मेरी सेक्सी माँ और किरायेदार अंकल 1
Sexy maa ki kirayedar se chudai:- मेरा नाम राजू है, 19 साल का लड़का, अपने पापा राकेश के घर में रहता हूँ। पापा अक्सर काम के सिलसिले में बाहर रहते हैं, इसलिए घर में सिर्फ मै और मेरी माँ प्रिया ही ज्यादातर मौजूद रहते हैं। प्रिया 37 साल की बहुत ही खूबसूरत औरत है—उसके बड़े-छोटे कर्व्स, गहरी क्लीवेज और टाइट ब्लाउज में उभरते बूब्स किसी को भी दीवाना बना सकते हैं। घर के ऊपर वाले फ्लोर पर मुकेश अंकल रहते हैं, जो 36 साल के किरायेदार हैं। उनकी बीवी मायके गई हुई थी।
रात के करीब 10 बजे प्रिया ने मुकेश के लिए खाना ऊपर ले जाने का फैसला किया। जब वह उनके कमरे के पास पहुँची, तो देखा कि दरवाजा थोड़ा सा खुला था। प्रिया ने अंदर झाँका तो उनकी आँखें फट गईं। मुकेश अपनी पैंट नीचे करके बैठकर अपने मोटे, लंबे लंड को हाथ से सहला रहे थे। उनका लंड इतना बड़ा और मोटा था कि प्रिया को देखकर साँस रुक गई। वह कुछ पल तक चुपचाप खड़ी देखती रही, फिर धीरे से दरवाजे को खटखटाया।
Sexy maa ki kirayedar se chudai ki kahani
मुकेश का चेहरा रंग बदल गया। वह जल्दी से अपने लंड को छुपाने की कोशिश करने लगे, लेकिन समझ गए कि प्रिया ने सब देख लिया है।
मुकेश: अरे भाभी जी… आप कब आईं? मुझे तो पता ही नहीं चला!
प्रिया मुस्कुराते हुए अंदर आईं और बोलीं,
प्रिया: आप अपने काम में इतने बिजी थे, आपको कैसे पता चलता? लगता है आपको अपनी बीवी की बहुत याद आ रही थी।
मुकेश शर्माते हुए बोला,
मुकेश: हाँ भाभी जी… याद तो बहुत आती है। रोज रात को उनके साथ करता हूँ, अब आदत हो गई है। जब तक मेरा निकल न जाए, तब तक बेचैन रहता हूँ। सॉरी… दरवाजा बंद करना भूल गया था।
प्रिया ने हाथ में रखा थाली आगे बढ़ाया और कहा,
प्रिया: कोई बात नहीं। ये लीजिए, आपके लिए खाना लाई हूँ। और कुछ चाहिए तो बता देना।
मुकेश ने प्रिया को गहरी नजर से देखा और धीरे से बोला,
मुकेश: भाभी जी… आप बहुत खूबसूरत हैं। भाई साहब को आपके साथ हाथ से करने की जरूरत ही नहीं पड़ती होगी।
प्रिया का चेहरा लाल हो गया। वह बोलीं,
प्रिया: ये आप कैसी बातें कर रहे हैं?
मुकेश ने आगे बढ़कर कहा,
मुकेश: भाभी जी, अगर आप बुरा न मानें तो एक बात बोलूँ?
प्रिया: हाँ हाँ, बोलिए।
मुकेश: आप मेरी मदद करेंगी? मेरा लंड बहुत दर्द कर रहा है। रोज अपनी पत्नी के साथ सेक्स करता हूँ, अब आदत पड़ गई है। जब तक मेरा निकल न जाए, तब तक मैं बिल्कुल बेचैन रहता हूँ।
प्रिया: आप कहना क्या चाहते हैं? मैं समझी नहीं।
मुकेश ने धीरे से कहा,
मुकेश: बस एक बार… आप अपने कोमल हाथों से मेरा लंड हिला दें। जल्दी ही शांत हो जाएगा। प्लीज भाभी जी… सिर्फ हाथ का स्पर्श चाहिए।
प्रिया पहले तो गुस्से से बोलीं,
प्रिया: आप पागल तो नहीं हो गए? मैं शादीशुदा औरत हूँ! आप मुझे समझ क्या रहे हैं?
मुकेश ने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते हुए कहा,
मुकेश: मैं आपके साथ सेक्स करने को नहीं बोल रहा हूँ भाभी जी। बस आपके हाथ का एहसास चाहिए। एक बार मेरा साथ दे दीजिए… प्लीज।
प्रिया कुछ देर सोचती रहीं। मुकेश और भी ज्यादा गिड़गिड़ाने लगे। आखिरकार प्रिया ने साँस छोड़ते हुए कहा,
प्रिया: ठीक है… बस एक बार।
मुकेश ने तुरंत अपनी पैंट और अंडरवियर नीचे करके अपना मोटा, लंबा लंड बाहर निकाल लिया। प्रिया की आँखें उसके लंड पर अटक गईं। वह धीरे-धीरे उसके पास गईं और उसके लंड को बड़ी ध्यान से देखने लगीं—उसका रंग गहरा था, नसों से भरा हुआ, और सुपाड़ा इतना बड़ा था कि प्रिया को देखकर मुँह में पानी आ गया।
मुकेश ने धीरे से पूछा,
मुकेश: कैसा लगा भाभी जी मेरा लंड?
प्रिया मुस्कुराते हुए बोलीं,
प्रिया: आपका तो बहुत बड़ा है…
मुकेश ने अपना लंड प्रिया के चेहरे के सामने कर दिया और कहा,
मुकेश: भाभी जी इसे पकड़ लीजिए न… किसका इंतजार कर रही हैं?
प्रिया ने नीचे की तरफ देखते हुए कहा,
प्रिया: मेरा बेटा नीचे सो रहा है…
मुकेश: अरे वह सो रहा है भाभी जी, वह ऊपर थोड़ी आएगा। आप पकड़ लीजिए… आपको मजा आएगा।
प्रिया ने आँखें नीचे करते हुए अपना हाथ आगे बढ़ाया और मुकेश के गरम, मोटे लंड को अपने हाथों में पकड़ लिया। उसके हाथ का स्पर्श पाते ही मुकेश की साँस रुक गई। प्रिया धीरे-धीरे उसके लंड को ऊपर-नीचे हिलाने लगीं। मुकेश की आँखें बंद हो गईं और मुँह से धीमी सी सिसकारी निकलने लगी।
प्रिया: आपका लंड इतना गरम है…
मुकेश: भाभी जी आपके हाथ बहुत कोमल हैं… आपकी उँगलियाँ मेरे लंड को इतना अच्छे से पकड़ रही हैं…
प्रिया धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाने लगीं। मुकेश का लंड उसके हाथों में और भी सख्त होता जा रहा था। प्रिया कभी उसके लंड के सुपाड़े को अंगूठे से रगड़तीं, कभी पूरी मुट्ठी से दबाकर हिलातीं। मुकेश की साँसों में गहराई आ गई।
मुकेश: भाभी जी… आप बहुत अच्छे से हिला रही हैं… थोड़ा और जोर से… हाँ बिल्कुल ऐसे…
प्रिया का चेहरा लाल हो चुका था। वह धीरे से बोलीं,
प्रिया: आपका लंड इतना बड़ा है कि मेरा हाथ भी नहीं भर रहा…
मुकेश ने अपना लंड प्रिया के हाथों में और आगे कर दिया। प्रिया अब दोनों हाथों से उसके लंड को पकड़कर जोर-जोर से हिलाने लगीं। मुकेश की कमर हिलने लगी और वह धीमी आवाज में मोन करने लगे।
मुकेश: भाभी जी… आपकी उँगलियाँ इतनी नरम हैं… मुझे लग रहा है कि अभी निकल जाएगा…
प्रिया ने स्पीड और बढ़ा दी। मुकेश का लंड उसके हाथों में फड़फड़ा रहा था। आखिरकार मुकेश की कमर अकड़ गई और उसने जोर से सिसकारी ली। उसके लंड से गरम-गरम कम की मोटी-मोटी बूँदें निकलकर प्रिया के हाथों पर गिरने लगीं। प्रिया ने हाथ नहीं हटाया और पूरा कम निकलने तक हिलाती रहीं।
मुकेश धीरे-धीरे शांत हुआ। प्रिया ने अपने हाथ से उसका कम साफ किया और मुस्कुराते हुए कहा,
प्रिया: अब ठीक हो गया न?
मुकेश ने धीरे से कहा,
मुकेश: भाभी जी… आपने मेरी जान बचा ली। कल फिर आएंगी न?
प्रिया ने आँखें झुकाते हुए कहा,
प्रिया: देखेंगे…
नीचे राजू अपने कमरे में सो रहा था, बिल्कुल अनजान कि उसकी हॉट माँ अभी-अभी ऊपर मुकेश के लंड को अपने हाथों से हिला चुकी थीं।
रात के करीब २ बजे प्रिया अपने कमरे में लेटी हुई थीं। नीचे राजू अपने कमरे में गहरी नींद में था। प्रिया का फोन वाइब्रेट किया। वह उठकर देखा तो मुकेश का मैसेज था।
मुकेश: भाभी जी… आपकी याद आ रही है।
प्रिया: तो मैं क्या करूँ?
मुकेश: अगर आप कहें तो मैं आपके पास आ जाऊँ।
प्रिया: नहीं, कोई जरूरत नहीं है।
मुकेश: मेरा लंड फिर से हार्ड हो चुका है।
प्रिया: तो खुद ही शांत कर लीजिए।
मुकेश: आपकी मदद चाहिए। प्लीज एक बार अपने कमरे में आने दीजिए न।
प्रिया: आप पागल हो गए हैं क्या? मेरा बेटा नीचे सो रहा है।
मुकेश: वह तो अपने कमरे में सो रहा है न। मैं आपके कमरे में आकर अंदर से दरवाजा बंद कर दूँगा।
प्रिया: अगर वह जाग गया तो बड़ी प्रॉब्लम हो जाएगी।
मुकेश: कुछ नहीं होगा। अंदर दरवाजा लॉक रहेगा तो कुछ नहीं होगा। वैसे भी वह सो रहा है, सुबह ही उठेगा।
मुकेश के बार-बार जिद करने पर प्रिया ने फाइनली हाँ कर दी।
प्रिया: ठीक है… आओ।
मुकेश तुरंत नीचे आया। प्रिया ने दरवाजा खोला। मुकेश अंदर आते ही प्रिया ने कहा,
प्रिया: अरे दरवाजा तो बंद कर दीजिए।
मुकेश ने दरवाजा अंदर से लॉक कर दिया और प्रिया के बगल में लेट गया।
मुकेश: थैंक यू भाभी जी।
मुकेश ने धीरे से प्रिया को देखा और बोला,
मुकेश: आपको भाई साहब की याद आ रही है न?
प्रिया: नहीं, ऐसा नहीं है। बस ऐसे ही नींद नहीं आ रही थी।
मुकेश ने अपनी पैंट नीचे की और अपना मोटा लंड बाहर निकाल लिया।
मुकेश: भाभी जी… आपके हाथ में जाने को बेताब है।
प्रिया ने तुरंत उसका लंड पकड़ लिया और हिलाने लगीं। मुकेश की साँस तेज हो गई।
मुकेश: भाभी जी एक बात बोलूँ… आप बुरा तो नहीं मानोगी?
प्रिया: क्या बात है बोलिए।
मुकेश: क्या मैं आपके चुचियों को पकड़ सकता हूँ?
प्रिया ने आँख दिखाते हुए कहा,
प्रिया: आपका दिमाग खराब है क्या? मैं किसी की पत्नी हूँ।
मुकेश ने हाथ जोड़कर कहा,
मुकेश: मैं जानता हूँ लेकिन मुझे मेरी पत्नी की बहुत याद आ रही है। एक बार अपने चुचियों के साथ खेल लेने दीजिए न।
प्रिया पहले मना करती रहीं लेकिन मुकेश के बार-बार जिद करने पर वह मान गईं।
प्रिया: अच्छा ठीक है… लेकिन थोड़ी देर बस।
मुकेश खुश होते हुए प्रिया के कपड़ों के ऊपर से ही उनकी बड़ी-बड़ी चुचियों को दबाने लगे। प्रिया की साँस धीरे-धीरे तेज होने लगी। मुकेश ने धीरे से प्रिया के ब्लाउज के अंदर हाथ डाल दिया और उनकी नंगी, गरम चुचियाँ बाहर निकाल लीं।
प्रिया: मुकेश… मत कीजिए।
लेकिन मुकेश ने उनकी एक चूची को मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगे। प्रिया की कमर हिलने लगी।
प्रिया: भाई साहब… बस कीजिए अब। जाइए यहाँ से।
मुकेश ने मुँह हटाकर कहा,
मुकेश: अरे भाभी जी अभी मेरा लंड शांत कहाँ हुआ है।
प्रिया मुकेश के लंड को लगातार जोर-जोर से हिलाती रहीं। मुकेश प्रिया की दोनों चुचियों को मुँह में लेकर चूस रहे थे। प्रिया की साँसें तेज हो रही थीं। उनके हाथ मुकेश के लंड पर तेज होते जा रहे थे।
मुकेश: भाभी जी आपके हाथ इतने नरम हैं… और आपकी चुचियाँ इतनी बड़ी और नरम हैं… मैं इनको चूसके ही मर जाऊँ।
प्रिया: बस… थोड़ा और… जल्दी शांत हो जाइए।
मुकेश प्रिया की चुचियों को चूसते हुए उनके निप्पल्स को जीभ से रगड़ रहे थे। प्रिया की आँखें बंद हो गई थीं। उनका हाथ मुकेश के लंड पर और तेज हो गया।
मुकेश: भाभी जी… मैं अब निकलने वाला हूँ।
प्रिया ने और जोर से हिलाया। मुकेश की कमर अकड़ गई और उनका गरम कम प्रिया के हाथों पर निकल पड़ा। प्रिया ने हाथ नहीं हटाया और पूरा कम निकलने तक हिलाती रहीं।
मुकेश धीरे-धीरे शांत हुआ। प्रिया ने धीरे से कहा,
प्रिया: अब जाइए… वरना सुबह हो जाएगी।
मुकेश ने दरवाजा खोला और धीरे से ऊपर चला गया। प्रिया अकेली अपने कमरे में लेटी हुई थीं, उनके हाथ अभी भी मुकेश के कम से गीले थे।
रात के करीब २ बजे वाली मुलाकात के बाद अगले दिन सुबह ११ बजे राजू कॉलेज के लिए निकल गया। घर में अब सिर्फ प्रिया और मुकेश ही थे। मुकेश ने ऊपर से धीरे से नीचे आने का फैसला किया। वह किचन की तरफ बढ़ा जहाँ प्रिया अपनी साड़ी को ठीक करते हुए सुबह का काम कर रही थीं। उनकी पीठ मुकेश की तरफ थी। मुकेश तुरंत उनके पीछे जाकर उनकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया।
प्रिया: अरे भाई साहब… आप ये क्या कर रहे हैं?
मुकेश ने उनकी चिकनी गोरी कमर पर अपना हाथ फेरते हुए कहा,
मुकेश: अपनी प्यारी भाभी जी को प्यार कर रहा हूँ। आप मेरी इतनी मदद करती हैं उसके लिए थैंक यू भाभी जी।
अब मुकेश का हाथ धीरे-धीरे प्रिया की कमर से ऊपर की तरफ बढ़ा और उनकी बड़ी चुचियों को कपड़े के ऊपर से ही दबाने लगा। उनका हार्ड और मोटा लंड प्रिया की गाँड से सट गया था। प्रिया को वह साफ महसूस हो रहा था।
प्रिया: आज आप ऑफिस नहीं गए क्या?
मुकेश: नहीं भाभी जी… आज थोड़ा लेट से जाना है। पहले आपको थोड़ा टाइम देना जरूरी था।
मुकेश ने अब ओपनली प्रिया की चुचियों को जोर से दबाना शुरू कर दिया। प्रिया की साँस तेज हो गई।
प्रिया: आआह्ह्ह भाई साहब… ये आप क्या कर रहे हैं? मैं किचन में काम कर रही हूँ। यहाँ ये सब नहीं करते।
मुकेश: तो चलिए न बेडरूम में चलते हैं।
प्रिया: अरे मुझे अभी काम है… आप बाद में आइएगा।
मुकेश: बाद में मौका नहीं मिलेगा भाभी जी। अभी हम दोनों घर में अकेले हैं। खुलके मजे ले सकते हैं।
मुकेश ने प्रिया को अपनी तरफ घुमा दिया और उनके होठों पर अपने होठ रख दिए। पहले प्रिया ने थोड़ा मना किया लेकिन मुकेश ने उनके नीचे वाले होठ को अपने मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगे। उनका एक हाथ प्रिया की गाँड पर चला गया और जोर से दबाने लगे।
प्रिया: हम्म्म भाई साहब… ये आप क्या कर रहे हैं? मैं आपकी बीवी नहीं हूँ। ये सब सिर्फ बीवी के साथ किया जाता है।
मुकेश: मेरी भोली भाभी जी… आजकल ऐसा कुछ नहीं है। आपके पति इतने दिन तक बाहर रहते हैं और पक्का उनको भी शांत करने के लिए कोई न कोई होगा। मेरी बीवी का भी कोई न कोई साथी होगा। आजकल ये आम बात है। हर औरत को संतुष्टि चाहिए जो सिर्फ पति नहीं दे सकता।
प्रिया: लेकिन ऐसा होना ठीक नहीं है।
मुकेश: आप मेरी बात को समझिए और मेरे साथ मजे कीजिए। मैं वादा करता हूँ अगर आपको मेरे साथ मजा नहीं आया तो मैं आपके पास कभी नहीं आऊँगा।
मुकेश ने अपनी पैंट की जिप खोली और अपना मोटा लंड बाहर निकाल लिया।
मुकेश: देखिए भाभी जी… ये कितना हार्ड हो चुका है। इसे पकड़िए और इसके साथ मजे लीजिए।
प्रिया ने तुरंत मुकेश का गरम लंड अपने हाथ में पकड़ लिया और धीरे-धीरे हिलाने लगीं। मुकेश ने उनके होठों पर फिर से किस की और प्रिया ने भी अब जवाब देना शुरू कर दिया। मुकेश प्रिया की गाँड को जोर-जोर से दबाए जा रहे थे।
मुकेश ने प्रिया की साड़ी को नीचे से उठाना शुरू किया।
प्रिया: ये क्या कर रहे हैं आप?
मुकेश: भाभी जी आपको मजे देने की कोशिश कर रहा हूँ। प्लीज एक बार करने दीजिए न।
प्रिया मुस्कुराते हुए बोलीं,
प्रिया: अच्छा ठीक है… लेकिन ऊपर से ही करिएगा।
मुकेश खुश हो गया। उसने प्रिया की साड़ी ऊपर उठाई और उनकी पैंटी के ऊपर से ही उनकी चूत को सहलाने लगा। मुकेश ने तुरंत नोटिस किया कि प्रिया की पैंटी उनके चूत के रस से पूरी तरह गीली हो चुकी थी।
मुकेश: भाभी जी… आपको मजा तो आ रहा है न? देखिए आपकी चूत जोश से कितनी गीली हो चुकी है।
प्रिया शर्माते हुए बोलीं,
प्रिया: अरे भाई साहब… आपका इतना तगड़ा लंड मेरे हाथ में इतने देर से है तो किसी की भी पैंटी गीली हो जाएगी।
मुकेश ने अब प्रिया की पैंटी में हाथ डाल दिया और उनकी गीली गरम चूत पर अपनी उँगली फेरने लगा।
प्रिया: अरे नहीं भाई साहब… मैंने मना किया था सिर्फ ऊपर से ही कीजिए।
मुकेश: अरे भाभी जी… आप कितनी जवान हैं। और जवानी का मजा खुलके लीजिए न। अपने मन को दबाइए मत।
मुकेश ने प्रिया की पैंटी को नीचे करना शुरू किया। प्रिया ने रोकने की कोशिश की लेकिन उनके अंदर का नशा इतना बढ़ चुका था कि वह रोक न पाईं।
प्रिया: अरे भाई साहब… आआह्ह्ह नाहीई…
मुकेश: भाभी जी अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा। आपकी चूत की सुगंध मुझे बेताब कर रही है।
प्रिया: भाई साहब… मेरे अंदर की काम वासना को आप जगा रहे हैं जो सालों से दबी हुई थी।
मुकेश ने प्रिया की गीली चूत पर अपना हाथ लगाया और जोर-जोर से रगड़ने लगा।
मुकेश: भाभी जी आपकी चूत कितनी गरम है… हम्म।
प्रिया: आज पहली बार किसी ने मेरी चूत को हाथ लगाया है मेरे पति के अलावा। ये आपका कैसा जादू कर दिया है कि मैं आपको मना भी नहीं पाई। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मेरी चूत को ऐसे कोई टच करेगा… आआह्ह्ह स्स्स्ह्ह।
मुकेश ने अब प्रिया की चूत में दो उँगलियाँ डाल दीं और अंदर-बाहर करने लगा। प्रिया की आँखें जोश से बंद होने लगीं। वह पूरी तरह से कामुक हो गई थीं। मुकेश ने उनकी चूत को अपनी उँगलियों से जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद प्रिया की चूत से पानी निकलने लगा और मुकेश का हाथ उसके रस से गीला हो गया। मुकेश ने अपना हाथ मुँह में ले लिया और उसका रस चाटने लगा।
प्रिया उन्हें देखकर मुस्कुराईं और उन्होंने मुकेश का लंड और जोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया। मुकेश का गाढ़ा कम निकलने लगा।
प्रिया: आपकी मलाई बहुत गाढ़ी निकलती है… हम्म्म।
मुकेश: हाँ भाभी जी… मेरी बीवी भी यही कहती है। वह तो मेरी मलाई को चाट जाती है। क्या आपने अपने पति की मलाई कभी चाटी है?
प्रिया: नहीं… मैंने ऐसा नहीं किया।
मुकेश: आज आपको मजा आया कि नहीं भाभी जी?
प्रिया मुस्कुराते हुए बोलीं,
प्रिया: हाँ… आज काफी दिनों बाद इतना मजा आया। वरना मैं तो ये सब भूल ही गई थी।
दोनों धीरे-धीरे शांत हुए। प्रिया ने अपनी पैंटी ठीक की और मुकेश ने अपना लंड अंदर किया। मुकेश ने प्रिया को एक और किस दी और धीरे से ऊपर अपने फ्लोर पर चला गया। प्रिया किचन में अकेली रह गईं, उनकी चूत अभी भी गीली थी और मन में नए जोश का एहसास था।
रात के करीब १२ बज रहे थे। राजू अपने कमरे में गहरी नींद में सो चुका था, उसे पता भी नहीं था कि घर के ऊपर वाले हिस्से में क्या होने वाला है। मुकेश, जो आज ऑफिस देर से गया था, अभी-अभी घर लौटा था। थका हुआ होने के बावजूद, उसके दिमाग में सिर्फ एक ही चीज चल रही थी—प्रिया की वह गीली गरम चूत और उनका वह कामुक अंदाज जो उसने दोपहर में देखा था।
प्रिया ने, जो अब मुकेश की आदत बन चुकी थीं, उनके लिए खाना तैयार किया और ट्रे लेकर ऊपर उनके कमरे की तरफ बढ़ीं। जैसे ही प्रिया ने कमरे में कदम रखा, मुकेश की नजरें उनकी खूबसूरत काया पर टिक गईं।
मुकेश: अरे भाभी जी, मैं नीचे आ जाता… आप क्यों परेशान हुईं इतनी रात को ऊपर आकर?
प्रिया ने एक हल्की मुस्कान के साथ ट्रे टेबल पर रखी और जाने के लिए मुड़ीं।
प्रिया: अरे कोई बात नहीं, आप बस खाना खा लीजिए। मैं चलती हूँ, मुझे भी सोना है।
लेकिन मुकेश ने उन्हें जाने नहीं दिया। जैसे ही प्रिया मुड़ने लगीं, मुकेश ने तेजी से आगे बढ़कर उन्हें पीछे से अपनी मजबूत बाँहों में जकड़ लिया। उसने अपने हाथ प्रिया की पतली कमर में डाले और उनके नरम शरीर को अपने से चिपका लिया। मुकेश ने अपना चेहरा प्रिया की गर्दन के पास ले जाकर वहाँ गहरे और गरम किस करने लगे।
प्रिया की साँस फूलने लगी और उन्होंने थोड़ा झटकने की कोशिश की।
प्रिया: अरे… पागल हो गए हैं क्या? बेटा अभी जाग रहा होगा… अगर वह उठ गया तो क्या होगा?
मुकेश ने उनकी गर्दन पर एक और जोर का चूसकर निशान बनाया और धीरे से बोला,
मुकेश: आप बस यहीं रुकिए भाभी जी… मैं अभी देखकर आता हूँ।
मुकेश तुरंत नीचे राजू के कमरे में गया। उसने देखा कि राजू गहरी नींद में खर्राटे ले रहा था। यह देखकर मुकेश के चेहरे पर एक शैतानी मुस्कान आई। वह तेजी से वापस ऊपर अपने कमरे में आया और प्रिया को देखा, जो अभी भी वहाँ खड़ी उनका इंतजार कर रही थीं।
मुकेश: भाभी जी… वह गहरी नींद में सो रहा है। अब कोई हमें डिस्टर्ब नहीं करेगा। अब आप आइए मेरी बाँहों में।
मुकेश ने बिना वक्त गवाए प्रिया को अपनी बाँहों में भर लिया और उनके होठों को अपने होठों से जोरदार तरीके से टकराया। वह प्रिया के होठों को इतनी शिद्दत से चूसने लगे जैसे कोई प्यासा इंसान पानी पीता है। प्रिया की हिम्मत जवाब दे रही थी और वह मुकेश के इस जूनून में बहने लगीं।
मुकेश का हाथ अब प्रिया के ब्लाउज की तरफ बढ़ा। उसने धीरे-धीरे ब्लाउज के बटन खोलने शुरू किए और उनकी भरी-भरी चुचियों को ब्रा के ऊपर से ही जोर-जोर से दबाने लगा। प्रिया के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं।
प्रिया: आआह्ह्ह… हम्म… भाई साहब…
मुकेश ने पीछे से ब्रा का हुक खोला और एक झटके में ब्रा को निकालकर बिस्तर पर फेंक दिया। प्रिया की बड़ी और गोरी चुचियाँ अब मुकेश के सामने नंगी थीं, जो जोश से उभरी हुई थीं। इस बार प्रिया ने उन्हें रोका नहीं, बल्कि उनके गले में अपनी बाँहें डाल दीं।
मुकेश ने प्रिया को उठाकर बेड पर लिटा दिया। उसने प्रिया की दोनों चुचियों को अपने मुँह में लेने लगे और उनके सख्त निप्पल्स को जोर-जोर से चूसने लगा। साथ ही साथ, उसका एक हाथ प्रिया की साड़ी को धीरे-धीरे ऊपर की तरफ खिसकाने लगा।
प्रिया: आआह्ह्ह्ह… भाई साहब… क्या कर रहे हैं… बेटा… बेटा जाग सकता है…
मुकेश ने उनके निप्पल से मुँह हटाया और उनकी आँखों में देखते हुए बोला,
मुकेश: अरे भाभी जी, मैंने अभी देखकर आया हूँ, वह गहरी नींद में सो रहा है। आज रात सिर्फ मैं हूँ और आप हैं। बस मजे कीजिए।
मुकेश ने एक ही झटके में साड़ी को ऊपर तक खिसका दिया। जैसे ही साड़ी ऊपर गई, मुकेश की आँखें फटी की फटी रह गईं। प्रिया ने आज पैंटी नहीं पहनी थी। उनकी नंगी, गोरी और गुलाबी चूत एकदम साफ दिख रही थी। मुकेश ने जैसे ही अपना हाथ उनकी चूत पर रखा, उसने महसूस किया कि वह पहले से ही गीली और चिपचिपी हो चुकी थी।
मुकेश: वाह भाभी जी… आपने तो आज पैंटी भी नहीं पहनी। आप कितनी बेसब्र हैं मेरे लिए।
मुकेश अब धीरे-धीरे नीचे की तरफ सरका और प्रिया की टाँगों के बीच में जगह बनाई।
प्रिया: ये… ये आप क्या कर रहे हैं?
मुकेश: भाभी जी… मैं आपकी इस प्यारी और गीली चूत को चूसना चाहता हूँ। मुझे इसका स्वाद चाहिए।
प्रिया ने थोड़ा शर्माते हुए और घबराते हुए कहा,
प्रिया: लेकिन भाई साहब… ये सही नहीं है। बस कीजिए अब… मैं जा रही हूँ।
प्रिया ने उठने की कोशिश की, लेकिन मुकेश ने उनकी टाँगों को पकड़कर रखा और गिड़गिड़ाते हुए बोला,
मुकेश: भाभी जी, प्लीज… मैं वादा करता हूँ कि मैं आपकी चूत में अपना लंड नहीं डालूँगा जब तक आप खुद नहीं बोलेंगी। लेकिन प्लीज, एक बार मुझे अपनी चूत का स्वाद चखने दीजिए न। मैं पागल हो रहा हूँ आपके लिए।
प्रिया ने मुकेश के चेहरे पर वह तड़प और जूनून देखा। उनके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान आई और वह वापस बेड पर लेट गईं, अपनी टाँगों को थोड़ा और फैलाया। मुकेश के लिए यह एक “ग्रीन सिग्नल” था।
मुकेश ने बिना एक सेकंड वेस्ट किए अपना मुँह प्रिया की गीली चूत की तरफ ले गया। उसने अपनी लंबी जीभ निकाली और प्रिया की चूत की दरारों को नीचे से ऊपर तक चाटना शुरू किया।
प्रिया: आआह्ह्ह्ह… ओह्ह्ह… भाई साहब… स्स्स्ह्ह…
प्रिया के मुँह से जोर-जोर से सिसकारियाँ निकलने लगीं। जब मुकेश की जीभ उनके क्लिटोरिस (चूत की नोक) पर लगने लगी, तो प्रिया ने अपनी कमर ऊपर उठाई और उनके बालों को कसकर पकड़ लिया। मुकेश ने अपनी जीभ को चूत के अंदर तक घुसाया और उसे जोर-जोर से चाटने लगा। प्रिया पूरी तरह से कामुक हो चुकी थीं और उनकी चूत से रस की धार बहने लगी, जिसे मुकेश बड़े मजे से चाट रहा था।
मुकेश अब पूरी तरह से प्रिया की गीली चूत का मजा ले रहा था। उसने अपनी जीभ से उनके क्लिटोरिस को इतना चाटना शुरू किया कि प्रिया की साँसें तेज हो गईं और वह बेड पर तड़पने लगीं। लेकिन मुकेश की भूख अभी खत्म नहीं हुई थी। उसने अपनी जीभ को थोड़ा पीछे किया और अपनी दो उँगलियाँ प्रिया की गरम और चिपचिपी चूत के अंदर घुसा दीं।
प्रिया: आआह्ह्ह्ह! भाई साहब… उँगलियाँ… ओह्ह्ह गॉड… आआह्ह्ह!
जैसे ही मुकेश की उँगलियाँ उनकी तंग चूत के अंदर गईं, प्रिया ने एक जोर की सिसकारी भरी। मुकेश ने अपनी उँगलियों को अंदर-बाहर तेजी से चलाना शुरू किया। वह उँगलियों से उनकी अंदरूनी दीवारों को कुरेद रहा था, जिससे प्रिया का शरीर झटके खाने लगा। मुकेश ने अपनी उँगलियों की रफ्तार बढ़ा दी और साथ ही साथ अपने मुँह से उनके निप्पल्स को चूसना शुरू किया।
प्रिया की हालत खराब हो रही थी। उनका पूरा शरीर काँप रहा था और वह अपने पैरों को मोड़ रही थीं। उन्हें महसूस हो रहा था कि उनके अंदर एक तूफान उठ रहा है।
प्रिया: आआह्ह्ह… बस… भाई साहब… मैं… मैं नहीं सह पाऊँगी… ओह्ह्ह… आआह्ह्ह्ह!
कुछ ही पलों में, प्रिया की उत्तेजना अपने चरम पर पहुँच गई। उनकी चूत ने एक जोर का झटका लिया और उनका गरम-गरम पानी धारों की तरह बहने लगा। प्रिया एक जोर की चीख के साथ ऑर्गेज्म तक पहुँच गईं और उनका शरीर ढीला पड़ गया।
मुकेश ने एक पल के लिए भी देरी नहीं की। जैसे ही प्रिया ने अपना पानी छोड़ा, मुकेश ने अपना मुँह वहाँ जमाए रखा और उस सारे रस को अपने मुँह में भर लिया। वह एक-एक बूँद को चाटने लगा, जैसे कोई अमृत पी रहा हो।
मुकेश ने अपना मुँह हटाया और अपने होठों पर लगे रस को चाटते हुए बोला,
मुकेश: आआह्ह्ह भाभी जी… आपकी चूत का स्वाद तो काफी नमकीन है… मजा आ गया इसे पीकर। आपकी ये गीली चूत मुझे पागल कर रही है।
प्रिया अभी भी ऑर्गेज्म के असर से हाँफ रही थीं, उनकी आँखें आधी खुली थीं और चेहरा सुकून और शर्म से लाल हो चुका था।
प्रिया: हाआह… हाआह… आप… आप कितने कामुक हैं भाई साहब…
मुकेश ने देखा कि प्रिया अब पूरी तरह से खुल चुकी हैं और उनका शरीर और ज्यादा माँग रहा है। मुकेश ने तुरंत अपनी पैंट की चेन खोली और अपना बड़ा, सख्त और नसों से भरा हुआ लंड बाहर निकाल लिया। उसका लंड जोश में एकदम खड़ा था और उसकी नोक से थोड़ा सा प्री-कम निकल रहा था।
मुकेश ने अपना लंड प्रिया की गीली चूत के होठों पर रगड़ना शुरू किया। प्रिया ने जब उस सख्त लंड का स्पर्श महसूस किया, तो उनकी साँसें फिर से तेज हो गईं।
मुकेश: भाभी जी, अब देखिए मेरा लंड आपकी इस प्यासी चूत को कैसे भरता है। अब मैं इसे अंदर डालने वाला हूँ।
प्रिया ने शर्माते हुए अपनी आँखें बंद कर लीं, लेकिन उन्होंने अपने पैरों को और फैलाया, जो इस बात का इशारा था कि वह अब मुकेश के लंड को अपने अंदर महसूस करना चाहती हैं।
मुकेश ने अपना सख्त लंड प्रिया की गीली और फिसलती हुई चूत के मुँह पर जोर से रगड़ा। प्रिया ने जब उस लंड की गरमी और सख्ती को महसूस किया, तो उनका शरीर एक झटके से काँप उठा। वह डर और उत्तेजना के बीच फँसी हुई थीं।
प्रिया: नहीं… नहीं भाई साहब… प्लीज… अंदर मत डालिए… ये बहुत गलत हो जाएगा। अगर किसी को पता चला तो… ओह्ह्ह… प्लीज रुक जाइए!
Next part coming soon….
