मै जीजू से शर्त हारकर चुद गई

Jiju se shart me harkar chudai hui:- मैं आपको अपने बारे में पहले बता दूँ फिर मेरी देसी सेक्स स्टोरी आपके सामने आएगी, इसलिए जरा गौर से सुनिएगा। मेरा नाम तो शिवानी है पर लोगों के लिए मैं लेडी राठौर हूँ। मेरी उम्र जानने से कोई फायदा नहीं, इसलिए मैं आपको ये बता दूँ कि मैं बहुत ही सेक्सी टाइप की लड़की हूँ। मेरे जिस्म को देख मर्दों के ही क्या, बुड्ढों तक के लंड भी टपक जाते हैं।

सच कहूँ तो भगवान ने मुझे फुर्सत से बैठकर बनाया होगा। मेरे छोटे-छोटे बूब्स और पतली कमर जिस पर हर मर्द फिदा होता है।

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Jiju se shart me harkar chudai hui

ऐसी हूँ मैं।

दोस्तों, अब मैं अपनी कहानी शुरू करने जा रही हूँ जिसे मेरा एक बहुत प्यारा दोस्त जिसका नाम राज है, वो लेकर आ रहा है।

तो दोस्तों, कथा स्टार्ट की जाए।

दोस्तों, ये बात तब की है जब मेरी नई-नई शादी हुई थी और मैं अपने पति के साथ जयपुर में रहती थी। मेरी शादी हुए अभी दो महीने ही हुए थे इसलिए मेरे चेहरे पर एक अलग सी चमक थी नई-नई शादी की। मेरे कहने का एक ये मतलब भी है कि मैंने नया-नया लंड लिया था जिसकी वजह से मेरे चेहरे पर एक अलग ही चमक आ गई थी।

आपके शब्दों में कहूँ तो मैं पूरी ‘कयामत’ लग रही थी।

मेरी शादी के दो महीने बाद ही मेरी बहन सुमन की शादी थी इसलिए मैंने अपने आप पर खूब ध्यान दिया। जब शादी का दिन आया तो अपने पति के साथ बहन की शादी में चली गई।

मैं इतनी खूबसूरत लग रही थी कि वहाँ जो भी कोई मुझे देखता तो बस देखता ही रह जाता। इसलिए मैंने नजर का काला टीका लगा रखा था। मैं अपने पति के साथ ही वहाँ शादी को अटेंड कर रही थी। उसी बीच जब भी मैं किसी से अलग से मिलती तो सब यही बोलते—

“क्या बात, शादी के बाद तो निखार आ गया। लगता है खूब लंड का स्वाद लिया है।”

मैं उनकी ये बात सुनकर थोड़ा शर्मा गई पर फिर इसी के चलते रात हो गई और शादी का समय आ गया। हमारे परिवार में शादियाँ राजस्थानी स्टाइल में होती हैं इसलिए जब शादी शुरू हुई तो मैंने खूब मजा लिया। और ऐसे ही चलते-चलते शादी भी खत्म हो गई।

पर दोस्तों, मैं आपको ये बता दूँ कि हमारे राजस्थान में ये एक रीत है कि जब शादी होती है तो दूल्हा लड़की के घर एक रात रहता है और वहीं अपनी सुहागरात मनाता है।

तो जैसे ही शादी खत्म हुई तो मैंने अपनी बहन को पहले ही कमरे में बिठा दिया और जीजू को कमरे में जाने से रोक लिया जब तक उन्होंने अपनी साली को नैक नहीं दी। अब जब जीजू ने अपनी साली को नैक दी तो मैंने भी रास्ता साफ कर दिया और उन्हें अंदर भेजकर दरवाजा बंद कर दिया।

अब मैं वहाँ से चली गई और बाहर आकर अपनी भाभी के पास खड़ी हो गई। तभी भाभी बोलीं—

भाभी: चल आजा देखते हैं कि मेरा नंदोई क्या कर रहा है।

मैं भाभी की बात सुनकर शर्मा गई पर दिल तो मचल रहा था उनको देखने का इसलिए मैंने भाभी की बात मान ली और उनके साथ चल पड़ी।

भाभी और मैं उनके कमरे की खिड़की के बाहर खड़े हो गए और थोड़ी सी खिड़की खोलकर उनको निहारने लग गए।

तब हमने देखा कि सुमन वहीं बिस्तर पर बैठी थी और जीजू उनके कपड़े उतार रहे थे। कपड़े उतारते वक्त उन्होंने एक-दूसरे को किस भी किया जिससे देख हमारे अंदर की आग भड़क उठी। तभी साथ ही साथ जीजू ने सुमन के बूब्स को भी दबा डाला और इसे देख हमारे अंदर भी मस्ती छा गई।

अब हमने जो देखा वो देखने लायक था। जीजू ने एक ही पल में सुमन के सारे कपड़े उतार दिए जिससे देख हमें अपनी सुहागरात का दिन याद आ गया और हम मस्ती में खड़े ये सब देखते रहे।

अब जीजू ने उनके बदन को जीभ से चाटना शुरू कर दिया जिससे हमारे अंदर भी गर्मी आने लग गई। सुमन उनकी बाहों में थी और वो सुमन की बाहों में थे पर उनको देख ऐसा लग रहा था कि मानो एक-दूसरे से कितना गहरा प्यार हो।

अब जीजू ने सुमन के बूब्स को मुँह में भरा और चूसने लग गए जिससे सुमन भी मदहोश होती चली गई और लंबी-लंबी सिसकारियाँ लेने लग गई। ये देख हमसे भी नहीं रहा गया और हमने एक-दूसरे को पकड़कर एक-दूसरे के बूब्स दबाने लग गए।

अब तो जीजू खड़े हुए और अपने सारे कपड़े उतारकर अपने सुपाड़े को सामने ले आए जिससे देख हमारी हालत तो पूरी तरह खराब हो गई और हमारे मुँह से उसको लेने की तड़प उठने लगी जैसे कि कभी कोई मिठाई सामने हो और खा न पाए तो उस समय जो मुँह में डालने की इच्छा होती है वैसा ही हाल हमारा भी था।

पर सुमन की तो अब खैर नहीं थी। जीजू का इतना मोटा 7 इंच लंबा लंड देखकर हमारी हवा टाइट हो रही थी तो सुमन ने तो इसे अंदर लेना था तो उसका क्या हाल होगा।

अब जीजू ने बिना कोई देरी किए सुमन की चूत पर अपनी जीभ रखकर चाटना शुरू कर दिया। जिसको देख मैंने भी अपनी चूत में हाथ डालकर मसलना शुरू कर दिया क्योंकि जीजू के इतने मोटे लंड को देखकर तो मन कर रहा था कि काश इस लंड को मैं ले लूँ पर मेरी जगह तो सुमन थी जिसे जीजू चाट रहे थे।

अब जीजू ने अपना सुपाड़ा सुमन की चूत पर रखा और उसके होंठों को मुँह में भरते हुए एक जोरदार धक्का दे दिया जिससे सुमन एकदम जोर से चीख उठी। उसकी ऐसी चीख सुनकर मेरी चूत ने पानी ही निकाल दिया और लंड लेने के लिए तड़प उठी।

अब हमने देखा कि जीजू ने दो धक्के लगाए और अपना सुपाड़ा सुमन की चूत में पूरा घुसा ही दिया। सुमन दर्द से चिल्लाती रही और जीजू उससे लगातार चोदते रहे। इधर मेरा भी बुरा हाल हो रखा था। मेरी उंगली भी चूत में तांडव कर रही थी और चुदाई को देखकर मेरी पैंटी ही क्या मेरा पेटीकोट तक गीला हो चुका था।

सुमन दर्द से चिल्लाए जा रही थी और जीजू चोदे जा रहे थे। फिर मैंने भाभी की तरफ देखा तो भाभी अपने बूब्स को मसल रही थीं। फिर हम दोनों अपने कमरे में आकर लेट गए और उनकी चुदाई को याद करते रहे।

मेरी चूत तो लंड लेने के लिए उतावली हो रही थी पर लंड तो मैं ले नहीं पा रही थी। तभी दरवाजे के बाहर भैया आए और भाभी उनके साथ चली गईं क्योंकि भाभी भी अपना भैया का लंड चाहती थीं।

अब मैं कमरे में अकेली थी इसलिए मैं फिर से सुमन के कमरे के पास जाकर देखने लग गई तो अब भी जीजू सुमन को चोदे जा रहे थे। और सुमन का तो मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि वो दर्द में तड़प रही है या मजे ले रही है। पर खैर मैं तो जीजू के लंड को देख-देखकर अपनी आँखें सेंक रही थी। फिर थोड़ी देर बाद मुझे नींद आने लग गई और मैं कमरे में आकर सो गई।

फिर जब सुबह हुई तो मैं सुमन के कमरे की तरफ गई तो अचानक मुझे जीजू मिले जिससे मैंने छेड़ते हुए कहा—

मैं: क्या बात जीजू, रात को तो बड़ी चीखें निकल रही थीं।

जीजू: तुम्हें कैसे पता?

मैं: अरे जीजू मैंने सब देखा था।

जीजू: अच्छा जी, यही है बस। जो भी मेरे साथ होता है उसकी ऐसे ही चीखें निकलती हैं। क्यों, तुम्हारे पति ने नहीं निकाली तुम्हारी चीखें?

मैं: मेरे लिए अभी कोई आया ही नहीं जो मेरी चीखें निकाल दे।

ये सुनते ही जीजू बोले—

जीजू: अगर मैं निकलवा दूँ तो!!

उनकी बात सुनकर मैं तो मचल उठी पर खुद को संभालते हुए कहा—

मैं: देखेंगे जब टाइम आएगा।

जीजू: तो लगी शर्त।

मैं तो चाहती थी कि जीजू का लंड मेरी चूत को मिले इसलिए मैंने उनकी शर्त मान ली।

फिर मैं वहाँ से चली गई और उस दिन मैं जीजू के सामने दो बार आई। और जब विदाई का समय आया तो मैंने जीजू के पास जाकर बोल दिया—

मैं: जिस दिन आप मेरी चीखें निकालोगे तो मानूँगी।

ये सुनते ही जीजू मुस्कुराते हुए मुझे शगुन में सोने की रिंग देते हुए चले गए। अब मैं भी अपने पति के साथ घर आ गई और घर आकर मैंने अपने पति को सेक्स के लिए मनाया और उनका लंड अपनी चूत में खूब लिया। पर उस समय मेरे माइंड में सिर्फ जीजू का लंड ही चल रहा था। मन कर रहा था कि मुझे तो बस अब जीजू का लंड ही चाहिए।

मैं दिन-रात यही सोचती रहती थी और अब तो पति के भी टूर ज्यादा लगने लग गए थे इसलिए मैं रात भर तड़पती रहती थी और जीजू के लंड को याद करती रहती थी। पर कहते हैं ना जब कुछ सच्चे दिल से माँगो तो भगवान भी मिल जाते हैं।

मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। कुछ दिन बाद जीजू हमारे घर आ गए और जैसे मेरी दिल की तमन्ना पूरी हो गई। मैंने जब जीजू को देखा तो जीजू ने मुझे आँख मार दी और फिर मैं शर्माते हुए किचन में चली गई और खाना बनाने लग गई। मेरे पति और जीजू बाहर बैठे बातें करने लग गए।

तभी जीजू ने बताया कि उन्होंने अपने लिए होटल में रूम बुक करवा लिया है।

ये सुनते ही मेरे पति को बहुत गुस्सा आया।

पति: देखो मैं कह देता हूँ आपको, हमारे होते हुए आपको किसी भी होटल में रहने की जरूरत नहीं है। वरना हमारे यहाँ रहने का फायदा ही क्या।

जैसे ही मेरे पति ने जीजू को अपने घर में रहने के लिए मना लिया मेरा तो खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। मैं समझ चुकी थी कि अब जीजू 3-4 दिन यहाँ रुकेंगे और 3-4 दिन मेरी चुदाई होती रहेगी।

अब हम तीनों देर रात तक आपस में बातें करते रहे। रात काफी हो चुकी थी इसलिए हम सोने की तैयारी करने लग गए। मैं अपने पति के साथ सो रही थी और जीजू अलग रूम में सो रहे थे। मैं अपने पति के साथ सो रही थी पर मेरा दिल तो जीजू का लंबा और मोटा लंड लेने का कर रहा था।

पर मैंने जैसे-तैसे रात निकाल ली पर सारी रात मेरे सपनों में जीजू का लंड घूमता रहा। मैं सुबह उठी और रोज की तरह अपने पति देव के लिए ब्रेकफास्ट बना रही थी। तभी मेरे पति का ऑफिस से फोन आया और पता चला कि उन्हें अचानक 4 दिनों के लिए ऑफिस के काम से कहीं बाहर जाना है।

ये सुनते ही मेरी चूत में तो खुजली शुरू हो गई। मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लग गया क्योंकि अब तो मैं दिन-रात अपने प्यारे जीजू से चुद सकती थी।

जब मेरे पति देव तैयार होकर घर से निकलने लगे तभी जीजू उनके पास आए।

जीजू: सुनो सुनील, मैं अब होटल में जा रहा हूँ। शालू घर पर अकेली है और मेरा यहाँ इसके पास रहना ठीक नहीं है।

पति: मैंने कुछ नहीं सुना। आप हमारे बड़े हैं इसलिए आपको यहीं पर रहना पड़ेगा चाहे कुछ भी हो जाए। और अब तो ये और भी ज्यादा जरूरी बन जाता है क्योंकि शालू घर में अकेली है। मेरे जाने के बाद कम से कम कोई तो बड़ा इसके पास रहेगा।

मेरे पति देव की बात सुनकर जीजू मान गए और मेरी चूत को तसल्ली मिली कि अब उसकी चुदाई आराम से हो सकती है।

मेरे पति घर से निकल चुके थे और उनके साथ ही जीजू भी घर से निकल गए। अब मैं घर में अकेली रह गई थी।

तो अब मैं नहाने लग गई और नहा-धोकर जब मैं थोड़ा फ्री होकर बैठी तो मेरे दिमाग में आया कि अभी तक जीजू ने मुझे हल्का सा भी इंटरेस्ट नहीं दिखाया और मैं बेफालतू में उनके लंड से चुदाई के सपने देख रही हूँ।

पर ये तो सच था कि मैं और मेरी चूत उनके बड़े से लंड के लिए तड़प रही थी। मुझे किसी भी हालत में उनका लंड चाहिए था।

मेरे दिमाग में यही चल रहा था कि मैं किस तरह जीजू को सेक्स करने के लिए मनाऊँ। सेक्स करने की पहल मैं कैसे करूँ। ये सब सोचते-सोचते दोपहर हो गई थी।

तभी घर का फोन रिंग करने लग गया। मैंने फोन पिक किया तो देखा कि फोन जीजू का था। उन्होंने कहा कि मैं थोड़ी देर तक आ रहा हूँ।

उनकी बात सुनते ही मैं उठी और उनके लिए खाना बनाने लग गई। मैंने जब तक खाना बनाकर तैयार किया तब तक जीजू भी घर आ गए थे।

आज बाहर गर्मी बहुत ज्यादा हो रही थी इसलिए जीजू आते ही नहाने चले गए और नहाकर अपनी व्हाइट बनियान और चेक वाली लुंगी पहनकर लंच करने आ गए।

मैंने उन्हें खाना सर्व किया। मैंने देखा कि वो मुझे ही घूर-घूरकर देख रहे थे। और देखें भी क्यों न, मैंने आज डीप नेक का खुला सा ब्लाउज डाला हुआ था जिसमें से मेरे मस्त मोटे-मोटे बूब्स बाहर उछल रहे थे।

जीजू की आँखें मेरे बूब्स पर ही थीं और मेरे ब्लाउज के अंदर देखना चाहती थीं। इसलिए मैं भी उनके सामने जानबूझकर बार-बार झुक रही थी।

फिर मैंने उनके साथ ही बैठकर खाना खाया। और खाना खाते हुए मैंने और जीजू ने कोई खास बात नहीं की। हमने कुछ ही देर में खाना खा लिया।

खाना खाने के बाद जीजू अपने कमरे में रेस्ट करने के लिए चले गए और मैं किचन में काम करने चली गई।

कुछ देर बाद मैंने अपने सारे काम खत्म किए और उसके बाद मैं जानबूझकर जीजू के कमरे में आ गई।

मैं: जीजू आपको कुछ और अगर चाहिए तो मुझे बता दो।

शायद जीजू मेरे इसी सवाल का इंतजार कर रहे थे। वो झट से बोले—

जीजू: हाँ शालू, चाहिए तो था पर…!!

तभी जीजू ने अपनी बात को बीच में छोड़ दिया और बात को बदलते हुए मुझे उसी शर्त की याद दिला दी। उनकी बात सुन मुझे फिर से शर्त याद आ गई वरना मैं तो भूल ही गई थी। पर फिर मैंने जीजू को टालमटोल करते हुए कह दिया—

मैं: जीजू जी ऐसी बातें तो शादी में ही अच्छी लगती हैं। आप तो ऐसे ही सीरियस ले गए मेरी बात को।

जीजू: साली साहिबा, हम तो उन मर्दों में से हैं जो एक बार किसी से शर्त लगा लें वो पूरी करके ही हटते हैं।

जीजू की बात सुन मैं समझ गई कि ये तो मुझे चोदना चाहते हैं।

तभी मैं उठकर अपने कमरे में जाने लगी पर तभी जीजू ने पीछे से मेरा हाथ पकड़ लिया और मेरे पूरे जिस्म में एकदम करंट दौड़ने लग गया। मेरे दिल की इच्छा पूरी हो गई क्योंकि मैं भी ये चाहती थी कि जीजू जी पहले पहल करें और आज वही बात हो रही थी। अचानक ही मेरी साँस तेज हो गई और मैं अपना हाथ उनके हाथों से छुड़वाकर सीधा अपने कमरे में चली गई और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। तभी जीजू जी भी मेरे पीछे-पीछे कमरे के बाहर आकर दरवाजा खटखटाने लग गए।

जीजू: अरे अब क्या हुआ साली साहिबा? देखो या तो तुम पहले शर्त लगाया मत करो। अब लगाई है तो उसे पूरा करो। अब मैं भी देखना चाहता हूँ कि मेरी साली चुदाई में चिल्लाती है या नहीं। चलो अब दरवाजा खोलो।

मैं: नहीं जीजू प्लीज ऐसा मत करो। ये ठीक नहीं है।

दोस्तों, अगर मैं सच कहूँ तो मेरे दिल में जीजू से चुदने का, मेरी चूत उनका लंड लेने के लिए तरस रही थी। पर कहीं न कहीं मेरे दिल में ये भी था कि मैं अपने पति से ऐसा धोखा नहीं कर सकती थी। काफी देर तक जीजू दरवाजे के सामने खड़े रहे और मुझे चुदने के लिए मनाते रहे पर मैंने दरवाजा नहीं खोला। जब वो हार मानकर वापस जाने लगे तभी पता नहीं मेरे मन में क्या हुआ मैंने झट से दरवाजा खोल दिया और साइड में खड़ी हो गई।

दरवाजा खुलते ही जीजू एकदम खुशी से पागल हो गए। वो एकदम भागकर कमरे में आए और मेरे पास आकर मेरा चेहरा अपने हाथों से ऊपर करके बोले—

जीजू: देखो शालू तुम्हें डरने की जरूरत नहीं है। तुम्हें पता है मैंने जब से तुम्हें देखा है मैं और मेरा लंड तुम्हारे दीवाने हो गए हैं। तुम्हारा जिस्म कयामत है। बस तुम मुझे एक बार अपना पूरा जिस्म दे दो।

दोस्तों, मुझसे तो कुछ बोला भी नहीं जा रहा था। भला मैं क्या जवाब देती उन्हें। पर तभी जीजू ने अपने होंठ मेरे नाजुक होंठों पर रख दिए और मेरे होंठों को चूसने लग गए। मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लग गया क्योंकि आज पहली बार मैं अपने पति के अलावा किसी और आदमी के हाथों में थी। जीजू लगातार मेरे होंठों को चूस रहे थे और मेरे बूब्स को अपने हाथों से मसल रहे थे। तभी जीजू ने मुझे अपनी गोद में उठाया और बेड में लिटा दिया।

मुझे बिस्तर पर लिटाकर जीजू ने अपनी लुंगी उतारकर साइड में फेंक दी। अब वो अंडरवियर में ही थे। दोस्तों सच कहूँ तो उनका लंड अंडरवियर में ही बहुत खतरनाक लग रहा था। मैं सोच रही थी कि ये तो आज मेरी चूत के छिदड़े उड़ा देगा। और उसके बाद जीजू धा मेरे ऊपर आकर मुझे चूमने और चूसने लग गए।

जीजू साथ-साथ मेरे बूब्स को मसल भी रहे थे। मैं मदहोश होती जा रही थी। उन्होंने मेरा ब्लाउज एकदम से उतार दिया और मेरे बूब्स को ब्रा में देखते ही हाथों में पकड़कर चूसने लग गए। मेरी और मेरे बूब्स की बुरी हालत हो रही थी। तभी जीजू ने मेरी ब्रा खींचकर फाड़ दी और साइड में फेंक दी। अब तो वो पागलों की तरह मेरे बूब्स को चूसने लग गए। वो मेरे बूब्स को ऐसे चूस और मसल रहे थे मानो कि वो मेरे बूब्स उखाड़ रहे हों।

और नीचे मेरी चूत का बुरा हाल हो रहा था। मेरी चूत में से पानी की नदियाँ निकल रही थीं। मैं अब चुदने के लिए कुछ भी करने को तैयार हो गई थी। मुझे अब अपने सपनों का लंड चाहिए था जो कि इस समय जीजू के पास था। मैं किसी भी हालत में जीजू का लंड अपनी चूत में लेना चाहती थी।

कुछ देर मुझे चूमने और चूसने के बाद जीजू ने मेरे जिस्म से मेरे सारे कपड़े अलग कर दिए और दूर साइड में फेंक दिए। अब मैं उनके सामने पूरी नंगी लेटी हुई थी। शर्म के मारे मेरी आँखें तक नहीं खुल रही थीं।

तभी मुझे मेरे हाथों में कुछ महसूस हुआ। वो जीजू का नंगा और बहुत बड़ा सा लंड था जो कि अब मेरे हाथ में था। उनका लंड बहुत बड़ा और मोटा होने के साथ-साथ गरम भी था। मुझे लग रहा था कि ये तो आज सच में मेरी चीखें निकाल देंगे। और आज मैं जीजू से लगाई हुई शर्त हार जाऊँगी।

मैंने भी अब अपनी शर्म को हटाते हुए अपने जीजू का 7 इंच का सुपाड़ा हाथ में पकड़ ही लिया और हाथ में पकड़ते ही मुझे उनके मोटे सुपाड़े का एहसास होने लग गया। जीजू का लंड इतना मोटा और नरम था कि मैं तो पागल हुई जा रही थी। और ये देख मैं जान चुकी थी कि अब तो मैं अपनी शर्त भी हार जाऊँगी क्योंकि उनके सुपाड़े के आगे तो मेरी ना हो जानी है।

पर हाँ ये मेरे लिए पहली बार था क्योंकि मैं सिर्फ अपने पति का लंड ही जानती थी जो कि कुछ कम भी नहीं था। पर जब भी मेरी चूत में खुजली हुआ करती थी उस दिन तो मेरे पति टूर पर होते थे जिसकी वजह से मैं रात भर अपने पति के लंड को याद कर अपनी चूत में उंगलियाँ देती रहती।

जीजू का लंड मेरे हाथों में तो था ही पर उनकी बॉल्स भी मेरे दूसरे हाथ में थीं जिससे मैं हल्का-हल्का दबा रही थी। फिर अचानक से ही जीजू ने मेरा मुँह अपने लंड की तरफ किया और अब मेरे हाथ से लंड निकालते हुए मेरे मुँह पर रखकर उसे फेरने लग गए। मैंने ये सब कभी पहले नहीं किया था इसलिए मुझे इसका इतना पता नहीं था। पर तभी जीजू ने मेरे होंठों पर अपना लंड रखा और होंठों के बीच धीरे-धीरे रगड़ना शुरू कर दिया।

अब मैंने अपनी जीभ बाहर निकाली और सुपाड़े को ऊपर से चाटा। मुझे लंड का स्वाद नमकीन सा लगा पर बहुत ही अच्छा लगा इसलिए मैंने अब उनके लंड को चाटना शुरू कर दिया। जीजू भी मेरे लंड को चूसने से खुश होते जा रहे थे। और फिर अचानक उन्होंने मेरे मुँह में अपना मोटा सुपाड़ा डाल दिया जिससे मुझे एकदम से धक्का लगा और उल्टी जैसा भी लगा। पर मैंने भी हार न मानते हुए लंड को ऊपर-नीचे करने लग गई।

मुझे जीजू के लंड को ऊपर-नीचे करने में बहुत मजा आ रहा था और वो भी अपनी गाँड हिला-हिलाकर लंड को मेरे गले में उतार रहे थे। जीजू का लंड मेरी थूक में पूरा भीग चुका था और ऊपर-नीचे हो रहा था।

अब जीजू ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरी चूत के पास जाकर मेरी चूत की खुशबू लेने लग गए। तभी जीजू ने अपने एक हाथ की उंगली मेरी चूत के ऊपर रखी और रगड़ने लग गए। उधर उनका दूसरा हाथ मेरे बूब्स को दबाए जा रहा था जिससे मेरे मुँह से मदहोशी से भरी सिसकारियाँ निकल रही थीं।

तभी जीजू ने अपनी एक उंगली चूत में डाल दी जिससे मुझे एकदम से बहुत मजा आया और मैंने उनके हाथ पर ही अपना हाथ रख लिया जो हाथ मेरे बूब्स पर था। जीजू ने इस बात को समझ लिया कि मैं गरम हो रही हूँ। तभी जीजू ने अब अपना मुँह मेरी चूत पर रखा और अपनी लंबी जीभ निकालकर मेरी चूत को चाटने लग गए।

मुझे इसमें बहुत मजा आ रहा था और आआआह्ह्ह… आआह्ह्ह… आाह्ह की आवाजें भी निकल रही थीं। तभी जीजू ने मेरे चूत के दाने को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया जिससे मेरे अंदर एक बिजली सी उठ पड़ी और पागल सी हो गई।

मेरे मुँह से सिसकारियाँ तो निकल ही रही थीं पर मजे में आाह्ह आाह्ह भी निकल रही थीं। तभी जीजू ने अपनी जीभ चूत में डाल दी जिसकी वजह से मेरी साँसें भी अब तेज हो गईं और मैं पूरी मजे में पागल हो गई क्योंकि मेरे पति ने ना तो कभी मेरी चूत चाटी और ना ही कभी अपना लंड मुँह में डालकर चूसवाया। इसलिए ये सब मेरे लिए पहली बार था।

अब जीजू ने मुझसे कहा—

जीजू: चीखने के लिए तैयार हो जाओ।

तो मैं घबरा गई कि अब मेरा क्या होगा!!

जीजू ने अपना लंड मेरी चूत के ऊपर रखा और ऊपर से चूत को रगड़ने लग गए। चूत के चिकनेपन की वजह से वो फिसल रहा था। इसलिए अब जीजू ने देरी न करते हुए अपना सुपाड़ा मेरी चूत के बिल्कुल सामने रखा और मेरे बूब्स को हाथों में लेते हुए एकदम से जोरदार धक्का दे दिया जिससे मेरी जोर से चीख निकल गई। अभी तो चीख का दर्द खत्म हुआ ही नहीं था कि जीजू ने साथ ही साथ तीन धक्के और मार दिए जिससे मेरी चूत को पूरी फाट ही गई और मेरा भी दर्द के मारे बुरा हाल हो गया। सच में जीजू का लंड बहुत ही ज्यादा खतरनाक था।

जीजू का लंड मेरी चूत में उछल-कूद तो कर ही रहा था पर मुझे मजा भी बहुत आ रहा था। जीजू ने अब की बार मेरी चूत से लंड को पूरा बाहर निकाल दिया और मेरे बूब्स को मुँह में भरकर चूसने लग गए जिससे मेरी चूत और पागल हो गई और मेरा हाथ उनके सिर के बालों को सहलाए जा रहा था।

तभी अचानक उन्होंने बूब्स को चूसते हुए मेरी चूत में एक जोरदार धक्का दिया जिससे उनका लंड मेरी बच्चेदानी तक लगने लग गया जिससे मेरे मुँह से दर्द की आवाजें तो निकल ही रही थीं पर मस्ती भरी आवाजें भी निकली जा रही थीं।

जीजू ने अब अपने लंड को मेरी चूत में धीरे-धीरे करना शुरू कर दिया और मेरे जिस्म को अपनी जीभ से चाटने लग गए। पर मेरी चूत अब उनके लंड को अच्छे से पाना चाहती थी इसलिए अब मैंने अपनी हल्की सी गाँड उठाई जिससे वो समझ गए कि मैं उनका सुपाड़ा अंदर तक लेना चाहती हूँ।

जीजू ने इस बात को समझते ही मेरी टाँगें उठाकर मेरी चूत में अपने सुपाड़े को बच्चेदानी तक उतारने लग गए। वाह! क्या मजा आ रहा था मुझे।

मेरी तो ये दिल की ख्वाहिश थी क्योंकि मेरे पति का लंड भी पूरा बच्चेदानी तक नहीं लग पाता था इसलिए मैं जीजू के लंड का पूरा स्वाद ले रही थी। जीजू भी मेरी बच्चेदानी तक अपना लंड उतारे जा रहे थे और लगातार मुझे चोदे जा रहे थे। तभी मेरी चूत में उनका लंड टाइट हो गया और मेरी चूत ने उनके लंड को ही अपने पानी से पूरा गीला कर दिया।

मैं तो थक चुकी थी पर जीजू अभी भी बिना रुके मुझे चोदे जा रहे थे। जिसके चलते अब मैं भी होश में आकर अपनी गाँड हिला-हिलाकर लंड अंदर ले रही थी। अब जीजू ने मुझे घोड़ी बना दिया और मेरे ऊपर चढ़कर मुझे जबर्दस्त तरीके से, कुत्ते की तरह अपनी कुतिया को चोदे जा रहे थे। पूरे कमरे में फच्च-फच्च की आवाजें गूँज रही थीं और मेरी लंबी-लंबी सिसकारियों की आवाजें भी गूँजी जा रही थीं।

जीजू ने अपनी स्पीड फिर दिखाई और मुझे चोदने लग गए। उन्हें बहुत पसीना भी आ गया था पर वो हैं कि रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। करीब 30 मिनट ऐसे ही चलता रहा और फिर अचानक से लंड का इशारा हुआ और जीजू ने मेरे ऊपर चढ़कर मेरी कमर पकड़कर जोर-जोर से चोदने लग गए और एक ही पल बाद उनके सुपाड़े ने गरम-गरम पानी मेरी चूत में निकाल दिया जिससे मैं बहुत खुश हुई और मेरी चूत तो उनके पानी से पूरी नहा चुकी थी।

मैं इस चुदाई से बहुत खुश थी और मैंने शर्त हारकर भी बहुत बड़ी जीत हासिल कर ली थी।

फिर अचानक से जीजू ने मुझे चूमना शुरू कर दिया। मैं ये देखकर हैरान थी कि अभी जीजू ने इतनी जबर्दस्त चुदाई करी है और अब फिर से खड़े हो गए।

जीजू ने फिर से अपना लंड मेरी चूत पर रखा और डाल दिया। मैं चीखती रही और जीजू चोदते रहे। ये सिलसिला तो फिर सारी रात तक चलता रहा और मेरी आवाजें भी सारी रात कमरे में गूँजती रहीं।

दोस्तों, फिर मेरी ये जीजा-साली की चुदाई की देसी सेक्स स्टोरी कैसी लगी आपको? मुझे इसका फीडबैक जरूर देना। इंतजार रहेगा।

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