मुझे अंकल ने चोदा – 2
Uncle se meri chudai ki story:- जैसा कि आपने पहले पार्ट में पढ़ा था, फलक 22 साल की हाउसवाइफ है। उसका पति समीर अक्सर काम के सिलसिले में बाहर रहता है। सामने वाले फ्लैट में रहने वाले 70 साल के अंकल धीरे-धीरे उससे नजदीकी बढ़ाने लगे थे। एक दिन अंकल ने खुलेआम उसके बूब्स और जिस्म की बातें कीं, जिससे फलक नाराज हो गई और उसे घर से निकाल दिया। लेकिन रात में सेक्स स्टोरीज पढ़ने के बाद उसके मन में अंकल के बारे में अजीब ख्याल आने लगे थे।
Part 1 ==> मुझे अंकल ने चोदा – 1
Uncle se meri chudai ki story
फिर मैंने अपने कपड़े पहने और बाथरूम से बाहर आकर घर के काम करने लगी।
दोपहर 1 बजे हस्बैंड की कॉल आई तो थोड़ी देर उनसे बात करके फोन डिस्कनेक्ट कर दिया और लंच बनाने लगी।
लंच करने के बाद कुछ काम तो था नहीं तो सोचा थोड़ा आराम कर लूँ। मैं रूम में जाकर बेड पर लेट गई और मोबाइल यूज करने लगी। अचानक से मेरे दिमाग में आया कि क्यों न आज फिर थोड़ी सेक्स स्टोरी पढ़ ली जाए। तो मैंने फिर से वो लिंक ओपन किया और कोई अच्छी सी स्टोरी ढूँढने लगी।
पता नहीं क्यों उस लिंक में सारी स्टोरी अंकल और हाउसवाइफ के रिलेटेड ही आ रही थी। शायद लिंक भेजने वाला यही चाहता था कि मैं अंकल और हाउसवाइफ के रिलेटेड ही स्टोरी पढ़ूँ।
तो मुझे एक स्टोरी मिली जिसमें एक बहुत ही पर्दे में रहने वाली वाइफ अपने सोसाइटी के चौकीदार से चुदी। तो मैंने उस स्टोरी को पढ़ना शुरू किया। करीब 4 घंटे में मैंने वो स्टोरी कंप्लीट की। उस स्टोरी को पढ़के पता नहीं क्यों मेरे दिल में भी एक अलग सी बेचैनी होने लगी।
मतलब कि मेरे दिल में भी ऐसा आने लगा था कि क्यों न मैं भी किसी ऐसे अंकल के साथ सेक्स करूँ जिसका लंड इतना लंबा और मोटा हो जितना स्टोरी में मैंने पढ़ा।
ये एक अलग ही एहसास था। खैर शाम हो चुकी थी तो मैंने सोचा क्यों न डिनर रेडी कर लिया जाए। तो मैं किचन में जाके डिनर रेडी करने लगी। करीब 1 घंटे में डिनर बनके रेडी हो गया था।
मैं किचन से फ्री होकर रूम में गई और सोचा कि अब नाइटी पहन लेती हूँ क्योंकि अब काम तो कुछ रहा नहीं है। तो मैं कपड़े निकालकर नाइटी पहन ही रही थी कि डोर बेल बजी। मैं सोचने लगी कि इस टाइम कौन आया होगा क्योंकि मेरे हस्बैंड तो यहाँ हैं नहीं और इस टाइम तो कोई आता भी नहीं।
खैर मैं नाइटी पहनकर गेट खोलने चली गई। गेट खोलकर देखा तो बाहर अंकल खड़े हैं।
मैं: अंकल आप इस टाइम? सब ठीक तो है?
(मैंने ये इसलिए पूछा क्योंकि आज से पहले अंकल कभी भी इस टाइम हमारे घर नहीं आए थे। आज पहली बार आए थे।)
अंकल: हाँ हाँ सब ठीक है। मैं तो तुम्हारे लिए कुछ लाया था। वो ही देने आया हूँ।
मैं: मेरे लिए? (मैंने चौंकते हुए पूछा)
अंकल: हाँ तुम्हारे लिए।
मैं: क्या है?
अंकल: अंदर तो आने दो। सब कुछ यहीं खड़ी होकर पूछोगी?
मैं: ओह सॉरी। अंदर आ जाइए।
अंकल अंदर आकर हॉल में बैठ गए। मैं भी उनके सामने वाले सोफे पर बैठ गई। फिर उन्होंने मुझे वो बॉक्स दिया जो वो लेकर आए थे। वो एक छोटा सा बॉक्स था जैसा कि रिंग का बॉक्स होता है और बोले इसको मेरे जाने के बाद खोलना।
मैंने उनसे पूछा भी कि इसमें क्या है तो वो बोले कि इसमें तुम्हारे लिए एक छोटा सा गिफ्ट है मेरी तरफ से। मैंने वो बॉक्स लेकर टेबल पर रख दिया और अंकल से पूछा कि चाय पियोगे तो वो बोले हाँ क्यों नहीं। अगर स्पेशल दूध की पिलाओगी तो जरूर पियेंगे। मैं उनकी ये बात सुनके हँसने लगी और बोली कि स्पेशल दूध कहाँ से लाऊँ। हमारे घर पे तो है नहीं स्पेशल दूध। तो वो बोले कि है तो लेकिन शायद तुम पिलाना नहीं चाहती।
मैं बोली कि अगर स्पेशल दूध होता तो मैं आपको जरूर स्पेशल दूध की चाय पिलाती। (मैं समझ गई थी कि वो कौन से दूध की चाय का बोल रहे हैं।)
अंकल: मुझे तो दिख रहा है स्पेशल दूध।
(वो मेरे बूब्स की तरफ देखते हुए बोले।)
(मुझे शर्म भी आ रही थी और मजा भी आ रहा था उनके साथ ऐसे डबल मीनिंग बातें करते हुए।)
मैं: आपको कैसे दिख रहा है? मुझे तो कहीं नजर नहीं आ रहा रखा हुआ।
(मैंने आज जो नाइटी पहनी थी वो थोड़ी ट्रांसपेरेंट नाइटी थी। उसमें से मेरा जिस्म थोड़ा-थोड़ा दिख रहा था।)
अंकल: मेरी नजरों से देखो तो दिखेगा।
मैं: आपकी ऐसी कैसी नजर है जो मुझे नहीं दिख रहा आपको दिख रहा है?
अंकल: ये स्पेशल नजर है डार्लिंग जो सबके पास नहीं होती।
(उन्होंने ये हँसते हुए बोला था तो मैंने भी इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जब डार्लिंग बोला।)
फिर मैं किचन में जाके चाय बनाने लगी और अंकल वहीं बैठे थे हॉल में।
किचन में जाके मैंने चाय बनानी रख दी और चोरी-चोरी से अंकल को भी देखने लगी। उनको देखते हुए पता नहीं क्यों मेरे मन में ख्याल आया कि पता नहीं अंकल का लंड कैसा होगा। बड़ा होगा या छोटा। और ये ख्याल आते ही मेरे पूरे जिस्म में करंट सा दौड़ गया और मेरे जिस्म को एक जोर का झटका लगा।
मुझे अपने आप पर ही हँसी आने लगी थी कि मैं ये सोच रही हूँ। शायद ये उन सेक्स स्टोरीज का असर था जो मैं अंकल के लिए ऐसा सोच रही थी।
खैर! चाय बनकर रेडी हो गई थी तो मैंने दो कप में चाय डाली और लेकर हॉल में आ गई। एक कप अंकल को दिया और दूसरा टेबल पर रख दिया।
अंकल चाय का एक घूँट पीकर बोले: चाय तो बड़े मजे की है। बिल्कुल तुम्हारी तरह।
मैं: मेरी तरह मतलब?
अंकल: मतलब ये कि जैसे तुम खूबसूरत हो, हसीन हो, जवान हो और तो और तुम्हारा फिगर बड़ा ही कमाल का है।
(इतनी ओपनली अंकल के मुँह से अपनी तारीफ सुनके मुझे शर्म आने लगी थी। मेरे हस्बैंड ने कभी मेरी ऐसे तारीफ नहीं की थी।)
मैं: क्यों? ऐसा क्या नजर आ गया आपको मेरे फिगर में?
(सॉरी! मैं आपको अपना फिगर बताना तो भूल ही गई। मेरा फिगर है 36-24-38। मेरे हिप्स थोड़े मोटे हैं।)
मैं भी अब अंकल के मजे लेने के मूड में थी।
अंकल: हाये! क्या बताऊँ कि कितना कातिलाना फिगर है तुम्हारा। बुड्ढे भी तुम्हें देख लें तो जवान होने की दुआ माँगें।
मैं: अच्छा जी! आप माँगते हैं क्या दुआ जवान होने की?
अंकल: मैं क्यों दुआ माँगूँ। मैं तो अभी जवान हूँ।
मैं: लगते तो नहीं हो जवान।
(मैं भी उनकी मजाक लेते हुए बोली।)
अंकल: तुम्हारे हस्बैंड से तो जवान ही हूँ। चाहो तो आजमाकर देख लो।
मैं: मैं कैसे आजमाऊँ आपको?
अंकल: एक मौका देकर देखो! अपने हस्बैंड को भूल जाओगी।
मैं: कैसा मौका?
अंकल: अपने साथ एक रात गुजारने का।
मुझे पता नहीं क्या हुआ ये सुनकर।
मैं एकदम गुस्से से बोली:
अंकल ये क्या बोल रहे हैं आप?
आपको तमीज नहीं है क्या बात करने की?
अंकल मुझे यूँ गुस्सा होते हुए देखके बोले:
अंकल: सॉरी! मैं तो बस ऐसे ही मजाक कर रहा था। तुम तो गुस्सा हो गई।
मैं: आप ये मजाक कर रहे हैं मेरे साथ रात गुजारने की?
निकल जाइए मेरे घर से अभी के अभी।
नहीं तो मैं सबको यहाँ बुला लूँगी।
और दोबारा मेरे घर मत आना।
अंकल सॉरी-सॉरी करते हुए घर से चले गए। उनके जाने के बाद मैंने गेट लॉक किया और सोफे पर आकर बैठ गई गुस्से में।
बैठे-बैठे मेरी नजर टेबल पर रखे उस बॉक्स पर पड़ी जो अंकल लाए थे।
मैंने वो बॉक्स उठाकर गेट की तरफ फेंककर मारा।
उसको ओपन किए बिना ही।
उस टाइम मुझे भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मुझे क्या हुआ है।
सुबह मेरी आँख मोबाइल की रिंग बजने से खुली। मोबाइल उठाकर देखा तो हस्बैंड की कॉल थी। मैंने कॉल रिसीव की और उनसे बातें करने लगी।
हस्बैंड: हाई। कैसी हो?
मैं: ठीक हूँ। आप कैसे हो? (मैं अभी भी नींद में ही थी)
हस्बैंड: ठीक हूँ। क्या हुआ अभी तक सो रही हो? 8 बज गए हैं।
(मैं कभी भी इतना लेट नहीं उठती थी। आज पहली बार इतना लेट हो गया था। मैं 5:30 या 6 बजे उठ जाती हूँ।)
मैं: 8 बज गए? (मैं एकदम चौंककर बोली) पता नहीं आज कैसे आँख नहीं खुली।
हस्बैंड: कोई बात नहीं। क्या हुआ आज लेट उठी हो? कौन सा तुम्हें ड्यूटी पर जाना है।
मैं: हम्म। आप किस टाइम पहुँच गए थे?
हस्बैंड: रात 2 बजे पहुँच गया था।
मैं: ठीक-ठाक पहुँच गए?
हस्बैंड: हाँ ठीक-ठाक पहुँच गया था।
मैं: ठीक है।
हस्बैंड: और बताओ वहाँ सब ठीक है? अंकल भी ठीक हैं?
(अंकल का नाम आते ही मुझे रात की सब बातें याद आने लगी थीं और मैं सोच में पड़ गई कि मैंने अंकल को गुस्से में क्या-क्या बोल दिया। मुझे अंकल के बारे में अब सोचकर गिल्टी फील हो रहा था। मुझे अंकल को ऐसा नहीं बोलना चाहिए था। यहाँ तक कि बातें आने में शायद मेरा भी कहीं न कहीं कसूर था। ना मैं उनसे मजे लेने के चक्कर में ज्यादा ओपनली बातें करती और ना वो मुझे ऐसा कहते।)
हस्बैंड: हेलो? क्या हुआ? कहाँ चली गई?
मैं: हम्म। कहीं नहीं। यहीं हूँ।
हस्बैंड: तो कुछ बोल क्यों नहीं रही? मैं अंकल का पूछ रहा हूँ कैसे हैं वो।
मैं: हाँ ठीक ही होंगे वो भी।
हस्बैंड: ठीक ही होंगे मतलब? घर नहीं आए आज वो?
मैं: नहीं।
(अब मुझे और भी ज्यादा गिल्टी फील हो रहा था कि अंकल आज घर नहीं आए। शायद उन्हें मेरी कही हुई बातें ज्यादा बुरी लग गईं।)
हस्बैंड: क्यों? क्या हुआ? कुछ बात तो नहीं हुई जो आज अंकल घर नहीं आए। वो तो रोज़ तुम्हारे हाथ की बनी हुई चाय पीने आते थे।
मैं: पता नहीं आज क्यों नहीं आए। (मैंने हस्बैंड से झूठ बोला)
फिर हमने थोड़ी देर और बात की फिर फोन डिस्कनेक्ट कर दिया। मैं उठकर फ्रेश होने बाथरूम में गई। उसके बाद किचन में जाके चाय बनाने लगी। चाय बनाते-बनाते मुझे फिर से अंकल का ख्याल आने लगा कि वो आज पीने नहीं आए। अब मैं ये सोचने लगी कि अंकल को सॉरी बोल दूँ और उन्हें चाय पर इनवाइट करूँ क्योंकि कल रात मैंने उन्हें कुछ ज्यादा ही सुना दी थी। ये सोचकर मैं किचन से निकली। बेडरूम में गई।
वहाँ से दुपट्टा लिया और अंकल के फ्लैट की ओर चल दी। बिना कुछ सोचे-समझे। शायद ये मेरे अंदर की गिल्टी फीलिंग थी तो मैं उन्हें सॉरी बोलने के लिए घर से निकल ही रही थी कि मेरी नजर उस बॉक्स पर गई जो मैंने रात को गुस्से में फेंक दी थी। मैंने वो बॉक्स उठाया और ओपन किया तो उसमें एक रिंग थी। रिंग को देखकर मेरी साँस ही रुक गई थी क्योंकि वो रिंग बहुत ही एक्सपेंसिव थी।
वो रिंग डायमंड की थी। मैंने उस रिंग को बॉक्स में वापस रखा और अंकल को बुलाने के लिए चली गई।
अंकल के फ्लैट के बाहर जाकर मैंने खुद को थोड़ा रिलैक्स किया और बेल बजा दी।
बेल बजाकर मैंने गेट ओपन होने का वेट किया। लेकिन बहुत देर तक गेट ओपन नहीं हुआ तो मैंने फिर दोबारा बेल बजाई। फिर भी गेट ओपन नहीं हुआ। (मैं ये भूल ही गई थी कि अंकल इस टाइम ड्यूटी जा चुके होंगे।)
मैं 10 मिनट तक वहाँ खड़ी रही। फिर मैं अपने फ्लैट में वापस आ गई निराश होकर। पता नहीं क्यों अब मेरा मन नहीं लग रहा था। बार-बार अंकल का ही ख्याल आ रहा था।
दोपहर के 12 बज चुके थे तो मैं लंच बनाने लगी। लंच बनाते-बनाते मेरे दिमाग में एक आइडिया आया। क्यों न आज अंकल को डिनर पर इनवाइट किया जाए। मैं ये सोचकर ही खुश हो गई। फिर मैं ये सोचने लगी कि पता नहीं अंकल को खाने में क्या पसंद होगा। मैं चाहती थी कि उनकी फेवरेट डिश बनाऊँ पर मुझे नहीं पता था कि उनको क्या पसंद है। लास्ट में मैंने डिसाइड किया कि मटर पनीर बना लेती हूँ। मेरे पास और कोई ऑप्शन नहीं था तो मैंने मटर पनीर फाइनल किया।
फिर मैंने लंच करके कुछ देर आराम किया। शाम के 5 बज गए थे तो मैं उठी और किचन में जाके डिनर की तैयारी करने लगी। 7 बजे तक मैंने डिनर रेडी कर लिया। डिनर रेडी करने के बाद मैं सोचने लगी कि मैं भी अच्छे रेडी हो जाती हूँ ताकि अंकल को सब सही लगे।
(एक मिनट? ये क्या? क्या मैं अंकल के लिए रेडी होने की सोच रही हूँ?)
ये सोचकर मुझे शर्म आने लगी थी।
खैर। मैं रेडी होने के लिए बेडरूम में आई और अपने वार्डरोब से अंडरगारमेंट्स और ट्रांसपेरेंट सूट निकाला जिसमें से थोड़ा मेरा जिस्म चमक सके। आज मैं अंकल को नाराज नहीं करना चाहती थी।
ये सब कुछ सोच-सोचकर मेरे अंदर एक अजीब सी बेचैनी हो रही थी और चूत में मीठी-मीठी खुजली भी।
रात के 9 बज गए थे तो मैंने सोचा कि अब अंकल को बुलाना चाहिए डिनर के लिए। तो मैं अच्छे रेडी होकर अंकल को बुलाने के लिए चली गई।
मैंने उनके फ्लैट पर जाके डोरबेल बजाई। थोड़ी देर बाद गेट ओपन हुआ।
(उस टाइम मेरी साँसें बहुत तेज-तेज चल रही थीं और दिल की धड़कनें भी।)
गेट अंकल ने खोला। मुझे वहाँ देखकर वो शॉक्ड हो गए थे।
(उनके मुँह से बहुत ज्यादा स्मेल आ रही थी। शायद उन्होंने ड्रिंक की हुई थी।)
अंकल: तुम यहाँ इस टाइम? सब ठीक तो है?
(शायद उन्होंने इस टाइम मुझे वहाँ एक्सेप्ट नहीं किया था।)
मैं: हाँ हाँ सब ठीक है। मैं तो आपसे सॉरी बोलने आई थी कल रात के लिए।
अंकल: ओह! अच्छा? मैं तो डर ही गया था कहीं कुछ हो तो नहीं गया।
मैं: अंदर नहीं बुलाओगे?
अंकल: हाँ हाँ अंदर आओ ना। तुम्हारा ही घर है।
फिर मैं अंदर गई। हॉल में जाके सोफे के पास खड़ी हो गई।
अंकल: अरे खड़ी क्यों हो? बैठो।
(वहाँ सामने टेबल पर एक शराब की बोतल और कुछ स्नैक्स रखे थे।)
अंकल: सॉरी। वो मुझे इसको पिए बिना नींद नहीं आती।
मैं: इट्स ओके।
अंकल: हम्म। और बताओ सब ठीक?
मैं: जी… जी सब ठीक है। वो मैं आपसे कल रात के लिए सॉरी बोलने आई हूँ। पता नहीं मुझे क्या हो गया था अचानक से।
अंकल: अरे कोई बात नहीं। ये सब तो होता रहता है। मैं भी कुछ ज्यादा ही बोल गया था जो मुझे नहीं बोलना चाहिए था।
मैं: अब आप मुझे शर्मिंदा कर रहे हैं ऐसा बोलकर?
अंकल भी मेरे सामने सोफे पर बैठ गए थे और ड्रिंक करने लगे थे जो उनके गिलास में पहले से रखी थी।
मैं: आपने डिनर कर लिया?
अंकल: नहीं अभी तो नहीं। ड्रिंक करने के बाद करूँगा।
मैं: ओके। मैंने आपके लिए डिनर बनाया है। अगर आपको कोई ऐतराज ना हो तो आप मेरे साथ डिनर करेंगे?
अंकल: ऐतराज? मुझे तो कोई ऐतराज नहीं है लेकिन तुम्हारा मुझे नहीं पता। कभी आज भी घर बुलाकर कल की तरह घर से निकाल दो।
मैं ये सुनकर शर्मिंदा हो गई। जो मैंने अंकल के साथ किया था वो मुझे नहीं करना चाहिए था।
मैं: सॉरी अंकल। माफ कर दीजिए मुझे। जो गलती मुझसे कल हुई वो गलती फिर कभी नहीं होगी। माफ कर दीजिए प्लीज।
अंकल: अरे! मैं तो मजाक कर रहा हूँ। तुम तो सीरियस ही हो गई।
मैं: नहीं अंकल। आप सही कह रहे हैं। मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था।
अंकल: अरे कोई बात नहीं। भूल जाओ उन सब बातों को। रात गई बात गई।
मैं: थैंक यू अंकल…….
फिर कुछ देर तक मैं वहीं बैठी रही जब तक अंकल ने अपनी ड्रिंक खत्म नहीं की। ड्रिंक खत्म करके अंकल और मैं दोनों मेरे फ्लैट पर आ गए।
अंकल डिनर टेबल पर बैठ गए। मैंने टेबल पर डिनर लगाना शुरू किया।
सब चीज अच्छे टेबल पर लगाकर मैं भी बैठ गई। फिर हमने डिनर स्टार्ट किया ही था कि लाइट चली गई।
(आज उन्होंने ना मेरी तारीफ की थी और ना ही कुछ मेरे बारे में कहा था।)
पता नहीं क्यों मुझे बुरा फील हो रहा था कि अंकल ने ना मेरी तारीफ की ना मेरे बारे में कुछ कहा।
मैं उनके लिए इतने अच्छे से तैयार हुई थी तो उन्हें कुछ तो कॉम्प्लीमेंट देना चाहिए था मुझे।
अंकल: लो ये तो शमा ही बुझ गई।
मैं: मैं कैंडल देखके लाती हूँ।
फिर मैं किचन में गई। वहाँ से कैंडल ढूँढके लाई।
मैंने टेबल के बीच में कैंडल रखकर जला दी।
अंकल: ये तो कैंडल डिनर हो गया। (ये कहके हँसने लगे)
मैं: शायद आज हमारी किस्मत में साथ कैंडल डिनर करना लिखा हुआ था।
खाना खाने के बाद मैंने अंकल को चाय के लिए पूछा तो उन्होंने मना कर दिया।
मुझे बहुत बुरा फील हुआ। अब मुझे और रहा नहीं गया तो मैं अंकल से पूछ बैठी।
मैं: आप मुझसे अभी तक नाराज हैं क्या?
अंकल: नहीं। तुम्हें ऐसा क्यों लगा कि मैं तुमसे नाराज हूँ?
मैं: आप जब से आए हैं तब से अब तक आपने एक बार भी मेरी तारीफ नहीं की और अब चाय को भी ना कर रहे हैं।
अंकल: चाय को मैं इसलिए मना कर रहा हूँ क्योंकि मैंने ड्रिंक कर रखी है और तुम्हारी तारीफ इसलिए नहीं कर रहा हूँ कहीं तुम फिर से नाराज ना हो जाओ।
मैं: नाराज? नहीं तो मैं क्यों नाराज होंगी?
(मैं ये एकदम से क्या बोल गई? बाद में ये सोचकर मुझे शर्म आ रही थी।)
अंकल: अच्छा?
मैं कुछ नहीं बोली। मैं सर को झुकाए नीचे को देखती रही। क्योंकि मुझे बहुत शर्म आ रही थी। तो अंकल बोले……
अंकल: इधर देखो मेरी तरफ।
मैंने बहुत हिम्मत करके अंकल की तरफ देखा।
अंकल: तुम इन कपड़ों में बहुत ही हॉट और सेक्सी लग रही हो।
(उन्होंने ये मेरी आँखों में देखते हुए बोला। तो मुझे शर्म आ गई और दोबारा फिर मैं नीचे को देखने लगी।)
अंकल: सच में? मैंने तुम जैसी हॉट लड़की आज तक नहीं देखी। क्या ही जबरदस्त फिगर है तुम्हारा। कसम से।
मैं: हम्ममम….
अंकल: तुम्हें पता है मुझे तुम्हारे फिगर में सबसे अच्छा क्या लगता है?
मैं: क्या???? (नीचे देखते हुए ही)
अंकल: तुम्हारे बूब्स।
(अब मेरी साँसें बहुत तेज-तेज चलने लगी थीं।)
अंकल: दिल करता है कि इन्हें जोर-जोर से मसलूँ।
मैं: हम्ममम?????
(मैं अब कुछ बोलने की हालत में नहीं थी। उनके मुँह से ऐसी बातें सुनकर मेरी चूत में पानी आने लगा था।)
अंकल: इनको जोर-जोर से दबाऊँ? और इनमें से दूध निकालकर पी जाऊँ।
फिर उन्होंने अपना एक हाथ मेरे राइट शोल्डर पर रखा। मुझे नहीं पता चला कि कब वो मेरे पीछे आकर खड़े हुए। और धीरे-धीरे मेरा शोल्डर सहलाने लगे।
अंकल: तुम्हारे जिस्म की खुशबू गुलाब के जैसी है। दिल करता है तुमसे लिपट जाऊँ।
अब उनका हाथ मेरे गालों को सहला रहा था और मैं आँखें बंद किए हुए बैठी हुई थी। जैसे कोई पत्थर की मूरत हूँ।
Next Part ==> मुझे अंकल ने चोदा – 3

Great post! I really enjoyed reading it. Thanks for sharing!