पहली बार ससुराल मे ससुरजी के साथ 1
Sasural me chudai ki sex story:- सुभा अपने पुणे अपार्टमेंट की खिड़की से बाहर देखती रही। शहर की चमकती रोशनियाँ दूर के तारों जैसी चमक रही थीं। 28 साल की उम्र में वो अपर क्लास एलिगेंस की मिसाल थी। गोरी स्किन, लंबे रेशम जैसे बाल पीछे तक झुकते हुए और वो कर्व्स जो जहाँ भी जाती लोगों की नजरें घुमा देती थीं। बैकलेस ब्लाउज में उसका बदन हर देखने वाले मर्द के लंड में सिहरन पैदा करता था। उसके डिजाइनर साड़ी उसके बदन से बिल्कुल चिपककर बैठते थे, उसकी भरी हुई छाती और पतली कमर को और भी उभारकर दिखाते थे।
Sasural me chudai ki hot hindi sex story
लेकिन शादी की खुशी के चेहरे के पीछे उसकी जिंदगी एक उलझी हुई जाल थी जिसमें अधूरे अरमानों का बोझ था।
सुभा ने दो साल पहले शक्तिल से शादी की थी। वो फैसला दिल टूटने और मजबूरी की वजह से लिया था।
शक्तिल उसका पुराना कॉलीग था एडवर्टाइजिंग फर्म में, विदर्भ के छोटे से गाँव से आया हुआ मेहनती, नेक दिल लेकिन बिस्तर पर बिल्कुल साधारण।
उनका सेक्स बिल्कुल मैकेनिकल था, जल्दी खत्म हो जाता था। बिल्कुल अलग उस तेज तूफान से जो उसने आदिल के साथ महसूस किया था।
आदिल—उसके नाम से आज भी उसकी पीठ पर सिहरन दौड़ जाती थी। वो भी कॉलीग था, चेहरा तराशा हुआ, आँखें गहरी और तीखी।
लेट नाइट प्रोजेक्ट्स के दौरान सुभा उसके प्यार में गिर पड़ी थी। उनका अफेयर बहुत इंटेंस था लेकिन जहरीला।
आदिल गुस्सा करता था, छोटी-छोटी बातों पर थप्पड़ मारता था, कंट्रोल करता था हर चीज पर। लेकिन सेक्स… वो बिजली की तरह था।
ऑफिस डेस्क पर, गाड़ी में, पब्लिक टॉयलेट में भी वो उसे जबरदस्ती ले लेता था। उसका मोटा नदी वाला लंड उसको पूरा फैला देता था, जोर-जोर से ठोकता था जब तक वो चीख न उठे मजे से।
वो जानता था कैसे डॉमिनेट करना है। हल्का गला दबाके गंदी बातें कान में बोलता था और उसे और माँगने पर मजबूर कर देता था।
सुभा को वो रॉ पावर, उसकी कोख तक मार करने वाली ताकत चाहिए थी, चाहे वो उसकी रूह को चोट पहुँचा रहा हो।
शक्तिल को अफेयर के बारे में पता था। उसने उसके बदन पर निशान देखे थे, अफवाहें सुनी थीं, लेकिन सुभा की खूबसूरती ने उसको पागल कर रखा था।
उसकी बादाम जैसी आँखें, भरपूर होंठ और एरिस्टोक्रेटिक अंदाज से चलना—सब कुछ उसको मदहोश कर देता था।
आदिल एक दिन जॉब के लिए विदेश चला गया सुभा को छोड़कर। वो टूटकर रह गई। तब शक्तिल ने मौका पकड़ा। उसने उसके आँसू पोंछे, शादी का प्रपोजल दिया, स्टेबिलिटी का वादा किया। सुभा के पास कोई और रास्ता नहीं था। समाज के डर से और चुदी हुई औरत कहलाने के डर से उसने हाँ कर दी। आखिर उसको ऐसा पति कहाँ मिलता जो उसका पास्ट जानकर भी सुभा से शादी के लिए तैयार हो जाए।
आदिल के जाने के एक महीने के अंदर ही सुभा से शक्तिल ने घर में बिना बताए सुभा से शादी कर ली। अपनी सपनों की रानी को बिस्तर में पहली रात पाकर शक्तिल बहुत खुश था। उसका तो जैसे मन माँगे मुराद मिल गया हो। सुभा को बिस्तर पर लाते ही उसे कपड़ों के बंधन से आजाद करते शक्तिल को ज्यादा समय नहीं लगा। सुभा पैंटी में थी, शक्तिल पूरे कपड़ों में। शक्तिल किसी आम की तरह सुभा के बूब्स को चूस रहा था। आदिल ने उसमें बहुत मेहनत की थी। सुभा के बूब्स पर आज तक आदिल के काटने के जख्म दिखाई दे रहे थे, लेकिन शक्तिल को इनसे कोई फर्क नहीं पड़ा। वो सुभा से पूछा भी नहीं उस बारे में। सुभा को भी इसकी परवाह नहीं थी क्योंकि उसे पता था शक्तिल सब कुछ जानता ही है।
सुभा के मन में भी नए लंड को लेकर बहुत जिज्ञासा थी। वो अपने हाव-भाव को कंट्रोल करके रखी थी। उसे शक्तिल के लंड देखने की इच्छा बहुत हो रही थी पर उसने शक्तिल को उसके मन का करने दिया। शक्तिल सेक्स में नया था, उसको एक्सपीरियंस भी नहीं था जबकि सुभा माहिर खिलाड़ी थी। वो अच्छे से अच्छे चुदक्कड़ को भी संभाल सकती थी। शक्तिल ने मन भरके आम चूसने के बाद सुभा की पैंटी नीचे सरकाई। एक फटी हुई चूत जिसके पंखुड़ियाँ बाहर निकल रहे थे और उसके जस्ट ऊपर टैटू आदिल के नाम का। शक्तिल का दिमाग चकरा गया। उससे गुस्सा आया लेकिन उसके कुछ बोलने के पहले ही सुभा ने रोनी सी शक्ल बनाकर उससे कहा—
सुभा: ये मेरी गलतियों की एक निशानी है। हम बाद में इसे मिटा देंगे।
शक्तिल सब कुछ जानता ही था और इस टैटू को लेकर अब बवाल खड़ा करके वो सुभा और अपना सुहागरात खराब नहीं करना चाहता था। इसलिए उसने कोई जवाब नहीं देते हुए सीधा सुभा की चूत को अपने मुँह में ले लिया। खूब देर तक आदिल लिखे चूत को चाटकर शक्तिल अब अपना कपड़ा उतारा। उसका तना हुआ लंड हालाँकि सुभा को लेटे होने के कारण नहीं दिखा पर अंदर जाते ही सुभा निराश हो गई। उसे लगा कि बिना खड़े लंड को शक्तिल ने डाल दिया है पर एक्चुअल में वो शक्तिल का फुल साइज में था। शक्तिल दो-चार धक्के में ही सुभा के ऊपर निढाल हो गया और सुभा ने भी बनावटी संतुष्टि दिखाते हुए उसे कडल करके सो गई।
शक्तिल शादी के बाद सुभा से खूब प्यार करता। आदिल के नाम पर भी कभी उसने सुभा को कुछ नहीं कहा। लेकिन बिस्तर पर शक्तिल के धीमे-धीमे धक्के और जल्दी खत्म होने से सुभा फ्रस्ट्रेड हो जाती थी। उसका बदन आदिल के वही ब्रूटल मजे माँगता रहता था।
जिंदगी ऐसे ही चलती रही जब तक शक्तिल ने गाँव जाने का प्लान नहीं बनाया।
शक्तिल: मेरे माँ-बाप आपसे सही तरीके से मिलना चाहते हैं।
उसने उम्मीद भरी आँखों से कहा।
सुभा ने मजबूरी में हाँ कहा। अपना शहरी वॉर्डरोब पैक किया। गाँव के लिए सफर लंबा था, धूल भरी सड़कें मुंबई की भीड़ से बिल्कुल अलग।
शक्तिल के घर में सिंपल झोपड़ी थी, छत पत्रा की, बेसिक चीजें। उसकी माँ लीला ने गरमा-गरमी से स्वागत किया लेकिन बाप रामाकांत ने उसको भूखी नजरों से देखा।
रामाकांत 50 के पार था, मोटा पेट वाला, हमेशा मुस्कुराता हुआ लेकिन आँखों में गंदगी।
वो सेक्स का नशेड़ी था। एक दिन भी बिना निकाले नहीं रह सकता था। गाँव के बाहर स्लम में हिजड़ों के गंदे ब्रोथल जाता था। वहाँ पसीने और सस्ते परफ्यूम की बदबू होती थी। वो ताश खेलता, पैसा हार जाता, उधार चढ़ा देता। उसका सबसे बड़ा उधार देने वाली थी चंदा—एक मशहूर हिजड़ा जो ब्रोथल को दबा के रखती थी।
चंदा और उसकी गैंग गाँव पर नजर रखती थी। खूबसूरत औरतों को देखती थी, उठा के ले जाती थी, जबरदस्ती चोदती थी फिर प्रोस्टिट्यूशन में डाल देती थी।
रामाकांत और उसकी बीवी ने सुभा का स्वागत अपने घर में किया। हालाँकि शक्तिल ने बिना बताए शादी की थी पर सुभा को देखके उनका गुस्सा एकदम शांत हो गया क्योंकि वो किसी भी हाल में सुभा जैसी बहू शक्तिल को नहीं दे सकते थे। सुभा उनके झोपड़े जैसे घर में मन पे पत्थर डालके रह रही थी। वो जल्द से जल्द यहाँ से वापस शहर जाना चाहती थी। जिसके लिए शक्तिल से कई बार बहस भी हो गई।
उनका घर छोटा था। केवल एक रूम जिसमें रामाकांत और उसकी वाइफ रहते थे। वो अभी सुभा और शक्तिल को दे दिया था और रामाकांत और उसकी वाइफ बाहर हॉल में सोते थे। बाथरूम भी एक ही था, वो भी घर के बाहर आँगन में था। सुभा को नहाने और वॉशरूम जाने में बहुत दिक्कत हो रही थी। शक्तिल और सुभा के झगड़े रोज-रोज बढ़ते जा रहे थे और रामाकांत और उसकी वाइफ ने उनके बीच के सारे कॉन्वर्सेशन सुनके समझ चुके थे कि बहू ज्यादा दिन यहाँ टिक नहीं सकती। रामाकांत मन ही मन चाहता था कि वो सुभा को कुछ दिन तक यहाँ रोके और उसके गोरे बदन को भोगे।
रामाकांत सुभा पर अपनी पूरी नजर बनाए रखा था। जब भी सुभा नहाकर वापस अपने कमरे में जाती रामाकांत एकटक उसके बदन को देखता। यहाँ तक कि सुभा से नजरें मिलने पर भी वो अपनी नजर नहीं हटाता था। सुभा को उससे चिढ़ हो गई थी। वो एक खेली-खाई हुई औरत थी। उसको मर्दों की नजर अच्छे से समझ आती थी। वो रामाकांत की गंदी नजरों को पहचान चुकी थी। शक्तिल को भी ये बात उसने बताई लेकिन शक्तिल—
शक्तिल: गाँव में तुम्हारी जैसी हूर पे सबकी निगाह होना सामान्य सी बात है।
बोलके टाल गया।
जैसे-तैसे एक हफ्ते बीत गए। सुभा से अब यहाँ रहना बरदाश्त से बाहर हो रहा था। हालाँकि वो अपनी सास और ससुर का पूरा सपोर्ट पाकर खुश थी। उसे घर का कुछ भी काम उसकी सास नहीं करने देती थी। रामाकांत आज जुए में कुछ पैसे जीतकर बाजार से मछली लाया। सुभा की सास ने उसको मछली साफ करना और बनाना सिखाया। रात में खाते समय रामाकांत को पता चला कि सुभा ने मछली पकाई है तो वो भी खुश हो गया। शक्तिल के सामने उसकी वाइफ की तारीफ करने लगा। साथ ही बोला—
रामाकांत: किसी जनम में पुण्य का काम किया है तू तभी इतनी सुंदर और अच्छी बीवी मिली है तुझे।
सुभा अपनी तारीफ सुनके खुश हुई, और अब धीरे-धीरे अपनी सास के साथ वो घर के कामों में हाथ बटाना चालू किया। रामाकांत भी अपनी बहू को अपने घर के माहौल में ढलते देखके खुश था। वो जानता था कि ये परी जल्दी ही यहाँ से उड़ जाएगी। उसके पहले ही वो उसके साथ संभोग कर लेना चाहता था।
लीला रामाकांत की नजरों को खूब पहचानती थी और साथ में रामाकांत के चंदा के कोठे में रोज जाना भी उसको पता था। जब उसकी शादी हुई तब लीला को रामाकांत रोज चोदता था, दिन में कई बार। लीला भी मजे से चुदवाती पर बच्चे होने के बाद और उम्र बढ़ने से लीला का सेक्स में रुझान कम हो गया। इसलिए कई बार रामाकांत झगड़ा करता या जबरदस्ती लीला को देता। जब रामाकांत चंदा के कोठे में जाने लगा तब लीला पर ध्यान देना उसने कम कर दिया। लीला भी इससे खुश हुई और रामाकांत को वहाँ जाने से रोका नहीं।
लीला समझ चुकी थी कि रामाकांत को सुभा भा गई है और किसी दिन मौका पाके पकड़ सकता है। लीला नहीं चाहती थी कि ऐसा हो। वो शक्तिल को दुखी नहीं करना चाहती थी।
एक रात जब सब खाना खाके सोने गए तब लीला और रामाकांत को शक्तिल और सुभा के सेक्स की आवाज ने जगा दिया। सुभा के कराहने की आवाज, फिर 2-4 मिनट तक शक्तिल के झटकों से पायल की आवाज और फिर शांति। रामाकांत का लंड तनके उसके पजामे पे तंबू बना दिया। लीला ने उसके पजामे में हाथ डालके लंड को हिलाने लग गई।
लीला: अपनी बहू की आवाज सुनके तन गया।
उसने तंज कसते हुए कहा।
रामाकांत ने अपना पजामा उतार दिया और अपना लंड आजाद कर दिया।
लीला: क्या करते हो, अगर बहू पेशाब करने बाहर निकली तो?
उसने रामाकांत पर झिड़कते हुए कहा।
रामाकांत: वो भी तो अभी यही कर रही थी ना, तुमको उससे कैसी शरम?
रामाकांत ने बोला और लीला के हाथों को पकड़कर अपने लंड पे आगे-पीछे करना लगा। लीला रामाकांत के लंड को पूरी ताकत से ऊपर-नीचे कर रही थी जिससे बीच-बीच में रामाकांत की आहें निकल जा रही थीं।
अंदर शक्तिल निढाल होकर सो गया लेकिन सुभा अनसैटिस्फाइड बिस्तर पर पड़ी जाग रही थी। तभी उसको बाहर की आवाज सुनाई दी और सुभा चुपचाप दरवाजे के पास आकर अपने सास-ससुर की हरकतों को सुनने लगी। दरवाजा पतला था और दूरी बहुत कम। इसलिए सुभा को सब कुछ साफ-साफ सुनाई दे रहा था।
लीला: हिजड़ों की गाँड ले-लेकर अपना लंड मोटा कर डाला है तू।
उसने लंड हिलाते हुए रामाकांत से कहा।
रामाकांत: नहीं लीला, ये पहले जैसा ही है। बहुत दिन बाद तूने हाथ में लिया है इसलिए ऐसा बोल रही।
आहें भरते हुए रामाकांत बोला।
लीला: बहू की आवाज सुनके तना है ना ये मादरजात, इसलिए आज फुँकार मार रहा।
लीला ने रामाकांत को छेड़ते हुए कहा। बहू का नाम इसलिए लिया कि जल्दी रामाकांत अपना माल निकाल दे।
अपनी सास के मुँह से अपना नाम सुनके सुभा चौंक गई।
सुभा (मन में): साली अपने पति को ही मेरे नाम से उकसा रही है।
उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया।
रामाकांत: अपना बेटा किस्मत वाला है जो इतनी चिकनी माल मिली है उसे। हम खोजते तो तेरे जैसी ही किसी काली-कलूटी को उसके लिए।
रामाकांत बोला।
लीला: तुमको मैंने कम मजे दिए हैं क्या भड़वे जो मुझे काली-कलूटी बोल रहा है?
लीला गुस्साते हुए बोली।
रामाकांत: अरे! तू तो मेरी जान है, वरना मेरी भूख तेरे अलावा कौन मिटा सकता है। लेकिन दिखने में सुभा बहुत सुंदर है ये तो मानेगी तू भी?
रामाकांत आहें भरते हुए बोला।
लीला: हाँ है तो, लेकिन आज अपना बेटा बहुत कम समय में ही झड़ गया। लगता है बहू का पानी नहीं निकाला उसने।
लीला लंड को तेजी से हिलाने लगी।
रामाकांत: अपने बाप पे नहीं गया है वो। मैं तो बहू का तीन बार पानी निकाल दूँ।
रामाकांत गुर्राते हुए कहा।
इन दोनों की बातें सुनके अंदर सुभा का बुरा हाल था। वो दरवाजे पे नंगी खड़ी थी और उसकी चूत का पानी बहकर जाँघों में आना चालू कर दिया।
लीला: अच्छा, हिजड़ों को चोद-चोदकर घमंड आ गया है तुझे। चढ़ मेरे ऊपर आज देखती हूँ कि कितना ताकत बचा है तेरे बुड्ढे शरीर में। मेरा पानी निकाल दिया तो मैं खुद बहू को पता के दूँगी तेरे नीचे।
लीला ने लंड छोड़कर अपनी साड़ी ऊपर तक उठा दी और रामाकांत के बगल में लेट गई।
रामाकांत अपनी मर्दानगी को दिखाने के लिए लीला के ऊपर चढ़ गया और एक झटके में ही अपना मूसल जैसा लंड लीला के भोसड़े में डाल दिया। लीला की चीख निकल गई। आज सालों बाद उसने लंड अंदर लिया था। उसकी चूत सूखी थी पर लंड जाते ही उसने पानी छोड़के अपने पति का स्वागत किया। रामाकांत पूरे जोश में था। सुभा की आहें उसके कानों में संगीत की तरह गूँज रही थीं। लीला की भोसड़ी की पकड़ हिजड़ों के गाँड से ढीली थी इसलिए उसको जल्दी झड़ने का कोई कारण ही नहीं था। रामाकांत अपनी बीवी को जानता था। अगर वो चाहेगी तो सुभा को आसानी से चोद सकता है। इसलिए हर हाल में वो उसका पानी आज निकालके ही रहेगा।
इधर सुभा की हालत इन बुड्ढों की बातें सुनके खराब हो गई थी। वो अपने बीएफ आदिल से भी इतना फ्री नहीं थी जितना ये मियाँ-बीवी एक-दूसरे से थे। वो अपना भोसड़ी अपने हाथ में लेकर खड़े-खड़े ही रगड़ने लगी।
रामाकांत ने धक्कों की रेल चला दी। वो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था। आज उसको अपनी बुड्ढी बीवी को खुश करना था ताकि अपनी बहू का जवान गोश्त उसको मिल सके। लगभग 20 मिनट्स के धक्कों के बाद लीला के भोसड़े ने दम तोड़ा और अकड़कर वो रामाकांत के लंड पर झड़ गई।
सुभा भी अपनी पुसी को निचोड़कर उसका पानी अपने ससुर के नाम से निकाल दिया। उसे अजीब सी सिहरन हो रही थी और रोमांच भी कि उसका ससुर आज उसके नाम से सास की जमकर चुदाई कर दी। और साथ वो सोच रही थी कि शक्तिल इतना कमजोर लेकिन इसका बाप तो आदिल के टक्कर का निकला। सुभा भले आगे की न सोच रही हो लेकिन उसके पुसी ने रामाकांत के लिए हाँ कर दी थी।
लीला: मादरजात! अब भी ताकत बचा है तेरे में। कैसा हब्शी है रे तू, लंड तेरा अकड़ा हुआ है अब भी।
लीला हाँफते हुए बोली।
रामाकांत: जल्दी से हिलाके अब पानी निकाल इसका।
रामाकांत ने लीला के बाल पकड़ते हुए उसका मुँह अपने लंड से सटा दिया।
लीला जोर-जोर से लंड हिलाने लगी।
लीला: झड़ जा मादरजात, अपनी चिकनी बहू के गोरे-गोरे गाँड को सींच दे अपने पानी से।
लीला ने अपना मुँह लंड के पास सटाते हुए कहा। बहू के गाँड को सोचते ही रामाकांत के लंड ने पिचकारी की तरह पानी निकाला। लीला पूरा वीर्य अपने मुँह में लेकर पी गई।
रामाकांत: अपना वादा भूल मत जाना।
रामाकांत ने लीला को याद दिलाते हुए कहा।
लीला: सो जा अब चुपचाप।
लीला ने झिड़कते हुए अपने पति को दूर हटाया।
बहुत दिनों के बाद संभोग से लीला आज बहुत संतुष्ट थी। अब वो सोचने लगी कि बहू को कैसे तैयार किया जाए। वो इस बात से अनजान थी कि अब उसे बहू को तैयार करने की जरूरत ही नहीं थी। वो तैयार हो चुकी थी।
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