बड़े घर की पाकीज़ा चूतें 5
Naukar se malkin chud gyi sex story:- पिछले पार्ट मे आपने पढ़ कि हम यहीं आपका इंतज़ार करेंगे.. जब तक आप नहीं आतीं.. ठंड में पूरी रात यहीं इंतज़ार करेंगे.. ये कहते हुए कालू जी ने मेरा हाथ छोड़ दिया.. मैंने भी मेन गेट लॉक कर लिया.. और बेडरूम में जाके .. बिना नाइटी में चेंज किए.. वैसी ही साड़ी में ही बेड पे लेट गई.. वैसे भी आज नींद मेरी आँखों से कोसों दूर थी..
अब आगे…
पिछला पार्ट अगर नहीं पढ़ा तो पहले वो पढ़ लें ==> बड़े घर की पाकीज़ा चूतें 4
Naukar se malkin chud gyi hindi sex story
टाइम निकलने लगा.. और रात का 1 बज गया..
अमीरा – (1 बज गए.. क्या कालू जी अभी भी बाहर होंगे..)
फिर मैंने अपनी बेडरूम की विंडो से देखा तो.. कालू जी वहीं खड़े थे..
अमीरा – ( या अल्लाह ये तो अभी भी वहीं खड़े हैं.. और ठंड कितनी है.. कहीं बीमार न हो जाएँ..)
फिर जैसे ही मैं बेडरूम से निकलके स्टेयर्स तक पहुँची..
अमीरा – ( मुझे वहाँ देखके कहीं कालू जी ये न समझें कि मैंने उनकी बात मान ली है.. मैं सिर्फ़ इसलिए जा रही हूँ.. ताकि वो ठंड से बीमार न पड़ जाएँ.. हम्म)
फिर मैं भागते हुए नीचे पहुँची.. और मैंने डोर खोला वैसे ही कालू जी खुद अंदर आ गए..
कालू – हमें पता था मालकिन.. आप भी हमसे प्यार करती हैं..
ये कहते हुए कालू जी मेरे नज़दीक आने लगे..
अमीरा – नहीं कालू जी ऐसा..
मैं इतना ही बोल पाई.. कि
कालू – मालकिन अगर आप मना करेंगी.. तो हम पूरी रात बाहर ही खड़े रहेंगे.. चाहे ठंड में मर ही क्यों न जाएँ..
अब मैंने कुछ नहीं कहा.. और इतना कालू जी के लिए काफ़ी था.. कालू जी मेरा राइट हाथ पकड़के मुझे किचन में ले गए.. और मेरी साड़ी उतारने लगे.. साड़ी उतारने के बाद जैसे ही मेरे ब्लाउज़ के पहले बटन पे हाथ रखा.. वैसे ही मैंने उनका हाथ पकड़ लिया..
कालू – क्या हुआ मालकिन.. क्या आप हमें सच में मारना चाहती हैं.. चाहती हैं हम ठंड में मर जाएँ..
अमीरा – मैं मना नहीं कर रही हूँ.. लेकिन मैं पूरे कपड़े नहीं उतारूँगी..
कालू – लेकिन इतना तो दिखाएँगी.. जितना उस आदमी को दिखाया था..
अमीरा (धीरे से) – हम्म
कालू – तो ठीक है..
फिर क्या बिना देर किए.. कालू जी ने मेरा ब्लाउज़ और पेटीकोट भी उतार दिए.. और मैं पहली बार कालू जी के सामने ब्रा पैंटी में खड़ी थी..
कालू – मालकिन आपके दोनों हाथ ऊपर उठाइए..
मेरे दोनों हाथ ऊपर उठते ही कालू जी की आँखें लाल होने लगीं.. क्योंकि मेरे हाथ ऊपर होते ही मेरे बूब्स भी ऊपर की तरफ उठ गए.. जो अब ब्रा में होते हुए भी और भी ज़्यादा शेप में दिखने लगे.. और जब मैंने कालू जी की आँखों का पीछा किया.. तो कभी मेरे बूब्स.. कभी पेट.. कभी बगल.. धीरे-धीरे कालू जी की आँखें मुझे अपने जिस्म पे तीर की तरह चुभने लगीं.. जैसे कालू जी मेरे जिस्म को आँखों से ही चूम रहे हों.. जिससे मेरी पलकें शरम से अपने आप झुक गईं..
और अगले ही पल कालू जी ने मुझे उनकी बाँहों में भर लिया.. और मेरे गले पे चूमना शुरू कर दिया… और गला चूमते हुए ही लेफ्ट हाथ को मेरे राइट बूब पे ब्रा के ऊपर से ही रखने लगे.. वैसे ही मैंने उनका हाथ झटक दिया.. और दूर जाके खड़ी हो गई..
अमीरा – कालू जी बात सिर्फ़ देखने की हुई थी.. और आप..
कालू – माफ़ कीजिए मालकिन.. बस खुद को रोक नहीं पाए.. अब नहीं करेंगे.. एक बार ज़रा घूमिए.. हमें आपकी गाँ..
इतना कहके कालू जी रुक गए.. लेकिन मैं समझ गई.. और थोड़ा पीछे हटकर घूम गई..
कालू – मालकिन आपके बैलून को तो आगे कीजिए..
थोड़ी देर तो मैं ऐसी ही खड़ी रही.. फिर अचानक मुझे मेरे गले पे पीछे कालू जी की गरम साँसें महसूस होने लगीं.. जिसका मतलब था कालू जी मेरे बहुत क़रीब आ चुके थे..
कालू – मालकिन हम आपकी पीठ पे एक बार हाथ फेर सकते हैं..
ये कहते हुए बिना मेरे जवाब के.. कालू जी ने मेरे गले से हाथ फेरना शुरू किया.. ब्रा से होते हुए.. और जैसे ही मेरी पैंटी पे पहुँचे..
अमीरा (आगे बढ़ते हुए) – नहीं कालू जी..
कालू – करने दीजिए ना मालकिन.. ऐसी सुंदर परी को इस हालत में देखे कोई मर्द कैसे खुद को रोक सकता है..
ये कहते हुए कालू जी दोबारा मेरे नज़दीक आए.. और दोबारा से उनका लेफ्ट हाथ मेरे राइट बूब पे रखने लगे.. वैसे ही मैं भागके किचन के गेट तक ही पहुँच पाई थी.. और कालू जी ने मुझे पकड़के किचन गेट से सीधा चिपका दिया.. और उनके राइट हाथ से मेरे दोनों हाथों को पकड़के ऊपर करके उनके लेफ्ट हाथ को मेरे राइट बूब पे ब्रा के ऊपर से ही रख दिया..
और जैसे ही रखा वैसे ही मेरे मुँह से आहाआ निकल गई
अमीरा – आहाआआ..
बिना दबाए कालू जी उनके लेफ्ट हाथ को मेरे राइट बूब पे सिर्फ़ रखे रहे.. सिर्फ़ मेरी आँखों में देखते रहे.. जैसे मुझसे अनुमति माँग रहे हों दबाने के लिए..
कालू – मालकिन आपकी ये चुची कितनी मुलायम है.. आहाआ
ये कहते हुए कालू जी ने धीरे-धीरे ब्रा के ऊपर से ही मेरे राइट बूब को दबाना शुरू कर दिया..
लाइफ़ में पहली बार किसी दूसरे आदमी का हाथ मेरे बूब पे था.. चाहे ब्रा के ऊपर से ही क्यों न वो भी एक काले कलूटे बुड्ढे नौकर का जो दूसरे मज़हब का है.. ये एहसास ही मुझे एक्साइट करने के लिए काफ़ी था.. और जैसे उन्होंने मेरे बूब के बारे में बोला वैसे या कैसे ही इक़बाल ने कभी मेरे बूब्स की तारीफ़ नहीं की.. यहाँ पहली बार कोई मेरी बूब की तारीफ़ कर रहा था वो भी इस तरह से और तो और मेरे बूब को दबा भी रहा था.. जिससे मेरी एक्साइटमेंट न चाहते हुए भी बढ़ने लगी.. और मेरी चूत धीरे-धीरे रिसने लगी..
फिर कालू जी ने उनका राइट हाथ जो मेरे दोनों हाथों को पकड़के रखा हुआ था.. उसे भी नीचे लाके मेरे लेफ्ट बूब पे रख दिया.. फिर दोनों हाथों से मेरे दोनों बूब्स को धीरे-धीरे ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगे..
कालू – आहाआ मालकिन.. कितने मुलायम चुचियाँ हैं आपकी.. जब ब्रा के ऊपर से इतनी नरम हैं.. तो नंगी तो क्या ही होंगी..
ये कहते हुए कालू जी ने उनके राइट हाथ को मेरे लेफ्ट ब्रा की स्ट्रैप्स पे जैसे ही रखा.. वैसे ही मैंने उनके हाथ को झटका.. और लेफ्ट हाथ जो मेरे राइट बूब को दबा रहा था.. उसे भी हटाके भागके हॉल में आ गई.. और जैसे ही बीच हॉल में पहुँची.. वैसे ही कालू जी ने मुझे दोबारा पीछे से पकड़ लिया.. और राइट हाथ से मेरे राइट बूब को ब्रा के ऊपर से ही ज़ोर से दबाने लगे.. लेफ्ट हाथ को पैंटी के ऊपर से मेरी चूत पे रखके मसलने लगे.. और मेरे गले को पीछे से चाटने लगे..
ये सब कालू जी ने इतनी जल्दी किया.. कि मुझे कुछ सोचने का टाइम ही नहीं मिला.. और यहाँ पहली बार किसी दूसरे आदमी के हाथ मेरी चूत पे पड़ने से भले ही पैंटी के ऊपर से.. मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया.. और मेरी पैंटी लगभग पूरी गीली हो गई.. जो कालू जी से नहीं छुपी..
कालू – मालकिन कहा था ना हमने.. हमें प्यार करने दीजिए.. हम आपको बहुत मज़ा देंगे..
अमीरा (सिसकते हुए) – कालू जी ये आप क्या कुछ भी कह रहे हैं..
कालू – क्यों ?? क्या आपको मज़ा नहीं आ रहा..
अमीरा (सिसकते हुए) – आहाआ बिल्कुल नहीं..
कालू – तो फिर आपकी चूत इतना पानी क्यों छोड़ रही है..
कालू – बोलिए..
अब मैं क्या ही बोलती.. सच ही तो था..
कालू – बोलो अमीरा..
इस बार कालू जी ने मुझे नाम से बुलाया.. जो सुनके मैं चौंक गई..
अमीरा (शॉक्ड) – ये ये आप क्या बोल..
मैं इतना ही बोल पाई..
कालू – तुम ब्रा पैंटी में हो.. और मैंने पूरे कपड़े पहन रखे हैं.. ये तो तुम्हारे साथ नाइंसाफ़ी हुई ना..
अब कालू जी मुझे आप से तुम कह रहे थे.. और यहाँ उनका एक हाथ मेरे बूब को मसल रहा था और दूसरा हाथ पैंटी के ऊपर से ही चूत को मसल रहा था.. जिससे मुझे समझने में नहीं आ रहा था कि मैं क्या रिएक्ट करूँ..
फिर कालू जी ने मुझे एकदम छोड़ दिया.. और कुछ सेकंड बाद जब मुझे पीछे से फिर से पकड़ा.. तो उनका लंड पैंटी के ऊपर से ही मेरी गाँड पे दबने लगा.. जिससे मुझे समझने में देर नहीं लगी..
अमीरा (शॉक्ड) – ( या अल्लाह.. कालू जी तो पूरे नंगे हो गए..)
ये सोचते ही मेरी चूत लगभग ऑर्गैज़्म तक पहुँच ही गई.. लेकिन मैंने खुद को सँभाला..
अमीरा – कालू जी ये आप क्या कर रहे हैं.. प्लीज़ कहीं इक़बाल उठ न जाएँ..
कालू – नहीं उठेगा..
अमीरा – प्लीज़ कालू जी.. और नहीं..
कालू – ठीक है तो मेरा पानी निकाल दो.. मैं चला जाऊँगा..
अमीरा (शॉक्ड) – ये ये आप क्या ..
मैं इतना ही बोली कि..
कालू – हमने तुम्हारा पानी निकाला.. तुम्हें मज़ा दिया.. अब मेरी बारी..
ये कहते हुए कालू जी ने मुझे घुमाके अपने घुटनों पे बिठा दिया.. जिससे उनका लंड मेरे चेहरे के पास आँखों के सामने झूलने लगा.. और एक अजीब सी बदबू पूरे हॉल में फैल गई.. जो मेरी साँसों के साथ मेरे दिल में उतरने लगी.. और तभी ऊपर से आवाज़ आई..
इक़बाल – अमीरा..
(रात 11 बजे) (अलीना के घर पर)
शमा – क्या मैंने जो फ़ोन पे सुना सच था..
शमा – नहीं नहीं चाचीजान ऐसे चाचाजान को धोखा नहीं दे सकतीं..
शमा – लेकिन जो मैंने फ़ोन पे सुना.. वो क्या था फिर..
ऐसे ही टाइम निकलता गया.. न ही शमा को चैन था.. ऐसे ही रात के 2 बज गए.. नींद न आने की वजह से शमा नीचे गार्डन में टहलने चली गई..
(बैक टू प्रेजेंट.. अमीरा का हाउस)
जैसे ही इक़बाल की आवाज़ आई.. वैसे ही मैं किचन में भाग गई.. और मेरे पीछे कालू जी भी किचन में भाग आए..
इक़बाल – अमीरा..
अमीरा – क्या हुआ इक़बाल.. किचन में हूँ..
इक़बाल – रात के 2 बज रहे हैं.. तुम किचन में क्या कर रही हो..
अमीरा – वो.. वो पार्टी में ठीक से खाया नहीं था.. भूख की वजह से नींद नहीं लग रही थी..
इक़बाल – ठीक है.. जल्दी आना..
अमीरा – जी..
अमीरा (कालू को) – कालू जी जाइए.. कहीं इक़बाल नीचे न आ जाएँ..
कालू – नहीं.. पहले मेरा पानी निकालो.. इसे जल्दी से मुँह में लो..
अमीरा – नहीं.. मैंने आज तक इक़बाल का नहीं लिया..
कालू – (साली ये तो मान ही नहीं रही.. इस चक्कर में कहीं वो साला सच में यहाँ न आ जाए..)
कालू – ठीक है मुँह में मत ले.. हाथ से हिला दे..
ये कहते हुए कालू जी ने डाइनिंग टेबल की चेयर को खींचके उसपे बैठ गए..
कालू – चल बैठ घुटनों पे..
अब तो कालू जी मुझे सीधे ऑर्डर देने लगे थे.. और मैं भी पता नहीं क्यों.. उनके ऑर्डर अपोज़ तो करना चाहती थी.. लेकिन कर नहीं पा रही थी.. कि तभी कालू जी ने मुझे अपने घुटनों पे बिठा दिया.. और मेरे राइट हाथ को पकड़के उनके लंड पे रख दिया.. और जैसे ही मेरा हाथ उनके लोहे जैसे खड़े लंड पे पड़ा.. वैसे ही मेरा दिल ज़ोरों से धड़क उठा..
कालू – चल जल्दी हिलाना शुरू कर..
अब जैसे ही मैं धीरे-धीरे लंड को आगे-पीछे करने लगी.. वैसे ही लंड से एक अजीब सी बदबू आने लगी.. और हिलाने के साथ-साथ वैसे ही लंड की खाल भी आगे-पीछे होने लगी.. जब मैं लंड को आगे की तरफ हिलाती तब टोपी जैसी खाल पूरे लंड के छेद को ढक लेती.. जो मैंने पहली बार देखा था.. क्योंकि इक़बाल के लंड पे कोई टोपी जैसी खाल नहीं थी.. और जैसे ही मैं लंड को पीछे की तरफ हिलाती तो लंड का छेद सामने आ जाता..
मैं जैसे-जैसे लंड को हिलाती.. वैसे-वैसे मेरे दिल की धड़कनें बढ़ती जातीं.. और वैसे ही धीरे-धीरे लंड की बदबू पूरे किचन में फैलने लगी.. और वहाँ शमा टहलते-टहलते मेरे घर के मेन गेट तक आ गई..
शमा – या अल्लाह.. चाचीजान का मेन गेट तो खुला है.. कहीं जो मैंने सुना वो सब सच..
फिर शमा धीरे-धीरे अंदर जाने लगी.. कि तभी उसे किचन से कुछ आवाज़ें आने लगीं.. और जब उसने किचन के अंदर झाँकके देखा तो..
शमा (शॉक्ड) – (ये ये सब क्या है.. चाचीजान ये सब)
कालू – आहाआआ क्या कोमल हाथ है तेरे अमीरा आआआ.. बेहनचोद.. ऐसे ही हिलाती रह आहाआआ
कालू जी के मुँह से गाली सुनके मैं शॉक्ड रह गई.. कि तभी उन्होंने मेरा लेफ्ट हाथ उनकी गोटियों पे रख दिया..
कालू – आहाआआ इस हाथ से मेरी गोटियाँ सहला..
और जैसे ही कालू जी ने मेरा लेफ्ट हाथ उनकी बैलून से भरी गोटियों पे रखा.. वैसे ही मेरी चूत भी पानी की बूंदें पैंटी पे टपकाने लगी.. और मैं कुछ ज़्यादा ही एक्साइटेड फील करने लगी.. और मेरे हाथ अपने आप लंड पे चलने लगे..
शमा – (या अल्लाह ये सब क्या है.. इसने चाचीजान को गाली दी.. और चाचीजान भी कुछ क्यों नहीं कर रही..)
कालू – आहाआ अमीरा.. एस मज़ा आ रहा है..
ये कहते हुए कालू जी ने उनका राइट हाथ ब्रा के ऊपर से ही मेरे लेफ्ट बूब पे रखके दबाने लगे..
शमा – (या अल्लाह ये तो चाचीजान के बूब.. ये सब क्या..)
ये देखके शमा शॉक में किचन गेट पे झुक गई.. जिससे उसकी पायल छनक उठी..
मैं तो लंड हिलाने में इतना खो गई.. कि मुझे तो कुछ सुनाई नहीं दिया..
कालू – (साला ये पायल जैसी आवाज़ कहाँ से आ रही है..)
शमा को ये पता नहीं था.. कि कालू जी गेट की तरफ ही देख रहे थे.. और जैसे ही शमा ने दोबारा किचन के अंदर झाँकके देखा तो कालू जी और शमा की आँखें आपस में टकरा गईं.. जिससे शमा वहीं गेट के पीछे छुप गई..
कालू – (साला ये तो अलीना की नई नवेली बहू है.. लेकिन ये यहाँ.. (कामिनी हँसी) अब आएगा मज़ा..)
शमा – (कहीं उसने मुझे देख तो नहीं लिया.. नहीं.. नहीं देखा.. शायद)
कालू (चेयर से खड़े होते हुए..) – साला ऐसे तो पूरी रात निकल जाएगी.. लेकिन मेरा पानी नहीं निकलेगा..
अमीरा – हिला तो रही हूँ.. और मैं क्या करूँ..
कालू – तू इसे मुँह में ले..
अमीरा (शॉक्ड) – क्या.. मैं ऐसा हरगिज
मैं इतना ही बोल पाई.. कि मेरे खुले मुँह में कालू जी ने उनका लंड अंदर घुसा दिया.. और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगे..
कालू – आहाआ साली ये हुई ना बात.. सस क्या गरम मुँह है तेरा.. आहाआ
ये कहते हुए कालू जी ने मेरे बालों को पकड़के लंड को और अंदर तक मेरे मुँह में घुसाने लगे.. और धक्कों की स्पीड भी बढ़ाके तेज़ी से मेरा मुँह चोदना शुरू कर दिया..
कालू – आहाआ साली क्या गरम मुँह है तेरा.. आहाआ मेरी अमीरा रंडी…
शमा – (या अल्लाह.. ये क्या हो रहा है.. ये तो चाचीजान को गालियाँ देने लगा.. चाचीजान भी बेचारी.. ऐसे तो ये चाचीजान की जान ही ले लेगा..)
ऐसे ही कालू जी क़रीब 2 मिनट तक मेरे मुँह को चोदते रहे.. और फिर एकदम से लंड को मेरे गले में उतारके बाहर निकाल लिया.. और जैसे ही लंड मेरे मुँह से बाहर आया.. वैसे ही मेरा खाँसना शुरू हो गया.. और तब जाके मेरी साँसें वापस आईं..
अमीरा (हाँफते हुए) – ये क्या था.. मना करने के बाद भी आपने ज़बरदस्ती मेरे मुँह में.. और ये कौनसा तरीक़ा होता है..
कालू – माफ़ कर दे.. लेकिन तुझे देखके रहा नहीं गया.. देख मेरे लंड को.. कैसे तुझे देखके फुँकार मार रहा है..
जब मैंने कालू जी के लंड की तरफ देखा तो मेरी साँसें फिर से तेज़ चलने लगीं..
अमीरा – (या अल्लाह ये इतना बड़ा मैंने कैसे अपने मुँह में ले लिया..)
शमा – (या अल्लाह ये क्या है.. इतना बड़ा और मोटा.. रेहान का तो इससे आधा.. आधा क्या 1/4 भी नहीं होगा.. और कैसे चाचीजान को देखके झटके मार रहा है..)
कालू – चल मुँह खोल..
अमीरा – नहीं नहीं.. और नहीं इसकी बदबू से मेरी जान निकल जाएगी..
कालू – तो क्या मैं खड़ा लंड लेके जाऊँ..
अमीरा – कुछ भी हो.. लेकिन मैं इसे मुँह में नहीं लूँगी… चाहे दोबारा हाथ से हिला दूँगी..
कालू – (साली को ज़्यादा मजबूर करूँगा.. तो कहीं लेने के देने न पड़ जाएँ.. वैसे भी शमा को हाथ में लेने के लिए इतना काफ़ी होगा.. बस डर इस बात का है.. वो किसी को कुछ बता न दे.. और अगर उसने किसी को कुछ नहीं बताया.. तो तो मेरी लौंडरी लग जाएगी..)
कालू – ठीक है.. लेकिन मेरी एक शर्त है..
अमीरा – कैसी शर्त..
कालू – मैं मेरा माल तेरे चेहरे पे निकालूँगा..
अमीरा – क्या.. बिल्कुल नहीं..
कालू – तो फिर मुँह में ले..
अमीरा – (या अल्लाह.. कहाँ फँस गई.. कालू जी नहीं मानेंगे..) ठीक है..
शमा – (ये.. ये चाचीजान क्या कह रही हैं.. सच में इस काले बुड्ढे का पानी.. छी..)
फिर मैंने कालू जी का लंड हाथ में लेके दोबारा हिलाना शुरू कर दिया.. और कालू जी की आहों से समझने में देर नहीं लगी.. कि कालू जी झड़ने वाले हैं..
कालू – आहाआआ ऐसे ही आहाआ मैं आने वाला हूँ.. चेहरा सीधा कर.. लेट जा.. सीधी लेट..
ये कहते हुए कालू जी ने मुझे वहीं किचन में लिटा दिया.. और खुद मेरे ऊपर आके मेरे चेहरे के ऊपर लंड को करके तेज़ी से हिलाने लगे..
कालू – आहाआ ऐसे ही आहाआ मैं आने वाला हूँ.. आहाआ ये ले मेरी अमीरा रंडी.. आहाआआ
ये कहते हुए कालू जी ने मेरे चेहरे पे पिचकारी मारना शुरू कर दी..
शमा – (या अल्लाह.. ये क्या है.. इतना सारा..)
अमीरा – (ये इतना गाढ़ा और गरम.. वो भी इतना सारा और इसकी ये बदबू.. हम्म..)
जैसे ही कालू जी का स्पर्म मेरे चेहरे पे गिरने लगा.. वैसे ही मेरी चूत ने भी पानी छोड़ दिया.. और मैं ताज्जुब रह गई.. बिना मेरे पूरे कपड़े उतारे कालू जी ने मुझे कितनी बार झड़ा दिया..
पूरा स्पर्म निकालने के बाद कालू जी बाहर की तरफ जाने लगे..
शमा – (या अल्लाह ये तो यहीं आ रहा है..)
कालू जी को देख के शमा जल्दी से घर से निकल गई.. और कालू जी भी उनके कपड़े पहनके चले गए.. मैंने भी खुद को साफ़ किया.. और कपड़े पहनके रूम में जाके सीधी बाथरूम में घुस गई.. शावर लेके खुद को ठीक से साफ़ किया.. फिर नाइटी पहनके बेड पे इक़बाल के पास लेट गई..
