लॉकडाउन और तबस्सुम 3


Ghar ke naukar ke bade lund se chudai
:- पिछले भाग में आपने पढ़ा कि तबस्सुम अपने घर लौटी थी। शंकर उसके कमरे में नंगा लेटा हुआ था। उसका काला बड़ा लंड सोया हुआ भी भयंकर लग रहा था। ब्रा-पैंटी और मुर्गे की हड्डियाँ बिखरी पड़ी थीं। तबस्सुम डर गई थी।

अब आगे…

Part 2==> लॉकडाउन और तबस्सुम – 2

Ghar ke naukar ke bade lund se chudai kahani

तबस्सुम ने देखा कि शंकर पूरा नंगा लेटा हुआ है। उसका लंड सोया हुआ था, पर सोते में भी बड़ा भयंकर काला-कलूटा था। टोपी पर चमड़ी चढ़ी हुई थी, जिससे उसका टोपा छुपा हुआ था। दो बड़े काले अंडों के बीच लटका हुआ था।

झाँटें बहुत ही बड़ी-काली थीं। उसका पेट भी थोड़ा बाहर निकला हुआ था। लेटे होने की वजह से कम दिख रहा था। सीने पर बहुत बाल थे, पेट पर भी बाल थे।

एक साइड से दारू की बोतल पड़ी हुई थी। थोड़ी दूर ब्रा-पैंटी पड़ी हुई थी। जब ब्रा की तरफ देखा जो ब्लैक कलर की थी, उसके कप पर सफेद गाढ़ा-सा बहुत सारा वीर्य था जो थोड़ा-बहुत सूख चुका था।

कमरे में ही मुर्गे की हड्डी पड़ी हुई थी। उसका आलीशान रूम एक तवायफ का कोठा नजर आ रहा था।

पर सबसे ज्यादा तबस्सुम की नजर उसके काले लंड पर ही थी, जो बहुत अजीब-सा तबस्सुम को देख रहा था। तबस्सुम को उसके लंड को ही देखकर दिल मचलने लगा कि कैसे उसका लंड अपनी चूत में डलवाया था।

तभी डोर बेल बजी तो तबस्सुम को लगा कि नादिया आ गई है। पर उसे अंदर तक कैसे ला सकती है? डोर बेल बजती रही तो दरवाजा बंद करके वह दरवाजे की तरफ डरते-काँपते हुए गई।

दरवाजा खोला तो चार फीट का एक आदमी नजर आया। जो कि तबस्सुम के यहाँ बाहर के काम से आता-जाता रहता था। पर बहुत कम ही। वह अल्ताफ की दूसरी फैक्ट्री में पैकिंग का काम करता था। रहता पास की एक झुग्गी में ही था जो तबस्सुम के घर से दस मिनट का रास्ता था।

आदमी: नमस्ते मेमसाहिब, मुझे सेठ ने भेजा है। कह रहे थे कि कोई काम है तो पूछ लो। क्योंकि आपका भी कॉल नहीं लग रहा था। और वह शंकर भाई का भी मोबाइल बंद था।

तब तबस्सुम को ध्यान में आता है कि रात को बातें करते-करते वह वहीं सो गई थी और मोबाइल की बैटरी कम होने की वजह से शायद उसका मोबाइल बंद हो गया था।

तब उस आदमी की तरफ देखा जो मिडगेट्स जैसा था, ठिगना था। पैर और हाथ मुड़े हुए थे। पर उसके चेहरे पर मुस्कान थी।

तबस्सुम ने उसे अंदर तो नहीं बुलाया, पर वहीं खड़ा रखकर अंदर से पर्स से पैसे लेकर आई और उसे देते हुए कहा कि दो मिल्क पाउडर के पैकेट और बेबी फूड्स ले आना। नंबर भी दिया।

तबस्सुम उसे जानती ही थी। पर कभी नाम नहीं जाना। उसे सब छोटू ही कहते थे।

तब उसे सब बताकर कहा कि मेडिकल खुला है तो तुम जा पाओगे? कहीं सिक्योरिटी ऑफिसर परेशान तो नहीं करेगी?

तब उसने बड़ी मासूमियत से तबस्सुम को देखकर मुस्कुराया और कहा कि आप मेरी चिंता छोड़ दें और जो कुछ मँगाना है मँगा लें।

तबस्सुम ने अपना सिर वील से ही कवर करा हुआ था। जब घर में आई तो बुरखा उतार दिया था। पैसे देने के लिए थोड़ी झुकी तो उसके बूब्स का हिस्सा बहुत ही हल्का-सा दिखा।

उस गठ्ठे आदमी ने उस हिस्से को गौर से देखा और बड़े बूब्स जो कुर्ती में बड़े कसे हुए गोल दिख रहे थे।

उस आदमी को देखा कि उसकी नजर सीने पर है तो तबस्सुम घबरा जाती है। और अपने को सीधा खड़ा करके उसे पैसे देते हुए कहती है—

तबस्सुम: मुझे आपका नाम नहीं पता। आप पहले भी यहाँ आए हैं।

आदमी: मेरा नाम गणेश है। लोग मुझे छोटू कहते हैं। कोई जोकर कहता है, कोई कुछ। पर मैं बुरा नहीं मानता। अच्छा मेमसाहिब, मुझे आने में एक घंटा लग जाएगा। कुछ काम भी है। मुझे भी अपना कुछ राशन-पानी का इंतजाम करना होगा।

यह कहकर फिर से उसके कसे हुए कुर्ती में दूध देखकर मुस्कुराता अपने टेढ़े कदमों से चला जाता है।

तब जब दरवाजा बंद करके तबस्सुम अंदर आती है तो उसके पैर जाम हो जाते हैं।

अंगड़ाई लेते हुए कमरे से शंकर निकलता है।

शंकर: अरे मेमसाहिब, आप आ गईं… सॉरी, फैक्ट्री बंद थी तो सोचा कि आपके यहाँ आ जाऊँ। पर बाहर से ताला देखा तो पीछे के रास्ते से आ गया। अच्छा मैं नहाने जाता हूँ। कुछ कपड़े साहब के हों तो दे देना। मैं अपने कपड़े नहीं ला पाया। और अब कल सुबह ही वॉचमैन से कहकर फैक्ट्री अगर खुलती है तो वहीं से कपड़े ले आऊँगा।

वैसे तो मैं आपके कमरे में नहा लेता, पर मेरी वजह से आपका कमरे का बाथरूम कहीं गंदा न हो जाए इसलिए बाहर वाले में नहाने जा रहा हूँ। हाँ, नहाने के बाद कपड़े निकाल देना और हो सके तो एक कप चाय बना देना। सिर बहुत दुख रहा है।

यह कहकर वह बाहर वाले बाथरूम में चला गया।

यहाँ अब कहीं न कहीं तबस्सुम समझ रही थी कि यह कोई पागल ही है। वह अब जल्दी से रूम में भागी तो सामान जैसा था वैसा पड़ा था।

अब बेचारी खुद ही झाड़ू लेकर साफ करने लगी। हड्डियाँ उसने झाड़ू से डस्टबिन में डालीं और शराब की बोतल भी।

उसकी आँखों में फिर से आँसू थे। उसे लगने लगा कि कुछ करना चाहिए वरना यह इंसान कुछ बड़ा नुकसान पहुँचा सकता था।

इसी खयाल में खोकर जब उसके हाथ में ब्रा आई तो उसकी उँगलियों में लसलसापन-सा लगा। जब देखा तो उसकी उँगलियों में वीर्य लगा हुआ था। उसने ब्रा को दूर फेंक दिया और जल्दबाजी में उसने वह उँगली में लगा वीर्य अपनी कुर्ती से पोंछ लिया।

उसे अहसास हुआ कि यह फिर क्या गंदापन कर लिया। पर उसे ब्रा उठाना ही था तो वह ब्रा दो उँगलियों से पकड़कर डस्टबिन में ही डाल दी और अपने हाथ साफ करने बाथरूम में पहुँची।

तो जैसे ही उसने टैप चलाया तो वह कुछ सेकंड रुक गई। वह उँगलियाँ देखने लगी और सोचने लगी कि यह इतना चिपचिपा कैसे होता है। यह सोचकर वह उँगलियाँ अपने नाक के पास लेकर सूँघने लगी।

वासना की यह खुशबू सूँघकर तब्बी को नशा-सा होने लगा। एक औरत ऐसी खुशबू मर्द से अच्छे से जानती थी।

पर फिर उसको झटका लगा कि यह क्या हो रहा है मेरे साथ। फिर से वह अपने ऊपर गुस्सा होने लगी। अपना हाथ धोकर वह जल्दी से बाहर निकली और अलमारी खोलकर एक कुर्ता-पजामा निकाला।

और उसे लेकर डरती हुई फिर से हॉल में आई।

तब यह सोच रही थी कि वह उसका हुक्म कैसे मान रही है। उसे क्यों घर से धक्के देकर बाहर क्यों नहीं निकाल रही है।

यह सोच ही रही थी कि बाहर से सिर्फ एक तौलिया लपेटे, जो बाथरूम में थी, उसमें वह ऊपर से नंगा काला बदन दिखाते हुए तबस्सुम के पास आया।

और तबस्सुम की आँखों में फिर से खौफ तारी हुआ। पर वह अपनी नजर झुकाते हुए उसके काले चौड़े सीने को भी देख रही थी। और इस वक्त ऐसे खड़ी थी कि वह मालिक है और यह गुलाम।

उसकी नजर फिर से तौलिये में लिपटे लंड पर गई, जो तौलिये में ही अपनी मौजूदगी का अहसास दिला रहा था।

वह पास आया और अपने कपड़े उतने के बजाय कहने लगा—

शंकर: बीवी जी, जरा मेरे कपड़े तो दे दो। कब तक ऐसा खड़ा रहूँगा। हाँ, चाय जरूर बना देना।

उसकी बातों का क्या असर हुआ कि तबस्सुम ने उसे कपड़े खुद उठाकर दिए और उसके पैर किचन की तरफ चले गए।

उसे फ्रीज में दूध देखा तो बस बहुत ही थोड़ा सा था। जिससे काली चाय ही बनती। पर वह सोच रही थी कि गणेश एक घंटे बाद आएगा तो वह उसी से बना देगी।

तब यह सोच ही रही थी कि एक मजबूत पकड़ वाले हाथ से शंकर ने उसके हिप्स को दबा दिया और वह चीखकर उछली। जो थोड़ा दूध भी था वह भी गिर गया।

शंकर: अरे आप घबरा बहुत जल्दी जाती हैं। मैं कुछ कर नहीं रहा था। मेरा हाथ गलती से लग गया। अच्छा तुमने तो दूध गिरा दिया। अब कहाँ से आएगा?

तबस्सुम (डरते हुए): वह… वह एक आदमी है। उसका नाम गणेश है। शायद आप भी जानते होंगे उसे।

शंकर: हाँ, वह नाटा है। मैं जानता हूँ। हम कभी-कभी रोज पीने बैठ जाते हैं। अब आपने तो समझ ही लिया मैं पीने वाली तबीयत का हूँ। और रोज मुझे रात को दारू चाहिए। इसलिए छत पर टंकी के पास एक हफ्ते का अपना कोटा रखकर आया हूँ।

पर छोड़ो, मुझे चाय बनाकर अभी के अभी दो। मेरा सिर फट रहा है। मैं खुद भी चाय बना लेता पर दूध आपने गिरा दिया। और घर का सामान भी आप जो भी काम हो वह उसी गणेश से मँगा लेना। मैं बाहर जाऊँगा तो कहीं फँस गया तो प्रॉब्लम होगी। पर फिलहाल चाय बनाकर दो मुझे। जब तक बेबी से खेलता हूँ और चाय पाँच मिनट में आ जानी चाहिए। वह भी बिल्कुल ताजा दूध की।

तबस्सुम (डरते-सहमे हुए): मैं कहाँ से बनाऊँ? दूध गिर गया।

शंकर: अरे मैंने दूध गिराया है क्या? जरा से हल्का हाथ किया लगा कि आप उछल गईं। मेरी गलती है क्या? देखो मैं अपने बेबी के पास जा रहा हूँ। समझी बीवी जी? चाय पाँच मिनट में आनी चाहिए। वह भी ताजा दूध की।

अपनी नजर तबस्सुम के सीने की ओर इशारा करता हुआ बोला और यह भी कहा—

शंकर: देखो मैं गाय का दूध बहुत निकाला है और दूध निकालने का तजुर्बा भी बहुत है। यह तो आपको पता ही होगा। मुझे बस चाय चाहिए। पाँच मिनट में। छह मिनट नहीं होना चाहिए।

उसकी बातों में अब धमकी-सी नजर आने लगी। पर उसने खुद अपने हाथों से कुछ करा नहीं।

उसका पाँच मिनट का इशारा समझकर तबस्सुम अपने बच्चे के खातिर डर गई।

उसके बाहर जाने के बाद अपनी कुर्ती को बिना कुछ सोचे ऊपर उठाया और अपने दोनों ब्रा को ऊपर करके अपने निप्पल दबाए।

जिसमें से मिल्क निकलकर धार की शक्ल में थोड़ा बाहर आया। वह जल्दी-जल्दी एक-एक निप्पल दबाकर मिल्क एक बर्तन में करके करीब सौ एमएल निकाला जो उसके बच्चे की खुराक के बराबर थे।

वह उस दूध की चाय बनाने लगी। पर पत्ती तो थी, चीनी कम थी। फिर भी कैसे भी चाय बना ली।

उसे यह सब करते हुए बड़ा दुख हो रहा था। पर कहीं से अपने दूध की चाय बनाने के खयाल से ही पेट में गुदगुदी हो रही थी। शायद यह पहली बार होगा कि किसी औरत ने किसी गैर मर्द के लिए अपने दूध की चाय बनाई। यह सोचकर उसके पेट में गुदगुदी होने लगी।

वह चाय बनाकर बाहर आती है और सर झुकाकर चाय देती है।

आराम से सोफे पर बैठकर शंकर चाय पीता है और कहता है—

शंकर: वाह् बीवी जी वाह्! ऐसी चाय अपनी जिंदगी में कभी नहीं पी। वाह्!

अब तो रोज इसी दूध की चाय पियूँगा।

यह सुनकर अचानक से कुछ और कहना चाहती थी तबस्सुम, कुछ और ही मुँह से निकल गया।

तबस्सुम: मैं ऐसी चाय रोज नहीं बना सकती। बहुत तकलीफ होती है।

पर जब उसे अहसास हुआ कि उसने क्या कह दिया तो भागकर किचन में आ गई।

तबस्सुम (मन ही मन): हाय तोबा तोबा! उफ मेरे खुदा, यह कैसे आजमाइश ले रहा है। यह कुछ भी मेरे साथ कर सकता है। पता नहीं कब यह बदल जाए। ओह मेरा खुदा मेरी हिफाजत कर। मैं इसके सामने क्यों कमजोर पड़ती जा रही हूँ। कहना कुछ चाहती हूँ और मुँह से कुछ और निकलता है। और उसके वीर्य को मैंने सूँघा भी… छि! यह क्या गफलत तारी हो रही है मुझे। उफ्फ क्या करूँ मैं।

पर अभी तक कुछ नहीं हुआ। वह चाय पीकर अपने रूम जो ऊपर बना था वहाँ चला गया।

और करीब एक घंटे बाद फिर से डोर बेल बजी। तो उसकी जान में जान आई। सोचा गणेश ही आया होगा। और सोचने लगी कि गणेश को यहाँ रोक ले जिससे वह उसकी हरकत से महफूज रहे।

गणेश सामने मुस्कुराता हुआ खड़ा था। पर उसकी नजर चेहरे पर कम थी और बूब्स पर ज्यादा थी। यह बात इसलिए तबस्सुम ने इग्नोर कर दी कि उसका कद ही तब्बी के सीने तक ही था। बल्कि सर सीने के नीचे ही था। अगर वह तब्बी को बाहों में ले तो ऐसा लगेगा जैसे उसका सर पेट पर होगा और हाथ तबस्सुम की चौड़ी भरी कर्वदार गाँड पर।

तबस्सुम ने उसे फिर एक डर की वजह से अंदर नहीं बुलाया। बाकी बाहर ही खड़ा रहने दिया। न पानी के लिए भी पूछा।

अंदर से सामान बच्चे का रखकर बाहर आई और एक पर्चा भी लिखकर लाती है। जी कुछ सामान की लिस्ट थी। तो पैसे देकर सामान लेने को कहती है।

इस पर गणेश चूची की तरफ ही देखकर कहता है कि सामान कल ही आ पाएगा।

तो वह कहती है कि कोई बात नहीं। सुबह आठ बजे ले आना। और जो पैसे बचें तुम सब रख लेना। काम सब बंद पड़ा है तो तुम्हारे काम आएंगे।

गणेश उसकी बात सुनकर पैसे लेकर एक बार चूची को घूरता हुआ चला जाता है।

तीन बजे जब फिर से कुछ खाने के लिए जो होता है वह बनाती है। पर कुछ ज्यादा बनाती है। मतलब शंकर का भी खाने का इंतजाम करने लगती है।

शंकर से डर तो लग ही रहा था। पर अभी तक उसने अपनी तरफ से कुछ करा भी नहीं था। और ऊपर से भी नहीं आया था।

इसलिए फिर भी खाना तो बनाती ही है। और एक्स्ट्रा इसलिए भी बनाती है अगर यह शंकर फिर से भूखा रह जाए तो अब डायरेक्ट उसका दूध न पी ले और उसके बच्चे को मिल्क पाउडर पीना पड़े।

अब यहाँ से आगे क्या होता है। शंकर का यह रूप अलग था, दारू पीने के बाद अलग था।

अब वह नादिया के यहाँ भी नहीं रात को आज जा सकती थी। क्योंकि नादिया ने कहा कि बाहर उसके मेहमान फँस गए हैं तो आज रात वह उनको अपने यहाँ लाएगी।

असल में नादिया की कोई औलाद नहीं थी। तो वह किसी बाबा के चक्कर में फँस गई थी जो पीछे एक मंदिर में रहता था। वह उसे बस अपने झांसे में लेकर दुआ-ताबीज कर रहा था।

उसने ही आज का कोई मुहूर्त निकाला और उसे आज रात उसके घर पर आने को कहा। और एक माला जाप करना था। उस बाबा की काफी परसिद्धि थी और नादिया को कुछ औरतों ने बताया कि बाबा के पास कोई जड़ी-बूटी है जिसे हफ्ते में तीन बार खाने से बच्चा उसके पति के वीर्य से बन जाता है। पर वह जड़ी-बूटी किसी-किसी पर असर भी नहीं होती थी।

यह बात सुनकर कई बार वह बाबा से मिली थी अपनी किसी सहेली के साथ। आज मौका भी था तो उस बाबा को नादिया ने रात को बारह बजे का टाइम देकर बुला लिया और अपने घर के पीछे का दरवाजा भी खोल दिया। वैसे भी लॉकडाउन से पूरा शहर ही सुनसान था। सबको अपनी फिकर लगी हुई थी।

और यहाँ आज रात को कहीं यह दारू पीकर कोई हरकत न करे यह सोचकर तबस्सुम की जान निकली जा रही थी। अब उसने सब कुछ खुदा भरोसे छोड़ दिया। पर वह क्यों उसकी औकात देखकर बाहर का रास्ता नहीं देख पा रही थी। या किसी को अपनी मदद के लिए क्यों नहीं बुला पा रही थी। कहीं उसके लंड का असर तो नहीं हुआ था तबस्सुम को, या उसके अंदर काफी दिनों से कुछ खाली था।

वहाँ होटल में अब रात की तैयारी हो रही थी तो दोनों ने एक औरत का इंतजाम कर ही लिया। वैसे दोनों आते तो यहाँ चुदाई करके जाते। उनके क्या पता एक बच्चे के चक्कर में किसी से चुदने की तैयारी कर रही है और दूसरी डरी-सहमी एक वक्त का इंतजार कर रही है।

अब क्या होता है यह नहीं पता कि कैसे जबरदस्ती ब्लैकमेल करके शंकर उसकी अस्मत लूटेगा या प्यार के साथ उसका डर अपने से निकालकर चुदाई करेगा। चुदाई तो आज होनी ही थी चाहे दोनों दोस्तों के साथ एक औरत होटल में।

और तंत्रिक के साथ नादिया की और शंकर के साथ तबस्सुम की। पर कैसे—प्यार से, इमोशन से या डरा-सहमा के।

अब रात को ही पता चलेगा। तब तक कैसा लगा यहाँ तक बताना भाई लोग।

पा यह 21 दिन के हिसाब से होगा। और लास्ट 2 दिन में कौन क्या होता है यह पता चल ही जाएगा।
और वह गणेश बौने के साथ कुछ होगा या बस वह एक कैरेक्टर भर ही है। या कोई और आना है इस लॉकडाउन में।

आगे क्या होगा पढ़ें अगले पार्ट मे

Next part ==> लॉकडाउन और तबस्सुम 4

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