बड़ी दीदी को पटा के चोदा 1
Badi sexy Didi ko pata ke choda:- हाय, मेरा नाम रॉनी है और मैं कोलकाता का रहने वाला हूँ (yeh meri hindi sex story hai)। मेरे घर में मम्मी और दीदी हैं। पापा 8-10 महीने दुबई में ही रहते हैं।
पहले मुझे लगता नहीं था कि फैमिली में सेक्स मुमकिन है। लेकिन अनलाइन सेक्स स्टोरीस की मदद से मुझे ये सब पता चला।
ये कहानी मेरे — मेरी दीदी (रिया) के साथ रिलेशन की है जो 3 साल पहले हुआ। दीदी मुझसे 5 साल बड़ी हैं और ये कहानी तब की है जब मैं 19 का था और दीदी 24 की थीं।
दीदी का बदन तब डेवलप हो चुका था। उनका साइज़ 36″28″36″ था। कई बार दिन में गलती से उनके बूब्स टच हो जाते थे। उससे मेरा लुंड खड़ा हो जाता था। क्योंकि मैं भी बड़ा हो रहा था तो मुझे भी दीदी को देखकर गंदे ख्याल आने लगे।
मैं उनके बूब्स टच करने के बहाने ढूँढता था। झुकते वक़्त क्लीवेज पे नज़र होती थी मेरी। जब उन्होंने ब्रा नहीं पहनी होती थी, तो टी-शर्ट के ऊपर से मैं उनके निप्पल्स देखता था। बस यही सब होता था और कई बार, लकिली क्लीवेज, निप्पल्स और बूब्स का टच मिल जाता था।
फिर मेरी इच्छा हुई कि अब दीदी को नंगा देखना है। मैं कॉलेज और घर में प्लान सोचने लगा। मेरा सपना था कि दीदी को फ़ोर्सफ़ुली कुछ न करूँ, बट ऐसा कुछ समझाऊँ जिससे उनको लगे कि नंगा होना सही है।
हम दोनों एक कमरे में ही सोते हैं, तो मुझे फ़ायदा बहुत हुआ अपना प्लान पूरा करने में। एक सुबह मैंने टीवी देखते हुए देखा कि दीदी झाड़ू लगा रही थीं। टी-शर्ट का गला काफ़ी बड़ा था, तो क्लीवेज दिखने के डर से पल्लू लिया हुआ था।
लेकिन झुकते ही पल्लू स्लिप हो रहा था और वो भी परेशान होकर बार-बार ठीक कर रही थीं। उसको देखकर मुझे एक आइडिया आया। मैंने सोचा कुछ दिन ऐसी-ऐसी चीज़ों पे ग़ौर करता हूँ, जिसमें उन्हें कपड़ों से प्रॉब्लम हो रही हो।
फिर मैं उन सब चीज़ों को लेके समझाऊँगा कि कपड़े न पहनने से कितना आराम होगा। अगले दिन से मैं उन्हीं चीज़ों को देखने लगा। और भी ऐसी कई चीज़ें मिलीं जिसमें दीदी को कपड़ों के साथ प्रॉब्लम होती थी।
जैसे कि दीदी जब नहाके निकलती थीं तो टॉवल संभाल के आती थीं, ताकि गिर न जाए। ब्रा जब पहनती थीं तब उनको बहुत खुजली होती थी और टाइट फ़ील होता था। गर्मी हो तब भी मेरे सामने फुल ट्रैक पैंट में होती थीं। कॉलेज से आके मुझे बाहर निकाल देती थीं, क्योंकि चेंज करना होता था।
ये सब नोट करके, मैं मौका देखने लगा दीदी से बात करने का। एक दिन फिर से वो पल्लू वाला किस्सा हुआ और इस बार दीदी झाड़ू फेंक के बेड पे बैठ गईं। मैंने दीदी को पूछा –
मैं – क्या हुआ?
दीदी – कुछ नहीं।
मैं – बताओ तो।
दीदी – (उदास चेहरा बनाके) ये पल्लू से परेशान हो गई हूँ। झाड़ू भी नहीं हो रहा।
मैं – एक बात पूछूँ? नाराज़ मत होना।
दीदी – क्या?
मैं – नहीं टिक रहा, तो पल्लू क्यों डालती हो आप?
दीदी – तुम लोग नहीं समझोगे।
मैं – समझता हूँ इसीलिए ही बोल रहा हूँ। हटा दो न पल्लू।
दीदी मेरी बात सुनकर गुस्सा हो गईं।
मैं – देखो दीदी, एक सीरियस बात बोल रहा हूँ, तुम्हारे ही आराम के लिए। मैंने देखा है आपको कैसे स्ट्रगल करना पड़ता है, अपने कपड़े संभालने में।
मैं – कॉलेज से आके, रूम बंद करके तुरंत कपड़े चेंज करना, क्योंकि पसीने से गीले होते हैं। नहा के टॉवल पकड़ना और सब इसीलिए क्योंकि मैं हूँ घर में।
मैं – देखो दीदी, मैं भी बड़ा हो गया हूँ, सब कुछ जानता हूँ, ऊपर से नीचे। मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता अब।
दीदी गुस्से में – तो क्या नंगी घूमूँ घर में?
मेरा मन तो बहुत था हाँ बोलने का, बट मैंने बोला –
मैं – नहीं, मैं तो बस ये बोल रहा हूँ कि जैसा आपको कंफ़र्टेबल लगता है, वैसे रहा करो। कपड़ों में या बिना कपड़ों के, मुझे इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है।
दीदी बहुत गुस्सा हुईं और उठ के चली गईं। उसने मुझसे कई दिन बात नहीं की, पर मुझे पता था कि दीदी को एहसास होगा कि मेरी बात सही थी।
नेक्स्ट दिन से कपड़ों की फिर से तकलीफ़ शुरू। वो मुझे देखती और मैं इग्नोर करके चला जाता। मुझे समझ आ गया कि दीदी को एहसास हो रहा है, लेकिन वो बोल नहीं पा रही हैं।
मैं और जलाने के लिए अपना टी-शर्ट उतार के आराम से पंखे के नीचे बैठ जाता और वो पसीने से लड़ती रहती। कुछ दिन बाद जब बात फिर से होने लगी तो मैंने पूछा –
मैं – दीदी, कैसी लग रही है लाइफ़?
वो समझ गईं, लेकिन थोड़ा चुप होकर बोलीं –
दीदी (तंगी वाला एक्सप्रेशन देते हुए) – प्रॉब्लम तो होती है, लेकिन मैं सब खोल कैसे दूँ?
मैं – सब खोलने को कौन बोला? कुछ-कुछ तो कर ही सकती हो?
दीदी – जैसे?
मैं – जैसे कॉलेज से आने के बाद रूम बंद करके चेंज करती हो। वो मेरे सामने किया करो।
दीदी – तुझे पता है, तू क्या बोल रहा है?
मैं – हाँ, वो भी पूरे कपड़े चेंज करने को नहीं बोला।
दीदी – तो फिर?
मैं – सिर्फ़ ब्रा में रह सकती हो। वो भी तो एक तरह का स्लीवलेस टॉप ही है। हवा लगेगी तो आराम मिलेगा। जो कवर होना चाहिए वो तो है ही। एक बार ट्राई करके देखो, नहीं ठीक लगा तो मत करना।
मैं ट्राई कर रहा था कि वो कपड़े उतारने को भी मान जाए और मैं केयरिंग भी दिखूँ। फिर दीदी कुछ बोलीं नहीं, क्योंकि वो समझ नहीं पा रही थीं कि कैसे रिएक्ट करें।
नेक्स्ट डे दीदी कॉलेज से आईं तो उसने मुझे देखा और मैंने भी उसको देखा। उसके बाद दीदी ने थोड़ा बहुत यहाँ-वहाँ देखा और फिर मुझे देखने लगीं। मैंने बोला –
मैं – दीदी रिलैक्स हो जाओ और बंद कर लो रूम।
दीदी रूम बंद करके आईं और फ़ाइनली धीरे-धीरे टी-शर्ट ऊपर की और उसकी ब्लैक ब्रा में दबे हुए बूब्स बाहर आ गए। दीदी ने फ़ाइनली टी-शर्ट उतार दी।
(yahin se meri is kamuk kahani ka pehla mod shuru hua) — मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मेरा आइडिया काम कर रहा था।
दीदी के बूब्स और पेट पर पसीना था। उनको देखकर मेरा लुंड खड़ा हो रहा था, लेकिन मैं कंट्रोल कर रहा था, ताकि उनको ये न लगे कि अपनी हवस के लिए मैं सब कुछ कर रहा हूँ।
दीदी ने कपड़े उतार तो दिए, लेकिन शर्म के मारे वो अपने हाथों से ब्रा को ढक रही थीं। फिर मैंने उनको बुलाया और कहा –
मैं – दीदी रिलैक्स करो, और जाने दो।
दीदी ने धीरे-धीरे हाथ हटाए और फ़ाइनली दीदी मेरे सामने सिर्फ़ जींस और ब्रा में बैठी थीं।
मैं – कैसा लग रहा है? हवा से आराम है?
दीदी – हाँ आराम तो है, लेकिन बहुत अजीब लग रहा है।
मैं – वो तो धीरे-धीरे चला जाएगा। बस हवा खाओ और रोज़ ऐसे ही करना।
फिर दीदी ने चेंज किया और किचन में मम्मी को हेल्प करने के लिए चली गईं। इसी मौके पर मैंने बाथरूम में जाके (दीदी को ब्रा में देखने के नज़ारे के बारे में सोच के) मुठ मारी। मैंने सारा दिन में शायद 4 बार मुठ मारी होगी।
ये पहला स्टेप था इसलिए टाइम लगा, सब सेट होने में। लेकिन मुझे पता था कि एक बार दीदी को अच्छा लगने लगा, तो बाकी स्टेप्स जल्दी पूरे हो जाएँगे।
नेक्स्ट डे से दीदी रोज़ ऐसा करने लग गईं। करीब 10 दिन बाद दीदी को आदत हो गई और अब वो कैज़ुअली आके मेरे सामने टॉप उतार देतीं और निचला हिस्सा टॉवल से ढककर पजामा पहन लेतीं।
बाकी जब तक रूम के बाहर नहीं जाना होता था, तब तक ब्रा में ही रहती थीं। कुछ और दिन के बाद, दीदी ने मुझे सरप्राइज़ कर दिया। हमारे रूम में अटैच्ड बाथरूम है। मैं टीवी देख रहा था तो दीदी नहा के निकलीं।
मैंने देखा तो शॉक रह गया। दीदी कमर में टॉवल लपेटी थीं और ऊपर सिर्फ़ ब्रा पहन के निकल आईं। पूरे बदन पे पानी लगा हुआ था और बाल थोड़े गीले थे। काश मैं टॉवल हटा सकता उस दिन।
दीदी को देखकर मेरा लुंड फिर खड़ा हो गया और बाद में मैंने मुठ मारी। वो हाफ़ पैंट और उस ब्रा के साथ मेरे पास सो गईं। अब तो और भी जल्दी दीदी को नंगा देखना था मुझे।
मैं – कैसा लग रहा है, दीदी?
दीदी – सच में यार, बहुत फ़्री लग रहा है। थैंक्स अ लॉट (खुशी से)।
मैं – कहा था न, अच्छा लगेगा। अभी नेक्स्ट स्टेप करें?
दीदी – इससे ज़्यादा क्या?
मैं – टॉप हटाने से इतना आराम हुआ तो पैंट से और भी फ़्री लगेगा।
दीदी – क्या? मतलब तेरे सामने सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में रहूँगी?
मैं – और क्या! वैसे ये ईज़ी होगा, जो हाफ़ पैंट है वो तो लगभग पैंटी के साइज़ का ही है। तो बस जींस रह जाती है बाकी। सेम लॉजिक, मेन पार्ट तो ढका ही हुआ है न?
दीदी मुस्कुराने लगीं और बोलीं – बहुत जानता है तू?
नेक्स्ट डे मैं बेसब्री से वेट करने लगा। मुझे पता था कि अब दीदी उतना टाइम नहीं लेंगी बाकी के कपड़े उतारने में, क्योंकि दीदी को ऐसे आराम मिल रहा था।
फ़ाइनली वो कॉलेज से आईं, टी-शर्ट उतारी, और फिर जींस उतारने लगीं। वो हल्का ब्लश कर रही थीं, पर जैसा कि मैंने कहा, ज़्यादा टाइम न लेते हुए जींस भी उतार दी। मैं दीदी को बिना जींस के देखकर पूरा फ़्रीज़ हो गया।
पहली बार दीदी मेरे सामने ब्रा और पैंटी में खड़ी थीं। गोरे-गोरे बूब्स बाहर निकलने को तरस रहे थे और पसीने से भरी गोरी-गोरी और रसीली जाँघें।
दीदी ने टॉवल लगाया और चेंज करने लगीं। वो एक ब्लैक ब्रा और पैंटी पहन के चादर में घुस गईं, शर्म के मारे। मैंने भी फ़ोर्स नहीं किया, क्योंकि मैं जानता था कि टाइम लगेगा उनको फ़्री होने में।
मैं – ठीक लग रहा है?
दीदी – चुप कर (मुस्कुराते हुए)।
मैं हर-रोज़ भोर में योगा के लिए जाता था। 6 बजे वापस आने के बाद दीदी जागती थीं। नेक्स्ट डे जब मैं योगा करके वापस आया, तो वो जागीं और उनको एहसास हुआ कि वो सिर्फ़ अंडरगारमेंट्स में सोई हैं।
उसने जल्दी से चादर से निकल के टी-शर्ट और पजामा डाल लिए। ये भी कुछ दिन ही चला। फिर 6-7 दिन में इसकी भी आदत हो गई। अब कॉलेज से आते ही बिना शर्म के टॉप और पैंट उतार दी जाती और चेंज करके ब्रा और पैंटी पहन ली जाती।
साथ ही सुबह जागने पर भाग के कपड़े नहीं पहनती थीं, बल्कि आराम से रूम में घूमती थीं और बाल-वाल झाड़ के फिर कपड़े पहनती थीं। मेरी भी बेचैनी और बढ़ गई थी बाकी स्टेप्स के लिए।
एक बार बहुत ज़्यादा गर्मी पड़ी थी, ऊपर से कुछ मेहमान भी घर में घुस गए। दीदी और मैं पूरा दिन काम करके थक गए। मेहमानों के जाने के बाद मैं हमेशा की तरह टी-शर्ट खोल के बस बॉक्सर में लेट गया। दीदी भी ब्रा और पैंटी में आ गईं पर मायूस थीं।
मैं – क्या हुआ?
दीदी – आज बहुत गर्मी है, ऊपर से ये ब्रा बहुत टाइट है, जिससे इचिंग हो रही है ब्रा के स्ट्रैप्स के नीचे। तुम्हारा अच्छा है जब-तब खोल देते हो अपनी बनियान।
मैं – मैंने आपको कब मना किया? खोल दो।
दीदी – चुप कर पागल, कुछ भी बोलता है।
मैं – इतना समझाया फिर भी नहीं समझीं? ये आपका घर है, यहाँ अपनी मर्ज़ी से नहीं रहोगी तो कहाँ रहोगी? सारा दिन ये सब पहन के घूमती हो, वो ठीक है?
मैं – दीदी, अब तो आप घर में हो, और वैसे भी मैंने बोला था मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। मेरी बात मानो, खोलो ब्रा और आराम से लेट जाओ।
दीदी ने थोड़ा सा सोचा, और फिर मेरी तरफ़ पीठ करके, धीरे से पीठ से स्ट्रैप खोला। मैं तिरछी आँखों से देख रहा था। मेरा लुंड खड़ा होने लगा। उन्होंने ब्रा खोली और साइड में रख दी। उन्होंने बूब्स को अपने हाथों से हग किया और ढक लिया।
वॉव क्या नज़ारा था! मेरा हार्टबीट बढ़ गया और मुझसे रहा न गया।
मैंने कहा – हाथ हटा दो और हवा लगने दो।
धीरे-धीरे दीदी ने हाथ नीचे कर लिए। दीदी को बहुत शर्म आ रही थी, लेकिन ज़रूरत थी, और वो भी समझ रही थीं।
क्या नज़ारा था, वॉव! उस दिन मेरा एक सपना पूरा हो गया, क्योंकि मुझे दीदी के 36″ साइज़ के बूब्स देखने को मिल गए। मन तो कर रहा था कि उन ब्राउन निप्पल्स को चूस लूँ, ताकि दूध मिले। लेकिन मैंने किस तरह से अपने आप को रोक रखा था, ये मैं ही जानता हूँ।
दीदी ने शर्म के मारे लाइट बंद कर दी।
दीदी – बहुत अजीब लग रहा है मुझे।
मैं – जानता हूँ, लेकिन मेरी एक बात मानोगी तो फिर प्रॉब्लम नहीं होगी।
दीदी – क्या?
मैं – अब से रोज़ ऐसे ही सोना। जितना ज़्यादा देर ऐसे रहोगी, उतना जल्दी कंफ़र्टेबल हो जाओगी।
दीदी ने थोड़ा टाइम लेके बोला – हम्म।
उस रात मैं सो ही नहीं पाया और मैंने दीदी को सामने देख के 4 बार मुठ मारी। अगली सुबह योगा में मन नहीं लग रहा था और मैं दीदी के बूब्स को लाइट में देखना चाहता था।
योगा ख़त्म होते ही मैं घर के लिए भागा। जब घर पहुँचा तो दीदी सो रही थीं। मैं दीदी के उठने की वेट करने लगा। फ़ाइनली दीदी उठीं, और क्योंकि सीधे-सीधे उठना मुश्किल था, तो दीदी चादर लेके उठीं और ब्रा और टी-शर्ट पहन लीं।
मैं समझ गया कि मुझे अभी थोड़ा वेट करना होगा। फ़ाइनली दीदी इसमें भी कंफ़र्टेबल होने लगीं, क्योंकि ऑब्वियसली उनको बड़ा फ़्री लगता था बिना कपड़ों के।
कॉलेज से आने के बाद रेस्ट तो था ही, साथ ही नहाने के बाद निकलते हुए टॉवल पकड़ने का भी टेंशन ख़त्म हो चुका था। वो बाथरूम में ही पैंटी पहन लेतीं और टॉपलेस ही बाहर निकल आतीं।
फिर बाहर आके अपनी बॉडी को पोंछतीं और थोड़ा घूम के बाल सुखा लेतीं और लेट जातीं। दीदी के लिए अब टॉपलेस रहना नॉर्मल हो गया था। मैं दीदी को देखके पहले दिन के बारे में सोचने लगा, जब बहुत ज़्यादा अपना कपड़ा संभालती थीं, ताकि कुछ दिख न जाए।
अब दीदी कितनी आसानी से नंगी घूम रही थीं। मैं उनकी तरफ़ देख ही रहा था कि दीदी ने मुझे उनको देखते हुए देखा और बोलीं –
दीदी – क्या देख रहा है?
मैं – नहीं, मैं सोच रहा हूँ कि अब आप कितने खुश हो।
दीदी – सही में तुमने मेरी आँखें खोल दीं। अब मुझे बहुत आराम मिलता है, अच्छी नींद भी आती है और बाकी दिन न तो टॉवल पकड़ने की टेंशन और न ही पल्लू गिरने का डर। थैंक यू सो मच! मेरे प्यारे भाई।
मैं – सोच रहा था कि आप पूरे दिन ऐसे क्यों नहीं रहतीं और सिर्फ़ रूम में ही क्यों?
दीदी – पागल! मम्मी के सामने टॉपलेस घूमूँगी? हम दोनों को तो पता है, लेकिन मम्मी को नहीं पता है कि मैं तेरे सामने ऐसे घूमती हूँ। नहीं होगा।
मैं – होगा।
दीदी – कैसे?
मैं – रूम से बाहर निकलने के लिए ब्रा, फिर टी-शर्ट पहनना पड़ता है। फिर वही सारा दिन इचिंग ब्रा पहनने के कारण। तो सिर्फ़ टी-शर्ट पहन के चले जाओ।
दीदी – झुकने से सब दिखेगा नहीं?
मैं – ज़रूरत है, अब मेरे सामने ढकने की?
दीदी (हँसते हुए) – सही है, ये भी ठीक है।
मैं – इससे सारा दिन अच्छा लगेगा और पूरे घर में टॉपलेस रहने की आदत बन जाएगी। मैं तो पहले से ही नहीं पहनता था।
दीदी – नहीं पहनता था, मतलब?
मैं – तुम कॉलेज में होती हो, तो मैं कपड़े नहीं पहनता और अगर घर में मॉम भी न हों, तो पूरे घर में कपड़े नहीं पहनता मैं। जितना हो सके अपनी बॉडी को हवा लगने देता हूँ।
दीदी – वाह! मुझे भी मन होता है, ऐसा करने का।
मैं – तो रहो न, अपना ही तो घर है।
ये बोलके मैं सोने चला गया और ये सोचने लगा कि कल दीदी को नंगा देखने का मौका मिल जाएगा। लेकिन मेरी बात सुनकर दीदी उसी वक़्त बेड से उठीं और उसने अपनी पैंटी उतार दी।
(और उस रात meri yeh adult hindi story apne peak par pahunch gayi) — दीदी को बिना पैंटी के देखकर मेरी हार्टबीट बढ़ गई और लुंड पूरा तन गया।
मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि मेरी दीदी मेरे सामने पूरी नंगी होके खड़ी हुई हैं। उनकी चूत काफ़ी गोरी थी और उसपे थोड़े से बाल थे। उसकी चूत बहुत सेक्सी लग रही थी। दीदी आके चादर तान के सो गईं।
मैं हिसाब नहीं लगा सका कि उस दिन मैंने कितनी बार मुठ मारी दीदी को देखकर। अब दीदी को आगे कोई आदत भी नहीं डालनी पड़ी। दीदी अगले दिन सुबह उठके बेफ़िक्र होके चादर से निकलतीं, टॉयलेट जातीं, ब्रश करतीं, शीशे के सामने बाल बनातीं और जब तक कोई बाहर बुलाता नहीं, मेरे सामने नंगी ही रहती थीं।
मुझे रोज़ सुबह उठके यही नज़ारा देखने को मिलता था। जो मैंने सपना देखा था वो पूरा हो रहा था। इसके अलावा, रूम से बाहर निकलते हुए वो टी-शर्ट और हाफ़ पैंट ही पहनती थीं।
दीदी सारा दिन बेफ़िक्र होके अपनी क्लीवेज दिखातीं और अगर ज़्यादा झुक जाएँ तो उसके गोरे-गोरे बूब्स पूरे के पूरे दिख जाते और वो भी निप्पल्स के साथ। अब उसको मुझे कुछ भी दिख जाने से कोई प्रॉब्लम नहीं थी।
मेरा मिशन पूरा हुआ और अब एक नया मिशन था मेरे पास और वो था दीदी को चोदना। क्योंकि अब मैं अपने आप पे और कंट्रोल नहीं कर पा रहा था। सेकंड मिशन के बारे में सेकंड एपिसोड में बताऊँगा।
(yeh hindi kahani ka pehla part tha — aapko yeh family sex story kaisi lagi, comment mein batana na bhoolein!)
Next part ==> बड़ी दीदी को पटा के चोदा 2

Suprb story
Maja aa gya padkar
अंकल ने चोदा सीरिज पूरा करो