हुमा एक हाउस वाइफ और मिश्रा पान वाला – 2
पिछले पार्ट मे आपने पढ़ा कि सैफ और मिश्रा दोस्त बन जाते है और एक शाम सैफ अपनी वाइफ हुमा को मिश्रा की दुकान पर ले जाता है। हुमा की खूबसूरती देख मिश्रा उसपर फिदा हो जाता है और उसको पटाने का प्लान बनाने लगता है, किस्मत भी उसके साथ होती है और जिस दिन सैफ शहर से बाहर होता है उसी दिन हुमा बीमार पड़ जाती है। मिश्रा इत्तेफाक से उस दिन उनके घर पहुँच जाता है और हुमा को बीमार देखता है तो उसको अस्पताल ले जाता है। वहाँ जाकर डॉक्टर हुमा को एडमिट कर लेटा है। मिश्रा फिर हुमा की अच्छे से देखभाल करता है और पैसे भी अपने खर्च करता है। मिश्रा की केयर को देखकर हुमा इम्प्रेस हो जाती है। अब पढिए ये A Housewife kamukta sex story आगे।
पिछला पार्ट यहाँ पढ़ें => हुमा एक हाउस वाइफ और मिश्रा पान वाला – 1
A Housewife kamukta sex story
सैफ और मिश्रा कुछ देर बातें करती है हुमा की नज़रे मिश्रा जी पर ही थी, कॉल कट करके मिश्रा जी डॉ. को कहता है की आप भाभी जी को एडमिट कीजियें। डॉ – ओके और हाँ कुछ फॉर्मेलिटी है कुछ साइन है आप काउंटर पर जाकर कर लीजिये और एडवांस 10000 भर दीजिए।
हुमा – 10000! इतने क्यु? मिश्रा – आप अपना ख्याल रखिये मै हूं ना!
कुछ देर बाद हुमा को एडमिट किया जाता है मिश्रा जी डाक्यूमेंट्स ओके करके 10000 रुपये जमा करा देता है, सैफ को भी कुछ देर बाद बुरा लगता है की उसको अपनी वाइफ से ऐसे बात नहीं करनी चाहिए थी सैफ हुमा को कॉल करता है और अपनी कही बातो के लिए सॉरी कहता है। हुमा को बहुत गुस्सा आया था सैफ पर मगर वो इस हालत में नहीं थी की सैफ से नाराज़गी जताये। वही दूसरी तरफ हुमा को एहसास हुआ की उसका शौहर उसको इस बुरी सिचुएशन में डांट रहा है और मिश्रा जी जैसा अजनबी अनजान उससे हमदर्दी दिखा रहा है।
कुछ देर बाद मिश्रा उस डीलक्स रूम में आता है जहा हुमा एडमिट थी, हुमा लेटी थी मिश्रा के आते ही अपने बूब्स पर दुपट्टा डालते हुए, वो उठ कर बैठने की कोशिश करती है, मगर मिश्रा कहता है- मिश्रा – भाभी जी आप तकलीफ न लो, आप लेटी रहो मै तो बस ऐसे ही आया था, डॉ. ने कहा है कुछ घंटो का ऑब्जरवेशन रख कर कल आपको डिस्चार्ज कर देंगे, अब मै जाता हु।
हुमा – भाई साहब रुकिए, मिश्रा रुक जाता है।
हुमा – भाई साहब आपने काफी तकलीफ उठाई मेरे लिए।
मिश्रा – अरे इसमें तकलीफ कैसी! आप मेरे दोस्त की पत्नी हो कोई गैर नहीं।
हुमा – मगर भाई साहब आज की दुनिया में कौन करता है किसी के लिए इतना?
मिश्रा – अब भाभी जी आप भी न छोड़िये इन बातो को और आपको कुछ चाहिए तो बताइये?
हुमा – जी शुक्रिया कुछ नहीं ये रूम काफी महंगा लगता है?
मिश्रा – भाभी जी तो क्या मै आपको जनरल वार्ड में एडमिट करता?
हुमा – मगर वो!
मिश्रा – पैसो की चिंता आप न करो मै हूं ना!
इतना कह कर मिश्रा बाहर चला गया और जाते हुए मिश्रा को हुमा देखती रही, मिश्रा पूरी तरह हुमा पर इम्प्रैशन ज़माने में लगा हुआ था और कुछ हद तक कामयाब भी हो रहा था। हुमा को पहली नज़र में मिश्रा ठीक इंसान लगा नहीं था, मगर वो उसकी गलत फहमी थी, ऐसा उसने फील किया मगर सच तो ये था की हुमा की नजर ने पहली नज़र में सही जाना था। मिश्रा मौका देखते ही चौका मारने वाला था। मिश्रा को पता था, ये शरीफ और अच्छे घर की है, इसको पटाने के लिए कुछ अलग प्लान करना होगा।
हुमा बेड पर लेटे हुए सोच रही थी मिश्रा के बारे में, तभी वहाँ एक नर्स आयी और हुमा का ट्रीटमेंट शुरू हो गया। हुमा का ट्रीटमेंट चलता रहा, मिश्रा ने भी बार बार हुमा के रूम में जाकर देखा, सब कैसे चल रहा है। ये दिन गुजर गया, मगर मिश्रा ने इम्प्रैशन ज़माने का कोई मौका नहीं छोड़ा। रात भर वो हुमा के रूम के बाहर बैठा रहा, नर्स ने भी उसको जाने को कहा मगर वो नहीं गया। सुबह नर्स ने, मिश्रा ने हुमा की कितनी केयर की ये बात हुमा को बताई। हुमा की नज़र में मिश्रा महान बन गया।
डूसरे दिन सुबह हुमा की सभी रिपोर्ट नार्मल आयी तो हुमा को डिस्चार्ज दे दिया गया। अब तक सैफ का कोई अता पता नहीं था, ये बात हुमा को अच्छी नहीं लग रही थी। हर जगह मिश्रा ही भाग दौड़ कर रहा था। हुमा को घर लाने तक मिश्रा उसके साथ था, घर आने के बाद हुमा जाकर किचन में कुछ करने लगी तो वों बोला –
मिश्रा – अरे भाभी ये क्या? डॉ. ने आपको आराम करने को कहा है और आप काम में लग गई।
हुमा – नहीं भाई साहब बहुत काम पड़ा है घर का।
मिश्रा – मै कुछ नहीं जानता आप आराम कीजिये।
हुमा – कम से कम खाना तो बना लु!
मिश्रा – बिलकुल नहीं मै बाहर से ले आऊँगा आप आराम कीजिये।
हुमा को बहुत अच्छा लग रहा था, मिश्रा का इस तरह केयर करना, आज तक सैफ भी इतना केयर नहीं करता था उसकी। मिश्रा ने हुमा को आराम करने को कहा, वो बैडरूम में गयी। मिश्रा बाहर जाकर दोनों के खाने का सामान और हुमा के लिए जूस ले आया। हुमा को खाना खिला कर उसको दवाई दी, हुमा और मिश्रा उस वक़्त हॉल में बैठे थे, कि तभी सैफ घर में आया। सैफ हुमा की तरफ देख कर बोला-
सैफ – सॉरी बेगम बुरा फंस गया था, बड़ी मुश्किल से आ पाया।
हुमा को सैफ से नाराज़गी थी, मगर मिश्रा के सामने उसने नाराज़गी जाहिर नहीं की। मिश्रा को देख कर सैफ बोला-
सैफ – भाई आज आपने जो हमारे लिए किया अपना भी नहीं करता।
मिश्रा – भाई कहते हो और एहसानो वाली बातें करते हो यार।
मिश्रा उठ कर खड़ा हो गया और सैफ के करीब आकर उसको गले लगाकर कहा।
मिश्रा – भाई आधी रात को बुलाओ मै हाज़िर हूं आपके लिए।
सैफ गले लग कर – शुक्रिया भाई।
अब उस बेचारे सैफ को क्या पता था, मिश्रा इतना भाई चारा और पीड़ा क्यों दिखा रहा है। सैफ और मिश्रा अलग हुए और सैफ ने हुमा से कहा।
सैफ – अब कैसी है तबीयत?
हुमा – ठीक है।
सैफ – ठीक है तो फिर हमारे लिए गरमा गरम चाय बना दो।
मिश्रा – भाई साहब ये क्या! भाभी अभी अभी हॉस्पिटल से आयी है और आप उनसे काम करवा रहे है?
सैफ – अरे भाई अभी तुमने सुना नहीं उसने कहा मै ठीक हु।
मिश्रा – भाई औरते होती ही ऐसी है, तकलीफ हो तो भी कहेगी ठीक हूं भाभी को आराम करने दो।
हुमा को मिश्रा की ये बातें दिल में उतर गई। हुमा सोचने लगी एक गैर मर्द मेरी इतनी फ़िक्र कर रहा है और मेरा शौहर उसको चाय की पड़ी है, हुमा सोच ही रही थी की तभी मिश्रा ने कहा-
मिश्रा – भाई साहब मै सोच रहा हूं आप कुछ दिन के लिए नौकरानी रख ले।
सैफ – भाई हम दो ही लोग है क्या ज़रुरत है नौकरनी की?
मिश्रा – ज़रुरत है भाभी को आराम करने को कहा है डॉ. ने।
सैफ हुमा की तरफ देखते हुए – क्या हमे नौकरानी की ज़रुरत है?
हुमा का मन तो था की कोई आ जाये तो आराम मिले, मगर उसने सैफ को देख कर ना कहा।
मिश्रा – भाई मै कल सुबह तक एक नौकरनी भेजता हु।
सैफ – भाई आप क्यों ज़िद कर रहे हो? आप को तो पता है मेरा काम ठीक नहीं चल रहा, ऊपर से नौकरनी का खर्चा कौन उठाएगा?
मिश्रा – ओह्ह तो ये बात है, उसको सैलरी मै दे दूंगा अब खुश? मगर बेचारी भाभी को कुछ दिन रेस्ट करने दो, जब लगे की अब उसकी ज़रुरत नहीं तो फिर उसको जाने को कह देंगे। क्यों भाभी ठीक है ना?
हुमा खुश होते हुए जी भाई साहब।
ये कह कर मिश्रा चला गया, मिश्रा के जाते ही हुमा सैफ पर बरस पडी।
हुमा – आपको मेरी कोई फ़िक्र है या नहीं? मै बीमार हॉस्पिटल में एडमिट और आप अभी आ रहे है?
सैफ भी गुस्से से – तो क्या मैंने जान बूझ कर किया? एक तो मै फंस गया बॉम्बे जाकर।
हुमा – मगर आप मुझे कॉल तो कर सकते थे ना?
सैफ – मै बार बार आउट ऑफ़ नेटवर्क में था।
कुछ देर दोनों के बीच बहस के बाद हुमा बेड रूम में चली जाती है सैफ गुस्से से उसको देखता है। हुमा अंदर जाकर सोचती है, मिश्रा जी कितने अच्छे इंसान है और मेरा शौहर जिसको मेरी परवाह ही नहीं है, फिर उसका मन उसको कहता है जैसा भी है तेरा शौहर है उसके साथ ही अब ये ज़िन्दगी बितानी है। इतना सोच कर फिर वो बाहर आती है और सैफ से प्यार से बात करती है।
हुमा – जी रात के खाने में क्या बनाऊ?
सैफ का भी गुस्सा ठंडा हो गया था। सैफ भी नॉर्मली बोलता है जो तुम चाहो बना दो और मुस्कुरा देता है, हुमा भी मुस्कुरा देती है ये दिन गुजर जाता है और दूसरे दिन सुबह सैफ के जाने के बाद मेन डोर की बेल बजती है, हुमा जाकर डोर ओपन करती है, सामने एक औरत खड़ी थी साँवली स्लिम, मगर नैन नक्श बहुत तीखे थे, फिगर भी अच्छा था। हाइट 5 फुट 2 इंच के आस पास उस औरत को देख कर हुमा बोली-
हुमा – जी आप कौन?
तभी उस औरत के पीछे मिश्रा आकर खड़ा होता है, हुमा मिश्रा को देख कर अरे आप आईये ना। मिश्रा अंदर आता है और उस औरत को भी आने को कहता है। अंदर आकर मिश्रा कहता है।
मिश्रा – जी भाभी जी ये शांता है आज से ये आपके यहाँ काम करेगी, भली औरत है बेचारी हमारे मोहल्ले में ही रहती है।
हुमा – ओह्ह मगर ये तो अभी अभी गए है, उनको भी बता देते तो?
हुमा की बात मिश्रा काटते हुए – मिश्रा – भाभी जी मै शांता को मिला चुका हूं भाई साहब से, उन्होंने आपसे मिलाने को कहा है।
हुमा – ओह्ह तो ये तो अच्छा हुआ, शांता आओ मै तुमको घर दिखाती हु।
मिश्रा फिर बात काटते हुए भाभी जी आपकी तबियत कैसी है?
हुमा – अच्छी है भाई साहब अगर आप न होते तो शायद ख़राब होती।
इतना कह कर हुमा मिश्रा को देख मुस्कुरा दी, हुमा ने शांता को घर दिखा दिया और काम समझा दिया। मिश्रा हॉल में बैठा, तो हुमा ने शांता को पहला काम दिया की वो मिश्रा जी को और उसको अच्छी कड़क चाय पिलाए।
शांता – जी मालकिन अभी लाई।
हुमा – मुझे मालकिन न कहो शांता।
मिश्रा फिर हुमा की बात काटता है- मिश्रा – मालकिन को मालकिन नहीं, तो क्या कहेगी? वो कहने दीजिये।
हुमा कुछ नहीं कहती, कुछ देर बाद शांता चाय लेकर आती है और मिश्रा चाय पी कर चला जाता है। मिश्रा के जाने के बाद हुमा मिश्रा के बारे में सोचने लगती है, कितने अच्छे है भाई साहब कितनी फ़िक्र है इनको हमारी। मगर हुमा को क्या पाता था, एक बड़ा ट्रैप मिश्रा लगा रहा था उसके आस पास। शांता भी इस ट्रैप का एक हिस्सा थी, ये आगे पता चल जायेगा। शांता हुमा के घर में काम करने लग गयी, मगर हुमा को पता नहीं था ये शांता और वो जो नेक इंसान बनने की एक्टिंग कर रहा है, मिश्रा पानवाला! ये दोनों उसके हँसते खेलते संसार को तबाह कर देंगे। शांता अब रोज़ काम पर आने लगी।
समय गुजरने के साथ शांता और हुमा दोस्त के जैसे बातें करने लगे, मगर शांता ने हुमा को हर वक़्त मालकिन ही कहा। हुमा को काफी आराम मिल रहा था, शांता की वजह से। शांता को मिश्रा ने मिशन दिया, उसका पहला कदम हुमा से दोस्ती करके उसके दिल से हर बात निकलवाना था। जो शांता ने बखूभी किया, अब अगला कदम था दिन रात शांता, मिश्रा की तारीफ करे. एक दिन हुमा हॉल में बैठी सोफे के करीब, घर में हुमा मैक्सी नाइटी पहना करती, मगर बाहर पूरी तरह नकाब में जाती थी। हुमा टीवी देख रही थी और फिर किचन में काम करती शांता से मुस्कुराते हुए कहने लगी।
हुमा – आरी शांता तूने कभी बताया नहीं तेरे घर में कौन कौन है?
शांता – अब क्या बताओ मालकिन एक पति है बिलकुल नालायक।
हुमा चौंक कर – नालायक कैसे?
शांता – वो ऑटो चलाता है उसका नाम राम राव है, सब उसको रामू कहते है, दिन भर ऑटो चलाकर जितना कमाता है, सब दारू में उड़ा देता है, मै तो तंग आ गयी उससे। मगर मेरी एक प्यारी बेटी है उसका नाम काम्या है उसी के लिए इस नालायक पति को झेल रही हूं.
हुमा को बुरा लगता है उसके घर के बारे में सुनकर।
हुमा – काम्या क्या करती है?
शांता – वो कॉलेज जाती है।
हुमा – गुड।
शांता – क्या कहु मालकिन हमारे माँ बेटी के तो खाने के वानदे हो जाते थे।
हुमा – वानदे मतलब?
शांता – वानदे मतलब हमको खाना कभी नसीब होता तो कभी नही।
हुमा – ओह्ह सो sad फिर?
शांता – मालकिन भगवान का रूप लेकर मिश्रा जी पानवाले हमारे ज़िन्दगी में आये, जब उनको पता चला की हमारी माली हालत ख़राब है, तो बिना कुछ मतलब के उन्होंने काम्या की कॉलेज की फीस भरी और हमको वक़्त पर राशन दिया। मुझे जैसे आपके यहाँ काम पर लगाया, वैसे ही पहले एक सेठ के यहाँ काम पर लगाया था।
हुमा – फिर वहाँ से यहाँ कैसे?
शांता – मिश्रा जी ने कहा की कल से आप के यहाँ काम पर जाया करे, आप लोग बहुत अच्छे भले और उनकी फॅमिली की तरह हो, इसलिए वहाँ से यहाँ आ गयी। मिश्रा जी जैसा फरिश्ता होता कहा है आज की दुनिया में?
हुमा – हाँ सच कहा तुमने, बहुत अच्छे इंसान है मिश्रा जी।
शांता जो कुछ स्टोरी हुमा को सुना रही थी, वो आधी सच आधी झूटी थी, रामू शराबी ज़रूर था मगर घर में कभी भूके मरने की नौबत नहीं आने दी थी उसने और वो काम्या को बहुत प्यार करता था। वो तो शांता को मिश्रा को फरिश्ता साबित करना था, इसलिए झूटी कहानिया घड रही थी और हुमा के यहाँ उसकी फर्स्ट जॉब थी, इससे पहले वो किसी सेठ के यहाँ काम नहीं करती थी, उसके और मिश्रा के बीच डील हुए थी, मिश्रा उसको महीने के सैलरी के अलावा 50 हज़ार देने वाला था, अगर हुमा को शांता पटा कर दे तो। वैसे मिश्रा का असली रूप ये था की शांता जैसी कई गरीब औरतो को पैसे का लालच देकर वो चोद लेता था।
शांता को भी जब चाहे अपनी पान की दुकान के पीछे वाले रूम में चोद लेता था, मिश्रा चूत का दीवाना था, आज तक उसने मैली गरीब सावली औरते चोदी थी, मगर हुमा को चोदना उसका सबसे बड़ा सपना बन गया था। यहाँ शांता मिश्रा की तारीफ के पुल बांध कर मिश्रा को हीरो बना रही थी और काफी हद तक कामयाब भी हो गयी थी। हर दिन कोई न कोई मिश्रा की कहानी हुमा को सुना देती, हर दिन की तरह आज भी शांता एक फेक कहानी सुनाने वाली थी।
हुमा – अरी क्या हुआ शांता? आज बड़ी चुप है।
शांता उदास सा मुंह बना कर अब क्या बताऊँ मालकिन! हमारे पड़ोस में जो शास्त्री जी थे उनकी मौत हो गयी, उनकी मौत के बाद उनकी पत्नी और बच्चो हाल बुरा होने लगा, कोई देखने वाला नहीं था। पता नहीं भगवान ने हमारे मोह्हले में अपना रूप लेकर, मिश्रा जी बन कर आ गए और मिश्रा जी ने उस बेसहारा विधवा को एक छोटी सी स्टोर्स की दुकान डाल दी और घर का खर्चा भी उठा रहे है आज वो बहुत दुआ दे रही थी मिश्रा जी को।
हुमा – सच में मिश्रा जी की जितनी तारीफ करू उतनी कम, औरतो की इज़्ज़त करने वाले सच्चे इंसान है वो। वाक़ई हम खुशनसीब है जो हमको मिश्रा जी जैसे इंसान मिले।
लेकिन सच तो कुछ और ही था मिश्रा, शास्त्री जी को ब्याज से पैसे देता था, शास्त्री के मरने के बाद उसकी विधवा बीवी को चोद कर पैसे वसूल कर रहा था। हुमा की नज़र में दिन बा दिन मिश्रा हीरो बन रहा था। अब अगला कदम था हुमा और सैफ के रिश्ते के बीच दरार पैदा करना, क्योंकी मिश्रा जानता था की दोनों के बीच प्यार बहुत है। हुमा सैफ से बेवफाई कभी नहीं करेगी.
शांता – मालकिन वैसे एक बात कहु, मालिक आप के साथ ज्यादा वक़्त नहीं बिताते क्यु?
हुमा – बहुत काम होता है उनको! क्या करे भाग भाग कर थक जाते है।
शांता – हाय दय्या कहाँ भागते है?
हुमा हस्ते हुए – अरे पगली काम और पैसे के पीछे भागते है।
शांता – ओह्ह अच्छा।
हुमा – शांता मै सोच रही थी मिश्रा जी सब के लिए इतना कुछ करते है, मेरे लिए भी किया है बेचारे रात भर हॉस्पिटल में जाग रहे थे, क्यों न उनको खाने की दावत दी जाये।
शांता – बहुत अच्छा विचार है.
हुमा – वो शाम को आएंगे तो पूछ लेती हूँ उनसे।
शाम हुई और सैफ घर आया तो हुमा ने मिश्रा की दावत वाली बात बताई, तो सैफ ने कुछ ज्यादा रिस्पांस नहीं दिया।
हुमा – मै क्या कह रही हूं और आप का ध्यान कहा है?
सैफ – हाँ मैंने सुना मिश्रा को दावत वाली बात।
हुमा – तो कल रात के खाने पर बुला लू? आपके साथ खा लेंगे।
सैफ – अरे यार वो वेजीटेरियन बंद है मुझे भी वेज खाना पडेगा।
हुमा – तो आप नॉन वेज खा लेना।
सैफ – तुम भी क्या बात करती हो यार! मेहमान को बुला कर उसके सामने नॉन वेज खाऊँ? उससे अच्छा है कल उसको दोपहर में बुला लो वेग खिला दो।
हुमा – मगर आप के बगैर मै कैसे?
सैफ – अरे तुम और शांता दोनों होंगे न खिला देना ओके! अब मुझे बोर मत करो मै थक चुका हूं.
हुमा को सैफ का ये बर्ताव बिलकुल अच्छा नहीं लगा, दूसरे दिन शांता के आते ही हुमा ने कहा – अरी शांता तेरे पास मिश्रा जी का मोबाइल नंबर है क्या? मै उनसे लेना ही भूल गयी हूं और उनको कॉल कर रही हूं तो वो नेटवर्क में नहीं दिख रहे, मुझे मिश्रा जी से पूछना था उनको खाने में क्या पसंद है? अगर देर हो गयी तो फिर दोपहर के खाने का वक़्त निकल जायेगा, तो दावत का क्या फायदा?
शांता के पास नंबर था फिर भी उसने ना कहा।
हुमा – उफ़ या खुदा अब क्या करू?
शांता – मालकिन पान की दुकान पर जाकर पूछ आऊं?
हुमा ने कुछ देर सोचा और कहा अरे नहीं वो क्या सोचेंगे! दावत दे रहे है और तुम्हारे जरिए मेसेज भेजा। मै खुद ही जाती हूं।
हुमा ने बुर्का पहना और निकल पड़ी मिश्रा की पान की दुकान की तरफ।
आगे क्या हुआ/। क्या मिश्रा अपनी चाल मे कामयाब हो पाया? क्या वो हुमा को चोद पाया? सारे सवालों के जवाब मिलेंगे आपको आने वाले parts मे, तो बने रहिए हमारी साइट पर।
Next Part ==> हुमा एक हाउस वाइफ और मिश्रा पान वाला – 3
