माँ भाई का मिलन बहन ने कराया 3

Maa Beta ka milan bahan ki iccha:- आकाश: ऐसे क्या देख रही हो मम्मी, मैं समझ नहीं पाया।

मम्मी: समझ नहीं पाया या समझकर अनजान बन रहा है?

आकाश फिर मम्मी को देखने लगा।

इस कहानी का पिछला पार्ट यहाँ पढ़ें ==> माँ भाई का मिलन बहन ने कराया 2

मम्मी: तेरी हरकत तेरी दीदी को भी पता पड़ गई है।

मैं हैरान रह गई कि मम्मी ने मेरा नाम क्यों लिया। वो चाहतीं तो छुपा सकती थीं।

आकाश ने नज़र झुका ली।

मम्मी: अपने आप को कंट्रोल कर आकाश, मैं तेरी मम्मी हूँ।

आकाश कुछ नहीं बोला।

मम्मी: चल सो जा, काफी रात हो गई है।

मुझे लगा था कि मम्मी आगे बढ़ेंगी मेरे प्लान के अकॉर्डिंग, पर ये तो सब खत्म करना चाहती हैं।

मम्मी ने आकाश को सोने के लिए बोला तो वो लेट गया और मम्मी भी लेट गईं।

पर चाँदनी की रोशनी में दोनों मुझे दिख रहे थे कि दोनों की आँखों में नींद नहीं थी।

मैं अब क्या करूँ… इन दोनों की चुदाई देखने के लिए… मैं सोचते हुए थोड़ी देर खड़ी रही और जब दोनों में कोई हरकत नहीं हुई तो मैं नीचे आ गई।

अगले दिन जब मैं उठकर बाहर आई तो मम्मी और आकाश नीचे आ चुके थे और आकाश मम्मी को अवॉइड कर रहा था।

और ये देखकर मेरा मूड खराब हो रहा था।

कि सब बेकार हो गया।

पर मैं भी कहाँ मानने वाली थी क्योंकि बुक्स की स्टोरीज़ पढ़कर मुझे एक माँ-बेटे की चुदाई देखनी थी कि क्या सच में एक माँ को अपने बेटे से चुदकर इतना मज़ा आता है जैसे स्टोरीज़ में लिखते हैं।

और एक असली माँ-बेटा ये सब कर सकते हैं।

पर मेरी मम्मी की हरकत से ये लग रहा था कि ये सब स्टोरीज़ ही होती हैं, हकीकत नहीं।

पर मैंने भी सोच लिया था कि अपनी शादी से पहले दोनों की चुदाई देखूँगी।

जब मैं और मम्मी किचन में खाना बना रही थीं।

मैं: मम्मी…

मम्मी: हाँ निशा।

मैं: आकाश से बात हुई क्या?

तो मम्मी मुझे देखने लगीं पर कुछ बोलीं नहीं।

मैं भी चुप रही।

थोड़ी देर बाद—

मम्मी: तुझे नहीं लगता कि जो तूने कहा था वो गलत है?

मैं मम्मी को देखकर—

अगर हकीकत में देखूँ तो गलत हो सकता है, पर आकाश की नज़र से देखूँ तो सही है।

और अपने मोबाइल में माँ-बेटे की स्टोरीज़ खोलकर मम्मी को दिखा दी।

मम्मी: ये क्या है?

मैं: आप खुद पढ़ लो।

और जैसे ही मम्मी ने स्टोरी का नाम पढ़ा तो उनकी आँखें फैल गईं।

मैं: ये ही हकीकत है मम्मी। ऐसा होता है। आकाश कोई नया नहीं कर रहा।

और मैंने आकाश की बुक्स में कैसी कहानी होती है, उनको बता दिया।

मम्मी: मतलब आकाश…

मैं: हाँ मम्मी, आकाश माँ-बेटे की स्टोरीज़ पढ़कर ही आपके बारे में सोचता है। मैंने सारी बुक्स पढ़ी हैं उसकी और सबकी सबका यही सब्जेक्ट होता है—माँ-बेटा का।

मम्मी: पर तू क्यों पढ़ती है?

तो मैं चुप हो गई।

मम्मी: कुछ पूछ रही हूँ।

तो मैंने अपना अगला दाँव चला।

मैं: मुझे भी अच्छी लगती हैं ये स्टोरीज़… माँ-बेटे की चुदाई।

और मेरे मुँह से “चुदाई” सुनकर—

मम्मी: हरामजादी! शर्म बेच खाई?

तो मैं मुस्कुरा दी।

मैं: आपने ही तो बोला था कि शादी होने वाली है।

मम्मी: तो माँ-बेटे की चुदाई पसंद करेगी?

मम्मी के मुँह से “चुदाई” वर्ड सुनकर मैं मुस्कुरा दी।

मम्मी: तो तू क्या चाहती है कि तुझे और तेरे भाई की पसंद के लिए मैं आकाश से चुदवा लूँ?

और मैं भी बेशर्म बनकर—

मैं: हाँ, चुदवा लो। आपको वैसे भी उसका लंड पसंद है और उसकी आपकी……

मम्मी: चुप हो जा हरामजादी कुतिया!

तो मैं मम्मी के मुँह से गाली सुनकर हँसने लगी।

मम्मी: कुछ तो शर्म कर, बेटा है मेरा।

मैं: पर बड़े लंड वाला है।

और फिर से मुस्कुरा दी।

मम्मी: तू ना अब पिटने वाली है।

तभी पापा की आवाज़ आई—नाश्ता लगा दो।

और फिर कुछ बात नहीं हुई। और जब पापा और आकाश चले गए तो मम्मी ने मुझे बाथरूम में बुलाया जहाँ वो कपड़े धो रही थीं।

मैं: हाँ मम्मी।

मम्मी: देख कितना माल निकला है मेरी कच्छी में।

और मुझे अपनी कच्छी दिखाने लगीं।

मतलब मम्मी को आकाश की बात करना अच्छा लग रहा था और शायद वो सब कुछ चेक कर लेना चाहती थीं आगे बढ़ने से पहले।

और मैंने भी वही डायलॉग बोल दिया जो कल आकाश ने बोला था।

मैं: क्या करे बेचारा, आपके भोसड़े से इतनी अच्छी खुशबू आती है कि उसका ज़्यादा माल निकल जाता है।

मम्मी: हरामजादी! तू सुधर जा नहीं तो…

मैं बीच में ही मम्मी को रोककर—

मैं: नहीं तो आकाश आपके भोसड़े में अपना घोड़े जैसा लंड डाल देगा।

और वहाँ से भागकर अपने रूम में आ गई और मम्मी मुझे गाली देती रहीं—

मम्मी: कुतिया अपनी मम्मी को भाई से चुदवाकर ही मानेगी!

तो मैं अपने रूम से—

मैं: तुम्हारा मन है तो चुदवा लो, मैं तो चाहती हूँ और आकाश भी।

तो बाहर से मम्मी—

मम्मी: मेरा मन करेगा तो चुदवा लूँगी, तेरा क्या जा रहा है। चल अब ये कच्छी और ब्रा सुखा कर आ।

तो मैं मुस्कुराते हुए बाहर आई और जो कच्छी और ब्रा मुझे दिखा रही थीं वो नहीं थी, ये दूसरी वाली थी।

मैं: ये तो साफ है।

मुस्कुराते हुए।

मम्मी मुझे देखकर—

मम्मी: हाँ साफ है, पर सुबह से पहनी हुई थी। बोला तो था कि उसे मेरी पहनी हुई कच्छी और ब्रा चाहिए होती है।

पहले तो धुली हुई लेता था।

पर एक दिन जब उसके कमरे से अंदर देख रही थी तो बड़बड़ा रहा था कि काश पहनी हुई कच्छी होती तो और मज़ा आता।

मैं: हाँ कहानियों की तरह उसमें भी लड़कों को अपनी मम्मी के जिस्म की खुशबू वाली कच्छी पसंद आती है।

और तुम अब बिना धुली ऊपर सुखाने के लिए डाल देती हो कि तुम्हारा बेटा उसे सूंघ सके।

तो इस बार मम्मी मुस्कुरा दीं।

मैं: मम्मी को देखकर…

मन तो तुम्हारा भी करता है मम्मी, तो अपने आपको रोक क्यों रही हो।

मुझे लगा कि स्टोरीज़ में सब काल्पनिक होता है, पर तुम्हारी और आकाश की हरकत देखकर लगता है कि माँ-बेटे की चुदाई ज़रूर होती है।

तो मम्मी मुस्कुराकर—

मम्मी: क्यों नहीं होती? अगर नहीं होती तो ये कहानी कैसे लिखी जाती मेरी बेटी।

जिन कहानियों को तू पढ़ रही है, मैंने भी आकाश के पिल्लो से वो बुक लेकर पढ़ी है।

मैं हैरान रह गई।

मम्मी: हाँ निशा, शुरू में मुझे भी सब काल्पनिक लगा, पर जैसे-जैसे मैं बुक पढ़ती गई और आकाश की हरकत को देखती गई मुझे भी यकीन हो गया कि माँ-बेटे की चुदाई होती होगी, पर कभी हिम्मत नहीं हुई।

पर…

मैं: पर क्या मम्मी?

मम्मी: पर तेरी वजह से मेरी हिम्मत हो रही है। पर डर लगता है कि कहीं आकाश सिर्फ बुक्स पढ़कर हरकत कर रहा हो और उसके दिल में ऐसा कुछ न हो तो बड़ी बदनामी होगी।

मैं मम्मी की आँखों में देखकर—

मैं: सच-सच बोलो, आपका मन है अपने बेटे से चुदने का?

मम्मी: कहानी पढ़-पढ़कर मेरा भी मन करने लगा है, पर डरती हूँ।

मैं: सच कहूँ मम्मी, कहानियाँ पढ़कर मेरा भी मन करता है आप और आकाश की चुदाई देखने का।

एक असली माँ-बेटे की चुदाई।

मम्मी: निशाаа…

मैं: हाँ मम्मी, मैं आप दोनों की चुदाई देखना चाहती हूँ। दिखा दो ना मम्मी, इससे आपके मन की भी हो जाएगी और आकाश के दिल की भी।

मम्मी मुझे देखते हुए—

मम्मी: और तेरी?

तो मैं मुस्कुरा दी।

मैं: हाँ मेरी भी दिल की हो जाएगी।

तो मम्मी ने एक लंबी साँस ली।

मम्मी: पर कैसे?

और मुस्कुरा दीं।

मैं: मतलब तुम चुदना चाहती हो आकाश से?

तो मम्मी ने मेरी आँखों में देखकर—

मम्मी: हाँ… हाँ… हाँ… चुदना चाहती हूँ आकाश के लंड से… अपने बेटे के लंड से।

और नज़र झुका ली।

मैं: हाये-हाये, शर्मा गई का?

तो मम्मी मुझे देखकर—

मम्मी: शर्म नहीं आएगी अपनी ही बेटी से बोल रही हूँ… अपने ही बेटे से चुदना चाहती हूँ।

मैं: मम्मी अपनी बेटी से क्या शर्माना। मैं आपके साथ हूँ, आपकी हेल्प करूँगी आकाश से चुदने में।

मम्मी: सच निशा?

मैं: हाँ, मेरा भी फायदा है इसमें।

तो मम्मी मुझे देखने लगीं।

मैं: है ना… अपनी मम्मी और भाई की लाइव चुदाई देखने की मेरी इच्छा पूरी होगी।

मम्मी इस बात पर शर्मा गईं।

मैं: चिंता मत करो, आकाश को पता नहीं पड़ेगा कि उसकी बहन उसको अपनी मम्मी को चोदते देख रही है।

मम्मी चुपचाप मुझे देखती रहीं।

मैं: तो पक्का… बेटे का लंड चाहिए उसकी मम्मी को?

मम्मी: हाँ… बना दे बेशर्म। एक माँ अपनी बेटी से बोल रही है कि उसे अपने बेटे का लंड अपने भोसड़े में चाहिए।

अब खुश?

मैं: बहुत खुश।

मम्मी: पर होगा कैसे?

मैं: मुझ पर छोड़ दो। और अब अपने जिस्म को तैयार करो बेटे का लंड लेने के लिए।

जैसे कल वाली बुक में कैसे वो मम्मी अपने बेटे के लंड के लिए तैयार होती है दुल्हन की तरह।

मम्मी: वो तो बहुत बेशर्म मम्मी थी निशा।

मैं: बेशर्म बनने में जो मज़ा है वो शर्मीली में कहाँ है।

बेटे के सामने शर्मीली बनकर रहो और अपनी तरफ से पूरी तैयारी रखो।

मम्मी: जब तेरी शादी फिक्स हुई थी तो मैं सोचती थी कि तुझे कैसे समझाऊँ।

पर देखो वक्त को… आज तू मुझे समझा रही है।

मैं: हाँ, आज से मैं आपकी गुरु।

मम्मी मुस्कुराकर—

मम्मी: अच्छा बाबा मेरी मैडम, आज क्या ऑर्डर है?

मैं: बोला ना, जिस्म को साफ करो। बगल के बाल, भोसड़े के बाल साफ करो और हो सके तो ब्यूटी पार्लर चली जाओ। मैनीक्योर और पेडीक्योर करा आओ, थोड़ा चेहरे का मेकअप करा लो।

बालों को स्ट्रेट करा लो।

कम से कम दुल्हन ना सही, दुल्हन की बड़ी दीदी बन जाओ।

मम्मी कुछ नहीं बोलीं और उठकर मेरे गले लग गईं।

और—

मम्मी: किसीको पता चला तो हम किसीको मुँह दिखाने लायक नहीं रहेंगे।

मैं: ना मैं बोलूँगी ना तुम। और आकाश को अगर अपनी मम्मी का भोसड़ा चाहिए तो वो भी मुँह नहीं खोलेगा।

और उनकी आँखों में देखने लगी।

मम्मी: अभी 11 बजे हैं। आकाश 3 बजे तक आएगा। मैं ब्यूटी पार्लर होकर आती हूँ।

मैं सीरियस होकर—

मैं: हाँ, हो आओ।

मम्मी: मुझे लगा कि तू हँसेगी मुझ पर।

मैं: मम्मी ये अब मज़ाक नहीं है।

अगर आपका दिल है तो इस रास्ते पर आगे चलो, नहीं तो रहने दो।

मम्मी: और तेरा सपना… अपनी मम्मी और भाई की चुदाई देखने का?

मैं: सपना है, टूट जाएगा और क्या।

मम्मी: मैं ऐसी माँ नहीं हूँ कि अपने दोनों बच्चों का दिल तोड़ दूँ।

और मुस्कुराकर—

मम्मी: मैं आती हूँ ब्यूटी पार्लर से।

एक का अपनी मम्मी को चोदने का मन है।

और एक का अपनी मम्मी को भाई से चुदाते हुए देखने का।

ये कहते हुए अपने रूम में गईं और 10 मिनट बाद घर से बाहर।

और मैं हॉल में खड़ी-खड़ी मुस्कुरा रही थी कि—

कहानियों में सही लिखा होता है… सेक्स के आगे सब रिश्ते बेकार हैं।

फिर वो माँ-बेटा का ही क्यों न हो।

मैं इस बात से भी खुश थी कि फाइनली मम्मी को आकाश से चुदते देख सकूँगी।

एक रियल माँ-बेटे की चुदाई… और ये सोचते ही मेरी पussy ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था।

तो जल्दी से अपने रूम में आई और बुक निकालकर थोड़ी देर पढ़ी और अपनी पussy में उँगली डालकर अंदर-बाहर करने लगी। और थोड़ी देर में मस्ती में आँखें बंद हो गईं और मेरे मुँह से अपने-आप—

मैं: आаааааа… आकाश मेरे बेटे… हाаааа… ऐसे ही चोद… अपनी मम्मी का भोसड़ाаааа… और तेज़-तेज़ चोद… तू अपनी मम्मी को चोदना चाहता था ना… देख तेरी बहन की वजह से अपनी मम्मी का भोसड़ा चोद रहा है…

और मेरी पussy ने पानी छोड़ दिया जिससे मेरा हाथ, मेरा बेड सब गीला हो गया।

पर मेरा हाथ अभी भी मेरी पussy पर ही चल रहा था क्योंकि सोच-सोचकर ही मैं मरी जा रही थी कि मम्मी आकाश से चुदना चाहती हैं।

और मैं लाइव चुदाई देखूँगी माँ-बेटे की।

मैं अपनी पussy में ऐसे ही उँगली कर-करके सोचती रही और इसका असर ये हुआ कि मैं एक बार और डिस्चार्ज हो गई।

दो बार डिस्चार्ज होने की वजह से मैं आँख बंद करके बेड पर लेट गई पर बंद आँखों के सामने वही सीन चल रहा था कि कैसे आकाश मम्मी को घोड़ी बनाकर अपना घोड़ा जैसा लंड उनके भोसड़े में डाल रहा है।

और मम्मी के मुँह से तेज़ चीख निकल जाती है दर्द की वजह से।

पर मम्मी की आवाज़ दोबारा आई तो मुझे होश आया कि मम्मी गेट से आवाज़ दे रही हैं गेट खोलने के लिए।

तो मैं जल्दी से उठी, अपने कपड़े सही किए और गेट खोल दिया।

मम्मी ब्यूटी पार्लर से आ गई थीं और मैं उनको देखकर मन में—देखो कैसे बेटे से चुदने के लिए तैयार होकर आई हैं।

पर मम्मी बिना बोले अपने रूम में चली गईं और तब बाहर आईं जब गेट पर आकाश की आवाज़ आई गेट खोलने के लिए। तब मैं अभी अपने रूम में थी और जैसे ही आकाश की आवाज़ सुनी मैं बाहर आई। तब तक मम्मी गेट खोल चुकी थीं और उनको देखकर आकाश के मुँह से निकल गया—

आकाश: बहुत सुंदर लग रही हो मम्मी।

तो मम्मी ने नज़र झुका ली और गेट बंद कर दिया ये कहते हुए—

मम्मी: सब गेट पर ही बोल देगा।

और पलटकर अंदर आने लगीं पर पलटकर आकाश को भी देखने लगीं जो अभी भी गेट पर ही खड़ा हुआ था। और मम्मी ने जानबूझकर अपनी बम्म इस तरह पीछे निकाली कि आकाश की आँखें फट गईं। सच कहूँ तो मम्मी सच में सुंदर लग रही थीं और गंदी लैंग्वेज में कहूँ तो हॉट एंड सेक्सी।

मम्मी: अब क्या वहीं खड़ा रहेगा? ये अंदर भी आएगा?

आकाश: हाँ… आया मम्मी।

और अंदर आ गया। पर मम्मी वैसे ही खड़ी रहीं तो आकाश करीब से उनके बम्म देखने लगा जो काफी बड़े और भारी हैं।

मम्मी: अब क्या खड़ा-खड़ा देखता रहेगा या फ्रेश भी होगा?

आकाश: आँ… हाँ… हाँ… जाता हूँ।

और वो पहले अपने रूम में गया फिर बाथरूम में। और मैं तब तक बाहर आ गई और मम्मी को देखकर—

मैं: हो गया लट्टू आप पर आपका बेटा।

तो मम्मी थोड़ा शर्मा गईं।

और किचन में मैं जाने लगी।

मैं: मम्मी मैं बाद में खा लूँगी, आप दोनों अकेले खा लो।

और मम्मी को आँख मार दी।

तो मम्मी समझ गईं कि मैं उन्हें अकेले में आकाश के साथ ज़्यादा से ज़्यादा मौका देना चाहती हूँ।

थोड़ी देर में आकाश बाहर आ गया और दोनों वहीं बैठ गए जहाँ हम खाना खाते थे।

पर आकाश मम्मी को ही देखे जा रहा था।

मम्मी: खाना शुरू करें?

आकाश: दीदी खाना नहीं खाएगी?

मम्मी: क्यों, उससे फिर बताना चाहता है कि तू अपनी मम्मी को घूर रहा है?

तो आकाश ने नज़र झुका ली।

मम्मी ने मुझे जानबूझकर आवाज़ दी और मैंने मना कर दी।

मम्मी: अब तो खा ले।

आकाश ने मम्मी को देखकर खाना शुरू कर दिया।

और मम्मी ने भी। पर जब आकाश को पता पड़ गया कि मैं नहीं आ रही तो आकाश फिर से मम्मी को देखने लगा।

मम्मी: दीदी नहीं आ रही, इसका फायदा उठा रहा है।

तो आकाश मुस्कुराकर—

आकाश: आपने ही तो कहा था कि दीदी को पता पड़ गया है। इसलिए तो अब जब वो नहीं है तो अपनी मम्मी को देख तो सकता हूँ।

मम्मी: हाँ पता है, कितना शरीफ है मेरा बेटा। पता नहीं क्या-क्या करता है।

तो आकाश मुस्कुरा दिया और—

आकाश: क्या करूँ, मेरी मम्मी ही तो इतनी सुंदर और खूबसूरत।

मम्मी: हाँ-हाँ, पता है कितनी सुंदर हूँ।

तभी आकाश ने खाना छोड़ा और मम्मी को उठाने लगा।

मम्मी: क्या हुआ?

आकाश: एक मिनट।

और मम्मी को हॉल में लगे मिरर के सामने खड़ा करके—

आकाश: लो देख लो कितनी सुंदर हो।

तो मम्मी शर्माकर—

मम्मी: तो मेरे कपड़े गंदे करेगा?

और उसकी आँखों में देखने लगीं।

तो आकाश मुस्कुरा दिया और कुछ नहीं बोला।

मम्मी: बहुत बड़ा कुत्ता है तू।

आकाश: कुत्ता नहीं, घोड़ा हूँ… बड़ा वाला।

और मम्मी को आँख मार दी।

तो मम्मी घबरा सी गईं एक बार को।

मम्मी: धत्त कुत्ते!

अब खाना खा ले।

और खाने के पास आने लगीं तो आकाश खड़े-खड़े—

आकाश: उँऊूँ… क्या मस्त चाल है मेरी सुंदर मम्मी की।

मम्मी पलटकर—

मम्मी: कुत्ते, मार खाएगा तू अब।

आकाश: तो मारो ना, रोका किसने है।

और मम्मी के पास आकर उनको पीछे से अपनी बाहों में भर लिया।

मम्मी: कुत्ते छोड़ दे, निशा अपने कमरे में है।

आकाश: तो क्या हुआ, मैं कुछ गलत काम नहीं कर रहा। अपनी मम्मी को हग कर रहा हूँ।

और पता नहीं क्या किया मम्मी के मुँह से—

मम्मी: आааाह…

निकल गया।

मम्मी: मत करा कर।

आकाश: क्या किया मैंने?

मम्मी: जो हर बार करता है मुझे अपनी बाहों में भरकर।

मैं हैरान थी ये सुनकर कि आकाश कुछ करता है जो मम्मी को पता है, पर क्या।

तभी मेरी नज़र आकाश की कमर पर पड़ी और वो अपनी कमर को मम्मी की कमर से घिस रहा था।

मतलब कहीं आकाश अपना लंड को मम्मी के बम्म से नहीं घिसता जो मम्मी को पता हो।

आकाश: क्या करता हूँ?

तो मम्मी वैसे ही खड़े-खड़े चेहरा पीछे घुमाकर—

मम्मी: तुझे नहीं पता तू क्या करता है घोड़े।

यहाँ पर “घोड़े” का मतलब आकाश के लंड से था।

मतलब आकाश सच में अपना लंड मम्मी के बम्म से रगड़ता है और मम्मी को इसका एहसास भी है, पर वो कुछ बोलती नहीं थीं।

मम्मी: छोड़ ना अभी।

तो आकाश ने मम्मी को देखा और मुस्कुराकर—

आकाश: घोड़ा भी तो आपके प्यार में ही बना हूँ।

मम्मी और आकाश की बातों से लग रहा था कि ये दोनों बहुत कुछ करते हैं और एहसास भी है, पर कुछ बोलते नहीं हैं।

मम्मी: हाँ-हाँ, अब तेरी सारी गलती की वजह मैं ही हूँ। चल अब खाना खत्म कर।

और इस बार दोनों खाना खाने लगे और एक-दूसरे को देखते रहे।

आगे क्या हुआ पढ़ें अगले पार्ट में।

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