मम्मी को दादाजी से चुदवाया – 4

Sasur bahu ki kamukta chudai story:- 5-मिनट बाद मैं भी कमरे के बाहर निकल गया और सीधा दादा जी के कमरे की खिड़की के पास गया और अंदर देखने लगा। मम्मी दादा जी के साथ बैठी हुई थी और दादा जी मम्मी का कंधा सहला रहे थे।

पिछला पार्ट यहाँ पढ़ें ==> मम्मी को दादा जी से चुदवाया – 3

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Sasur bahu ki kamukta chudai story

दादा जी – बहु तुम यहाँ आ गयी हो, यानी तुम्हारी भी मर्जी है। मैं चाहता हूं तुम खुल के मुझसे बात करो, ताकि हमारे बीच कोई भी पर्दा न रहे।

मम्मी – पापा जी हमारे बीच कोई पर्दा रहा ही कहाँ है? आपने तो पहले ही शर्म के परदे को फाड़ दिया है।

दादा जी – अब बहु ये मत कहना की जब मैं तुम्हारी चुदाई कर रहा था, तो तुम्हे अच्छा नहीं लग रहा था। क्युकी मैं जानता हूँ मैंने तुम्हारा 2 बार पानी निकाल दिया था।

मम्मी – पापा जी आप सही कह रहे है, मुझे भी आपके साथ बहुत मज़ा आया था। अब आपका बेटा तो रहता नहीं है। इसीलिए मैं भी इस आग में जल रही थी। मगर उस दिन जब आपने मुझे प्यार किया, तब मुझे आपके रूप में एक नया साथी मिल गया। मैं तो उस रात भी आपके पास आना चाह रही थी। मगर फिर मन्नू के पापा आ गए, इसीलिए मैं रात में नहीं आ पायी।

दादा जी – बहु छोडो ये बाती! अब हमारे बीच कोई भी नहीं आएग। मैं खुश हूं मेरी बहु मुझे समझती है।

मम्मी – पापा जी समझा तो आपने मुझे है, मैं कभी भी ये शर्म की दीवार पार नहीं कर पाती, मगर अब आपने उस दीवार को तोड़ दिया है। मैं हमेशा आपके बेटे की पत्नी रहूंग़ी। मगर मैं एक पत्नी के सारे सुख आपको भी दूंग़ी, जैसे आपने मुझे सुख दिया है।

फिर मम्मी ने दादा जी के होंठों को चूसना शुरू कर दिया। दादा जी भी मम्मी के होंठों को चूस रहे थे। और उनकी गांड को दबा रहे थे। मम्मी ने दादा जी को ऊपर से नंगा कर दिया और वह उनकी छाती को चाटने लगी। फिर मम्मी ने दादा जी का पजामा खोल दिया और अंदर से दादा जी पहले से ही नंगे थे। दादा जी का लंड उछल के बाहर आ गया। दादा जी के लंड का सुपाड़ा पहले से ही खुल चुका था। मम्मी ने दादा जी का लंड पकड़ा और उसे आगे पीछे करने लगी। फिर मम्मी ने दादा जी का लंड मुँह में डाल लिया और उसे चूसने लगी।

दादा जी ने उस सुखद अहसास को पा कर अपनी आँखे बंद कर ली। दादा जी का हाथ मम्मी के सर पर था और मम्मी दादा जी का आधा लंड अपने मुँह में ले रही थी। मम्मी के थूक से दादा जी का लंड पूरा गिला हो चुका था। जिसे मम्मी बार बार निकाल के चूस रही थी। मम्मी दादा जी का लंड चुस्ती हुई खुश लग रही थी। आखिर कार उन्हें भी एक साथी मिल गया था, जो उनकी काम वासना को शांत कर सकता था।

फिर दादा जी ने मम्मी को खड़ा कर दिया और उन्होंने मम्मी की मैक्सी को निकाल के साइड में फेक दिया। मम्मी अंदर से पूरी नंगी थी। दादा जी का लंड और भी टाइट हो गया।

दादा जी – बहु आज तुमने अंदर कुछ भी नहीं पहना है।

मम्मी – पापा जी जबसे पंकज गए है। तब से मेरा मन बहुत अजीब हो रहा था। मैं बस आज रात का इंतज़ार कर रही थी। इसीलिए मैंने अंदर कुछ नहीं पहना।

दादा जी – बहु अगर मुझे पहले पता होता की मेरी बहु मेरी बात का बुरा नहीं मानेगी, तो मैं कब का तेरे पास आ जाता।

मम्मी – पापा जी मैं तो उसी दिन मान गयी थी, जब आपने अपना लंड मेरे पीछे लगाया था। मैं उसी दिन समझ गयी थी की आप क्या करना चाहते है। मगर फिर भी थोड़ा डर लग रहा था।

मम्मी – और फिर आपने जो मेरी चुदाई की थी, उसके बाद मैंने सोच लिया था। की अब मैं भी आपको हाँ बोल दूंग़ी। सच कहु तो पंकज से चुदाई करवाते हुए मुझे आप ही याद आ रहे थे। इन 2 दिनों में भी पंकज ने मुझे ना के बराबर चोदा है।

मम्मी के मुँह से ऐसी बाते सुनके मैं समझ गया था, की मेरी मम्मी भी एक नंबर की खिलाडी है। बस वह आपने छुपा हुआ रूप किसी को दिखाना नहीं चाहती है। दादा जी मम्मी के सामने खड़े थे और दादा जी का खड़ा हुआ लंड मम्मी की नाभि में घुसा जा रहा था। दादा जी के लंड का सुपाड़ा मम्मी की नाभि में घुसा हुआ था। दादा जी ने मम्मी के दूध को मुँह में भर लिया और उसे चूसने लगे। मम्मी दादा जी के सर पर हाथ फिर रही थी और दादा जी दूसरे हाथ से मम्मी की चूत को रगड़ रहे थे।

मम्मी आँखे बंद किये उस पल का मज़ा ले रही थी। मम्मी के चेरे पर वासना के भाव साफ़ दिख रहे थे। दादा जी मम्मी के दूध चूसते जा रहे थे, और कभी उनकी चूत को रगड़ रहे थे, तो कभी मम्मी के दूध को मसल रहे थे। जब दादा जी मम्मी के दूध को मसल रहे थे, तो मम्मी के चेहरे पर दर्द वाले भाव आ रहे थे। मगर मम्मी दादा जी को कुछ नहीं कह रही थी। फिर दादा जी नीचे बैठ गए और उन्होंने अपनी जीभ मम्मी की नाभि में डाल दी। दादा जी की जीभ मम्मी की नाभि को चोद रही थी, और दादा जी उंगलिया मम्मी की चूत को शांत कर रही थी।

मम्मी को देखकर लग रहा था की वह पूरी गरम हो चुकी है। बस चुदाई ही रह गयी है। फिर मम्मी खुद बेड के कोने पर आके लेट गयी। दादा जी मम्मी के पास गए। और मम्मी ने खुद दादा जी का लंड पकड़ के चूत में डाल लिया। मम्मी की चूत वाकई बहुत गीली थी। दादा जी खड़े खड़े धक्के लगाने लगे। और मम्मी के बड़े बड़े दूध जोर जोर से हिलने लगे। मम्मी को दादा जी के साथ देखकर मैं भी आपने लंड हिलाने लगा। मम्मी पूरा लंड अपनी चूत में ले रही थी और कमरे में थप थप की आवाज आ रही थी। दादा जी को पता था मैं खिड़की से देख रहा हूँ और उन्होंने कई बार खिड़की की तरफ भी देखा। मगर बाहर अंधेरा था, इसीलिए कुछ नहीं दिखा। मगर मुझे पूरी चुदाई दिख रही थी।

मम्मी – पापा जी आप भी बेड पर आ जाएँ, कब तक नीचे खड़े रहेंगे।

फिर दादा जी बेड पर आ गए और मम्मी ने तकिया उठायी और खुद अपनी कमर के नीचे लगा ली। दादा जी भी अपनी बहु की कला देखकर खुश हो गए।

दादा जी – वाह बहु तुम्हे तो पहले से सब पता है की मुझे क्या पसंद है।

मम्मी – आप भी कुछ कम नहीं है पापा जी, आपकी हरकतों ने ही मुझे अपना असली रूप दिखाने के लिए मजबूर किया है। अब जब हमारे बीच कोई पर्दा नहीं है, तो मैं खुद बेशरम हो गयी हु।

दादा जी – बहु मुझे तो तुम हर रूप में पसंद हो, मगर ये वाला रूप मुझे ज्यादा पसंद है।

मम्मी – अब आपको मेरा यही रूप दिखाई देगा पापा जी, बस मन्नू के सामने आप कुछ मत करना। बाकी आपका जब मन करे आप कुछ भी कर सकते है।

दादा जी भी सोच रहे होंगे, तुम्हे क्या पता बहु, तुम्हारे बेटे ने ही सारी सेटिंग की है, ताकि मैं तुम्हे चोद सकुं।

दादा जी – बहु अब मन्नू उठेगा तो नही।

मम्मी – पापा जी आप चिंता मत करो, मैं जानती हूं वह बीच में कभी नहीं उठेगा, इसीलिए तो मैं आपके पास आ पायी हु।

दादा जी ने लंड पूरा अंदर डाल दिया और फिर मम्मी से चिपक कर चुदाई करने लगे। दादा जी मम्मी के दूध चूस रहे थे, तो कभी उनके होंठों को चूस रहे थे। मम्मी भी उनका पूरा साथ दे रही थी। मम्मी के मुँह से मोअन्स की आवाज निकल रही थी और फिर मम्मी ने दादा जी को कस के पकड़ लिया। शायद मम्मी का पानी निकल चुका था, मगर दादा जी धक्के लगाते रहे। फिर दादा जी ने मम्मी को बेड से नीचे खड़ा कर दिया और मम्मी भी समझ गयी। की दादा जी क्या चाहते है। इसीलिए वह भी कुतिया बन गयी और दादा जी ने अपना लंड पीछे से चूत मे डाल दिया।

दादा जी पुरे मज़े से माँ की चुदाई कर रहे थे। मम्मी की गोरी गांड देखकर तो मैं भी पागल हो गया था। फिर मम्मी थोड़ी आगे हो गयी और दादा जी का लंड बाहर आ गया। मम्मी ने दादा जी को बेड पर लिटा दिया और फिर मम्मी दादा जी के लंड पर चढ़ गयी। दादा जी मम्मी के दूध को मसल रहे थे और मम्मी फुल स्पीड में अपनी कमर को चला रही थी। मम्मी को देखकर लग रहा था, की उनका पानी फिर से निकलने वाला था। उधर दादा जी का भी पानी निकलने वाला था। दादा जी ने अपनी आँखे बंद कर ली और माँ कमर चलाती रही।

फिर मम्मी और दादा जी दोनों शांत हो गए और दादा जी ने सारा पानी मम्मी की चूत में ही निकाल दिया। मम्मी दादा जी के ऊपर ही लेटी हुई थी। फिर वह साइड में लेट गयी। मैंने देखा, दादा जी का लंड अभी भी झटके मार रहा था और मम्मी की चूत से दादा जी का पानी निकल रहा था। दादा जी मम्मी के दूध चूसने लगे और मम्मी भी उनके सर पर हाथ फिराने लगी।

दादा जी – कैसा लगा बहु?

मम्मी – बहुत अच्छा था पापा जी। अगर ऐसी चुदाई हफ्ते में एक बार भी मिल जाये, तो सारी थकान उतर जाती है।

दादा जी – बहु अब जब भी थकान उतारनी हो तो मेरे पास आ जाना। तुम्हारी सारी थकान और गर्मी निकाल दूंगा।

मम्मी – आपके पास ही आउंगी पापा जी। पंकज तो सिर्फ 2 दिन रहते है। उसमें भी अपना काम निकाल के सो जाते है। मैं तो फिर भी तड़पती रहती हु।

दादा जी – बहु अब तुम्हे और मुझे तड़पना नहीं पड़ेगा, तुम्हारी सारी गर्मी अपने लंड से निकाल दूंगा।

मम्मी – पापा जी लगता है शिलाजीत का असर अच्छा होता है, इसीलिए आपका लंड ज्यादा अच्छे से टिक पाता है।

दादा जी – तुम्हे पता है, मैं शिलाजीत खाता हूँ?

मम्मी – हाँ पापा जी मैंने आपकी वह शिलाजीत देखि है और आज उसका असर भी देख लिया। वैसे अब मैं चलती हु।

दादा जी – बहु कहाँ जाऒगी? यही मेरे साथ सो जाओ। मन्नू तो वैसे भी सोया होगा। उसे क्या पाता चलेगा।

दादा जी के बहुत कहने पर मम्मी दादा जी के साथ नंगी सो गयी और फिर मैं आपने कमरे में आ गया।

आगे क्या हुआ पढिए अगले पार्ट मे

Next Part ==> मम्मी को दादाजी से चुदवाया – 5

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