मम्मी को दादा जी से चुदवाया – 3

Dada ji ne mummy ki chudai ki story:- पिछले पार्ट मे आपने पढ़ा कि दादाजी मम्मी को अब खुलकर छूने लगे थे। और फिर एक दिन मैंने उनको मम्मी को दादी का कोई गिफ्ट देने को कहा। फिर दादाजी मम्मी के कमरे मे गए और वहाँ मम्मी उनको देखकर हड़बड़ा गई। अब पढिए ये hindi sex story आगे…

पिछला पार्ट यहाँ पढ़ें :- मम्मी को दादा जी से चुदवाया – 2

Dada ji ne mummy ki chudai ki story

दादा जी – बहु जरा रुको मुझे कुछ बात करनी है, आओ मेरे पास बैठो।

मम्मी दादा जी के पास बैठ गयी और वह नीचे देख रही थी।

दादा जी – बहु आज तुम्हे देखकर मुझे पता चला की एक औरत कितनी मुश्किल झेलती है।

मम्मी – ये आप क्या कह रहे पापा जी?

दादा जी – मैं जानता हूं बहु तुम कभी कुछ नहीं कहोगी, मगर आज जो मैंने देखा है वह सच था। आज जब मैं तुम्हारे कमरे में गया था तब तुम मैक्सी पहन के लेटी थी और सिर्फ मेरी वजह से तुम्हे ये पल्लू रखना पड़ता है।

मम्मी – नहीं पापा जी ऐसी कोई बात नहीं है, ये तो समाज की परंपरा है।

दादा जी – बेटा मैं नहीं जानता ये परंपरा किसने बनायीं है, मगर एक औरत को भी खुल के जीने का हक़ है, इसीलिए मैं नहीं चाहता हूं की तुम ये पल्लू मेरे सामने करो।

मम्मी – मगर पापा जी मुझे इससे कोई भी परेशानी नहीं है।

दादा जी – मैं जानता हूँ तुम्हे परेशानी है, इस गर्मी में भी तुम साड़ी पहनती हो, फिर पल्लू भी रखना होता है। आज कल ज़माना बदल गया है, अब बहु लोग ये सब नहीं करती है और तुम जो चाहो वह कपडे पहन सकती हो। चाहे तो मैक्सी भी पहन के रह सकती हो।

मम्मी – नहीं पापा जी वह मैं नहीं पहन सकती हूँ मुझे आपके सामने अच्छा नहीं लगेगा।

दादा जी – ठीक है बहु तुम अपने कमरे में पहन लेना, मगर ये पल्लू तो हटा सकती हो।

मम्मी – नहीं पापा जी इसे भी रहने दीजिये, मैं ऐसे ही ठीक हूँ।

दादा जी – देखो बहु अगर तुमने मेरा कहना नहीं माना तो मैं कुछ भी नहीं खाऊंगा और न ही ये चाय पियूँगा।

मम्मी – पापा जी अब ये कैसे बात हुई? आप ऐसा मत बोलिये।

दादा जी – तो फिर मेरा कहना मानो और ये पल्लू अब निकाल दो। मेरी बहु इतनी सुन्दर है तो क्या हमेशा परदे में ही रहेगी, या मेरे मरने के बाद ये पर्दा हटेगा।

मम्मी – पापा जी ये मरने की बात मत कहिये, अभी तो आपने बहुत जीना है, अपने पोते की शादी देखनी है।

दादा जी – तो अब हटाओ ये पल्लू!

मम्मी ने अब अपना पल्लू हटा दिया और उनका चेहरा दादा जी के सामने आ गया और दादा जी ने मम्मी की का चेहरा पकड़ के ऊपर कर दिया।

दादा जी – देखो तो कितना सुन्दर चेहरा है, मगर मेरी वजह से आज तक परदे में था।

मम्मी दादा जी की बाते सुनके शर्माने लगी।

दादा जी – लो कर लो बात जो जरुरी काम था, वह तो रह ही गया।

मम्मी – क्या काम था पापा जी?

दादा जी – पहले अपनी आँखे बंद करो फिर बताता हूँ।

मम्मी आँखे बंद करके बैठ गयी, फिर दादा जी ने अपनी जेब से दादी का एक सोने का हार निकाला और मम्मी के हाथ में रख दिया। मम्मी ने जैसे ही आँखे खोली, वह हार देखकर बहुत खुश हुई।

मम्मी – बहुत सुन्दर हार है पापा जी।

दादा जी – आज से ये तुम्हारा हुआ बहु, तुम्हारी सास का हार है और अंदर पड़े पड़े बेकार ही हो रहा है। मैंने सोचा तुम ही पहन लो। चलो अब जरा पहन के दिखाओ।

मम्मी भी हार देखकर खुश थी और वह हार पहनने लगी। मम्मी के गले में मंगलसूत्र था जो उनके दूध की लाइन के ठीक ऊपर था। फिर उन्होंने हार पहन लिया।

मम्मी – कैसा लग रहा है पापा जी?

दादा जी हार देखकर थोड़ा भावुक हो गए, जो सिर्फ नाटक था। मम्मी दादा जी के कंधे पर हाथ रखकर उसे सहला रही थी।

दादा जी – बहु तुम बिलकुल मेरी मीरा (दादी का नाम) जैसी लग रही हो।

ये बात बोलते ही दादा जी ने मम्मी को अपनी बाहो में भर लिया। मम्मी भी बस खड़ी खड़ी दादा जी की पीठ सहला रही थी और दादा जी ने मम्मी को आपने आप से चिपका रखा था।

मम्मी – बस कीजिये पापा जी जो हो गया, वह हो गया आप रोये मत।

दादा जी लगभग 2-मिनट तक मम्मी से चिपके रहे और अब तक तो मम्मी को भी उनके खड़े लंड का अहसास हो चुका था। दादा जी का हाथ मम्मी की कमर पर था और वह उनकी कमर को सहला रहे थे। फिर मम्मी ने दादा जी को अलग किया। दादा जी के पाजामे में तम्बू बन चुका था क्युकी मैंने ही उन्हें अंदर से नंगा रहने के लिए कहा था। मम्मी की नज़र भी उनके लंड पर चली गयी। मम्मी भी अब तक ये समझ गयी थी की उनके ससुर क्या करना चाह रहे है। मगर अभी तक मम्मी ने भी उन्हें कुछ नहीं कहा था।

फिर मम्मी चाय दुबारा गरम करने किचन में चली गयी और दादा जी भी अपना खड़ा लंड लेके किचन में चले गए। मैं भी उनके पीछे गया और अब दादा जी से सहन नहीं हुआ। इसीलिए उन्होंने जाते ही मम्मी को पकड़ लिया और उनकी गर्दन को चूमने लगे और उनके दूध को दबाने लगे।

मम्मी – पापा जी ये क्या कर रहे है? होश में आइए! मैं आपकी बहु हूँ ये ठीक नहीं है।

दादा जी – बहु अब मैं बर्दास्त नहीं कर पा रहा हूँ मैं जानता हूं तुम भी समझ चुकी हो की इतने दिनों से हमारे बीच क्या चल रहा है। अब मैं तुमसे प्यार करना चाहता हु।

दादा जी जोर जोर से मम्मी के दूध मसल रहे थे, मगर मम्मी अभी भी उन्हें मना कर रही थी।

मम्मी – पापा जी ऐसा मत कीजिये। ये ठीक नहीं है। कही मन्नू ने देख लिया तो सब बर्बाद हो जायेगा।

दादा जी – बहु मन्नू पढ़ाई कर रहा है, वह यहाँ नहीं आएगा। मैं जानता हूं तुम बाथरूम में अपनी गर्मी निकालती हो। जो मेरा बेटा दूर रहकर नहीं निकाल सकता है। हम दोनों एक जैसे है, मेरे पास तो बीवी नहीं है और तुम्हारा पति दूर रहता है, क्यों न हम एक दूसरे की मदद करें! किसी को कुछ मालूम नहीं चलेगा।

उसके बाद दादा जी ने अपना पजामा नीचे कर दिया और दादा जी का 7 इंच का लंड उछल के बाहर आ गया। दादा जी का लंड काफी मोटा था और उसका सुपाड़ा भी खुला हुआ था। मम्मी भी दादा जी का लंड देखने लगी और दादा जी ने मम्मी का हाथ आपने लंड पर रख दिया।

दादा जी – देखो बहु कितना सख्त हो गया है तुम्हे देखकर। जब भी तुम सामने होती हो ये ऐसी ही खड़ा हो जाता है। कितने सालो से तुम्हे छुप छुप के देख रहा हूँ मगर अब सहन नहीं होता।

अब मम्मी दादा जी से कुछ नहीं कह रही थी और दादा जी ने मम्मी का हाथ पकड़ के आपने लंड पर रखा हुआ था। जिसे वह आगे पीछे कर रहे थे। मम्मी को शायद मेरा डर लग रहा था। फिर दादा जी मम्मी की साड़ी पकड़ के ऊपर करने लगे।

मम्मी – पापा जी यहाँ ये ठीक नहीं है, मन्नू कभी भी आ सकता है! प्लीज जाए यहाँ से।

दादा जी – बहु मन्नू की चिंता मत करो, वह नहीं आएगा। चलो मेरे कमरे में चलते है।

मैं जल्दी से वह से हैट गया और जाके छुप गया। फिर दादा जी मम्मी का हाथ पकड़ के अपने कमरे में ले जाने लगे और जैसे ही वह कमरे में घुसे।

दादा जी ने दरवाजा बंद कर दिया। मम्मी कुछ बोलना चाह रही थी, मगर अब दादा जी ने उनके मुँह पर हाथ रख दिया और फिर दादा जी ने मम्मी को बेड के कोने पर लिटा दिया। और जल्दी से उनकी साड़ी पेट पर पलट दी। मम्मी ने बैगनी रंग की पैंटी पहनी थी। दादा जी ने जल्दी से पैंटी निकाल दी और अब दादा जी के सामने मम्मी की चूत थी। दादा जी ने आपने हाथ से मम्मी की चूत को फैला दिया और चूत पर हाथ लगते ही उन्हें पता चल गया, की उनकी बहु भी लंड के लिए मरी जा रही है।

दादा जी – बहु तुम्हारी चूत तो बहुत गीली है। यानी तुम भी मेरी तरह इसी आग में जल रही हो। मगर आज के बाद हम दोनों खुश रहेंगे।

मम्मी की चूत पर छोटे छोटे बाल थे, जैसे की उन्होंने कुछ दिन पहले ही चूत साफ़ की हो। मम्मी की चूत साँवली थी। दादा जी ने अपना लंड मम्मी की चूत पर रखा और हलके हलके पूरा लंड चूत में डाल दिया। मम्मी ने अपनी आँखे बंद कर ली और दादा जी ने मम्मी की दोनों टाँगे पकड़ के फैला दी और फिर हलके हलके धक्के लगाने लगे। मम्मी आँखे बंद किये दादा जी के धक्को का मज़ा ले रही थी और अपने मुँह पर हाथ रखकर अजीब अजीब से मुँह बना रही थी। यानी अंदर से उन्हें भी मज़ा आ रहा था।

दादा जी खड़े खड़े 2-मिनट धक्के लगाते रहे, फिर वह मम्मी के ऊपर झुक गए और उनका ब्लाउज खोलने लगे। मगर तभी मम्मी ने उन्हें रोक दिया।

दादा जी – बहु खोलने दो डरने की कोई बात नहीं है। अभी कोई नहीं आने वाला। मैंने मन्नू को देखा था, वह पढ़ रहा था।

मगर मम्मी ने आपने ब्लाउज नहीं उतारा तो दादा जी ने नीचे के 2 हुक खोल दिए और नीचे से ब्लाउज और ब्रा को ऊपर कर दिया। मम्मी के दूध बाहर निकल आए। दादा जी ने तुरंत एक दूध को मुँह में भर लिया और उसे चूसने लगे। नीचे से मम्मी की चूत में धक्के लग रहे थे और ऊपर दादा जी उनके दूध चूस रहे थे। दादा जी ने दूसरे दूध के निप्पल को पकड़ लिया और उसे हलके हलके चुटकी में लेके मसलने लगे। माँ मोअन करने लगी।

मम्मी – पापा जी ऐसे मत कीजिये, मुझे दर्द हो रहा है।

दादा जी – बहु इसी दर्द के लिए तो तुम अपनी चूत में ऊँगली करती हो। मेरा बेटा तो नालायक है, जो ऐसी बीवी को छोड़ के दूर रहता है। मगर अच्छा ही हुआ, अब मैं उसकी बीवी का ख्याल रखुंगा।

दादा जी धक्के लगाए जा रहे थे और मम्मी अलग अलग मुँह बना रही थी। एक ऐसा मुँह जो चुदाई की संतुष्टि मिलने पर बनता है। यानी मम्मी का भी पानी निकल रहा था और उनके दूध ऊपर नीचे हो रहा थे। फिर मैंने देखा दादा जी ने अपना लंड निकाल लिया। दादा जी का लंड मम्मी की चूत के पानी से चमक रहा था।

दादा जी – देखो बहु कितनी गीली चूत है तुम्हारी, मेरा लंड कितना गीला हो गया है।

दादा जी ने फिर से लंड अंदर डाल दिया और फिर से मम्मी की चुदाई करने लगे। दादा जी मम्मी के होंठों को चूसना चाह रहे थे, मगर मम्मी मुँह इधर उधर कर रही थी। फिर दादा जी ने मम्मी का मुँह पकड़ लिया और फिर उनके होंठों को चूसने लगे। मैंने देखा दादा जी ने अपनी जीभ मम्मी के मुँह में डाल दी और अब वह मम्मी की जीभ से खेल रहे थे। दादा जी चुदाई में सच में काफी अच्छे थे। इस बात का पता मम्मी की गीली चूत को देखकर चल रहा था।

दादा जी ने अपने धक्के तेज कर दिए और फिर उन्होंने अपना सारा माल मम्मी की चूत के ऊपर निकाल दिया। मम्मी और दादा जी की साँसे तेज तेज चल रही थी। दादा जी ने अपना माल साफ़ कर दिया और फिर मम्मी उठ गयी। उन्होंने पहले अपना ब्लाउज नीचे किया और हुक लगाने लगी। फिर वह बिस्तर पर पड़ी अपनी पैंटी उठाने लगी। तभी दादा जी ने पैंटी पकड़ ली। मम्मी उसे खींच रही थी, मगर दादा जी उसे छोड़ नहीं रहे थे। फिर दादा जी ने मम्मी को पैंटी दे दी।

दादा जी – बहु अब मुझे तुम्हारी पैंटी की जरुरत नहीं पडेगी। तुम जो हो मेरे लिए। रोज तुम्हारी गर्मी निकाल दिया करूँगा। अब तुम्हे ऊँगली से काम नहीं करना पड़ेगा।

माँ ने जल्दी से पैंटी पहन ली और जैसे ही वह जाने लगी। तभी दादा जी ने मम्मी को पकड़ लिया।

दादा जी – बहु रात को मन्नू के सोने के बाद आ जाना, पूरी रात तुम्हारी गर्मी निकाल दूंगा।

मम्मी ने कोई जवाब नहीं दिया और वह वहाँ से चली गयी। मैंने देखा मम्मी टॉयलेट में चली गयी और फिर वह किचन में काम करने लगी। तभी मैं दादा जी के कमरे में गया। दादा जी कपडे पहन रहे थे और फिर मैं और दादा जी पार्क में घूमने चले गए। आज दादा जी बहुत खुश थे और ये ख़ुशी मम्मी की चूत मिलने की थी।

मैं – दादा जी आपने तो आज मुझे डरा ही दिया था। मुझे लगा नहीं था आप ऐसा भी कर देंगे।

दादा जी – बेटा मुझे आज बर्दास्त नहीं हुआ, इसीलिए मैं इतना आगे बढ़ गया। मगर इतना तो मैं भी समझ गया था की तेरी मम्मी मुझे आराम से चोदने देगी और वही हुआ आज 2 बार तेरी मम्मी की चूत को ठंडा किया है।

मैं – है दादा जी मैंने भी देखि मम्मी और आपकी पूरी चुदाई।

दादा जी – तू मेरी अपनी माँ की चुदाई देख रहा था? तुझे बुरा नहीं लगा की मैं तेरी माँ की चुदाई कर रहा हु?

मैं – दादा जी इसमें बुरा क्या था? आपने मम्मी की चूत को ठंडा कर दिया। उन्हें भी मज़ा आया होगा और अब आपको किसी रंडी के पास नहीं जाना पड़ेगा। रोज रात मम्मी आपके पास आया करेगी।

दादा जी – हाँ बेटा जो मज़ा मैंने तेरी मम्मी को दिया है, उसके लिए वह जरूर मेरे पास आएगी।

मै – मगर दादा जी मम्मी कुछ बोल नहीं रही थी, कही वह पापा से तो नहीं कह देगी।

दादा जी – बेटा अगर कहना ही होता, तो पहली ही बार में कह देती। जब मैंने उसकी कमर को पकड़ा था और अपना लंड लगाया था। तेरी मम्मी की चूत बहुत गरम है और तेरे पापा रहते नहीं है, इसीलिए उसकी गर्मी नहीं निकल पाती है। तूने देखा था मेरा लंड कितना गीला होकर निकला था, तेरी मम्मी की चूत में से।

मै – हाँ दादा जी पूरा लंड गीला था और मम्मी की चूत का छेद भी पूरा खुला हुआ दिख रहा था। आज पूरी रात आप चुदाई करेंगे।

दादा जी – हाँ बेटा आज मैंने उसे बुलाया है। क्या तू रात को भी चुदाई देखेगा?

मैं – हाँ दादा जी मैं पूरी चुदाई देखुंगा। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, जब आप मम्मी को चोद रहे थे।

फिर मैं और दादा जी घर की तरफ निकल गए। मगर आज दादा जी के खड़े लंड पर धोका होने वाला था। जैसे ही हम घर पहुंचे और दादा जी ने कुण्डी बजायी तो गेट पापा ने खोला। पापा को देखते ही दादा जी का मूड ख़राब हो गया। मैंने पापा के पैर छुएँ और पापा ने दादा जी के पैर छुएँ।

दादा जी – अरे बेटा तुम कब आये?

पापा – बस पापा थोड़ी देर पहले ही आया। आप बस बाहर गए और मैं घर में आया।

फिर हम सब अंदर आ गए, पापा मैं और दादा जी कमरे में बैठे थे। तभी मम्मी कमरे में आयी। उनके सर पर पल्लू था। पापा सबके लिए समोसे लेके आये थे। फिर हम सबने समोसे खाए और दादा जी चूत न मिलने का अफ़सोस मनाने लगे। फिर हम सब ने खाना खाया और मम्मी पापा कमरे में चले गए।

जब पापा आते थे, तो मैं आपने स्टडी वाले कमरे में ही सोता था।

मैं – दादा जी आज तो पापा ने आपका सारा खेल बिगाड़ दिया।

दादा जी – हाँ बेटा अब 2 से 3 दिन तो कुछ भी नहीं हो सकता है। उसकी भी तो बीवी है। 3 दिन बाद तेरी मम्मी यही मेरे बेड पर नंगी लेटी होगी।

फिर मैं भी जाके सो गया और सुबह सब नार्मल था। पापा मम्मी को लेके किसी रिश्तेदार के घर चले गए। फिर वह दोनों शाम को वापस आये। फिर पापा अपने किसी दोस्त के घर चले गए और मम्मी भी काम करने लगी। पापा रात को वापस आये। फिर हम सबने खाना खाया और फिर पापा कमरे में चले गए। मम्मी किचन में बर्तन साफ़ कर रही थी। तब दादा जी उनके पास गए। दादा जी ने मम्मी को पीछे से पकड़ लिया और वह उनके दूध दबाने लगे। मम्मी उनसे छूटने की कोशिश करने लगी।

दादा जी – बहु कल रात मैं तुम्हारे लिए बहुत तड़पा हूँ मगर मेरा बेटा आ गया था, इसीलिए मैंने भी सबर कर लिया। मगर उसके जाने के बाद मैं और तुम ही रहेंगे।

अगला पूरा दिन हम सबने पापा के साथ बिताया, क्युकी शाम को पापा जाने वाले थे। जब पापा शाम को चले गए, तब मैं और दादा जी भी बाहर निकल गए।

मैं – दादा जी आज तो पूरी रात सिर्फ आपकी है। पूरी रात माँ की चुदाई करना। वैसे भी मुझे नहीं लगता है की पापा ने उन्हें अच्छे से चोदा भी होगा।

दादा जी – चिंता मत कर बेटा। आज तू खुद देख लेना। कैसे तेरी मम्मी की गर्मी निकालता हूँ।

फिर हम दोनों घर आ गए। दादा जी मम्मी के पास चले गए और उन्हें किचन में जाके पकड़ लिया। इस बार मम्मी ने भी उन्हें कुछ नहीं कहा। ना ही उन्हें मना किया।

दादा जी – बहु आज रात को मन्नू के सोने के बाद आ जाना, मैं तुम्हारा इंतज़ार करुँगा।

फिर दादा जी आपने कमरे में चले गए। और फिर हम सबने खाना खाया। फिर मम्मी और मैं कमरे में आ गए। मैं बेड पर लेटा हुआ था और मम्मी ने भी मैक्सी पहन ली और वह भी मेरे बगल में लेट गयी। तभी पापा का कॉल आ गया और मम्मी उनसे बाते करने लगी। फिर रात के 11 बजे मैं सोने लगा। मैं करवट बदल के सोने का नाटक करने लगा, मगर मैं सिर्फ लेटा हुआ था और मम्मी भी लेटी हुई थी।

रात के 12:30 बजे मम्मी बेड से उठ गयी और उन्होंने मुझे आवाज दी। मगर मैं वैसे ही लेटा हुआ था। फिर मम्मी बेड से उठ गयी और वह कमरे के बाहर निकल गयी।

Next Part ==> मम्मी को दादाजी से चुदवाया – 4

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2 Comments

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