बेटे की अजीब ख्वाहिश 2
Maa beta ke romance ki sex kahani:- उस दिन के बाद अब सोनू हर रात को डिनर के बाद उसके दोस्त अभिनाव की भेजी हुई कहानी पढ़के और फिर वीडियो देखके ही सोने लगा। और दिन में भी बस वही कहानी और वीडियो के खयाल उसके दिमाग में घूमते रहते थे। अभिनाव की बात क्या सच होने वाली थी। नहीं… ऐसा नहीं हो सकता। यही खुद को बोलके ही सोनू गिल्ट फीलिंग कम कर रहा था।
पिछला पार्ट नहीं पढ़ा तो यहाँ से पढ़ें ==> बेटे की अजीब ख्वाहिश 1
Maa beta ke romance ki hindi sex story
एक दिन उसी वीक में दोपहर के टाइम पे सोनू अपने रूम में था और पूनम देवी किचन में थीं। सोनू अपने रूम से हॉल की ओर आया पानी पीने… तो अचानक उसकी नज़र किचन में खड़ी उसकी माँ पर पड़ी।
सोनू की माँ ने उस दिन एक ग्रीन कलर की साड़ी और ऑरेंज ब्लाउज़ पहना था। पता नहीं क्यों सोनू हॉल के सोफ़े पर बैठ गया… जहाँ से किचन दिखाई देता था। उसकी मॉम के पीछे के शरीर पर नज़र जैसे अटक गई थी सोनू की। शरीर तो साड़ी से ढका ही था आगे से… पर क्योंकि सोनू को उनका पीछे का शरीर अब हॉल से नज़र आ रहा था। पीछे से थोड़ा सा खुला हुआ ब्लाउज़ उनका… और एक पीछे डोरी थी ब्लाउज़ के सेंटर में। उनकी गोरी चिकनी पीठ मानो चमक रही थी। पीठ के नीचे थोड़ी उनकी कमर भी नज़र आ रही थी सोनू को पीछे से।
कमर पर साइड में जो फोल्ड पड़े थे… वो इतने क़ातिल लग रहे थे… शायद उसको देखके कोई बूढ़ा मरता हुआ आदमी भी जैसे कि उत्तेजना से भर जाए। सही से उनकी कमर पे जैसे फेट था… जिससे कि उनकी सुंदरता को और चार चाँद लग रहे थे…
अचानक सोनू को जैसे होश आया और वो सोचने लगा… अरे ये क्या… मैं देख रहा हूँ। नहीं नहीं… ये गलत है… ऐसा मम्मी को देखना… और वो उठके अपने रूम में चला गया। पर उसकी मम्मी का शरीर जैसे उसके दिल-ओ-दिमाग में अब घर कर चुका था।
सोनू अब अपने रूम में वापस आ गया और सोचने लगा कि ऐसा माँ को देखना गलत है… और फिर माइंड डायवर्ट करने को वो कुछ गेम्स ऑनलाइन पे खेलने लग गया।
अब वीक के पाँच दिन गुज़र चुके थे और सोनू ने अभिनाव की भेजी हुई सारी स्टोरीज़ पढ़ ली थीं और सभी वीडियो भी देख लिए थे। कुछ वीडियो तो उसने रिपीट भी देखे थे। सोनू का स्वभाव जैसा था… वो अपनी माँ के बारे में गंदा नहीं सोच सकता था… जैसे कि शायद दूसरे लड़के सोचते हैं जो इन्सेस्ट से प्रभावित होते हैं।
पर उसको भी लगने लगा था कि माँ-बेटे की इन्सेस्ट में एक अजीब ही आकर्षण था… जिससे कोई इनकार नहीं कर सकता था। शायद बेटा माँ से ही सबसे ज़्यादा क्लोज़ होता है बचपन से… और माँ भी बेटे को सबसे ज़्यादा प्यार करती है… ये भी एक कारण हो सकता है कि माँ-बेटे के बीच इन्सेस्ट की फैंटसी में इतना आनंद होता है… जो दूसरे टाइप की फैंटसी में कभी हो नहीं सकता।
सोनू को भी कहानी के वो भाग बहुत ज़्यादा उत्तेजित करते थे… जिनमें बेटा अपनी माँ की सुंदरता का वर्णन करे… बेटा प्यार से अपनी माँ को मनाने की कोशिश करे… वो माँ का बेटे को समझाना… वो माँ का इनकार और गुस्से में भी छुपा हुआ प्यार। ये सब चीज़ें जैसे सोनू के खून को जमा रही थीं। वो भी शायद अब इन्सेस्ट की दुनिया में प्रवेश कर चुका था… और बाहर आने के लिए उसका दिल नहीं मानने वाला था।
वीक अब खत्म होने वाली थी… और कल सब दोस्तों के मिलने का प्लान था… जैसे कि डिसाइड हुआ था। सोनू पर अब उस बारे में नहीं सोच रहा था। वो तो बस एक अलग ही दुविधा में था अब। जब भी वो अब घर पर अपनी मम्मी पूनम देवी को देखता… तो पता नहीं न चाहते हुए भी आकर्षण सा होने लगा था उसको।
आज वो जब हॉल में बैठा… तो उसकी माँ टॉवल लेकर बाथरूम की ओर जा रही थीं। हॉल से कुछ ही दूर पे था बाथरूम। उसकी माँ हमेशा साड़ी-ब्लाउज़ साथ ही ले जाती थीं बाथरूम में… और शायद अंदर ही चेंज करके बाहर निकलती थीं। बाथरूम काफी बड़ा था… तो शायद इसलिए अंदर ही चेंज करने में कोई तकलीफ भी नहीं थी। सोनू सोफ़े पर बैठा टीवी देख रहा था… और उसकी दादी भी पास में ही बैठी थीं।
तभी उसकी माँ दोपहर में टॉवल और चंदन का पेस्ट लेकर बाथरूम की ओर जा रही थीं। सोनू की नज़रें फिर से उसकी खूबसूरत माँ पे जैसे गड़ गई थीं… और वो घूरने लगा पीछे।
पूनम देवी के चूतड़ कमर मटक रहे थे चलते समय… और सोनू का दिल जैसे ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। बाथरूम का डोर अब बंद हो गया। पर एक-दो मिनट के बाद सोनू सोफ़े पे से उठके फ्रिज के पास गया। फ्रिज बाथरूम से करीब में ही रखा था… और अब उसको अपनी माँ की चूड़ियों की आवाज़ आ रही थी। वो फ्रिज में पड़े फ्रीज़र के आइस क्यूब्स की तरह जैसे जम गया। वो समझ गया था कि ये आवाज़ तभी आती है जब उसकी मम्मी शायद अपना ब्लाउज़ उतार रही होंगी… हाथ दोनों ऊपर करके। जो औरतें हाथों में चूड़ियाँ भरके पहनती हैं… कभी नोटिस करो तो पता चल जाएगा कि वो हाथ ऊपर करने पे चूड़ियाँ ज़्यादा आवाज़ करती हैं।
सोनू ये सोचके जैसे फ्रीज़ हो गया। उसकी मम्मी अंदर अपना ब्लाउज़ उतार रही हैं।
ये सिर्फ सोच थी… किसी भी बेटे को उत्तेजना के शिखर पे ले जाने को काफी है। सोनू भी अब उसी शिखर पे था। कुछ देर बाद चूड़ियों की आवाज़ बंद हो गई। शायद सोनू की मम्मी ने अब हाथों से भी चूड़ियाँ निकाल ली होंगी… नहाने से पहले। अब पर अंदर पानी की आवाज़ आने लगी… जो शावर से पानी गिर रहा था। सोनू की सोच फिर से सोचने लगी कि क्या उसकी मम्मी अब अंदर पूरी नग्न अवस्था में…
इतना सोचके फिर से वो जैसे होश में आ गया और अपने रूम में चला गया। वो सोचने लगा कि अभिनाव की बात तो सच हो रही है। मुझे तो एक ही हफ्ते में ऐसे खयाल आने लगे हैं। गलत है… पर क्या करूँ… कितना भी कंट्रोल करने की कोशिश करूँ… नहीं होता है। कल अभिनाव पूछेगा तो मैं अगर सच बता दूँ उसको… तो क्या वो कुछ गलत सोचेगा मेरे बारे में… कि मैं भी छुपा रुस्तम निकला। और फिर राज क्या सोचेगा। यही सब बातें सोनू के दिमाग में चल रही थीं… अभिनाव तो एक साल से इस हालत में है। शायद अभिनाव का कहना ठीक ही है। शाम तक सोनू सोचता ही रहा… और रात को अब डिसाइड कर लिया उसने कि सच बता ही देता अभिनाव को… कल जब मिलेगा। वो भी जानना चाहता था कि सच बताने पे देखते हैं क्या होता। वैसे भी अभिनाव और राज उसके पक्के दोस्त थे… और सब कुछ शेयर करते थे। और राज… राज क्या कर रहा होगा… ये भी सोनू जानना चाहता था… इन सब सवालों के जवाब के लिए कल तक का इंतज़ार सोनू को करना ही था।
अगले दिन सुबह-सुबह सोनू बिस्तर में ही था कि अभिनाव का फोन आ गया उसको… और वो लोग अब 11 बजे उनके सोसाइटी के पार्क में मिलने वाले थे। सोनू नहा-धोके आकर अब ब्रेकफास्ट करने बैठा। आज संडे था… इसलिए उसके पिताजी भी घर पे थे। उसकी मम्मी और नौकरानी किचन में रोटी बना रहे थे। दादीजी भी आकर अब डाइनिंग टेबल पे बैठ गईं। कुछ ही देर में सोनू की मम्मी ने सबके लिए गरमा-गरम रोटी प्लेट में लेकर आ गईं। सोनू ऑपोजिट साइड पे ही बैठा था टेबल पे… उसकी मम्मी और पापा के।
वो खाते हुए भी न जाने क्यों बार-बार उसकी मम्मी की ओर ही देख रहा था।
उसकी मम्मी जब-जब रोटी का टुकड़ा अपने लिप्स से लगाके अंदर डालतीं… वो दृश्य भी मानो सोनू को उत्तेजित कर रहा था।
एकदम गुलाबी लिप्स थे उसकी मम्मी के… और रोटी जब खा रही थीं तो उसकी मम्मी के चीक्स और भी चब्बी लग रहे थे उसको। सोनू जैसे खाना कम खा रहा था… और देख ज़्यादा रहा था। एक ही हफ्ते में सोनू की सोच कितनी बदल चुकी थी।
उसकी मम्मी अब खाने के बाद जब ग्लास से पानी भी पीने लगीं… तो सोनू देख रहा था कि कैसे उनके गले से उतर रहा पानी। सोनू की मम्मी की गर्दन एकदम सुराही जैसी थी… और पानी गले से उतरते भी देखने लगा वो। सोनू भी खाना खाके अब उसकी मम्मी को बोलके दोस्तों के पास जाने के लिए आ गया घर के बाहर। घर के बाहर तो आ गया वो… पर वो इन्सेस्ट की दुनिया और अपनी ही मम्मी के आकर्षण से बाहर नहीं आ पा रहा था।
सोनू अब घर से निकलकर पार्क की ओर चल दिया… जहाँ पर अभिनाव और राज भी पहुँचने ही वाले थे। सोनू को अब इस बात की कोई चिंता नहीं थी कि उसको दोस्तों के सामने क्या बोलना है… बस उसके दिमाग में तो उसकी सुंदर मम्मी पूनम की ही जैसे तस्वीर बैठ गई थी। इतने दिन से क्यों उसने अपनी इतनी सुंदर माँ को नोटिस नहीं किया था। उसको तो अब उसकी माँ किसी फिल्म की हीरोइन से भी ज़्यादा सुंदर लग रही थी। यही सब सोचते हुए अब सोनू पार्क पहुँच गया। वहाँ तो पहले से ही अभिनाव और राज बैठे थे।
अभिनाव: अरे सोनू… कैसा है… आजा। हम लोग तेरा ही वेट कर रहे थे।
राज: और सोनू… वन वीक बाद मिल रहे हैं… कैसा है… क्या चल रहा है।
सोनू: हाँ… बढ़िया हूँ… तुम लोग बताओ। क्या चल रहा है।
कुछ देर इधर-उधर की बात के बाद अब अभिनाव ने असली मुद्दा छेड़ा।
अभिनाव: हाँ सोनू और राज… तो फिर क्या हुआ… एक हफ्ते का अपना प्लान और शर्त याद है ना… तुम दोनों बताओ फिर।
राज: हाँ याद है रे। वैसे तेरी कहानियाँ और वीडियोज़ कमाल हैं… और मैंने तो सभी पढ़ डालीं और वीडियोज़ देख डाले। ऊपर से मैंने तो खुद कुछ और कहानियाँ और वीडियो भी सर्च करके देख लीं… हाहा।
सोनू: हम्म… मैंने भी पढ़ी रे अभिनाव… वो स्टोरीज़ और वीडियोज़ भी देखे। और शायद तू जो कह रहा था… मैं सोच रहा हूँ कि सच ही था।
ये सुनके अभिनाव और राज थोड़ा सरप्राइज़ हुए… क्योंकि सोनू ऐसा इतनी जल्दी बोलेगा… शायद उम्मीद नहीं थी।
राज को भी वही फीलिंग्स आ रही थीं… पर उसकी माँ और पिताजी अभी कुछ दिन के लिए गाँव गए थे… तो शायद उसपर इतना प्रभाव नहीं पड़ा था। पर फिर भी राज भी अभिनाव की बात से एग्री करता था कि माँ-बेटे की इन्सेस्ट फैंटसी करना बहुत ज़्यादा मज़ेदार होता है… और कोई गिल्ट फीलिंग नहीं।
राज: अरे सही में सोनू… मुझे भी बहुत पसंद आ रही अब वो कहानियाँ और वीडियोज़ तो। अभिनाव तू सच ही कहता था वैसे… अच्छा हुआ कि मेरे मॉम-पिताजी गाँव गए हैं… वरना मेरा भी दिमाग खराब हो जाता… हाहा।
अभिनाव: वैसे सोनू… तूने क्या फील किया… बता तो… उन सब कहानियों, वीडियोज़ को पढ़के, देखके… और सच-सच बोलना… तुझे भी अब थोड़ा-बहुत फैंटसी अपनी माँ पे होने लगी है ना… देख झूठ मत बोलना… क्योंकि हम सब तो पक्के दोस्त हैं… और कभी कोई भी बात हम छुपाते नहीं हैं… सब कुछ तो हमने शेयर किया है।
सोनू: नहीं… मैं छुपा नहीं रहा हूँ… पर वो यार… ये कुछ गलत तो नहीं ना… बस यही दुविधा में पड़ा हूँ। और मुझे कोई गलत फीलिंग्स नहीं हैं यार मेरी मम्मी पर… बस पता नहीं क्यों उनकी सुंदरता से आकर्षण होने लग गया है कुछ दिन से… जब से तेरी ये कहानियाँ पढ़ीं, वीडियोज़ देखे हैं। मैंने बहुत ट्राई किया… पर मन हमेशा वही सोचता रहता है।
अभिनाव: अरे कुछ गलत क्यों होगा सोनू… हम क्या कुछ गलत काम कर रहे हैं क्या… वैसे भी आजकल ऑनलाइन पे देख… लाखों लड़के ये फैंटसी करते हैं… अगर तू कॉलेज के लड़कों की बात करेगा तो मैं तो सोचता हूँ 10 में से कम से कम 8 लड़के तो यही फैंटसी कर रहे होंगे आजकल। क्योंकि जैसे मैंने बताया ना… इसमें सबसे ज़्यादा मज़ा है।
राज: हाँ यार सोनू… सही बोला… शायद वो माँ-बेटे का रिलेशन ही ऐसा है… कि उसमें अगर इन्सेस्ट का तड़का लग जाए… तो फिर उससे ज़्यादा मज़ा शायद कुछ और चीज़ नहीं दे सकती।
अभिनाव: ये सही बोला राज तूने… शायद मैंने मेरी मॉम से भी सुंदर लेडीज़ देखी हैं… पर वो इन्सेस्ट में जो मज़ा है… वो फैंटसी में जो मज़ा है… दूसरे में नहीं आता… क्योंकि शायद वो रिश्ता ही ऐसा है… कि वो मज़ा देता है।
सोनू अब सब बातें सुन रहा था… और अब वो भी उनकी बातों से अंदर ही अंदर जैसे एग्री करने लग गया था। सोच रहा था कि शायद सच ही तो कह रहे हैं ये दोनों। सोनू भी जानता था… उसको ऐसी उत्तेजना कभी महसूस नहीं हुई थी… पर पहली बार हो रही थी… तो शायद माँ-बेटे के रिश्ते में ही कुछ खास बात होगी।
अभिनाव: मैं तो घर पर जब भी होता हूँ… बस मेरी मम्मी को घूरता रहता हूँ… और अच्छा टाइमपास हो जाता है यार… वो जब किचन में हों या फिर सो भी रही हों… तो चुपके से जाके उनको देखता हूँ… कहीं कुछ नज़ारा दिख जाए। जितना भी दिख जाए… बस उसमें ही मज़ा ले लेता हूँ।
राज: हाहा… अरे मुझे तो इतना मौका नहीं मिलेगा… मेरे घर में तो जानता है ना… तू चाचा-चाची भी रहते हैं… तो प्राइवेसी नहीं मिलती है… हम्म… पर लगता है अब शायद… पर मुझे भी देखने का मन करेगा।
सोनू: हाँ… पर सिर्फ देखने तक ही ठीक है यार… ज़्यादा हम डीप न सोचें… तो ही बेहतर है ना। ज़्यादा डीप सोचेंगे तो दिमाग पागल हो जाएगा… फिर हम किसी पे कॉन्संट्रेट नहीं कर पाएँगे।
अभिनाव: अच्छा सोनू… वैसे एक बात बोलूँ… अगर तू बुरा न माने तो…
सोनू: हाँ हाँ… बोल ना… मैं क्यों बुरा मानूँगा यार… हमारी दोस्ती में कुछ भी बोल सकते हैं।
अभिनाव: वैसे हम तीनों में तू सबसे ज़्यादा लकी है यार।
सोनू: मैं कहाँ से लकी हूँ रे… तू ही लकी है… देख तेरे पिताजी का पैसा अच्छे से उड़ा रहा… हाहा।
अभिनाव: अरे मैं पैसे की बात नहीं कर रहा हूँ… मैं वो मॉम्स की बात कर रहा हूँ। तेरी मम्मी हम तीनों की मॉम्स में सबसे सुंदर हैं ना… उस हिसाब से बोला है।
राज: हम्म… ये तो सही कहा अभिनाव तूने… सोनू की मम्मी शायद हमारी कॉलोनी में ही सबसे सुंदर होगी।
सोनू: ओये… अरे तुम लोग मेरी मम्मी पे कोई गलत नज़र मत डालो… अपनी-अपनी मम्मियों को पहले देखो।
अभिनाव: अरे गलत नहीं… यार बस हम तो कह रहे हैं कि तू बहुत लकी है ना… घर में इतनी सुंदर मॉम हो… तो तुझे फिर टाइमपास ही टाइमपास… तू तो दिन भर घर पर ही रहे तो भी तुझे बोर नहीं होगा।
राज: कॉन्ग्रैचुलेशन्स सोनू… हाहा… इतनी सुंदर मॉम पाने के लिए… हाआआ।
सोनू: अबे… तुम लोग कब मिले थे मेरी मम्मी से… लास्ट टाइम बहुत दिन से तुम लोग तो घर पर भी नहीं आए ना… हम तो यहीं पार्क में या फिर अभिनाव के घर पे ही मिलते हैं। मुझे तो याद भी नहीं… कब मिले थे।
अभिनाव: अरे वो याद नहीं क्या तुझे… कि कॉलेज के जॉइनिंग डे फंक्शन पे तू तेरी मम्मी और डैड के साथ आया था… वहीं पे लास्ट टाइम देखा था मैंने।
राज: अरे हाँ… याद आया हाआ… आंटी आई तो थीं ना वहाँ पे… और हम मिले थे… बस हाई-हेलो की थी ना… भूल गया क्या सोनू।
सोनू: ओह अच्छा… हा हा… याद आया… मुझे हाँ… वहीं पे तो मिले थे… एक साल हो गया उसको।
अभिनाव: वैसे तेरी मम्मी उस फंक्शन में सबसे बेस्ट लग रही थीं… झूठ नहीं बोल रहा हूँ मैं। मैं तो हैरान ही हो गया था तेरी मम्मी को देखके उस दिन।
सोनू: अरे चुप… बुरी नज़र नहीं डालना मेरी मम्मी पे।
अभिनाव: बुरी नज़र नहीं… मैं तो बस बोल रहा हूँ कि तू बहुत लकी है यार… अच्छा रुक… शायद उस फंक्शन की पिक्स हैं मेरे फोन में… देख। तेरी मम्मी की सुंदरता का कोई भी मुकाबला नहीं।
सोनू ये सब सुनके थोड़ा जेलस भी फील हो रहा था… और थोड़ा सा अजीब भी। किसी और से या अपने ही दोस्तों से उसकी मम्मी के लिए ऐसी तारीफ़ करना क्या ठीक था… पर जैसे अभिनाव ने बताया था… सोनू के भी दिमाग में उस दिन फंक्शन में उसकी मम्मी कैसी लग रही थीं… वही सोचने लग गया… और तभी अभिनाव ने अपने फोन पे सोनू की मम्मी की फंक्शन वाली ये पिक दिखाई।
सोनू, राज और अभिनाव बस उस पिक को आँखें फाड़कर देखते ही रह गए। पार्क में जैसे एकदम सन्नाटा सा छा गया।
पार्क में सन्नाटा जैसे छा गया। राज, अभिनाव और सोनू भी उस पिक को देखने लग गए… और फिर अचानक सोनू बोल पड़ा।
सोनू: अरे तूने कहाँ ली पिक्स ये… मेरे पास भी नहीं ये तो पिक्स।
अभिनाव: अरे वो कॉलेज के फंक्शन में मैं एचडी कैमरा लेकर आया था… तो सभी पिक्स हैं मेरे पास… हम सब दोस्तों की… और वो सेलिब्रेशन्स की भी।
राज: अच्छा किया जो तूने ले ली यार पिक्स… वैसे सच में सोनू… तेरी मम्मी एकदम कमाल लग रही हैं… हीरोइन्स भी बेकार हैं उनके सामने।
सोनू: हा हा… जानता हूँ मेरी मम्मी बहुत सुंदर हैं… घर पे ही वो नॉर्मल कपड़ों में सुंदर लगती हैं… तो अब फंक्शन में ऐसे अच्छे से रेडी होकर आएँगी… तो और भी सुंदर लगेंगी ही ना।
अभिनाव: अच्छा… मतलब तू घर पर तेरी मम्मी को देखता रहता है… इसका मतलब… हाहा।
सोनू: अरे नहीं नहीं… पहले नहीं देखता था… पर अब वो… बस एक हफ्ते से… बस वो जैसे तूने बताया ना… शायद वो स्टोरीज़ और वीडियोज़ का असर हो रहा है मुझपे भी।
अभिनाव: अरे तो क्या गलत है… बस थोड़ा-बहुत घूर लेने में… और आँखों को ठंडा करने में… कुछ बिगड़ थोड़ी ना जाएगा यार। अब कोई पराया आदमी देखे तो गलत है… तू तो घर पर ही है… उनका बेटा… और देख ले तो क्या बिगड़ जाएगा थोड़ा-बहुत।
राज: हम्म… वैसे यार सच है… मैंने भी एक बार अपने गाँव जब गया था… तो तब वहाँ पे गलती से वो… वो मेरी माँ को हाफ न्यूड देख लिया था… वो वहाँ गाँव में बाथरूम का छत ऊपर से खुला था… और मैं अनजाने में ऊपर खड़ा था… तो मेरी नज़र पड़ गई थी… जब मेरी माँ बाथरूम में ब्लाउज़ उतार रही थीं। पर फिर मम्मी ने उधर एक पर्दा लगा दिया अपने आगे… और नहाने लगीं… तो मैं भी फिर उधर से चला गया। थोड़ी गिल्ट फीलिंग भी आई थी… पर सच कहूँ तो बहुत मज़ा भी आया था देखकर।
सोनू: हाँ… पर गिल्ट फीलिंग भी आती है… क्योंकि मम्मी से बहुत लगाव है ना… और उनको भी लगाव है… तो कुछ गलत भी नहीं सोच सकता हूँ।
अभिनाव: मैंने कब बोला कि गलत सोचो… अरे बस कुछ अगर तेरी मम्मी की सुंदरता साड़ी में ही दिख जाए… तू देख ले… तुझको अच्छा लग जाए… तू फैंटसी कर ले… इसमें क्या गलत है।
सोनू: अरे हाँ… पर ऐसे ही हम लोग सोचने लगे तो गलत फीलिंग्स भी आ जाएँगे यार… मुझे वन वीक में ही अट्रैक्शन वाली फीलिंग आ रही है… तो सोच… ऐसे ही हम सोचने लगे… तो मुझे तो सोच… फिर एक महीना… या कुछ महीने में गलत फीलिंग्स आ गए तो।
अभिनाव: हाँ… पर मैं कहाँ कह रहा हूँ कि तू सेक्सुअल थॉट्स लाए दिमाग में… अच्छा ओके यार… मैं अबसे कुछ भी इन्सेस्ट कहानियाँ या वीडियोज़ नहीं दिखाऊँगा।
राज: अरे नहीं रे… तू नहीं दिखाएगा तो मैं खुद ही देख लूँगा… हाहा।
अभिनाव: हाहा… देख सोनू… ये राज तो बड़ा ही छुपा रुस्तम निकला… मुझे तो लगता है मुझसे भी आगे निकल जाएगा ये।
सोनू: तुझसे आगे कोई नहीं निकल सकता… तूने तो इसमें मास्टर डिग्री ले रखी है।
सोनू: अच्छा अच्छा… अब चल… बस भी कर… चलते हैं ना… अब तो हॉलिडेज़ ही हैं… हम रेगुलरली मिलते रहेंगे हाँ।
अभिनाव: अच्छा दोस्त… ठीक है फिर… और राज… तू मुझसे आगे मत निकल जाना इन्सेस्ट में… हाहा।
तीनों अब वहाँ पार्क से अपने-अपने घर की ओर फिर से निकल पड़े।
पर इस वन वीक ने सोनू पे बहुत ही गहरा प्रभाव छोड़ा था। अब वो घर आ गया वापस… और हर रोज़ खुद ही जैसे नेट पर जाके इन्सेस्ट के बारे में… और स्पेशली मॉम-सन इन्सेस्ट पे जैसे सभी चीज़ें पढ़ने लगा… रिसर्च भी करने लगा। उसकी मम्मी तो दिन भर घर पर ही रहती थीं… या कभी-कभी मंदिर जातीं या मार्केट जाती थीं… और हफ्ते में एक बार नानी के घर जाती थीं।
अब सोनू जब भी उसकी मम्मी को देखता… तो वो अभिनाव और राज की बात याद आती थी… जो उन्होंने कही थी— “तू बहुत लकी है”। सच में वो सोचने लगा कि वो बहुत लकी है… जब-जब वो अपनी मम्मी को देखता था घर में। उसकी मम्मी जब फोन पे भी हॉल में बैठके बात कर रही होतीं… तो वो वहीं हॉल में बैठके उनको ऑब्ज़र्व करने लग गया था। जब वो फोन पे बात करते-करते हँसतीं… तो उनकी हँसी भी उसको कामुक लगने लगी थी। वो उसकी मम्मी का खिलखिलाकर हँसना… बात करते-करते वो उनका अपने बालों को आँखों के ऊपर से हटाना… कभी-कभी बात करते समय चूड़ियों को ठीक करना… ये सब कुछ ऑब्ज़र्व करने लगा था।
अब तो इस हॉलिडेज़ में सोनू जैसे अपनी मम्मी की हर एक मूवमेंट पे जैसे रिसर्च कर रहा हो… उस तरह से डिटेल्ड में देखने लग गया। कभी-कभी सोनू अपनी मम्मी के साथ थर्सडे को मार्केट जाता था… वो वहाँ पे भी जान-बूझके पीछे-पीछे थोड़ा सा चलने लग गया था अपनी मम्मी के… और उनके शरीर को पीछे से देखके उसको एक अजीब सी उत्तेजना होती थी। वो सर पर पल्लू ओढ़े हुए ही थोड़ा सा हलके से मटकते हुए चलती थीं… तो सोनू सब कुछ पीछे से ऑब्ज़र्व कर रहा था।
इतना ही नहीं… सोनू ने अब अपने मोबाइल पे भी चुपके से कुछ बार अपनी मम्मी की ही मार्केट में थोड़ी-बहुत पिक्स भी चुपके से खींच ली थीं। वो मोबाइल की पिक्स लाके फिर अपने लैपटॉप पे सेव कर ली थीं… और मोबाइल से डिलीट कर दीं… ताकि किसीको पता न चल सके। घर पर वो ऐसा कुछ नहीं खींच सकता था पिक्स… क्योंकि घर पर दादी भी थीं… और उन्होंने कहीं देख लिया… तो वो जानता था… खैर नहीं। दादी थोड़ा पुराने खयाल की औरत थीं… और वो भी सोनू को बहुत लाड़ करती थीं… पर ऐसी चीज़ अगर देख लें… तो वो भी भड़क ही जाएँगी… उसको पता था।
पर मार्केट में जब होता… तो उसकी मम्मी जब वेजिटेबल्स या कुछ खरीद रही होतीं… तो वो थोड़ा सा दूर जाके… कहीं कॉर्नर से उनकी पिक्स खींच लेता था। पहले तो मार्केट आने के लिए वो मम्मी के साथ मना करता था… पर आजकल तो खुद ही पहले से ही रेडी हो जाता था… वो अपनी मम्मी के साथ जाने के लिए। क्योंकि वहाँ पे जाके वो कुछ ऐसी पिक्स खींच पाता था अपनी सुंदर मम्मी की।
आगे क्या होता है… पढ़ें अगले पार्ट में।
