मम्मी की चुदाई पूजा – 1

Mummy ki dost se chudai ki kahani:- मेरा नाम तेजस है और मैं दिल्ली में रहता हूँ। मेरी उम्र 20 साल है। मेरे घर में हम 5 लोग रहते हैं – मेरे पापा रमेश (51), मम्मी वर्ना (46), भाई राहुल (18) और बड़ी बहन जिसकी एक साल पहले शादी हो गई थी।

मैं कॉलेज में पढ़ाई कर रहा हूँ और छोटा भाई स्कूल जाता है। पापा एक प्राइवेट जॉब करते हैं और मम्मी एक घरेलू महिला हैं (हाउसवाइफ)। मम्मी दिखने में मस्त लगती हैं। एक नॉर्मल खाई-पीई घर की मम्मी की हाइट भी 5.5″ है। मम्मी रोज पूजा करने मंदिर भी जाती हैं और फिर मंदिर से आने के बाद छत पर तुलसी में जल चढ़ाने जाती हैं।

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Mummy ki dost se chudai ki kahani

इंट्रो बहुत हुआ। अब कहानी पर आते हैं। ये 2 हफ्ते पहले की बात है। छोटा भाई स्कूल गया हुआ था और पापा भी जा चुके थे। मैं घर में सबसे लेट उठता था।

सुबह के 9 बजे थे। मैं बिस्तर से उठा और मूतने चला गया। फिर ब्रश करके चाय पीने लगा। मम्मी उस टाइम शायद नहा रही थीं। फिर मम्मी नहाकर बाहर निकल आईं और पूजा की तैयारी करने लगीं। मम्मी पहले घर के मंदिर में पूजा करती थीं और फिर बाहर मंदिर में जाती थीं।

अभी मम्मी ब्लाउज और पेटीकोट में ही थीं। मुझे मम्मी में सबसे अच्छी चीज उनकी बाहर निकली हुई गोल-गोल चूतड़ों वाली गाँड लगती थी। मैं रोज मम्मी के नाम की मुठ मारके सोया करता था। और हाँ दोस्तों आपको एक चीज बता दूँ – मम्मी कभी कच्छी और ब्रा नहीं पहनती थीं। ये बात मुझे बचपन से ही पता थी।

तो मम्मी नहाने के बाद साड़ी पहनकर पूजा करने बैठ गईं और फिर मंदिर जाने लगीं। मैं आराम से चाय पी रहा था और टीवी देख रहा था। मम्मी निकल गईं घर से बाहर।

दोस्तों मेरा एक दोस्त था जो हमारे बिल्कुल घर के बराबर में ही रहता है। मेरी ही एज का है लेकिन बचपन से ही हम सभी दोस्तों में सबसे हट्टा-कट्टा है। 5.11″ लोंदा है। उसका नाम अमित है और लोंदियाबाजी में नंबर 1 है। मगर बहुत दिनों से वो किसी लोंदिया को सेट नहीं कर पा रहा था।

क्योंकि उसकी गर्लफ्रेंड की शादी हो गई थी। तभी से उसने किसी की भी चूत नहीं मारी थी और उसको चूत लेने की बहुत तलब चढ़ रही थी। जब भी वो मुझको मिलता तो मुझसे कहता—

अमित: सचिन भाई किसी से चूत का जुगाड़ कर।

और मैं उसकी बातों पर जोर-जोर से हँस पड़ता।

अमित हमेशा गली की एक दुकान पर अपना टाइम पास करता रहता था और आने-जाने वाली हर लड़की-औरत को भूखी नजरों से देखा करता था। जब मेरी मम्मी मंदिर जा रही थीं तो अमित उन्हें भी घूर-घूर कर देख रहा था। ये उसका रोज का काम था।

मम्मी मंदिर से वापस लौट रही थीं और दुकान पर आकर रुक गईं क्योंकि मम्मी की अगरबत्ती खत्म हो गई थी। मम्मी ने दुकान वाले से एक अगरबत्ती का पैकेट मँगाया।

तो सोनू ने कहा—

सोनू: अभी देता हूँ आंटी।

सोनू दुकान वाला लड़का था।

सोनू थोड़ी देर बाद मम्मी के पास आकर बोला—

सोनू: आंटी अगरबत्ती तो खत्म हो रही है। हमारी दूसरी दुकान पर पड़ी होगी। मैं अभी 10 मिनट में मँगा देता हूँ।

मम्मी ने अमित को और सोनू को हल्की सी स्माइल दी और कहा—

वर्ना: मैं 10 मिनट तक यहीं खड़ी रहूँ क्या? मुझे पूजा को देर हो रही है बेटा सोनू।

सोनू: आंटी आप घर जाओ। मैं अभी 10 मिनट में अमित के हाथ आपके घर पर अगरबत्ती का पैकेट भेजवा दूँगा।

वर्ना: इसकी माँ ने देख लिया ना तो फजीहत खड़ा कर देगी।

दोस्तों क्योंकि मेरी और अमित की मम्मी की लड़ाई हो रखी थी। दरअसल अमित की माँ बहुत लड़ाकू थी।

अमित ने मम्मी से कहा—

अमित: आंटी मैं आपको पैकेट छत से दे दूँगा। आप छत पर ही मिलना।

मम्मी ने सिर हिलाते हुए कहा—

वर्ना: ठीक है। जल्दी आना। मैं छत पर ही इंतजार करूँगी तेरा।

ये कहकर मम्मी घर आने लगीं।

अमित ने सोनू से कहा—

अमित: क्या गाँड है यार इसकी। कितनी मटक रही है।

सोनू: यार सचिन की मम्मी तो मस्त है।

और फिर मम्मी घर में आ गईं और लोटे में जल लेकर जाने लगीं।

मैं भी मम्मी की मटकती गाँड को देख रहा था। मम्मी छत पर करीब 15-20 मिनट पूजा करती हैं। दोस्तों मेरी और अमित की छत एकदम सटी हुई है। बस बीच में एक 4 फुट की दीवार है। मम्मी सूरज को जल देती हैं और फिर अमित का इंतजार करने लगती हैं।

बहुत देर हो जाती है मम्मी को छत पर खड़े हुए। पर अमित अभी तक अगरबत्ती लेकर नहीं आया था। और धूप होने की वजह से मम्मी को साड़ी में बहुत गरमी लगने लगती है। तो मम्मी की छत पर एक नाइटी सुख रही होती है। मम्मी साड़ी उतारकर नाइटी पहन लेती हैं और मम्मी नाइटी के नीचे से अपना पेटीकोट उतारने लगती हैं।

इतने में ही अमित छत पर आ जाता है और मम्मी को पेटीकोट उतारते हुए देख लेता है। फिर थोड़ी देर बाद अमित मम्मी से कहता है—

अमित: लो आंटी तुम्हारी अगरबत्ती।

वर्ना: लेने गया था या बनाने गया था? इतनी देर से खड़ी हूँ मैं।

अमित तो बस मम्मी को ही नाइटी में ताड़े जा रहा था। क्योंकि मैक्सी के नीचे मम्मी बिल्कुल नंगी थीं। उसकी गाँड की लाइन की दरार साफ देखी जा सकती थी क्योंकि नाइटी काफी सिल्की थी और हल्की सी थी।

जैसे ही मम्मी उसे अगरबत्ती लेती हैं वो कहता है—

अमित: आंटी टॉयलेट कहाँ करूँ? बहुत जोर से आया है।

वर्ना: यहाँ छत पर तो बाथरूम है नहीं। रात में सब उस कोने में करते हैं। जा वहाँ कर ले।

क्योंकि हमारी छत चारों तरफ से ढकी हुई थी क्योंकि सबके 3 मंजिला मकान बने हुए थे। बस कमरा और अमित का छोड़कर। इसलिए किसी को कुछ दिख नहीं सकता था। वैसे भी धूप में छत पर आता ही कौन है।

मम्मी ने अमित को जो जगह बताई थी मूतने की वो बिल्कुल मम्मी के पूजा करने के 20 मीटर सामने ही थी।

अमित मूतने के लिए वहाँ चला गया और मम्मी से बोला—

अमित: आंटी यहाँ?

वर्ना: हाँ बेटा।

और मम्मी पूजा में व्यस्त हो गईं। अमित ने अपना लोहे जैसे रॉड जैसा कम से कम 7 इंच लंबा 3″ मोटा लौड़ा निकाला और जोर से मूतने लगा। अमित की धार का प्रेशर इतना तेज था कि मम्मी तक उसके पेशाब की छींटें आने लगीं।

मम्मी ने एकदम से कहा—

वर्ना: क्या कर रहा है? जोर से चिल्लाई।

अमित ने एकदम से मम्मी की तरफ मुड़ गया और उसका लंड अभी भी बाहर था। मम्मी तो उसके लंड को देखती ही रह गईं और आँख फटी के फटी रह गईं। मम्मी ने कभी ऐसा लंड नहीं देखा था।

अमित भी बेशर्मों की तरह मम्मी को लंड दिखाए जा रहा था और मम्मी देखे जा रही थीं। करीब 1 मिनट तक।

अमित तो अभी अपनी पूरी जवानी में था। और हाँ दोस्तों अमित बहुत कम मुठ मारता था और पोर्न वगैरह भी बहुत कम ही देखता था। यही वजह थी कि उसका शरीर और लंड हम सभी दोस्तों से अच्छा था। क्योंकि वो मेरा बहुत अच्छा और पुराना दोस्त था तो मुझे ये सब बात पता थी।

मम्मी को ऊपर गए हुए करीब 15 मिनट हो गए थे पर मैं अभी भी टीवी देख रहा था। करीब 1 मिनट तक तो मम्मी उसका लंड निहारती रहीं। फिर उन्हें होश आया और अमित से—

वर्ना: आराम से पेशाब कर। अमित देखता नहीं क्या? मैं पूजा कर रही हूँ और तेरे पेशाब की छींटें आ रहे थे मुझ पर।

अमित ने जल्दी से मुड़के अपना लंड अंदर किया और फिर घूमके बोला—

अमित: सॉरी आंटी। आपकी छत बहुत छोटी है। इसी वजह से छींटें आ रहे थे। अच्छा तो आंटी मैं जा रहा हूँ दुकान पर। और हाँ आंटी अगरबत्ती के पैसे मँगा रहा था। 20 रुपये।

वर्ना: हाँ अभी तो यहाँ पैसे हैं नहीं मेरे पास। मैं नीचे से लाके देती हूँ तुझे। तू यहीं रुक अभी।

अमित: आंटी बहुत धूप हो रही है। मैं तो जा रहा हूँ। थोड़ी देर बाद आप खुद देने आ जाना।

वर्ना: चल ठीक है तू जा। मैं तेजस के हाथों भिजवा दूँगी।

अमित अपने मन में बोला—अब ये तेजस कहाँ से बीच में आ गया। और निराश होकर जाने लगा। और तेजी से बीच की दीवार की तरफ जाते ही बड़ी मासूमियत से बोला—

अमित: आंटी पैसे जल्दी ही भिजवा देना वरना सोनू मुझे डाँटेगा।

वर्ना: अभी भिजवा रही हूँ भैया।

और अमित के शॉर्ट्स में बने तान की तरफ देख रही थीं अपनी तिरछी नजरों से। शायद दोस्तों बहुत दिनों से मम्मी चुदी भी नहीं थीं पापा से। और अमित मम्मी को जाते समय ताड़े जा रहा था।

उसको मम्मी की पिंक मैक्सी में चूतड़ों की दरार साफ-साफ दिखाई दे रही थी। मम्मी नीचे उतरने ही वाली थीं कि एकदम से धम्म की आवाज आती है।

ये आवाज अमित की थी क्योंकि जब वो 4 फीट की दीवार चढ़ रहा था तो उसका ध्यान मम्मी की गाँड पर था। इसी वजह से वो हमारी छत पर गिर गया। उसने अपना दर्द बयान किया। एक सेकंड को शायद उसको साँस भी नहीं आ रही होगी।

सच में वो बहुत जोर से गिरा था। मम्मी एकदम से भागकर उसके पास गईं और उसको उठाने लगीं और कहने लगीं—

वर्ना: मर ली चोट? ध्यान से नहीं चढ़ सकता था?

और अमित दर्द से कराह रहा था। वो कई जगह से छिल भी गया था।

मम्मी ने अमित को दीवार के सहारे बैठाया। और एक तो जुलाई की गरमी ऊपर से उसको जो चोट लगी थी उसकी वजह से अमित को बहुत पसीना आ रहा था। वो एकदम तर हो गया था। मम्मी एकदम से उठीं और कपड़ा देखने लगीं छत पर। बस उसकी साड़ी थी और उसका उतारा हुआ पेटीकोट। क्योंकि साड़ी से पसीना ढंग से नहीं पोंछता। इसी वजह से मम्मी ने पेटीकोट उठा लिया क्योंकि पेटीकोट सूती होता है और जल्दी पसीना एब्जॉर्ब कर लेता है।

पेटीकोट लेते ही मम्मी अमित के पास गईं और अमित का मुँह पोंछने लगीं। पेटीकोट वही था जो थोड़ी देर पहले ही मम्मी ने उतारा था। जाहिर सी बात थी कि पेटीकोट में चूत और गाँड की पागल कर देने वाली महक थी। जैसे ही अमित के नाक के पास पेटीकोट गया, अमित को मनमोहने वाली मादक महक सूँघी और अमित का मानो दर्द छू मंतर हो गया हो।

मम्मी बहुत प्यार से उसका मुँह पोंछ रही थीं और अमित मदमस्त होता जा रहा था। और फिर मम्मी ने जहाँ-जहाँ उसको चोट लगी थी वहाँ पोंछा और बोला—

वर्ना: अब घर जा और चोट की दवाई लगा ले। वरना गरमी का टाइम है। घाव पक जाएगा।

अमित: आंटी मेरे यहाँ चोट की दवाई नहीं है। छोटी-मोटी चोट है। यूँ ही ठीक हो जाएगी।

जब अमित ये बात बोल रहा था तो उसका ध्यान मम्मी की टाँगों के बीच में था क्योंकि मम्मी दोनों पैरों पर बैठी थीं। अमित को बीच की जगह में से उसकी मोटी-मोटी चिकनी जाँघ दिखाई दे रही थीं।

मम्मी ने जैसे ही अमित को नोटिस किया तो मम्मी एकदम से उठ खड़ी हुईं और बोलीं—

वर्ना: तेरी ये चोट मेरे काम की वजह से लगी है। तू दुकान पर जा सोनू की। मैं अभी पैसे और दवाई लेकर आती हूँ।

और अमित खुश हो गया और चला गया। मम्मी भी खुश थीं और आँखों में कामुकता थी।

करीब 30 मिनट बाद मम्मी नीचे आई थीं और काफी खुश लग रही थीं। और मम्मी कमरे में एंटर हुईं। मैंने पूछा—

तेजस: इतनी देर पूजा कर रही थीं क्या?

मम्मी हड़बड़ाहट में घबरा के बोलीं—

वर्ना: आज गुरुवार है ना तो मेरा व्रत है। इसलिए पूजा में लेट हो गई।

अमित जब तक दुकान पर वापस जा चुका था।

सोनू: अमित से भोसड़ी के कहाँ था इतनी देर से? अगरबत्ती देने गया था या आंटी की गाँड में घुसाने गया था?

फिर अमित ने पूरा किस्सा सोनू को सुनाया तो सोनू बहुत एक्साइटेड हो गया था अमित की बातें सुनकर।

अमित: भाई मेरा पूरा लंड देखती रही और मुझे अपनी चूत की खुशबू वाला पेटीकोट भी सुँघाया। भाई जब खुशबू ही इतनी अच्छी है तो गाँड क्या होगी यार आंटी की। सोनू भाई मैं गारंटी से कह रहा हूँ चुद जाएगी मुझसे।

सोनू की तो मानो हालत खराब हो गई थी। उसका लंड पूरी तरह से इरेक्ट टाइट फुल फॉर्म में आ गया था।

सोनू: भाई मुझे उसकी नंगी गाँड दिखा दे भाई प्लीज।

अमित: भाई अभी पैसे देने आने वाली है आंटी। कोई प्लान सोचते हैं। गाँड क्या तू चूत भी देखियो और मैं मारूँगा। हा हा हा।

दोनों हँसने लगे।

उधर तेजस यानी कि मैं थोड़ा असमंजस में था कि मम्मी गईं तो साड़ी में थीं मगर मैक्सी में आई हैं और वो भी इतनी देर में। मम्मी मन ही मन मुस्कुरा रही थीं और कुछ ढूँढ रही थीं। मम्मी अमित का लंड देखकर बहुत एक्साइटेड हो गई थीं और बार-बार उसके लंड के बारे में ही सोच रही थीं। और जो अमित के पेशाब की छींटें मम्मी के मैक्सी और हाथों पर गिरी थीं उसकी गंध से और उत्तेजित हो रही थीं।

थोड़ी देर बाद मम्मी ने झूठे को मुझसे पूछा—

वर्ना: सोनू की दुकान पर उसके 20 रुपये दे आएगा? मैं अभी अगरबत्ती का पैकेट उधार लाई थी।

जबकि मम्मी को पता था कि मैं नहीं जाऊँगा क्योंकि मुझे छोटा-मोटा काम करना बिल्कुल भी पसंद नहीं था। मैंने तुरंत साफ मना कर दिया और बोल दिया—

तेजस: बाद में चला जाऊँगा।

मम्मी खुश हो गईं और बोलीं—

वर्ना: मत जा। घर में ही पड़ा रह। मैं खुद देकर आती हूँ अभी।

उधर अमित के दिमाग में एक गेम चल रही थी मम्मी की चूत मारने की।

दोस्तों जो सोनू की दुकान थी घर से काफी पास थी। गली के मुड़ने के बाद 2 घर छोड़कर सोनू की दुकान थी। उसकी दुकान का फ्रंट तो काफी बड़ा था मगर अंदर से पतली थी और पीछे उसने एक छोटा सा बहुत छोटा कमरा टाइप का बना हुआ था और अंदर एक खाट बिछी हुई थी। सोनू का फ्रिज भी वहीं रखा रहता था।

दोस्तों जब अमित छत पर से गिरा था तो दीवार से इलाज के उसका शॉर्ट्स यानी कि कच्छा बीच में से फट गया था। छेद काफी बड़ा था। तो अमित ने जल्दी से अंदर जाके अपना अंडरवियर उतार दिया और वहीं फटा कच्छा पहन लिया, जिससे कि वो मम्मी को लंड दिखा सके।

पढ़ते रहिए… क्योंकि कहानी अभी जारी रहेगी। नेक्स्ट पार्ट में दोस्तों बहुत मेहनत से लिख रहा हूँ इसलिए कहानी काफी स्लो चल रही है। मैं आपको जो हुआ बिल्कुल डिटेल में बताना चाहता हूँ। उम्मीद है आपने इससे पहले ऐसी स्टोरी का एक्सपीरियंस नहीं किया होगा।

आगे क्या हुआ पढ़िए नेक्स्ट पार्ट में।

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