बड़ी बहन ने मुठ मारते पकड़ा 2
Badi bahan ne muth marte pakda:- नमस्कार दोस्तों। उम्मीद है आपको कहानी पसंद आ रही होगी। अपना फीडबैक देने के लिए मुझे मेल कर सकते हैं। आज मेरे कॉलेज में एक फंक्शन था जिसमें दूसरे कॉलेज के स्टूडेंट्स भी आए थे। उनमें एक लड़की बहुत सेक्सी थी। उससे बात हुई, नंबर भी शेयर हुआ। लेकिन वो मैं आपको बाद में बताऊँगा। अभी अपनी कहानी कंटिन्यू करता हूँ।
Part 1 ==> बड़ी बहन ने मुठ मारते पकड़ा 1
मैंने अपना पॉर्न कलेक्शन हाइड किया और लैपटॉप बंद करके रख दिया ताकि सबा को शक न हो। फिर एक किताब लेकर लेट गया। थोड़ी देर बाद रूम का दरवाजा खुला। मैं समझ गया सबा आई है, लेकिन मेरी मम्मी गेट पर थीं। वो अंदर आईं और मेरे पास आकर बैठ गईं।
Badi bahan ne muth marte pakda hindi sex story
मैं अभी भी लेटा हुआ था। मम्मी ने थोड़े गुस्से में समझाते हुए कहा—
मम्मी: अब पढ़ाई पे ध्यान दे। बस ये गेम अब सब बाद में खेलना।
मैं हाँ में सर हिलाया। मम्मी समझाती जा रही थीं और मैं नजर चुराकर उनके बूब्स देख रहा था। उन्होंने एक पर्पल कलर की नाइटी पहनी हुई थी। जिसका गला ज्यादा डीप तो नहीं था, लेकिन तेज निगाह वालों के लिए काफी थी।
नाइटी का ऊपर का पार्ट थोड़ा नेट का बना हुआ था। जिसमें से उनकी ब्रा हल्की-हल्की दिख रही थी और कुछ हद तक क्लीवेज भी। मम्मी का फिगर भी बिल्कुल मस्त है। 36 के बूब्स होंगे शायद। और मम्मी-पापा रोज सुबह वॉक पर जाते हैं तो मम्मी का फिगर भी मेंटेन है।
मम्मी की उम्र शायद 43-45 के आसपास होगी। लेकिन दिखने में 35-40 की लगती हैं। इसलिए बैंक में कोई नहीं मानता कि उनके तीन बच्चे हैं और वो भी कॉलेज में। मम्मी मुझे समझा रही थीं। फिर रूम के बारे में बोलने लगीं—
मम्मी: कितना गंदा रहता है। साफ रखा कर।
और मैं उनके बूब्स देख रहा था।
मेरे बेड के पास मेरी टी-शर्ट पड़ी हुई थी। मम्मी वो उठाने के लिए झुकीं और मुझे उनके बूब्स के अच्छे से दर्शन हुए। उनकी ब्रा भी साफ दिखाई दी।
मम्मी: ये जगह है टी-शर्ट उतारने की क्या?
वो उठीं और मेरी तरफ कमर करके अलमारी के पास रखे बकेट में टी-शर्ट डाल दी। मुझे उनकी हिलती हुई गाँड साफ नजर आ रही थी। और मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया। मेरे लोअर में साफ दिखने लगा।
फिर मैंने उस जगह अपनी किताब रख दी और बैठ गया।
मम्मी: अब पढ़ ले। मैं दूध लेकर आती हूँ।
मम्मी के जाने के बाद मैंने रूम बंद किया और फौरन लोअर से लंड बाहर निकालकर हिलाना शुरू कर दिया। मेरे सामने मम्मी के वो झुके हुए बूब्स नजर आ रहे थे।
मैं दरवाजे के पास ही मुठ मार रहा था। बस कुछ स्ट्रोक के बाद झड़ने ही वाला था कि दरवाजे पर नॉक हुआ। मैंने इग्नोर किया क्योंकि मैं बस झड़ने वाला था। फिर नॉक हुआ। मैंने मजबूरी में न चाहते हुए भी लंड अंदर किया। क्योंकि बाहर शायद मम्मी थीं दूध लेकर आई होंगी। मैंने सोचा दूध पीके फिर दरवाजा बंद करके शुरू हो जाऊँगा। इसलिए लंड लोअर में अंदर कर लिया। लेकिन मेरा खड़ा लंड लोअर में साफ नजर आ रहा था।
मैंने फटाफट दरवाजा खोला। मेरे सामने सबा खड़ी थी। वो सीधे दरवाजा खोलते हुए कमरे में घुस गई।
सबा: क्या कर रहा था?
मैं उसकी तरफ बढ़ते हुए बोला—
साहिल: बाथरूम में था।
मैंने देखा कि उसकी नजर मेरे ग्रॉइन पर थी।
सबा: नहीं। तू दरवाजे के पास ही था। पर तूने दरवाजा नहीं खोला। क्या कर रहा था? सच-सच बता।
साहिल: कुछ नहीं।
फिर वो नॉर्मल होकर पूछने लगी—
सबा: बता तो। क्या कर रहा था?
मुझे लगा शायद वो मेरे मुँह से सुनना चाहती है कि मैं मुठ मार रहा था। लेकिन मैंने नहीं बोला क्योंकि वो बहुत चालाक है।
साहिल: बताया तो। कुछ नहीं कर रहा था।
सबा मेरी तरफ देख रही थी।
सबा: वो तो दिख ही रहा है।
सबा मेरे बेड पर बैठी थी और मुझे भी बैठने के लिए बोला। मैं अपने लंड को छुपाते हुए बेड पर बैठ गया।
सबा: अब दिखा।
मैं हैरान और बिल्कुल शॉक्ड।
सबा: मम्मी ने कहा था ना आज लैपटॉप देने को। तो जल्दी से दिखा। मैं देखती हूँ तेरे गेम्स और मूवी।
तब मैं समझा ये लैपटॉप माँग रही है। मैं खड़ा हुआ। मेरे लंड की टिप से लोअर में टेंट साफ नजर आ रहा था। फिर मैंने लैपटॉप लाकर सबा को दिया। सबा ने मेरा लैपटॉप ऑन किया और पासवर्ड पूछने लगी। मैंने पासवर्ड बताया।
सबा: ऐसा क्या है इसमें जो तू पासवर्ड लगाके रखता है?
साहिल: पर्सनल फाइल्स हैं।
सबा: हाँ वो तो दिन में देख लिया मैंने। कितनी पर्सनल हैं।
साहिल: अब तू बार-बार क्यों वो बोल रही है?
सबा: क्यों करते हुए शर्म नहीं आती? ऐसे गंदे काम। अब शर्म आ रही है?
मैं चुप रहा। और कर भी क्या सकता था। थोड़ी देर में मम्मी दूध लेकर आ गईं। और सबा का दूध भी मेरे ही रूम में देकर अनम के रूम चली गईं।
मम्मी: मैं अनम को दूध देके आती हूँ।
फिर सबा मेरा लैपटॉप चेक करने लगी और उसमें कुछ हॉलीवुड मूवीज और गेम्स डिलीट कर दिए। थोड़ी देर में मम्मी वापस आईं और मैं उनके बूब्स देख रहा था।
मम्मी: तेरी चादर कितनी गंदी हो रही है।
और सबा और मुझे उठने का बोला। वो चादर उतारने के लिए आगे झुकीं।
सबा मेरे आगे पीठ करके खड़ी थी और सबा के आगे मम्मी चादर उतार रही थीं। इसलिए मैं सुकून से सबा की गाँड और मम्मी के दूध एक साथ देख रहा था। मम्मी ने आराम से पूरी चादर निकाली और फिर एकदम से रुककर बोलीं—
मम्मी: ये क्या गिराया हुआ चादर पे?
मैंने चादर की तरफ देखा तो वो मेरा सीमेन था जो माल मैंने दिन में निकाला था। हालाँकि वो थोड़ा जम गया था फिर भी स्टिकी था। क्योंकि मेरे रूम में एसी ऑन रहता है तो वो सही से सूख भी नहीं पाया।
सबा और मम्मी दोनों मेरे सवाल का इंतजार कर रही थीं।
साहिल: मैं आज जल्दी आ गया था कॉलेज से। सर दर्द और जुकाम हो रहा था तो शायद मेरी नाक लग गई होगी।
जानता था कि ये बेहद घटिया बहाना था। उस वक्त इससे ज्यादा अच्छा जवाब मेरे पास नहीं था। सबा मेरी तरफ देखकर हल्का सा हँसने लगी।
मम्मी: रूमाल नहीं है क्या तेरे पास?
फिर मम्मी ने दूसरी चादर निकाली और सबा से कहा—
मम्मी: चादर बिछवा ना जरा।
अब सबा और मम्मी दोनों चादर बिछा रहे थे। सबा ने एक वी-नेक टी-शर्ट और शावर पहनी हुई थी। मम्मी मेरी साइड आ गई थीं और सबा मेरे सामने। कभी मैं मम्मी की बड़ी सी गाँड देखता तो कभी सबा के सेक्सी दूध। हाथ में दूध के गिलास से दूध पी रहा था।
फिर अचानक सबा ने मुझे उसके दूध देखते हुए पकड़ लिया और अपनी टी-शर्ट ठीक करने लगी। फिर मैंने नजरें हटा लीं और मम्मी की गाँड देखने लगा। सबा ने फिर मुझे मम्मी की गाँड देखते हुए देख लिया और खांसने लगी।
फिर मम्मी चादर बिछाके वहीं बैठ गईं और सबा मम्मी पास बैठ गई। मैं सबा और मम्मी के पीछे खड़ा था और देख रहा था कि लैपटॉप में क्या करती है।
मम्मी: तूने मूवीज डिलीट कर दी?
सबा: हाँ मैंने कर दी। और गेम्स भी।
मम्मी: अब इसे वापस दे दे। अब बस पढ़ना है लैपटॉप से। अब कोई गेम डाला तो लैपटॉप रख लूँगी मैं।
सबा: नहीं मम्मी। अब लैपटॉप मैं रखूँगी अपने पास। मुझे थोड़ा काम भी है और मैं चेक भी कर लूँगी कि कहीं और तो हाइड नहीं किया इसने।
मैं कॉन्फिडेंटली बोला—
साहिल: हाँ रख लो। कुछ है ही नहीं इसमें।
फिर मम्मी बाहर चली गईं। मम्मी के जाते ही सबा ने मुझे एक चाटा मारा हल्के से।
सबा: क्या कर रहा था तू?
साहिल: क्या?
सबा: तू मुझे और मम्मी को इतनी देर से क्या देख रहा था?
साहिल: कुछ भी तो नहीं।
सबा: सब पता है मुझे। मैं तेरी बड़ी बहन हूँ और वो तेरी माँ। कम से कम इसका लिहाज कर।
साहिल: तुम सामने थीं तो एकदम से नजर पड़ गई। और तुमने उसी टाइम देख लिया। वरना मैं देख नहीं रहा था।
फिर वो गुस्से में मेरा लैपटॉप लेकर बाहर जाने लगी। और मैं उसकी मटकती हुई गाँड देखने लगा। तभी वो मुड़ी।
सबा: आज के बाद तू दरवाजा अंदर से लॉक नहीं करेगा। वरना मैं मम्मी को सब बता दूँगी।
साहिल: ठीक है।
वैसे भी लैपटॉप वो लेकर जा रही थी इसलिए मैंने सोचा आज बाथरूम में ही कर लूँगा।
फिर वो मुड़ी और बाहर चली गई। मैं वापस बेड पर आकर लेट गया। मेरा लंबा लंड बिल्कुल खड़ा था जो क्लाइमेक्स पर आकर रुक हुआ था। फिर मैं बाथरूम गया और मैंने पहली बार मम्मी और सबा को एक साथ चोदा अपने खयालों में।
मैं यही सोच रहा था कि चादर बदलने के बाद मम्मी ने मुझसे पूछा ये क्या है और मैंने बता दिया कि ये मेरा माल है तो मम्मी ने कहा—
मम्मी: बेटा ये करने की क्या जरूरत है। सबा और मैं हूँ तो…
फिर मम्मी और सबा दोनों मेरा लंड चूसने लगे और मैं चुदाई पर आने से पहले ही झड़ गया। और साफ करके बाहर आ गया।
जैसे ही बाहर आया, मम्मी बेड के पास जमीन पर घोड़ी की तरह झुकी हुई थीं। और उनकी टाँगें साफ दिख रही थीं जो वैक्स की हुई थीं। मैं तो हैरान हो गया कि मम्मी मेरे कमरे में रात में साढ़े दस बजे घोड़ी क्यों बनी हुई हैं। और बस नजारे का मजा लेने लगा।
दोस्तों मैं अभी मुठ मारके ही बाहर आया था लेकिन मम्मी की चिकनी टाँगें और गाँड देखके मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा था। मैं थोड़ा आगे बढ़ा।
साहिल: क्या हुआ मम्मी?
मम्मी ने उसी झुकी हुई हालत में जवाब दिया—
मम्मी: शायद मेरी अंगूठी चादर बदलते समय रूम में गिरी है। तो वो वहीं ढूँढ रही हूँ।
मम्मी: तू भी ढूँढ। वहीं आसपास होगी।
तो मैं मम्मी के पीछे बैठके ढूँढने का नाटक करने लगा। और मम्मी की चिकनी गाँड और टाँगों का करीब से नजारा लेने लगा।
फिर मुझे आइडिया आया कि क्यों न आगे जाके मम्मी के दूध देखे जाएँ। तो मैं अंगूठी ढूँढते हुए आगे गया। मम्मी वहीं आसपास झुकके अंगूठी देख रही थीं। और मैं मम्मी के बूब्स देख रहा था। शायद मम्मी ने अब ब्रा उतार दी थी और नाइटी ऊपर से ब्रॉड दिख रही थी। मैं मम्मी के बूब्स कंटिन्यू देख रहा था। तभी मम्मी ने मुझे उनके दूध देखते हुए पकड़ लिया।
मम्मी: तू इस तरफ क्या देख रहा है? अंगूठी ढूँढ।
फिर मैं सच में अंगूठी ढूँढने लगा। और फिर से मम्मी ने हाथ हटा लिया। मैं उनके बूब्स देखते-देखते थोड़ा उनके पास चला गया। मम्मी को मेरे हाथ के पास ही अंगूठी मिल गई। लेकिन उन्होंने बोला—
मम्मी: नहीं।
और मुझे देखने लगीं। फिर कसके मेरा नाम लेकर बोलीं—
मम्मी: साहिल!!!! ध्यान कहाँ है तेरा? तेरे हाथ ही के पास थी अंगूठी। आँखें कम चलाया कर।
और उठीं। कपड़े सही करके चली गईं।
फिर मैं लेट गया और सोचने लगा—यार आज एक ही दिन में क्या-क्या हो गया मेरे साथ।
पहले निशा के बूब्स।
फिर घर आकर सबा ने मुठ मारते देखा।
फिर सबा को चूत में उंगली करते सुना।
फिर सबा और मम्मी के दूध और गाँड देखी वो भी एक साथ।
फिर सबा के हाथ से चाटा खाया।
फिर अब मम्मी की नंगी टाँगें और बड़ी सी गाँड देखी।
और मम्मी के बूब्स देखे और उन्होंने भी पकड़ लिया।
मैं यही सोच रहा था और कब मेरी आँख लग गई पता भी नहीं चला।
अगले दिन सुबह मुझे मम्मी ने उठाया। वो नाश्ते के लिए आई थीं।
मम्मी: आज तेरा रूम खुला हुआ था?
उन्हें क्या बताता।
साहिल: सो गया था।
मम्मी: एसी ऑन रहता है तो रूम बंद रखा कर। तैयार होके नीचे आ जा। नाश्ता करके स्कूल जाना है।
आज मैं देर से उठा। वरना रोज अपनी कामवाली बाई को झाड़ू-पोछा करते हुए देखता हूँ। उसके क्लीवेज भी मस्त हैं। वो होगी कोई 32-35 साल की और मस्त माल है। साड़ी में आती है तो उसका पेट और दूध बहुत मस्त दिखते हैं। लेकिन आज वो आई नहीं थी शायद।
खैर उस दिन फिर नाश्ता किया और अनम के साथ स्कूल जाने के लिए निकला तो पीछे से सबा ने आवाज दी—
सबा: मैं भी साथ चलूँगी।
फिर मैंने अनम को बैठने को बोला।
सबा: नहीं। तू पीछे बैठ। मुझे डर लगता है।
तो सबा बैठी बाइक पे। फिर उसके पीछे अनम बैठी। दोनों क्रॉस में बैठे थे। मुझे तो सबा के बैठते ही उसके बूब्स का टच फील होने लगा था। लेकिन पाँच मिनट बाद स्टॉप आ गया और सबा उतर गईं। फिर अनम और मैं स्कूल गए। स्कूल में भी कुछ खास नहीं हुआ और निशा भी नहीं आई तो और मायूस हो गया मैं।
फिर वापस घर आए। अनम और मैं सीधे अपने कमरे में गए। मुझे आते ही मुठ मारने की आदत है तो मुझे मुठ मारनी थी। लेकिन मेरा लैपटॉप तो सबा के पास था।
फिर मैं उसके रूम में गया और अपना लैपटॉप ढूँढने लगा। फिर उसके कपड़ों की अलमारी में मेरा लैपटॉप रखा मिला। मैं लैपटॉप लेकर जा रहा था कि मुझे सबा की अलमारी में उसकी यूज्ड ब्रा और पैंटी मिली। मैंने एक ब्रा और एक पैंटी उठाई और लेकर कमरे में जाने लगा।
मैं अपने रूम में पहुँचा ही था कि मुझे याद आया अनम शायद कपड़े चेंज कर रही होगी। तो मैं वापस सबा के रूम में गया और सबा और अनम के रूम का जॉइंट वेंटिलेशन में से उसके रूम में झाँकने लगा। अनम शलवार पहन रही थी लेकिन उसने ऊपर बस ब्रा पहना हुआ था। और एक मिनट बाद ही उसने कमीज भी पहन ली।
फिर मैं वापस अपने रूम में आया। रूम लॉक करके पूरे कपड़े उतारके लेट गया। लैपटॉप में एक पॉर्न वीडियो लगाई ब्रो-सिस पैंटी स्निफिंग की। और दूसरी भी वीडियो जो मैंने सी ड्राइव में हाइड की हुई थीं वो देखी। और सबा की पैंटी और ब्रा सूँघ रहा था। उसकी पैंटी से अजीब सी स्मेल आ रही थी जो शुरू में गंदी लगी। लेकिन वीडियो देखने के बाद वो खुशबू मेरे दिमाग पे छा गई। और सबा की पैंटी पे स्पर्म जैसा चिपचिपा सूखा हुआ कुछ था जिसे मैं सूँघने लगा। शायद वो उसकी चूत का पानी होगा। मैंने सबा की पैंटी सूँघके मुठ मारी। और बहुत सारा माल बाहर उछलके सबा के ब्रा पे और चादर पर गिर गया।
फिर मैंने सबसे पहले कपड़े चेंज किए। सबा की पैंटी उठाई और उसके ब्रा पे से अपना सीमेन साफ किया। लैपटॉप लेकर उसे वापस उसके रूम में रखने के लिए जाने लगा। तभी अनम बाहर आ गई और मैंने ब्रा और पैंटी छुपा ली।
लेकिन उसने लैपटॉप देख लिया।
अनम: अप्पी को बताऊँगी।
फिर मैं उसे इग्नोर करता हुआ रूम में गया। सबा की ब्रा-पैंटी जैसी रखी थी वो वहीं रखी। लैपटॉप रखकर वापस आ गया।
लेकिन सबा की पैंटी की स्मेल मेरे दिमाग से नहीं जा रही थी। अब तो मुझे बस सबा की चूत सूँघने का दिल कर रहा था। खैर मैं नीचे आया। अनम ने खाना निकालके दिया और हम दोनों ने खाना खाया। फिर खाना खाके मैं रूम में जाके सोने चला गया। और मुझे फिर से सबा की पैंटी की खुशबू सूँघने का दिल किया।
तो मैं दबे पाँव उसके रूम में गया और बस पैंटी और ब्रा लेकर आया। लैपटॉप लेकर नहीं आया। फिर मैंने रूम लॉक किया। लोअर उतारके उसकी पैंटी सूँघने लगा। और उसका ब्रा अपने लंड पे लपेट लिया। उसकी पैंटी सूँघते ही मेरा लंड बिल्कुल टाइट हो गया। और मेरे लंड से प्रीक्यूम निकलने लगा। फिर मेरा दिल किया कि बस के सबा को चोद दूँ। और मैं उसकी पैंटी सूँघने लगा। जोर-जोर से अपना लंड हिलाने लगा। और सबा के ब्रा पे ही पूरा सीमेन निकाल दिया। और मैंने ऐसे ही सो गया।
थोड़ी देर बाद जोर-जोर से दरवाजा नॉक होने की आवाज से मैं उठा। मैंने देखा तो लंड और ब्रा दोनों मेरी सीमेन में गीले। और चादर पे सीमेन पड़ी हुई है।
फिर मैंने फटाफट अपने रूमाल से चादर साफ की। सबा की ब्रा और पैंटी गद्दे के नीचे छुपा दी। लोअर चढ़ाके दरवाजा खोला। और खोलते ही मैंने राहत की साँस ली। क्योंकि मेरे सामने मम्मी खड़ी थीं। और मम्मी को बेवकूफ बनाना आसान था। जबकि सबा सच सुनके ही मानती है।
मम्मी: इतनी देर से नॉक कर रही हूँ। क्या कर रहा था?
साहिल: सो रहा था।
मम्मी: मैं चाय लेकर आई हूँ। चाय पी ले।
और मेरे रूम में आकर बैठ गईं।
मम्मी: पढ़ लिया कर बेटा। पढ़ाई काम आएगी। सोने से कुछ नहीं मिलेगा।
फिर मैं उनकी हाँ में हाँ मिलाता रहा। और उनकी नजर चादर पे पड़ी।
मम्मी: कल ही चादर बदली थी तूने। फिर गंदी कर दी।
और सीमेन की जगह पे हाथ लगाने लगीं जो बिल्कुल ताजा था और चिपचिपा था।
मम्मी: ये क्या है? गोंद जैसा।
साहिल: जुकाम हो रहा है मम्मी।
मम्मी: रूमाल है तो इससे क्यों पोंछता है?
साहिल: रूमाल से ही पोंछी थी। पर थोड़ी यहाँ भी गिर गई।
लेकिन मुझे शक की निगाहों से देख रही थीं जैसे वो समझ गई हों।
मम्मी: कहाँ है रूमाल?
साहिल: यहीं कहीं था।
और मुझे याद आया कि रूमाल तो सबा की ब्रा और पैंटी के साथ गद्दे के नीचे दफन है। तो मैं ढूँढने का नाटक करने लगा और टालने लगा। लेकिन मम्मी को शक हो चुका था।
मम्मी: ढूँढ के दे।
मैंने फिर कहा—
साहिल: आप उस साइड देखो। वहीं कहीं होगा।
जैसे ही मम्मी मुड़ीं, मैंने गद्दे के नीचे से रूमाल निकाल लिया और मम्मी को दिखाया। लेकिन सीमेन बिल्कुल सफेद थी और अलग ही समझ आ रहा था। लेकिन फॉर्चूनेटली मम्मी ने घिन की वजह से रूमाल पकड़ा भी नहीं। बस उन्हें स्टिकी दिखाई दिया।
मम्मी: मुझे दे। मैं धोके डाल दूँगी।
और ऊपर से पकड़ने लगीं। लेकिन मैंने कहा—
साहिल: नहीं। मैं धो लूँगा।
मम्मी: तुझे वैसे ही जुकाम है।
और मेरा रूमाल ऊपर से पकड़के ले गईं।
मम्मी के जाने के बाद मैंने चाय खत्म की और राहत की साँस ली। तभी थोड़ी देर बाद मम्मी की आवाज आई—
मम्मी: साहिल!!!!
मम्मी वॉशिंग एरिया में थीं और थोड़े गुस्से में थीं।
मम्मी: तेरा गंदगी से भरा रूमाल मैंने धोने के लिए डाल दिया है। आज के बाद ये सब हरकतें बंद कर दे। वरना तेरे पापा को बताऊँगी।
साहिल: नहीं मम्मी। वो नाक ही है।
मम्मी: मुझे पता है क्या है वो। तू चादर भी इसी में गंदी करता है। आज के बाद कभी अगर तूने कुछ गंदा किया तो सब तेरे पापा को बताऊँगी।
लेकिन मैं उनकी बात का इनकार करता रहा—
साहिल: वो नाक ही है। जो आप सोच रही हो वो नहीं है।
मम्मी: सब पता है मुझे। आज के बाद कुछ नहीं करना।
फिर मुझे समझाने लगीं—
मम्मी: बेटा इससे सेहत खराब होती है। मेमोरी वीक होती है। क्या जरूरत है ये सब करने की? तू तो अच्छा बेटा है मेरा। मैं तेरी हर बात मानती हूँ। अब तू ये सब करेगा क्या बता?
मैंने उन्हें सॉरी बोला—
साहिल: अब नहीं करूँगा।
और सच में दोस्तों, कई दिनों तक मैंने अपना लंड सही से देखा भी नहीं।
लेकिन फिर एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि मुझे मुठ मारनी ही पड़ी।
सबा ने एक दिन मुझे मेरे ही रूम में आवाज देके बुलाया। मुझे लगा शायद लैपटॉप में कुछ काम होगा। मैं टीवी छोड़के अपने रूम में गया। लेकिन जब मैं रूम में पहुँचा तो सबा के हाथ में उसकी वही ब्रा थी जिसमें मेरा सूखा हुआ सीमेन लगा हुआ था। और पैंटी उसके दूसरे हाथ में थी।
वो गुस्से में आगबबूला।
सबा: ये तेरे गद्दे के नीचे क्या कर रहा है?
मेरे पास जवाब नहीं था। लेकिन आगे जो हुआ उसने सब बदल के रख दिया।
जानने के लिए पढ़ते रहिए मेरी स्टोरी। और फीडबैक देना न भूलिए। कमेंट सेक्शन में कमेंट जरूर कीजिए।
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Kya likhta h bhai agli story kab dalega