माँ का अकेलापन दूर किया
Maa ki chudai ki hindi sex story:- हैलो दोस्तों मेरा नाम राहुल है और मै अब 30 साल का हूँ. यह कहानी तबकी है जब मैं 24 साल का था. मुंबई में एक सॉलिड जॉब मिल गयी थी तो मैं वही सेटल हो गया. घर पे माँ-पापा और छोटी बहन लखनऊ में रहते थे. बहन की शादी हो चुकी थी वह अलग शहर में अपनी लाइफ सेट कर चुकी थी. सबसे ज़्यादा याद माँ की आती थी – उनका नाम सुप्रिया है. बहुत सॉफ्ट और केयरिंग इंसान लेकिन पापा विक्रम बिलकुल टॉक्सिक थे. उनका छोटा सा बिज़नेस था पर रोज़ की दारू ने सब कुछ तबाह कर दिया. घर आते ही चिल्लाते, माँ पे हाथ उठाते और अगर एक बात भी उनको पसंद न आये तो थप्पड़ तक मार देते. मैं बचपन से यह सब देखता था और माँ के लिए दिल से दुःख होता था.
Maa ki chudai ki hindi sex story
एक बार मैं लखनऊ गया हफ्ते भर की छुट्टी पे. माँ को समझाने लगा “माँ मेरे साथ मुंबई चलो ना! सिर्फ एक महीना… पापा को सबक मिल जाएगा.” पहले तो वह बिलकुल नहीं मानी. “पापा अकेला कैसे रहेगा बेटा?” लेकिन मैंने इतना इंसिस्ट किया की आखिरकार मान गयी. बिना बताये निकलने का प्लान बनाया. नोट छोड़ दिया टेबल पे और सीधा एयरपोर्ट. मुंबई पहुँचते ही रात को पापा को कॉल किया. उनका गुस्सा सुनके माँ के आंसू निकल आये पर पहली बार उनकी आवाज़ में हिम्मत थी.
माँ – “अगर दारू नहीं छोड़ी तो मैं कभी वापस नहीं आउंगी बोलके फ़ोन काट दिया.
उस दिन माँ का चेहरा पहली बार इतना खुला और रिलैक्स्ड दिखा. पहले दो-तीन दिन मैंने ऑफिस से पहले सब अरेंज किया। फ्रिज, फुल टीवी रिमोट उनके हाथ में. शाम को घर आता तो माँ ने घर को बिलकुल अपना बना लिया था. गरमा गरम खाना, परफेक्ट चाय. मैंने मज़ाक में बोला “माँ यहीं परमानेंटली रह जाओ ना.” वह हंस दी “पापा दारू छोड़ दे तो दोनों आ जाएंगे बेटा.” मुझे यह आईडिया बिलकुल नहीं पसंद था. पापा वैसे भी नहीं बदलने वाले थे.
एक हफ्ते बाद पापा को फिर कॉल किया. अभी भी ड्रंक और गुस्से में. माँ ने सीधा बोल दिया “मैं सिर्फ तब वापस आउंगी जब तू चेंज करेगा और कॉल कट. उसके बाद दो हफ्ते निकल गए. घर में माँ के साथ रूटीन बन गया था – मैं ऑफिस, वह घर संभालती. रोज़ अलग-अलग साड़ी पल्लू से सर और पीठ ढक के. बचपन से ऐसा ही देखा था मैंने. लेकिन छठवे हफ्ते के संडे सब कुछ पलट गया. मैं देर से उठा. किचन में गया तो माँ खाना बना रही थी. आज उनका पल्लू सिर्फ कंधे पे लटका हुआ था.
लम्बी कमर तक बाल खुले हुए, लोवर बैक, पूरी तरह नंगी गांड सिर्फ साड़ी से कवर्ड. वह लम्बी हैं इसलिए फिगर हैवी नहीं, बस करवी और सेडक्टिव लग रही थी. पहली बार मैंने उनको ऐसे देखा. नज़र ही नहीं हट रही थी. जितना देखता उतना समझ आता की सालों से यह खूबसूरत बॉडी उनके कपड़ों के नीचे छुपी हुई थी.
वह मुड़ने वाली थी मैंने जल्दी से बोला “माँ आज क्या बना रही हो?”
वह मुस्कुरायी “पोहा और अंडा फ्राई.”
“वाह मुँह में पानी आ गया!”
“ब्रश करके आ बेटा ब्रेकफास्ट रेडी है.”
बाथरूम में जाते हुए मेरा दिमाग घूम रहा था, आज माँ ने पल्लू क्यों नहीं कवर किया? नाभि भी तो दिख रही होगी. ब्रश करके लिविंग रूम आया. माँ ने ब्रेकफास्ट सर्व किया अभी भी सेम लुक. चुपके से देखा… और मेरा लंड खड़ा हो गया. उनका सुन्दर चेहरा, पतली कमर लेकिन बड़े बड़े बूब्स और भरी हुई गांड. पहले कभी ऐसे नहीं देखा था मैंने माँ को. उस दिन और अगले कुछ दिन माँ ने पल्लू से सर पीठ और पेट नहीं ढका. मैं ऑफिस से आता और सिर्फ उनको देख कर ही टाइट हो जाता.
क्यूरोसिटी बढ़ गयी. एक दिन चुपके से मैंने पूरे घर में छोटे-छोटे हिडन कैमरा लगा दिए. मोबाइल और लैपटॉप पे लाइव फीड आ रहा था. उसके बाद माँ को देखने का नया एंगल मिल गया. नहाते हुए कपडे बदलते हुए… और एक दिन शॉक लगा जब मैंने देखा माँ बाथरूम में अपनी चूत में ऊँगली कर रही थी और धीरे से मोअन कर रही थी. दिल से अफ़सोस हुआ। पापा ने सालों से उनको टच तक नहीं किया था. चार दिन बाद मैं लिविंग रूम का लाइव फीड देख रहा था.
माँ ने दरवाज़ा खोला. एक आदमी अंदर आया। वो सामने वाले शर्मा अंकल थे, उम्र लगभग 55-60. दोनों हसी-मज़ाक कर रहे थे. दोनों ने 15 मिनट बात की और अंकल चला गया. माँ ने मुझे कभी बताया नहीं था उनके बारे में. दो दिन बाद माँ नहा कर चेंज कर रही थी. लैपटॉप पे उनकी नंगी बॉडी देख कर मैं कण्ट्रोल नहीं कर पाया और मुठ मार ली. तीसरे दिन मैंने पूरा दिन मॉनिटर किया. 11:30 बजे डोर बेल बजा. शर्मा अंकल फिर आये. माँ ने उनको लंच सर्व किया. बाद में सोफे पे बैठ के बातें. थोड़ी देर बाद माँ रो पड़ी. अंकल ने उनको गले लगाया माथे पे किश किया फिर गाल और गर्दन पे. माँ ने रोका नहीं. मैं अंदर से जल रहा था. अंकल 60 के माँ अभी मिड-40 में और ऊपर से इतनी हॉट.
फिर जब अंकल ने लिप्स पे किश करने की कोशिश की माँ ने धक्का दे दिया. अंकल गुस्सा होकर चला गया. शाम को 7 बजे मैं घर पहुंचा. माँ नॉर्मल खुश थी पर मैं अंदर से खौफनाक. कपडे बदल के लिविंग रूम आया. माँ सोफे पे टीवी देख रही थी. मैं पास बैठा और रिमोट म्यूट कर दिया. माँ ने मेरी तरफ देखा.
मै – माँ, घर में हिडन कैमरा लगा रखे हैं मैंने.
उनका चेहरा एकदम से उदास हो गया.
वह अंकल आप से कम से कम 20 साल बड़े हैं माँ.
माँ की आँखों में आंसू भर आये. “सॉरी बेटा…”
मैं उनके पास गया उनके हाथ पे हाथ रख के बोला “मत रो माँ. मैं तुम्हारा पूरा ख्याल रखूँगा.”
आंसू पोछती हुई वह बोली “पता है बेटा. बस कभी-कभी अकेलापन बहुत सताता है. पापा ने सालों से मुझे कुछ नहीं दिया… न प्यार न सटिस्फैक्शन.”
मैंने उनके कंधे पे हाथ रखा और धीरे से बोला “माँ… मैं तुम्हारे बहुत क्लोज होना चाहता हूँ.”
वह शॉक से मुझे देखती रही. मैं और पास हुआ उनके होंठों की तरफ.
“माँ क्या कर रहे हो तुम?!”
वह पीछे हट गयी.
“माँ मैं तुमसे सच्चा प्यार करता हूँ”
मैंने फिर ट्राई किया. वह उठ गयी. मैं भी उठा.
“माँ उस बुड्ढे अंकल की क्या ज़रूरत? तुम इतनी खूबसूरत हो… तुम्हे एक यंग स्ट्रांग आदमी चाहिए जो तुम्हे खुश कर सके. वह मैं हूँ माँ.”
“बेटा तुम्हे क्या हो गया है?”
“माँ मैं तुम्हे वह सब दे सकता हूँ जो तुमने सालों से मिस किया है.”
मैं एक कदम आगे बढ़ा. वह पीछे हटी. “नहीं बेटा… यह गलत है!”
मैंने झट से उनको अपनी बाँहों में ले लिया. वह छूटने की कोशिश कर रही थी पर मैंने टाइट पकड़ लिया.
“रिलैक्स माँ… सब ठीक है.”
“छोड़ दो बेटा… प्लीज…”
मैंने जल्दी से उनके लिप्स पे एक चुम्मा लिया.
वह सर हिला के बोली “नहीं!”
मैं उनकी गालों पे किश करता रहा. एक हाथ उनकी नंगी लोवर बैक पे दूसरा नीचे उनकी भरी गांड पे और फिर मैंने ज़ोर से दबाया.
अपना सख्त लंड उनके पेट पे रगड़ते हुए बोला “माँ… फील कर रहे हो? यह तुम्हारे लिए ही खड़ा है. बहुत मज़ा दूंगा मैं तुम्हे.”
“नहीं बेटा… प्लीज छोड़ दो…”
मैं उनके सुन्दर चेहरे पे किश बरसाता रहा और गांड को मसलता रहा. वह थकने लगी थी.
मैं उनकी गर्दन और चेस्ट पे किश करता हुआ बोला “माँ… मैं तुम्हारे बूब्स चूसना चाहता हूँ.”
वह थोड़ा हैरान होकर बोली “बेटा… मेरे बूब्स में दूध तो नहीं है अब.”
मैं सीधा हुआ और उनके चेहरे को देखा. उनकी आँखों में एक अजीब सी मासूमियत थी.
“कोई बात नहीं माँ… बस चूसना चाहता हूँ.”
“बचपन की यादें आ रही हैं क्या?” वह प्यार से मुस्कुरायी.
“हाँ माँ… तुम्हारा दूध पीना मेरा सबसे प्यारा बचपन का ख्वाब था. प्लीज माँ…”
शायद उनके मन का मालिक दिल पिघल गया. वह प्यार से बोली “ठीक है… बस थोड़ा सा.”
मैं ख़ुशी से उनके लिप्स पे किश किया. फिर उनका पल्लू हटा ब्लाउज के हुक्स खोले. उन्होंने बाकी खोले और ब्लाउज उतार दिया. ब्रा अभी भी बूब्स को कवर कर रही थी.
फिर अचानक वह बोली “नहीं बेटा… मैं नहीं कर सकती.”
वह पलटी और बैडरूम की तरफ भाग गयी.
मैं पीछे-पीछे “माँ प्लीज… प्लीज…”
वह दरवाज़ा बंद करने वाली थी पर मैंने ज़ोर से धक्का दिया. वह पीछे हट गयी. मैं अंदर घुस गया. वह दीवार से टकरा गयी. मैं उनको पकड़ के गले लगा लिया चेहरे गर्दन चेस्ट और बूब्स के एक्सपोज्ड हिस्से पे किश करता रहा. ब्रा का लेफ्ट कप नीचे किया और उनके पहले हुए निप्पल को ज़ोर से चूसने लगा. माँ के मुँह से हलकी सी सिसकी निकली. मैं उनकी गांड को मसलता रहा और और ज़ोर से चूसने लगा.
“धीरे बेटा…” वह धीमी आवाज़ में बोली.
अब उनको पूरा कंसेंट मिल गया था. मैं धीरे-धीरे दोनों बूब्स को चूसने लगा. फिर मैंने उनको सीधा किया लिप्स पे डीप फ्रेंच किश किया. हाथ उनके पूरे शरीर पे घूम रहे थे। सॉफ्ट गरम मालिश. मैंने उनकी ब्रा खोल दी. पहली बार उनके पूरे बड़े बूब्स देखे. इतने बड़े इतने सॉफ्ट और भरे हुए… मैं पागल हो गया. चूसा दबाया किश किया. फिर मैंने अपने कपडे उतारे. उनकी साड़ी और पेटीकोट ऊपर किया. माँ बस देखती रही. मैं उनकी कमर पकड़ के साड़ी ऊपर करने लगा.
“नहीं बेटा… नहीं!” उन्होंने हाथ पकड़ने की कोशिश की.
मैंने उनका एक हाथ पकड़ के साइड किया और दूसरे हाथ से उनकी पैंटी नीचे की. पैंटी उतार के फ़ेंक दी. उनको दीवार से चिपका के लिप्स पे किश किया. जब उन्होंने सर घुमाया तो मैंने उनका चेहरा पकड़ के सीधा किया और ज़ोर से किश किया. फ्रेंच किश के साथ-साथ मैंने उनकी चूत पे हाथ रखा उनकी चूत बिलकुल गीली थी. उँगलियाँ अंदर डाल के ऊँगली करने लगा. माँ की सिसकियाँ बढ़ गयी. वह रेसिस्ट करना छोड़ के मोअन करने लगी.
मैं उनको उठा के बेड पे ले गया. उनकी साड़ी ऊपर करके उनको लिटाया. उन्होंने थोड़ा रेजिस्टेंस किया पर मैं उनके दोनों हाथ पकड़ के ऊपर चढ़ा. अपना लंड उनकी गीली चूत पे रगड़ा और एक ही झटके में पूरा अंदर धकेल दिया.
“आअह्ह्ह… बेटा!” माँ की चीख निकल गयी.
“दर्द हो रहा है माँ?” वह आँखें बंद किये सर हिला के ना बोली.
मैं उनके लिप्स पे किश करता हुआ धीरे-धीरे चोदने लगा. फिर स्पीड बढ़ा दी. ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा. मेरी बॉल्स उनकी गांड से टकरा रही थी. मैंने उनकी गांड ऊपर उठायी चीक्स फैलाई और एक ऊँगली उनकी टाइट गांड में डाल दी. माँ की मोअन और तेज़ हो गयी – दर्द और मज़ा दोनों मिक्स.
“ओह बेटा… ओह्ह्ह… हाँ…”
करीब 30 मिनट तक ज़ोर-ज़ोर से चोदते हुए मैंने उनकी चूत में अपना गरम माल भर दिया. माँ को भी एक बड़ा ओर्गास्म आ गया और उनकी चूत से गरम पानी निकल आया. मैं उनके ऊपर ही ढक से गिर गया सांस फूली हुई लंड अभी भी अंदर. जब लंड निकल आया तो मैं उनके पास लेट गया. उनके गाल पे आंसू थे.
“माँ… क्यों रो रही हो? इतना मज़ा आया न?”
“बेटा… यह गलत है वह धीरे से बोली.
“माँ पापा कभी ऐसा नहीं कर सकते. उस अंकल से तो दूर ही रहो. आज से मैं ही तुम्हारा सब कुछ हूँ. जब चाहो मैं तुम्हे खुश कर दूंगा.”
उस रात डिनर के बाद हम दोनों अलग-अलग सोये पर टेंशन था. रात को 11 बजे मैं फिर उनके रूम में घुस गया. वह नाइटी में सो रही थी. मैं उनके पास लेट गया उनकी कमर पे हाथ रख के.
वह डर गयी पर मैंने बोला “मैं हूँ माँ… नींद नहीं आ रही.”
उन्होंने आँखें खोली. मैं जल्दी से उनकी नाइटी ऊपर की, पैंटी नीचे करके टाँगे फैलाई और लंड अंदर घुसा दिया. इस बार वह खुद किश करने लगी. हम दोनों पैशनेट फ्रेंच किश करते हुए चुदाई करते रहे. दूसरी बार भी मैं उनके अंदर ही झड़ गया. उसके बाद हम दोनों नंगे ही एक दूसरे से लिपट के सो गए. सुबह माँ किचन में थी. मैं पीछे से उनको गले लगा के उनकी नंगी कमर को चूमा.
“माँ तुम्हे मिस करूँगा पूरा दिन.”
वह हंस दी “बेटा ऑफिस जाने का टाइम हो गया!”
उस दिन ऑफिस से जल्दी घर आया. माँ ने पिंक साड़ी पहनी थी – बिलकुल सेक्सी पेट और कमर खुले हुई. दरवाज़ा खुलते ही मैंने उनको किश कर लिया. उन्होंने थोड़ा सा रेसिस्ट किया पर फिर खुद रेस्पोंड करने लगी. उस दिन लिविंग रूम के सोफे पे ही मैंने उनकी ब्लाउज-ब्रा उतर दी और दोनों बूब्स को अच्छे से चूसा. फिर उनको गोदी में उठा के बैडरूम ले गया और पूरा दिन उनको चोदता रहा.
एक हफ्ते में हम दोनों बिलकुल नयी शादी-शुदा जोड़ी जैसे रहने लगे. पापा का नाम भी नहीं लिया जाता था. हम हस्बैंड-वाइफ बन चुके थे – रोज़ सेक्स रोज़ प्यार. साल गुज़र गए. माँ 50 की हो गयी तो उन्होंने मुझे शादी करने के लिए प्रेशर करना शुरू किया. “बेटा मैं बूढी हो रही हूँ. एक अच्छी लड़की से शादी कर लो मुझे पोता-पोती देखना है.”
मैंने एक लड़की से शादी कर ली – उसका नाम नेहा था. नेहा माँ जैसी ही दिखती थी – सुन्दर करवी केयरिंग. नेहा को सब पता है. वह समझती है की मैं माँ से कितना प्यार करता हूँ. हम तीनो एक साथ खुश हैं. हर हफ्ते कम से कम दो रात मैं माँ के रूम में सोता हूँ.
नेहा खुद बोलती है “जाओ न… माँ को अकेला मत छोडो.”
और जब मैं माँ के साथ होता हूँ हम दोनों बिलकुल पागल हो जाते हैं – जैसे पहली बार हो.
मैं अपनी माँ से सच्चा प्यार करता हूँ… और अब यह प्यार कभी ख़तम नहीं होगा.
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