बड़े घर की पाकीज़ा चूतें 3
Ghar ke naukar se chudai ki kahani:- फिर ऐसे ही ये दिन भी निकल गया… और एक हफ्ता भी… लेकिन उसका ये रोज़ का काम हो गया। वो रोज़ मुझे ठीक 5 बजे कॉल करता था… और सिर्फ गंदी बातें ही करता था… जिससे मैं बहुत फ्रस्ट्रेटेड महसूस करने लगी।
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Ghar ke naukar se chudai ki hindi sex story
अमीरा: बहुत हो गया… इस हरामखोर का कुछ करना पड़ेगा… लेकिन मैं किसको बोलूँ जो मेरी हेल्प करे… घरवालों से बोल नहीं सकती… फिर किससे…
कालू: क्या हुआ मालकिन… आप कुछ परेशान लग रही हैं…
अमीरा: नहीं कालूजी… ऐसा कुछ नहीं है…
कालू: झूठ क्यों बोल रही हो… आपके चेहरे से साफ पता चल रहा है… कि आपको कोई तो बात परेशान कर रही है…
अमीरा: (इकबाल को ये सब पूछना चाहिए था… हम दोनों में इतना प्यार होने के बावजूद भी… वो मेरा चेहरा कभी नहीं पढ़ पाए… और यहाँ कालूजी मेरा चेहरा देखके ही समझ गए… जैसे ये ही मेरे शौहर हों…)
आखिरी लाइन सोचके तो मैं खुद पे दंग ही रह गई…
अमीरा: (या… हा… ये मैंने क्या सोच लिया… नहीं नहीं… मैं ये क्या…)
कालू: हमें बताके तो देखिए मालकिन… शायद हम कुछ मदद कर सकें…
अमीरा: नहीं कालूजी आप गलत समझ रहे हैं… ऐसा कुछ नहीं है…
ये कहते हुए मैं किचन में चली गई और अपने काम में लग गई। ऐसे ही एक हफ्ता और निकल गया… पर उसका फोन आना बंद नहीं हुआ। जब मैं फोन नहीं उठाती… तो वो कंटिन्यू करता रहता… थक हारके मुझे फोन उठाना ही पड़ता… और कालूजी ने मुझसे कई बार पूछा… लेकिन मैंने कुछ नहीं बताया।
फिर एक दिन दोबारा उसका फोन आया… तब मैं गार्डन में थी… और उसका नंबर देखके ही मेरा दिमाग खराब होने लगा… वहीं कालूजी फूलों को पानी दे रहे थे। मेरा चेहरा देखके वो सब समझ गए।
कालू: किसका फोन है मालकिन…
अमीरा: किसीका नहीं…
कालू: आप कब तक हमसे झूठ बोलेंगी… हमने गौर किया है… जब भी इसी समय आपका फोन बजता है… तो आपके चेहरे पर टेंशन साफ दिखता है…
अमीरा: ऐसा कुछ नहीं है… वो…
मैं इतना ही बोल पाई… कि अगले ही पल कालूजी ने फोन उठा लिया और… दो मिनट तक सुनते रहे फिर…
कालू (फोन पर): साले मादरचोद… तुझे वहीं आकर ज़मीन में ज़िंदा गाड़ दूँगा… मेरी मालकिन से दूर रह… तुझे क्या लगा वो अकेली है… नहीं मैं हूँ मेरी मालकिन के साथ… अगर दोबारा तूने कॉल किया तो साले जहाँ भी तू छुपा होगा… वहीं आकर तेरी माँ चोद दूँगा…
कालू: मालकिन आपको कोई लफंगा परेशान कर रहा है। और आपने किसीको कुछ नहीं बताया… अगर आप पहले हमें बताती तो हम पहले ही उसे सीधा कर देते…
ऐसे ही दो दिन निकल गए… और अब उसका फोन आना भी बंद हो गया… तब जाके मुझे कुछ राहत मिली। कालूजी के लिए इज्जत तो पहले ही मेरे दिल में थी… अब उनकी बहादुरी भी पहचान में आ गई…
ऐसे ही एक दोपहर मैं अपने रूम से सीढ़ियाँ उतरते हुए किचन में जा रही थी…
(किचन के अंदर से)
कालू: आहाआआ ऐसे ही चूसती रह… आहाआआ
फरीना: ग्रररर ग्गाररर ग्ग्ग
मुझे समझ में तो आ गया कि हो क्या रहा है… लेकिन फिर भी मैंने किचन के अंदर झाँका… तो वही सीन था जो पहले था…
कालू: आहाआआ साली इतने महीने हो गए… लेकिन तूने मुझे एक बार तुझे चोदने नहीं दिया… आहाआआआ एक बार तो चूत मारने दे…
फरीना (लंड मुँह से बाहर निकालते हुए): बिल्कुल नहीं… तुम्हारा इतना बड़ा है मैं तो मर ही जाऊँगी…
कालू: साली 10 सालों से चूत नहीं मारी है… बहुत अकेला महसूस करता हूँ… एक बार डालने दे…
फरीना: बिल्कुल नहीं…
ये कहते हुए फरीना ने दोबारा लंड चूसना शुरू कर दिया। जैसे ही फरीना ने दोबारा लंड मुँह में लिया… कालूजी ने मेरी तरफ देखा… और हमारी नज़रें मिलीं… और जैसे ही हमारी नज़रें मिलीं… अगले ही पल पता नहीं क्यों मुझे शर्म आ गई… और मैं अपने रूम में भाग गई।
ऐसे ही 20-22 दिन निकल गए… मैं तो कालूजी की नज़रों से नज़रें ही नहीं मिला पा रही थी… जैसे गलती सब मेरी हो… मैंने किचन में उन्हें पकड़ जो लिया। कालूजी कई बार मुझसे बात करने की कोशिश करते थे… लेकिन मैं उन्हें अवॉइड कर देती थी। फिर एक दिन जब मैं किचन में सब्जियाँ काट रही थी…
कालू: मालकिन… अब तो उसका फोन नहीं आता ना…
मैं कुछ नहीं बोली।
कालू: वो कमीना आपको दोबारा से परेशान तो नहीं करता ना…
मैं दोबारा कुछ नहीं बोली।
कालू: चुप क्यों हो मालकिन… बताइए ना… हम आपको परेशान होता हुआ नहीं देख सकते…
अमीरा: क्यों…??
कालू: कैसे कहें मालकिन… अगर हमने बता दिया तो आप हम पर बहुत गुस्सा करेंगी… यहाँ तक कि नौकरी से भी निकाल देंगी… इसलिए रहने दीजिए…
अमीरा: नहीं निकालूँगी… आप बताइए तो आप मेरी इतनी परवाह क्यों करते हैं…
कालू: पक्का आप गुस्सा नहीं करेंगी…
अमीरा: पक्का…
कालू: हम आपको पसंद करते हैं मालकिन… आपके लिए कुछ भी कर सकते हैं… इसलिए आपको कोई भी परेशान करे… हम बर्दाश्त नहीं करेंगे…
अमीरा (शॉक्ड): क्या? ये आप क्या कह रहे हैं… मेरा निकाह हो चुका है। मैं किसीकी बेगम हूँ… और एक बच्चे की अम्मी… आप ये क्या…
कालू: हम सब जानते हैं मालकिन… लेकिन क्या करें। खुद को आपको चाहने से रोक ही नहीं पा रहे हैं…
अमीरा (गुस्से में): अगर आप मुझे इतना ही पसंद करते हैं… तो मेरे ही किचन में मेरी ही नौकरानी के साथ क्या कर रहे थे…
ये कहते हुए मैं किचन से बाहर आकर अपने रूम में चली गई। कालूजी भी कहाँ पीछे रहते, वो भी मेरे पीछे-पीछे मेरे रूम में अंदर आ गए।
कालू: तो क्या करता मालकिन… 10 साल हो गए एक औरत से सुख मिले हुए… और अगर मैं आपसे कहता तो क्या आप मुझे प्यार करने देतीं?
अमीरा: मुझे कुछ नहीं पता… आप बस इसी पल से फरीना से दूर रहेंगे…
कालू: ठीक है दूर रहूँगा… लेकिन फिर क्या आप मुझे प्यार करने देंगी…
अब मैं चुप रही… और मुझे चुप देखके कालूजी मेरे नज़दीक आए।
कालू: क्या आप मुझे गले लगाने देंगी…
अब मैं फिर चुप रही… तो अब कालूजी कैसे ही पीछे हटते… और अगले ही पल मुझे गले से लगा लिया… और हाथों को मेरी पीठ पर घुमाने लगे… और धीरे-धीरे हाथों को नीचे सरकाते हुए जैसे ही कालूजी ने अपने राइट हाथ को मेरी गाँड की लेफ्ट फाँक पर रखा… वैसे ही मैं कसमसा उठी।
अमीरा: कालूजी ये आप क्या कर रहे हैं…
अब कालूजी ने कुछ नहीं कहा… और उनके लेफ्ट हाथ को भी लेजाके मेरी गाँड की राइट फाँक पर रख दिया… और धीरे-धीरे सूट के ऊपर से ही मेरी गाँड को दबाने लगे।
अमीरा: आहाआआ कालूजी प्लीज़… मत करिए…
कालू: करने दीजिए ना मालकिन…
ये कहते हुए कालूजी ने मेरे लेफ्ट कान को चाटना शुरू कर दिया… और अब मेरी भी हालत धीरे-धीरे खराब होने लगी…
फिर कालूजी अपने चेहरे को मेरे चेहरे के सामने लाए… और धीरे-धीरे उनके होंठों को मेरे होंठों के पास लाने लगे… वैसे ही मुझे उनके मुँह से बदबू आने लगी… और अगली ही पल मैंने अपना चेहरा घुमा लिया।
कालू: चूमने दीजिए ना मालकिन…
अमीरा: नहीं कालूजी… होंठ पर नहीं… (ये… ये मैंने क्या कह दिया…)
कालू: होंठ नहीं तो गाल तो चूमने दीजिए…
ये कहते हुए कालूजी ने उनके होंठों को मेरे राइट गाल पर रख दिया… और मेरे राइट गाल को चूमने लगे।
अमीरा: आहाआआ…
करीबन 5 मिनट राइट गाल चूमने के बाद… कालूजी ने मेरे चेहरे को घुमाया… और मेरा लेफ्ट गाल चूमना शुरू कर दिया।
कालू: हम आपके जिस्म को देखना चाहते हैं…
अमीरा: नहीं कालूजी प्लीज़…
कालू: मना मत करिए मालकिन…
फिर कालूजी ने मेरा दुपट्टा निकाल दिया… और मेरी कमीज़ के पीछे से पूरे बटन भी खोल दिए… और जैसे ही मेरी कमीज़ उतारने लगे… वैसे ही मैंने अपनी कमीज़ पकड़ ली।
अमीरा: नहीं कालूजी प्लीज़…
कालू: मालकिन हम आपके लिए बहुत तड़पे हैं…
ये कहते हुए कालूजी ने मेरे राइट गाल को चाटना शुरू कर दिया… और मेरी हालत खराब से खराब होने लगी…
कालू (गाल चाटते हुए): हाथ ऊपर करिए मालकिन…
अब मेरा खुद पे कंट्रोल खोने लगा था… और जैसे ही कालूजी ने मेरे राइट गाल को चाटना शुरू किया… वैसे ही मेरी पकड़ अपनी कमीज़ पर ढीली हो गई थी… और जब कालूजी ने मुझे हाथ ऊपर करने को कहा… वैसे ही मेरे हाथ अपने आप ऊपर हो गए… और कालूजी ने मेरी कमीज़ उतारना शुरू कर दी…
और अगले ही पल मेरी कमीज़ मेरे जिस्म से अलग हो चुकी थी… और जैसे ही मेरी कमीज़ उतरी तब मुझे एहसास हुआ कि मैंने क्या कर दिया… कैसे मैंने अपने हाथ ऊपर कर दिए… और कालूजी को कमीज़ उतारने दी… अब जैसे ही मैं होश में आई… वैसे ही मैं घूम गई।
अमीरा: कालूजी ये आपने क्या किया…
कालू: हम तो सिर्फ आपको प्यार करना चाहते हैं…
अमीरा: मैं मना करूँगी तो आप जबर्दस्ती करेंगे… ये है आपका प्यार…
कालू: अगर आपको लगता है मैंने आपकी जबर्दस्ती कमीज़ उतारी है… तो ऐसा बिल्कुल नहीं है… मैं आपसे जबर्दस्ती का सोच भी नहीं सकता… अगर फिर भी आपको ऐसा लगता है… तो हमें माफ कर देना… हम यहाँ से चले जाते हैं…
फिर करीबन 2 मिनट तक सन्नाटा रहा। और जब मैंने पीछे घूमके देखा तो कालूजी जा चुके थे। फिर मैं बाथरूम में घुस गई… और बाकी के कपड़े भी निकाल फेंके… और जैसे ही पैंटी उतारी… तो मेरे चूत के एरिया पर गीली थी… मतलब कालूजी की हरकतों से मेरी चूत गीली हो गई…
फिर मैंने ज्यादा नहीं सोचा और बाथरूम से आकर मैं बेड पर लेट गई… और पता ही नहीं चला मुझे नींद कब आ गई…
अगला दिन
अब ज्यादातर किचन का काम मुझे ही करना पड़ रहा था… क्योंकि फरीना को मैंने मना कर दिया घर आने से… और बाकी सारी औरतों को भी… क्योंकि मुझे यकीन था जो आदमी मुझ जैसी पाकीज़ा औरत को सेड्यूस कर सकता है… तो फरीना और बाकी सब तो नौकरानियाँ ही हैं… कितना रेसिस्ट कर लेंगी…
फिर दो दिन बाद किचन में…
कालू: मालकिन आपने फरीना को यहाँ आने से क्यों मना किया…
अमीरा: ये मेरा घर है… मैं जिसे चाहूँ उसे मना कर सकती हूँ… और हाँ… आज से यहाँ कोई भी औरत काम नहीं करेगी…
कालू: क्यों…??
अमीरा: जैसे आपको नहीं पता…
कालू: ये गलत है मालकिन… आप खुद प्यार करने नहीं देतीं… और जब मैं दूसरी औरत से अकेलापन दूर करना चाहता हूँ… तो आप वो भी नहीं करने देतीं… ये आपने मेरे साथ बहुत गलत किया मालकिन…
ये कहते हुए कालूजी किचन से बाहर चले गए। अब ऐसे ही 5 दिन निकल गए… कालूजी मुझसे बात तो दूर… मुझे ठीक से देखते तक नहीं थे… जो पता नहीं क्यों… लेकिन मुझे अंदर ही अंदर बहुत बुरा लग रहा था। तभी आकिल ने बताया… कि 4 दिन बाद उसके कॉलेज में फंक्शन है… जो रात 7:30 से स्टार्ट होगा… और इकबाल कभी आकिल के कॉलेज जाते नहीं थे… चाहे PTA मीटिंग हो… या कोई फंक्शन… हमेशा मैं, मुस्कान और कभी-कभी अलीना अप्पी भी साथ चली जाती थी। लेकिन इस बार मैंने अकेली सिर्फ आकिल के साथ जाने का सोचा… और ड्राइविंग तो कालूजी को ही करनी थी…
(फंक्शन डे… 6:30 बजे)
अमीरा: अब देखती हूँ कालूजी… आप मुझे कैसे इग्नोर करते हैं…
रेड साड़ी वो भी बैकलेस और स्लीवलेस ब्लाउज के साथ… और आज मैं अपनी क्लीवेज और नेवल दोनों दिखा रही थी… पता नहीं क्यों मेरा मन किया मैं ऐसे ही तैयार हूँ… पता नहीं क्यों… पर कैसे भी करके मैं कालूजी का ध्यान अपने ऊपर चाहती थी…
अमीरा: बस थोड़ी लिपस्टिक… परफेक्ट…
फिर मैंने इकबाल को कॉल किया और उन्हें बोल दिया कि मैं फंक्शन में जा रही हूँ… और की अलीना अप्पी के घर पे दे जा रही हूँ…
आकिल: अम्मी जल्दी… और कितनी देर… अंकलजी ने कार भी निकाल ली है…
अमीरा: बस आकिल आ रही हूँ…
फिर मैं अपने रूम से निकली… और धड़कते दिल के साथ सीढ़ियाँ उतरने लगी…
अमीरा: (ये मैं सही तो कर रही हूँ ना… कहीं मुझे ऐसे तैयार देख कालूजी कोई गलत मतलब न निकाल ले… मैंने तो सिर्फ उनकी अटेंशन के लिए ये किया है… कहीं वो ये न समझे कि मैंने उन्हें खुद को प्यार करने की इजाजत दे दी है… नहीं वो ऐसा नहीं करेंगे… अगर उन्होंने ट्राई किया भी तो उस दिन जैसे मैं उन्हें रोक दूँगी… हाँ यही करूँगी…)
पर मैंने ये नहीं सोचा… कि मैं खुद को रोक पाऊँगी… या नहीं…
अब मैं जैसे ही बाहर निकली… और जैसे ही कालूजी की नज़र मुझ पर पड़ी… वैसे ही उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं… और वो मुझे ऊपर से नीचे घूरने लगे… और उन्हें ऐसे घूरते देख मैं शर्म से लाल होने लगी…
फिर मैं और आकिल कार की बैक सीट पर बैठ गए… कालूजी ड्राइविंग सीट पर और कार चल पड़ी… रास्ते भर चुप-चुप के फ्रंट मिरर से कालूजी मुझे देखते रहे… और मैं भी ऐसी बैठी थी… कि मेरा नेवल और क्लीवेज साफ-साफ दिख रहा था… और कालूजी के ऐसे देखते हुए मैं अंदर ही अंदर बहुत खुश होने लगी…
फिर कॉलेज आ गया और कालूजी ने कार पार्किंग एरिया में लगा दी…
अमीरा: कालूजी आप कार में ही रेस्ट करिए… हम फंक्शन अटेंड करके आते हैं…
जाने से पहले मैंने अपनी साड़ी सही की… क्लीवेज और नेवल दोनों ढक लिए… जो कालूजी ने भी देखा… और फिर मैं और आकिल कॉलेज के अंदर चले गए…
(रात 10:30 पर)
आकिल: अम्मी मुझे नींद आने लगी…
अमीरा: हाँ टाइम भी बहुत हो गया है… चलो…
मैं आकिल को लेकर पार्किंग एरिया में आई… और कार में देखा तो कीज़ लगी हुई थीं… लेकिन कालूजी कार में नहीं थे… फिर मैंने कार की बैक सीट पर आकिल को सुला दिया… और जैसे ही गेट बंद किया… वैसे ही किसीने मुझे पीछे से कसके पकड़ लिया…
और जैसे ही मैं चीखने को हुई…
कालू: मालकिन हम हैं…
अमीरा: कालूजी ये आप क्या कर रहे हैं…
कालू: वही जिसके लिए हम कई महीनों से तड़प रहे हैं… आपको इस साड़ी में देखके तो अब रहा नहीं जाता…
ये कहते हुए कालूजी ने मुझे घुमाके सीधा किया… और मेरे गले को चूमने लगे… साथ ही दोनों हाथों को पीठ पर घुमाने लगे…
अमीरा: आहाआआ कालूजी प्लीज़ नहीं…
कालू: हम जानते हैं… आप भी चाहती हैं कि हम आपसे प्यार करें…
अमीरा: नहीं ऐसा नहीं है…
कालू: अच्छा तो फिर वो क्या था… हमारे सामने तो आप अपनी नाभि खुलके दिखा रही थीं… और कॉलेज में जाते समय ढकके चली गईं…
अब मैं चुप रही… क्योंकि मेरे पास इसका कोई जवाब नहीं था… और मुझे चुप देख कालूजी ने वो किया जो मैं सोच नहीं सकती थी…
मेरा गला चूमते हुए ही कालूजी ने मेरे ब्लाउज की डोरी और हुक दोनों खोलके… मेरा ब्लाउज पीछे से पूरा खोल दिया… और मेरे ब्रा के स्ट्रैप्स पर उंगली फेरने लगे…
अमीरा (शॉक्ड): आपने मेरा ब्लाउज क्यों…
मैं इतना ही बोल पाई… कि कालूजी ने मुझे घुमाके कार के बैक गेट से सीधा चिपका दिया… जिससे खुले ब्लाउज में मेरी पीठ उनके सामने आ गई… और ब्लाउज के दोनों कोनों को पकड़के पीठ से हटा दिए… जिससे मेरी पूरी पीठ नंगी सिर्फ ब्रा स्ट्रैप को छोड़के उनकी आँखों के सामने थी…
अमीरा: कालूजी ये आप…
मैं इतना ही बोल पाई कि कालूजी ने मेरी पीठ को चूमना शुरू कर दिया… साथ ही आगे लेजाके हाथ मेरे पेट पर रख दिए…
अमीरा: आहाआआ कालूूूजी प्प्प्लीज़्ज़्ज़…
धीरे-धीरे कालूजी मेरी पीठ पर चूमने के साथ-साथ चाटने भी लगे… साथ ही हाथों को मेरे पेट पर धीरे-धीरे घुमाने लगे…
आकिल के कॉलेज की खुली पार्किंग में मेरे साथ ये हो रहा था… जिसके एहसास से मेरा भी खुद पे कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था… मेरी चूत भी धीरे-धीरे गीली होने लगी थी… कि तभी मुझे किसीके कदमों की आवाज़ आई…
अमीरा: कालूजी कोई आ रहा है… प्लीज़ रुक जाइए…
इस बार कालूजी ने भी मुझे छोड़ दिया… फिर मैं सीधी घूमी और पीठ को बैक गेट से चिपकाके खड़ी हो गई… ताकि किसीको समझ में न आए… कि मेरा ब्लाउज खुला है… अब जब देखा तो सामने से एक कपल चलता हुआ हमें क्रॉस कर गया… जिनकी कार हमारी कार से दो कार आगे ही पार्क थी… फिर वो दोनों कार में बैठे… और चले गए…
फिर मैंने बहुत कोशिश की… लेकिन मुझसे न ही ब्लाउज का हुक लगा… न ही डोरी बँधी…
अमीरा: प्लीज़ कालूजी… मेरे ब्लाउज का हुक लगा दीजिए…
कालू: ठीक है… लेकिन आपको हमारी एक बात माननी होगी…
अमीरा: (अब क्या पता कालूजी क्या करना चाहते हैं।) क्या??
कालू: हम आपका हुक लगा देंगे। बस आपको घर जाके हमें प्यार करने देना होगा…
अमीरा (शॉक्ड): क्या… ये आप क्या…
कालू: पहले हमारी पूरी बात तो सुनिए… हम आपको कहीं भी गलत जगह नहीं छुएँगे… न ही आपके कपड़े उतारेंगे बस आपकी साड़ी उतारेंगे… सिर्फ आपको चूमेंगे…
जैसे ही कालूजी ने चूमना कहा वो भी साड़ी उतारके वैसे ही मेरा दिल बहुत ज़ोरों से धड़का… और मेरी चूत में एक करंट सा लगा…
अमीरा: कालूजी आप उस दिन की तरह मेरे पीछे…
कालू: नहीं हम कुछ नहीं करेंगे… सिर्फ चूमेंगे… ये वादा करते हैं…
अमीरा: ठीक है… अब तो मेरा ब्लाउज…
कालू: हाँ अभी बाँधता हूँ…
फिर कालूजी ने मेरे ब्लाउज का हुक भी लगा दिया… और डोरी भी बाँध दी… और कार घर को निकल पड़ी… घर पहुँचके जैसे ही मैंने मेन गेट खोला…
कालू: मालकिन आप आकिल को उसके रूम में सुलाके किचन में आ जाना…
ये कहते हुए कालूजी किचन में चले गए… मैंने भी आकिल को उसके रूम में सुला दिया… और फिर अपने रूम का गेट खोलके देखा तो इकबाल बड़े चैन से सो रहे थे… ये खबर भी नहीं थी… कि आज रात उन्हीं के घर के किचन में… उनकी पाकीज़ा बेगम का चैन और जिस्म दोनों एक काला-कलूटा बूढ़ा नौकर जो दूसरे धर्म का था… लूटने वाला था…
फिर मैंने रूम का गेट लगा दिया… और सीढ़ियाँ उतरने लगी… जैसे-जैसे मैं सीढ़ी उतरती… उतनी ही मेरे दिल की धड़कने बढ़तीं… और जैसे ही मैं किचन के अंदर गई… वैसे ही कालूजी ने मेरी साड़ी का पल्लू पकड़ा… और ज़ोर से खींचा… जिसकी वजह से मैं गोल-गोल घूमी… और तब तक घूमती रही… जब तक पूरी साड़ी मेरे जिस्म से अलग नहीं हो गई…
साड़ी उतारने के बाद… कालूजी ने मुझे बाहों में भर लिया और मेरा लेफ्ट गाल चूमने लगे… जिससे मैं सिर्फ कसमसा के रह गई…
करीबन 5 मिनट तक कालूजी ने मेरा राइट गाल चूमा और चाटा… फिर वैसा ही मेरे लेफ्ट गाल को चूमा फिर चाटा… और मैं सिर्फ कसमसाती रही… फिर कालूजी मेरे राइट गाल को चाटते हुए उनकी जीभ नीचे को ले जाने लगे… और मेरे गले को चाटना शुरू कर दिया… मुझे किचन स्टैंड पर उल्टा झुकाके मेरा पूरा गला चाटने लगे… कभी लेफ्ट से राइट… तो कभी राइट से लेफ्ट… कभी ऊपर से नीचे… तो कभी नीचे से ऊपर… ऐसे कालूजी ने मेरा पूरा गला उनके थूक से गीला कर दिया…
फिर कालूजी चाटते हुए मेरे क्लीवेज पर आ गए… और क्लीवेज से ऊपर को चाटते हुए उनके होंठों को मेरे होंठों के पास ले आए…
और जैसे ही कालूजी उनके होंठों को मेरे होंठों के पास लाए… वैसे ही मैंने अपना चेहरा घुमा लिया…
कालू: चूमने दीजिए ना मालकिन…
अमीरा: नहीं कालूजी प्लीज़…
कालू: हम अपने वादे के मुताबिक ही सिर्फ आपको चूम रहे हैं… फिर क्यों नहीं…
अमीरा: प्लीज़ कालूजी… आपके मुँह से बहुत बुरी बदबू आ रही है…
कालू: हमारे लिए थोड़ी बदबू सह लीजिए ना मालकिन…
ये कहते हुए कालूजी ने मेरा चेहरा सीधा किया… और अपने होंठों को मेरे होंठों पर रख दिए… और मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया…
करीबन 5 मिनट तक मेरे होंठों को चूमा लेकिन मेरी तरफ से कोई रिस्पॉन्स न पाकर मेरे होंठों को छोड़ दिया… फिर कालूजी ने मुझे उठाके किचन स्टैंड पर बिठा दिया… और मेरे पेट को चूमना शुरू कर दिया… कभी मेरे पूरे पेट को चूमते तो कहीं चाटते… मेरा पेट चाटते हुए एकदम से कालूजी ने उनकी जीभ मेरे नेवल में घुसा दी… फिर मेरी नेवल चाटने लगे…
और तब तक कालूजी मेरा पेट और नेवल को चाटते रहे… जब तक मेरा पेट और नेवल उनकी थूक से गीला न हो गया… और अब मेरी हालत खराब होने लगी… मेरी चूत लगभग झड़ने को हो गई… लेकिन मैं झड़ना नहीं चाहती थी…
अमीरा: कालूजी प्लीज़… अब और नहीं…
कालू: बस मालकिन आपके होंठों को एक बार और चूम लें…
ये कहते हुए कालूजी ने दोबारा मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया… अब जैसे-जैसे कालूजी मेरे होंठों को चूमने लगे… वैसे-वैसे मेरी चूत भी पानी टपकाने लगी… जिसकी वजह से न चाहते हुए भी मैं कालूजी का साथ देने लगी… उनके होंठों को चूमते हुए उनकी बदबूदार साँसें अपने सीने में उतारने लगी…
ऐसे ही 2 मिनट गुजर गए लेकिन कालूजी ने मेरे होंठों को नहीं छोड़ा… बल्कि धीरे-धीरे कालूजी ने मेरे होंठों को रफली चूमना शुरू कर दिया… जो मेरे लिए बहुत था… और उनकी बदबूदार साँसें तो अलग ही थीं…
अमीरा: (ये किस करने का कौनसा तरीका है… इतना रफली… इकबाल ने तो कभी ऐसा नहीं किया… ऊपर से कालूजी के मुँह की बदबू… शराब, सिगरेट… और ब्रश भी करते हैं या नहीं… आ… हा ही जाने…)
ऐसे ही 5 मिनट हो गए… कालूजी मेरे होंठों को चूमते ही रहे… और अब मेरे लिए ये सहन करना नहीं हो पा रहा था… और अगले ही पल मुझे बहुत स्ट्रॉन्ग ऑर्गाज्म हुआ… मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया… और जैसे ही मेरी चूत ने पानी छोड़ा… वैसे ही मैं फर्श पर गिर पड़ी… और हाँफते हुए अपनी साँसों को कंट्रोल करने लगी…
साँसों को कंट्रोल करते हुए जब मेरी नज़र कालूजी के पैंट पर पड़ी जिसमें से उनके खड़े लंड का उभार साफ-साफ मेरी नज़रों के बिल्कुल सामने था… कि तभी कालूजी ने उनके लंड को पैंट के ऊपर से ही मसल दिया… जिसे देखके मेरी साँसें दोबारा फूलने लगीं… लेकिन मैंने खुद पे कंट्रोल किया… और जैसे-तैसे उठके किचन से बाहर आ गई… और सीढ़ियाँ चढ़ते हुए अपने रूम में चली गई…
