरात्रि खेलकर आने के बाद कैसे हम मेरे घर आ गए और अंकल मुझे घूरे जा रहे थे जिससे मुझे बहुत शर्म आ रही थी।
उनकी बातें सुनकर मुझे इतनी शर्म आई कि मैं कॉफी के दोनों कप उठाकर बाहर की रूम में आ गई और वो भी मेरे पीछे-पीछे बाहर आ गए।
बाहर आकर मैं सोफे पर बैठ गई और वो भी मेरे पास आकर बैठ गए और हम कॉफी पीने लगे। ए.सी. इतनी ज्यादा होने की वजह से मुझे बहुत ठंड लग रही थी पर अच्छा भी लग रहा था कि गरबा की वजह से हुआ पसीना चला गया था।
अंकल कॉफी पीते हुए भी मुझे ही घूरे जा रहे थे। मेरी चुचियों को देख रहे थे और दूसरे हाथ से अपने लंड को शॉर्ट्स के ऊपर से सहला रहे थे जिस वजह से उनका लंड खड़ा होने लगा था जो मैं अच्छे से देख पा रही थी।
अचानक ही लाइट चली गई और मैं अंधेरे में बहुत डरती हूँ तो मैं जोर से चीख पड़ी और जाकर महेश अंकल से चिपक गई क्योंकि वही तो थे जो मेरे नजदीक बैठे थे। मुझे अपने इतनी नजदीक पाकर उन्हें तो मौका मिल चुका था जो वो कब से ढूंढ रहे थे।
डर के मारे मैं उनसे बिल्कुल चिपक गई और मुझे डरते देख उन्होंने तुरंत अपना हाथ मेरी पीठ में ले जाकर सहलाने लगे। आप सबने लास्ट स्टोरी में पढ़ा ही होगा कि मैंने चोली बैकलेस पहनी थी इसलिए उनका हाथ डायरेक्टली मेरी नंगी पीठ को छू रहा था।
उनका हाथ लगते ही मेरे पूरे शरीर में एक करंट दौड़ उठा और तब मैंने गलती से एक हाथ उनके खड़े लंड पर लगा दिया जिससे उनके मुँह से “आहा” की सिसकारी निकल गई।
अब उन्होंने मुझे और ज्यादा खुद की तरफ खींचा और एक ही झटके में मेरे लिप्स पर किस करने लगे। मैं अचानक इतनी चौंक गई पर पता नहीं क्यों मैं उन्हें खुद से दूर नहीं कर पाई और उनका साथ देने लगी।
हम लोगों ने कुछ शायद 10 मिनट तक टंग टू टंग किस किया। इसी बीच अंकल अपना हाथ नीचे लाकर जोर-जोर से मेरी चुचियाँ दबाने लगे जो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।
अब हमने किस तो तोड़ लिया पर अभी भी अंकल के दोनों हाथ मेरे शरीर पर ही थे। मैंने अंकल से कहा—
दिव्या: ये सब गलत है। हमें ये नहीं करना चाहिए।
जिस पर उन्होंने कहा—
महेश: मेरी रानी, मेरी सपनों की परी दिव्या। इसमें कुछ भी गलत नहीं। एक लड़की और एक मर्द के बीच ये सब होना बहुत नॉर्मल है। और दिव्या तुम टेंशन नहीं लो। किसीको कुछ पता नहीं लगेगा।
पता नहीं कैसे उनकी ये बातों में मैं आ गई और कैसे मेरे शरीर ने मुझे उनकी तरफ खींचा। मैं तुरंत जाकर उनकी दोनों जाँघों पर बैठ गई और उन्हें जोर-जोर से किस करने लगी और बोलने लगी—
दिव्या: अंकल बस अब आप आज की रात रुकना नहीं। मुझे आज जवानी का मजा चखा ही लीजिए। कर लीजिए अपना सपना पूरा। मुझे चोदकर मेरी चूत में अपना लंड डालकर बना दीजिए मुझे अपनी औरत।
मेरी ये बातें सुनकर अंकल को बड़ा झटका लगा पर वो ये भी समझ गए कि उनका प्लान अब सक्सेसफुल होने लगा है और उन्हें जो बचपन से मेरी चूत के सपने देखे हैं आज वो कुँवारी चूत उनकी होने वाली है। इसी खुशी में उन्होंने जोर से मेरी नीचे वाली लिप्स पर काट लिया और दूसरे हाथ से मेरे बूब्स की निप्पल्स चोली के ऊपर से खींचने लगे।
अब हम किस करते-करते अंकल मुझे गोद में ही उठाकर मेरी बेडरूम में ले गए और बेड पर जोर से पटक दिया और खींचकर मेरे लहंगा-चोली फाड़कर निकाल दिए।
अब मैं उनके सामने बिल्कुल नंगी थी। वो एक भूखे शेर की तरह मुझ पर आए और मेरे पूरे नंगे शरीर को चूसने और चाटने लगे और मैं सिर्फ लेटी-लेटी तड़प रही थी। आहें भर रही थी और उनके हर चूसाई का आनंद उठा रही थी।
पहले वो मेरी चुचियाँ जोर से चूसने और काटने लगे और इतना दबाने लगे कि मुझे बहुत दर्द हो रहा था पर मैं आज ये दर्द झेलना चाह रही थी। महसूस करना चाह रही थी इसलिए मैंने अंकल को रोकने की सोची भी नहीं।
अब चुचियाँ चूसते-चूसते वो धीरे-धीरे नीचे आते गए और सीधा मेरी नंगी चूत पर आकर उसको सहलाने लगे। उनका ये करना तो मेरे लिए बर्दाश्त के बाहर था और मैं जोर से बोल पड़ी—
दिव्या: आआआह्ह्हह महेश मत तड़पाओ मेरी चूत को। आज ये बहुत गीली है आपके लिए।
मेरे मुँह से उनका नाम सुनकर वो और जोश में आ गए और सीधा मेरी चूत अपनी उंगलियों से खोलकर चूसने लगे।
दिव्या: आआआह्ह्ह… आह्ह्ह… ओओह्ह्ह… ओओह्ह्ह…
मैं ऐसे ही आहें भरती रही और उनका सर और मेरी चूत में घुसाने की कोशिश कर रही थी।
महेश अपनी जीभ को नुकीला बनाकर मेरी चूत को अपनी जीभ से चोदने लगे और मैं उनका ये प्रवाह ज्यादा देर सह नहीं पाई और बोलने लगी—
दिव्या: ओहोहोहो… आआआह्ह्हह… ये मुझे क्या हो रहा है… आह्ह्हह अंकल हट जाइए मुझे सुसु आ रही है… आआआह्ह्हह… आह्ह्ह… ओओह्ह्ह…
और इतना कहते ही मैंने पहली बार अपनी चूत से पानी निकाला था और अंकल वो पूरा पी गए।
सब लड़कियाँ ये समझ सकती होंगी कि चूत से पहली बार पानी निकालने के बाद क्या आनंद मिलता है। कितना सुकून मिलता है। ये हम शब्दों में बता भी नहीं सकते हैं।
अंकल खड़े हुए और हमने फिर से किस किया। तब उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर अपने तने हुए खड़े लंबे लंड पर रखकर उसे सहलाने लगे।
पहली बार उनके खड़े लंड को छूकर मैं बहुत डर गई और किस तोड़कर कहने लगी—
दिव्या: अंकल ये तो कितना लंबा है। एक डंडे की तरह। मैं तो मर ही जाऊँगी। ये इतना बड़ा कैसे मेरी चूत में जाएगा।
मेरी बात सुनकर अंकल हँसने लगे और कहने लगे—
महेश: मेरी प्यारी लड्डू। चूत चाहे जितनी छोटी हो, लंबे से लंबा लंड अपने अंदर ले ही लेती है।
अब महेश से भी बर्दाश्त नहीं हुआ तो उन्होंने मुझे कहा उनकी शॉर्ट्स उतारकर उनके लंड को सहलाने और मैंने भी वही किया। मैं भी कुछ 5 मिनट तक उनका लंबा लंड सहलाने लगी जोर-जोर से और वो सिसकारियाँ भरने लगे।
अंकल का लंड सहलाते-सहलाते मेरी चूत फिर गीली हो गई और उनके लिए भी मेरा लंड सहलाना बर्दाश्त के बाहर हो रहा था। इसलिए हम दोनों बोल पड़े कि अब हम और एक-दूसरे को नहीं तड़पाएँ।
तुरंत ही अंकल ने फिर मुझे बेड पर सुलाया। मेरी टाँगें फैलाकर नीचे एक तकिया रखा और बीच में अपना लंड पकड़कर बैठ गए।
वो अपना लंड मेरी गीली चूत पर घिसने लगे और मुझे कहने लगे—
महेश: दिव्या रानी बस एक बार दर्द होगा। तो ज्यादा डरना नहीं। एक बार का दर्द और फिर हमेशा का मजा हो जाएगा।
मैं बस लेटी हुई डर के मारे उनकी बातें सुन रही थी। इतना कहते ही अंकल ने खूब सारी थूक और मेरी एक क्रीम मेरी चूत में लगाने लगे।
अब उन्होंने अपना लंड मेरी चूत पर सेट किया और एक इतना जोर का धक्का मारा कि उनका मोटा लंबा लंड मेरी चूत को चीरता हुआ चूत में घुस गया।
उनके इस प्रवाह से मैं इतनी जोर-जोर से चीखने-चिल्लाने लगी और रोते-रोते कहने लगी—
दिव्या: अंकल नाआआआहीईईईई… आआआह्ह्हहह… ओओओह्ह्ह्ह्ह… आहाह… नहीं मैं मaaaार गई… आहाहह… कोई बचाओ मुझे इस लंड से… आहाहहहह… आहाहह… निकालो लंड को मेरी चूत से बाहर… ओओओह्ह्ह्ह… आआआह्ह्हहह… आआआह्ह्ह… आहाहह…
मेरी चीखें शायद घर के बाहर तक गई होंगी और कुछ मिनट बाद तो मुझे लगा जैसे मैं बेहोश ही हो गई थी। कुछ मिनट बाद मैंने तब आँखें खोलीं जब दर्द थोड़ा कम हुआ और अंकल ने फिर धीरे-धीरे झटके मारना शुरू किया।
अब मेरा भी दर्द कम होते जा रहा था और मैं महेश का साथ देने लगी।
दिव्या: ओओह्ह… ओओओह्ह्ह… आहाहह… हाँ महेश ऐसे ही मेरी चुदाखड़ चूत अपने लंड से मारो… आहाहह… आआआह्ह्ह्ह… फाड़ दो मेरी चूत अपने लंड से… आहा… बना लो मुझे अपनी पत्नी…
ऐसे बड़बड़ाने लगी।
मेरी बातें सुनकर महेश में और जोश आ गया और वो बहुत तेज-तेज जोर-जोर से मेरी बच्चेदानी तक मेरी चूत फाड़ने लगे।
ऐसे ही कुछ 20 मिनट हमारी चुदाई चलती रही और मेरा फिर से पानी छोड़ने आया तो मैं और जोर-जोर से सिसकारियाँ लेने लगी और बोलने लगी—
दिव्या: और चोदो… और चोदो… मुझे बना दे मेरी चूत का भोसड़ा… और चूस मेरी चूत का पानी…
यह सुनते ही अंकल समझ गए मैं फिर से पानी छोड़ने वाली हूँ और उन्होंने भी अपने झटकों की रफ्तार बढ़ा दी और बोला—
महेश: हाँ कुत्तिया ऐसे ही चुदाती रहना मेरे लंड से। ऐसे ही तेरी चूत का भोसड़ा बनाऊँगा। ले रांडी साली मेरा लंड और लंड का पानी अपनी चूत में।
हम दोनों चरम सीमा पर पहुँच गए थे और मैं जोर से चिल्लाते हुए महेश के लंड पर झड़ गई और वो भी मेरा गरम रस छूते ही अपना लंड पूरा मेरी बच्चेदानी से चिपकाकर पिचकारी मारने लगे और अपना सारा पानी मेरे अंदर डाल दिया और मेरे ऊपर ही लेट गए।
इतनी जोरदार चुदाई के बाद पता नहीं कब हम दोनों की आँखें लग गईं कि हम सीधा आधी रात को उठे और उसके बाद उसी रात महेश ने मेरी और 3 बार चूत मारी और हर बार पानी मेरी चूत में डाल दिया।
ऐसे ही अब हमने पूरे नवरात्रि के 10 दिन दमदार चुदाई करी घर के हर कॉर्नर में। और आज भी हमारी चुदाई चल ही रही है।
यह कहानी यहाँ ही खत्म कर रही हूँ। अब आप लोगों ने मुठ मार ली होगी और चूत से पानी भी निकाल लिया होगा तो मेरी स्टोरी को लाइक कीजिए, कमेंट कीजिए और मेल भी कीजिए। मुझे अपने फीडबैक दीजिए। मैं आपका वेट करूँगी।




