अम्मी बनी मेरे बॉस की रखैल 1

Ammi ki boss se chudai ki kahani:- मेरा नाम समीर (18) है। ये कहानी मेरी माँ के जीवन से जुड़ी है, जिसे मैंने अपनी इमेजिनेशन से लिखा है। उम्मीद करता हूँ आप सबको पसंद आएगी।

Ammi ki boss se chudai ki kahani

“सम्मी… सम्मी… बेटा उठ जाओ… सुबह के दस बज रहे हैं…” अम्मी की चीखती आवाज़ से मेरी नींद टूट गई और मैं अपनी आँखें मलता हुआ उठ गया। अम्मी ने ब्लू कॉटन की नाइटी पहनी हुई थी। पर उनका छरहराता हुआ बदन नाइटी से साफ पता चल रहा था।

38 की उम्र में भी अम्मी का फिगर वैसा का वैसा ही है जैसा 28 की उम्र में था। 36 के गोल दूध से भरे हुए बूब्स, 42 के राउंडेड हिप्स, 28 की पतली कमर, 5.5 फीट की हाइट, 65 केजी वेट, गोरा दूधिया रंग। कमर तक लहराते काले घने बाल, गालों पर खिलती मुस्कान।

कुल मिलाकर ये सारी खूबियाँ अम्मी के यौवन को चार चाँद लगाती हैं जिसके हर मर्द दीवाने हैं।

अम्मी: अब बैठे-बैठे क्या सोचने लगा?

मै: कुछ नहीं… (मन में: आपकी ही खूबसूरती के बारे में सोच रहा हूँ)

अम्मी: तो फिर जल्दी से उठकर नहा लो ना बेटा। मैंने बाल्टी में पानी भर लिया है। चलो उठो जल्दी से।

मैं आँखें मलता हुआ बाथरूम में गया और कपड़े निकालकर नहाने लगा। मैं औरंगाबाद में रहता हूँ। अब्बा का नाम अनीस (50) है और उनकी एक किराने की शॉप है। अम्मी शबाना (38) हाउसवाइफ हैं।

अम्मी का इंट्रोडक्शन तो मैंने आपको पहले बता दिया। अब्बा दिखने में काले से दुबले-पतले हैं। अम्मी-अब्बा की अरेंज्ड मैरिज हुई थी। उस वक्त मेरे नाना की फाइनेंशियल कंडीशन ठीक नहीं थी, और मेरे दादा से कर्ज लिया हुआ था। नाना अपना कर्ज चुका नहीं सके इसलिए उन्होंने बिना किसी जोर के अब्बा से अम्मी की शादी करवा दी।

अम्मी उस वक्त कॉलेज पढ़ रही थीं पर नाना के दबाव के कारण अम्मी ने कॉलेज छोड़कर अब्बा से निकाह कर लिया। और अपने सारे अरमानों का गला घोंट दिया। मैं बचपन से देखता आया हूँ अम्मी-अब्बा का रिश्ता सिर्फ नाम का ही था।

अब्बा दिन भर दुकान पर रहते या तो दोस्तों-यारों के संग मौज-मस्ती में पैसे उड़ाते। अम्मी किसी तरह ट्यूशन चलाकर पैसे बचातीं और मेरी पढ़ाई पर खर्च करतीं। पर अब इतना भी कम पड़ रहा है इसलिए मैंने सोचा है कि मैं अब जॉब कर लूँ ताकि अम्मी की प्रॉब्लम कुछ हद तक कम हो जाए।

मैं बचपन से ही अम्मी का लाडला था और इसलिए मैं अब तक भी उनके पास ही सोता हूँ। पहले तक तो ठीक था पर अब तो अब्बा हफ्ते में या कभी दो हफ्ते में एक बार अम्मी को चोदते हैं वो भी दस मिनट में निपट जाते हैं।

जिसके कारण अम्मी की प्यास अधूरी रह जाती और कभी-कभी अकेले में मैंने अम्मी को मोबाइल में पॉर्न देखते हुए चूत में उँगलियाँ करते हुए देखा है। मुझे अम्मी की हालत पर तरस आता है, पर क्या करूँ जो हकीकत है उसको बदल नहीं सकता।

मैं नहाकर बाहर आया। अम्मी ने मुझे नाश्ता दिया। मैंने जॉब करने के लिए अम्मी को मना लिया था। मेरा एक दोस्त है, उसके भाई के कॉन्टैक्ट से उसने मेरे लिए एक जगह मेरे लिए सिफारिश की थी। अभी मैं वहीं जाने वाला हूँ।

अम्मी: अच्छा… बेटा। मन लगाकर काम करना। मैंने तुम्हारे लिए लंच पैक कर दिया है। पूरा खत्म करना। ठीक है…

मै: ठीक है अम्मी… थैंक यू…

मैं रेडी हुआ और बताए हुए एड्रेस पर पहुँच गया। वहाँ का स्टाफ अच्छा था। मेरा काम बॉस की केबिन में कंप्यूटर वर्क था। ये एक छोटी सी फ्रूट एक्सपोर्ट कंपनी थी। यहाँ से टॉप क्वालिटी के फ्रूट्स फॉरेन एक्सपोर्ट किए जाते हैं।

मैं अपना काम कर रहा था। कुछ देर के बाद एक आदमी केबिन में आया। उसकी पर्सनैलिटी देखकर मैं समझ ही गया था कि यही बॉस हैं। 6 फीट लंबा, फिट मस्कुलर बॉडी। शानदार मूंछें बीयर्ड के साथ, व्हाइटिश रंग, चौड़ा सीना, ब्लैक कसी हुई जीन्स, व्हाइट शर्ट जो इन्सर्ट किया हुआ था। और शर्ट के ऊपर के तीन बटन खुले हुए थे जिसमें से उनके बालों भरे सीने पर एक गोल्ड चेन लटक रही थी और एक हाथ में इम्पोर्टेड वॉच और उँगलियों में कई अँगूठियाँ पहनी हुई थीं।

जीन्स की कसावट से उनके लंड का उभार बड़ा फूला हुआ लग रहा था। पक्का तो नहीं पता पर अंदाजे से उनकी उम्र 40 के आसपास लग रही थी। वो अपनी चेयर पर बैठ गए। मुझे इशारे से अपने पास बुलाया। मैंने अपना इंट्रोडक्शन दिया। फिर उन्होंने कहा। उनकी आवाज भी बड़ी रौबदार थी।

बॉस: तुम्हें काम तो बता दिया गया है ना?

मै: जी बॉस… मैं दिल लगाकर काम करूँगा। आपको शिकायत का मौका नहीं दूँगा।

बॉस: बहुत अच्छे… मुझे ऐसे ओबेडिएंट बंदे ही अच्छे लगते हैं। ठीक है अब अपना काम करो।

मैं अपनी जगह पर बैठ गया और अपना काम करने लगा। कभी-कभार मेरी नजर बॉस पर पड़ ही जाती। कुछ वक्त के बाद मेरे सामने उनका व्यक्तित्व भी आने लगा।

बाकी एम्प्लॉइज के साथ भी बहुत अच्छे से फ्रेंडली बात कर रहे थे। और कभी माहौल को हल्का करने के लिए अच्छा हंसी-मजाक कर लिया करते थे। मुझे भी काम से रिलेटेड कुछ कन्फ्यूजन था तो मैंने उनसे पूछा तो उन्होंने बहुत फ्रेंडली मुझे समझाया। मुझे उनका नाम भी पता चल गया।

उनका नाम अजय राणा था। मैंने सोच लिया था, अगर इस जॉब से फायदा उठाना है तो इस बंदे की ताबेदारी में ही भलाई है। उन्होंने टेबल से सिगरेट निकाली और लाइटर ढूंढने लगे। मुझे टेबल के एक कोने में लाइटर दिखा। मैंने उसे लिया और उनकी सिगरेट जलाई। तो वो बहुत खुश हुए।

फिर कुछ वक्त के बाद लंच ब्रेक हुआ और वो चले गए। मैं अपना टिफिन निकालकर लंच करने लगा। कुछ देर के बाद वो ऑफिस में आए, मेरा लंच अभी कम्प्लीट नहीं हुआ था।

मैं अपना लंच पैक करने लगा तो उन्होंने मुझे आराम से खाने को बोला। और मेरे पास आकर बैठ गए। मैंने उन्हें खाने को ऑफर किया। अम्मी ने पनीर टिक्का, हलवा और पूरी दी थी। उन्हें खाने की महक अच्छी लगी तो वो खाना टेस्ट करने लगे और उन्हें बहुत पसंद आया।

बॉस: हम्म… बड़ा मजेदार खाना है… किसने बनाया है?

मै: मेरी अम्मी ने।

बॉस: फिर तो तुम्हारी माँ बहुत बढ़िया खाना बनाती होंगी।

मै: जी बॉस… मेरी अम्मी के हाथ का बना खाना सबको पसंद आता है।

बॉस: मुझे चटपटा और मसालेदार नॉन-वेज खाना बहुत पसंद है… तो तुम रोज ऐसा मजेदार खाना लंच में लेकर आना।

मै: जी बॉस… मेरी अम्मी सब तरह का खाना बहुत अच्छे से बनाती हैं। आपको बहुत पसंद आएगा।

और फिर इस तरह दिन गुजर गया। मैं अपने घर आ गया। अम्मी मुझसे ऑफिस के बारे में पूछने लगीं। मैं उनको पूरी डिटेल में सब चीजें बता दी।

अम्मी: तुम्हारे बॉस अच्छे आदमी लगते हैं… तुम्हें उनको शिकायत का मौका नहीं देना चाहिए। मन लगाकर काम करना बेटा।

मै: और हाँ… उन्होंने आपके खाने की भी बहुत तारीफ की थी और बोला था कि रोज आप मुझे ऐसा लंच बनाकर देना। उनको ऐसा मजेदार खाना बहुत पसंद है।

अम्मी: हाँ… बेटा जरूर… मैं तुम्हें रोज ऐसा मजेदार खाना बनाकर दूँगी।

फिर हम इस तरह बाकी मामूली दिन की तरह बातें करने लगे। अब्बा को मेरा जॉब करना अच्छा लगा क्योंकि अब उनका बोझ कम हो गया था। और वो शराब पीकर तुन होकर सो गए।

दूसरे दिन मैं जॉब के लिए रेडी हो गया। और आज अम्मी ने मसालेदार चिकन और टेस्टी सूप बनाकर दिया था। मैं ऑफिस गया और अपना काम करने लगा। कुछ देर के बाद बॉस आए, जैसी कल उनकी पर्सनैलिटी थी वैसी ही आज भी उनकी पर्सनैलिटी बरकरार थी। उनसे मैं काफी इम्प्रेस्ड हुआ। फिर रेगुलर काम चलने लगा।

लंच टाइम में मैंने उनसे अम्मी के हाथ का बना खाना शेयर किया तो वो काफी खुश हुए और उँगलियाँ चाटते हुए खाने लगे। और इस तरह मेरा वक्त कटने लगा।

एक महीना बहुत मजे से कट गया। अम्मी रोज मुझे टेस्टी खाना बनाकर लंच के लिए देतीं और मैं बॉस के साथ लंच शेयर करता। बदले में वो मुझसे काफी खुश हुए और मेरे लिए काम करना आसान हो गया। मंथ के एंड में उन्होंने मुझे सैलरी के साथ-साथ थोड़े से एक्स्ट्रा भी दिए थे। अब वो अपने मोस्ट ऑफ हर काम में मुझे अपने साथ रखते।

मैंने सैलरी अम्मी के हाथ में दी तो अम्मी बहुत खुश हो गईं और मुझे गले से लगाकर बहुत प्यार किया।

मै: अम्मी… अगर बॉस इतने अच्छे नहीं होते तो मेरे लिए काम करना इतना आसान नहीं होता। और आप अगर मुझे लंच में अच्छा खाना बनाकर नहीं देतीं तो वो शायद मुझसे इतना इम्प्रेस भी नहीं होते।

अम्मी: फिर तो हमें तुम्हारे बॉस को ऐसे ही खुश करते रहना चाहिए ताकि तुम्हारा फ्यूचर अच्छे से सेट हो जाए।

मै: अम्मी… मुझे एक आइडिया आया है… क्यों न हम बॉस को किसी दिन खाने के लिए इनवाइट करें। आप कुछ अच्छी सी डिशेज बना लेना… उनसे मेरा ताल्लुक और गहरा हो जाएगा।

अम्मी: हाँ… ये बहुत अच्छा होगा तुम्हारे लिए। ठीक है फिर तुम उनसे बात करना और वो जब आने को बोलें तो मुझे बता देना। मैं बढ़िया सी डिशेज बनाऊँगी…

फिर मैंने दूसरे दिन बॉस से बोला।

मै: बॉस… आपको अगर मेरी अम्मी के हाथ का खाना इतना पसंद है तो, आप किसी दिन मेरे घर डिनर के लिए आइए ना… और आप मेरी इतनी हेल्प करते हैं तो अम्मी पर्सनली आपको थैंक्स बोलना चाहती हैं।

बॉस: ओह… ये बात है… फिर तो मैं जरूर आऊँगा… पता तो चले इतना टेस्टी खाना बनाने वाला है कौन…!

मै: तो कल संडे को रात में आप मेरे घर पर डिनर करने आ जाना। मैं अम्मी को बोल दूँगा। वो आपकी पसंद की डिशेज बनाएँगी।

बॉस: ठीक है फिर… मैं कल शाम को आ जाऊँगा

अम्मी सुबह से ही डिनर की तैयारी में लगी हुई थीं। अम्मी ने दो-तीन चिकन की टेस्टी डिशेज बनाई थीं और डेजर्ट में गाजर का हलवा। मैंने एक अच्छी सी ब्रांड की बोतल भी मंगवा ली थी क्योंकि मुझे पता था बॉस नॉन-वेज के साथ ड्रिंक भी करते थे।

शाम होते-होते अम्मी ने पूरा खाना रेडी कर लिया था। मैंने अम्मी को देखा। खाना बनाते-बनाते वो पसीने में पूरी भीग गई थीं।

मै: अम्मी आप इस हालत में बॉस के सामने कैसे जाओगी? एक काम करो, बॉस के आने से पहले आप नहाकर, अच्छे से कपड़े पहनकर रेडी हो जाओ।

अम्मी: हाँ… तुमने सही कहा… मैं इस हालत में उनके सामने नहीं जा सकती। मैं नहाकर तैयार हो जाती हूँ।

फिर अम्मी रेडी होने चली गईं। मैं सब इंतजाम चेक करने लगा। अब्बा शॉप पर गए थे। और फिर मैंने बॉस को कॉल करके पूछा कि वो कब तक आएंगे, तो उन्होंने कहा कि एक घंटे के बाद वो आ रहे हैं। तब तक मैं टीवी देखने लगा।

अम्मी नहाकर बाहर आईं। अम्मी कपड़े देखकर कन्फ्यूज हो रही थीं कि वो क्या पहनें क्योंकि उनके पास कोई खास अच्छे से कपड़े नहीं थे। तो मैंने अम्मी को सजेस्ट किया कि…

मै: आप अपनी शादी वाला पिंक कलर का सलवार सूट पहन लो…

अम्मी: बेटा… वो मैं अब कैसे पहन सकती हूँ…

मै: क्योंकि वो आपको अभी भी अच्छे से आता है, और आप उसमें बहुत अच्छी लगती हो।

अम्मी वो सूट पहनना नहीं चाह रही थीं पर मैंने जोर देकर उनसे वही पहनने को कहा क्योंकि दूसरा कोई ऑप्शन नहीं था। कुछ देर के बाद अम्मी सूट पहनके रेडी हो गईं।

उस पिंक कलर के सलवार सूट में अम्मी बहुत खूबसूरत लग रही थीं। अम्मी का गोरा रंग खूब खिल रहा था। वो ड्रेस उनकी शादी का था।

पर अम्मी का फिगर अभी भी वैसा ही था। इसलिए वो अम्मी को अभी भी थोड़ा फिट तो हो रहा था पर खूब जच रहा था। अम्मी के 36 साइज के बूब्स डीप क्लीवेज से झलक रहे थे। उस ड्रेस में बड़े उभरे हुए नजर आ रहे थे। पतली कमर पर वो कमीज पूरी चिपक गई थी जिसकी वजह से नाभि का शेप भी नजर आ रहा था, और कुल्हे तो अच्छे राउंड शेप में लग रहे थे।

जोर देकर मैंने अम्मी से हल्का मेकअप करने को भी कहा, और साथ में थोड़ी सी चूड़ियाँ भी पहना दीं। अब अम्मी सज-सँवरकर किसी भोजपुरी हीरोइन जैसी लग रही थीं।

तभी मेरे मोबाइल पर बॉस का कॉल आया। उन्हें मेरा एड्रेस नहीं मिल रहा था, तो वो जहाँ रुके हुए थे मैं उन्हें लेने चला गया। वो अपनी मर्सिडीज कार में आए थे। मैंने सोचके खुश हुआ कि मोहल्ले में मेरी काफी इम्प्रेस पड़ेगी।

बॉस ने आज ब्लू टी-शर्ट और जीन्स पहनी हुई थी। उस टी-शर्ट में उनकी मस्कुलर बॉडी बहुत ही हॉट लग रही थी। उनके चौड़े सीने पर एक गोल्ड चेन लटक रही थी जिसमें बढ़िया लॉकेट था। और हाथ में बढ़िया सी वॉच और उँगलियाँ अँगूठियों से भरी हुई थीं। साथ में उनकी रौबदार मूंछें उनकी पर्सनैलिटी को शानदार मर्द जैसा बनाती थीं। मैं उनको अपने घर लेकर आया।

मैंने दरवाजा खटखटाया। कुछ देर में ही अम्मी ने दरवाजा खोला। मैंने अम्मी से बॉस की तरफ इशारा किया।

अम्मी: आइए… आइए… नमस्ते… अंदर आइए…

बॉस ने जब अम्मी को देखा तो उनकी नजर अम्मी से हट ही नहीं रही थी। वो अपना गॉगल हटाकर अम्मी के चेहरे को गौर से देखने लगे, फिर अम्मी के बदन को ऊपर से नीचे तक देखने लगे। मुझे ये नॉर्मली ही लगा क्योंकि मैंने कई बार देखा ही था कि कई गैर मर्द पहली नजर में अम्मी के बदन को ऐसे ही घूरते थे, और आज तो अम्मी बड़ी खूबसूरत लग रही थीं।

मै: बॉस… अंदर चलिए… बॉस…

बॉस: हम्म… हाँ… चलो…

जब उनको होश आया तो वो मेरे साथ घर में आए। मैंने उनको सोफे पर बैठने का इशारा किया। अम्मी किचन में गईं तो बॉस अम्मी को जाते हुए पीछे से घूरने लगे। मैं उनका ध्यान हटाने के लिए बोला।

मै: बॉस… ये है मेरा घर…

बॉस: हम्म… ठीक है… और कौन-कौन है…

मै: बस मैं, अम्मी और अब्बा… और कोई नहीं।

अम्मी ट्रे में पानी लेकर आईं। मैंने ही अम्मी को पानी देने का इशारा किया। अम्मी पानी देने के लिए बॉस की ओर झुकीं तो उनके डीप क्लीवेज से आधे से ज्यादा बूब्स नजर आने लगे, जिस पर से बॉस की नजरें हटने का नाम ही नहीं ले रही थीं। मुझे अब अफसोस हो रहा था कि मैंने ये ड्रेस पहनने की एडवाइस अम्मी को क्यों दी।

बॉस अम्मी को अजीब नजरों से घूर रहे थे और ना जाने क्यों मुझे बहुत अजीब सा महसूस हो रहा था। वैसे तो कई गैर मर्दों को मैंने अम्मी को हवसी नजरों से घूरते हुए देखा है, पर बॉस के लिए मेरी नजरों में एक अलग ही आइडियोलॉजी थी, इसलिए बॉस का यूँ अम्मी को घूरना मुझे थोड़ा अनइजी फील कर रहा था। फिर अम्मी हमारे सामने एक चेयर पर बैठ गईं।

अम्मी: आपका बहुत शुक्रिया आपने हमारे गरीब खाने पर आकर हमें इज्जत बख्शी।

बॉस: अरे… इसमें कोई बड़ी बात नहीं… समीर (मैं) बहुत भोला और ओबेडिएंट लड़का है… इसकी यही चीज मुझे बहुत अच्छी लगी इसलिए मैं इसे डिनर के लिए मना नहीं कर पाया।

अम्मी: ये तो आपका बड़प्पन है… और आपकी इस करम नवाजी से समीर को बहुत कुछ सीखने को मिला है।

बॉस: पर… एक बात और है कि… आपके हाथ के बने खाने का स्वाद मुझे यहाँ खींच लाया। समीर लंच में जो भी लाता था मुझे बहुत पसंद आता था। सच में ऐसा स्वाद मुझे कहीं और नहीं मिला।

अम्मी: (शरमाते हुए) अब… मैं क्या कहूँ… मुझे खाना बनाना अच्छा लगता है… इसलिए कुछ न कुछ बनाती रहती हूँ…

मै: तो फिर चलिए अम्मी… बॉस को भूख लगी होगी… आप खाना लगाएँ…

अम्मी उठकर किचन से खाना टेबल पर लाकर रखने लगीं। मैं बॉस के साथ बैठकर खाने लगा। अम्मी खाना सर्व करने लगीं। जब कभी-कभी अम्मी खाना सर्व करने के लिए झुकतीं तो बॉस अम्मी के चेहरे को गौर से देखते, तो कभी अम्मी के बदन को ऊपर से नीचे तक निहारते। अम्मी ने भी ये बात नोटिस की होगी, इसलिए वो भी अब कतरा-कतरा कर बॉस के सामने आतीं।

बॉस को खाना काफी पसंद आया। अम्मी ने चिकन की चार अलग-अलग डिश बनाई थीं वो सारी बॉस को बहुत पसंद आईं। और वो खाते हुए भी अम्मी की काफी तारीफ कर रहे थे। खाने के बाद मैंने एक ग्लास में ब्रांडी मिलाकर बॉस को दी। तो वो बहुत खुश हो गए। फिर अम्मी हमारे साथ बैठकर बातें करने लगीं।

बॉस: एक बात पूछूँ शबाना जी…

अम्मी: हाँ… पूछिए ना…

बॉस: मुझे ऐसा लगता है… मैं आपको पहले से जानता हूँ शायद। आप बेसिकली कहाँ से हो?

अम्मी: मेरा मायका सतारा से है और शादी से पहले मैं सतारा में ही रही हूँ।

बॉस: क्या… आपने कॉलेज की है…

अम्मी: हाँ… पर आपको कैसे पता…

बॉस: मैं भी पहले सतारा में ही रहता था। और मैंने अपना ग्रेजुएशन एलबीएस कॉलेज से किया है। क्या आप भी वहीं पर थीं ना…

अम्मी: हाँ… बिल्कुल मैंने भी वहीं पर फर्स्ट सेमेस्टर तक किया है, पर बाद में मजबूरन मुझे पढ़ाई छोड़नी पड़ी…

बॉस: तो मैं सही हूँ… तुम वही शबाना शब्बो… हो ना… हम फर्स्ट ईयर में साथ में थे। मैं अजय राणा… सब मुझे अज्जू कहकर बुलाते थे।

अम्मी: (हैरत से) अज्जू… अरे हाँ… अब याद आया मुझे… मुझे भी आपका चेहरा कुछ जाना-पहचाना सा लगा ही था…

बॉस: मुझे भी पहले तुम्हें देखकर ऐसा लगा ही था कि मैं पहले से तुम्हें जानता हूँ। और सुनाओ तुमने पढ़ाई क्यों छोड़ी, बाकी सब दोस्त तुम्हें बहुत याद करते थे, और तुम तो टॉप करती थी…

अम्मी: मुझे भी अपनी पढ़ाई छूटने का बहुत अफसोस था पर अब जो होना था सो हो गया… थे घर के कुछ पर्सनल रीजन्स… पर आप बहुत बदल गए हो। पहले कितने दुबले-पतले थे। और अब बड़े स्मार्ट हो गए हो। और खाने की आदत तो बिल्कुल भी नहीं बदली।

बॉस: पर तुम नहीं बदलीं… पहले जैसी थीं अब भी वैसी ही खूबसूरत दिखती हो। हाँ कुछ-कुछ बदलाव है तुम में…

(फिर अम्मी के बदन को और उनके बूब्स घूरते हैं। अम्मी अपनी तारीफ सुनकर शर्माने लगीं और उनका चेहरा गुलाब की तरह खिल उठा। मैंने देखा जैसे-जैसे बॉस पर शराब का सुरूर चढ़ रहा था, उनके जीन्स में लंड के हिस्से पर फुलाव बढ़ रहा था।)

अम्मी: एक बात तो है… कॉलेज का वक्त मेरे लिए बहुत यादगार था। सभी दोस्त बहुत अच्छे थे। पर शादी के बाद सब कुछ छूट ही गया। पर देखिए किस्मत का खेल आप हमें फिर मिल गए। वो भी मेरे बेटे के बॉस बनकर। मुझे बहुत खुशी है आपने अच्छी प्रोग्रेस की है…

बॉस: मुझे भी तुमसे वापस मिलकर बहुत अच्छा लगा शब्बो… सॉरी… शबाना जी… पर सुनकर दुख हुआ कि तुम्हारा करियर नहीं बन सका।

अम्मी: पर कोई बात नहीं… अब मेरे बेटे का करियर आपके हाथ में है… प्लीज मेरे लिए इस पर खास ध्यान देना अज्जू… सॉरी अजय जी…

बॉस: जरूर… क्यों नहीं… मेरे होते हुए अब तुम्हें टेंशन लेने की जरूरत नहीं है… मैं समीर की लाइफ सेट कर दूँगा… बस तुम मुझे खुश करती रहना…

(अम्मी और मैं दोनों इस बात पर चौंक गए कि आखिर ये क्या कहना चाहते थे।)

बॉस: अरे भाई… मुझे बढ़िया-बढ़िया खाना बनाकर देना…

अम्मी: ओह… हाँ… बिल्कुल… बस अब आपको जो भी मन हो ऑर्डर करना… सारी डिशेज आपके सामने पेश कर दूँगी।

फिर बॉस जाने लगे तो दरवाजे पर अब्बा मिले। मैंने बॉस से अब्बा का इंट्रो करवाया। मुझे सुकून हुआ कि अब्बा ने उनसे सही से बात की। और फिर बॉस निकल गए।

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