दीदी ने दिलवाई सहेली की चूत 3
Didi ki hardcore chudai ki sex story:- हाय दोस्तों, आपके लिए इस सेक्स स्टोरी का एक और कामुक पार्ट लेकर आई हूँ। तो आप सब कहानी पढ़ें और मुझे कमेन्ट करना न भूलें। अब आगे पढ़िए और मजे लीजिए। पिछला पार्ट नहीं पढ़ तो यहाँ पढे ==> दीदी ने दिलवाई सहेली की चूत 2
मैं दीदी के घर जाता रहता था। और मेरी और जीजा जी की भी बहुत जमती थी। कई बार हम दोनों साथ में ड्रिंक करते थे। मगर मैं बीयर पीता था। और जीजा जी दारू पीते थे। मेरे घर वाले ये बात नहीं जानते थे। मैं हमेशा ज्यादा बोतल लेकर जाता था। जब जीजा जी पीके आउट हो जाते थे। तब मैं और दीदी रात में बीयर पीते थे। मैं रात वहीं रुकता था। और सुबह आ जाता था। हर संडे हमारा दारू पार्टी का प्लान बनता था।
Didi ki hardcore chudai ki hindi sex story
मगर इस बार सब कुछ बदलने वाला था। मैं शाम के टाइम दीदी के घर गया। फिर मैं और जीजा जी बोतल लेने गए। दारू और बीयर लेकर हम दोनों घर आ गए। और ऊपर बने कमरे में सारा सामान रख दिया। दीदी ने आज मुर्गा बनाया था। हम दोनों 8:30 बजे पीने बैठ गए। मैं और जीजा जी बातें करते हुए पीने लगे। मैंने 2 बोतल बीयर खत्म कर दी। और जीजा जी ने काफी पेग दारू पी ली। जीजा जी बिल्कुल नशे में हो गए। मैं उन्हें नीचे ले आया। और दीदी ने उन्हें खाना दे दिया। मगर जीजा ने बस थोड़ा बहुत खाया। और वो सोने चले गए।
दीदी ने अपने बेटे को खाना खिलाके सुला दिया। और हम दोनों अब ऊपर बने कमरे में आ गए। वहाँ मैं और दीदी बीयर पीने लगे। दीदी सिर्फ एक नाइटी पहने हुए थी। दीदी ने कुछ ही देर में 2 बोतल बीयर पी ली। अब सिर्फ हमारे पास जीजा जी की बची हुई दारू पड़ी थी। दीदी ने मेरा और खुद का पेग बनाया। और हम दोनों हल्के-हल्के पीने लगे।
दीदी की नाइटी से मुझे उनके निप्पल दिख रहे थे। और मेरा लंड खड़ा हो गया था।
मैं: दीदी क्या जीजा जी को बिल्कुल नहीं पता है कि आप भी ड्रिंक करती हो?
दीदी: भाई ये सिर्फ मेरे टाइम पास बॉयफ्रेंड थे। मैं इनके साथ घूमने जाती थी। हमारे बीच चुदाई भी हुई थी। और ये उसे प्यार समझ बैठे। मगर कमाते अच्छा थे। तो मैंने भी मम्मी-पापा के लिए हाँ कर दी।
मैं: दीदी जीजा जी को तो पता ही नहीं कि कितनी जंगली बिल्ली से उनका पाला पड़ा है। अगर किसी दिन उन्हें पता चल जाए तो कहीं हार्ट अटैक न आ जाए।
दीदी: हाहाहा ऐसा कभी नहीं होगा। वैसे जंगली बिल्ली तो प्रिया भी है। मैंने देखा है तुम दोनों को चुदाई करते हुए। तू भी कम नहीं है। बिल्कुल साँड़ जैसा चढ़ जाता है प्रिया पर।
मैं: दीदी मैं जानता हूँ। आप हम दोनों को चुदाई करते हुए देख रही थीं। वैसे दीदी प्रिया दीदी इतनी अच्छी हैं। उनका पति उनकी चुदाई क्यों नहीं करता है?
दीदी: भाई शादीशुदा लाइफ शुरुआत में अच्छी होती है। मगर जब कुछ साल निकले सब ठंडा हो जाता है। और बच्चा होने के बाद बिल्कुल कम। प्रिया क्या तू अपने जीजा जी को देख ले। 2 हफ्ते से उन्होंने मुझे नहीं चोदा है।
मैं: सच में दीदी आपने 2 हफ्ते से चुदाई नहीं की है? शादी से पहले तो आप रोज सेक्स करती थीं।
दीदी: भाई शादी के बाद तेरे जीजा जी भी रोज चुदाई करते थे। मगर हल्के-हल्के सब कम हो गया। अब तो मुझे बैंगन और मूली से खुद की चूत को ठंडा करना पड़ता है।
मैं: तो दीदी आप अपने किसी पुराने बॉयफ्रेंड के साथ सेक्स कर लो।
दीदी: भाई मन तो मेरा भी होता है। मगर बाहर सेक्स करना आसान नहीं है। अगर मैं उसे घर भी बुलाऊँगी तो वो मोहल्ले वालों की नजर में आ जाएगा। तू मेरा भाई है इसलिए कोई शक नहीं करता है।
दीदी नशे की हालत में मुझे अपनी चुदाई की इच्छा बता रही थीं। और मैं समझ गया था कि दीदी की चूत को भी लंड चाहिए। इसलिए मैंने प्रिया दीदी की गाँड मारने वाली बात फिर कर दी।
मैं: दीदी आप मेरे लिए कुछ करो ना। ताकि प्रिया दीदी मुझे अपनी गाँड दे दे। मुझे उनकी गाँड बहुत मस्त लगती है। और उनकी गाँड कितनी बड़ी है।
दीदी: अच्छा प्रिया की गाँड बड़ी है? इसका मतलब तू मेरी भी गाँड देखता होगा। मेरी तो प्रिया से भी बड़ी है।
दीदी प्रिया की गाँड की बात से जल रही थीं। इसलिए वो अब मुझसे अपनी गाँड की तारीफ सुनना चाह रही थीं।
दीदी: सच बता भाई क्या तू मेरी भी गाँड देखता है? तुझे मेरी कसम है।
मैं: हाँ दीदी मैं आपकी गाँड भी देखता हूँ।
दीदी: तो तुझे मेरी गाँड पसंद है या प्रिया की?
मैं: दीदी आपकी गाँड के आगे तो प्रिया दीदी कुछ भी नहीं है।
मैंने अपना हाथ दीदी की जाँघ पर रख दिया। दीदी ने मुझे कुछ नहीं कहा।
दीदी: और तुझे क्या पसंद है?
आज दीदी पूरे मूड में लग रही थीं। और नशे में सेक्स की इच्छा और ज्यादा हो जाती है। मुझे यकीन हो गया था। आज मेरा काम बन जाएगा।
मैं: दीदी आपकी तो चुचियाँ भी प्रिया दीदी से बड़ी हैं। ये तो देखकर ऐसा लगता है कि ये मेरे हाथ में भी नहीं आएगी।
दीदी ने मेरा हाथ पकड़के अपनी चुचियों पर रख दिया। मैंने सोचा नहीं था कि दीदी ऐसा कर सकती हैं।
दीदी: तू खुद पकड़के ले। कि तेरे हाथ में आएगी या नहीं।
मेरे दोनों हाथ दीदी की चुचियों पर थे। दीदी नाइटी के अंदर बिल्कुल नंगी थीं। मैं उनकी चुचियाँ हल्के-हल्के दबाने लगा। दीदी की गरम साँसें तेज-तेज चल रही थीं। और मैं उनकी चुचियाँ दबाता रहा।
दीदी: भाई प्रिया तेरे लंड से डरती है। वो तुझे कभी अपनी गाँड नहीं मारने देंगी। उसने मुझसे खुद कहा था कि तू उसकी गाँड मारना चाहता है। मगर वो बहुत डरती है। तेरा लंड भी तो छोटा नहीं है।
दीदी ने लोअर के ऊपर से मेरा लंड पकड़ लिया। जो बिल्कुल खड़ा हो चुका था। और मेरा मुँह पकड़के मेरे होठों को चूसने लगीं। दीदी मेरा लंड मसलते हुए मुझे किस करने लगीं। मैं भी दीदी के होठों को चूस रहा था। मगर दीदी तो जैसे मेरे होठों को खा जाना चाहती थीं। उन्होंने लोअर नीचे कर दिया। और मेरे लंड मुँह में ले लिया। दीदी की चुसाई से पता चल रहा था कि वो चुदाई की कितनी बड़ी खिलाड़ी हैं। वो मेरा लंड पूरा अंदर तक ले रही थीं।
दीदी: भाई अगर तुझे प्रिया से ज्यादा मैं पसंद हूँ तो तूने मुझे बताया क्यों नहीं? मैं तो समझने लगी थी। मैं मोटी हो गई हूँ। इसलिए तू भी मुझे पसंद नहीं करता है।
मैं: आप मेरी बहन और दोस्त दोनों हो। मैं डरता था। कहीं मैंने कुछ किया तो आप मुझसे नाराज न हो जाओ। वरना मैं तो आपको शुरू से पसंद करता हूँ। और दीदी आप मोटी नहीं हो। बहुत सेक्सी हो।
दीदी: भाई मैं भी तुझे बहुत पसंद करती हूँ। जब भी मैं तुझे प्रिया के साथ देखती हूँ। मेरा मन करता है। उसे हटाके खुद तेरे इस लंड की सवारी करूँ।
मैंने दीदी की नाइटी उतार दी। और दीदी अंदर से बिल्कुल नंगी थीं। दीदी की बड़ी-बड़ी चुचियाँ 38 साइज की बाहर आ गईं। दीदी का निकला हुआ गोरा पेट और उनकी गहरी नाभि। मेरा लंड और भी टाइट कर रहा था। दीदी मेरे सामने खड़ी हो गईं। और मुझे गले लगाके मेरे होठों को चूसने लगीं। उन्होंने खुद मेरा हाथ पकड़ा और उसे अपनी गाँड पर रख दिया। दीदी की गाँड कम से कम 42 या 44 साइज की थी। मैं दीदी की गाँड मसलते हुए उनके होठों को चूस रहा था। दीदी अपनी जीभ मेरे मुँह के अंदर डाल रही थीं। और हम दोनों एक-दूसरे की जीभ चूस रहे थे।
दीदी ने मुझे दीवान पर लिटा दिया। और दीदी ने अपनी चूत मेरे मुँह पर लगाके बैठ गईं। दीदी की चूत पर छोटे-छोटे बाल थे। और वो गद्दे जैसे फूली हुई थी। दीदी अपनी चूत मेरे मुँह पर रगड़ रही थीं। और मैं अपनी जीभ निकाले उनकी चूत पर चाट रहा था। दीदी एक हाथ से मेरा लंड पकड़के मुठ मार रही थीं। कुछ देर चूत चाटने के बाद दीदी मेरे मुँह से उठ गईं। और उन्होंने मेरा लोअर उतार दिया। मेरा लंड झटके मार रहा था। मैंने कंडोम निकाला। और उसे लंड पर चढ़ाने लगा।
दीदी: भाई कंडोम रहने दे। मुझे कंडोम के साथ मजा नहीं आता है। तू अपना पानी बाहर निकाल देना।
दीदी दीवान के कोने पर अपनी टाँगें फैलाके लेट गईं। दीदी की गद्देदार चूत थोड़ी खुल गई। मैं अपना लंड दीदी की चूत के दाने पर रगड़ने लगा।
दीदी: भाई देर मत कर। जल्दी से डाल दे। बहुत टाइम से लंड का स्वाद नहीं मिला है मेरी चूत को।
मैंने अपना लंड दीदी की चूत में डाल दिया। दीदी ने एक जोर की साँस भरी और मैंने धक्के लगाना शुरू कर दिए। दीदी हल्के-हल्के आाह्ह उम्म म्म की आवाज निकाल रही थीं। आज जीजा जी के होते। उन्हीं के घर में दीदी मुझसे अपनी चूत को ठंडा करवा रही थीं। और वो नीचे नशे में सो रहे थे।
अभी कुछ ही देर हुई थी। मैं धक्के लगा ही रहा था। कि मुझे ऐसा लगा जैसे कुछ आवाज आ रही है। मगर मैं फिर भी चुदाई में लगा रहा। मगर तभी फिर से जोर से आवाज आई। ये आवाज किसी और की नहीं मेरे भांजे की थी। वो दीदी को बुला रहा था। मगर उनकी मम्मी तो अपने भाई के लंड से मजे ले रही थीं। भांजे की आवाज सुनते ही दीदी ने मेरा लंड निकाल दिया। और जल्दी से नाइटी पहन ली। मैंने भी अपना लोअर पहन लिया। हम दोनों जल्दी से नीचे आ गए।
मेरा भांजा अभी छोटा है। जो हमेशा दीदी के साथ सोता है। उन्हें पास न देखकर वो जाग गया था। दीदी उसे बेडरूम में ले गईं। और कुछ ही देर बाद वो सो गया। मैंने देखा जीजा जी भी गधे की तरह सो रहे हैं। और उनकी खर्राटे की आवाज जोर-जोर से आ रही थी। रात के 10:30 बज रहे थे। दीदी किचन में गईं। और खाना गर्म करने लगीं। मैं भी उनके पीछे गया। और उन्हें किचन में पकड़ लिया। दीदी और मैं किस करने लगे। फिर दीदी नीचे बैठ गईं। और मेरा लंड निकालके चूसने लगीं। उधर खाना गर्म हो रहा था। और दीदी मेरा लंड चूसके मुझे गर्म कर रही थीं। थोड़ी देर लंड चूसने के बाद दीदी ने खाना निकाल दिया। हम दोनों खाना खाने लगे।
खाना खाके मैं ऊपर वाले कमरे में चला गया। मैं दीवान पर लेटा हुआ था। तभी आधे घंटे बाद दीदी आ गईं। ऊपर आते ही उन्होंने अपनी नाइटी निकाल दी। दीदी पूरी नंगी हो गईं। मैं भी जल्दी से नंगा हो गया। मगर मुझे अभी भी डर लग रहा था। कहीं मैं दीदी की चुदाई कर रहा हूँ और जीजा जी न आ जाएँ।
मैं: दीदी क्या अभी ये करना ठीक रहेगा? जीजा जी नीचे सो रहे हैं। कहीं वो जाग न जाएँ।
दीदी: भाई आज तूने मेरी चूत की गर्मी बहुत बढ़ा दी है। जल्दी से इसे ठंडा कर दे वरना मैं मर जाऊँगी। और तेरे जीजा जी सुबह ही उठेंगे। मगर अब तू देर मत कर। देख मेरी चूत कितनी गीली है।
दीदी ने मेरा हाथ पकड़के अपनी चूत पर रख दिया। फिर दीदी की चूत गर्म होने के साथ-साथ बहुत गीली भी थी। दीदी दीवान पर टाँगें फैलाके लेट गईं। और मेरा लंड पकड़के जल्दी से चूत में डाल लिया। जोश में तो मैं भी बहुत था। मैं धक्के लगाने लगा। और दीदी भी नीचे से धक्के लगा रही थीं। मैं दीदी की बड़ी-बड़ी चुचियाँ दबा रहा था। और दीदी अपने मुँह पर हाथ रखकर अपनी आवाज रोक रही थीं। मगर फिर भी हल्की-हल्की आवाज निकल ही रही थी। मैं तेज-तेज धक्के लगा रहा था। और दीदी मेरे होठों को चूस रही थीं। हम दोनों के नंगे बदन चिपके हुए थे। पूरा कमरा हम दोनों की गर्मी से गर्म हो गया था। मेरे लंड पर दीदी की चूत का पानी साफ-साफ दिख रहा था।
कुछ देर बाद मैंने अपना लंड निकाल लिया। और दीदी ने उसे तुरंत मुँह में ले लिया। दीदी मेरा लंड चाट-चाटके साफ कर रही थीं। फिर दीदी मेरे सामने डॉगी स्टाइल में खड़ी हो गईं। दीदी की बड़ी मोटी गाँड मेरे सामने थी। दीदी ने एक हाथ से अपनी गाँड फैलाई। और मैंने अपना लंड डाल दिया। मेरे धक्के से थप-थप की आवाज हो रही थी। मगर आज तो दीदी को किसी की परवाह नहीं थी।
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