माँ भाई का मिलन बहन ने कराया 1

हैलो फ्रेंड्स, मैं एक नई स्टोरी शुरू करने जा रही हूँ। इसमें आप देखोगे कैसे एक बहन ने अपनी माँ और अपने भाई का मिलन करवाया।

हैलो दोस्तों, मैं निशा। करीब एक साल से मैं ऑनलाइन आती हूँ और काफी स्टोरीज़ पढ़ीं और इनमें सबसे ज्यादा पसंद या कहूँ फेवरेट रहा मम्मी और बेटे का सेक्स.

एक अजीब सी फीलिंग होती है सोचकर ही कि कोई मम्मी और बेटा कैसे एक हो सकते हैं।

पर जब इतनी स्टोरीज़ पढ़ीं तो कहीं न कहीं कुछ तो जरूर होगा कि बात यहाँ तक आई है।

तो सोचा क्यों न अपने दिल से एक स्टोरी मैं भी लिख ही दूँ।

पर सारी स्टोरीज़ या तो मम्मी की जुबानी होती हैं या बेटे की।

तो सोचा क्यों न बहन की जुबानी लिखूँ तो थोड़ा अलग अहसास हो आप लोगों को।

पर होती फीमेल की जुबानी ही।

जैसा कि मैंने अपना नाम बताया निशा और मेरी उम्र इस वक्त 23 साल है। शादी नहीं हुई है पर एंगेजमेंट हो गई और शादी को 2 महीने बाद है।

फिर मेरी मम्मी जिनका नाम राखी है, उम्र 43 साल और लुक की बात करूँ तो किसी हीरोइन से कम नहीं हैं।

वजह उनका फिगर इतना कातिलाना है कि बच्चे भी उनके दीवाने हैं।

फिगर साइज की बात करूँ तो 34 है पर ब्रा का सी कप आती है।

और हिप की बात करूँ तो 36 है।

इससे आप सोच सकते हो कि क्या फिगर है उनका।

अब मेरे पापा सुरेन्द्र उम्र 50 साल हैं। एक बिज़नेसमैन हैं। ज्यादा बड़े नहीं तो छोटे भी नहीं हैं।

और लास्ट में मेरा भाई आकाश उम्र 21 साल मेरे से दो साल छोटा है और कॉलेज फाइनल ईयर में है।

तो ये है मेरी छोटी सी फैमिली।

अब घर की बात करूँ तो डबल स्टोरी घर है।

फर्स्ट फ्लोर पर 2 रूम बने हैं और बाकी का ओपन एरिया है।

और ग्राउंड फ्लोर पर 3 रूम हैं। एक मम्मी-पापा का, दूसरा मेरा और तीसरा मेरे भाई का।

और एक बड़ा सा हॉल या आँगन, एक बड़ी सी किचन और एक लू और एक बाथरूम।

तो नाम से पता चल गया आप लोगों को कि कैसे मैं निशा अपनी मम्मी और भाई का मिलन कराती हूँ।

पर उससे पहले ये जानना भी जरूरी है कि ऐसा हुआ क्यों।

तो चलते हैं थोड़ा बैक में जहाँ मुझे पता चला कि मेरा भाई कैसे अपनी ही मम्मी का दीवाना है।

और मेरे ख्याल में ये क्यों आया कि मम्मी और भाई का मिलन करा दूँ।

बात आज से 2 महीने पहले की है।

मैं आपको बता दूँ कि मैं घर पर ही रहती हूँ क्योंकि मेरी ग्रेजुएशन कंप्लीट हो गई और शादी फिक्स होने की वजह से आगे नहीं पढ़ी।

एक दिन मैं आकाश का रूम साफ कर रही थी और जब मैंने उसके पिलो का कवर निकाला तो उसमें से एक बहुत छोटी सी बुक गिरी जो काफी हल्की थी और कोई नहीं बता सकता था कि पिलो में कुछ रखा है।

और जब उसे खोला तो थोड़ी शॉक्ड हुई। ज्यादा नहीं क्योंकि मैंने भी कॉलेज लाइफ स्पेंड की है तो मुझे पता है कि इस उम्र में लड़के क्या लड़कियाँ भी सेक्स में बहुत इंटरेस्ट लेती हैं।

और ये सब बुक्स पढ़ना, पोर्न देखना सब नॉर्मल है।

पर इस बुक में एक बात कॉमन थी कि इसमें 10 स्टोरीज़ थीं और 10 की 10 मम्मी-बेटे पर थीं।

इनसेस्ट स्टोरीज़ वो भी माँ-बेटे पर।

ये भी थोड़ा अजीब लगा कि आकाश माँ-बेटे वाली बुक क्यों पढ़ रहा है।

पर ये भी नॉर्मल लगा कि हो सकता है ऐसी बुक ही मिली हो उसे।

तो मैंने उसे वापस रख दिया और अपने रूम में आ गई।

तभी मेरे होने वाले पति विकास की कॉल आई जो अक्सर आती रहती है या मैं कर लेती हूँ।

उनसे बात होते-होते डेली की तरह बात सेक्स तक पहुँच गई और मैं न चाहते हुए भी गरम हो गई।

कुछ कर तो सकते नहीं थे इसलिए जब कॉल डिस्कनेक्ट हुई तो मैं आकाश के रूम में गई और उस बुक को निकालकर पढ़ने लगी।

तभी मम्मी की आवाज आई कि वो पड़ोस में जा रही हैं तो गेट लगा लूँ। तो मैंने जल्दी से गेट लगाया और बुक को लेकर अपने रूम में आ गई और पढ़ने लगी। और उसका रिजल्ट ये रहा कि मैंने अपनी पसी में फिंगरिंग की और राहत की साँस ली।

और बुक को वापस आकाश के पिलो में रख दिया।

तो ये पहली फिंगरिंग थी बुक को पढ़कर घर में।

पर आखिरी नहीं क्योंकि 2 दिन तो मैं कुछ नहीं सोचा पर ऐसे ही तीसरे दिन जब मम्मी घर पर नहीं थीं तो मैं आकाश के रूम में गई और पिलो चेक किया तो उसमें एक बुक और मिली। मुझे लगा वही होगी पर वो दूसरी थी।

और उसमें भी सारी की सारी स्टोरीज़ माँ-बेटे की थीं।

और इस बार मेरे दिमाग में आया कि ये कॉइनसिडेंस नहीं हो सकता। लगता है आकाश को माँ-बेटे की स्टोरीज़ अच्छी लगती हों।

तो मैंने भी उन्हें पढ़ा और वापस रख दीं।

पर एक दिन जब मैं घर पर थी तो मम्मी बोलीं कि उनकी काली कच्छी नहीं मिल रही है जो उन्होंने छत पर सुखाई थी।

मैंने हल्के में लेकर बोल दिया कि हो सकता है कहीं रख दी हों।

और बात खत्म हो गई।

पर जब मम्मी रोज की तरह पड़ोस में गईं और मैं आकाश के रूम में बुक पढ़ने तो जैसे ही पिलो से मैंने बुक निकाली तो उसमें से मुझे मम्मी की काली वाली कच्छी मिल गई।

इसका मतलब आकाश ने मम्मी की कच्छी चुराई थी। पर क्यों? वो क्या कर रहा था इसका? और जैसे ही मैंने उसे खोला तो उसमें शायद आकाश का वीर्य लगा था।

इस बार मैं शॉक्ड रह गई क्योंकि जो मैंने स्टोरीज़ पढ़ी थीं उनमें कई स्टोरीज़ में बेटा अपनी मम्मी की कच्छी पर अपना वीर्य निकालता है और उसे देखकर ही उनकी मम्मी उनसे पट जाती हैं।

तो क्या आकाश के दिल में हमारी मम्मी के लिए ये सब है क्या?

क्योंकि जितनी भी बुक्स मैंने पढ़ी हैं सब की सब माँ-बेटे की स्टोरीज़ थीं।

तो क्या आकाश भी मम्मी के साथ ये सब करना चाहता है?

नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता। शायद मैं गलत सोच रही हूँ। पर मैं गलत हूँ तो मम्मी की कच्छी यहाँ क्या कर रही है जिसे मम्मी ढूँढ रही थीं।

कुछ तो है जो मुझे नहीं पता।

और मैंने सोचा कि पता लगाना पड़ेगा कि क्या है।

पर मेरा ये पता लगाना ये पता नहीं था कि एक दिन मैं मम्मी और भाई का मिलन खुद करा दूँगी।

और भाई के साथ मिलन करने के लिए मम्मी राजी हो जाएँगी या कहूँ हालात ऐसे हो गए कि मम्मी खुशी-खुशी राजी हो गईं भाई से मिलन करने के लिए।

और मेरी शादी की सुहागरात से एक दिन पहले मतलब मेरी शादी वाले दिन मम्मी और भाई की सुहागरात मैं करवा दूँगी।

पर ऐसे हुआ पर इसमें टाइम लगा क्योंकि पहले तो मैंने ये पता किया कि आकाश सिर्फ बुक्स पढ़कर ये सब करता है मतलब मम्मी की कच्छी पर अपना वीर्य गिराना।

या उसके दिल में अपनी ही मम्मी के लिए कुछ है।

और इसका नशा मुझे भी होने लगा क्योंकि आकाश कितनी भी बुक्स लाता मैं सब पढ़ती। यहाँ तक कि फिंगरिंग भी करती और अब मुझे भी माँ-बेटे की चुदाई की कहानी पसंद आने लगी थी। और एक दिन तो कहानी पढ़ते-पढ़ते मैं मम्मी और भाई को इमेजिन करने लगी और उस दिन मैं इतनी कसके डिस्चार्ज हुई कि बता नहीं सकती।

अपने भाई और मम्मी की चुदाई की सोचकर।

जब आकाश के रूम में मम्मी की कच्छी मिली उसके अगले दिन मम्मी को उनकी कच्छी मिल गई तो मैंने बोल दिया— देखा मैंने कहा था हाँ कि तुम कहीं रखकर भूल गई होंगी।

पर मम्मी ने बोला— मिल तो गई पर मुझे लगता है किसी कुत्ते ने उस पर अपना माल गिराया है।

मैं मम्मी को देखने लगी तो वो मुस्कुराकर रह गईं। कुछ नहीं बोलीं।

मतलब आकाश ने अपना वीर्य उस पर निकाला पर साफ नहीं किया अपना वीर्य।

पर मम्मी क्यों मुस्कुराईं वो पता नहीं पड़ा और अगले दिन फिर से मम्मी की नीले रंग की कच्छी गायब हो गई तो मैं समझ गई कि ये आकाश का काम है और मौका देखकर उसका पिलो चेक किया तो उसमें मम्मी की कच्छी रखी थी।

मतलब अब आकाश मम्मी की कच्छी का दीवाना हो रहा था। उस पर कहानी पढ़कर अपना वीर्य निकाल देता और वापस वही रख देता जहाँ से वो उन्हें लेता था।

और उस दिन मैंने आकाश और मम्मी को बिना स्टोरी पढ़े उनको इमेजिन किया और फिंगरिंग की और अपना माल भी उसी कच्छी से पोछा और वही रख दी।

और अगले दिन मम्मी की कच्छी उनको मिल गई और मम्मी—

बड़ा कुत्ता है जो भी है। अब से मैं छत पर अपनी कच्छी नहीं सुखाऊँगी। और मुस्कुराईं और अपने रूम में चली गईं।

मैं मम्मी की मुस्कुराहट की वजह समझ नहीं पा रही थी।

क्या मम्मी को आकाश पर शक है या उनके मुस्कुराने की वजह कुछ और है।

पर इन सब में मैं स्टोरीज़ की इतनी दीवानी हो गई कि एक दिन भी उनके बिना नहीं रह पाती और जब आकाश के पिलो में बुक नहीं मिलती तो मैं ऑनलाइन आकर पढ़ लेती और पढ़ती सिर्फ माँ-बेटे की स्टोरीज़ ही।

और फिंगरिंग भी करती आकाश और मम्मी को सोचकर।

धीरे-धीरे कुछ और दिन निकले और मैं अब आकाश को नोट करने लगी कन्फर्म करने के लिए कि उम्र का असर है या वो मम्मी के साथ ये सब करना चाहता है जो स्टोरीज़ में हम दोनों ही पढ़ते हैं।

तो पता चला कि आकाश मम्मी को छुप-छुप कर देखता है।

कभी कपड़े चेंज करते टाइम।

कभी नहाकर जब आती हैं उस टाइम।

कभी जब वो सो रही होती हैं तो उनके रूम में जाकर सोते हुए।

और कभी-कभी मौका देखकर अपना हाथ मम्मी की गाँड पर फेर देता पर मम्मी को पता नहीं चलता था।

धीरे-धीरे आकाश मम्मी की कच्छी के साथ-साथ उनकी ब्रा में भी अपना वीर्य निकालने लगा।

और मैं अपनी कच्छी में और कभी मम्मी की कच्छी या ब्रा में भी।

और मम्मी हर बार गाली देतीं और मुस्कुराकर रह जातीं।

तो कई बार मुझे लगता कि मम्मी को पता है कि ये हरकत आकाश करता है और वो जानबूझकर उससे कुछ नहीं कहतीं ये सोचकर कि उसकी उम्र ही ऐसी है।

पर इन दोनों की हरकत से मैं पागल हुए जा रही थी।

क्योंकि अब मैं डेली फिंगरिंग करती आकाश और मम्मी को इमेजिन करके।

जिससे मुझे कमजोरी आने लगी थी।

पर क्या करती? चस्का ही ऐसा लग गया था।

एक दिन पापा के जाने के बाद मम्मी किचन में कुछ कर रही थीं तभी आकाश किचन में गया तो पता नहीं मुझे क्या हुआ मैं भी किचन के गेट पर इस तरह खड़ी हो गई कि वो मुझे न देख सके।

और अंदर आकाश ने मम्मी को पीछे से अपनी बाहों में ले रखा था। मतलब अपनी दोनों बाँहें मम्मी की कमर में डाल रखी थीं और उनसे चिपका हुआ था।

मम्मी: क्या कर रहा है आकाश? छोड़ ना। रोटी जल जाएगी।

आकाश: हाँ पता है पर क्या करूँ मेरा मन कर रहा है आपको इस तरह पकड़ने का।

मम्मी: हाँ पता है तेरा बस चले तो तू मुझे अपनी बाहों से अलग ही न करे। हमेशा अपने से चिपका कर रखे।

आकाश: हाँ मम्मी हमेशा अपने आप से चिपका कर रखूँ। मैं और मम्मी को और कसके अपने आप से चिपका लिया।

मम्मी: आаа… क्या कर रहा है? मम्मी हूँ तेरी। कोई तेरा पंचिंग बैग नहीं जो इतनी कसकर पकड़ रखा है। मैं कहीं भाग नहीं रही हूँ।

आकाश: हाँ पता है भाग नहीं रही पर आप इतनी आसानी से मेरी बाहों में आती कहाँ हो।

मम्मी: अच्छा ऐसा कब हुआ है? तू कल भी छत पर मुझे अपनी बाहों में भरकर काफी देर खड़ा रहा था। याद है?

और आकाश को गर्दन घुमाकर देखने लगीं।

और मैं मन में कि मैं कहाँ थी उस वक्त।

आकाश: हाँ पता है। पूरे 21 मिनट आप मेरी बाहों में थीं।

मम्मी: फिर अब क्या पूरे दिन तेरी बाहों में ही रहूँ? घर का काम कौन करेगा।

आकाश: दीदी को बोलो ना। वो काम कर लेगी।

मम्मी: और तू मुझे अपनी बाहों में लेकर पड़ा रहेगा जैसे रात को अपनी बाहों में लेकर पड़ा रहता है।

मैं आप लोगों को बताना भूल गई कि हम एक छोटे से कस्बे में रहते हैं और रात को हम अधिकतर छत पर ही सोते हैं। पर पापा नीचे अपने रूम में और मैं भी। पर जब लाइट नहीं होती तो मैं भी ऊपर ही सोती हूँ। पर कई बार विकास से बात करने की वजह से भी मैं नीचे ही सो जाती हूँ।

तो इसका मतलब मम्मी और भाई छत पर एक-दूसरे की बाहों में सोते हैं जब हम मतलब मैं और पापा नीचे सोते हैं।

तभी आकाश ने शायद कुछ किया तभी तो मम्मी के मुँह से आउच्च निकला।

मम्मी: क्या करता है पागल? इतनी तेज कोई अपनी मम्मी के पेटू पर चुटकी काटता है क्या।

आकाश: मैं काटता हूँ अपनी मम्मी के।

तो मम्मी मुस्कुराकर— तू बहुत बिगड़ रहा है। तेरे पापा से बोलना पड़ेगा।

आकाश: मेरी शिकायत करोगी पापा से? और फिर से चुटकी काट ली आकाश ने।

मम्मी: आउच्च… नहीं करूँगी शिकायत। मत कर लगती है बेटा। तो आकाश मम्मी के पेट को सहलाने लगा।

आकाश: अब ठीक है मम्मी?

मम्मी: हाँ अब सही है।

आकाश: पापा से शिकायत करोगी अब?

मम्मी: हाँ करूँगी। और आकाश को अपने से दूर किया और किचन से बाहर आने लगीं तो मैं छुप गई।

और आकाश भी मम्मी के पीछे-पीछे आ गया।

मम्मी अपने रूम में गई थीं तो आकाश भी उनके पीछे-पीछे उनके रूम में चला गया।

और मैं बाहर से खड़े होकर अंदर देखने लगी।

मम्मी: यहाँ भी आ गया?

आकाश: ये पूछने के लिए कि पापा से क्या बोलोगी।

मम्मी: कुछ नहीं। इतना बोलूँगी कि आपकी बीवी को आपका बेटा बहुत परेशान करने लगा है।

आकाश: अपनी बाहों में लेना और चुटकी काटना परेशान करना है मम्मी?

मम्मी: नहीं ये परेशान करने वाली बात नहीं। पर जो तू अब करने लगा है वो परेशान करने वाली बात है। और मम्मी इस वक्त सीरियस दिख रही थीं।

आकाश: अब मैंने क्या किया ऐसा?

मम्मी ने आकाश को देखा और— नहीं कुछ नहीं। अब तू जा। कॉलेज के लिए लेट हो रहा है।

मम्मी को सीरियस देखकर आकाश कुछ नहीं बोला और बाहर आ गया तो मैं फिर से छुप गई और थोड़ी देर में आकाश कॉलेज चला गया।

पर मैं ये ही सोचती रही कि आकाश ऐसा कौन सा गलत काम कर रहा है कि मम्मी उससे परेशान हो रही हैं।

पर कोई जवाब नहीं था मेरे पास।

पर उसके जाते ही मैं उसके रूम में गई और बुक निकाली और अपने रूम में आ गई और पढ़ने लगी।

पर दिमाग में ये ही सवाल था कि ऐसा क्या है जो मम्मी आकाश की हरकत से परेशान हो रही हैं अब।

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