माँ को चोदने की चाहत – 4
Maa beta ki damdar chudai ki kahani:- पिछले पार्ट में अंजलि (अजय की फेक आईडी) के जरिए मम्मी को पेटिकोट-ब्लाउज में रहने, बेटे के कमरे में सोने और लिप्स पर किस करने के लिए तैयार किया गया। धीरे-धीरे फ्रेंच किसिंग शुरू हुई। सुबह किचन में हग के दौरान मम्मी ने जानबूझकर पैंटी नहीं पहनी थी। दोनों के बीच फिजिकल टच बढ़ गया और मम्मी ने खुद माना कि अब वो बेटे से चुदने के लिए तैयार हैं। अंजलि ने मम्मी को साफ-सफाई करने और रात को ब्रा-पैंटी के बिना आने का निर्देश दिया। दोनों साफ-सफाई करके फर्स्ट नाइट की तैयारी में लग गए। अब पढिए आगे ..
Part 3 ==> माँ को चोदने की चाहत – 3
Maa beta ki damdar chudai ki kahani
मुझसे अब टाइम काटे नहीं कट रहा था। सोच रहा था कि कब जल्दी से रात हो और मुझे वो सब करने को मिले जो मैं इतने दिन से सोच रहा हूँ। रात को जब मम्मी रूम में आईं तो उन्होंने ब्लैक कलर का ब्लाउज और उसी कलर का पेटिकोट पहना हुआ था।
मेकअप के नाम पे हल्का सा स्ट्रॉबेरी की स्मेल वाला लिप ग्लॉस लगाया था जिससे उनके मुलायम होठ और भी गुलाबी और रसीले लग रहे थे। वो बेड पे आकर बैठीं और मुझसे कहा कि अजय लाइट बंद कर दो। मैंने पूछा—
मैं: क्यों मम्मी? आज मालिश नहीं करवानी?
मम्मी: नहीं आज मत करो… आओ लेटो आकर।
मैं लाइट बंद करके उनके पास लेट गया। कमरे में सिर्फ एसी की लाइट थी जिसमें हम दोनों एक-दूसरे को हल्का-हल्का देख सकते थे। मेरी धड़कनें इतनी बढ़ी हुई थीं कि मुझे सुनाई दे रही थीं। अब हम दोनों को ही पता था कि आज क्या होने वाला है।
लेटने के बाद मैं मम्मी की तरफ घुमा। और मम्मी ने गुड नाइट किस के लिए अपने होठ मेरी तरफ बढ़ाए। मम्मी की साँसों की खुशबू मेरी साँसों से मिल रही थी। मैंने अपना हाथ उनके होठ के नीचे रखते हुए उनके दोनों होठों को हल्का सा खोला और उनके दोनों होठों को बारी-बारी अपने होठों से छूने लगा।
फिर मैंने उनके निचले होठ को चूसना शुरू किया। थोड़ी देर के बाद फिर ऊपर वाले होठ को चूसा।
मैंने मम्मी को कसके खुद से चिपका लिया…. हम दोनों इतना पास थे कि बीच में से हवा जाने की भी जगह नहीं थी। होठ चूसते-चूसते मैंने अपनी जीभ मम्मी के मुँह में डाली जिसे वो चूसने लगीं।
हम दोनों जीभ की टिप से टिप को टच करते… कभी चूसते तो कभी जीभ से जीभ लड़ाते… मॉम के लिप ग्लॉस की खुशबू मुझे पागल कर रही थी।
ये सब करते-करते मैंने अपना लेफ्ट हाथ मम्मी के राइट चूची पे रख दिया और हल्के-हल्के सहलाने लगा। मम्मी ने ऊपर से अपने हाथ से मेरा हाथ दबा दिया…. बस फिर तो मुझे ग्रीन सिग्नल मिल गया… मैंने झट से उनका ब्लाउज खोल दिया…. उन्होंने अंदर कुछ भी नहीं पहना था… ब्लाउज आगे से खोलते ही उनके दोनों चूचे मेरे सामने आ गए… रुई के फाहे जैसे नरम-नरम गोल-गोल एकदम मुलायम।
एक हाथ में तो आ भी नहीं रहे थे। मैंने उनके राइट चूचे को दबाना शुरू किया और किस किए जा रहा था।
अब मैंने होठ छोड़के उनके कान की लौ किस करनी शुरू कर दी और दूसरे चूचे को भी दबाने लगा…. बीच-बीच में सिर्फ निप्पल को भी छेड़ देता… मम्मी सिसकारियाँ लेते हुए नीचे से अपनी कमर उठा रही थीं। फिर मैं थोड़ा नीचे आया और उनके चूचे पीने लगा। एक चूची को चूसता तो दूसरी को दबाए जा रहा था।
इतने सॉफ्ट और सुडौल कि क्या कहूँ… जैसे दूध से भरे गुब्बारे हों… फिर मैंने अपनी जीभ से उनके निप्पल को छेड़ना शुरू किया…. उनके एरिओला पर जीभ पूरी गोलाई में घुमाता और जीभ उनके निप्पल पर रगड़ता… फिर हल्के से दाँत से काट लेता….. 10 मिनट तक बूब्स चूसने के बाद मैं थोड़ा और नीचे आया और उनकी नाभि चाटने लगा। अब मम्मी ऊपर से पूरा नंगी थीं… मुझे उन्हें नीचे से भी नंगा करना था। नाभि से नीचे आकर मैंने पेटिकोट खोलने की ट्राई की लेकिन उसका नाड़ा खुलने के बजाय उसमें गाँठ लग गई।
मैं कोशिश किए जा रहा था लेकिन इतनी कम रोशनी में कुछ समझ नहीं आ रहा था तो मम्मी ने अपने हाथों से गाँठ खोली और हल्का सा कमर उठा ली… ये इशारा था मेरे लिए… मैंने भी देर ना करते हुए पेटिकोट उनके शरीर से अलग कर दिया। पेटिकोट हटते ही पूरे कमरे में चूत के रस की महक फैल गई…. मैं तो अपने कपड़े किस करने और बूब्स चूसने के दौरान ही उतार चुका था और अब मेरी मम्मी भी मेरे सामने नंगी लेटी हुई थीं।
लोग कहते हैं माँ के पैरों में जन्नत होती है मगर मुझसे पूछो तो जन्नत माँ के पैरों में नहीं पैरों के बीच होती है।
मम्मी ने अपने दोनों पैर मोड़के एक-दूसरे से जोड़ लिए थे…. मैंने धीरे से उनके पैरों को खोला तो मुझे हल्की सी रोशनी में उनकी चूत की झलक मिली… एकदम क्लीन शेव्ड और गोरी-गोरी सी और उसके बीच में ब्राउन कलर की चूत की पंखुड़ियाँ। मम्मी की दोनों जाँघों पे अंदर की तरफ उनकी चूत का रस लगा हुआ था जो हल्की सी रोशनी में चमक रहा था।
मैंने उसी रस को चाटना शुरू कर दिया। दोनों जाँघों पर से चूत के रस को चाटते हुए मैं उनकी चूत की तरफ बढ़ने लगा। मैंने मम्मी की चूत की दोनों पंखुड़ियों को किस किया और एक बार अपनी जीभ नीचे से ऊपर तक फिराते हुए ले गया… मम्मी की सिसकारी निकल गई।
उन्होंने अपनी दो उँगलियों से अपनी चूत को थोड़ा सा फैलाया तो मुझे उनका क्लिटोरिस दिखा। मैं उसे अपनी जीभ से चाटने और चूसने लगा।
मम्मी बार-बार एक्साइटमेंट में कभी अपनी कमर ऊपर उठा लेतीं तो कभी मेरा सर अपनी चूत पे दबाने लगतीं। ऐसे ही चूसते-चाटते हुए मैंने अपनी जीभ मम्मी की चूत में अंदर घुसा दी और जीभ से उनकी चूत चोदने लगा। मम्मी की चूत से पानी नदी की तरह बह रहा था। उनका रस हल्का सा नमकीन था लेकिन मुझे इतना टेस्टी लग रहा था कि पूछो मत। आखिर इसी दिन का तो सपना देखा था मैंने।
थोड़ी देर चूत चूसने और चाटने के बाद मैं ऊपर आया और फिर से मम्मी को किस करने लगा। मैं कभी उनके गालों पे किस करता कभी उनके बूब्स चूसता तो कभी उनकी गर्दन पे काटता। ये सब करते टाइम मेरा लंड उनकी चूत के ठीक सामने था… कभी-कभी मेरा लंड उनकी चूत की पंखुड़ियों को थोड़ा सा खोल देता लेकिन मैं अभी मम्मी को थोड़ा और तड़पाना चाहता था।
मम्मी बार-बार एक्साइटमेंट के मारे अपनी कमर उठा रही थीं… आखिर में जब मैं उनकी गर्दन पे किस कर रहा था तो उन्होंने कह ही दिया… चोद बेटा।
ये सुनते ही मैंने अपना लंड उनकी चूत में उतार दिया… मम्मी की चूत ढीली नहीं थी। शायद ज्यादा चुदाई ना होने की वजह से… मेरा लंड अंदर जाते ही हम दोनों की सिसकारी एक साथ निकल पड़ी…. मैंने अपने होठ मम्मी के होठों से मिला लिए और अपना हाथ उनके पैर के पीछे से ले गया जिससे कि उनकी पोजीशन थोड़ा ऊपर की तरफ हो गई। अब इस पोजीशन में मेरा लंड उनकी चूत में ज्यादा अंदर तक जा सकता था। मैं बस मम्मी को चोदे जा रहा था… हर धक्के पे मम्मी स्स्स्र्रस्स कर रही थीं.. हर धक्के के साथ उनकी चूड़ियों की और उनकी पायल की आवाज आ रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे कमरे में म्यूजिक चल रहा हो। जब मैं कसके अपने लंड का धक्का लगता तो मेरे तत्ते मम्मी की गाँड से टकराते और मम्मी की सिसकारी निकल जाती।
पूरे कमरे में चूत के रस की महक फैली हुई थी… और थप-थप की आवाजें आ रही थीं। हम दोनों की जाँघें मम्मी की चूत के रस से भीग गई थीं। मेरे तत्तों पर भी मम्मी की चूत का रस लग गया था।
मम्मी बोलती जा रही थीं:- चोद बेटा… कसके चोद…. आह… कितना मजा आ रहा है… चोद दे मुझे… स्स्स्स्स्स्स्सीईईईईईई… आआह… और कसके…. स्स्स… आह… और अंदर तक…. हाय…. बस चोदता रह।
उनकी हर सिसकारी सुनके मुझे और जोश आ रहा था। मैं और जोर से उन्हें चोदता जिससे कि वो और जोर से कराह उठतीं। पहले धीरे फिर तेज-तेज चोदके मैंने करीब 15 मिनट माँ को चोदा…. जब मुझे लगता कि मेरा होने वाला है तो मैं लंड निकाल लेता और मम्मी की चूत चाटने लगता। आखिरकार जब मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ और मुझे लगा कि मैं झड़ जाऊँगा तो मैंने धक्के लगते हुए ही मम्मी से पूछा…. मम्मी मेरा होने वाला है… कहाँ निकालूँ?
मम्मी: अंदर ही निकाल दे बेटा… स्स्स…. आह।
मैं: कोई दिक्कत तो नहीं होगी?
मम्मी: नहीं तेरे भाई के… स्स्स्स्स…. होने के बाद…. आह…. मैंने ऑपरेशन करवा लिया था…. स्स्स्स्स आह तो कोई डर नहीं है…. आह… भर दे मेरी चूत को अपने रस से।
ये सुनके मैंने फिर से मम्मी को किस करना शुरू कर दिया…. और चोदने की स्पीड और बढ़ा दी। मम्मी की चूत के गीले होने से मेरा लंड अब पिस्टन की तरह मम्मी की चूत के अंदर-बाहर हो रहा था।
इधर मम्मी भी काफी समय से नहीं चुदी थीं तो मम्मी भी झड़ने वाली थीं। उन्होंने अपने हाथ मेरी पीठ पे रखे और मुझे कसके खुद से चिपका लिया। मम्मी के नाखून मेरी पीठ में चुभ रहे थे और मम्मी लंबी-लंबी सिसकारियाँ ले रही थीं।
मम्मी: स्स्स्स्स्स्स्सीईईईईईई….. आआह्ह्ह्ह्ह्ह…. हाय मैं गई बेटा… बस चोदता रह… रुकना मत… आआह्ह्ह इतना मजा कभी नहीं आया ….. स्स्स्स्स….. चोद अपनी माँ को….. बुझा दे मेरी प्यास…. हाय।
मेरे लंड ने झटके लेने शुरू कर दिए… एक धार… फिर दूसरी… फिर तीसरी… इतना वीर्य पहले कभी नहीं निकला था… तेजी से चोदते हुए मैंने अपना सारा वीर्य मम्मी की चूत में ही गिरा दिया….. इधर मम्मी भी साथ में ही झड़ गईं…. हम दोनों का रस मिलके एक हो गया था और अब मम्मी की चूत के बाहर बह रहा था। हम दोनों अभी भी किस कर रहे थे। बारी-बारी से एक-दूसरे के होठों और जीभ को चूसे जा रहे थे। मेरा लंड अभी भी मम्मी की चूत में ही था। थोड़ी देर बाद लंड जब ढीला हुआ तो पुक की आवाज के साथ चूत से बाहर आ गया और साथ ही मेरा वीर्य भी मम्मी की चूत से बाहर होता हुआ उनकी जाँघों पे बहने लगा।
मुझे डर था कि झड़ने के बाद जब थरक का असर खत्म हो तो कभी मम्मी को गिल्ट ना फील हो लेकिन मम्मी ने मुझे किस करते हुए कहा: कसम से अजय… तूने तो मुझे तृप्त कर दिया… आई लव यू बेटा… मेरी जान… आई लव यू सो मच।
मैं: आई लव यू टू मम्मी।
मम्मी (हँसते हुए): चोद लिया फिर भी मम्मी बुला रहा है :डी। चाहे तो मेरे नाम से भी बुला सकते हो।
मैं: नहीं मम्मी। मैं आपको मम्मी ही कहूँगा। जिससे कि मुझे भी फील होगा कि मैंने अपनी मम्मी की चुदाई की है।
ये सुनके मम्मी हल्का सा मुस्कुराईं और फिर धीरे से हँस दीं। हम दोनों अभी भी एक-दूसरे से चिपके हुए एक-दूसरे के साइड में लेटे थे। तभी मम्मी ने मुझसे कहा—
मम्मी: अच्छा अब मुझे जाने दे… साफ करके आती हूँ। नीचे सब गंदा हो गया है।
ये बोलके वो उठीं और मेरे ही रूम के अटैच्ड बाथरूम की तरफ जाने लगीं। उन्होंने बाथरूम की लाइट जलाई। मेरे रूम के अंदर तो अँधेरा था लेकिन उसमें जब बाथरूम की लाइट सामने से पड़ी तो उसमें मैंने मॉम के नंगे कर्वी जिस्म की मस्त शेप देखी और फिर जब मम्मी मुड़के बाथरूम का दरवाजा बंद करने लगीं तो मैंने पहली बार उनके बूब्स की एक साफ झलक देखी।
गाइज शायद आपको ध्यान हो कि अभी तक मैंने उनके बूब्स क्लियरली या सामने से नहीं देखे थे। उनको ऐसे देखके मेरा लंड फिर से तन गया। मॉम तो बाथरूम में थीं तो मैंने उनके जिस्म की गर्माहट फील करने के लिए चादर पे जहाँ वो लेटी थीं वहाँ हाथ फिराना शुरू किया… मेरा हाथ थोड़ा सा नीचे गया तो मुझे थोड़ी दूर में कुछ गीला-गीला सा फील हुआ… मैं समझ गया कि ये मम्मी की चूत से निकले कामरस और मेरे माल से गीला हुआ है।
ये सब देखके और फील करके मैं बहुत एक्साइटेड हो रहा था… आखिर मेरी बरसों की तमन्ना आज पूरी हो गई थी और मैंने मम्मी को उनकी रजामंदी से चोदा था। यही सब सोच ही रहा था कि मम्मी लाइट बंद करके बाथरूम से बाहर आ गईं और बेड पे लेटने लगीं तो मैंने कहा –
अजय: मम्मी वहाँ मत लेटो… वहाँ गीला हो गया है। आप इधर लेट जाओ।
ये बोलके मैं हँसने लगा और मम्मी भी हँसने लगीं। मम्मी दूसरी तरफ आकर लेट गईं। अब बेड पे लेटने के लिए और कम जगह बची थी और वैसे भी हम दोनों को लिपटना ही था। मैंने मम्मी को खुद से चिपका लिया और उनका एक पैर अपने पैर के ऊपर रख लिया। फिर से उनको किस करते हुए मैंने उनसे कहा –
अजय: मम्मी! एक बात कहूँ?
मम्मी: म्मम… बोल ना।
अजय: मुझे लाइट जलानी है।
ये सुनके जैसे मम्मी को झटका सा लगा… उन्होंने किस ब्रेक की और कहा
मम्मी: धत्त… पागल हो गया है क्या? मुझसे बहुत शर्म आएगी।
अजय: कैसी शर्म मम्मी… इतना सब तो हो गया हमारे बीच।
मम्मी: हाँ बट मुझे ऐसे उजाले में शर्म आएगी।
अजय: प्लीज मम्मी…
मम्मी: नहीं अज्जू…
मेरी बहुत खुशामद के बाद वो मान गईं… मैंने हाथ बढ़ाके लाइट जलाई और जो मैंने देखा वो मैं एक्सप्लेन नहीं कर सकता। माँ ने शर्म की वजह से अपने दोनों हाथों से अपना चेहरा ढक रखा था और इस वजह से उनके दोनों बड़े-बड़े चूचे और गोरी सी चूत अनकवर्ड थी। उनका एक पैर सीधा था और दूसरा घुटने के पास से मुड़ा हुआ था इस वजह से उनकी चूत एकदम साफ दिखाई दे रही थी। एकदम पावरोटी की तरह फूली हुई गोरी सी और उसमें से तुरंत की चुदाई की वजह से उनकी चूत के ब्राउन होठ की हल्की सी झलक मुझे मिल रही थी। उनका गोरा गुलाबी रंगत लिए जिस्म लाइट में मानो चमक रहा था।
फिर मेरी निगाह अपने लंड की तरफ गई। लंड पर और उसके आसपास मम्मी की चूत से निकला हुआ पानी लगके सूख चुका था जिस वजह से वहाँ पे सफेद पाउडर जैसा लगा हुआ था।
मैं अब आगे बढ़ा और उनके चूचों से खेलने लगा। एक उँगली मैंने उनके एरिओला के चारों तरफ धीरे-धीरे घुमाना शुरू किया और दूसरे निप्पल पे अपनी जीभ से टच कर रहा था। इस टाइम मेरी आधी बॉडी मम्मी के ऊपर थी और कमर के नीचे से हम दोनों साइड में थे। चूचों से खिलवाड़ की वजह से मम्मी एक्साइटेड होने लगीं और उन्होंने मेरा सर अपने चूचों पे दबाना शुरू कर दिया… इधर मैं अपना दूसरा हाथ नीचे ले गया और मम्मी के चूत के दाने (क्लिटरिस) को सहलाने लगा।
मम्मी अब सिसकारियाँ लेने लगी थीं और बार-बार अपनी कमर उठा रही थीं। अब तक उनके अंदर की शर्म पर थरक जीत चुकी थी।
मैंने अचानक से ये सब करना बंद कर दिया और धीरे से अपनी अपर बॉडी उनके बॉडी के ऊपर की तरफ ले गया और उनके क्यूट से फेस को देखने लगा। थोड़ी देर तक तो मम्मी समझ नहीं पाईं कि क्या हुआ है। उन्हें लगा कि मैं कुछ नया ट्राई करने जा रहा हूँ फिर जब 10-15 सेकंड हो गए तो उन्होंने आँखें खोलीं। तब उन्होंने देखा कि मैं उन्हीं की तरफ देख रहा था। हम दोनों की निगाहें मिलीं और मम्मी ने इशारे से पूछा कि क्या हुआ? तो मैं बस हल्का सा स्माइल कर दिया… तब उन्हें ध्यान आया कि अब वो पूरी तरह न्यूड थीं और मैं उन्हें उजाले में देख रहा था। ये रियलाइज होते ही उन्होंने फिर से स्माइल की और शर्माते हुए अपनी आँखों पर हाथ रख लिए… हाये इस अदा पे मैं तो मर ही गया।
अब मैंने उनके हाथ आहिस्ते से और प्यार से उनके चेहरे से हटाए और माथे पे किस किया और फिर धीरे से उनकी आइज पे किस करते हुए उनके रसीले होठों की तरफ बढ़ा। मम्मी ने अपने होठों को खोल लिया और मैंने अपनी जीभ उनके मुँह में डाल दी जिसे वो चूसने लगीं। हम दोनों फिर से एक डीप और पैशनेट किस कर रहे थे और मैंने फिर से अपने हाथों से उनके क्लिटरिस को सहलाना शुरू कर दिया। मम्मी की चूत अब बहुत पानी छोड़ रही थी जो मेरी उँगलियों पे लग रहा था।
थोड़ी देर किस के बाद मैं उठा और उनके दोनों पैर फैलाकर बीच में बैठ गया। मैंने उनके पैर खोल दिए और फिर मैंने 22 साल बाद अपने जन्मस्थान के अच्छे से दर्शन किए…. क्या मस्त चूत थी मम्मी की… चूत का चीरा लगभग 3 इंच का…. एकदम मस्त गोरी सी और जब मैंने उनके पैरों को फैलाया तो अंदर से ब्राउन रंग की दो पंखुड़ियाँ दिख रही थीं जिसके अंदर उनकी चूत का छेद जो अभी की चुदाई से थोड़ा सा खुला हुआ था और एक्साइटमेंट की वजह से अंदर-बाहर हो रहा था।
मैं बेड से नीचे उतरा और मम्मी को बेड के एकदम किनारे पर खींच लिया। फिर मैं जमीन पे घुटनों के बल बैठा जिससे कि मम्मी की चूत और मेरा मुँह एकदम सीध में आ गए। इस पोजीशन में मैं उनकी चूत अच्छे से और देर तक चाट सकता था।
मैंने जीभ बाहर निकाली और उनकी चूत को चाटना स्टार्ट किया… पहले मैं जीभ नीचे से ऊपर तक लंबाई में ले गया और उनकी चूत के दाने के आसपास चाटने लगा और जीभ की नोक से टच करने लगा फिर मैंने जीभ उनकी चूत में अंदर-बाहर करनी शुरू की। मैं हर एक पंखुड़ी से जीभ से अलग-अलग खेलता, उनका क्लिट चूसता, और कभी-कभी हल्के से काट भी लेता।
मम्मी की आवाजें फिर से कमरे में गूँजने लगी थीं।
मम्मी: आआह्ह्ह… अजय… बहुत अच्छा लग रहा है… जीभ अंदर डाल… हाँ वैसा ही… स्स्स्स हाय कितना मजा आ रहा है!
मम्मी की ये बात सुनके मैं बहुत एक्साइटेड हो गया था। मैं उन्हें चोदने के लिए उठके खड़ा हुआ तो मम्मी ने खुद अपना हाथ नीचे किया, मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत के मुँह पर रगड़ने लगीं।
फिर आँखों में आँखें डालकर बोलीं,
मम्मी: डाल दे अंदर… अपनी मम्मी की चूत में अपना लंड डाल दे।
मैंने एक सॉलिड धक्का मारा और पूरा का पूरा अंदर उतर गया। इस बार चूत और भी स्लिपरी हो चुकी थी मेरे पहले वीर्य की वजह से।
मैंने उन्हें चोदना शुरू किया — धीरे-धीरे, गहरे धक्कों के साथ। हर धक्के पे उनके बूब्स उछलते और उनकी चूड़ियाँ खनकतीं।
ये नजारा मेरे लिए बहुत एक्साइटिंग था क्योंकि अब मैं साफ-साफ उनके चूचों का हिलना देख पा रहा था। मैं जब धक्का लगाता तो उनके बड़े-बड़े चूचे ऊपर की तरफ जाते और फिर नीचे आ जाते। इस उम्र में भी मम्मी के चूचे टाइट थे तो ये देखने में बहुत ही मजा आ रहा था।
मैंने उनके दोनों पैर पकड़के थोड़ा और फैला दिए थे जिससे मेरा लंड एकदम गहराई तक जा रहा था। मैं अपने लंड को अपनी सगी माँ की चूत में पिस्टन की तरह चलते हुए देख रहा था और मारे एक्साइटमेंट के मेरा लंड फटने को हो रहा था। बार-बार मेरे तत्ते उनकी गाँड से टकरा रहे थे। मम्मी ने दर्द और मजे से चादर को कसके पकड़ रखा था और मेरे हर धक्के पे आह-आह की आवाज आ रही थी।
थोड़ी देर ऐसे चोदने के बाद मम्मी ने अपने पैर मेरी कमर के अराउंड लपेट लिए और मुझे और अंदर खींचने लगीं। हम दोनों पसीने से तर थे। कमरे में सिर्फ थप-थप की आवाज, उनकी सिसकारियाँ और हमारी साँसें ही सुनाई दे रही थीं।
मम्मी: (कामुक आवाज में) हाय्य्य… चोद बेटा… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दे… आह… कितना मजा आ रहा है… चोद दे मुझे… स्स्स्स्स्स्स्सीईईईईईई… आआह… और कसके…. स्स्स… आह… और अंदर तक…. हाय।
ऐसे ही थोड़ी देर चोदने के बाद मैंने मम्मी से कहा –
अजय: मम्मी आप अब घूमके घोड़ी बन जाओ।
फिर मैंने लंड उनकी चूत से निकाल लिया। मैंने देखा कि उनकी चूत का छेद थोड़ा सा खुल गया था। मम्मी उठीं और बेड पे आगे की तरफ हो गईं… फिर वो झुकके चारों हाथ-पैरों पे आ गईं… अब मम्मी की बड़ी चौड़ी गाँड मेरे सामने थी मगर उनके हिप्स इतने बड़े हैं कि उनकी चूत और गाँड का छेद छुप गया था। तो मैंने मम्मी से कहा:- मम्मी अपने हिप्स थोड़ा सा फैलाओ।
हिप्स फैलाने के लिए मम्मी ने अपना सर बेड पे टिका लिया और अपने दोनों हाथों से अपने हिप्स खोल दिए… तब मैंने पहली बार उनकी गाँड का छेद देखा… गोरी-गोरी गाँड के बीच एकदम पिंकिश ब्राउन सा… इतना क्यूट लग रहा था कि पूछो मत… मैं उसे देखके ललचा रहा था क्योंकि मम्मी की गाँड हमेशा से मेरी फेवरेट है।
अब मैंने खुद उनके दोनों हिप्स पे हाथ रखकर उसे फैलाया और मम्मी की चूत जो थोड़ा सा खुल गई थी उसमें अपनी टंग डालने लगा… और उनकी चूत के दाने को चूसने लगा। ये सब करते टाइम मेरी नाक बार-बार उनकी गाँड के छेद पे टच हो रही थी। वहाँ से एकदम हल्की सी स्मेल आ रही थी जो उस टाइम मुझे किसी भी परफ्यूम से ज्यादा अच्छी लगी।
चूत चाटते-चाटते मैंने मम्मी की गाँड के छेद को अपनी जीभ से हल्का सा छुआ… तो वो सिहर उठीं।
मम्मी: स्स्स्स… अजय क्या कर रहा है.. गंदा है वहाँ।
मैंने कुछ बोला नहीं सिर्फ म्मम कहके जताया कि जो कर रहा हूँ करने दो… और मैं उनकी गाँड के छेद को चाटता रहा… अब मम्मी को भी मजा आने लगा था और वो सिसकियाँ ले रही थीं… स्स्स्स… आआह अजय बहुत मजा आ रहा है … ऐसे ही कर…. स्स्स्स्आआह।
जी भरके उनकी गाँड और चूत चाटने के बाद मैं खड़ा हुआ। मैंने देखा उनकी गाँड का छेद मेरी थूक की वजह से एकदम चमक रहा था। मेरी नजर सामने गई तो मैंने पाया कि मेरे बेड के सामने के वार्डरोब में जो शीशा लगा था उसमें मम्मी आधी दिख रही थीं.. उनका राइट साइड का चूचा नीचे की तरफ लटक रहा था जैसे बड़ा सा पपीता हो… और उनकी आँखें बंद थीं।
मैंने मम्मी को थोड़ा सा राइट होने को बोला। अब वो बेड के पैरों वाले साइड में नीचे की तरफ आ गई थीं और शीशे में अच्छे से दिख रही थीं। दो बड़े-बड़े चूचे नीचे को झूलते हुए मगर फिर भी टाइट…. और उनके बीच में लटकता मंगलसूत्र। मम्मी की गाँड के उभार की शेप शीशे में दिख रही थी। इस टाइम वो एकदम किसी अप्सरा की तरह लग रही थीं।
मैं भी बेड पे चढ़ गया और अपने घुटनों पे आ गया… मेरा लंड इस टाइम उनकी चूत के एकदम सीध में था। अब मुझसे रहा नहीं गया और मैंने अपना लंड उनकी चूत में पीछे से उतार दिया। धीरे-धीरे और गहरे धक्कों से मैं उनकी चूत चोदने लगा।
मैं पूरा लंड बाहर निकाल लेता और फिर पूरा अंदर तक डाल देता.. इससे मम्मी को बहुत मजा आ रहा था। हर धक्के पे मेरी जाँघ मम्मी की जाँघों से टकरा रही थी। थोड़ी देर ऐसे धक्के लगाने के बाद मैंने अपनी जाँघें पूरी तरह मम्मी की जाँघों से चिपका दीं और अब लंबे धक्कों की जगह चिपके-चिपके ही छोटे और तेज धक्के लगाने शुरू कर दिए। हर धक्के में मम्मी की आह निकल रही थी और उनके चूचे हिल रहे थे।
ये देखके मुझे बड़ी एक्साइटमेंट हो रही थी… अगर थोड़ी देर पहले ही चुदाई का एक राउंड ना हुआ होता तो अब तक मैं झड़ चुका होता।
फिर मैं मम्मी को चोदते हुए ही आगे झुका और मैंने उनके दोनों चूचे पकड़के मसलना शुरू कर दिया। इतने सॉफ्ट थे कि मैं क्या बताऊँ और इतने बड़े कि पूरे आ भी नहीं रहे थे मेरे हाथ में।
ऐसे चोदते हुए ही मैंने मम्मी से कहा… मम्मी अपनी आँखें खोलो और सामने देखो… मम्मी ने अपनी आँखें खोलीं तो शीशे में पहली बार देखा कि उनका बेटा कैसे उनके चूचे दबाते हुए उन्हें चोद रहा है।
ये देखके वो स्माइल करते हुए शर्मा गईं और धत्त कहते हुए फिर से आँखें बंद कर लीं और आगे बढ़ने लगीं।
उनके चूचे थोड़ी देर दबाने के बाद मैं पीछे हुआ और फिर से धक्के लगाने लगा। इस पोज़ में धक्के लगाते हुए मुझे मम्मी की गाँड का छेद दिख रहा था जो मुझे बहुत एक्साइट कर रहा था। मैंने अपने राइट थंब को उनकी गाँड के छेद पर हल्के-हल्के फिराना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद मैंने वो अंगूठा अपने मुँह में डाला और अच्छे से थूक लगाकर गीला कर लिया… और वो अंगूठा उनकी गाँड में धीरे से डाल दिया।
अंगूठा डालते ही मुझे ऐसा लगा जैसे मेरा अंगूठा किसी टाइट बोतल में फँस गया हो। मम्मी भी एकदम से चौंक गईं और बोलीं
मम्मी: वहाँ नहीं बेटा बहुत दर्द होगा।
मैं: कुछ नहीं करूँगा मम्मी सिर्फ ऐसे ही मूव कराऊँगा।
और ये बोलके मैं उनके गाँड में अंगूठा डाले-डाले ही घुमाने लगा। थोड़ी-थोड़ी देर पर मैं अंगूठा निकाल के अपने मुँह में डालता और उसे गीला करके फिर से मम्मी की गाँड में डाल देता।
फिर मैंने दूसरे हाथ से मम्मी के सर को थोड़ा सा नीचे दबाया। मेरा इशारा समझके उन्होंने अपना सर बेड पे टिका लिया और चादर को कसके पकड़ लिया। अब मैं जोर-जोर से उन्हें चोद रहा था और हर झटके पर मेरे तत्ते उनके क्लिट से टकरा रहे थे जिससे उन्हें बहुत ज्यादा एक्साइटमेंट हो रही थी।
मम्मी: आआह आआह… हाँ बेटा ऐसे ही चोद… और कसके… आह्ह्स्स्स्स मैं गई…
मम्मी का सेकंड ऑर्गेज्म इतना जोर का था कि उनकी टाँगें काँपने लगीं। उनकी चूत ने मेरे लंड को कसकर पकड़ लिया। मैं भी कंट्रोल नहीं रख पाया और उनकी चूत के अंदर ही अपना सारा माल भर दिया — दूसरी बार।
थोड़ी देर बाद मैंने धीरे से अपना लंड उनकी चूत से बाहर निकाला। साथ ही एक मोटी सी धारा उनकी चूत से बाहर निकली जो उनकी जाँघों पर बहने लगा।
2nd राउंड की चुदाई के बाद हम दोनों ही बहुत थक गए थे… मैं और मम्मी वहीं बेड पे निढाल होकर लेट गए। उनकी जाँघों पर अभी भी उनकी चूत के रस और मेरे लंड के रस का मिक्सअप लगा हुआ था और मेरा लंड भी अभी उनकी चूत के पानी से गीला था। हम दोनों फिर एक-दूसरे के साथ-साथ लेट गए… मम्मी की गरम साँसें मेरी गर्दन पे पड़ रही थीं और उनके नंगे बदन की नरमी मुझे फिर से जगाने लगी थी। मम्मी ने अपना हाथ मेरी पीठ पर फेरते हुए धीरे से कहा,
मम्मी: अजय… सच में इतना मजा आया जिंदगी में पहली बार। लगता है मैंने बहुत कुछ मिस कर दिया था।
मैं मुस्कुराया और उनके मुलायम होठों को फिर से चूम लिया।
मैं: अब मिस नहीं होगा मम्मी।
मम्मी शर्माकर मेरी चेस्ट पे मुँह छुपा लिया, लेकिन उनकी उँगलियाँ मेरी कमर पर धीरे-धीरे घूम रही थीं। मैंने उनकी एक टाँग अपने कमर पर चढ़ा ली और उनके बूब्स को हल्के से दबाते हुए उनके निप्पल को उँगली से छेड़ने लगा।
ऐसे ही लेटे-लेटे और एक-दूसरे के जिस्म से खेलते हुए हम दोनों कब सो गए पता ही नहीं चला।
गाइज जो चीज आपने हमेशा से चाही हो और वो मिल जाए तो उसका मजा वर्ड्स में नहीं बताया जा सकता। ये सिर्फ फील किया जा सकता है। फर्स्ट नाइट की चुदाई के बाद मैं बहुत खुश था जैसे सातवें आसमान पर हूँ। बट ये होने के इतने साल बाद भी इस खुशी में कोई कमी नहीं आई है। मैं और मेरी मम्मी आज भी जब चुदाई करते हैं तो उतना ही एक्साइटमेंट रहता है जितना फर्स्ट टाइम था।
आगे की स्टोरी में आप पढ़ेंगे कि जब रात के बाद सुबह हुई तो हम दोनों के बीच क्या-क्या हुआ।

Bhai age ki story ky hai