दादाजी से चुदकर उनकी पत्नी बन गई 4

Dada Poti ki chudai ki hindi sex story:- पर हमें क्या पता था कि हमारी लाइफ़ में एक बहुत बड़ा ट्विस्ट आने वाला है। शादी के बाद मैं अंकल के साथ गाड़ी में बैठकर घर आ गई जहाँ मम्मी पहले ही आ चुकी थीं। मैं और अंकल शादी के बाद घर आए और जैसे ही मम्मी ने हम दोनों को एक साथ देखा मम्मी ज़ोर से चीखते हुए गिरने लगीं।

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Dada Poti ki chudai ki hindi sex story

मैं: मम्मी! क्या हुआ?

और जब कुछ देर बाद मम्मी थोड़ा नॉर्मल हुईं तो मम्मी अंकल को देखकर बोलीं—

मम्मी: पिता जी ये क्या?

तब मुझे पता चला कि जिनसे मेरी शादी हुई है वो कोई और नहीं मेरे दादा जी।

मम्मी: पिता जी ये आपने क्या किया? ये आपकी पोती है।

अंकल: बहू मुझे क्या पता था।

मम्मी: ये ग़लत है। ये शादी किसी को मंज़ूर नहीं होगी।

अंकल: बहू ये शादी तो हो चुकी है। फिर भी तुम जो चाहो।

मम्मी: मेरा क्या चाहना है? ये नाजायज़ है।

अंकल: बहू कुछ भी हो पर ये नाजायज़ नहीं है। अब हम क़ानूनन पति-पत्नी हैं। और फिर भी अगर तुम चाहती हो तो मैं मधु को तलाक़ दे दूँगा।

मम्मी: (थोड़ा गुस्से से) तलाक़ देने का क्या मतलब जब ये शादी मान्य नहीं?

अंकल: क़ानून तो मानता है। क़ानून और समाज की नज़र में हम पति-पत्नी हैं। और तलाक़ तो देना ही पड़ेगा। अगर तलाक़ न दूँ तो मधु दोबारा शादी नहीं कर सकती। अगर मधु बिना तलाक़ शादी करेगी तो वो ग़ैर-क़ानूनी होगी। इसलिए तलाक़ तो देना पड़ेगा।

मेरी शादी कब हुई और अब तलाक़ तो मुझे बीच में बोलना ही पड़ा—

मैं: आप दोनों कुछ भी करें पर मेरी एक बात पक्की है कि मैं तलाक़ नहीं दूँगी। मैंने प्यार किया है और इसमें मेरी क्या ग़लती है कि आप मेरे दादा जी निकले। क्या मैंने आपसे प्रेम किया ये सोचकर कि आप मेरे दादा हो? अगर फिर भी आपने मुझे तलाक़ देने की बात की तो कसम खाकर कहती हूँ कि मैं उसी पल अपनी जान दे दूँगी। मैं आपकी हूँ और हमेशा आपकी रहूँगी। और माँ तुम्ही बताओ तुमने भी पिता जी से लव मैरिज की थी उनके लिए सब कुछ छोड़ा था तो मैंने भी इनसे प्यार किया है। इनसे मेरा क्या रिश्ता था वो मैं नहीं जानती। अब मैं इतना जानती हूँ कि ये मेरे पति हैं और मैं इनकी धर्मपत्नी। और अब दुनिया की कोई ताक़त मेरे नाम के आगे से इनका नाम नहीं हटा सकती। अब मैं मिस नहीं मिसेज़ हूँ। मिसेज़ रवि और यही मेरी पहचान है। इन्हें नहीं छोड़ सकती बस।

अंकल: पर मधु तुम्हारी मम्मी का फ़ैसला ही आख़िरी फ़ैसला होगा कि वो क्या चाहती हैं।

और मम्मी की ओर देखकर—

अंकल: बहू तुम क्या चाहती हो? पहले भी तुमने जो कहा था वही हुआ था और आज भी वही होगा जो तुम कहोगी। ये चाहे कुछ भी कहे पर ये भी सोच लेना कि फिर तुम्हें मेरी जायदाद से कुछ भी नहीं मिलेगा और तुम्हें फिर पहले की तरह मेहनत-मज़दूरी करके पेट पालना होगा। तुम्हारे फ़ैसले पर अब तीन ज़िंदगियाँ खड़ी हैं। ना मधु के बिना मैं जी पाऊँगा और मेरे ख़याल से ना मधु।

मम्मी के बोलने से पहले मैं बोली—

मैं: मम्मी अगर हम शादी करके सुहागरात मना लेते तब आपका क्या फ़ैसला होता ये भी सोच लेना।

मम्मी: पर मधु लोग क्या कहेंगे?

मैं: लोग जानते ही कहाँ हैं। क्या तुम बताओगी कि तुम्हारी बेटी ने अपने दादा से शादी कर ली? या फिर ये बताएँगे? नहीं ना तो फिर किसी को क्या पता चलेगा।

अब मैं चुप अंकल के साथ खड़ी थी और मम्मी मेरी ओर देख रही थीं। मम्मी भी अब जीवन में मेहनत करते-करते थक चुकी थीं और वो इतनी बड़ी जायदाद और आराम-आराम को हाथ से जाने नहीं देना चाहती थीं।

अंकल: बोलो बहू।

मम्मी: अब मैं क्या बोलूँ पिता जी। जब इसने और ठान ही लिया है तो मैं क्या कर सकती हूँ।

अंकल: तो क्या तुम हमारे नए रिश्ते को एक्सेप्ट कर लिया है?

मम्मी: मंज़ूर न करने के अलावा और कोई रास्ता भी तो नहीं है।

अंकल: (मम्मी और मेरी ओर देखकर) बहू अब मेरा और मधु का ही रिश्ता नहीं बदलेगा। बहुत कुछ बदल जाएगा।

मम्मी: मैं समझी नहीं पिता जी।

अंकल: बहू दो-दो रिश्ते तो एक साथ निभाए नहीं जा सकते ना। ये तो तुम जानती हो ना। तुम मधु की माँ हो और मधु की माँ होने के साथ तो इस रिश्ते में तो तुम मेरी सास हुईं यानी बीवी की माँ मेरी माँ। और अब तुम मुझे पिता जी और मैं तुम्हें मम्मी ये तो नहीं चलेगा।

मम्मी: जी ये तो है।

अंकल: तो फिर दोनों में से एक रिश्ते को तो छोड़ना ही पड़ेगा। अगर तुम मधु के साथ बेटी का रिश्ता रखती हो तो मैं समझता हूँ कि कोई भी माँ अपनी बेटी के घर रहना पसंद नहीं करेगी।

मैं: (अंकल से जो अब मेरे पति से) ये आप क्या कह रहे हैं मम्मी से?

मेरे पति: इसमें क्या ग़लत कह रहा हूँ? अगर ग़लत हूँ तो मम्मी से पूछ लो। वैसे अब तुम्हें भी अब जैसे मेरे से एक रिश्ता छोड़ा वैसे अपनी माँ से भी एक रिश्ता छोड़ना होगा। अगर एक रिश्ता छोड़ोगी तभी सुखी रहोगी। देखो किसी के सामने तुम बहू को मम्मी कहो, तुम्हारी मम्मी मुझे पिता जी और मैं तुम्हारी मम्मी को बहू तो लोग क्या कहेंगे इनके बीच क्या रिश्ता है। बोलो फिर भी ये तुम दोनों पर ही है कि तुम दोनों आपस में कौन सा रिश्ता रखना चाहती हो—माँ-बेटी का या फिर सास-बहू का। तुम दोनों जो भी फ़ैसला करोगी मुझे मंज़ूर है।

अब मैं क्या कहती क्या बोलती। मैंने इस बात का फ़ैसला मम्मी के ऊपर छोड़ दिया।

अंकल: (मम्मी से) बोलो तुम क्या चाहती हो।

मम्मी अपना चेहरा नीचे किए धीरे से बोलीं—

मम्मी: पिता जी।

अंकल: बहू इसका मतलब तुम मधु को सास का दर्जा दोगी।

मम्मी: जी।

अंकल: जैसा तुम चाहो बहू। अपनी सास को उनके सुहागरात वाले कमरे ले जाओ। काफ़ी थक चुकी हैं।

मम्मी: जी पिता जी।

और मम्मी मुझे ले कर सुहागरात के रूम में चलने लगीं दादा जी के साथ सुहागरात मनाने के लिए। आप यूँ भी कहें मम्मी ख़ुद मेरी सील अपने ससुर से खुलवाने के लिए मुझे बेडरूम में ले जा रही थीं।

मैं शर्म से मुँह झुकाए मम्मी के साथ सुहागरात के रूम की ओर चल रही थी। अपने रूम की ओर जाते हुए यही सोच रही थी ये पल मेरे कुँवारेपन के आख़िरी पल हैं। आज दादा जी यानी कि मेरे पति मेरा कुँवारापन भंग करके मुझे कच्ची कली से फूल बना डालेंगे। आज मेरी नाथ उतार कर मुझ पर अपनी पक्की मोहर लगा डालेंगे। मैं यही सब सोच रही थी कि हम मेरे सुहागरात के कमरे में आ गए।

मम्मी के साथ मैं भी कमरा देखकर हैरान रह गई। क्या आलीशान कमरा था जो मेरी तरह ही सजा हुआ था। पूरे कमरे में ताज़े फूलों की महक आ रही थी और सामने एक बहुत ही बड़ा रॉयल बेड जो गुलाब के फूलों से सजा था।

बेड के ऊपर दीवार पर लिखा था ‘Just Married’ और नीचे बेड पर फूलों से लिखा था Mr and Mrs Ravi। आज ये बिस्तर मेरे और दादा जी के मिलन का गवाह बनने जा रहा था। इसी बेड पर मैं कली से फूल बनने जा रही थी। यही बेड मेरी सील टूटने का गवाह बनने वाला था। बेड की साइड पर मेरी और दादा जी की बहुत ही रोमांटिक पिक थी।

और पिक के पास ही बहुत ही बढ़िया क्वालिटी के कंडोम के पैकेट पड़े थे और शायद इनका इस्तेमाल आज रात मुझ पर होना था। और मैं चाहती थी कि दादा जी इन कंडोम का इस्तेमाल न करें और अपने वीर्य से मेरे तालाब को लबालब भर दें। आज हमारे मन से मन और तन से तन के मिलन के साथ हमारे वीर्य का भी मिलन हो तो अच्छा है। हमारे वीर्य का मिलन तो दादा जी की इच्छा पर ही निर्भर था।

मम्मी ने मुझे सुहाग की सेज पर बिठाया।

मेरे चेहरे पर ख़ुशी साफ़ झलक रही थी। मैं मंद-मंद मुस्कुराते अपनी नज़रें झुकाए बैठी थी। मैं बहुत ख़ुश थी कि मेरा प्यार परवान चढ़ गया था। मेरा दिल तो यही कर रहा था कि जल्दी से जल्दी दादा जी रूम में आएँ और मुझे बाँहों में भर लें। दादा जी की बाँहों में समा जाने का सोच मेरे चेहरे पर शर्म की लाली दौड़ने लगी। दादा जी से शर्म कैसी? वो तो मेरे प्रेमी थे और आज हमारा प्यार परवान चढ़ने वाला था। पर आप तो जानते हैं भले ही हम देसी औरतें कितनी भी एडवांस क्यों न हों पर शर्म तो हमारा गहना होता है और इस गहने को हमारे पति हमारे कपड़ों के साथ ही धीरे-धीरे उतारते हैं।

मम्मी मुझे बेड पर बिठाते हुए मेरे सर पर घूँघट करते हुए बोलीं—

मम्मी: पिता जी आते ही होंगे।

और रूम से बाहर जाने लगीं तो मैंने मम्मी से कहा—

मैं: मम्मी मैं ये साड़ी उतार कर नाइटी पहन लूँ? वो क्या है गर्मी बहुत लग रही है।

मम्मी: ये क्या कर रही है? आज तुम्हारी सुहागरात है और सुहागरात तो सुहाग के जोड़े में ही मनानी चाहिए। और रही बात इसको उतारने की वो तो वैसे भी अब कुछ ही देर में उतर ही जाएगी।

और ये बोलकर मम्मी मुस्कुराने लगीं।

मम्मी: देख मधु एक माँ अपनी बेटी को सिखाती है कि शादी के बाद जो होता है पर ये इतनी जल्दी हुआ। मैं तुझे कुछ सिखा नहीं पाई। वैसे तो आजकल के बच्चों को पता ही होता है फिर भी तू एक बात सुन। पिता जी जो कुछ भी करें तो ज़्यादा नखरे मत करना। उनका साथ देना समझी। पिता जी नंगी करेंगे तो साथ देना उनका। समझ रही है ना?

मैं: मम्मी क्या सुहागरात में ही सब मर्द कर लेते हैं?

मम्मी: और नहीं तो क्या? और पिता जी तो बरसों से प्यासे हैं। वो थोड़े ही रुकेंगे। जब अंदर डालेंगे तो ज़्यादा चीखना नहीं।

मैं ये सुनकर शर्मा गई।

और बोली—

मैं: मम्मी वो रीना बता रही थी कि मर्दों के बहुत बड़े-बड़े होते हैं तो क्या इनका भी?

ये सुनकर मम्मी मुस्कुराकर—

मम्मी: होते हैं अक्सर मर्दों का 5-6 इंच का होता है पर कुछ मर्दों के बड़े भी होते हैं 10-12 के भी। अब पता नहीं पिता जी का कितना होगा। वैसे मर्दों का जितना बड़ा हो उतना मज़ा ज़्यादा मिलता है। एक बार ही दर्द होता है बाद में तो मज़ा ही मज़ा है।

और मम्मी बाहर जाने लगीं तो बेड की साइड पर पड़े कंडोम के पैकेट को उठाकर मुझसे बोलीं—

मम्मी: क्या पिता जी को सुहागरात में इसके इस्तेमाल के लिए तूने कहा था या तुम दोनों ने प्लान किया हो बच्चा नहीं करने का?

मैंने घूँघट में ना में सर हिलाया।

मैं: नहीं मैंने तो ऐसा कुछ नहीं कहा।

मम्मी: देखो मधु अब जो होना था हो चुका। अब तुम पति-पत्नी हो। पति-पत्नी हो तो सुहागरात भी होगी। अब तुम दोनों को इस रिश्ते को दिल से निभाना चाहिए तो फिर मैं समझती हूँ कि तुम्हें अब कम से कम एक बच्चा तो प्लान कर लो। पिता जी का नाम वंश चलाने के लिए कोई तो चाहिए इतनी बड़ी जायदाद का वारिस। बाक़ी तुम समझदार हो।

मैं: मैं भी तो यही चाहती हूँ कि इनका वंश आगे बढ़े।

मम्मी: तो फिर पिता जी अगर इसका इस्तेमाल करें तो रोक देना उन्हें। सब कुछ होगा तो फिर उनका अंदर ही गिरवाना समझी। और सुन आजकल मर्द सुहागरात में ही सब कुछ कर लेते हैं।

और फिर मुस्कुराकर—

मम्मी: और पिता जी बरसों से प्यासे हैं भरे बैठे हैं। रात भर सोने नहीं देंगे। भर देंगे तेरे अंदर अपना प्यार। तुमको और सुनो अब जो होना है हो गया। अब खुलकर पिता जी का साथ देना समझी।

मैं: जी पर मम्मी अगर ये इसका इस्तेमाल करेंगे तो मैं इन्हें कैसे रोक सकती हूँ? मुझे डर लगता है।

मम्मी: डरने की कोई बात नहीं। अगर इस्तेमाल करने लगें तो करने मत देना। कुछ नहीं बोलेंगे। बीवियों के सामने भला मर्दों की चलती है क्या? और वैसे भी पिता जी तुम्हारे आगे दम हिलाते रहेंगे। सुहागरात में ही तू उन्हें दबा लेगी तो जीवन भर तेरे पैर चाटते रहेंगे। मैं क्या बोलती बस हाँ में सर हिला दिया।

मम्मी बाहर जाने लगीं तो मैंने मम्मी से कहा—

मैं: मम्मी मुझे बड़ा डर लग रहा है। पता नहीं इनका कितना बड़ा होगा। मैं इन्हें झेल भी पाऊँगी कि नहीं।

मम्मी: सब झेल लेगी। पिता जी सब सँभाल लेंगे। तू ये समझ ले झूठी कितनी भी छोटी क्यों न हो मर्द उसमें अपना पाँव फँसा ही लेता है। और सुन ये दूध का गिलास रखा है। पिता जी आएँ तो पिला देना। वैसे तो पिता जी को ये दूध कहाँ अच्छा लगेगा। उन्हें तो तेरा ही दूध अच्छा लगेगा। वो भी पिला देना पर ये भी शुभ होता है।

और इतना बोलकर मम्मी ये बोलकर बाहर निकल गईं। मम्मी जैसे ही रूम से बाहर निकलीं मेरी साँसें बड़ी तेज़ी से चलने लगीं। मेरी चुचियाँ तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थीं कि तभी मुझे दादा जी के क़दमों की आहट सुनाई दी।

जैसे ही दादा जी रूम में आए मेरे दिल की धड़कनें और भी बढ़ गईं। दादा जी रूम में आते ही बेडरूम के दरवाज़े को बंद कर दिया। उस समय पूरे बेडरूम में शांति थी सिर्फ़ मेरी और दादा जी की साँसों की आवाज़ ही सुनाई दे रही थी। मैंने तो दादा-पोती के रिश्ते को भुलाकर उन्हें अपना पति मान लिया था और शायद दादा जी ने भी। पर मेरे मन के किसी कोने में ये डर था कि दादा जी दादा-पोती के रिश्ते के चलते मुझसे शायद मियाँ-बीवी वाला प्यार न करें। मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाने में परहेज़ करें तो मैंने भी सोच लिया था अगर ऐसा हुआ तो मैं ख़ुद पहल करूँगी और दादा जी के साथ शारीरिक संबंध बना लूँगी।

ख़ैर दादा जी चलते बेड के पास आए और बोले—

दादा जी: क्या मैं कोई ख़्वाब देख रहा हूँ या ये कोई हक़ीक़त है? क्या सच में तुम मेरी हो गई हो? इस चाँद से मुखड़े के दीदार तो करवा दो।

मैं तो बेड पर घूँघट में सिमट रही थी कि तभी दादा जी बेड पर पड़े मेरे हाथ पर अपना हाथ रखा तो अपने हाथ को खींचने लगी तो दादा जी मेरा हाथ कसकर दबा दिया और फिर मेरे हाथ को अपने हाथ में लेकर चूम लिया।

आगे क्या हुआ पढ़ें अगले पार्ट में।

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