सेक्सी बहू कोमल को चोदने का सपना – 12

Sasur bahu ki kamukta story:- अब तक अपने इस सेक्स स्टोरी में पढ़ा कि कोमल के पति का छोटा स और कमजोर लंड देखकर बनवारी लाल मायूस हो गया और उसको बहु पर तरस आने लगा और अब उसको अपने लिए रास्ता भी clear नजर आने लगा। फिर बनवारी लाल ने चतुराई से अपना गधे जैसा लंड कोमल बहु को दिखा दिया और बहु बाबू जी का इतना बड़ा लंड देखकर हैरान हो गई। उसको हैरत हुई की इतना बड़ा लंड भी किसी का हो सकता है क्या? इस बात से उसको अपनी सहेली की याद आने लगीजिसने उसको अपने पति के बड़े लंड के बारे मे बताया था और उसने अनसुना कर दिया था। अब पढिए आगे..

Part 11 => सेक्सी बहू कोमल को चोदने का सपना – 11

Sasur bahu ki kamukta story

पिंकी जो बात कोमल के दिल को बार बार कचोट रही थी वो थी अपने पति के लंड की तारीफ, पिंकी बचपन से हो एक बोल्ड लड़की थी। कर्म से भी और वचन से भी उसका कोई सगा भाई नहीं था, इस लिए वो चुलबुली भी हो गयी थी और मुंहफट भी. पिंकी ने उसे बड़ा जोर देकर बताया था की “कोमल एक बात बता देती हूँ चुदाई का जो मजा जो आनद जो लज्जत लम्बे मोटे लंड से है वो छोटे में नहीं है तू तो जानती है तू तो जानती ही है की मैं शादी से पहले कम से कम आधा दर्जन लड़कों के लंड खा चुकी हूँ, लेकिन जो मजा अब पति देव के महा भयंकर हथियार से मिल रहा है उसका तो कोई मुकाबला ही नहीं।

पहले जब मैं चुदती थी तो लगता था की इससे ज्यादा मजा दुनिया में कही नहीं हो सकता, लेकिन अब लगता है जैसे तब मैं झुनझुने से खेल रही थी चूँकि तू कुवारी है इसलिए तुझे ज्यादा समझ भी नहीं आएगा, बस समझ ले की ये गंगू के गुड़ का अनुभव है। शादी के पहले जो लंड मैंने लिए थे अगर वो गुड़ थे, तो अब जो मैं ले रही हूँ वो गुलाब जामुन है, मोटा लंड बिलकुल चूत को चीरता हुआ घुसता है और फिर अंदर की दीवारों पर ऐसा रगड़ता है, की लगता है की अगर दुनिया में कही सवर्ग है तो वो सिर्फ चुदाई में है चुदाई में है और सिर्फ चुदाई में ही है।

जब तेरा पति तेरी चीरेगा, तब तुम मेरी इस बात को याद करोगी”. कोमल को पिंकी की बात याद तो आ रही थी लेकिन उसे ये समझ नहीं आ रहा था की चूत चीरना किसे कहते है सुशील तो कभी चीर नहीं पाया, खैर दिन भर वो बाबू जी से दूर दूर ही रही, अलतबा बाबू जी का हथियार हमेशा उसके जेहन में ही रहा। बाबू जी तो उसे लगातार देखते ही रहे और अपनी आँखों से चक्षु छोदन करते रहे. कोमल बाबू जी से दूर इस लिए रह रही थी, क्योकि आज जो कुछ बाबू जी ने किया उससे कोमल को पक्का विश्वाश था की अगर वो अकेली बाबू जी के पास गयी, तो बाबू जी बिना हाथ फेरे नहीं छोड़ेगे। वैसे कोमल आज सुबह से ही बहोत गरम थी, उसका मन तो कर रहा था की बाबू जी से अपनी चूचियां मसलवा ले लेकिन सुशील के शहर में होने के कारण वो सतर्क थी.

लेकिन शाम को सर मुँड़ाते ही ओले पड़ गए, सास का फरमान आया की “बहु मैंने ये लिस्ट बना दी है तुम बाबू जी के साथ जाकर सामान ले आओ, सुशील के जाने से पहले नमकीन गुजिया बना कर देनी है”

कोमल तैयार होकर बाबू जी के कमरे में गयी और मां जी का फरमान सुना दिया. बाबू जी ने कहा बहु तुम एक्टिवा निकालो तब तक मैं तैयार होकर आता हूँ।

फिर दोनों बाजार को चल दिए। कोमल पीछे बैठी थी, बाबू जी को जरा भी मौका मिलता, तो झटके से ब्रेक लगा देते, जिससे कोमल आगे खिसक उसके दशहरी आम, बाबू जी की पीठ में घस जाते. कोमल बाबू जी की चालाकी समझ रही थी, लेकिन कुछ बोल नहीं रही थी, क्योकि वो जानती थी की बोलने से भी बाबू जी मानेगे नहीं और फिर उसे भी बाबू जी की ये बदमाशी अच्छी लग रही थी।

बाजार में दोनों ने सब सामान ख़रीदा और लौट ही रहे थे की कोमल बोल पड़ी.

कोमल – बाबू जी मम्मी जी ने कुछ फल भी लेने को कहा था.

बनवारी लाल – ठीक है क्या लोगी?

कोमल – वो सामने ठेला लगा है केले ले लेते है.

बनवारी लाल ने केले देख कर कहा – ये तो बहोत छोटे छोटे केले है बहु केले हमेशा बड़े खाने चाहिए, जब बड़े केले खाओ तो पेट को भी लगता है की कुछ अंदर आया है.

कोमल बाबू जी का डबल मीनिंग समझ गयी और शर्म से नीचे देखने लगी, तब बनवारी लाल दूसरे ठेले पर गया जहा बड़े केले थे, उसने वो ख़रीदे और बहु को पकडाते हुए बोला-

बनवारी लाल – देखा बहु ये कितने बड़े साइज का केला है जब बड़े केले खाने लगोगी, तो छोटे केले खाना भूल जाओगी.

कोमल – बाबू जी आपको भी कोई फल लेना है तो ले लीजिये.

बनवारी लाल – बहु जो फल मुझे पसंद है वो तो आज बाजार में है ही नहीं.

कोमल – बाबू जी कौन सा फल?

बनवारी लाल ने बहु की चूचियों को कामुक नजरो से देखा फिर होंठो पर जीभ फेरते हुए नजर नीचे बहु की गांड को देखते हुए बोला.

बनवारी लाल – बहु मुझे तो दशहरी आम और तरबूज पसंद है.

कोमल समझ गयी की बाबू जी किन फलों की बात कर रहे है इस लिए चिढ़ाते हुए बोली..

कोमल – बाबू जी घर चलिए लगता है फल खाना आपकी किस्मत में नहीं है.

दोनों घर लौटने लगे, बाबू जी जान बुझ कर गाडी लहरा रहे थे, हल्का सा अँधेरा होने लगा था, जब थोड़ा सुनसान एरिया आया तो बाबू जी ने किनारे गाडी रोक दी.

कोमल ने पूछा – क्या हुआ बाबू जी?

बनवारी लाल – कुछ नहीं बहु बस एक मिनट.

और थोड़ा दूर जाकर पेशाब करने लगा, दरअसल इतनी देर तक बहु से चिपके रहने के कारण उनका लंड टनटना गया था और टेंशन रिलीज करना बहोत जरुरी थी। कोमल भी उनको लघुशंका करते देख रही थी और उसे सुबह वाला बाबू जी का कोबरा याद आ रहा था. पेशाब करते करते बनवारीलाल को एक बार फिर शरारत सूझी और उसने दोनों तरफ देखा कोई भी गाडी नहीं दिख रही थी, तो बनवारी लाल बिना हथियार अंदर किए घूम गया।

बहु उसी की और देख रही थी और बनवारीलाल का फुफकारता लंड, एक बार फिर उसकी आँखों के सामने देख कोमल फिर से एक बार सम्मोहित सी हो गयी. वो एक टक बाबू जी के औजार को देखने लगी, बनवारीलाल चलते चलते उसके पास आया, कोमल की नजरे उसके हथियार पर टिकी थी। इस लिए वो जब बिलकुल पास आ गया गया, तो कोमल की नजर लंड देखते देखते नीचे झुक गयी, उसकी साँसे तेज तेज चल रही थी।

बनवारी लाल ने अपने लंड को अपनी दो उँगलियों के बीच फँसाया और दाए बाए हिलाया, जिससे कुछ बुँदे गिरी ऐसा लग रहा था भयंकर विषधर ने विषवमन किया हो.

फिर बनवारी लाल धीरे से बोला – बहु चले या और देखना है.

ससुर की आवाज सुनते ही बहु की तन्द्रा टूटी और वो बुरी तरह झेप गयी और शर्म के मारे पल्लू से मुँह ढक लिया। फिर बनवारीलाल ने कहा बहु अब तुम गाडी चलाओ मैं थोड़ा थक गया हूँ और जैसे ही गाडी चली बनवारी लाल ने बहु की गोरी चिकनी कमर पर हाथ फेरना शुरू कर दिया. कोमल चुप चाप गाडी चलाती रही, के तभी बनवारीलाल ने उसके कान के पास आके कहा..

बनवारी लाल – बहु मेरा केला पसंद आया.

कोमल ने सोचा, बाबू जी शायद उसी केले की बात कर रहे है जो वो सुबह से दिखा रहे है, इस लिए वो चुप ही रही.

बनवारी लाल – बहु बताओ नया मेरा केला कैसा लगा?

कोमल ने हड़बड़ाते हुए कहा – क्या ससससस.. मैं समझी नहीं.

बनवारी लाल – अरे वही केले जो हमने ख़रीदे है.

कोमल – जी जी.. वो अच्छे है बड़े बड़े है.

बनवारी लाल – बहु मजा तो बड़े केले में ही है, तुम्हारी सास को भी बड़े केले पसंद है, वो मुझसे हमेशा बड़ा केला मँगवाती थी.

कोमल – वो तो आपसे मंगवाती थी, मैं तो किसी से मंगवा भी नहीं सकती.

बनवारी लाल – क्यों? मैं नहीं हूँ क्या अभी भी लिए है जब कहोगी तो ला दूंगा-

कहते कहते बनवारीलाल ने अपनी उंगली बहु की नाभि में डाल दी, बाबू जी की इस हरकत से कोमल पूरी गरम हो गयी थी, उसे लगा जैसे उसकी प्रेम गुफा से प्रेम इतना फुट पड़ा हो बाबू जी के डबल मीनिंग शब्द बहोत ही कामोत्तेजित थे। वैसे भी ऑडियो क्लिप वीडियो क्लिप से ज्यादा असर करती है.

बनवारी लाल ने फिर पूछा – बहु तो आज रात खाओगी न मेरा केला.

कोमल समझ गयी की बाबू जी क्या कहना चाहते है लेकिन वो बोली.

कोमल – बाबू जी रात को फल खाने से मुझे ठण्ड लग जाती है, मैं कल दिन में खाउंगी, रात को तो आप मां जी को खिलाना अपना केला.

बनवारी लाल – कोई बात नहीं बहु दिन में ही खा लेना, मैं तो बस ये चाहता हूँ की तुम मेरा केला खा के देखो, चाहे दिन रात खाती रहो.

ऐसा कहते कहते बनवारीलाल बहु की नंगी पीठ पर किश करने लगा.

कोमल ने घबराते हुए कहा – बाबू जी प्लीज ऐसा मत करिये मैं बहक जाउंगी.

बनवारी लाल – तो बहक जाओ न, मैं तो कबसे चाह रहा हूँ की तुम बहक जाओ.

कोमल – बाबू जी मैं गाडी की बहकने की बात कर रही हूँ आप तो हमेशा कुछ और ही सोचते है.

बनवारी लाल – अच्छा मैं क्या सोच रहा हूँ बताओ?

कोमल – मुझे आपसे बात नहीं करनी बस –

और ऐसे ही बाते करते करते दोनी घर पहुंच गए. रात को सबने साथ में खाना खाया। बनवारी लाल ऊपर छत पर घूमने चला गया, बाकी सब टीवी देख रहे थे, कुछ देर बाद सास ने कोमल से कहा की बाबू जी को ऊपर केला दे आ, मज़बूरी में उसे जाना पड़ा। हलाकि उसकी आशंका थी की ऊपर अँधेरे में बाबू जी कुछ न कुछ बदमाशी जरूर करेंगे.

जब वो पहुंची तो बाबू जी ऊपर छत पर टहल रहे थे और जैसे ही कोमल ने उन्हें केला देना चाहा, तो बाबू जी ने उसकी कलाई पकड़ ली और उसे टावर के अंदर ले जाने लगे। कोमल ने कलाई छुड़ाने की कोशिश करते हुए कहा..

कोमल – प्लीज बाबू जी मुझे छोड़िये, छत से हमे कोई देख लेगा.

बनवारी लाल – बाबू इसलिए तो टावर में लाया हूँ.

कोमल – नहीं छोड़िये मुझे! घर में सब है मुझे नीचे जाना है मैं तो आपको सिर्फ केला खिलाने आयी थी.

बनवारी लाल – बहु मैं केला खाता नहीं खिलाता हूँ, अब तुम खाओगी मेरा केला.

बाबू की बात सुनकर कोमल कांप उठी और उसने सोचा शायद बाबू जी अब अपना वो निकाल कर जबरदस्ती न कर दे.

कोमल घबराते हुए बोली – बाबू जी नहीं गजब हो जायेगा आप फिर कभी खिला देना, मुझे देर हो गयी तो सबको शक हो जायेगा.

बनवारी लाल – अरे नहीं होगा! कह देना ऊपर ठंडी हवा खा रही थी.

ऐसा कह कर बनवारी लाल ने, कोमल का लाया हुआ केला छिला और कहा चलो मुँह खोलो, फल वाला केला देख कर कोमल की जान में जान आयी और उनसे तुरंत मुँह खोला तो बनवारी लाल ने उसके मुँह में केला ठूस दिया। धीरे धीरे कोमल ने पूरा केला खा लिया.

बनवारी लाल – कहो कैसा लगा मेरा केला?

कोमल – बहोत बड़ा था, मेरा पेट पहले से ही भरा हुआ था अब तो गले तक भर गया है.

बनवारी लाल – बहु मैंने तो पहले ही कहा था की बड़ा केला खाओगी तो पेट तक महसूस होगा, की कुछ अंदर आया है या फिर गले तक महसूस होगा, जैसे अभी लगा रहा है.

कोमल – बाबू जी अब मुझे जाने दीजिये.

बनवारी लाल – अच्छा खुद तो मजे से खा गयी, अब मुझे भी तो कुछ खाने को दो.

अचानक बनवारी लाल ने बहु के रसीले होंठो पर अपने होंठ रख दिए और उसका हाथ अपने आप ही कोमल की चूचियों पर जा लगा, कोमल ने छुड़ाने की कोशिश की मगर बाबू जी की ताकत के सामने लाचार हो गयी। बनवारी लाल ने जी भर कर बहु के अधरामृत का पान किया और उसने उरोजों को बुरी तरह मसल डाला। बड़ी मिश्किल से जब कोमल के होंठ आजाद हुए तो उसने कहा.

कोमल – बाबू जी मैं अपने आगे हाथ जोड़ती हूँ मुझे जाने दीजिये, सुशील के जाने के बाद आप अपनी मनमानी कर लेना.

बनवारी लाल ने भी समय की नजाकत को देखते हुए उसे आजाद करते हुए कहा.

बनवारी लाल – ठीक है बहु! मेरे एक सवाल का जवाब देती जाओ.

कोमल – कौनसा सवाल?

बनवारी लाल – ये बताओ की जो केला खाया है वो बड़ा है या ये वाला..

कहते हुए उसने बहु का हाथ अपने टनटनाते हुए हथियार पर रख दिया, लंड पर हाथ लगते ही कोमल के शरीर में झुरझुरी उठ गयी। उसे लगा जैसे उसके हाथ में किसी ने अजगर दे दिया हो। बाबू जी का हथियार गरम था और फड़क रहा था उसने जल्दी से हाथ हटाया और नीचे जाने लगी.

बनवारी लाल ने एक बार फिर पूछा – बताओ न बहु कोनसे वाला ज्यादा बड़ा है?

कोमल – मुझे नहीं पता मां जी से पूछ लेना, उन्होंने दोनों खाये है और जीभ निकाल कर बाबू जी को चिढ़ाने लगी.

फिर बनवारी लाल ऊपर छत पर ही टहलता रहा और सबके अपने अपने कमरों में जाने का इंतजार करता रहा। जब सब सुनसान हो गया, तो वो चुप चाप नीचे आया और बहु की खिड़की में आँख लगा दी. पर अंदर का नजारा देखते ही उसे बहोत निराशा हुई बहु ने गाउन पहना हुआ था और सुशील छड़ी में था सुशील उससे बात कर रहा था, लेकिन वो छत की और ताक रही थी और सिर्फ हाँ हूं कर रही थी।

बहु के चेहरे पर उदासी का भाव था. तभी सुशील ने छछूंदर को छड़ी से बाहर निकाला और कोमल के हाथ में पकड़ा दिया कोमल ने तुरंत हाथ हटा दिया, सुशील ने कुछ रिक्वेस्ट की पर वो चुपचाप पड़ी रही। ये नजारा देख कर बनवारी लाल को बहोत बुरा लग रहा था, वो जानता था की आज बहु ने उसका कोबरा देखा है इसलिए सुशील के पीनियल सांप में उसकी कोई रूचि नहीं हो रही है. सुशील ने एक दो बार और कोशिश की, के कोमल उसके पनियल से खेले।

लेकिन कोमल ने उसे छुआ भी नहीं, अंत में थक हार कर सुशील ने कोमल की नाइटी ऊपर की और बीच में आकर अपनी लूली को कोमल के भीतर सरका दिया, सुशील का खिलौना बिना किसी प्रतिरोध के अंदर सरक गया. कोमल ऐसे ही निश्छल पड़ी रही, जैसे कुछ हुआ ही न हो। सुशील ने 5-10 सेकुंड उछल कूद की और फिर हांफता हुआ कोमल के ऊपर लेट गया।

कोमल ने तुरंत उसे अपने ऊपर से हटाया और दूसरी तरफ करवट लेकर लेट गयी. इस पुरे घटनाकर्म ने बनवारी लाल को अशांत कर दिया। सुशील उसका बेटा था, उसकी जिंदगी के इस दुख ने बनवारी लाल को हिला दिया। बेटा आखिर बाप का ही प्रतिरूप होता है, बाप का ही नया अवतार होता है या आज की भाषा में कहे तो बाप के नेचुरल क्लोन होता है.

संतान हो जाने के बाद माँ बाप जो कुछ करते है, सब बच्चो की खुशी के लिए करते है, उनकी अपनी ख़ुशी पीछे छूट जाती है, बहु के आज के व्यवहार ने बनवारी लाल को विचलित कर दिया, वो चुपचाप आकर अपने कमरे में लेट गया, लेकिन नींद उसकी आँखों से कोसो दूर थी.

दूसरी तरफ कोमल की आँखों से भी नींद दूर थी, उसकी नजरो के सामने बाबू जी और सुशील दोनों के हथियार घूम रहे थे। वो सोच रही थी की कितना अंतर है दोनों औजारों में, “बाप बुढ़ापे में भी दोनाली बंदूक लिए घूम रहा है और बेटा भरी जवानी मे पिस्तौल खिलौने से खेल रहा है, पता नहीं मेरी जिंदगी का क्या होगा”.

पढ़ते रहिये.. क्योकि ये hindi sex stories अभी जारी रहेगी.

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